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उप मुख्यमंत्री ने किया निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ

रायपुर जिन हाथों ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहे थे। जिन पैरों ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहे थे। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। उपकरण नहीं, आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखया, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा में रहते हुए उन्होंने जैन समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी। बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक भी पहुंचेगी सेवा उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं। दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है।   इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टरमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे। 23 से 26 सितंबर तक चलेगा शिविर  शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 … Read more

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा—किसानों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से मिली उपलब्धि

रायपुर कवर्धा के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दो पेराई सत्रों—2024-25 और 2025-26—के लिए ‘हाइएस्ट शुगर रिकवरी–अदर एरिया’ श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित शुगर फैक्ट्री एफिशिएंसी अवॉर्ड समारोह में कारखाने को सम्मानित किया।  समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर भी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।  छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का अवसर है कि राज्य में पहली बार किसी सहकारी शक्कर कारखाने को इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर कारखाने से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों और कारखाना प्रबंधन को बधाई देते हुए कहा कि किसानों द्वारा गुणवत्तापूर्ण गन्ने की आपूर्ति, कारखाने की तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा, यह सम्मान किसानों की मेहनत और सहकारिता व्यवस्था की सामूहिक शक्ति का सम्मान है। सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के अनुरूप सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को किसानों की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम बनाने के लिए काम कर रही है। हमारा प्रयास है कि संस्थाएं आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनें तथा उनके काम का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सहकारिता को गांवों की अर्थव्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सहकारिता मंत्री कश्यप ने कहा कि सहकारिता विभाग में डिजिटलीकरण, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण और आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की सफलता प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। लगातार दो वर्षों के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान समारोह में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा को दो पेराई सत्रों वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ। कारखाने की ओर से यह पुरस्कार आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा, विभागीय अधिकारियों और कारखाना प्रबंधन के द्वारा  संयुक्त रूप से ग्रहण किया गया।

युवाओं के लिए बड़ा मौका, रायपुर रोजगार मेले में 8 हजार से अधिक नौकरियां

राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7 एवं 8 अक्टूबर को रायपुर में 8 हजार से अधिक पदों पर मिलेंगे रोजगार के अवसर अधिकाधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश रायपुर  प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। यह आयोजन मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक पदों की रिक्तियां में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे । कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों को शामिल कर अधिक से अधिक रिक्त पद युवाओं के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक युवा ई-रोजगार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के करकमलों से ऑफर लेटर वितरित किए जाने की भी तैयारी है। इसके लिए जिलों से चयनित अभ्यर्थियों की सूची 01 अक्टूबर 2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। साथ ही जिला एवं राज्य स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित युवाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने तथा प्रदेश के अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर विशेष प्रयास करने को कहा गया है।

राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने किया कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण

रायपुर : राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने किया कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण छात्राओं से संवाद कर जानी समस्याएं, शीघ्र निराकरण के दिए निर्देश     रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने राज्य महिला आयोग की टीम के साथ शंकर नगर, रायपुर स्थित राज्य स्तरीय पोस्ट मैट्रिक पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावास में रह रही छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याएं, आवश्यकताएं और सुझाव सुने तथा छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।     डॉ. ममता साहू ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई, आवासीय सुविधाओं सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। छात्राओं द्वारा बताई गई समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निराकरण तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्राओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, ताकि वे निर्बाध रूप से अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए आगे बढ़ सकें।     निरीक्षण के दौरान राज्य महिला आयोग की ओर से श्रीमती मंजू थदानी एवं श्रीमती रश्मी तिवारी, सखी वन स्टॉप सेंटर रायपुर की संरक्षण अधिकारी श्रीमती प्रीति पांडेय सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से मिला ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल

छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से की सौजन्य भेंट, विश्व पर्यटन दिवस समारोह के लिए किया आमंत्रित रायपुर  छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन (CTTA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने अग्रवाल को 27 सितंबर को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न सुझाव भी साझा किए गए। राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पर्यटन क्षेत्र के विकास को लेकर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रभावी प्रचार-प्रसार और निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, कलाकारों, होम-स्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की पर्यटन क्षमता को और अधिक प्रभावी रूप से सामने लाया जा सकता है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राजेश अग्रवाल की सहभागिता का आग्रह किया। अग्रवाल ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया। विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यटन विभाग, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दिलाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता, बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

संघर्ष से कक्षाओं तक: कैसे आस्था गुरुकुल दंतेवाड़ा में जीवन का पुनर्निर्माण कर रहा है

दंतेवाड़ा  एक ऐसा क्षेत्र जो दशकों की हिंसा और विघटन से गुज़रा है, जवांगा का एजुकेशन सिटी में एक आवासीय स्कूल बच्चों को वयस्क बनने की राह पर एक अलग मार्ग प्रदान कर रहा है – शिक्षा, स्थिरता और एक ऐसे जीवन की संभावना के माध्यम से, जो उनके बचपन को आकार देने वाली परिस्थितियों से बहुत दूर है । आस्था विद्या मंदिर, जिसे आस्था गुरुकुल के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में कक्षा 1 से 12 तक के लगभग 1,300 छात्रों का घर है । दंतेवाड़ा जिले के जवांगा में एजुकेशन सिटी में स्थित यह आवासीय स्कूल उन समुदायों केबच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान बन गया है, जिन्होंने लंबे समय से चल रहे संघर्ष का खामियाजा भुगता है । अनुमान है कि इसके आधे से अधिकछात्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जुड़ी हिंसा से प्रभावित हुए हैं । यह स्कूल ऐसी हिंसा के कारण अनाथ हुए बच्चों, उन बच्चों को जिनके माता-पिता विद्रोह में शामिल थे और प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से दंतेवाड़ा और व्यापक बस्तर क्षेत्र के छात्रों को प्राथमिकता देता है । कुछ छात्रों पर संघर्ष का प्रभाव कक्षा में प्रवेश करने से पहले ही पड़ जाता है । प्राचार्य रवींद्र पाणिग्राही ने कहा कि स्कूल विशेष प्राथमिकता मानदंडों के तहत बच्चों को दाखिला देते समय आधिकारिक दस्तावेज़ों पर निर्भर करता है । पुलिस-प्रमाण, जो यह पुष्टि करता है कि छात्र का इलाका एलडब्ल्यूई गतिविधि से प्रभावित हुआ है और किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु से संबंधित एफआईआर रिकॉर्ड उन दस्तावेजों में शामिल हैं, जिन पर विचार किया जाता है । यद्यपि, इसका उद्देश्य आवास और स्कूली-शिक्षा तक पहुँच प्रदान करने से परे है । स्कूल ने एक ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास किया है, जहां हिंसा के बीच पले-बढ़े बच्चे उबर सकें, सीख सकें और उन परिस्थितियों से परे एक भविष्य की कल्पना कर सकें जो उन्हें विरासत में मिली हैं । श्री पाणिग्राही ने कहा, "जो बच्चे हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें विशेषज्ञों द्वारा परामर्श दिया जाता है । आईएएस अधिकारियों जैसे कुशल व्यक्ति भी विशेष व्याख्यान देते हैं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए उनसे बातचीत करते हैं ।” स्कूल सीबीएसई पाठ्यक्रम का अनुसरण करता है, जबकि शिक्षण में प्रौद्योगिकी को शामिल करने के लिए क्लासरूम स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं । दूर दराज के गांवों से आने वाले छात्रों के लिए, जिनमें से कुछ ने लंबे समय तक संघर्ष का अनुभव किया है और जिनकी पहुँच सीमित शैक्षिक बुनियादी ढांचे तक थी, ये सुविधाएं उनके सीखने के माहौल में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती हैं । “एजुकेशन सिटी में स्कूल का परिचालन एनएमडीसी सीएसआर द्वारा वित्त-पोषित है और प्रशासन राज्य सरकार के पास है । अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके छात्रों को पढ़ाने के लिए कक्षाएँ स्मार्ट-स्क्रीन सिस्टम से सुसज्जित हैं ।” श्री पाणिग्राही ने बताया । आस्था गुरुकुल 2013 में शुरू किया गया था, जिसमें एनएमडीसी ने इसके बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सीएसआर सहायता प्रदान की थी । परिसर में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय भवन और 1,000 से अधिक छात्रों की क्षमता वाला एक सभागार शामिल है । वित्तीय प्रतिबद्धता निर्माण के बाद भी जारी है । एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण स्कूल संचालन में सहायता करता है, जिसमें वार्षिक परिचालन व्यय अकेले लगभग 3.5 करोड़ रुपये है । इस व्यवस्था ने एक पब्लिक-कारपोरेट मॉडल बनाया है, जिसमें स्कूल राज्य सरकार द्वारा संचालित संस्थान है, जबकि एनएमडीसी का सीएसआर वित्त-पोषण इसके बुनियादी ढांचे और निरंतर संचालन में सहायता करता है । एक बच्चे के लिए, जिसने हिंसा के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है, संघर्ष में फँसे गाँव में पला-बढ़ा है अथवा उग्रवाद से प्रभावित परिवार में पैदा हुआ है, आवासीय विद्यालय का महत्व शिक्षा से कहीं अधिक है । परिसर एक संरचित वातावरण, औपचारिक स्कूली-शिक्षा, परामर्श और लोगों व अवसरों से परिचिति कराता है, जो अन्यथा बस्तर के दूर-दराज के बच्चों के लिए पहुँच से दूर होते हैं । अपनी शुरुआत के एक दशक से अधिक समय बाद, आस्था गुरुकुल शिक्षा के माध्यम से संघर्ष के परिणामों को निपटने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा बन गया है । इसके क्लासरूम अब सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत अध्ययन करने वाले बच्चों से भरे हुए हैं, इसके आवासीय भवनों में पूरे क्षेत्र के छात्र रहते हैं, और इसका परिसर दैनिक दिनचर्या प्रदान करता है, जो उनके कई परिवारों को प्रभावित करने वाली हिंसा से बहुत दूर है । दंतेवाड़ा में, जहां संघर्ष के परिणामों को अक्सर जीवन-हानि और समुदायों के उजड़ने से मापा जाता है, स्कूल का दीर्घकालिक प्रभाव अंततः तब दिखता है जब इसके छात्र जावंगा छोड़ने के बाद कुछ करने में सक्षम होते हैं – और यह शिक्षा उन्हें ऐसा भविष्य चुनने की स्वतंत्रता देती है, जो यह परिभाषित नहीं करती है कि वे कहां से आए हैं, बल्कि इस बात से तय होता है कि वे कहाँ जाना चाहते हैं ।

पुलिस से जुड़ेंगे रिटायर्ड कर्मी, कानून एवं शांति व्यवस्था पर रहेगा फोकस

जांजगीर-चांपा. ग्राम कोसा में पुलिस एवं आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा क्षेत्र में कानून व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने पुलिस बीट पोस्ट प्रारंभ किया गया. पुलिस बीट पोस्ट, पुलिस मितान पोस्ट क्षेत्र में शाम को सघन पेट्रोलिंग कर लोगों से विशेष संवाद किया जाएगा. पुलिस बीट पोस्ट के माध्यम से क्षेत्र में प्रतिदिन शाम को सघन पेट्रोलिंग की जाएगी. साथ ही क्षेत्र के रिटायर्ड पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता से गांव की शिक्षा, रोजगार, साफ-सफाई, सुरक्षा और शांति व्यवस्था से जुड़े विषयों पर नियमित चर्चा की जाएगी. इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्राम कोसा की सक्रिय और जागरूक महिलाओं को जोड़कर महिला कमांडो टीम का गठन किया गया. महिला कमांडो टीम के माध्यम से गांव में महिला सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता एवं सकारात्मक वातावरण निर्माण में सहयोग लिया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ने नशामुक्ति अभियान के तहत ग्रामीणों से संवाद करते हुए नशापान से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी और नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया. सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस और जनता के बीच विश्वास और सहभागिता बढ़ाना, अपराधों की रोकथाम तथा क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है.

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर ‘राम-नामी’ की टीम को मंत्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाई

‘राम-नामी’ फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताया हर्ष, निर्देशक भारतबाला गणपति सहित पूरी टीम को दी शुभकामनाएं रामनामी की अनूठी सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिलना हम सभी के लिए गौरव का विषय – राजेश अग्रवाल रायपुर रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति सहित निर्माता एवं पूरी फिल्म टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है। उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी अनूठी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है। अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक भारतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशीलता और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े प्रत्येक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, निर्माता और सहयोगी इस सम्मान के सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत व्यापक और विविधतापूर्ण है। यहां की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन समृद्ध परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्कृति मंत्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को भी अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक भरतबाला गणपति हैं। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने भारतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश के राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।

बिजली बिल नहीं भरा तो होगी कार्रवाई, वसूली के लिए चलेगा विशेष अभियान

बिलासपुर. बिलासपुर में बिजली बिल के बकायादारों के खिलाफ अब गुप्त तरीके से विशेष वसूली अभियान चलाया जाएगा. सप्ताह में दो दिन होने वाली इस कार्रवाई के दौरान बकायादारों के बिजली कनेक्शन काटे जाएंगे. बीते एक महीने में 4,025 कनेक्शन काटे गए, लेकिन 16.03 करोड़ रुपए के बकाया में से केवल 2.99 करोड़ रुपए की वसूली हो सकी है. वर्तमान में 26,946 बकायादारों पर 93.76 करोड़ रुपए बकाया है. कार्रवाई की जानकारी मौके पर ही एई और जेई को दी जाएगी. वहीं, कमजोर वसूली पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में बिना टिकट और अनियमित टिकट के खिलाफ चलाए गए जांचअभियान से 1 से 20 सितंबर के बीच रेलवे को 3.13 करोड़ रुपए की आय हुई है. इस दौरान 43,710 मामलों में कार्रवाई की गई. बिलासपुर मंडल से सबसे ज्यादा 1.51 करोड़ रुपए की वसूली हुई, जबकि रायपुर मंडल से 77.04 लाख और नागपुर मंडल से 85.03 लाख रुपए की वसूली की गई. रेलवे की ओर से बिना टिकट और अनियमित टिकट के मामलों में जांच और कार्रवाई का अभियान लगातार जारी है.

छत्तीसगढ़ में टाटा पावर के प्रवेश का विरोध तेज, ₹435 करोड़ के निवेश पर सवाल

छत्तीसगढ़ में टाटा पावर के प्रवेश पर विरोध तेज, 435 करोड़ के निवेश दावे पर भी सवाल रायपुर छत्तीसगढ़ में टाटा पावर की समानांतर लाइसेंस याचिका (क्रमांक 89/2026) का मामला गरमाता जा रहा है। सीएस रिटायर्ड पावर इंजीनियर्स-ऑफिसर्स एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के सचिव को पत्र लिखकर इस प्रकरण की सुनवाई 15 जनवरी 2027 के बाद करने की मांग की है। 22 सितंबर 2026 को लिखे गए पत्र में एसोसिएशन के अध्यक्ष पी.एन. सिंह ने कहा है कि यह विषय आम बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ा है, इसलिए लोगों को अध्ययन कर अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। एसोसिएशन ने आयोग से निवेदन किया है कि छत्तीसगढ़ के लोगों को 31 दिसंबर 2026 तक अपना अभिमत प्रस्तुत करने का समय दिया जाए और उसके 15 दिन बाद सुनवाई की जाए। पत्र में उठाए गए 6 प्रमुख बिंदु: 1. बिजली दर पर सवाल: टाटा पावर ने याचिका के पेज नं. 485 में रु. 471 में बिजली उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन यह देखना होगा कि कंपनी मुंबई, उड़ीसा, नॉर्थ दिल्ली और अजमेर में किस दर पर बिजली खरीदती है और किस दर पर उपभोक्ताओं को देती है। 2. कर्नाटक का उदाहरण: टाटा पावर ने कर्नाटक में समानांतर लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था, जिसे जनता के दबाव में वापस लेना पड़ा था। 3. उत्तर प्रदेश में विफलता: 4 वर्ष पूर्व कंपनी पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल बिजली कंपनियों में व्यवस्था संभालने दल-बदल सहित पहुंची थी, जहां से उन्हें बैरंग वापस जाना पड़ा था। 4. महाराष्ट्र की स्थिति: महाराष्ट्र में कई जगह लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है, वहां की वर्तमान स्थिति का अध्ययन जरूरी है। 5. परफॉर्मेंस की जांच हो: जिन राज्यों में टाटा पावर बिजली वितरण कर रही है, वहां उनका परफॉर्मेंस कैसा है, इसका भी अध्ययन किया जाए। 6. 435 करोड़ के दावे पर सवाल: टाटा पावर द्वारा दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में रु. 435 करोड़ व्यवस्था सुधारने में खर्च किया जाएगा, लेकिन इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि संपूर्ण प्रकरण टाटा पावर द्वारा अपने शेयर होल्डर्स को संतुष्ट करने के लिए किया जा रहा है और यह दिखाया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की चार तहसीलों को बहुत फायदा होगा। जबकि लाइसेंस के लिए चुना गया क्षेत्र मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ का सबसे ज्यादा औद्योगिक खपत वाला क्षेत्र है, अतः इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ पर पड़ेगा। पत्र में नॉर्थ दिल्ली में लाइन लॉस 50% से अधिक से घटाकर 10% से कम करने के दावे पर भी सवाल उठाया गया है और कहा गया है कि इससे वहां के उपभोक्ताओं को कितना लाभ मिला, इसका विवरण याचिका में दर्ज नहीं है।