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आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रतियां सीधे मोबाइल पर हुईं उपलब्ध, हार्ड कॉपी भी मिली

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी सरकारी सेवाओं की राह हुई आसान, सेवा सेतु से नंद किशोर की बेटी को सिर्फ 4 दिनों में मिले तीन प्रमाण पत्र आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रतियां सीधे मोबाइल पर हुईं उपलब्ध, हार्ड कॉपी भी मिली समयबद्ध और पारदर्शी सेवाओं से नागरिकों को मिल रही राहत, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवाओं को सरल, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से अब जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के सारागांव तहसील अंतर्गत ग्राम सरवानी निवासी नंद किशोर का अनुभव इसका उदाहरण है। उन्होंने अपनी पुत्री के आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया और मात्र चार दिनों के भीतर तीनों प्रमाण पत्र प्राप्त हो गए। प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध होने के साथ ही हार्ड कॉपी भी प्रदान की गई। चार दिनों में पूरे हुए तीन काम, मोबाइल पर मिले प्रमाण पत्र नंद किशोर अपनी पुत्री के लिए आवश्यक आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने तहसील कार्यालय स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया। केन्द्र में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन स्वीकार कर आवश्यक कार्रवाई की गई। आवेदन करने के महज चार दिनों के भीतर तीनों प्रमाण पत्र तैयार हो गए और उनकी पीडीएफ प्रतियां नंद किशोर के मोबाइल पर प्राप्त हो गईं। इसके साथ ही उन्हें प्रमाण पत्रों की हार्ड कॉपी भी उपलब्ध करा दी गई। नंद किशोर के लिए यह सुविधा राहत देने वाली साबित हुई। एक ही केन्द्र के माध्यम से तीनों आवश्यक दस्तावेज समय पर प्राप्त होने से उन्हें अलग-अलग प्रक्रियाओं की परेशानी नहीं उठानी पड़ी। डिजिटल माध्यम से प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के कारण दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया भी सुविधाजनक रही। न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर, न लंबा इंतजार सेवा सेतु केन्द्र से समय पर प्रमाण पत्र मिलने पर नंद किशोर ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज आसानी से और निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध हो रहे हैं। इससे आम नागरिकों को शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में सुविधा मिल रही है। विशेष रूप से मोबाइल पर प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां उपलब्ध होना नागरिकों के लिए उपयोगी व्यवस्था है। नंद किशोर ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र से उनकी पुत्री के तीनों प्रमाण पत्र केवल चार दिनों में मिल गए, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। डिजिटल सेवाओं से नागरिकों के समय की बचत, बढ़ रही सुविधा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक शासकीय सेवाएं सरल और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल तकनीक के उपयोग से प्रमाण पत्रों की आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजों की उपलब्धता अधिक सुविधाजनक बन रही है। नंद किशोर की यह कहानी दर्शाती है कि तकनीक आधारित नागरिक सेवाएं सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मात्र चार दिनों में आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध होना सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को मिल रही समयबद्ध सेवाओं का उदाहरण है।

एसएसपी ने बिलासपुर के 6 थानेदारों को किया पुरस्कृत, पुलिस विभाग में बढ़ा उत्साह

बिलासपुर. गंभीर अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को सजा दिलाने, अपराधी पकड़ने समेत अन्य बेहतर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएसपी ने सम्मानित किया है। पॉक्सो, हत्या और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मजबूत चार्जशीट पेश करने वाले 25 पुलिसकर्मियों को नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए गए हैं। इन मामलों में अदालतों ने आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई है। सम्मान पाने वालों में टीआई देवेश सिंह राठौर का प्रदर्शन प्रमुख रहा। इसके अलावा टीआई प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, दामोदर मिश्रा समेत अन्य निरीक्षकों को पुरस्कृत किया गया है। इनाम पाने वाले निरीक्षक रजनीश सिंह को पॉक्सो के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। निरीक्षक दामोदर मिश्रा को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए और निरीक्षक निलेश पांडेय को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। उप निरीक्षक रामनरेश यादव को एनडीपीएस के मामले में चार आरोपियों को 15-15 साल की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। उप निरीक्षक राज सिंह को हत्या के मामले में उम्रकैद और मीना ठाकुर को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1- 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। जीएल चंद्राकर को पॉक्सो के मामले में आठ साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए दिए गए। वहीं बसंत साहू को 900 रुपए तथा संतरा चौहान और नारायण ठाकुर को 500-500 रुपए से पुरस्कृत किया गया। एएसआई और हेड कांस्टेबलों को भी मिला पुरस्कार एएसआई गुलाबचंद पटेल और रमेश ओरके को 1-1 हजार रुपए, देवेंद्र तिवारी को 800 रुपए तथा विजय शर्मा को 600 रुपए दिए गए। इसी तरह हेड कांस्टेबल रामायण सिंह और सत्यप्रकाश यादव को 1-1 हजार रुपए, भुवनेश्वर मरावी को 500 रुपए तथा रमेश आदिले और परमेश्वर ठाकुर को 200-200 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न आवास जल्द पूरा करने वाले हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश रायपुर,   मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 और 1.0 के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।         मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के स्वीकृत आवासों का निर्माण कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि जो हितग्राही अपने आवास का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0         प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0: बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) घटक के तहत चल रही आवास निर्माण परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही, भागीदारी में किफायती आवास (AHP) घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के निर्माण स्थल में परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0         इस योजना के तहत लाभार्थी आधारित आवास निर्माण घटक के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं की कटौती के बाद संशोधित परियोजनाओं की स्वीकृति के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगरीय प्रशासन विभाग के विभिन्न अन्य प्रस्तावों को भी बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।        नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत कुल 2,43,087 मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2 लाख 25, हजार 411 आवास पूरी तरह से पूर्ण हो चुके हैं। 17 हजार 368 आवासों का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं, बीएलसी घटक के अंतर्गत स्वीकृत 2 लाख 6 हजार 118 मकानों में से 1 लाख 96 हजार 144 मकान पूर्ण हो चुके हैं और 9 हजार 666 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में जारी है।      बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (राज्य शहरी विकास अभिकरण) सुमित अग्रवाल सहित ऊर्जा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगर तथा ग्राम निवेश, हाउसिंग बोर्ड, हुडको और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड

कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जिंदल स्टील को मिला वर्ल्डस्टील का प्रतिष्ठित स्टीली अवॉर्ड रायपुर  जिंदल स्टील लिमिटेड ने कर्मचारियों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को अपने सुरक्षा कार्यक्रम “दक्षता इंजीनियरिंग सेफ्टी” के लिए वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (वर्ल्डस्टील) का प्रतिष्ठित 2026 स्टीली अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन पीपल मिला है। यह पुरस्कार 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें स्टीलीए अवॉर्ड्स में दिया गया। जिंदल स्टील को चीन बाओवू, इन्फ्राबिल्ड, टाटा स्टील और यूएसिमिनास जैसी वैश्विक कंपनियों के बीच से स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति ने विजेता चुना। दक्षता कार्यक्रम का उद्देश्य हर कर्मचारी को उसकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार सुरक्षा के लिए तैयार करना है। इसमें केवल प्रशिक्षण में शामिल होना ही नहीं, बल्कि सुरक्षा ज्ञान, व्यावहारिक कौशल, आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और सुरक्षित व्यवहार का भी आकलन किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत जिंदल स्टील के छह स्थानों पर 27,100 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को जोड़ा गया है। कंपनी ने 16,539 नए कर्मचारियों का सुरक्षा आकलन किया है और 69 प्रमाणित प्रशिक्षकों के माध्यम से 372 सुरक्षा एवं एचएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इन कार्यक्रमों में 96 प्रतिशत प्रशिक्षण पूरा किया गया। रायपुर मशीनरी डिवीजन में एआई आधारित कार्यस्थल निरीक्षण, डिजिटल जोखिम विश्लेषण और व्यावहारिक प्रशिक्षण से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां 17,752 सुरक्षा निरीक्षण किए गए और 379 उच्च जोखिम वाले कार्यों को हटाया गया या मशीनों के माध्यम से सुरक्षित बनाया गया। इसी अवधि में आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 15 प्रतिशत सुधार हुआ और इसे घटाकर 5.25 मिनट किया गया। साथ ही, रायपुर मशीनरी डिवीजन ने एलटीआईएफआर 0.00 हासिल किया, जो कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जिंदल स्टील की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सम्मान जिंदल स्टील के उस निरंतर प्रयास की पहचान है, जिसके माध्यम से कंपनी हर कर्मचारी के लिए अधिक सुरक्षित, सक्षम और बेहतर कार्यस्थल तैयार कर रही है।

साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल, भिलाई में म्यूल अकाउंट्स नेटवर्क का खुलासा

भिलाई नगर. सुपेला, खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त कार्रवाई में कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराने वाले 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन म्यूल खातों के जरिए लाखों रुपये के संदेहास्पद लेन-देन का खुलासा हुआ है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी मात्र 5 से 15 हजार रुपए के कमीशन के लिए अपने बैंक खातों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और उससे जुड़े सिम कार्ड अन्य व्यक्तियों को सौंप देते थे। साइबर ठग इन खातों का इस्तेमाल आम जनता से ठगे गए पैसों को ट्रांसफर करने और पहचान छुपाने के लिए करते थे। तकनीकी साक्ष्यों और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर दुर्ग पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। सुपेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत फेडरल और उत्कर्ष बैंक से संबंधित मामलों में 02 आरोपियों शुभम चौधरी (22 वर्ष) और गुरमीत कौर को पकड़ा गया। वहीं खुर्सीपार थाना क्षेत्र में इंडियन बैंक खातों से जुड़े मामले में 5 आरोपियों तरुण नायक (40 वर्ष), निखिल नेताम (22 वर्ष), यसमीत सिंह (22 वर्ष), गौरव साहू (23 वर्ष) और नरगिस को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 (2), 318 (3) और 317 (4) के तहत सुपेला और खुर्सीपार में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।

रायगढ़ के रामभांठा में ₹75 लाख से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, मंत्री ओपी चौधरी ने किया भूमिपूजन

रायगढ़ के रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनेगा नया हाई स्कूल भवन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भूमिपूजन शाला नायक सुमन के हाथों कराया भूमिपूजन, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को किया सम्मानित शिक्षा की ताकत से ही मेरे जीवन में आया बदलाव, छोटे से गांव से निकलकर आईएएस और वित्त मंत्री बनने तक का सफर शिक्षा से ही हुआ संभव  : ओ.पी. चौधरी रामभांठा स्कूल को 10वीं से 12वीं तक उन्नयन की मिली सुविधा, क्षेत्र के बच्चों को उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में मिलेगी सहूलियत रायपुर,  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामभांठा में 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्होंने उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। नया स्कूल भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव बनेगा। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शाला नायक सुमन के हाथों नवीन भवन का भूमिपूजन कराया। उन्होंने सुमन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में इतनी ऊंचाई हासिल करें कि भविष्य में आप हमसे भी बड़े विकास कार्यों का भूमिपूजन करें। वित्त मंत्री के इस आत्मीय व्यवहार से विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल रहा। शिक्षा ने बदली मेरी जिंदगी, यही हर बच्चे की सफलता का आधार : वित्त मंत्री चौधरी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने अपने जीवन के संघर्षों और शिक्षा के महत्व को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति, समाज, प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। किसी भी देश के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षा की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्री चौधरी ने कहा कि मेरा जन्म रायगढ़ से लगभग 17 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बायंग में हुआ था। जब मैं आठ वर्ष का था, तब मेरे पिता का निधन हो गया। मेरी माताजी केवल चौथी कक्षा तक पढ़ी हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा ने मेरे जीवन को नई दिशा दी। शिक्षा की बदौलत मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचा और आज रायगढ़ के विधायक तथा छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रामभांठा विद्यालय का 12वीं तक उन्नयन, अब बच्चों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2025 में रामभांठा विद्यालय को हाई स्कूल से उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के रूप में उन्नत किया गया। पहले यहां केवल दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की सुविधा थी, लेकिन अब बारहवीं कक्षा तक शिक्षा की व्यवस्था होने से रामभांठा और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बड़ी सहूलियत मिल रही है। उन्होंने कहा कि 75 लाख रुपये की लागत से बनने वाला नया भवन विद्यालय की अधोसंरचना को मजबूत करेगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शैक्षणिक अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षक ही गढ़ते हैं समाज और राष्ट्र का भविष्य वित्त मंत्री चौधरी ने विद्यालय के शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के हाथों में होती है। शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य का निर्माण भी करते हैं।  इस अवसर पर वित्त मंत्री चौधरी ने प्रतिभा सम्मान समारोह के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया और सभी बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, बड़े सपने देखने तथा जीवन में ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में रायगढ़ नगर निगम के महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गबेल, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य नरेंद्र पटेल, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट

राज्यपाल डेका से छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस समिति के अध्यक्ष ने की सौजन्य भेंट रायपुर,  छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष तोमन साहू ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य के 13 जिलों में जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित किए जाने की जानकारी दी और इसका प्रतिवेदन राज्यपाल को सौंपा।         साहू ने राज्यपाल को जिलों में रेड क्रॉस की गतिविधियों और संचालित कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया। साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्यपाल को आमंत्रित किया।         राज्यपाल डेका ने शेष जिलों में भी जिला रेड क्रॉस समितियों की समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेड क्रॉस की गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर दिया, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा सके। इस अवसर पर रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य युगल सिन्हा उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा

सेवा की कहानी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा सुकमा के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर सात दिनों में लगीं स्ट्रीट लाइटें, ग्रामीणों को मिली राहत रायपुर,   सुकमा जिले के कोकावाड़ा (जांगड़पाल) गांव के लोगों को वर्षों से अंधेरे में आवाजाही की परेशानी से महज एक फोन कॉल ग्रामवासियों के लिए राहत की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर समस्या दर्ज कराने के बाद तत्काल मामले को संज्ञान में लाकर कार्यवाही प्रारंभ की गयी और सात दिनों के भीतर पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। इससे करीब 450 की आबादी वाले इस गांव के लोगों की रात में आवाजाही आसान हो गई है।  छिंदगढ़ विकासखंड के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से ग्रामीणों को रात में टॉर्च और वाहनों की हेडलाइट के सहारे आना-जाना पड़ता था। घने जंगलों से घिरे इस रास्ते पर सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और आपात स्थिति में मरीजों को लाने-ले जाने में परेशानी होती थी। गांव के युवा श्री रितेश यादव ने इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर अपनी यह समस्या दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। कलेक्टर श्री अमित कुमार की निगरानी में सात दिनों के भीतर मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। अब सड़क पर रोशनी होने से ग्रामीणों को रात में आने-जाने में राहत मिली है।

पटवारियों की हड़ताल से राजनांदगांव में कामकाज प्रभावित, राजस्व सेवाओं पर असर

राजनांदगांव. पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े विभिन्न कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दो दिनों से यही स्थिति देखने को मिल रही है। तहसील कार्यालयों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हड़ताल के कारण फसलों का भौतिक सत्यापन का काम भी नहीं हो पा रहा है, जिससे किसनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर किसान पंजीयन तथा जमीन संबंधी कार्यों तक पर इसका असर देखने को मिल रहा है। इसके साथ-साथ अन्य कार्यों पर भी असर पड़ने लगा है। राजनांदगांव जिले में भी छत्तीसगढ़ राजस्व संघ के आह्वान पर पटवारी हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी राजस्व व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीन के रिकॉर्ड, सीमांकन से जुड़ी प्रक्रिया, भूमि संबंधी रिपोर्ट और विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन में उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में उनके हड़ताल पर रहने से संबंधित प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों और जमीन संबंधी काम कराने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है। दो दिनों से शहर तथा जिले में यही स्थिति देखने को मिल रही है। पीवी ऐप की समस्याओं को लेकर आंदोलन छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 अक्टूबर से शुरू हुई है। पटवारी संघ का कहना है कि फसल के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप में तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। हड़ताल का असर आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर भी पड़ने की आशंका है। किसान पंजीयन और फसल सत्यापन में देरी होने से किसानों को परेशानी हो सकती है। वहीं आय और जाति प्रमाण पत्र की जरूरत वाले विद्यार्थियों तथा अन्य आवेदकों को भी इंतजार करना पड़ सकता है। 

डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक यात्रा: 15 अक्टूबर को जन्मदिन, जानें डॉक्टर से मुख्यमंत्री बनने तक की कहानी

डॉ. रमन सिंह – सादगी से सत्ता तक, 15 साल के विकास पुरुष की कहानी जन्मदिन विशेष: 15 अक्टूबर 1952 – आज 74वां जन्मदिन रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजनीति में अगर किसी एक नाम ने सबसे लंबी और स्थायी छाप छोड़ी है, तो वो हैं डॉ. रमन सिंह। आयुर्वेद के डॉक्टर से लेकर लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता तक का उनका सफर, भारतीय राजनीति में दुर्लभ है। 1. प्रारंभिक जीवन – ठाठापुर से रायपुर तक डॉ. रमन सिंह का जन्म 15 अक्टूबर 1952 को अविभाजित मध्यप्रदेश के कवर्धा जिले के ठाठापुर गांव में हुआ था। पिता विघ्नहरण सिंह ठाकुर एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे।  1975 में उन्होंने रायपुर के शासकीय आयुर्वेद कॉलेज से BAMS की डिग्री ली। इसी कारण उन्हें आज भी कार्यकर्ता प्यार से "चाउर वाले बाबा" नहीं, बल्कि "डॉक्टर साहब" कहते हैं। राजनीति में उनकी सक्रियता 1976 से शुरू हुई।  2. राजनीतिक यात्रा •  1990 और 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।  •  1999 में राजनांदगांव से लोकसभा सांसद चुने गए। •  अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री बने। •  7 दिसंबर 2003 को जब छत्तीसगढ़ में पहली बार भाजपा की सरकार बनी, तो 51 साल के रमन सिंह को राज्य का दूसरा मुख्यमंत्री बनाया गया। •  उसके बाद 2008 और 2013 में लगातार जीत हासिल कर उन्होंने 2003 से 2018 तक लगातार तीन बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।  •  वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष हैं। 3. क्यों कहलाए 'चाउर वाले बाबा'? रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल को दो योजनाओं के लिए हमेशा याद किया जाएगा: 1. खाद्य सुरक्षा का छत्तीसगढ़ मॉडल: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में उनका सुधार देशभर में मिसाल बना। 1 रुपये किलो चावल योजना ने उन्हें घर-घर में "चाउर वाले बाबा" के नाम से लोकप्रिय कर दिया। इसी मॉडल को बाद में केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून का आधार माना गया। 2. स्वास्थ्य और विकास: खुद आयुर्वेदिक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और स्कूलों का जाल बिछाने का काम उनके कार्यकाल में तेज गति से हुआ। 4. व्यक्तित्व की खासियत विरोधी भी मानते हैं कि रमन सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी और शांत स्वभाव है। लंबी सत्ता के बावजूद उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप कभी नहीं लगा। कम बोलना, मुस्कुराकर जवाब देना और संगठन को साथ लेकर चलना – यही उनकी शैली रही। छत्तीसगढ़ जैसे नए और चुनौतियों से भरे राज्य को एक स्थिर प्रशासन देना, यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज उनके 74वें जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश से उन्हें बधाइयाँ मिल रही हैं। एक डॉक्टर जिसने नब्ज़ देखना सीखा था, उसने बाद में एक पूरे प्रदेश की नब्ज़ को समझा और उसे विकास की राह पर चलाया।