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मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा

सेवा की कहानी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर एक कॉल से दूर हुआ गांव का अंधेरा सुकमा के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर सात दिनों में लगीं स्ट्रीट लाइटें, ग्रामीणों को मिली राहत रायपुर,   सुकमा जिले के कोकावाड़ा (जांगड़पाल) गांव के लोगों को वर्षों से अंधेरे में आवाजाही की परेशानी से महज एक फोन कॉल ग्रामवासियों के लिए राहत की सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर समस्या दर्ज कराने के बाद तत्काल मामले को संज्ञान में लाकर कार्यवाही प्रारंभ की गयी और सात दिनों के भीतर पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। इससे करीब 450 की आबादी वाले इस गांव के लोगों की रात में आवाजाही आसान हो गई है।  छिंदगढ़ विकासखंड के पुसपाल-चितलनार मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से ग्रामीणों को रात में टॉर्च और वाहनों की हेडलाइट के सहारे आना-जाना पड़ता था। घने जंगलों से घिरे इस रास्ते पर सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और आपात स्थिति में मरीजों को लाने-ले जाने में परेशानी होती थी। गांव के युवा श्री रितेश यादव ने इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर अपनी यह समस्या दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। कलेक्टर श्री अमित कुमार की निगरानी में सात दिनों के भीतर मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लगा दी गईं। अब सड़क पर रोशनी होने से ग्रामीणों को रात में आने-जाने में राहत मिली है।

पटवारियों की हड़ताल से राजनांदगांव में कामकाज प्रभावित, राजस्व सेवाओं पर असर

राजनांदगांव. पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े विभिन्न कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दो दिनों से यही स्थिति देखने को मिल रही है। तहसील कार्यालयों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हड़ताल के कारण फसलों का भौतिक सत्यापन का काम भी नहीं हो पा रहा है, जिससे किसनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर किसान पंजीयन तथा जमीन संबंधी कार्यों तक पर इसका असर देखने को मिल रहा है। इसके साथ-साथ अन्य कार्यों पर भी असर पड़ने लगा है। राजनांदगांव जिले में भी छत्तीसगढ़ राजस्व संघ के आह्वान पर पटवारी हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी राजस्व व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीन के रिकॉर्ड, सीमांकन से जुड़ी प्रक्रिया, भूमि संबंधी रिपोर्ट और विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन में उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में उनके हड़ताल पर रहने से संबंधित प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों और जमीन संबंधी काम कराने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है। दो दिनों से शहर तथा जिले में यही स्थिति देखने को मिल रही है। पीवी ऐप की समस्याओं को लेकर आंदोलन छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 अक्टूबर से शुरू हुई है। पटवारी संघ का कहना है कि फसल के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप में तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। हड़ताल का असर आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर भी पड़ने की आशंका है। किसान पंजीयन और फसल सत्यापन में देरी होने से किसानों को परेशानी हो सकती है। वहीं आय और जाति प्रमाण पत्र की जरूरत वाले विद्यार्थियों तथा अन्य आवेदकों को भी इंतजार करना पड़ सकता है। 

डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक यात्रा: 15 अक्टूबर को जन्मदिन, जानें डॉक्टर से मुख्यमंत्री बनने तक की कहानी

डॉ. रमन सिंह – सादगी से सत्ता तक, 15 साल के विकास पुरुष की कहानी जन्मदिन विशेष: 15 अक्टूबर 1952 – आज 74वां जन्मदिन रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजनीति में अगर किसी एक नाम ने सबसे लंबी और स्थायी छाप छोड़ी है, तो वो हैं डॉ. रमन सिंह। आयुर्वेद के डॉक्टर से लेकर लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता तक का उनका सफर, भारतीय राजनीति में दुर्लभ है। 1. प्रारंभिक जीवन – ठाठापुर से रायपुर तक डॉ. रमन सिंह का जन्म 15 अक्टूबर 1952 को अविभाजित मध्यप्रदेश के कवर्धा जिले के ठाठापुर गांव में हुआ था। पिता विघ्नहरण सिंह ठाकुर एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता थे।  1975 में उन्होंने रायपुर के शासकीय आयुर्वेद कॉलेज से BAMS की डिग्री ली। इसी कारण उन्हें आज भी कार्यकर्ता प्यार से "चाउर वाले बाबा" नहीं, बल्कि "डॉक्टर साहब" कहते हैं। राजनीति में उनकी सक्रियता 1976 से शुरू हुई।  2. राजनीतिक यात्रा •  1990 और 1993 में मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।  •  1999 में राजनांदगांव से लोकसभा सांसद चुने गए। •  अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री बने। •  7 दिसंबर 2003 को जब छत्तीसगढ़ में पहली बार भाजपा की सरकार बनी, तो 51 साल के रमन सिंह को राज्य का दूसरा मुख्यमंत्री बनाया गया। •  उसके बाद 2008 और 2013 में लगातार जीत हासिल कर उन्होंने 2003 से 2018 तक लगातार तीन बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।  •  वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष हैं। 3. क्यों कहलाए 'चाउर वाले बाबा'? रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल को दो योजनाओं के लिए हमेशा याद किया जाएगा: 1. खाद्य सुरक्षा का छत्तीसगढ़ मॉडल: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में उनका सुधार देशभर में मिसाल बना। 1 रुपये किलो चावल योजना ने उन्हें घर-घर में "चाउर वाले बाबा" के नाम से लोकप्रिय कर दिया। इसी मॉडल को बाद में केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून का आधार माना गया। 2. स्वास्थ्य और विकास: खुद आयुर्वेदिक डॉक्टर होने के नाते उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली और स्कूलों का जाल बिछाने का काम उनके कार्यकाल में तेज गति से हुआ। 4. व्यक्तित्व की खासियत विरोधी भी मानते हैं कि रमन सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी और शांत स्वभाव है। लंबी सत्ता के बावजूद उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप कभी नहीं लगा। कम बोलना, मुस्कुराकर जवाब देना और संगठन को साथ लेकर चलना – यही उनकी शैली रही। छत्तीसगढ़ जैसे नए और चुनौतियों से भरे राज्य को एक स्थिर प्रशासन देना, यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज उनके 74वें जन्मदिन पर छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश से उन्हें बधाइयाँ मिल रही हैं। एक डॉक्टर जिसने नब्ज़ देखना सीखा था, उसने बाद में एक पूरे प्रदेश की नब्ज़ को समझा और उसे विकास की राह पर चलाया।

छत्तीसगढ़ के ढोकरा शिल्पकार बन्नूराम बैद का राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयन, बढ़ाया प्रदेश का मान

कोंडागांव के ढोकरा शिल्पकार बन्नूराम बैद का शिल्प गुरु अवार्ड 2025 के लिए चयन देशभर से चयनित छह शिल्प गुरुओं में शामिल रायपुर, बस्तर की पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) शिल्पकला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले कोण्डागांव जिले के माकड़ी विकासखण्ड के ग्राम बरकई निवासी शिल्पकार बन्नू राम बैद का चयन वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित शिल्प गुरु अवार्ड के लिए किया गया है। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा जारी अंतिम चयन सूची में बैद का नाम शामिल है, जिसमें देशभर से कुल छह शिल्प गुरुओं का चयन किया गया है।                  बानू राम बैद का चयन केंद्रीय स्तरीय चयन समिति की 18 जुलाई 2026 को आयोजित बैठक में अंतिम रूप से किया गया। उन्होंने बस्तर की प्राचीन लॉस्ट-वैक्स (मधुच्छिष्ट) तकनीक पर आधारित ढोकरा शिल्पकला को संरक्षित रखने, उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा नई पीढ़ी को इस पारंपरिक कला का प्रशिक्षण देने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।                   बैद की कलाकृतियों में बस्तर के आदिवासी जनजीवन, लोक-संस्कृति, देवी-देवताओं और प्रकृति का सजीव चित्रण देखने को मिलता है। पारंपरिक तकनीक और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सहेजने के उनके प्रयासों ने बस्तर की विशिष्ट शिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।              बन्नू राम बैद को शिल्प गुरु अवार्ड के लिए चयनित सहित जाना कोण्डागांव जिला और समूचे छत्तीसगढ़ एवं बस्तर अंचल के लिए गौरव का विषय है। उनकी यह उपलब्धि पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित करेगी।

धर्मनगरी राजनांदगांव में खाद्य विभाग की कार्रवाई, दुकानों पर मारे छापे

राजनांदगांव. क्वांर नवरात्रि पर्व 2026 के अवसर पर धर्मनगरी डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दर्शन हेतु आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम द्वारा मेला क्षेत्र में सतत एवं सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। कुल 21 प्रतिष्ठानों पर दबिश दी गई है। मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं को शुद्ध, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य व पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के दल द्वारा मेला प्रांगण में संचालित कुल 21 खाद्य प्रतिष्ठानों / दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, मिष्ठान्न भंडार, चाट – समोसा ठेला, प्रसाद विक्रय केंद्रों एवं पेय पदार्थ स्टॉलों की जांच की गई तथा खाद्य कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आवश्यक कड़े निर्देश जारी किए गए। खाद्य सामग्री का ढंका होना अनिवार्यः चाट, समोसा, जलेबी, मिठाई एवं अन्य खुले खाद्य पदार्थों को पूरी तरह ढंककर अथवा जालीदार शोकेस में ही रखने के निर्देश दिए गए, ताकि धूल, मक्खी एवं कीटों से बचाव हो सके। स्वच्छ पेयजल एवं खाद्य- ग्रेड बर्फ का उपयोग पेय पदार्थों (जूस, लस्सी, शरबत आदि) के निर्माण में केवल पीने योग्य स्वच्छ पानी और खाद्य-ग्रेड बर्फ का ही उपयोग करने की सख्त हिदायत दी गई। विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि मेला अवधि के दौरान खाद्य सुरक्षा दल द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और संदेहास्पद खाद्य सामग्रियों के नमूने भी लिए जा रहे हैं। यदि किसी भी प्रतिष्ठान में दूषित, बासी अथवा अमानक खाद्य सामग्री का विक्रय पाया जाता है, तो संबंधित खाद्य कारोबारी के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

दुर्ग में सरकारी स्कूलों के खराब प्रदर्शन पर शिक्षा विभाग सख्त, प्राचार्यों से मांगा जवाब

दुर्ग. सरकारी स्कूलों के तिमाही परीक्षा का रिजल्ट अपेक्षाकृत कमजोर है। बच्चों के निराशाजनक प्रदर्शन से शिक्षा विभाग की चिंताएं बढ़ गई है। दुर्ग ब्लॉक के स्कूलों की तिमाही परीक्षा परिणाम की समीक्षा बुधवार को जेआरडी स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह द्वारा की गई। कमजोर रिजल्ट का जवाब संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों से लिया गया। कई प्राचार्यों ने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं आया। वहीं, कुछ प्राचार्य ने उत्तर पुस्तिकाओं की कड़ाई से जांच जाने का हवाला दिया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने दो टूक कहा कि उत्तर पुस्तिकाएं सामान्य रूप से जांची जाए, न कि किसी पूर्वाग्रह से। समीक्षा के दौरान पता चला कि दुर्ग ब्लॉक की स्कूलों में तिमाही परीक्षा बारहवीं का औसत रिजल्ट 63% तथा दसवीं का 58% रहा है। दुर्ग ब्लॉक के 20 स्कूलों में दसवीं कक्षा का रिजल्ट 60% से कम आया है। वहीं 12वीं में 28 स्कूलों का रिजल्ट 60% से कम है। इस बार 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह में होगी। इस वजह से तिमाही परीक्षा के बाद पूरे सिलेबस से अर्धवार्षिक परीक्षा ली जाएगी। कमजोर परीक्षा परिणाम के बारे में दबे स्वर में ये बातें भी सामने उभर कर आई कि स्कूलों में शैक्षणिक कार्यों के अलावा अनावश्यक रूप से कई गतिविधियां की संचालित की जाती है, जिसका पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता। इससे बच्चों का ज्यादा समय भी बर्बाद होता है। बहरहाल डीईओ ने कमजोर बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें सीमित पाठ्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा लिखने की प्रैक्टिस करने कहा। माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर अपलोड स्टडी मैटेरियल की तैयारी करने जोर दिए गए। समीक्षा के दौरान सहायक संचालक अमित घोष एवं दुर्ग ब्लॉक के प्राचार्य मौजूद थे।

बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया अनूठा इलेक्ट्रिक प्रेस, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया सम्मानित

रायगढ़ के छात्र कृष्ण अग्रवाल को 12वें राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता में मिला सम्मान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया सम्मानित, बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित किया अनूठा इलेक्ट्रिक प्रेस मॉडल छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाएं नवाचार और विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ा रही हैं प्रदेश का गौरव – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव रायपुर,   छत्तीसगढ़ के होनहार छात्र कृष्ण अग्रवाल ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार से राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। रायगढ़ जिले के जिंदल पब्लिक स्कूल के छात्र कृष्ण अग्रवाल को नई दिल्ली में आयोजित 12वीं राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता (NLEPC-2026) में उनके अभिनव प्रोजेक्ट फ्लिप इलेक्ट्रिक आयरन फॉर चाइल्ड सेफ्टी (Flip Electric Iron For Child Safety) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें सम्मान प्रदान किया। राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के होनहार छात्र कृष्ण अग्रवाल की इस उपलब्धि के लिए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बधाई दी। विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं             स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने छात्र कृष्ण अग्रवाल की इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों में प्रतिभा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच की अपार संभावनाएं हैं। कृष्ण अग्रवाल ने अपने उपयोगी नवाचार के माध्यम से यह साबित किया है कि हमारे विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कृष्ण के साथ उनके अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यालय परिवार को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि कृष्ण अग्रवाल की सफलता छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करना है             शिक्षा मंत्री यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने के साथ ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बच्चों को गर्म इलेक्ट्रिक प्रेस से जलने से बचाएगा नवाचार            छात्र कृष्ण अग्रवाल ने ‘Flip Electric Iron For Child Safety’ नामक अभिनव मॉडल विकसित किया है। इसका उद्देश्य घरों में उपयोग होने वाली गर्म इलेक्ट्रिक प्रेस से छोटे बच्चों को जलने की दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखना है। इस मॉडल में ऑटो-फ्लिप तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे प्रेस को छोड़ने पर उसका गर्म हिस्सा ऊपर की ओर हो जाता है। इसके साथ ही 30 सेकंड में स्वचालित रूप से बंद होने की सुविधा और चाइल्ड लॉक जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं। कम लागत में तैयार यह मॉडल घरेलू सुरक्षा की दृष्टि से उपयोगी साबित हो सकता है। 80 हजार नवाचार विचारों में से शीर्ष 62 में बनाई जगह            छत्तीसगढ़ से प्रस्तुत लगभग 80 हजार नवाचार विचारों में कृष्ण अग्रवाल के मॉडल का चयन शीर्ष 62 नवाचारों में हुआ। उनके प्रोजेक्ट को इंस्पायर मानक -2026 के संकलन में भी स्थान मिला है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-भारत से जुड़ी इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित किया जाता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर

सेवा संकल्प अभियान 2026 : सेवा की कहानी कभी बैनर की दीवारों के बीच गुजरती थी जिंदगी, आज पक्के आशियाने में संवर रहे आशा के सपने प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला अपना घर, सड़क किनारे अस्थायी आशियाने में रहने की मजबूरी हुई दूर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा आवास योजनाओं का लाभ वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आवासीय सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर सुकन्या समृद्धि योजना में बेटियों के लिए कर रही हैं बचत, सुरक्षित भविष्य की दिशा में बढ़ाए कदम रायपुर,  कभी सड़क किनारे बैनर से बनी दीवारें ही उनके घर का सहारा थीं। न पक्की छत थी और न ही सुरक्षित आशियाना। हर दिन परिवार की जरूरतों को पूरा करने की चिंता और बेहतर भविष्य की उम्मीद के बीच जिंदगी गुजर रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। नवा रायपुर के सेक्टर-7 स्थित ग्राम चीचा की आशा के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना नई खुशियां लेकर आई है। कभी बैनर की दीवारों के बीच रहने वाली आशा आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ रह रही हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानियों से मिली राहत, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का नया आधार है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और आम नागरिकों को बेहतर आवास उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से आशा जैसे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार मिल रहा है। बैनर की दीवारों से पक्के घर तक का सफर आशा के लिए अपना पक्का घर होना कभी एक बड़ा सपना था। सीमित संसाधनों के कारण उन्हें सड़क किनारे बैनर की दीवारों से बने अस्थायी घर में रहना पड़ता था। ऐसे घर में परिवार के साथ जीवन गुजारना आसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बाद उनकी जिंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब उनके पास अपना पक्का आशियाना है, जहां वे परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रही हैं। आशा के लिए घर मिलने की खुशी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह उनके परिवार के भविष्य को लेकर एक नई शुरुआत है। जिस परिवार के पास कभी रहने के लिए स्थायी ठिकाना नहीं था, आज उसके पास अपना घर है। आशा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। अब बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटीं आशा अपना घर मिलने के बाद आशा अब अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं। एक मां के रूप में उनकी इच्छा है कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और भविष्य में आत्मनिर्भर बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत अपनी बेटियों के लिए बचत शुरू की है। वे अपनी बच्चियों के खातों में ढाई-ढाई सौ रुपये जमा कर रही हैं। आशा के लिए यह बचत भले ही छोटी राशि से शुरू हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक मां के बड़े सपने जुड़े हैं। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में बेटियों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए उनके पास आर्थिक सहारा हो। नियमित बचत के माध्यम से वे आज ही अपनी बेटियों के बेहतर कल की नींव रख रही हैं। एक योजना से मिला आशियाना, दूसरी से बेटियों के भविष्य को सहारा आशा की कहानी जनकल्याणकारी योजनाओं से आम परिवारों के जीवन में आ रहे बदलाव का प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया है, वहीं सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से वे बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक बचत कर रही हैं। इन दोनों योजनाओं ने उनके जीवन की दो महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को नई दिशा दी है। पहली, परिवार के लिए सुरक्षित घर और दूसरी, बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक तैयारी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे और उन्हें बेहतर जीवन के अवसर मिलें। वहीं वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के विजन के अनुरूप आवासीय विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हो सके। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई बदलाव की प्रेरक कहानी सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आशा की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ जरूरतमंद परिवारों के जीवन में ठोस बदलाव लेकर आता है। कभी बैनर की दीवारों के सहारे जीवन गुजारने वाली आशा आज अपने पक्के घर में रह रही हैं और अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। आशा की जिंदगी में आया यह बदलाव केवल एक परिवार को आवास मिलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक मां के संघर्ष, उम्मीद और सपनों के साकार होने की कहानी है। कभी उनकी सबसे बड़ी चिंता परिवार के लिए सुरक्षित छत थी, आज वे उस चिंता से आगे बढ़कर बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी हैं। बैनर की अस्थायी दीवारों से शुरू हुआ आशा का सफर आज पक्के घर की मजबूत दीवारों तक पहुंच चुका है। अब इसी घर में उनकी बेटियों के सुनहरे भविष्य के सपने भी आकार ले रहे हैं। आशा की यह कहानी बताती है कि जब जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिलता है, तो केवल उनकी वर्तमान परिस्थितियां ही नहीं बदलतीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की उम्मीदें भी मजबूत होती हैं।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में दिखेगा ओलंपियन्स का दम, दिग्गज खिलाड़ी संभालेंगे टीमों की कमान

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग : टीमों की अगुवाई करेंगे हॉकी ओलंपियन्स ओलंपियन सुरेंद्र कुमार, प्रदीप मोर, एस.वी. सुtनील, ललित कुमार उपाध्याय, शमशेर सिंह और चिंगलेनसाना सिंह मार्की खिलाड़ी के रूप में शामिल राज्य के युवाओं को अनुभवी खिलाड़ियों और ओलंपियन्स के साथ खेलने का मिलेगा मौका, लीग के दौरान अनुभवी प्रशिक्षकों से कोचिंग भी मिलेगी अजय कुमार, अजितेश राय, मोहम्मद रियाज, देवेश चौहान, राजेन्दर सिंह जूनियर और रजनीश मिश्रा होंगे टीमों के मुख्य प्रशिक्षक रायपुर. रायपुर में होने वाले छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए सभी छह फ्रेंचाइजी टीमों के मुख्य प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों का चयन कर लिया गया है। ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से खेल चुके प्रतिष्ठित और अनुभवी हॉकी खिलाड़ियों को प्रत्येक टीम में मार्की (Marquee) खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। लीग में खेलने वाले वरिष्ठ खिलाड़ियों के सानिध्य में राज्य के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिलेगा। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में टीमें खिताब के लिए दावेदारी करेंगी। इस दौरान नामी प्रशिक्षकों से राज्य के खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सीखने के साथ ही बड़े मुकाबलों के दबाव से निपटने की कला भी सीखने मिलेंगी। प्रतियोगिता के सभी मुकाबलों का विधिवत आयोजन हॉकी इंडिया के ऑफिशल्स और अधिकारी करेंगे। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की टीमों में राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों, ओलंपियनों, स्थानीय प्रतिभाओं और छत्तीसगढ़ के अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। लीग में राज्य की प्रतिभाओं को उच्च स्तरीय मंच मिलने के साथ ही घरेलू हॉकी के ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। लीग के सभी मैच 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर के बीच रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले जाएंगे। पहला मुकाबला शाम साढ़े पांच बजे और दूसरा मुकाबला शाम साढ़े सात बजे शुरू होगा। दोनों मैचों के बीच प्रतिदिन मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जो दर्शक स्टेडियम नहीं पहुंच पाएंगे, वे भी मुकाबलों का आनंद ले सकेंगे। लीग का लाइव प्रसारण जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर किया जाएगा। स्टेडियम में दर्शकों का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित की जा रही छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की छह फ्रेंचाइजी टीमों के साथ प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हैं। चक्रधर चैंपियंस की फ्रेंचाइजी जिंदल स्टील लिमिटेड, न्यायधानी नाइट्स की साउथ इस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), राजधानी रॉयल्स की बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड, मैनपाट टाइगर्स की छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, संस्कारधानी स्ट्राइकर्स की सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड और बैलाडीला बुल्स की फ्रेंचाइजी एनएमडीसी लिमिटेड के पास है। इन टीमों के मुख्य प्रशिक्षक और खिलाड़ी इस प्रकार हैं –  न्यायधानी नाइट्स मुख्य प्रशिक्षक – मोहम्मद रियाज खिलाड़ी – सुरेंद्र कुमार (Marquee), राहुल ठाकुर, मोहम्मद अनीश रजा, लवी मानिकपुरी, अमित टोप्पो, अश्विन कुजूर, रोहित रजक, सागर सूर्यवंशी, सैय्यद समीर अली, कश्मीर मिंज, अभिजीत श्रीवास, सोनू निषाद, सुखवेद निर्मलकर, शादाब अहमद खान, अरबाज अली, ओम रुद्र नामदेव, अमन वर्मा, आदर्श राज सिंह, प्रिंस महतो, केतन कुशवाहा, रोहित कुल्लू, चिराग  मैनपाट टाइटन्स मुख्य प्रशिक्षक – अजय कुमार  खिलाड़ी – प्रदीप मोर (Marquee), अल्फ़ाज़ खान, सौर्य वर्मा, अजय तांडी, रेहान खान, प्रवीण यादव, साहिल ज़ाक्सा, मोहित नायक, अर्पण टोप्पो, आदित्य मेश्राम, अकविनाश तिग्गा, नरेंद्र निषाद, संदीप ठाकुर, प्रिंस भगत, राहुल पन्नू, प्रांजल यादव, नेहाल बरेठ, मनीष वट्टी, दक्ष चौबे, प्रह्लाद, आनंद लकड़ा, अवि मानिकपुरी  चक्रधर चैंपियंस मुख्य प्रशिक्षक – अजितेश राय खिलाड़ी – एस.वी. सुनील (Marquee), असीम हंश, वैभव सिंह चंदेल, विष्णु यादव, अविनाश तिर्की, करण कुमार साहू, अर्जुन यादव, प्रेम राव, मोहित कश्यप, अनुज जाल्क्सो, शैलेन्द्र वर्मा, गगन बाकवाले, खोगेश्वर बाग, कार्तिक यादव, हार्दिक आहूजा, भेद चौरे, भावेश धनकड़, मनीष मौर्य, बलदेव कवासी, युवराज वाल्मिकी, परमप्रीत, अद्रोहित एक्का  राजधानी रॉयल्स मुख्य प्रशिक्षक – राजेन्दर सिंह जूनियर  खिलाड़ी – ललित कुमार उपाध्याय (Marquee), हिमांशु मलिक, विनोद यादव, जुनैद अहमद, संदीप यादव, सुमित मिंज, तौफिक अहमद, अनिकेत कुजूर, ओंकार यादव, अविनाश एक्का, श्रेयांश चौरसिया, योगेश मेश्राम, जुबैर मोहम्मद, खुशाल यादव, कुणाल सेंद्रे, योगेश यादव, चिंता राम, अर्पण लकड़ा, पीयूष कुमार साहू, संजीत तिर्की, प्रेमचंद सोय, रौशन कुमार  संस्कारधानी स्ट्राइकर्स मुख्य प्रशिक्षक – रजनीश मिश्रा  खिलाड़ी – शमशेर सिंह (Marquee), आदित्य कुमार नेताम, रोशन राजपूत, झकमक लकड़ा, मानस पटेल, सोमदेव सूर्यवंशी, निशांत तिर्की, तरूण यादव, जीतू हेमला, कुशल यादव, सोमनाथ यादव, मुहुर्त कौशिक, ओम कुमार यादव, प्रकाश पटेल, सारिख अहमद, मुनीस्वर कुमार, महेंद्र सिंह नाग, अभिषेक यादव, आयुष साहू, आर्यन जेस, शाहरुख, आशीष तानी पूर्ति  बैलाडीला बुल्स मुख्य प्रशिक्षक – देवेश चौहान  खिलाड़ी – चिंगलेनसाना सिंह कंगुजाम (Marquee), दलेश्वर यादव, संतोष मौर्य, रोबिट एक्का, गुलशन कौशिक, प्रह्लाद तांडी, आनंद सूर्यवंशी, निहाल हुसैन, विशाल किस्पोट्टा, चन्द्रशेखर कुसवाहा, प्रभात सिंह, प्रीतम कुजूर, गणेश यादव, आदित्य मेरावी, करण वर्मा, तोमन साहू, हिमेश बंशोद, गोपाल पैकरा, अमन नाग, जसकरण सिंह, राहुल यादव, करण धानुक

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान रही है। इसी दिशा में कोण्डागांव जिले के मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम चांगेर निवासी  चीतुराम शोरी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए चीतुराम ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आज शासन की पुनर्वास नीति और विशेष परियोजना के तहत मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को एक सुरक्षित आशियाना प्रदान किया है। पुनर्वास से मिली नई राह, परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना चीतुराम शोरी पूर्व में हिंसा के रास्ते पर चले गए थे, लेकिन उन्होंने माओवाद के हिंसात्मक मार्ग को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत शासन की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना आवास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान स्वीकृत किया गया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने निर्धारित समय में अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। अब वे अपने परिवार के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। पक्के घर की उपलब्धता से उनके परिवार को सुरक्षित आवास मिला है और भविष्य के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। आत्मसमर्पित परिवारों के जीवन में बदलाव की पहल  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव की पुनर्वास नीति केवल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर ही नहीं देती, बल्कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने का भी प्रयास करती है। आवास सहित कई बुनियादी सुविधाएं एवं शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से ऐसे परिवारों को स्थायित्व मिला है और वे अपने बच्चों के भविष्य, परिवार की जरूरतों तथा आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।  परिवार को मिला सुरक्षित और स्थायी आशियाना  माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहुंच सुनिश्चित करने और समाज की मुख्यधारा से दूर हुए परिवारों को जोड़ने के लिए पुनर्वास के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण है।  चीतुराम को मिला पक्का आवास इसी प्रयास का बेहतर उदाहरण है, जहां शासकीय सहायता ने उनके परिवार को सुरक्षित रहने की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई है। आज वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पक्का मकान उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि नए जीवन की स्वर्णिम शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार भी है। इस सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया।