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अब नहीं चलेगी निजी स्कूलों की दादागिरी, SCERT किताबें मिलेंगी फ्री

दुर्ग. निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार ने नकेल कसना शुरू कर दी है। निजी विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तक के स्थान पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें क्रय करने विद्यार्थियों एवं पालकों को बाध्य किए जाने की शिकायत को लेकर राज्य शासन ने कड़े मुख्य निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में सचिव छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्त कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी को 24 अप्रैल को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया है कि निजी विद्यालय जहां सीजी बोर्ड से संबद्धता प्राप्त कर अध्यापन कराया जाता है, वहां पहली से दसवीं तक पाठ्य पुस्तकें एससीईआरटी की छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम से प्रकाशित पुस्तकें विद्यार्थियों को निःशुल्क प्रदाय किया जाना है। लिहाजा इन विद्यालयों में विद्यार्थियों / पालकों को किसी अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जाए। इसी प्रकार सीबीएसई से संबद्धता प्राप्त विद्यालयों में एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का अध्यापन कराया जाता है। पालकों से प्रायः यह शिकायत प्राप्त होती है कि अशासकीय विद्यालयों द्वारा उन्हें दुकान विशेष से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इस संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कक्षा पहली से आठवीं तक निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। यह सभी विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ कराने की दृष्टि से लागू किया गया है। अतः कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों हेतु एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें लागू करवायें ताकि पालकों पर निजी पुस्तकों का अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। तीन पालकों और दो नागरिकों की शिकायत विगत 18 व 20 अप्रैल को जिला कार्यालय दुर्ग के कम्प्यूटर कक्ष में उपस्थित 5 सदस्यीय जांच दल के समक्ष तीन पालकों और दो नागरिकों द्वारा शिकायत की गई। शिकायत में कह गया कि कुछ स्कूलों द्वारा एक निजी दुकान खासकर सेक्टर 6 भिलाई से किताबें खरीदने बाध्य किया जाता है। इन शिकायतों को लेकर संबंधित स्कूल प्रबंधन का भी पक्ष सुना गया, जिसमें कुछ स्कूल प्रबंधक अपनी गलती स्वीकार किए और कुछ का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।

विकसित भारत की दिशा में कदम, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया

पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा कर गांव के विकास में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री पंचायती राज दिवस के अवसर पर आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही होगा गांवों का विकास: अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचेगा शासन की योजनाओं का लाभ – मुख्यमंत्री रायपुर  डबल इंजन की हमारी सरकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गांवों के समग्र विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन में  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रियता से ही गांवों का विकास होगा और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की शुभकामनाएं दीं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत प्रतिनिधि के रूप में की थी तथा पंच और सरपंच के दायित्व का निर्वहन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को लेकर जो अनुभव प्राप्त होते हैं, वही आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। आज हजारों जनप्रतिनिधि पंचायत से अपना सफर शुरू कर देश के उच्च सदनों तक पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और जमीनी स्तर पर बेहतर कार्य करने से ही प्रभावी नीतियां बनती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब ग्रामीणों को पक्के मकान मिल रहे हैं, साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग, बिजली बिल भुगतान, पेंशन और बीमा जैसी सेवाएं अब ग्रामीणों के लिए सहज हो गई हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आई है। महिलाओं के लिए  महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और इनसे महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री साय ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि पंचायतों में संचालित सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सभी विकास कार्य पूर्ण हो सकें। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके सफल क्रियान्वयन में पंचायतों की जिम्मेदारी बड़ी है और इसे समयबद्ध रूप से पूरा करने में पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मुख्यमंत्री साय ने सुशासन तिहार के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से आमजनों की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सुशासन तिहार के आयोजन और इसके माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत लंबित बिजली बिलों के भुगतान के लिए विशेष अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरचार्ज पूरी तरह माफ किया गया है और अतिरिक्त रियायत का भी प्रावधान है। साय ने प्रतिनिधियों से इसका लाभ अधिक से अधिक ग्रामीणों को दिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव संसाधन उपलब्ध कराएगी और सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने की अपील की। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी डबल इंजन की सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मंशा के अनुरूप अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को पंचायत दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त करते हुए विकास कार्यों की लगातार स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी के साथ-साथ पंचायत प्रतिनिधियों पर सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है, जिसका वे बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। सम्मेलन को सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का किया अवलोकन, मेगा स्वास्थ्य शिविर की विशेष पहल की सराहना मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंचायत पदाधिकारी सम्मेलन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट छांव के अंतर्गत आयोजित मेगा स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न प्रोजेक्ट पर आधारित स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से चर्चा की और आजीविका संवर्धन के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन रायपुर द्वारा नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान के लिए प्रोजेक्ट धड़कन, देहदान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट दधीचि, किसानों को नवाचार से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट नैनो, प्रोजेक्ट रचना, प्रोजेक्ट स्मृति पुस्तकालय, प्रोजेक्ट पाई-पाई, ग्लोबल गांव, ज्ञान भारतम, प्रोजेक्ट सिग्नल, मेरा गांव मेरी पहचान, प्रोजेक्ट अजा, प्रोजेक्ट बिजनेस दीदी समेत विभिन्न प्रोजेक्ट के स्टालों का अवलोकन किया और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र एवं राशि का वितरण किया। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट आरोग्यम के कटआउट और प्रोजेक्ट हैंडी के तहत शासन की योजनाओं की संक्षिप्त पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित इन गतिविधियों से आमजनों को हो रहे व्यापक लाभ के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुमोना सेन समेत त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

राज्य में खाद संकट पर कृषि मंत्री का बयान, पंजीकृत रकबे के अनुसार सभी किसानों को मिलेगा पर्याप्त खाद

राज्य में नहीं है खाद की कमी, पंजीकृत रकबे के मुताबिक सभी किसानों को मिलेगी समय पर खाद: कृषि मंत्री रामविचार नेताम खरीफ सीजन 2026 के लिए केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित काला बाजारी और जमाखोरी पर होगी कड़ी कार्यवाही के निर्देश कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ 2026 के तैयारियों का लिया जाएजा नैनो यूरिया-नील हरित काई जैसे विकल्प अपनाने के निर्देश; उन्नत बीज, क्लस्टर खेती और एग्रीटेक पंजीयन पर फोकस रायपुर  पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका – इज़राइल और ईरान के बीच तनाव के बीच आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार कर रही है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आबंटित हुआ है। जिसमें यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख तथा एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन शामिल हैं। वर्तमान में गोदामों एवं समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सभी किसानों को पारदर्शिता के साथ पर्याप्त मात्रा में रासायनिक खाद का आबंटन सुनिश्चित हो।   मंत्री नेताम ने बताया कि 30 मार्च की स्थिति में राज्य में कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक में मौजूद है, जिसमें यूरिया 2,43,717 मीट्रिक टन, डीएपी 1,05,631 मीट्रिक टन, एनपीके 1,69,109 मीट्रिक टन, एमओपी 50,431 मीट्रिक टन और एसएसपी 1,78,657 मीट्रिक टन  इस तरह कुल 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद स्टॉक में मौजूद है। मंत्री नेताम ने बताया कि पश्चिमी एशियाई संकट के चलते रासायनिक उर्वरकों की संभावित कमी को देखते हुए विभाग द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत एनपीके 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13, हरी खाद, जैविक खाद और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।  मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार ने उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों के गठन के निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर उर्वरकों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी।  कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने रायपुर और दुर्ग संभाग के विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों से कहा है कि पीएम किसान पोर्टल से एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों के पंजीयन तेजी से पूर्ण कर लिया जाए। बीज एवं उर्वरक वितरण के लिए नई ई-वितरण प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। वही रासायनिक खाद के विकल्प के रूप में हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए।  उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और डायवर्जन रोकने के लिए जिलों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन फसलों के उपार्जन को भी प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने हर जिले में सुगंधित धान की प्रजाति के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन-तिलहन फसलों तथा उद्यानिकी क्षेत्र में ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों के विस्तार के निर्देश दिए हैं।

जनगणना 2027 के लिए ग्रामसभा में जागरूकता अभियान तेज, ग्रामीणों ने किया भागीदारी का संकल्प

जनगणना 2027 को लेकर ग्रामसभा में जागरूकता अभियान तेज, ग्रामीणों ने लिया भागीदारी का संकल्प घर-घर पहुंचेगी जनगणना टीम, ग्राम सभा में दी गई पूरी जानकारी और भरोसा मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में आज आयोजित विशेष ग्रामसभा में जनगणना 2027 को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को जनगणना के महत्व, प्रक्रिया और इससे जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियों से अवगत कराया। बैठक में बताया गया कि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) का अवसर दिया गया है, जिसके तहत नागरिक घर बैठे ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। ग्रामसभा में उपस्थित लोगों को मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन, ओटीपी सत्यापन, स्मार्ट जियो-टैगिंग और घर से संबंधित सभी विवरण भरने की प्रक्रिया सरल और स्पष्ट तरीके से समझाई गई। इसके साथ ही अधिकारियों ने जानकारी दी कि 1 मई से 30 मई 2026 तक प्रगणक घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, उसकी स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और अन्य आवश्यक जानकारियों का संग्रह करेंगे। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान “हमारी जनगणनादृहमारा विकास” का संदेश प्रमुख रूप से दिया गया और लोगों को जागरूक किया गया कि जनगणना के आंकड़े ही भविष्य की विकास योजनाओं की नींव तय करते हैं। ग्रामसभा में “मेरी गणना, देश की ताकत” के संदेश के साथ लोगों में उत्साह देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने बताया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि देश के समग्र विकास की आधारशिला है, इसलिए हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़ने और जनगणना 2027 को सफल बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान जनगणना 2027 के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। यह भी स्पष्ट किया गया कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दी गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, जिससे नागरिकों में विश्वास और सहभागिता बढ़े।

भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आंगनबाड़ी संचालन समय में बदलाव: बच्चों की उपस्थिति सुबह 7 से 9 बजे तक सीमित बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, निर्देशों के क्रियान्वयन में कोई ढिलाई नहीं होगी: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर  प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बच्चों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए त्वरित एवं संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार  30 जून 2026 तक प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे। इस अवधि में बच्चों की उपस्थिति केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित की गई है, ताकि उन्हें अत्यधिक तापमान एवं लू के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख, शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा (ECCE) गतिविधियाँ निर्धारित समय-सारिणी एवं कलेण्डर के अनुसार संचालित होंगी तथा पूरक पोषण आहार का वितरण नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे बच्चों के पोषण एवं शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा न आए। निर्देशानुसार आंगनबाड़ी केंद्र प्रातः 7:00 बजे से प्रारंभ होंगे, जिसमें बच्चों की उपस्थिति 7:00 से 9:00 बजे तक रहेगी, जबकि अन्य सेवाओं के लिए केंद्र 11:00 बजे तक संचालित रहेगा। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के पश्चात निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि गर्म हवाओं, अधिक तापमान एवं लू की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित रूप से घर तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में संबंधितों की जवाबदेही तय की जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी सुनिश्चित करें तथा जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल समाप्ति उपरांत 01 जुलाई 2026 से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित किए जाएंगे।

रायपुर: ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से उपभोक्ताओं को मिल रही बड़ी राहत, बन रहे ऊर्जा उत्पादक

रायपुर : पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से मिल रही बड़ी राहत, उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक डबल सब्सिडी और सौर ऊर्जा से कम हुआ बिजली बिल, बढ़ रही आत्मनिर्भरता रायपुर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ प्रदेश में आम नागरिकों के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रही है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली इस योजना के माध्यम से उपभोक्ता न केवल अपने बिजली खर्च में कमी ला रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन कर ‘ऊर्जा दाता’ के रूप में भी उभर रहे हैं। इसी क्रम में सरगुजा जिले के अंबिकापुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत भगवानपुर निवासी श्री शिशिर सरकार ने इस योजना का लाभ उठाकर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कर बिजली के बढ़ते बिल से राहत पाई है। डबल सब्सिडी से आसान हुआ निवेश शिशिर सरकार ने बताया कि इस योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है, जबकि राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त अनुदान राशि प्रक्रियाधीन है। इस प्रकार डबल सब्सिडी के कारण सोलर सिस्टम स्थापित करना आर्थिक रूप से सहज हो गया है। बिजली बिल में आई भारी कमी उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम लगवाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 8 हजार से 11 हजार रुपये तक आता था, जो परिवार के लिए आर्थिक बोझ था। सौर ऊर्जा अपनाने के बाद अब बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है और उन्हें न्यूनतम खर्च वहन करना पड़ रहा है। पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान शिशिर सरकार ने कहा कि सौर ऊर्जा स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोत है, जिससे प्रदूषण में कमी आती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ लेने की अपील की, ताकि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा प्रदान की जा रही आर्थिक सहायता और सरल प्रक्रिया ने सौर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ बना दिया है। प्रदेश में ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन से ऊर्जा बचत, आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

हरियाली से महका मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर, फलदार वृक्ष बने आकर्षण का केंद्र

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिला मुख्यालय स्थित मनेन्द्रगढ़ न्यायालय परिसर इन दिनों अपनी हरियाली और फलदार वृक्षों के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परिसर में लगे लीची, आम और कटहल के पेड़ न केवल पर्यावरण की सुंदरता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि यहां आने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच ये घने वृक्ष परिसर में ठंडी छाया और सुकून का एहसास करा रहे हैं। न्यायालय में आने वाले अधिवक्ता, कर्मचारी और पक्षकार इन पेड़ों की छांव में राहत महसूस कर रहे हैं। परिसर में विशेष रूप से लीची के गुच्छेदार फल, आम के कच्चे-पके फलों की बहार और कटहल के बड़े आकार के फल इसे किसी बाग-बगीचे जैसा मनोहारी स्वरूप दे रहे हैं। यह प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के लिए खास आकर्षण का विषय बन गया है। अधिवक्ता श्रीमती पूनम गुप्ता के अनुसार, न्यायालय परिसर में इस प्रकार की हरियाली न केवल वातावरण को शुद्ध करती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। साथ ही यह पर्यावरण संरक्षण का एक सकारात्मक संदेश भी देती है। यदि न्यायालय प्रशासन और अधिवक्ता संघ द्वारा इस हरियाली को और बढ़ावा दिया जाए, तो आने वाले समय में यह परिसर एक आदर्श उदाहरण बन सकता है, जहां न्यायिक कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संतुलन का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित

जिले में परिवहन सुविधा केंद्र खोलने का सुनहरा मौका, 15 मई तक आवेदन आमंत्रित "एक ही स्थान पर ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी परिवहन सेवाएं, स्थानीय स्तर पर रोजगार के भी बनेंगे अवसर" मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में परिवहन सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत परिवहन सुविधा केंद्र (Transport Facilitation Center) स्थापित करने के लिए इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी, कोरिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को परिवहन संबंधी सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और समय की बचत हो सके। एक ही केंद्र पर मिलेंगी सभी सेवाएं परिवहन सुविधा केंद्र के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्य, ऑनलाइन आवेदन, शुल्क भुगतान, दस्तावेजों का स्कैन एवं अपलोड, तथा विभिन्न प्रपत्रों के प्रिंट आउट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इससे नागरिकों को त्वरित, सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकेंगी। पहले भी हुई थी प्रक्रिया, अब फिर अवसर गौरतलब है कि इस योजना के तहत पहले भी आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसमें एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र के लिए प्रक्रिया संचालित की गई थी। अब पुनः चयनित क्षेत्रों के लिए आवेदन आमंत्रित कर अधिक से अधिक लोगों को जुड़ने का अवसर दिया जा रहा है। 15 मई तक करें आवेदन इच्छुक आवेदक 15 मई 2026 तक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन ने समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों का चयन कर शीघ्र केंद्र स्थापित किए जा सकें। रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे प्रशासन का मानना है कि इन केंद्रों की स्थापना से जहां आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के साथ-साथ जनसेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महासमुंद में ई-ऑफिस की शुरुआत, फाइल ट्रैकिंग और काम में तेजी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित

महासमुंद  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल इंडिया पहल और विष्णुदेव साय के सुशासन एवं पारदर्शिता के संकल्प को साकार करते हुए महासमुंद जिला प्रशासन ने ई-ऑफिस प्रणाली को तेजी से अपनाया है। शासन की प्राथमिकता के अनुरूप ई-ऑफिस प्रणाली अब जिले के लगभग सभी विभागों में गति पकड़ चुकी है। जिले के लगभग सभी विभागों में अब परंपरागत कागज़ी फाइलों के स्थान पर ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य किए जा रहे हैं। 1366 अधिकारी-कर्मचारियों का ई-ऑफिस के लिए ऑनबोर्डिंग किया जा चुका है, जो इस प्रणाली के व्यापक क्रियान्वयन को दर्शाता है। अब तक लगभग साढ़े 5 हजार से अधिक फाइलों का मूवमेंट डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है, जिससे कार्यों में गति और दक्षता आई है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में कलेक्ट्रेट का अधिकांश कार्य ई-ऑफिस प्रणाली से संचालित हो रहा है। प्रत्येक सप्ताह समय-सीमा की बैठकों में इसकी समीक्षा कर विभागवार प्रगति की समरी रिपोर्ट ली जाती है। सभी शासकीय पत्राचार, नियमित फाइलें और वित्तीय स्वीकृतियाँ यहां तक कि छोटी नोटशीट्स भी अब ऑनलाइन दर्ज की जा रही हैं, जिससे कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी आसान हो गई है। ई-ऑफिस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ इसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग सुविधा है। अब किसी भी फाइल की स्थिति को आसानी से देखा जा सकता है, वह किस अधिकारी के पास लंबित है और कितने समय से। इससे कार्यों में अनावश्यक विलंब कम हुआ है और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। इस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे फाइल निर्माण, नोटशीट लेखन और दस्तावेज अपलोडिंग में दक्ष हो चुके हैं। तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए एनआईसी और तकनीकी टीम का सहयोग भी लगातार लिया जा रहा है। शासन की मंशा है कि भविष्य में संपूर्ण पत्राचार केवल ई-ऑफिस के माध्यम से ही किया जाए। शासन की यह कदम समय की बचत और विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा कार्यों में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा। महासमुंद जिले में यह पहल निश्चित रूप से डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में सार्थक रूप से संचालित हो रहा है।

रायपुर: राज्यपाल ने कोसा वस्त्रों के नवाचार और बुनकरों के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर दिया

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा साड़ी, शाल और गमछा का अवलोकन किया तथा राज्य के हाथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए नवाचार, डिज़ाइन विकास और मूल्य संवर्धन पर विशेष बल दिया। राज्यपाल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी एवं शाल में डॉबी और जैकार्ड तकनीक का उपयोग कर आधुनिक डिज़ाइन विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न आयु वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए उत्पादों को आकर्षक एवं किफायती बनाया जाए, ताकि इनकी बाजार में मांग बढ़ सके। उन्होंने उत्तर-पूर्व के प्रसिद्ध रेशम क्षेत्र असम के सुवालकुची, विजयनगर और डेमाजी क्षेत्रों के सफल मॉडल का अध्ययन कर वहां के लोकप्रिय डिज़ाइनों को छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों में समाहित करने का सुझाव दिया। राज्यपाल ने कहा कि इससे राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिलेगी तथा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। राज्यपाल ने कोसा साड़ी को अधिक किफायती बनाने के लिए साड़ी की बॉडी और बॉर्डर को पृथक रूप से तैयार कर नई शैली की साड़ियों के निर्माण का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रंगों एवं धागोंकृएक्रेलिक, स्पन और टू-प्लाई यार्न का उपयोग कर आकर्षक मोटिफ और डिज़ाइन विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने आगामी एक माह में इस दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामोद्योग विभाग  को राज्य की किसी एक बुनकर सहकारी समिति को गोद लेकर उसके समग्र विकास हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्याम धावड़े, राज्य हाथकरघा संघ के सचिव एम. एम. जोशी, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार बुनकर सेवा केंद्र रायगढ के उपनिदेशक विजय सावनेरकर सहित तकनीकी विशेषज्ञों तथा डिज़ाइनर उपस्थित रहे।