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​कुरुषनार का कायकल्प: जहाँ कल तक गूंजती थीं बारूद की आहटें

रायपुर छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ का नाम सुनते ही कभी बीहड़, संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों की तस्वीर जेहन में उभरती थी। लेकिन आज वही अबूझमाड़ बदलाव की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। छत्तीसगढ के नारायणपुर जिले के विकासखंड ओरछा स्थित कुरुषनार की फिजाओं में अब डर की परछाई नहीं, बल्कि बच्चों की खिलखिलाहट और पढ़ाई का नया उत्साह है। कुरुषनार का यह परिसर, जो कभी सुरक्षा बलों का एक मजबूत कैंप हुआ करता था और जहाँ से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था संचालित होती थी, आज 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत शिक्षा और उम्मीदों का जगमगाता केंद्र बन चुका है। समय के साथ जब क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया और बलों ने अगले संवेदनशील गंतव्य की ओर रुख किया, तो जिला प्रशासन ने इस खाली परिसर का ऐसा रचनात्मक उपयोग किया जिसने पूरे राज्य के सामने जनकल्याण की एक अनूठी मिसाल कायम कर दी है। *बंदूक की छांव से 'विद्या के मंदिर' तक का सफर* *अब वनांचल के बच्चे सीखेंगे Artificial Intelligence (AI)*  ​बंदूक की छांव से निकलकर विद्या के मंदिर में तब्दील हो चुके इस परिसर में वर्तमान में 110 मासूम बच्चे पूर्णतः सुरक्षित वातावरण में रहकर अपने सपनों को नए पंख लगा रहे हैं। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र होने के कारण यहाँ के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवास हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में पूर्व सुरक्षा शिविर का आश्रम शाला के रूप में रूपांतरण होने से न केवल बच्चों को रहने के लिए एक महफ़ूज़ छत मिली, बल्कि उनके सर्वांगीण और व्यक्तित्व विकास के लिए एक अनुकूल शैक्षणिक माहौल भी तैयार हुआ है। *डिजिटल तकनीक, कोडिंग और आधुनिक विज्ञान की नई खोजों से रूबरू होंगे बच्चे* दूरस्थ अंचल के इन बच्चों को आधुनिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने योग्य बनाने के लिए प्रशासन ने एक दूरदर्शी खाका तैयार किया है। जिला खनिज न्यास (DMF) के माध्यम से इस परिसर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने का प्रस्ताव बनाया गया है। इसके अंतर्गत अबूझमाड़ के बच्चे अब केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब के जरिए डिजिटल तकनीक, कोडिंग और आधुनिक विज्ञान की नई खोजों से रूबरू होंगे। इसके साथ ही, बच्चों में स्वाध्याय, साहित्य और सामान्य ज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए एक समृद्ध पुस्तकालय का निर्माण भी प्रस्तावित है, जो उनकी कल्पनाशीलता और विचारों को विस्तार देगा।  बच्चों के शारीरिक विकास, अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक आधुनिक खेल मैदान भी तैयार किया जाएगा, जहाँ वे अपनी छिपी हुई प्रतिभा को निखार सकेंगे। *सुरक्षा से विकास और उज्ज्वल भविष्य की नई भोर* Qकुरुषनार का यह ऐतिहासिक रूपांतरण केवल एक इमारत का बदलाव मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का सजीव प्रमाण है कि जब सुरक्षा का विश्वास कायम होता है, तो विकास के द्वार स्वतः खुल जाते हैं। कुरुषनार की यह अनूठी पहल पूरे राज्य को यह संदेश देती है कि जहाँ कभी सुरक्षा का कड़ा पहरा था, आज वहाँ AI तकनीक और पुस्तकों के जरिए नौनिहालों का उज्ज्वल भविष्य गढ़ा जा रहा है। यह सकारात्मक बदलाव अबूझमाड़ के बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें कल के प्रतिभावान नागरिक, इंजीनियर, वैज्ञानिक और खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

​सारंगढ़ के महाविद्यालय में गुंजा ‘कोई मतदाता छूटे ना’ का संदेश

रायपुर युवाओं को दिलाई मतदाता जागरूकता की शपथ सशक्त लोकतंत्र की बुनियाद में प्रत्येक नागरिक और युवा की भागीदारी सर्वोपरि है। इसी सोच को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सारंगढ़ स्थित शासकीय लोचन प्रसाद पाण्डेय महाविद्यालय में वृहद मतदाता जागरूकता (SVEEP) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘कोई मतदाता छूटे ना’ के संकल्प पर छात्र-छात्राओं को मतदान प्रक्रिया में निष्पक्ष और सक्रिय सहभागिता निभाने की शपथ दिलाई गई। इसी तरह नए पंजीकृत युवा मतदाताओं को डिजिटल ई-एपिक (e-EPIC) की प्रतियां वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। *​रंगोलियों में झलकी लोकतांत्रिक ताकत* *18 की उम्र में मताधिकार मिलना जीवन का अहम पड़ाव* ​महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिए मतदान के महत्व को रेखांकित किया। ‘मेरा वोट मेरी ताकत’ और ‘वोट फॉर बेटर इंडिया’ जैसे विषयों पर बनाई गई मनमोहक रंगोलियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।  इस अवसर पर​छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि ​18 वर्ष की आयु पूर्ण कर पहला वोट देना प्रत्येक युवा के जीवन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि होती है। मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र को मजबूत करने का दायित्व है। जब एक युवा जागरूक होता है, तो वह पूरे समाज को सही दिशा दिखाता है।उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे न केवल स्वयं शत-प्रतिशत मतदान करें, बल्कि अपने परिजनों, मित्रों और पड़ोसियों को भी मताधिकार के प्रति प्रेरित करें। *​प्रारूप-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की अपील* आगामी नगरीय निकाय चुनावों एवं निर्वाचन आयोग की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कलेक्टर ने बताया कि 18 वर्ष पूर्ण कर चुके ऐसे सभी युवा जिनका नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे प्रारूप-6 (Form 6) के माध्यम से त्वरित पंजीयन कराएं। जिले में बीएलओ (BLO), एसडीएम एवं तहसीलदारों के माध्यम से पंजीयन प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।  ​उन्होंने कॉलेज के निर्वाचन साक्षरता क्लब (ELC) की गतिविधियों की विशेष प्रशंसा की और कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में निर्वाचन आयोग की गतिविधियों और मतदान सुधारों की प्रामाणिक जानकारी समाज तक पहुँचाने में युवाओं की भूमिका बेहद अहम है।

ग्रामोद्योग सचिव राजेश सिंह राणा ने किया छत्तीसगढ़ रेशम सेतु का निरीक्षण

रायपुर रेशम उत्पादक महिला समूहों को मिलेगा उचित मूल्य, उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने की पहल ग्रामोद्योग विभाग के सचिव  राजेश सिंह राणा ने रायपुर में नवस्थापित छत्तीसगढ़ रेशम सेतु का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महासमुंद, धमतरी, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ सहित विभिन्न जिलों के महिला धागाकरण समूहों और कोसा धागा व्यापारियों से चर्चा कर रेशम उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। सचिव  राणा ने कहा कि रेशम सेतु की स्थापना से महिला समूहों द्वारा उत्पादित रेशम धागे को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सकेगा। साथ ही व्यापारियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण धागा उपलब्ध होगा, जिससे परिवहन खर्च और समय की बचत होगी। बैठक में महिला समूहों ने कोसाफल की बढ़ती कीमतों और धागे का उचित विक्रय मूल्य नहीं मिलने की समस्या रखी। सचिव  राणा ने समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि महिला समूहों द्वारा तैयार अहिंसा सिल्क को अमारी रेशम ब्रांड के नाम से भी बेचा जा रहा है। साथ ही रेशम सेतु में विभिन्न जिलों के महिला समूहों द्वारा तैयार रेशम धागों को अलग-अलग ब्रांड नामों से पहचान दी गई है। इसके अंतर्गत रायगढ़ का फॉरेस्ट गोल्ड सिल्क, सरगुजा का महामाया सिल्क, महासमुंद का खल्लारी सिल्क तथा जांजगीर-चांपा का चांपा सिल्क सहित अन्य जिलों के उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को रेशम उत्पादकों एवं व्यापारियों को ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। इस पहल से प्रदेश में रेशम उद्योग को मजबूती मिलने के साथ महिला समूहों के स्वरोजगार और आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।

14.66 करोड़ रुपये की लागत से बन रही कंपोजिट बिल्डिंग

रायपुर नवीन जिला सक्ती में प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने और आम नागरिकों को सुगम शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में संयुक्त जिला कार्यालय भवन (कंपोजिट बिल्डिंग) का निर्माण किया जा रहा है। 14 करोड़ 66 लाख 59 हजार रुपये की लागत से बन रहा यह भवन जिले में सुगम प्रशासन और बेहतर विभागीय समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सेवा संकल्प अभियान के तहत यह निर्माण कार्य नागरिकों को सुविधाजनक प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयासों को गति दे रहा है। कंपोजिट बिल्डिंग के पूर्ण होने पर विभिन्न शासकीय कार्यालय एक ही परिसर में संचालित हो सकेंगे। इससे नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने, शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और विभागीय कार्यों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। समय और संसाधनों की बचत के साथ शासकीय सेवाओं की पहुंच भी आसान होगी। लोक निर्माण विभाग, सक्ती संभाग के कार्यपालन अभियंता  आर.के. खाम्भरा ने बताया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरों और अनुभागीय अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। कार्य को जल्द पूरा कराने के लिए अनुबंधित एजेंसी विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में लगातार काम कर रही है। संयुक्त जिला कार्यालय भवन से प्रशासनिक कार्यों में समन्वय बढ़ने, नागरिक सुविधाओं में सुधार और शासकीय सेवाओं को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने में मदद मिलेगी। नवीन जिले की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो रही यह अधोसंरचना सक्ती के दीर्घकालीन विकास और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को मजबूती प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता से सपने को मिला पंख

रायपुर आर्थिक सहयोग मिले तो प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। सक्ती जिले के डभरा विकासखंड के ग्राम किरारी की शिवानी साहू की कहानी इसकी मिसाल है। श्रम विभाग की मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से शिवानी को उच्च शिक्षा के लिए 45 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली है। इससे उनकी पढ़ाई जारी रखने में परिवार को मदद मिली और नर्स बनने के उनके सपने को नई दिशा मिली। शिवानी,  टंकेश्वर साहू और मती गोमती साहू की बेटी हैं। उन्होंने भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाने के उद्देश्य से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई चुनी है। वर्तमान में वे नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वर्ष 2025-26 में योजना के तहत उन्हें 45 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दी गई। इस राशि से पढ़ाई से जुड़े खर्चों में परिवार को आर्थिक संबल मिला। शिवानी का कहना है कि शासन से मिली सहायता ने उन्हें बिना आर्थिक चिंता के पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया है। वे नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर कुशल नर्स बनना चाहती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं। शिवानी ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया। छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाएं श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य की राह पर आगे बढ़ने में मददगार बन रही हैं।

पढ़ाई छोड़ रील्स पर फोकस? बिलासपुर की शिक्षिका पर छात्रों से फॉलो बढ़वाने का आरोप

 बिलासपुर  सरकंडा स्थित आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब विद्यालय की एक शिक्षिका द्वारा इंटरनेट मीडिया पर अपनी रील के व्यूज बढ़ाने के लिए छात्रों से लाइक और फालो कराने का गंभीर मामला सामने आया है। कभी नकल, कभी मजदूरी तो कभी छेड़छाड़ जैसे मामलों से घिरे इस विद्यालय की साख पर एक बार फिर बट्टा लगा है। सरकंडा आत्मानंद स्कूल में शैक्षणिक मर्यादा तार-तार हो रही है। ताजा मामले के अनुसार, विद्यालय की एक शिक्षिका अपनी इंटरनेट मीडिया रील्स को वायरल करने और फालोअर्स बढ़ाने के लिए अध्ययनरत स्कूली बच्चों का सहारा ले रही हैं। आरोप है कि शिक्षिका छात्रों पर अपनी आइडी लाइक और फालो करने का अनुचित दबाव बनाती हैं। कुछ जागरूक विद्यार्थियों ने पढ़ाई में व्यवधान का हवाला देते हुए अन्य शिक्षकों व प्राचार्य से इसकी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन प्रबंधन ने मामले को दबाने का प्रयास किया। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध का नियम लागू है, इसके बावजूद रील और फालो के चक्कर में बच्चे खुलेआम मोबाइल लेकर पहुंच रहे हैं।  

अमृतधारा: जब कोरापानी के आंगनों में मुसकराया ’जल जीवन’

रायपुर दूर पहाड़ियों और जंगलों के आंचल में बसे एक छोटे से गांव में सुबह की पहली किरण के साथ ही बर्तनों की खनखनाहट और मीलों दूर पानी की तलाश में पैदल चलती महिलाओं के कदमों की आहट… यह कहानी छत्तीसगढ़ के सारंगढ़दृबिलाईगढ़ जिले की बिलाईगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत परसदा छोटे के आश्रित गांव कोरापानी की है। महज 25 परिवारों और लगभग 110 की आबादी वाले इस छोटे से गांव के लिए स्वच्छ पीने का पानी वर्षों तक एक बड़ा सपना हुआ करता था। लेकिन आज, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में जल जीवन मिशन ने इस गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी है। कभी पानी के गंभीर संकट से जूझने वाला कोरापानी अब राज्य में ग्रामीण जल-स्वावलंबन की एक जगमगाती मिसाल बन चुका है। जल-संकट की पुरानी गाथा: कुएं, हैंडपंप और लंबी कतारें कोरापानी का अतीत अभावों और संघर्षों से भरा था। गांव की महिलाओं और मासूम बेटियों का एक बड़ा कीमती समय केवल पीने का पानी जुटाने में ही बीत जाता था। सिर पर गगरियां उठाए कुएं, हैंडपंप और नदी की ओर जाती महिलाएं गांव की रोजमर्रा की नियति बन चुकी थीं। भीषण गर्मी के दिनों में जब भूजल स्तर नीचे गिर जाता था, तब हैंडपंप भी जवाब दे जाते थे और बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। वहीं, मानसून के आगमन के साथ मटमैले और दूषित पानी के इस्तेमाल से जलजनित बीमारियों का खतरा हर समय मंडराता रहता था। इस दैनिक संघर्ष ने न केवल ग्रामीणों की सेहत पर असर डाला, बल्कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता और बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित किया। संकट के इस दौर में जल जीवन मिशन कोरापानी के ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ। गांव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के माध्यम से श्एकल ग्राम सोलर नलजल योजनाश् की शुरुआत की गई। देखते ही देखते गांव के क्षितिज पर 20 हजार लीटर क्षमता की विशाल पानी टंकी आकार लेने लगी और हरित ऊर्जा के रूप में सोलर पैनल स्थापित किए गए। इसके बाद पूरे गांव में पाइपलाइन का जाल बिछाकर सभी 24 परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, गांव के आंगनबाड़ी केंद्र और शासकीय स्कूल तक भी नल पहुंचाए गए, जिससे अब बच्चों को भी शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है। जैसे ही नलों से जल की धारा बही, ग्रामीणों के चेहरों पर बरसों से गायब खुशी लौट आई। अब महिलाओं को पानी के लिए मीलों दूर भटकना नहीं पड़ता, जिससे उनके कीमती समय और शारीरिक श्रम की बचत हो रही है। इस बचे हुए समय का उपयोग वे अपने परिवार की देखभाल, घरेलू कार्यों और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में कर रही हैं। शुद्ध पेयजल मिलने से गांव में डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियों का प्रकोप भी खत्म हो गया है। बच्चों का स्वास्थ्य सुधरा है और उनकी उपस्थिति स्कूल में नियमित हुई है। इस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व टिकाऊ बनाने के लिए ’सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के पावन अवसर पर श्जल अर्पण दिवसश् का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, पंचगण और जलवाहिनी की समर्पित महिलाओं की मौजूदगी में नलजल योजना को विधिवत ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दिया गया। ग्रामीणों को जल संरक्षण, स्वच्छता और योजना के रख-रखाव का प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे गांव अब पानी के प्रबंधन में स्वयं सक्षम बन गया है। अब घर पर आता है पानी, दूर हुई जीवन की परेशानी आज कोरापानी के आंगनों में मुसकराती जलधाराएं शासन की जनकल्याणकारी नीतियों के सफल क्रियान्वयन की गवाही दे रही हैं। दैनिक जीवन की सबसे बड़ी चिंता दूर होने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की पूरी टीम के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है। कोरापानी में आया यह ऐतिहासिक परिवर्तन यह साबित करता है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास हो, तो सुदूर  प्रगति की मुख्यधारा से जुड़ जाता है।

रायपुर नगर निगम में 11 अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली, जोन से मुख्यालय तक फेरबदल, देखें लेटेस्ट अपडेट

रायपुर नगर निगम में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 11 अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। आयुक्त संबित मिश्रा के जारी आदेश के अनुसार कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता और उप अभियंताओं के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। मुख्यालय में पदस्थ कार्यपालन अभियंता पदमाकर श्रीवास को जोन-5 भेजा गया है, जबकि जोन-5 के लाल महेन्द्र प्रताप सिंह को जोन-6 की जिम्मेदारी मिली है। दिनेश कुमार सिन्हा को जोन-6 से जोन-10 और गजाराम कंवर को जोन-10 से मुख्यालय की उद्यान शाखा में पदस्थ किया गया है।  

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से बच्चों को मिलेगा नया जीवन, सरगुजा में 48 मरीज निःशुल्क उपचार एवं सर्जरी के लिए चिन्हांकित

रायपुर बर्न, कटे-फटे होंठ, तालू और क्लब फुट से पीडि़त बच्चों एवं मरीजों का रायपुर के कालड़ा हॉस्पिटल में होगा निःशुल्क उपचार छत्तीसगढ़ में बच्चों को स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य प्रदान करने की दिशा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर में आयोजित विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं सर्जरी चिन्हांकन शिविर में जन्मजात विकारों एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीडि़त 48 बच्चों एवं मरीजों को निःशुल्क उपचार और आवश्यक सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया है। इन मरीजों को रायपुर स्थित कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। मरीजों को रायपुर तक पहुंचाने के लिए आवश्यक परिवहन व्यवस्था भी की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरुता के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके/चिरायु) के अंतर्गत जिला मुख्यालय अम्बिकापुर स्थित 100 बिस्तरीय मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग सरगुजा और कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल रायपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस शिविर में विकासखंड स्तर पर चिरायु दलों द्वारा पहले से चिन्हांकित बच्चों एवं मरीजों का विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। शिविर का उद्देश्य जन्मजात विकारों और अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ना तथा उन्हें निःशुल्क उपचार एवं सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराना है। बर्न के 8, कटे-फटे होंठ के 18, तालू के 12 और क्लब फुट के 10 मरीज चिन्हांकित शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कुल 48 मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया। इनमें बर्न से संबंधित समस्याओं के 8 मरीज, जन्मजात कटे-फटे होंठ के 18, कटे-फटे तालू के 12 तथा क्लब फुट के 10 मरीज शामिल हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इन मरीजों को रायपुर स्थित कालड़ा बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी हॉस्पिटल में आवश्यक उपचार एवं सर्जरी उपलब्ध कराने के संबंध में सहमति प्राप्त की गई। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक एवं प्लास्टिक सर्जन डॉ. दीपक ठाकुर ने मरीजों की जांच कर उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया। जन्मजात कटे-फटे होंठ और तालू जैसी समस्याओं के कारण बच्चों को भोजन करने, बोलने तथा सामान्य जीवन की गतिविधियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं क्लब फुट जैसी जन्मजात समस्या से बच्चों के चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप और आवश्यक सर्जरी से ऐसी समस्याओं में सुधार संभव है। शिविर के माध्यम से चिन्हांकित मरीजों को विशेषज्ञ उपचार से जोड़ने की पहल उनके बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक पहुंच रही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने कहा कि ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.सी. आर्या ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों में जन्मजात विकारों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक है। सिविल सर्जन डॉ. जे.के. रेलवानी ने जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा एवं सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कालड़ा हॉस्पिटल के विशेषज्ञ प्लास्टिक सर्जन डॉ. दीपक ठाकुर ने बताया कि बर्न, कटे-फटे होंठ, तालू और क्लब फुट जैसी समस्याओं का समय पर उपचार मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उचित चिकित्सकीय देखभाल और आवश्यक सर्जरी से मरीजों की शारीरिक कार्यक्षमता एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है। चिरायु कार्यक्रम से जन्मजात विकारों की शीघ्र पहचान और उपचार पर विशेष जोर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकासात्मक समस्याओं की शीघ्र पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा जाता है। चिरायु दलों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा जरूरत के अनुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों में उपचार की व्यवस्था की जाती है। अम्बिकापुर में आयोजित शिविर इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे 48 जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ उपचार एवं आवश्यक सर्जरी का अवसर मिलेगा। शिविर में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम, संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.सी. आर्या, सिविल सर्जन डॉ. जे.के. रेलवानी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विमलचंद पैकरा, प्रोफेसर डॉ. अविनाशी कुजूर, डॉ. अभिजीत दीवान, नोडल नर्सिंग डॉ. पी.के. सिन्हा, नोडल आरबीएसके डॉ. के.पी. विश्वकर्मा, डॉ. कांत चौहान, डॉ. दीपक गुप्ता,      

प्रशासनिक सुविधाओं और उच्च शिक्षा के विस्तार को मिलेगी मजबूती

रायपुर  उप मुख्यमंत्री ने 40 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की, कॉलेज में स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट और एआई सुविधाओं के विस्तार की पहल  कबीरधाम जिले के बोड़ला में प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार और उच्च शिक्षा के लिए अधोसंरचना विकास को गति देते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने आज 60 लाख रुपए के दो विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इसके तहत एसडीएम कार्यालय बोड़ला में 30 लाख रुपए की लागत से सभा कक्ष सह सामुदायिक शौचालय तथा शासकीय स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में 30 लाख रुपए की लागत से अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने 40 लाख रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की। इसमें कॉलेज में बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये, बालिका शौचालय निर्माण के लिए 4.60 लाख रुपए, ग्राम भीरा में मंगल भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए तथा सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख 40 हजार रुपए शामिल हैं। इसके साथ ही कॉलेज में स्मार्ट बोर्ड, इंटरनेट सुविधा और एआई आधारित तकनीक उपलब्ध कराने की पहल की जाएगी। उप मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल तकनीक और नवाचार के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, क्षमताओं के विकास और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी तकनीक के स्वामी बनें, तकनीक उनका स्वामी न बने। चौटजीपीटी, जेमिनाई, ग्रोक और परप्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग पढ़ाई और रचनात्मक कार्यों को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। साथ ही विद्यार्थियों को अपने संस्कारों और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विधानसभा क्षेत्र के 85 स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इनमें 50 स्थानों पर स्मार्ट बोर्ड लगाए जा चुके हैं तथा शेष 35 स्थानों पर भी लगाए जाएंगे। छात्रावासों और महाविद्यालयों में भी डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से विज्ञान, गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों की जटिल अवधारणाओं को वीडियो और डिजिटल सामग्री से सरलता से समझाया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों की काउंसलिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत एनडीए, सीजीपीएससी, यूपीएससी, कर्मचारी चयन आयोग और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य के अनुरूप मार्गदर्शन मिल सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नई तकनीक सीखने और उसका विवेकपूर्ण उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नवाचार और सकारात्मक सोच के साथ निरंतर प्रयास एवं अभ्यास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष  बालका रामकिंकर वर्मा, नगर पंचायत बोड़ला अध्यक्ष  विजय पाटिल,  बरसाती लाल वर्मा,  छोटूराम चंद्रवंशी,  मोहन धुर्वे, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष  नंद वास, जिला पंचायत सदस्य मती ललिता रूपसिंग धुर्वे,  कांशीराम उईके, सरपंच  रेशमा बाई सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।