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आजादी के बाद पहली बार ग्राम चांगेर में पहुंची विकास की रोशनी

रायपुर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर ज़िले के अबूझमाड़ क्षेत्र के कई दूरदराज और नक्सल-प्रभावित गांवों में दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली पहुंचाई गई है। छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कोण्डागांव जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित अति दुर्गम ग्राम चांगेर में आजादी लगभग 8 दशकों में पहली बार बिजली पहुंची है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से कराए गए विद्युतीकरण कार्य के फलस्वरूप गांव के सभी 23 घर अब रोशनी से जगमगा उठे हैं। अंधेरे से उजाले तक का सफरनामा प्रशासनिक और भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में आठ दशकों तक बिजली नहीं पहुँच पाई थी, वहाँ सरकारी प्रयासों और विभिन्न ग्रामीण विद्युतीकरण योजनाओं के जरिए रोशनी पहुँची है। ग्राम चांगेर के ग्रामीण वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। शाम ढलते ही गांव में अंधेरा छा जाता था। बच्चों को पढ़ाई के लिए लालटेन का सहारा लेना पड़ता था, वहीं रात के समय आवागमन में भी ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बिजली के अभाव में दैनिक जीवन के अनेक कार्य प्रभावित होते थे। ऐसे में गांव में विद्युतीकरण होना ग्रामीणों के लिए लंबे इंतजार के बाद पूरी हुई एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ग्राम चांगेर के सभी 23 घरों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए ग्राम चांगेर तक विकास की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से 25.21 लाख रुपये की लागत से विद्युतीकरण कार्य कराया गया। इसके तहत गांव के सभी 23 घरों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इस पहल से ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा मिलने के साथ ही उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई संभावनाएं भी बनी हैं।  लंबे समय से अंधेरे में जीवन गुजार रहे कई गाँवों और मजरों में पहली बार बिजली के बल्ब और स्म्क् की रोशनी पहुँची है। बिजली आने से ग्रामीणों और बच्चों को अंधेरे से राहत मिली है तथा रात के समय कामकाज और पढ़ाई में आसानी हुई है। आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम ग्राम चांगेर में बिजली पहुंचने से बच्चों को अब शाम के समय बेहतर रोशनी में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, ग्रामीणों को घरेलू कार्यों में सुविधा और रात के समय आवागमन में सहूलियत मिलेगी। बिजली की उपलब्धता से शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। यह सुविधा ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षित जीवन और बेहतर भविष्य की दिशा में एक नई शुरुआत ग्राम चांगेर में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ग्रामवासियों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों के लिए यह केवल बिजली कनेक्शन मिलने की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों से प्रतीक्षित सुविधा, सुरक्षित जीवन और बेहतर भविष्य की दिशा में एक नई शुरुआत है। विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा दूरस्थ चांगेर माओवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा की स्थिति में सुधार के साथ विकास कार्यों को गति मिल रही है। जिला प्रशासन द्वारा दूरस्थ एवं दुर्गम गांवों तक सड़क, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्राम चांगेर में विद्युतीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो अंतिम छोर पर बसे परिवारों तक विकास का लाभ पहुंचाने और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प को दर्शाती है। भारत की आज़ादी के 78 वर्षों बाद कोण्डागांव ज़िले के पूर्व में नक्सल-प्रभावित  ग्राम चांगेर में दशकों के अंधेरे के बाद पहली बार बिजली पहुंचाई गई है। ग्रामीण झूम उठे और उनके चेहरों खुशी की लहर दिख रही है। सरकार ने सुदूर ग्रामीणों तक विकास कार्य पहुंचाने का काम किया है। मोदी सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि विकास की रोशनी देश के अंतिम छोर तक पहुँचे, और कोई भी गांव अंधेरे में न रहे, उनकी इसी संकल्प को छत्तीसगढ़ की श्री विष्णु देव की सरकार साकार कर रही है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की मजबूत विकास दर देश की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और प्रभावी आर्थिक नीतियों का प्रमाण : मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर जारी अनुमान पर सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में नया भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद आर्थिक प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आईएमएफ द्वारा वर्ष 2026 और 2027 में भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वर्ष 2026 में वैश्विक विकास दर मात्र 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अंतर भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती, निरंतरता और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में किए गए व्यापक आर्थिक सुधारों, अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, विनिर्माण को प्रोत्साहन और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण ने देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। भारत आज न केवल दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारत की यह तेज आर्थिक प्रगति ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में देश के मजबूत कदमों का परिचायक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ भी अपनी पूरी सामर्थ्य के साथ सहभागी है। राज्य सरकार ‘विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़’ के ध्येय के अनुरूप निवेश, उद्योग, अधोसंरचना, रोजगार और नवाचार को गति देते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 22 अधिकारियों की नई पदस्थापना; देखें पूरी लिस्ट

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक कार्यकुशलता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सचिवालय सेवा के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव मनराखन भूआर्य द्वारा जारी आदेश के तहत सचिवालय सेवा के कुल 22 सहायक सचिवालय सहायक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नए विभागों में पदस्थ किया गया है। गृह और वित्त विभागों में पदस्थापना जारी आदेश के अनुसार, राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग, पर्यटन विभाग, गह विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, वित्त विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग आदि में नए अधिकारियों की तैनाती की है। ममता साहू की जेल विभाग में पदस्थापना सौरव मंडल को गृह विभाग से सामान्य प्रशासन विभाग, ममता साहू को सामान्य प्रशासन विभाग से जेल विभाग और अभिषेक देवांगन को सामान्य प्रशासन से जेल विभाग में पदस्थापना मिली है। चन्द्रनारायण की गृह विभाग में पदस्थापना इसके अलावा संगीता देवी को सामान्य शासन विभाग से वित्त विभाग, चन्द्रनारायण को नगरीय प्रशासन विभाग से गृह विभाग और धनेश्वर पटेल को मुख्यमंत्री सचिवालय से चिकित्सा शिक्षा विभाग में तैनाती मिली है।  

वन विकास निगम ने कवर्धा में मैदानी अमले को दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा काष्ठ निष्कासन में गुणवत्ता बढ़ाने, वन संरक्षण और श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कवर्धा के सिंगपुर बीट में एक दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला में मैदानी अमले को वृक्षों के वैज्ञानिक पातन (वृक्ष कटाई ) और लगुण (लट्ठे तैयार करने) की उन्नत तकनीकों का जंगल में प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण काष्ठ तैयार करने और निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए निर्धारित लॉगिंग प्लान का शत-प्रतिशत पालन करने पर जोर दिया गया। मैदानी अमले को काष्ठ की लंबाई और निर्धारित श्रेणी के अनुसार कटाई एवं छंटाई करने की तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि उपलब्ध काष्ठ का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रशिक्षण के दौरान वृक्षों की कटाई में श्रमिकों की सुरक्षा के साथ आसपास के छोटे पौधों और प्राकृतिक पुनरुत्पादन को नुकसान से बचाने के उपाय बताए गए।   छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमरनाथ प्रसाद के निर्देशन में यह कार्यशाला आयोजित हुई। क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री राम अवतार दुबे, मंडल प्रबंधक श्री राम कुमार सिदार सहित अन्य अधिकारी, कूप प्रभारी और मैदानी श्रमिक शामिल हुए।

प्रदेश के 30 शासकीय आईटीआई बनेंगे आधुनिक एवं उद्योगोन्मुखी कौशल विकास केंद्र

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल से सशक्त बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। तेजी से बदलती तकनीक और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में पीएम-सेतु योजना के प्रदेश में क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए क्रमशः भिलाई स्टील प्लांट और एनएमडीसी लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपन्न हुआ। इन दोनों प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों की भागीदारी से आईटीआई में प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कौशल विकास को रोजगार और औद्योगिक प्रगति से जोड़ने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। पीएम-सेतु योजना इसी दूरदर्शी सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से आईटीआई को केवल प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक कौशल, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में नए उद्योगों और निवेश के विस्तार के साथ विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग भी बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हो और प्रदेश के युवाओं को अपने कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। प्रदेश के 30 आईटीआई का होगा कायाकल्प प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (PM-SETU) योजना के अंतर्गत देशभर के एक हजार शासकीय आईटीआई को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है। योजना का उद्देश्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक एवं उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। छत्तीसगढ़ में पीएम-सेतु योजना के क्रियान्वयन के लिए दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर सहित छह क्लस्टर चयनित किए गए हैं। इनमें छह हब आईटीआई और 24 स्पोक आईटीआई सहित कुल 30 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन प्रस्तावित है। प्रदेश के छह क्लस्टरों में पांच वर्षों की अवधि में लगभग 1,446 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 241 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। इसके अंतर्गत हब आईटीआई के लिए 81 करोड़ रुपए तथा प्रत्येक स्पोक आईटीआई के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। योजना में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित उद्योग भागीदार की वित्तीय सहभागिता क्रमशः 50 प्रतिशत, 33 प्रतिशत और 17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से आईटीआई में आधुनिक मशीनों, उपकरणों, प्रयोगशालाओं और तकनीकी संसाधनों के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उद्योग और आईटीआई के बीच मजबूत होगी साझेदारी मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। उद्योगों की सीधी भागीदारी से युवाओं को ऐसी तकनीकों और कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिनका वास्तविक औद्योगिक इकाइयों में उपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की आवश्यकता और युवाओं के कौशल के बीच अंतर को कम करना जरूरी है। पीएम-सेतु के माध्यम से पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और व्यावहारिक अनुभव को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने से प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। दुर्ग क्लस्टर में भिलाई स्टील प्लांट की महत्वपूर्ण भागीदारी पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत दुर्ग क्लस्टर के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की इकाई भिलाई स्टील प्लांट (BSP) एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा। इस क्लस्टर में शासकीय आईटीआई दुर्ग को हब आईटीआई तथा शासकीय आईटीआई भिलाई, महिला आईटीआई भिलाई, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा को स्पोक आईटीआई के रूप में शामिल किया गया है। भिलाई स्टील प्लांट की विशेषज्ञता और औद्योगिक अनुभव का लाभ प्रशिक्षण व्यवस्था को मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्र में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों, मशीनों और कार्यप्रणाली के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री  साय की उपस्थिति में आज भिलाई स्टील प्लांट के साथ एमओयू संपन्न कर इस सहभागिता को औपचारिक स्वरूप दिया गया। बस्तर के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने की बड़ी पहल बस्तर क्लस्टर के लिए एनएमडीसी लिमिटेड एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागी होगा। बस्तर क्लस्टर में शासकीय आईटीआई बस्तर को हब आईटीआई तथा जगदलपुर, गीदम, कोंडागांव और नारायणपुर के शासकीय आईटीआई को स्पोक आईटीआई के रूप में सम्मिलित किया गया है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में एनएमडीसी लिमिटेड के साथ एमओयू संपन्न मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय और दूरस्थ अंचलों के युवाओं तक गुणवत्तापूर्ण तकनीकी प्रशिक्षण पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। एनएमडीसी जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थान की सहभागिता से बस्तर के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें स्थानीय एवं प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में विकसित हो रहे रोजगार के अवसरों का लाभ लेने में सहायता मिलेगी। सरगुजा और कोरबा क्लस्टर में भी उद्योगों की सहभागिता सरगुजा क्लस्टर के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति प्रदान की है। इस क्लस्टर के लिए टाटा IIS का चयन ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की स्वीकृति के लिए प्रकरण विभाग को प्रस्तुत किया गया है तथा एमओयू के प्रारूप में आवश्यक संशोधन के लिए इसे एसईसीएल को भेजा गया है। इसी प्रकार कोरबा क्लस्टर के लिए एनटीपीसी कोरबा द्वारा एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में सहभागिता की सहमति दी गई है। एनटीपीसी कोरबा द्वारा ऑपरेटिंग पार्टनर के चयन की प्रक्रिया प्रचलन में है। रायपुर और रायगढ़ क्लस्टर के लिए प्रक्रिया जारी रायपुर एवं रायगढ़ क्लस्टर के लिए एंकर इंडस्ट्री पार्टनर के चयन की प्रक्रिया भी जारी है। इसके लिए राज्य के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से निविदाएं जारी की गई हैं। … Read more

छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग घोटाला: रामगोपाल को 14 दिन की न्यायिक रिमांड

रायपुर  कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को जेल भेज दिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पांच दिन की हिरासत पूरी होने के बाद मंगलवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के बाद ईडी की विशेष अदालत ने रामगोपाल को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। करीब 140 करोड़ रुपये के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले से जुड़े इस मामले में ईडी ने रामगोपाल को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ के लिए पांच दिन की कस्टडी रिमांड हासिल की थी। ईडी इस मामले में कस्टम मिलिंग से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है। जांच के सिलसिले में रामगोपाल अग्रवाल को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। एजेंसी ने उनसे मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ की। क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला ? यह मामला खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से जुड़ा है। उस समय प्रोत्साहन राशि को 40 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर इस व्यवस्था के तहत मिल मालिकों से दो किस्तों में 20-20 रुपये प्रति क्विंटल की राशि ली गई।  

मुख्यमंत्री साय ने की मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा

रायपुर छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों में ऐसी अनेक प्रतिभाएं हैं, जिन्हें सही समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतिस्पर्धा के पर्याप्त अवसर मिलें तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा सकती हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रतिभाओं के लिए गांव के खेल मैदान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक आगे बढ़ने का सुनियोजित मार्ग तैयार करना है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन इसी सोच को धरातल पर उतारने की महत्वपूर्ण पहल है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी प्रदेश की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों से यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की भरपूर क्षमता है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रतिभाओं की पहचान कम उम्र में हो और उन्हें लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिले। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की कार्ययोजना ऐसी हो, जिसमें खिलाड़ी की प्रतिभा की पहचान से लेकर उसके उच्च प्रदर्शन वाले खिलाड़ी बनने तक की पूरी यात्रा के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो। गांवों और दूरस्थ अंचलों तक पहुंचे खेल प्रतिभाओं की खोज मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल बड़े शहरों और स्थापित खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छत्तीसगढ़ के गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। तीरंदाजी, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों से इन क्षेत्रों के युवाओं का स्वाभाविक जुड़ाव रहा है। ऐसी प्रतिभाओं को चिन्हित कर वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन की सफलता इस बात से तय होगी कि हम जमीनी स्तर पर कितनी प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे पाते हैं। कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों अथवा अवसर की कमी के कारण पीछे नहीं रहना चाहिए। स्कूल से ही मजबूत होगी खेल संस्कृति मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्कूल स्तर से खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले गांवों में बच्चों का खेल के मैदानों से स्वाभाविक जुड़ाव होता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण यह जुड़ाव कम हुआ है। इसे फिर मजबूत करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना भी विकसित करते हैं। स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान होने से योग्य बच्चों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकेगा और वे भविष्य में खेलों को एक बेहतर करियर के रूप में भी अपना सकेंगे। फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक बनेगा प्रशिक्षण का मजबूत तंत्र बैठक में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के अंतर्गत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित प्राथमिकता वाले खेलों के विकास की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने की प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा की गई। फीडर सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को क्रमशः खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं की पहचान के बाद उनके प्रदर्शन और प्रगति की नियमित निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे प्रत्येक चयनित खिलाड़ी के प्रशिक्षण, प्रदर्शन और आवश्यकता का नियमित आकलन हो तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अगले स्तर तक पहुंचने के अवसर मिलते रहें। प्रशिक्षित कोच और स्पोर्ट्स साइंस पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री  साय ने खेलवार प्रशिक्षित और योग्य कोचों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस खेल की जहां संभावनाएं अधिक हैं, वहां उसी के अनुरूप विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की पदस्थापना और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं के विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मनोवैज्ञानिक सहयोग, फिटनेस, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सेवाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने की योजना पर विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में तकनीक और खेल विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण की इन सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए। बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की भी समीक्षा की गई। सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की वर्तमान क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने तथा यहां संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पहले से उपलब्ध खेल अधोसंरचनाओं का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित रखरखाव के साथ आवश्यकतानुसार उनका उन्नयन किया जाए, ताकि खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से प्रतिभाओं को मिलेगा मंच मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रशिक्षण के साथ खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना भी आवश्यक है। प्रतियोगिताओं से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन का आकलन कर पाते हैं और उनमें बड़े मुकाबलों के लिए आवश्यक आत्मविश्वास विकसित होता है। बैठक में टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसके माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चिन्हित कर उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर प्रदान किए जाएंगे। महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन मुख्यमंत्री  साय ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा और क्षमता सिद्ध की है। उन्हें … Read more

जिंदल स्टील बनी छत्तीसगढ़ हॉकी लीग की रायगढ़ टीम ‘चक्रधर चैंपियंस’ की फ्रेंचाइजी मालिक

रायपुर जिंदल स्टील ने छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले संस्करण में रायगढ़ की टीम ‘चक्रधर चैंपियंस’ की फ्रेंचाइजी का स्वामित्व हासिल किया है। यह लीग में भाग लेने वाली छह फ्रेंचाइजी में से एक है। प्रतियोगिता का आयोजन 21 अक्टूबर से 1 नवंबर तक रायपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं खेल तथा युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा की और टीम की जर्सी का अनावरण किया। इस लीग में अपनी भागीदारी के माध्यम से जिंदल स्टील का उद्देश्य युवा हॉकी खिलाड़ियों को अपनी क्षमता और प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक मंच उपलब्ध कराना तथा प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है। इस साझेदारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिंदल स्टील लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक श्री देबज्योति रॉय ने कहा, “हम प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हैं। छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का हिस्सा बनकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। ‘चक्रधर चैंपियंस’ के माध्यम से हम युवा खिलाड़ियों को एक सशक्त प्रतिस्पर्धात्मक मंच प्रदान करने की उम्मीद करते हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें, महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर सकें और छत्तीसगढ़ में हॉकी के विकास में अपना योगदान दे सकें।” इस फ्रेंचाइजी के साथ जिंदल स्टील का जुड़ाव प्रदेश में सामुदायिक विकास और युवा सशक्तिकरण के प्रति कंपनी की व्यापक प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करता है। कंपनी का विशेष ध्यान युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने पर केंद्रित है।

छत्तीसगढ़ की तीरंदाज सरिता तेलम को CM साय ने किया सम्मानित, बढ़ाया मान

रायपुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके से निकलकर युवां अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अलग पहचान बना रहें हैं। इन्हीं में से एक है बीजापुर की सरिता तेलम, जिन्होंने तीरंदाजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। सरिता की मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक मीडिया हाउस की ओर से आयोजित GenNext संवाद Youth Award में उनको सम्मानित किया। संघर्ष और समर्पण से बनाई पहचान आदिवासी अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना उनकी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। सरिता ने राष्ट्रीय शालेय तीरंदाजी प्रतियोगिता सहित कई स्पर्धाओं में सफलताएं हासिल की है। तीरंदाजी के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियां न केवल बीजापुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय हैं। उनका संघर्ष और खेल के प्रति प्रतिबद्धता खासकर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा उनकी सफलता ने क्षेत्र की प्रतिभाओं और बेटियों में आगे बढ़ने की उम्मीद और आत्मविश्वास को मजबूत किया है। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि मेहनत, लगन और समर्पण के साथ विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। CM साय ने संवाद में किया सम्मानित राजधानी रायपुर में संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीरंदाजी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए सरिता तेलम को सम्मानित किया।

बस यात्रियों को झटका! छत्तीसगढ़ में बढ़ेगा किराया, कुछ वर्गों को मिलेगी पूरी छूट

रायपुर छत्तीसगढ़ में अंतरशहरी यात्री बसों के किराये की नई दरें निर्धारित कर दी गई हैं। राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने आठ अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर साधारण, डीलक्स, रात्रिकालीन, शयनयान और वातानुकूलित बस सेवाओं के लिए किराये की दरें तय की हैं। नई दरें राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होंगी। यह व्यवस्था नगर सेवाओं से अलग बसों पर लागू होगी। सरकार ने इसके साथ ही दिव्यांगों, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों सहित कुछ श्रेणियों के यात्रियों को किराये में पूरी छूट देने का प्रविधान भी किया है। साधारण बस में पांच किमी का किराया 10 रुपये नई दरों के अनुसार साधारण बस में पहले पांच किलोमीटर की यात्रा के लिए प्रति यात्री 10 रुपये देने होंगे। इसके बाद प्रत्येक किलोमीटर या उसके हिस्से के लिए 1.75 रुपये प्रति यात्री किराया निर्धारित किया गया है। साधारण रात्रिकालीन बस सेवा में सामान्य साधारण बस के किराये से 10 प्रतिशत अधिक राशि देनी होगी। डीलक्स बस में पहले पांच किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 12 रुपये और इसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए 2.20 रुपये किराया लगेगा। डीलक्स रात्रिकालीन बस सेवा के लिए भी यही दर निर्धारित की गई है। शयनयान और अर्धशयनयान बसों की अलग दरें गैर-वातानुकूलित डीलक्स शयनयान और अर्धशयनयान बसों में पहले पांच किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 12 रुपये किराया तय किया गया है। इसके बाद प्रति किलोमीटर 2.20 रुपये देने होंगे। वातानुकूलित डीलक्स शयनयान और अर्धशयनयान बसों में पहले पांच किलोमीटर के लिए 12 रुपये तथा इसके बाद प्रति किलोमीटर 3.20 रुपये किराया निर्धारित किया गया है। वोल्वो, स्कैनिया और मर्सिडीज जैसी अति विलासितापूर्ण वातानुकूलित बसों में पहले पांच किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 12 रुपये और इसके बाद प्रति किलोमीटर 3.30 रुपये देने होंगे। वातानुकूलित अर्धशयनयान में सीट के लिए प्रति किलोमीटर तीन रुपये तथा शयनयान की बर्थ के लिए 3.30 रुपये की दर निर्धारित की गई है। इन यात्रियों को किराये में पूरी छूट सरकार ने कुछ श्रेणियों के यात्रियों को बस किराये में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रविधान किया है। इसमें दृष्टिबाधित व्यक्ति, बौद्धिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति, दोनों पैरों से चलने में असमर्थ दिव्यांग, 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक और एचआइवी से पीड़ित व्यक्ति शामिल हैं। इन यात्रियों के साथ यात्रा करने वाले एक सहायक को भी किराये में पूरी छूट मिलेगी। दोनों पैरों से दिव्यांग यात्रियों को पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग या शासकीय अस्पताल के अधिकारी द्वारा जारी फोटोयुक्त प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। एचआइवी से पीड़ित यात्रियों के लिए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों, राज्य एड्स नियंत्रण समिति, एआरटी केंद्र या कैंसर अस्पताल द्वारा जारी फोटोयुक्त प्रमाणपत्र मान्य होगा। नक्सल प्रभावित व्यक्ति को 50 प्रतिशत छूट छत्तीसगढ़ के निवासी नक्सल प्रभावित व्यक्ति को राज्य के भीतर यात्री बस से सफर करने पर 50 प्रतिशत किराये की छूट मिलेगी। इसके लिए संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक की अनुशंसा पर कलेक्टर द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। आधे रुपये पर अगली पूर्ण राशि नई दरों के तहत किराये की गणना में 50 पैसे या इससे अधिक की राशि होने पर उसे अगले पूर्ण रुपये में बदला जाएगा। 50 पैसे से कम की राशि को छोड़ दिया जाएगा। रात्रिकालीन बस सेवा की श्रेणी में ऐसी बसें शामिल होंगी, जो सामान्यतः सूर्यास्त से सूर्योदय के बीच चलती हैं और जिनकी एक तरफ की यात्रा 200 किलोमीटर से अधिक होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बस के पंजीयन प्रमाणपत्र और परमिट में सेवा की श्रेणी का उल्लेख होना चाहिए। निर्धारित छूट की शर्तों का उल्लंघन करने पर परमिटधारक और परिचालक के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।