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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ

रायपुर.  छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में अब टैक्स भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को एचडीएफसी बैंक की ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था के तहत एचडीएफसी बैंक ने नगर पालिका जशपुर के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किया है। प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड जनरेट किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी। नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जो राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और कुशल बनाती है। इस प्रणाली के तहत वर्तमान में लगभग 4600 हाउसहोल्ड को शामिल किया गया है, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां शामिल हैं। इस पहल से जहां नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान अरपा रिवर व्यू के समीप नवनिर्मित ‘अटल परिसर’ में भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया।मुख्यमंत्री साय ने शहर के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए 26 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।  मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसने प्रदेश को विकास की नई दिशा और पहचान प्रदान की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल जी की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सहेजने की एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि यह परिसर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा और समाज में राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है, ताकि अटल जी के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को प्रदेश के 115 नगरीय निकायों में अटल परिसरों का लोकार्पण किया जा चुका है और यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और आज किए गए 26 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य शहर की अधोसंरचना को सुदृढ़ करेंगे तथा नागरिक सुविधाओं को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के माध्यम से शहर को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुदृढ़ विदेश नीति और प्रभावी समन्वय के कारण आपूर्ति व्यवस्था सुचारु है तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री साय द्वारा इस अवसर पर लगभग 12.43 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें अटल परिसर निर्माण, मराठी कन्या शाला भवन में प्रथम तल निर्माण, इमलीपारा में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तथा रक्षित आरक्षी केंद्र का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने लगभग 14.50 करोड़ रुपये की लागत के नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें अरपा क्षेत्र में सड़क, नाला एवं पिचिंग कार्य, जरहाभाठा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण तथा उसलापुर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं चबूतरा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो शहर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अटल परिसर का निर्माण प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अटल जी के योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और उनके आदर्श आज भी देश को दिशा दे रहे हैं।  इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

माँ कर्मा के आदर्श हमें एकजुट, संगठित और सशक्त बनने की प्रेरणा देते हैं – मुख्यमंत्री साय

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सूरजपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय भक्त माता कर्मा जयंती महोत्सव 2026 में शामिल हुए और भक्त माता कर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री साय ने सूरजपुर रिंग रोड स्थित भक्त माता कर्मा चौक पहुँचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और माँ कर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि माँ कर्मा का जीवन त्याग, सेवा और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है, जो समाज को एकजुटता और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में साहू समाज को एक गौरवशाली, संस्कारित और विकासोन्मुख समाज बताते हुए कहा कि भक्त माता कर्मा, माता राजिम दाई और दानवीर भामाशाह जैसी महान विभूतियाँ इसी समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में साहू समाज की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आगे भी यह समाज प्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहभागी बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र, जो लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा, अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़कों, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ 400 से अधिक गांवों को मुख्यधारा में लाया गया है और आने वाले समय में बस्तर विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा। मुख्यमंत्री साय ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और ऊर्जा संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेहतर स्थिति में है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें और प्रशासन पर भरोसा बनाए रखें। मुख्यमंत्री साय ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि होली से पहले 25 लाख से अधिक किसानों को 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अंतर राशि का भुगतान किया गया है, वहीं महतारी वंदन योजना के अंतर्गत लगभग 70 लाख महिलाओं को 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है, जिससे उनकी आजीविका को मजबूती मिली है। इसके साथ ही रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को तीर्थ दर्शन का अवसर प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के लिए सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह सहयोग समाज के संगठनात्मक सशक्तिकरण और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने अपने संबोधन में कहा कि साहू समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है और समाज ने अपने परिश्रम एवं समर्पण से देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने समाज के विकास के लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक अनुशासन को आवश्यक बताते हुए कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर एक सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने जीता रजत

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत 86 किलोग्राम भारोत्तोलन प्रतियोगिता महिला वर्ग में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। इस स्पर्धा में महाराष्ट्र की साक्षी बंडू बुरकुले ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक कब्जा किया। यह प्रतिस्पर्धा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की खेल मैदान में आयोजित की जा रही है। साक्षी बुरकुले ने स्नैच में 68 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 82 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 150 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल की, उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में सबसे मजबूत रहा। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल की। उन्होंने कुल 121 किलोग्राम (स्नैच 55 किलोग्राम, क्लीन एंड जर्क 71 किलोग्राम) वजन उठाया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने 118 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। प्रतियोगिता में असम की लिंडा  114 किलोग्राम के साथ चौथे स्थान पर रहीं, जबकि त्रिपुरा की सुमी मोग (77 किलोग्राम) और आंध्र प्रदेश की जेसी रानी (61 किलोग्राम) क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा में खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर प्रतिभागी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। दर्शकों ने प्रत्येक खिलाड़ियों की हौंसला अफजाई करते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर इस पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा।

हवाई कनेक्टिविटी में बड़ा कदम, अंबिकापुर से दिल्ली और कोलकाता उड़ानें शुरू

रायपुर.  उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026 का दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज होने जा रहा है। माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा (अम्बिकापुर) से देश के प्रमुख महानगरों दिल्ली एवं कोलकाता के लिए नियमित विमान सेवा शुरू होगी। इस पहल से क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने के साथ ही विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 30 मार्च को प्रातः 10 बजे रायपुर से वर्चुअल माध्यम से विमान सेवा का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर अंबिकापुर के पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें सांसद, विधायकगण एवं जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं आम नागरिकों उपस्थित रहेंगे।  नई हवाई सेवा के अंतर्गत एलायंस एयर द्वारा 72-सीटर एटीआर विमान संचालित किया जाएगा। अंबिकापुर से दिल्ली के लिए फ्लाइट हफ्ते में दो दिन सोमवार और बुधवार को चलेगी। सोमवार को फ्लाइट सुबह 7.50 बजे दिल्ली से उड़ान भरकर 10.25 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, वहां से 10.50 बजे रवाना होकर 11.35 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद यही फ्लाइट दोपहर 12.05 बजे अंबिकापुर से उड़ान भरकर 2.35 बजे दिल्ली पहुंचेगी। बुधवार को सुबह 7.50 बजे दिल्ली से सीधी फ्लाइट उड़कर 10.25 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 10.50 बजे अंबिकापुर से निकलकर 11.35 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 12.00 बजे उड़कर 2.40 बजे दिल्ली पहुंचेगी। अंबिकापुर से कोलकाता के लिए भी हफ्ते में दो दिन फ्लाइट चलेगी। शनिवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से फ्लाइट उड़ान भरकर 8.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी, फिर 9.20 बजे वहां से रवाना होकर 10.00 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। इसके बाद 10.25 बजे अंबिकापुर से उड़कर 12.15 बजे कोलकाता पहुंच जाएगी। वहीं गुरुवार को सुबह 7.05 बजे कोलकाता से सीधी फ्लाइट उड़कर 8.50 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी, फिर 9.15 बजे अंबिकापुर से निकलकर 9.55 बजे बिलासपुर पहुंचेगी और वहां से 10.20 बजे उड़कर 12.05 बजे कोलकाता पहुंचेगी। निर्धारित शेड्यूल के तहत यात्रियों को आने-जाने दोनों दिशाओं में सुविधा उपलब्ध होगी तथा बिलासपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी सुदृढ़ होगी। कोलकाता के लिए भी विमान सेवा प्रारंभ होने से पूर्वी भारत के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र से सीधा संपर्क स्थापित होगा, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नया विस्तार मिलेगा। अम्बिकापुर सरगुजा संभाग का मुख्यालय होने के साथ उत्तर छत्तीसगढ़ का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक एवं वाणिज्यिक केंद्र है। यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा एवं खनिज भंडार से समृद्ध है। साथ ही मैनपाट, तातापानी एवं विविध जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। हवाई सेवा के प्रारंभ होने से सरगुजा संभाग सीधे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एवं पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता से जुड़ जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। पर्यटन क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से देश-विदेश के पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा, जिससे होटल, परिवहन एवं अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी लाभ होगा, जिससे गंभीर मरीजों को महानगरों में शीघ्र उपचार उपलब्ध हो सकेगा। गौरतलब है कि माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा का विकास केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के अंतर्गत किया गया है। वर्ष 1950 में निर्मित इस हवाई पट्टी का विस्तार कर रनवे को 1500 मीटर से बढ़ाकर 1800 मीटर किया गया, जिससे अब एटीआर जैसे बड़े विमान यहां संचालित हो सकते हैं। माँ महामाया एयरपोर्ट दरिमा, अम्बिकापुर लगभग 365 एकड़ में फैला हुआ है, एयरपोर्ट के सिविल एवं विद्युतीकरण कार्य हेतु राशि रू. 48.25 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी, जिससे इस एयरपोर्ट में सभी कार्य डीजीसीए मानक अनुरूप कराया गया है। मां महामाया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उन्नयन 72 यात्रियों के अनुरूप कराया गया। हवाई अड्डे में लगभग 100 वाहन की पार्किंग की व्यवस्था के साथ टर्मिनल भवन तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया गया।

विश्वसनीयता और जनसेवा से सशक्त हो मीडिया, राज्यपाल डेका का संदेश

रायपुर.  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि लोकतंत्र में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चतुर्थ स्तंभ माना गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन और साधना है। समाज का दर्पण कहलाने वाली पत्रकारिता ने सदैव जनता और सत्ता के बीच संपर्क-सेतु की भूमिका निभाई है और लोगों को जागरूक किया है। इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।  राज्यपाल डेका आज भिलाई सेक्टर 4 स्थित एस.एन.जी. ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि की आंसदी से सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया। राज्यपाल डेका ने इस अवसर पर महिला पत्रकारों को उनकी उत्कृष्ट लेखनी के लिए सम्मानित किया, जिसमें शगुफ्ता शीरीन, अनुभूति भाखरे, कोमल धनेसर, साक्षी सोनी शामिल है। इसी प्रकार समाज सेवी महिलाओं साधना चतुर्वेदी, अंजना श्रीवास्तव, लता बौद्ध, दीप्ति सिंग, सुनीता जैन को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल डेका ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए अवगत कराया कि आज पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया के विस्फोट ने सूचना के प्रवाह को लोकतांत्रिक तो बनाया है, लेकिन साथ ही विश्वास का गंभीर संकट भी खड़ा किया है। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर व्यक्ति ‘पत्रकार‘ बन चुका है और सत्यापन से पहले ही समाचार वायरल हो जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ‘फेक न्यूज‘ और ‘डीपफेक‘ ने सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली कर दी है। इन सबके बीच आज भी प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता को कायम रखा है। राज्यपाल डेका ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारिता को अपने मूल आदर्शों की ओर लौटना होगा। एक स्वस्थ पत्रकारिता ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने इस चौथे स्तंभ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर दुबे, सचिव सतीश बौद्ध एवं अन्य पदाधिकारी और राजाराम त्रिपाठी, प्रो. संजय त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के पत्रकार उपस्थित थे।

असम की पिंकी बोरो को रजत और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके को कांस्य

रायपुर. खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के तहत महिला 86$ किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस स्पर्धा में मिजोरम की ज़ोसांगज़ुआली ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ज़ोसांगज़ुआली ने स्नैच में 70 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 83 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 140 किलोग्राम के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि ने मिजोरम को गौरवान्वित किया। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय खेल परिसर में किया जा रहा है। असम की पिंकी बोरो ने शानदार प्रयास करते हुए कुल 125 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने स्नैच में 55 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 70 किलोग्राम का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने भी दमदार खेल दिखाते हुए कुल 86 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने स्नैच में 39 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 47 किलोग्राम वजन उठाया। प्रतियोगिता में त्रिपुरा की ट्विस्मु जमातिया चौथे स्थान पर रहीं, जिन्होंने कुल 77 किलोग्राम वजन उठाया। प्रतियोगिता की खास बात यह रही की सभी खिलाड़ियों ने युवा आयु में बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। मुकाबला काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जहां हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। आयोजन स्थल पर दर्शकों का उत्साह खिलाड़ियों के प्रदर्शन को और ऊर्जा दे रहा था।

मालाबार पाइड हॉर्नबिल और उड़न गिलहरी की मौजूदगी दर्ज, उदंती में तकनीक और परंपरा का संगम

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक दिलचस्प बदलाव दिखाई दे रहा है. यहाँ की पहाड़ियों और वनों में अब फिर से उन दुर्लभ प्रजातियों की आहट सुनाई देने लगी है, जो कभी पश्चिमी घाट और हिमालयी क्षेत्रों की पहचान मानी जाती थीं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, मालाबार विशाल गिलहरी और भारतीय उड़ने वाली गिलहरी जैसी प्रजातियाँ अब उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अपना विस्तार कर रही हैं. इस बदलाव के पीछे आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का एक अनूठा संगम काम कर रहा है. सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्सः एक प्राकृतिक ‘जीव-जंतु पुल’ छत्तीसगढ़ का सेंट्रल इंडियन हाइलैंड्स क्षेत्र पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और हिमालय के बीच एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कड़ी का काम करता है. यह क्षेत्र कई वन्यजीव प्रजातियों के लिए “फॉनल ब्रिज” यानी जीव-जंतुओं के आवागमन का प्राकृतिक मार्ग बनता है. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व इसी हाईलैंड्स का हिस्सा है. यह क्षेत्र उन प्रजातियों के लिए आदर्श माना जाता है जो ऐसे वनों में पनपती हैं जहाँ वृक्षों के छत्र आपस में जुड़े हों, जिन्हें “वृक्षीय राजमार्ग” कहा जाता है. सालभर जल स्रोत उपलब्ध हों, फल देने वाले वृक्ष जैसे बरगद, पीपल और सेमल मौजूद हों. लेकिन पिछले वर्षों में अतिक्रमण, अवैध शिकार और अवैध वृक्ष कटाई के कारण इन वनों को नुकसान पहुँचा और इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई. जब एआई ने जंगलों की निगरानी शुरू की वर्ष 2022 में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जंगल संरक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शुरू किया. रिजर्व ने गूगल अर्थ इंजन आधारित रिमोट सेंसिंग पोर्टल का उपयोग करते हुए 1840 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन आवरण और जल स्रोतों की स्थिति का विश्लेषण किया. सेंटिनल और लैंडसैट उपग्रहों से प्राप्त पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन कर मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के माध्यम से एनडीवीआई (वनस्पति सूचकांक) और एनडीडब्ल्यूआई (जल सूचकांक) में बदलावों का विश्लेषण किया गया. इस तकनीक से उन क्षेत्रों की पहचान संभव हुई जहाँ, वन आवरण तेजी से कम हो रहा था. वृक्षों के छत्रों में अंतराल बढ़ रहा था. जल स्रोत सूख रहे थे. इन क्षेत्रों को “हॉटस्पॉट” के रूप में चिह्नित किया गया. ड्रोन से हुआ जमीनी सत्यापन उपग्रह चित्रों से मिले संकेतों की पुष्टि के लिए एआई-संचालित सर्वेक्षण ड्रोन का उपयोग किया गया. इन ड्रोन की मदद से हॉटस्पॉट क्षेत्रों का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्र तैयार किया गया. जंगलों की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ. संरक्षण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई. इससे वन विभाग को एक सटीक और अद्यतन तस्वीर मिली, जो संरक्षण रणनीति बनाने में अत्यंत उपयोगी साबित हुई. असली जानकारी समुदाय के पास तकनीक के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का ज्ञान भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना. ओढ़, अमलोर, आमामोरा, नारिपानी, अमली, खालगढ़, मेचका, बमनीझोला, आमगाँव, बहिगाँव और कारिपानी जैसे गांवों के वनवासियों से बातचीत कर इन प्रजातियों के पुराने रहवास क्षेत्रों, भोजन के स्रोतों और आवागमन के रास्तों की जानकारी जुटाई गई. यह पारंपरिक ज्ञान कई मामलों में वैज्ञानिक डेटा का पूरक साबित हुआ. तीन वर्षों में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम एकत्रित जानकारी और विश्लेषण के आधार पर पिछले तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. लगभग 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया गया. हॉटस्पॉट क्षेत्रों के 21 तालाबों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाए गए, जो गर्मियों में सूख जाया करते थे. फाइकस प्रजातियों और फलदार वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण किया गया. जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच, चेक डैम और जल संचयन संरचनाएँ बनाई गईं. इसके साथ ही अवैध शिकार रोकने के लिए 60 से अधिक एंटी-पोचिंग अभियान चलाए गए, जिनमें ओडिशा और यूएसटीआर क्षेत्र से लगभग 500 शिकारी और लकड़ी तस्करों की गिरफ्तारी हुई. समुदाय के साथ संरक्षण की नई पहल वन विभाग ने समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं. इनमें प्रमुख हैं, “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” जहाँ हॉर्नबिल के लिए भोजन उपलब्ध कराया जाता है. “वीविंग बैक द स्क्विरल कैनोपी” भारतीय विशाल और उड़न गिलहरियों के लिए जुड़े हुए वृक्ष छत्रों का पुनर्निर्माण. इन पहलों ने स्थानीय लोगों को संरक्षण का सक्रिय भागीदार बना दिया है. अब लौट रही हैं दुर्लभ प्रजातियाँ इन संयुक्त प्रयासों के परिणाम अब दिखने लगे हैं. मालाबार पाइड हॉर्नबिल, जो पहले केवल कुलहाड़ीघाट परिक्षेत्र में दर्ज की जाती थी, अब चार परिक्षेत्रों-कुलहाड़ीघाट, अरसिकनहार, दक्षिण उदंती और इंदागाँव- तक फैल चुकी है. इसी तरह भारतीय विशाल गिलहरी और उड़ने वाली गिलहरी भी अब रिजर्व के कई नए क्षेत्रों में दिखाई देने लगी हैं. यह विस्तार न केवल इन प्रजातियों की वापसी का संकेत है बल्कि जंगलों के बेहतर होते स्वास्थ्य का भी प्रमाण है. यही जंगल महानदी का उद्गम स्थल भी हैं. इको-टूरिज्म से खुलेगा विकास का नया रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं. विशेषकर गर्मियों के मौसम में यहाँ बर्ड वॉचिंग के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं. इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और पलायन कम हो सकता है. तकनीक और परंपरा का सफल संगम उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का यह मॉडल दिखाता है कि जब आधुनिक तकनीक और स्थानीय ज्ञान साथ आते हैं तो जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में चमत्कारी परिणाम मिल सकते हैं. यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरिया मॉडल को जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उदाहरण बताया

जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण- प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने की सराहना कोरिया मॉडल की देशभर में गुंज- प्रधानमंत्री ने बताया जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण कोरिया का प्रयास बना राष्ट्रीय उदाहरण: जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प- मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय रायपुर कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के मोर गाव मोर पानी महा अभियान अभियान के अंतर्गत में “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है। इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं। पृष्ठभूमि कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था।  कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा “जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत  संरचनाएं बनाईं गईं। सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना।  2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण) जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ।यह जल मात्रा लगभग 230–235  (12000 m³/ तालाब ) बड़े तालाबों के बराबर और  1800 से अधिक  ( 1500 m³/ डबरी ) डबरियों के बराबर है। ( गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।) भूजल स्तर में सुधार CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के  भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।  2026 में प्रगति 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं। कलेक्टर का वक्तव्य जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा— “कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।” कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी,  वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।

सहमति पर आधारित संबंध पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की टिप्पणी, कहा—यह रेप की श्रेणी में नहीं

बिलासपुर. हाईकोर्ट में रेप के आरोपी को दोषमुक्ति किये जाने के खिलाफ अपील पेश करने अनुमति दिए जाने की मांग को लेकर पेश याचिका लगाई गई थी. कोर्ट ने आदेश में कहा कि एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्ज़ी और सहमति से बनाए गए फिजिकल रिलेशन रेप का जुर्म नहीं बनता है. इसके साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है. दरअसल, बेमेतरा जिला निवासी रेप पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट से आरोपी के बरी होने के खिलाफ अपील प्रस्तुत करने अनुमति दिए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. जिसमें कहा गया कि वह एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी करने जाती थी. वहां गांव के दूसरे लोग भी काम करने जाते हैं. गांव का एक आदमी, यानी आरोपी भी वहां काम के लिए जाता था. 19.06.2022 को आरोपी ने उससे बात करना शुरू किया और कहा कि वह उससे शादी करेगा, उसे रानी की तरह रखेगा, और शादी का वादा करके उसे बहलाया. याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी ने उसे बार-बार शादी का वादा करके फुसलाया और उससे फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए कहा. 25.07.2022 को सुबह करीब 4:00 बजे, जब शिकायतकर्ता शौच के लिए जा रही थी, तो आरोपी उससे मिला और फिर कहा कि वह उससे शादी करेगा और फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए कहा. शिकायतकर्ता ने उसकी बातों को नजरअंदाज किया और आगे बढ़ी, लेकिन उसी समय लाइट चली गई, और आरोपी उसे अपने घर ले गया एवं संबंध बनाया. जब आरोपी संबंध बनाया तो वह तीन माह के गर्भ से थी. लोक लॉज के भय से उसने घटना के संबंध में किसी को नहीं बताया. बाद में पति के पूछने पर घटना की जानकारी दी, इसके बाद मामले की रिपोर्ट लिखाई गई. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया. ट्रायल कोर्ट ने गवाहों एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त किया. इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा गवाहों के बयानों को देखने से यह साफ़ है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साफ तौर पर साबित हो सके कि आरोपी ने पीड़ित को जान से मारने या चोट लगने का डर दिखाकर उसकी सहमति ली थी. इस केस में ऐसा कोई सबूत भी नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि विक्टिम ने अपनी सहमति इसलिए दी क्योंकि उसे लगता था कि कानूनी तौर पर शादीशुदा है. इसके उलट, विक्टिम पहले से ही किसी दूसरे व्यक्ति से शादीशुदा थी और प्रेग्नेंट भी थी. इस केस में यह भी साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि विक्टिम की उम्र 18 साल से कम थी. इसके अलावा, यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि विक्टिम अपनी सहमति नहीं बता पाई थी. विक्टिम के कोर्ट में दिए गए बयानों को देखने से यह साफ है कि आरोपी ने सहमति से विक्टिम के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए थे. एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्ज़ी और सहमति से बनाए गए फिजिकल रिलेशन रेप का जुर्म नहीं बनता है. इसके साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज किया है.