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छत्तीसगढ़ के सरकारी महाविद्यालयों में 700 नए पदों पर भर्ती की शुरुआत

छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ सहायक प्राध्यापक के 625, ग्रंथपाल के 50 एवं क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर होगी नियुक्ति रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण एवं सहायक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न शैक्षणिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। विभाग द्वारा सहायक प्राध्यापक के 625 पद, ग्रंथपाल के 50 पद तथा क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों का निर्धारण करते हुए उनका विस्तृत रोस्टर ब्रेक-अप भी तैयार कर लिया है। भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को 24 फरवरी 2026 को विस्तृत जानकारी के साथ पत्र भी भेजा जा चुका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के हिन्दी, अंग्रेजी, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, भौतिक शास्त्र, गणित, रसायन शास्त्र, वनस्पति शास्त्र एवं प्राणीशास्त्र के 50-50 पदों, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगोल के 25-25 पदों, कम्प्यूटर एप्लीकेशन के 15, वाणिज्य के 75, विधि के 10 पदों पर भर्ती के साथ ही क्रीड़ा अधिकारी के 25 पद तथा ग्रंथपाल के 50 पदों सहित कुल 700 पदों पर भर्ती की जाएगी। विभाग द्वारा इन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता, भर्ती नियम, श्रेणीवार पदों की संख्या, परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम तथा विज्ञापन प्रारूप भी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को प्रेषित कर दिया गया है। आयोग द्वारा आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के पश्चात भर्ती संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्ति से राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ता मिलेगी तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य के महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा प्रत्येक स्वीकृत पद के विरुद्ध अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था सहायक प्राध्यापक एवं प्राध्यापक पदों के साथ-साथ ग्रंथपाल तथा क्रीड़ा अधिकारी के पदों पर भी लागू है, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की शैक्षणिक बाधा का सामना न करना पड़े। विभाग द्वारा नियुक्त अधिकांश अतिथि शिक्षक पीएच.डी. उपाधिधारी हैं तथा नेट एवं सेट जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाओं से योग्य हैं। ये शिक्षक वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रदान कर रहे हैं तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

अन्नदाताओं के खातों में पहुंची सम्मान की राशि: किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्यरत है डबल इंजन सरकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने असम की राजधानी गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किश्त जारी की। इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18 हजार 640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान योजना राशि अंतरण एवं पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश के किसान भाइयों और बहनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को हर वर्ष तीन किश्तों में कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसानों के परिश्रम और उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 हजार 283 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को बोनस राशि प्रदान की गई और 13 लाख किसानों के खातों में 3 हजार 716 करोड़ रुपये अंतरित किए गए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि होली से पहले अंतरित की गई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के लिए कृषि पंपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए इस वर्ष के बजट में 5 हजार 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से दो वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना भी शुरू की गई है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती की ओर भी ध्यान देने की अपील की, जिससे पानी की बचत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। धरसीवां विधायक  अनुज शर्मा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बधाई दी। इस अवसर पर विधायक  अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, कृषि विभाग के संचालक  राहुल देव,  छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के एमडी  अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में मिशन कर्मयोगी को गति देने की पहल, राज्य स्तरीय समिति की पहली बैठक 17 मार्च को

नवा रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत राज्य में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को गति देने तथा विभागों के मध्य बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित “छत्तीसगढ़ राज्य क्षमता निर्माण क्रियान्वयन एवं समन्वय समिति” की पहली बैठक 17 मार्च 2026 को अपराह्न 4 बजे मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाइब्रिड मोड (भौतिक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) में आयोजित होगी। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के प्रशासनिक मार्गदर्शन में गठित यह समिति राज्य में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने, विभागों में संचालित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने तथा क्षमता निर्माण को संस्थागत रूप देने के उद्देश्य से कार्य करेगी। राज्य नोडल अधिकारी (मिशन कर्मयोगी – iGOT), सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार बैठक में राज्य के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा  iGOT डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के उपयोग की स्थिति की समीक्षा की जाएगी तथा विभिन्न विभागों में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक के एजेंडा में राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों (ATI एवं अन्य) की भूमिका को सुदृढ़ करने, डिजिटल लर्निंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा तथा राज्य स्तर से प्राप्त सुझावों को संकलित कर आगामी राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के लिए अनुशंसाएँ तैयार करना भी शामिल है। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी शामिल होंगे।

जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि

रायपुर जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसे बस्तर जिले ने जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य पोर्टल द्वारा 11 मार्च 2026 तक जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिला आयुष्मान भारत और वय वंदन कार्ड वितरण के मामले में प्रदेश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो गया है। कठिन रास्तों और भाषाई विविधताओं के बावजूद जिला प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम है कि आज बस्तर स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कई विकसित और शहरी जिलों को पीछे छोड़ते हुए सफलता की नई इबारत लिख रहा है यह प्रगति मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की बस्तर में सुविधाओं के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि       बस्तर की इस अभूतपूर्व सफलता की पटकथा लिखने में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी के अधिकांश पदों पर महिलाओं की नियुक्ति है, जिन्होंने अपनी संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से इस अभियान को जन-आंदोलन बना दिया है। इन महिला स्वास्थ्य अधिकारियों – कर्मचारियों ने हाट-बाजारों से लेकर सुदूर दुर्गम गाँवों तक पहुँचने की रणनीति अपनाई, जिससे भाषाई और भौगोलिक बाधाएं भी विकास की राह नहीं रोक सकीं। जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि     आयुष्मान भारत योजना के तहत शत-प्रतिशत कवरेज की दिशा में बढ़ते हुए बस्तर ने अब तक 98.2 प्रतिशत आबादी को सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है। जिले के कुल निर्धारित 7,87,364 सदस्यों के लक्ष्य के मुकाबले 7,73,468 कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो न केवल जिले की प्रशासनिक सजगता को दर्शाता है बल्कि राज्य के औसत 90.8 प्रतिशत से भी कहीं अधिक है। विशेष रूप से पारीवारिक कवरेज के मामले में तो बस्तर ने अपने लक्ष्य को पार करते हुए 116.4 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है, जो इस बात का प्रमाण है कि जिले का हर परिवार अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में आ चुका है।        वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी वय वंदन कार्ड योजना में भी बस्तर का प्रदर्शन स्वर्णिम रहा है। जिले ने न केवल अपने लिए निर्धारित 13,640 कार्डों के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त किया, बल्कि 103.8 प्रतिशत की शानदार प्रगति के साथ अब तक 14,156 कार्ड जारी किए हैं। वर्तमान में बस्तर इस श्रेणी में समूचे छत्तीसगढ़ में तीसरे स्थान पर काबिज है। पिछले सात दिनों के भीतर जिले में लगभग 300 से ज्यादा नए कार्ड जारी किए गए हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने का यह अभियान अभी भी पूरी ऊर्जा के साथ जारी है।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग मंत्री गजेन्द्र यादव ने इस बजट केे लिए सदन के सदस्यों से सुझाव भी लिए

रायपुर  विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव ने राज्य की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत 1221 करोड़ 26 लाख 45 हजार रुपये का बजट मांग विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। विधि मंत्री  गजेंद्र यादव ने बताया कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए, अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर न्यायालय भवनों तथा न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 88 करोड़ 63 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव ने बताया कि राज्य में न्यायालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है, जिसके लिए इस वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। न्यायपालिका के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा तालुका विधिक सेवा समितियों के माध्यम से विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य विचाराधीन बंदियों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जरूरतमंद लोगों तक न्याय पहुंचाना है। इन योजनाओं के संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है तथा ए.डी.आर. सेंटर के निर्माण के लिए 2 करोड़ 40 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। मंत्री  यादव ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं, बच्चों तथा विचाराधीन बंदियों सहित पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2025 में कुल 94 हजार 959 पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ बिलासपुर से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए 100 नवीन पदों के सृजन हेतु 9 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर में नवीन एन.आई.ए. कोर्ट की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  यादव ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न न्यायालयों में नए पदों का सृजन भी किया गया है, जिनमें व्यवहार न्यायालय धमधा (दुर्ग) के लिए 06 पद, जिला न्यायालय बेमेतरा के लिए 06 पद, जिला न्यायालय महासमुंद के लिए 55 पद, जिला न्यायालय बिलासपुर के लिए 18 पद, जिला न्यायालय पंखाजूर-कांकेर के लिए 07 पद, जिला न्यायालय कोरबा के लिए 09 पद, जिला न्यायालय जगदलपुर के लिए 06 पद तथा जिला न्यायालय जांजगीर-चांपा के लिए 03 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिविल जिला न्यायालय दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा (अम्बिकापुर) एवं बस्तर (जगदलपुर) में 40 विभिन्न पदों के सृजन तथा प्रत्येक जिला न्यायालय में एक-एक अनुवादक का पद के मान से कुल 23 पदों के सृजन हेतु 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  यादव ने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित लोगों को आपराधिक मामलों में सक्षम एवं प्रभावी निःशुल्क कानूनी सेवा प्रदान करने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय मूट-कोर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय के स्थापना व्यय के लिए 13 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह बजट राज्य में न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने, न्यायालयों के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने तथा समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा में बड़ा निवेश, नए स्कूल, डिजिटल पढ़ाई

रायपुर   छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22 हजार 466 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। विधानसभा में बजट भाषण के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने कहा कि यह बजट राज्य में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया है। मंत्री  यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से राज्य के हर बच्चे को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार की पीएम  योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस योजना के लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन स्कूलों में ग्रीन स्कूल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और कैरियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही शिक्षकों को उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और विद्यार्थियों की प्रगति का आंकलन होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से किया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करेगी। इन विद्यालयों के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होंगे, जिससे ग्रामीण विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। बस्तर संभाग के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार ने एजुकेशन सिटी स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके तहत ओरछा (अबुझमाड़), नारायणपुर और जगरगुंडा (सुकमा) में एजुकेशन सिटी स्थापित करने के लिए 9 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे सुदूर वनांचल के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी और वे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।  यादव ने बताया कि सरकार ने स्कूलों की अधोसंरचना को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया है। इसके लिए 105 करोड़ 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत 500 प्राथमिक स्कूल, 100 पूर्व माध्यमिक स्कूल, 50 हाई स्कूल और 50 हायर सेकेंडरी स्कूलों के नए भवन बनाए जाएंगे तथा पुराने भवनों का रखरखाव किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण में पढ़ाई करने का अवसर मिल सके। उन्हांेने कहा कि शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए नवा रायपुर में विभाग का एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 5 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस भवन में लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड, शिक्षा आयोग, पाठ्य पुस्तक निगम और माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित कई महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 5000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती करने की घोषणा की है। इसके साथ ही 4000 से अधिक पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। शिक्षकों की भर्ती अक्टूबर और नवंबर 2026 में परीक्षा आयोजित कर की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत राज्य के शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों तथा पंजीकृत मदरसों के लगभग 30 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिलेगा। स्कूलों में किचन गार्डन विकसित करने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके।  यादव ने बताया कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई पहल की हैं। विद्या समीक्षा केंद्र और एचआरएमआईएस पोर्टल के माध्यम से लगभग 1 लाख 80 हजार शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है। साथ ही विद्यार्थियों की डिजिटल मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिसमें क्यूआर कोड और यूनिक आईडी के जरिए दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन किया जा सकेगा। इसके अलावा पीएम ई-विद्या कार्यक्रम के तहत डीटीएच चैनलों के माध्यम से कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को विषयवार ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। प्रतिदिन छह विषयों का प्रसारण किया जाता है, जिसे दिनभर में चार बार दोहराया जाता है। भविष्य में दो-तरफा संवाद के लिए मोबाइल एप विकसित करने की भी योजना है। स्कूलों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से प्रोजेक्टर और इंटरनेट की सहायता से विद्यार्थियों को वीडियो आधारित शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।  राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए योग शिक्षा, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और रेडक्रॉस जैसी गतिविधियों को सभी स्कूलों में शुरू करने की योजना है। साथ ही प्रतिदिन अंतिम कालखंड में खेलकूद को अनिवार्य किया जाएगा और विद्यार्थियों को सेना में अग्निवीर बनने के लिए शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालयों के लिए 800 करोड़ रुपये, आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए 300 करोड़ रुपये, छात्रवृत्ति योजना के लिए 236 करोड़ 50 लाख रुपये, निःशुल्क गणवेश वितरण योजना के लिए 55 करोड़ रुपये, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना के लिए 50 करोड़ रुपये और सरस्वती निःशुल्क साइकिल योजना के लिए 66 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

रेशम से माटीकला तक : ग्रामोद्योग बजट से लाखों ग्रामीणों को रोजगार का संबल

रायपुर  ग्रामोद्योग मंत्री  गजेंद्र यादव से संबंधित ग्रामोद्योग विभाग के लिए  वर्ष 2026-27 हेतु 228 करोड़ 84 लाख 90 हजार रूपए की अनुदान मांगों को आज विधानसभा में पारित किया गया। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी तथा विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री  यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों, शिल्पियों और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा परंपरागत कला एवं संस्कृति का संरक्षण प्रदान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा  यादव ने बताया कि रेशम, हाथकरघा, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड तथा माटीकला बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 3 लाख 15 हजार 350 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप स रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। रेशम प्रभाग ग्रामोद्योग मंत्री ने बताया कि प्रदेश में टसर रेशम के उत्पादन एवं विस्तार को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026-27 में नैसर्गिक एवं पालित टसर कोसा उत्पादन विकास योजना के अंतर्गत 59 करोड़ 82 लाख का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से राज्य में 21 करोड़ 59 हजार टसर ककून उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। मलबरी रेशम विकास एवं विस्तार को प्रोत्साहन देने के लिए मलबरी रेशम विस्तार कार्यक्रम एवं उत्प्रेरण विकास योजना के तहत 4 करोड़ 25 लाख का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही प्रशिक्षण एवं अनुसंधान योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में 76 लाख का बजट रखा गया है, जिसके माध्यम से 1450 हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। हाथकरघा प्रभाग प्रदेश के बुनकरों को प्रशिक्षण, उन्नत करघों की उपलब्धता, कर्मशाला भवन, गोदाम निर्माण तथा डिज़ाइन विकास जैसे कार्यों के लिए समग्र हाथकरघा विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 5 करोड़ 3 लाख 54 हजार की राशि स्वीकृत कर 1206 बुनकरों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए  5 करोड़ 60 लाख का प्रावधान किया गया है। बुनकर वर्कशेड-सह-आवास योजना मंत्री  यादव ने बताया कि आवासहीन बुनकरों को आवास उपलब्ध कराने के लिए बुनकर वर्कशेड-सह-आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 4 करोड़ 90 लाख की राशि स्वीकृत कर 196 बुनकरों को लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2026-27 के लिए भी 4 करोड़ 90 लाख का प्रावधान रखा गया है। इसके अतिरिक्त शासकीय वस्त्र प्रदाय के माध्यम से 335 बुनकर समितियों के 47 हजार 640 बुनकरों को रोजगार मिल रहा है। वहीं गणवेश वस्त्रों की सिलाई से 1921 महिला स्व-सहायता समूहों की 23 हजार 052 महिलाओं को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध हो रहा है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ग्रामोद्योग मंत्री ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 502 इकाइयों को 11 करोड़ 3 लाख की परियोजना स्वीकृति दी गई, जिसमें से 3 करोड़ 67 लाख 81 हजार की अनुदान सहायता प्रदान की गई। वर्ष 2026-27 में परिवार आधारित इकाइयों की स्थापना के लिए 8 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड मंत्री  यादव ने बताया कि प्रदेश के पारंपरिक शिल्प जैसे बेलमेटल, लौह शिल्प, बांस शिल्प, काष्ठ शिल्प, पत्थर शिल्प, गोदना शिल्प, भित्ती चित्र, तुम्बा शिल्प, टेराकोटा शिल्प, कालीन शिल्प एवं एम्ब्रॉयडरी को प्रोत्साहन देने के लिए हस्तशिल्प विकास बोर्ड कार्य कर रहे हैं। शिल्पियों को प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण एवं मशीनरी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2026-27 में 3 करोड़ 90 लाख का प्रावधान किया गया है। पी.एम. एकता मॉल  यादव ने बताया कि प्रदेश की पारंपरिक कला एवं संस्कृति पर आधारित उत्पादों तथा “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” के विपणन को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में पी.एम. एकता मॉल की स्थापना की गई है। इसके लिए वर्ष 2026-27 में 93 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड ग्रामोद्योग मंत्री  यादव ने बताया कि प्रदेश के कुम्हारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से माटीकला बोर्ड द्वारा पंजीकृत शिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक 9464 विद्युत चाकों का वितरण किया जा चुका है। वर्ष 2026-27 में इसके लिए 3 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। ग्लेजिंग यूनिट उन्होंन बताया कि माटी शिल्प उत्पादों में मूल्य संवर्धन के लिए राज्य में 5 ग्लेजिंग यूनिट संचालित की जा रही हैं। इसके संचालन तथा जिला जशपुर के ग्राम गोरिया, विकासखंड कुनकुरी में नई ग्लेजिंग यूनिट की स्थापना के लिए वर्ष 2026-27 में 4 करोड़ 30 लाख का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण उद्योगों से रोजगार और संस्कृति का संरक्षण मंत्री  गजेंद्र यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि ग्रामोद्योग विभाग प्रदेश के पारंपरिक कुटीर उद्योगों, शिल्पकलाओं तथा ग्रामीण रोजगार और स्व-रोजगार को सुदृढ़ करते हुए न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं

रायपुर नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। राज्य की दो महिलाओं, बिलासपुर नगर निगम की मती रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की मती हेमलता खत्री ने केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल की मौजूदगी में देशभर की 1000 अमृत मित्रों के साथ अपने कार्यों के अनुभव साझा किए। नई दिल्ली में आयोजित अमृत मित्र महोत्सव में शामिल हुईं राज्य की 75 महिलाएं केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के तहत शहरी जल प्रबंधन एवं सतत विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने इस राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें छत्तीसगढ़ की 75 “अमृत मित्र” महिलाओं ने भागीदारी की। ये महिलाएं राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचना संचालन तथा सामुदायिक जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने विगत 11 मार्च को रायपुर रेलवे स्टेशन में हरी झंडी दिखाकर महिलाओं के इस दल को नई दिल्ली के लिए रवाना किया था।  “अमृत मित्र महोत्सव” में भागीदारी करने वाली स्वसहायता समूहों की ये महिलाएँ 'वीमेन फॉर ट्री' अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण, हरित क्षेत्रों के संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ की ये “अमृत मित्र” महिलाएँ अपने-अपने शहरों में तकनीकी और सामुदायिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं। घरों तक सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने जल गुणवत्ता के परीक्षण, जल उपचार संयंत्रों (WTP) और वितरण नेटवर्कों के संचालन तथा रखरखाव में सहयोग के साथ ही जल संरक्षण तथा “कचरे से कंचन” जैसे अभियानों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने का महत्वपूर्ण काम ये महिलाएं कर रही हैं। देशभर के स्वसहायता समूहों के सर्वोत्तम अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के इस राष्ट्रीय मंच को छत्तीसगढ़ की दो अमृत मित्रों ने भी साझा किया। बिलासपुर की मती रुक्मिणी गोस्वामी ने महोत्सव में कहा कि हम केवल पौधे ही नहीं लगा रहे हैं, बल्कि अपने शहरों के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम भी कर रहे हैं। इस पहल से हमें आजीविका का अवसर भी मिला है जिससे हम अपने परिवार की आय में योगदान दे पा रहे हैं। वहीं लोरमी की मती हेमलता खत्री ने राष्ट्रीय मंच पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जल संरक्षण के लिए वृहद पैमाने पर हम लोग वृक्षारोपण करने के साथ ही अपने बच्चे की तरह पौधों की देखभाल और रक्षा कर रहे हैं। इन पौधों को बढ़ते हुए देखकर हमें बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है।  "अमृत मित्र महोत्सव के लिए चयनित महिलाओं को बहुत-बहुत बधाई… नई दिल्ली के भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने कार्यों और अनुभवों को प्रस्तुत करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। 'वीमेन फॉर ट्री – अमृत मित्र योजना' से महिला समूहों को वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका का भी अवसर मिल रहा है। इस पहल से उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। रोजगार के साथ पर्यावरण संरक्षण के कार्य में योगदान देने का संतोष भी प्राप्त हो रहा है।" – उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव  

प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में भू-जल संरक्षण कार्यों का किया अध्ययन प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों ने

रायपुर छत्तीसगढ़ में जल एवं मृदा संरक्षण के क्षेत्र में वन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण बनते जा रहे हैं। इन्हीं कार्यों के अध्ययन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून से भारतीय वन सेवा (IFS) वर्ष 2025-26 बैच के 133 प्रशिक्षु अधिकारी अध्ययन दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। यह दल 8 से 15 मार्च तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वन विभाग द्वारा किए गए भू-जल संरक्षण और जल संवर्धन कार्यों का अध्ययन कर रहे हैं। प्रशिक्षण के पहले चरण में 9 मार्च को दक्षिण सिंगपुर परिक्षेत्र के पम्पार नाला का भ्रमण कराया गया। यहां अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार तकनीकी उपायों के माध्यम से मिट्टी के कटाव को रोका गया और जल स्तर बढ़ाने में सफलता मिली। इस दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शालिनी रैना और मुख्य वन संरक्षक मणिवासगन एस. सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशिक्षु अधिकारियों को क्षेत्रीय कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। धमतरी वनमंडलाधिकारी श्री जाधव श्रीकृष्ण ने बताया कि पम्पार नाला क्षेत्र में ब्रशवुड चेकडेम, लूज बोल्डर संरचना और गेबियन संरचना बनाए गए हैं, जिनसे मिट्टी का कटाव कम हुआ है। साथ ही ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी और वन्यजीवों को सालभर जल उपलब्ध होने लगा है। प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें आठ समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका मार्गदर्शन राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनुभवी डीएफओ कर रहे हैं। अध्ययन दौरे के दौरान दल कुसुमपानी, कांसा और साजापानी नालों का भी भ्रमण करेगा तथा वनधन विकास केंद्र, दुगली में वन प्रबंधन से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेगा। यह अध्ययन दौरा इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और मृदा संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास देश के लिए एक मॉडल बनते जा रहे हैं।

सहायक उपकरण योजना से जीवन में आ रही सहजता

रायपुर प्रदेश में दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सुगम और सम्मानजनक बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर सहायता प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत मोहला जिले के ग्राम सोमटोला निवासी 80 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक एवं मांझी समाज प्रमुख  महाजन अठभैया को श्रवण यंत्र और वॉकिंग स्टिक प्रदान की गई। जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह और कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने उन्हें सहायक उपकरण प्रदान किए। श्रवण यंत्र और वॉकिंग स्टिक प्राप्त कर  महाजन अठभैया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और प्रशासन के प्रति आभार जताया।  शासन की योजनाओं का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक सहायता और सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस प्रकार की योजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो उनके जीवन को अधिक सरल और सम्मानजनक बनाती हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत इस वर्ष प्रदेश में अब तक 1 हजार से अधिक दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण और कृत्रिम अंग प्रदान कर लाभान्वित किया गया है। इनमें श्रवण यंत्र, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, व्हीलचेयर और वॉकिंग स्टिक सहित अन्य आवश्यक उपकरण शामिल हैं। राज्य शासन का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी पात्र दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे, ताकि वे अपने दैनिक जीवन को अधिक सहजता और आत्मसम्मान के साथ जी सकें। इसके लिए प्रशासन द्वारा लगातार शिविरों और कार्यक्रमों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। यह पहल जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद और संबल का संचार कर रही है।