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आजीविका मिशन ने बदली किस्मत, धमतरी की योगेश्वरी देवांगन बनीं प्रेरणादायक महिला

धमतरी : आजीविका मिशन से बदली तस्वीर: चर्रा की योगेश्वरी देवांगन बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया  धमतरी दीनदयाल अन्त्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। परिणामस्वरूप कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी धमतरी जिले के विकासखंड कुरूद के ग्राम चर्रा की श्रीमती योगेश्वरी देवांगन की है, जो आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर पाईं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।   योगेश्वरी देवांगन जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। आजीविका मिशन के तहत कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में योगेश्वरी देवांगन, अध्यक्ष जय माँ परमेश्वरी स्वयं सहायता समूह ग्राम चर्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित छठवें जेण्डर संवाद के लिए किया गया था ।इस संवाद में वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लैंगिक निवेश क्यों आवश्यक है” विषय पर अपने अनुभव साझा किए ।   योगेश्वरी देवांगन बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार की आजीविका कृषि और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और जीवन दोनों में बड़ा बदलाव आया।   राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने बैंक से ऋण प्राप्त किया तथा पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र और आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की स्थापना की। शुरुआत में सामाजिक दबाव और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।   आज योगेश्वरी देवांगन का मुर्गी फार्म सफल उद्यम बन चुका है। उनके फार्म में तैयार होने वाली मुर्गियां और चूजे देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। उनके  फ़ार्म में करीब 7 मुर्गी की नस्लें, बटेर, बत्तख, गिनी फाउल, टर्की  है । अंडों से बच्चे निकालने की मशीन है।  उन्होंने  बताया कि शुरू में मालूम नहीं था कहा किस बाजार में बेचना है । उन्होंने मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया है । देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से वे अन्य ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।    योगेश्वरी देवांगन का सपना है कि उनके समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं। इसी उद्देश्य से वे समूह की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही भविष्य में वे खरगोश पालन जैसे नए उद्यम की भी शुरुआत करने की योजना बना रही हैं।    योगेश्वरी देवांगन की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रख सकती हैं। आज वे अपने गांव और जिले की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और संघर्ष से सफलता पाने की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।

रायपुर में जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से काम शुरू

रायपुर : मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत वर्षों से जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीरों को मिलेगी सुरक्षित आवागमन की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सिंगीबहार से कछुआकानी मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से पुल की जर्जर स्थिति के कारण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। बताया गया है कि सिंगीबहार–कछुआकानी मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पुल के खराब होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही संबंधित विभाग ने स्थल पर पहुंचकर पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पुल निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या का अब समाधान होने जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल बनने से आवागमन सुरक्षित होने के साथ ही आसपास के गांवों के विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में मौसम का यू-टर्न: बस्तर में बारिश और तेज हवा की चेतावनी

रायपुर छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से बस्तर संभाग के कई जिलों में शुक्रवार से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 13 से 15 मार्च के बीच बस्तर क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यदि बारिश होती है तो तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार और झारखंड के बीच समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बादल छाने और बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं। जगदलपुर, बीजापुर समेत बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। प्रदेश में बढ़ रही गर्मी फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजनांदगांव में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि रायपुर और बिलासपुर संभाग के अधिकांश जिलों में पारा लगभग 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वहीं न्यूनतम तापमान के मामले में अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान करीब 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि राज्य में मार्च के दूसरे और तीसरे पखवाड़े में गर्मी और तेज हो सकती है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई गई है।

राजस्व विभाग को मिला 3502 करोड़ से ज्यादा का बजट, मंत्री टंक राम वर्मा की अनुदान मांगें पारित

मंत्री  टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित राजस्व सेवाओं में डिजिटल पारदर्शिता और आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया बल मुंगेली जिला के विजयपुर और सरगुजा जिला के देवगढ को उप तहसील बनाने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु कुल 4 हजार 808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इसमें भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए 2,206 करोड़ 2 लाख 97 हजार रुपए, राजस्व विभागीय व्यय के लिए 20 करोड़ 62 लाख 64 हजार रुपए, पुनर्वास के लिए 2 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत हेतु 1,272 करोड़ 99 लाख 2 हजार रुपए तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1,306 करोड़ 14 लाख 83 हजार रुपए शामिल हैं।      अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में 3,502 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, ताकि नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।      राजस्व मंत्री  वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। डिजिटल ऋण पुस्तिका, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्जन तथा लोक सेवा गारंटी जैसी व्यवस्थाओं से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है l उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सरकार पूरी तरह सजग है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता देने के लिए राहत और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।       राजस्व प्रशासन में हुए प्रमुख बदलाव      मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत राज्य में जिलों, तहसीलों और राजस्व ढांचे का विस्तार किया गया है। राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इसी प्रकार राजस्व अनुविभाग, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल और पटवारी हल्कों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है। ऑटो डायवर्सन और डिजिटल किसान किताब    मंत्री  वर्मा ने बताया कि सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करते हुए ऑटो डायवर्सन प्रणाली लागू की है, जिसके तहत आवेदन के 15 दिनों के भीतर भूमि का उपयोग परिवर्तन स्वतः हो जाता है। इससे नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है। इसके साथ ही डिजिटल किसान किताब की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे किसानों को भूमि स्वामित्व, ऋण स्थिति और अन्य जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। इससे बैंक से फसल ऋण लेने में भी सुविधा मिल रही है। भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक संबल       मंत्री ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक ग्रामीण व्यवसाय से जुड़े परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में लगभग 4.96 लाख हितग्राहियों को लाभ देने के लिए 496 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 605 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आधुनिक तकनीक से कृषि निगरानी       राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उपहार (UPHAR) योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र की निगरानी और सलाहकारी प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के जरिए फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और आपदा से होने वाले नुकसान का आंकलन किया जाएगा। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को भूमि अधिकार    राजस्व मंत्री ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी को भूमि का अधिकार देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य में लगभग 10.50 लाख हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1.60 लाख लोगों को अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। पंजीयन के साथ स्वतः नामांतरण      मंत्री ने बताया कि राज्य में जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद स्वतः नामांतरण (ऑटो म्यूटेशन) की व्यवस्था लागू की गई है। पंजीयन होते ही जमीन का नामांतरण क्रेता के नाम पर स्वतः हो जाता है, जिससे नागरिकों को लंबी प्रक्रिया और परेशानियों से राहत मिली है।    आपदा प्रबंधन के लिए मजबूत प्रावधान           वर्मा ने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में 588 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) में 50 करोड़ रुपए तथा राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) में 147 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।        मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य डिजिटल राजस्व प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें मंजूर

छत्तीसगढ़ विधानसभा में उच्च शिक्षा विभाग की 1306 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगें पारित शिक्षा सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला  25 महाविद्यालयों के नए भवन बनेंगे रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा के उच्च शिक्षा विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 1306 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित कर दी गई। अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक विकास की आधारशिला है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है। मंत्री  वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 37 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। यह बजट प्रावधान प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता सुधार और अधोसंरचना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।      मंत्री ने बताया कि वंचित क्षेत्रों के लिए वित्तीय संसाधनों में भी वृद्धि की गई है। वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के लिए 230.36 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 249.61 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्रों के लिए 103.10 करोड़ रुपये के प्रावधान को बढ़ाकर 120.23 करोड़ रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने के लक्ष्य के तहत सरकार ने GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) को विकास का प्रमुख स्तंभ बनाया है। वर्ष 2024-25 में राज्य में महाविद्यालयों की संख्या 335 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 343 हो गई है। इसी वर्ष 8 नए स्नातक महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें संगीत, विधि और शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय भी शामिल हैं। नए विषय और महाविद्यालय स्थापना        दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा बढ़ाने के लिए जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर के खड़गवा में बी.एड. (आईटीईपी) तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सुहेला में नए महाविद्यालय की स्थापना के लिए 1.30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरगुजा विश्वविद्यालय में नए विषय शुरू करने तथा रामचंद्रपुर और घरघोड़ा महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उन्नयन के लिए 1.40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 25 नए महाविद्यालय भवन बनेंगे     मंत्री  वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के 25 महाविद्यालयों के लिए नए भवन निर्माण हेतु 2500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा 6 महाविद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 4.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ऑडिटोरियम, छात्रावास और बाउंड्रीवाल निर्माण     उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि कोहका-नेवरा-तिल्दा में ऑडिटोरियम निर्माण, भानुप्रतापपुर में छात्रावास निर्माण और धमतरी महाविद्यालय के छात्रावास में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए कुल 1.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे दूरदराज के विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा। 36 महाविद्यालय बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र     मंत्री ने कहा कि राज्य के चयनित महाविद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना के तहत 36 शासकीय महाविद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। वर्ष 2025-26 में 25 महाविद्यालयों को और वर्ष 2026-27 में 5 महाविद्यालयों के लिए प्रति महाविद्यालय 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। NAAC मूल्यांकन पर जोर      उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। अब तक 200 शासकीय महाविद्यालयों और 5 राज्य विश्वविद्यालयों का NAAC द्वारा सफलतापूर्वक मूल्यांकन कराया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का क्रियान्वयन     मंत्री  वर्मा ने बताया कि राज्य में 335 शासकीय, 321 अशासकीय महाविद्यालयों, 8 राजकीय विश्वविद्यालयों और 18 निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई है। इसके तहत बहुविषयक शिक्षा, मल्टी एंट्री-मल्टी एग्जिट प्रणाली और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया गया है। 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स और 108 जनरिक इलेक्टिव व एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स विकसित किए गए हैं। PM-USHA योजना के तहत सुदृढ़ीकरण        प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) के अंतर्गत 12 शासकीय महाविद्यालयों को प्रति महाविद्यालय 5 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं 3 विश्वविद्यालयों को प्रति विश्वविद्यालय 20 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अलावा बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को MERU (Multidisciplinary Education and Research Universities) योजना के तहत 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है।     लैंगिक समावेशन और समानता पहल (Gender Inclusion and Equity Initiative) के तहत राजनांदगांव, सरगुजा, धमतरी, बलौदाबाजार और कबीरधाम जिलों को महिला शिक्षा और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण के लिए प्रति जिला 10 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।      मंत्री  वर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, समतामूलक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास के साथ राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके।

केंद्र का समर्थन: छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ की सहायता प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए

प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र का अतिरिक्त सहयोग छत्तीसगढ़ को मिली 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता रायपुर  प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति ने वर्ष 2025 के दौरान आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटने, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ जैसी आपदाओं से प्रभावित राज्यों के लिए 1,912.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में केंद्र के इस अतिरिक्त सहयोग के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का आभार माना है।                 केंद्र सरकार द्वारा यह सहायता राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) से जारी की जाएगी, ताकि प्रभावित राज्यों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। समिति के निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की गई है।               केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। आपदा की स्थिति में प्रभावित राज्यों को त्वरित राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।             गौरतलब है कि यह अतिरिक्त सहायता राज्यों को पहले से उपलब्ध कराए गए संसाधनों के अतिरिक्त है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि पहले ही जारी कर दी है। State Disaster Response Fund (SDRF) के तहत 28 राज्यों को 20,735.20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जबकि National Disaster Response Fund (NDRF) के तहत 21 राज्यों को 3,628.18 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।                  इसके अलावा आपदा जोखिम को कम करने और दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने के लिए State Disaster Mitigation Fund (SDMF) से 23 राज्यों को 5,373.20 करोड़ रुपये तथा National Disaster Mitigation Fund (NDMF) से 21 राज्यों को 1,189.56 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

अफीम खेती पर CM विष्णु ने जारी किया निर्देश, बिजली बिल देरी पर किसानों को राहत

रायपुर छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के रोज नए-नए केस सामने आ रहे हैं. पहले दुर्ग में अफीम की खेती का मामला सामने आया था. फिर बलरामपुर के कुसमी में अफीम की खेती पकड़ी गई. अब बलरामपुर के ही तुर्रापानी में दूसरी अवैध अफीम की खेती मिलने की जानकारी आई है. इससे राज्य में हड़कंप मच गया है. विपक्ष की तरफ से लगातार इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी वजह से अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाया है।  CM विष्णुदेव साय ने अपनाया कड़ा रुख मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के सभी कलेक्टर्स को आदेश जारी किया है और उन्हें 15 दिनों के भीतर सर्वे रिपोर्ट देने को कहा है. उनकी तरफ से बताया गया है कि अवैध मादक पदार्थ को लेकर राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. अवैध अफीम की खेती ना हो इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट के साथ प्रमाण पत्र कलेक्टर सौंपेंगे।  मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना भी की शुरू इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजधानी रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की शुरुआत की. यह योजना उन लोगों के लिए है, जो आर्थिक समस्याओं की वजह से बिजल का बिल नहीं चुका पाए. योजना के तहत लगभग 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली आज हर घर की आवश्यकता है और सरकार चाहती है कि किसी परिवार की रोशनी सिर्फ बिल बकाया होने के कारण बंद न हो।  बलरामपुर जिले के तुर्रापानी में दूसरी अवैध अफीम की खेती मिलने की जैसे ही सूचना मिली. पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया. बताया जा रहा है कि लगभग एक से डेढ़ एकड़ में अवैध अफीम की खेती मिली है. पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. जिले की संयुक्त टीम जांच में जुटी है।  दुर्ग में अफीम की खेती मामले में चौथा आरोपी हुआ गिरफ्तार अब राज्य प्रशासन अफीम की खेती को लेकर सतर्क हो गया है और पुलिस की तरफ से बड़ी कार्रवाई की जा रही है. दुर्ग में अफीम की खेती मामले में पुलिस ने चौथे आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है. दुर्ग के ग्राम समोदा झेंझरी के मध्य खेत में अफीम की खेती की जा रही थी. लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में अफीम के पौधे लगाए थे. जब्त पौधों की कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई जा रही है।   

कोरंधा से 1.75 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम जब्त, किसान बोले- गैर कानूनी होने की जानकारी नहीं थी

बलरामपुर  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कोरंधा में पुलिस ने करीब ढाई एकड़ में लगी अफीम उखाड़कर जब्त की है। यहां से 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनका वजन 18 क्विंटल है। इनकी अनुमानित कीमत पौने दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामला कोरंधा थाना क्षेत्र का है। दरअसल, बुधवार शाम को खजूरी गांव में अफीम की खेती का पता चला था। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फसल उखाड़कर जब्त की गई। तीन ट्रैक्टरों में 285 बोरे अफीम को कोरंधा थाना लाया गया। इस मामले में अफीम की खेती करने वाले 2 किसानों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल, हिरासत में लिए गए किसानों से पुलिस पूछताछ कर रही है। उनका कहना है कि वे अफीम को नहीं पहचानते थे। इस कारण उन्हें नहीं पता था कि यह गैर कानूनी है। जांच में सामने आया कि किसान ने हर साल 6 हजार रुपए देने की शर्त पर जमीन ली थी। बता दें कि कुसमी के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है। झारखंड के मजदूर करते थे पहरेदारी अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। इनमें सहादुर नगेशिया के खेत में लगी अफीम की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है, उसके खेत में लगे अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे हुए मिले, जिससे स्पष्ट है कि उनसे काफी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी थी। टुईला राम के खेत में बोई गई अफीम की फसल में अभी डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था और उनसे अफीम निकालने का काम किया जा रहा था। हालांकि, यहां से निकाली गई अफीम बरामद नहीं हो सकी है। दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग अफीम की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए। किसानों का कहना है कि वे अफीम की फसल को पहचानते नहीं थे, इसलिए उन्हें यह भी पता नहीं था कि इसकी खेती गैरकानूनी है। इसके अलावा अफीम की खेती के लिए पास के प्राकृतिक जल स्रोत से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए पाइप लगाकर खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की गई थी।

छत्तीसगढ़ के IPS अमित कुमार को बड़ी उपलब्धि, केंद्र में ADG के लिए इम्पैनलमेंट

रायपुर. छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IPS अफसर अमित कुमार को केंद्र सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) रैंक के लिए इम्पैनल कर लिया है। केंद्र सरकार ने अपने हालिया आदेश में साल 1998 बैच के कुल 30 आईपीएस अधिकारियों को ADG या समकक्ष पदों के लिए पैनल में शामिल किया है, जिसमें अमित कुमार का नाम भी शामिल है। यह राज्य पुलिस के लिए भी गर्व की बात मानी जा रही है। वर्तमान में संभाल रहे हैं इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी IPS अमित कुमार फिलहाल छत्तीसगढ़ पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें जनवरी 2024 में यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राज्य की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र से जुड़े मामलों में IPS अमित कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इंटेलिजेंस विंग में उनकी नियुक्ति के बाद कई संवेदनशील मामलों में पुलिस को समय रहते जानकारी और रणनीति बनाने में मदद मिली है। पहले भी केंद्र में निभा चुके हैं महत्वपूर्ण भूमिका IPS अमित कुमार का प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। वे पहले भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर CBI में संयुक्त निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने सीबीआई में रहते हुए कई अहम जांचों में भूमिका निभाई थी। इसी वजह से उन्हें एक अनुभवी और प्रभावशाली पुलिस अधिकारी के रूप में देखा जाता है। कई जिलों में एसपी के रूप में दे चुके हैं सेवाएं अमित कुमार राज्य में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान कई जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने रायपुर, बीजापुर, राजनांदगांव, जांजगीर और दुर्ग जैसे जिलों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने इन जिलों में रहते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत करने और क्राइम कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्रपति पुलिस पदक से हो चुके हैं सम्मानित IPSअमित कुमार की ईमानदार छवि और प्रशासनिक दक्षता के लिए उन्हें कई बार सराहना भी मिल चुकी है। उनके शानदार कार्य और सेवाओं को देखते हुए जनवरी 2025 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Police Medal for Distinguished Service) से सम्मानित भी किया गया था।

TET अनिवार्यता के विरोध में 15 को जुटेंगे 80 हजार शिक्षक

रायपुर. छत्तीसगढ़ में TET अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है। 15 मार्च को रायपुर में राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय में शिक्षक संगठनों की बैठक होगी। इसमें करीब 80 हजार शिक्षकों पर पड़ने वाले असर और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। इसी मुद्दे को लेकर 15 मार्च को रायपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक राजपत्रित कर्मचारी संघ कार्यालय में होगी और दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। बैठक में प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि सभी संगठन मिलकर इस मुद्दे पर सामूहिक निर्णय ले सकें। प्रदेशभर के संगठनों को बुलाया गया सूत्रों के अनुसार इस बैठक में प्रदेश के अलग अलग जिलों से शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य TET अनिवार्यता से जुड़ी संभावित समस्याओं और उसके समाधान पर चर्चा करना है। इसके साथ ही सरकार के सामने अपनी मांगों को रखने की रणनीति भी तय की जाएगी।' 80 हजार शिक्षकों पर पड़ सकता है असर बताया जा रहा है कि यदि TET को अनिवार्य किया गया तो प्रदेश के करीब 80 हजार शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि शिक्षक संगठन इस मुद्दे को लेकर एकजुट होते नजर आ रहे हैं। बैठक में यह भी तय किया जा सकता है कि यदि शिक्षकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है। बैठक में तय होगी आगे की रणनीति 15 मार्च को होने वाली इस बैठक को शिक्षकों के भविष्य के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में यह तय किया जाएगा कि शिक्षक संगठन सरकार से क्या मांग रखेंगे और आगे इस मुद्दे को लेकर किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी।