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मंत्री केदार कश्यप की माता का निधन, परिवार में शोक की लहर

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप की माता मानकी देवी कश्यप का रविवार को निधन हो गया. बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ्य थी. इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रविवार को मंत्री केदार के गृहग्राम भानपुरी फरसागुड़ा में उनकी मां का अंतिम संस्कार किया जाएगा. मंत्री केदार कश्यप ने सोशल मीडिया फेसबुक पर उनके मां की निधन की जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि “अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरी पूज्य माताजी मनकी देवी कश्यप हमारे बीच नहीं रहीं. दोपहर 03.30 बजे तक गृहग्राम भानपुरी फरसागुड़ा निवास में उनके अंतिम दर्शन कर सकते हैं.” रविवार को 4 बजे बस्तर जिले के गृहग्राम भानपुरी फरसागुड़ा में मंत्री केदार कश्यप की मां मानकी देवी का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. सीएम साय ने जताया शोक     कैबिनेट के साथी श्री केदार कश्यप जी की पूज्य माताजी श्रीमती मनकी देवी कश्यप जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्री केदार कश्यप के माता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने श्रद्धांजली अर्पित करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की.

धर्मांतरण के बाद अंतिम संस्कार पर उठा विवाद थमा, बड़े तेवड़ा मामले में सरपंच का खुलासा

कांकेर  कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र अंतर्गत बड़े तेवड़ा गांव में धर्मांतरित परिवार के एक व्यक्ति के शव के कफन-दफन को लेकर बीते चार दिनों से चला आ रहा विवाद अब शांत हो गया है. इस पूरे मामले में धर्मांतरित सरपंच राजमन सलाम का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी है. सरपंच राजमन सलाम ने वीडियो बयान में बताया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने गांव के प्रमुख लोगों से परंपरागत रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराने की बात कही थी, लेकिन विरोध के चलते उन्हें अपने निजी पट्टे की जमीन पर अंतिम संस्कार करना पड़ा. इसके बाद 16 और 17 दिसंबर को गांव में रैली निकालकर विरोध किया गया, जिसके दौरान मारपीट की घटना हुई. इस घटना में उनके बड़े भाई और भाभी गंभीर रूप से घायल हो गए. सरपंच ने आरोप लगाया कि 18 दिसंबर को तनाव की स्थिति के बीच शव को कब्र से निकालकर ले जाया गया. साथ ही प्रार्थना भवन और उनके घर में आगजनी की गई. आगजनी की घटना में घर में रखा सोना-चांदी, करीब 4 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए. इधर, इस मामले पर कांकेर जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष व आदिवासी नेता ईश्वर कावड़े ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि उन्हें ईसाई मिशनरियों से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन आदिवासी समाज की परंपराओं, देवी-देवताओं, पेन-पुरखों और आंगादेव के अपमान को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के दौरान लोगों से देवी-देवताओं को त्यागने और उन्हें अविश्वासी कहे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो चिंताजनक हैं. ईश्वर कावड़े ने स्पष्ट किया कि यदि किसी धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव की परंपराओं के अनुसार किया जाता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन परंपराओं के विपरीत तरीके से किए गए अंतिम संस्कार का विरोध किया जाएगा. उन्होंने धर्मांतरण कर चुके लोगों से मूल धर्म में लौटने की अपील भी की. जानकारी के अनुसार, मृतक की मृत्यु के बाद गांव में बैठक हुई थी, जिसमें गायता, पुजारी और पटेल ने कहा था कि यदि अंतिम संस्कार गांव की रीति-रिवाज से किया जाए तो कोई आपत्ति नहीं होगी. आरोप है कि इसके बावजूद परिवार द्वारा विदेशी परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार किए जाने पर जोर दिया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने विरोध किया. ग्रामीणों की मांग पर शासन-प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कब्र से शव को बाहर निकलवाया. फिलहाल, प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है. हालांकि, घटना को लेकर गांव में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा.

साय सरकार का बड़ा फैसला: मार्कफेड सहकारी समितियों के माध्यम से करेगा उपार्जन

  खरीफ में उपार्जन के लिए 425 करोड़ रूपए मंजूर     रायपुर, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत प्राइस सपोर्ट स्कीम में छत्तीसगढ़ को दलहन और तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बीच हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन में दलहन-तिलहन उपार्जन के लिए 425 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है।     गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से खरीफ और रबी सीजन के लिए कुल 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन दलहन-तिलहन उपार्जन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। इसमें खरीफ के लिए 50 हजार मीट्रिक टन और रबी के लिए 72 हजार मीट्रिक टन शामिल हैं। फिलहाल केंद्र से खरीफ की फसलों के उपार्जन की अनुमति मिली है। इसके तहत अरहर 21 हजार 330 मीट्रिक टन, उड़द 25 हजार 530 मीट्रिक टन, मूंग 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन 4 हजार 210 मीट्रिक टन और मूंगफली 4 हजार 210 मीट्रिक टन का उपार्जन किया जाएगा। इन फसलों के उपार्जन पर कुल 425 करोड़ रुपए खर्च होंगे। केंद्र सरकार ने मांग आने पर सोयाबीन और मूंगफली के लिए अतिरिक्त स्वीकृति देने का आश्वासन भी दिया है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए अरहर का समर्थन मूल्य 8000 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग का 8768 रूपए, उड़द का 7800 रूपए, मूंगफली का 7800 रूपए, सोयबीन का प्रति क्विंटल 5328 रूपए घोषित किया गया है।       छत्तीसगढ़ सरकार ने समर्थन मूल्य पर दलहन-तिलहन उपार्जन के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। उपार्जन का कार्य राज्य में मार्कफेड के माध्यम से सहकारी समितियों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए 22 जिलों में 222 उपार्जन केंद्र पहले ही अधिसूचित कर दिए गए हैं। किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल पर लगातार जारी है। जिन किसानों का पंजीयन अब तक नहीं हो पाया है, वे नजदीकी सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन कराकर योजना का लाभ उठा सकते हैं।     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन-तिलहन का उपार्जन किसानों के हित में राज्य सरकार का बड़ा निर्णय है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ दाल एवं खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार किसानों के हित में केन्द्र सरकार के साथ समन्वय कर लगातार काम कर रही है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा एवं लैंगिक समानता पर हुआ गहन मंथन

रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन  द्वारा राष्ट्रीय अभियान 'नई चेतना 4.0' के अंतर्गत एक दिवसीय राज्य स्तरीय जेंडर कार्यशाला का आयोजन आज नए सर्किट हाउस रायपुर में किया गया। कार्यशाला में प्रमुख रूप से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन संचालक श्री अश्विनी देवांगन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में बताया गया कि यह पहल महिलाओं के हक-अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने एवं जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्री सिंह ने कहा कि जेंडर रिसोर्स सेंटर के माध्यम से महिलाओं को एक सशक्त मंच मिलेगा, जहाँ वे अपने अधिकारों की जानकारी प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका एवं भागीदारी है। मिशन संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन श्री देवांगन ने कहा कि जेंडर केवल किसी एक विभाग का विषय नहीं है, बल्कि शासन के सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जेंडर को मुख्यधारा में लाने हेतु विभागीय अभिसरण को और अधिक मजबूत करने पर बल दिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों की भूमिका को सुदृढ़ करना तथा महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करना रहा। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, सामाजिक समावेशन, जेंडर आधारित हिंसा, शिकायत निवारण तंत्र एवं अधिकार आधारित सेवाओं की पहुँच जैसे विषयों पर विस्तृत परिचर्चा की गई। कार्यशाला में पुलिस विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा महिलाओं के हक एवं अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। कांकेर जिले की दीदियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जेंडर आधारित हिंसा, सामाजिक भेदभाव तथा जेंडर रिसोर्स सेंटर की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही दो पैनल चर्चाओं में महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में आने वाली बाधाओं तथा विभागीय अभिसरण पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, एनएमएमयू प्रतिनिधि, तथा प्रदान, ट्रीफ, चैतन्य संस्था सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश भर से आए जीएमटी, समूह सदस्य, पदाधिकारी एवं अन्य हितधारकों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जिला एवं ब्लॉक स्तरीय टीमों को सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं को समय पर सहयोग, सुरक्षित मंच एवं भरोसेमंद तंत्र उपलब्ध कराना ही ‘नई चेतना 4.0’ अभियान का मूल उद्देश्य है।

गाइडलाइन दरों में सुधार: छत्तीसगढ़ सरकार का पारदर्शी और सरल व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम

रायपुर, छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000 के प्रावधानों के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ द्वारा स्थावर संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित गाइडलाइन दर वर्ष 2025–26 को अनुमोदित करते हुए 20 नवंबर 2025 से प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य में संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तार्किक और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विगत पांच वर्षों से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण नहीं होने के कारण प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कई प्रकार की विसंगतियां उत्पन्न हो गई थीं। वर्ष 2025–26 की नवीन गाइडलाइन में इन विसंगतियों को दूर करते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। पूर्व प्रचलित गाइडलाइन में नगर पालिका क्षेत्रों में कुल 200 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 102 किया गया है। एक ही वार्ड में अलग-अलग कंडिकाओं और भिन्न दरों के कारण आमजन को संपत्ति के मूल्य को समझने में कठिनाई होती थी, जिसे अब सरल और स्पष्ट बनाया गया है। वार्ड परिसीमन के बाद कंडिकाओं में आवश्यक संशोधन कर नई परिस्थितियों के अनुरूप दरें निर्धारित की गई हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित दरों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि वर्ष 2025–26 की गाइडलाइन में लगभग समान दरों को समायोजित कर एकरूप किया गया है, जिससे औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित होती है। उदाहरण के तौर पर महासमुंद जिले में नई गाइडलाइन में पूरे रायपुर मार्ग की दर 32,500 रुपये तथा 20 मीटर अंदर की दर 7,500 रुपये निर्धारित की गई है। इसी प्रकार यतियतनलाल वार्ड में परिसीमन के कारण दरों को युक्तियुक्त करते हुए 4,800 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया है। वार्ड क्रमांक 03 में भी एक ही मार्ग पर स्थित कंडिकाओं को समायोजित कर नई कंडिका सृजित की गई है और दरों में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पुष्पा पेट्रोल पंप से पंकज सोनी के मकान तक निर्धारित दरें शंकर नगर वार्ड के सामने की दरों के अनुरूप रखी गई हैं, जिससे सड़क के आमने-सामने स्थित क्षेत्रों में समान दरें लागू हो सकें। बरोण्डा चौक तथा बरोण्डा चौक से भाजपा कार्यालय तक के क्षेत्रों में भी दरों का युक्तियुक्तकरण करते हुए औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार अन्य वार्डों में भी समान परिस्थिति और महत्व के क्षेत्रों में दरों को एकरूप करते हुए संतुलित वृद्धि सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार द्वारा किए गए इस पुनरीक्षण का उद्देश्य वास्तविक प्रचलित बाजार मूल्य को गाइडलाइन दरों में समाहित करना है, ताकि संपत्ति क्रय-विक्रय, स्टांप शुल्क और पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े तथा आम नागरिकों को स्पष्ट और न्यायसंगत दरों का लाभ मिल सके। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुगम, भरोसेमंद और जनहितैषी संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

ठाकुर प्यारेलाल सिंह की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने अर्पित की श्रद्धांजलि

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं श्रमिक-किसान आंदोलनों के अग्रदूत ठाकुर प्यारेलाल सिंह की 21 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी छत्तीसगढ़ की धरती के ऐसे महान सपूत थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ श्रमिकों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। वे छत्तीसगढ़ में श्रमिक एवं सहकारी आंदोलन के प्रणेता माने जाते हैं। छात्र जीवन से ही वे स्वाधीनता आंदोलनों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और ब्रिटिश शासन के अन्याय व दमन के विरुद्ध निर्भीक होकर संघर्षरत रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह का संपूर्ण जीवन साहस, संघर्ष और सेवा के आदर्शों से ओत-प्रोत है। छत्तीसगढ़ के सामाजिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक विकास में उनके अमूल्य योगदान को सदैव सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागी बनने का आह्वान किया।

अब रायपुर में भी ड्राइव-इन सिनेमा का मज़ा: हर वीकेंड सेंध लेक बनेगा ओपन-एयर थिएटर, पहले दिन दिखेंगी DDLJ और Mohabbatein

रायपुर छत्तीसगढ़ में पहली बार एंटरटेनमेंट का एक नया विंडो ओपन होने जा रहा है. रायपुर के एमएसएमई द फरेबिस ने नया रायपुर में ड्राइव इन मूवी का आयोजन करने का फैसला किया है. ये ड्राइव इन मूवी नया रायपुर में सेंध लेक ग्राउंड में होने वाला है. इस ड्राइव इन मूवी का पहला शो रविवार 21 दिसंबर को होने वाला है. साथ ही आने वाले दिनों में भी वीकेंड्स और खास अवसरों पर लगातार ड्राइव इन मूवी का आयोजन किया जाएगा. वर्ल्ड क्लास एक्सपीरियंस के साथ होने वाले इस शो की पहली मूवी दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे होगी, जो अपने रिलीज का 30वाँ एनिवर्सरी सेलिब्रेट कर रहा है. ये शो शाम को 5.45 बजे शुरू होगा. बता दें कि इसी दिन अपने रिलीज का सिल्वर जुबली ईयर सेलिब्रेट करने वाली फिल्म मोहब्बतें  का टेलीकास्ट रात 10.25 बजे से किया जाएगा. द फरेबिस की फाउंडर अनंता जायसवाल हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में पहला कदम रखते हुए ये शो लांच किया है. उन्होंने बताया कि खुले आसमान में सितारों के नीचे अपने पसंदीदा सितारों की फिल्म देखना अनोखा अनुभव होगा. लेक साइट पर खुले आसमान के तले साफ सुथरे वातावरण में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए टेलीकास्ट होने वाली मूवी देखना छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए एकदम अनूठा अनुभव होगा. दरअसल, विशाल एल ई डी वॉल पर फिल्म की स्क्रीनिंग होगी और दर्शक अपनी कार में बैठे-बैठे इसका लुत्फ उठा सकेंगे. फिल्म का ऑडियो रेडियो ट्रांसमिशन के जरिए कार के अंदर एफ एम सिस्टम पर सुना जा सकेगा. यह आपको एकदम नया और अनूठा अनुभव देगा. वाइस क्वालिटी बहुत क्लियर होगी. इसके अलावा आप यदि सराउंड साउंड का आनंद लेना चाहते हैं तो विंडो ओपन करके फ्लोर साउंड का भी मजा ले सकते हैं. ये डबल ऑडियो सिस्टम वाला ड्राइव इन मूवी का देश में इकलौता मॉडल है. द फरेबिस की फाउंडर अनंता जायसवाल ने बताया है कि अत्याधुनिक तकनीक के साथ छत्तीसगढ़ में ड्राइव इन मूवी शो का ये पहला प्रयोग है, जिसमें दर्शक अपनी कार में बैठे बैठे ही लजीज चाइनीज और कांटिनेंटल व्यंजन के साथ ही हॉट एंड कोल्ड ड्रिंक्स का भी मजा ले सकेंगे, इसके लिए देश के कई नामचीन सेफ का मेनू तैयार किया गया है. इस शो का टिकटिंग पार्टनर find your wibe है, जो रायपुर का ही टिकटिंग प्लेटफॉर्म है, जिसमें दर्शकों को केवल टिकट फी देना होगा. इसमें जीएसटी और प्लेटफार्म फी शामिल है, इसमें कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं जुड़ेगा. ये प्लेटफार्म इंटरनेट पर आसानी से एक्सेसेबल है. शो में प्रत्येक कार के लिए फीस तय की गई है, जिसमें कोई पर्सन लिमिट नहीं है. इसके अलावा ऑन द स्पॉट टिकट भी लिया जा सकता है. इसके लिए शो ग्राउंड पर कैश और ऑनलाइन पेमेंट के लिए अलग अलग काउंटर बनाए गए हैं. आप फैमिली या फ्रेंड्स के साथ इस शो में एकदम नया और अनूठा आनंद का अनुभव करेंगे. न्यू कपल्स के लिए ये शानदार डेटिंग भी साबित होगा. को-फाउंडर मयंक वर्मा ने कि पहले शो के लिए 4 बजे गेट ओपन होगा और सेकंड शो के लिए 9.15 बजे से प्रवेश दिया जाएगा. एंट्री और एग्जिट के लिए अलग अलग व्यवस्था है, जिससे दर्शकों को किसी तरह की परेशानी से नहीं होगी. शो के दौरान अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम भी होगा ताकि पारिवारिक माहौल में कोई खलल ना हो. कार्यक्रम स्थल पर किसी को भी नशे की हालत में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी और ना ही शो के दौरान इसकी इजाजत होगी. प्रशासन के निर्देशानुसार शो में एंट्री के दौरान ड्रिंक्स ईटेबल्स और पैट्स साथ ले जाने की अनुमति नहीं होगी. द फ़रेबिस ग्रुप का ये छत्तीसगढ़ में पहला आयोजन है, इसके साथ ही इसी तरह ड्राइव इन मूवी का आयोजन आने वाले दिनों में वीकेंड्स और खास अवसरों पर लगातार किया जाता रहेगा. आने वाले दिनों में ग्रुप ने कई बड़े इवेंट्स का कैलेंडर प्लान किया है, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी.

बलिदान और कर्तव्य के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व : मुख्यमंत्री

साहसिक गतिविधियों और भव्य झांकियों के साथ 5 हजार से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं ने निकाली ऐतिहासिक रैली रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा  आयोजित वीर बाल रैली में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस भव्य रैली में लगभग 5,000 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, स्काउट-गाइड एवं एनसीसी कैडेट्स ने सहभागिता की। रैली में सिख परंपरा की वीरता को दर्शाती गतका जैसी साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं प्रेरणादायी झांकियों ने उपस्थित जनसमूह को गहरे भावनात्मक स्तर पर जोड़ा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में हम दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों — बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी — के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की अल्पायु में साहिबजादों ने जिस अदम्य साहस, आस्था और बलिदान का परिचय दिया, वह मानव इतिहास में अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में भी साहिबजादे किसी दबाव के आगे नहीं झुके, अपनी आस्था से विचलित नहीं हुए और धर्म एवं सत्य की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। साय ने कहा कि सिख धर्म की यह गौरवशाली परंपरा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान और मूल्यों से परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं में शौर्य, साहस और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम साहिबजादों के जीवन को देखते हैं, तो हमें दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिए गए संस्कारों और शिक्षाओं पर गर्व होता है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनकी प्रेरक पंक्तियाँ “सवा लाख से एक लड़ाऊँ, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊँ, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहलाऊँ।” आज भी हर भारतीय के भीतर साहस और संघर्ष की चेतना जागृत करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि साधन नहीं, साहस और संकल्प ही विजय का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत की धरती धन्य है, जिसने ऐसे महान गुरुओं और साहिबजादों को जन्म दिया। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान हमें निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रथम की भावना का मार्ग दिखाता है। उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने साहिबजादों की शहादत के ऐतिहासिक प्रसंगों से उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया। इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, सीजीएमएससी अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा सहित सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, समाजसेवी एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

जब हद से बढ़ा मच्छरों का आतंक: युवक ने मारे मच्छर पैक किए और सीधे नगर निगम में किया प्रदर्शन

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक आदमी ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। मच्छरों के काटने के बाद उसने उसे मारकर प्लास्टिक की थैली में पैक किया। फिर उसे लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंच गया। वहां उसने निगम के हेल्थ अधिकारी से उसकी जांच करने को कहा। उसे शंका थी कि कहीं ये मच्छर डेंगू के वाहक तो नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक युवक ने अपनी शिकायत को प्लास्टिक की थैली में बंद करके अधिकारियों तक पहुंचाने का अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर के वामनराव लाखे वार्ड में मच्छरों के काटने के बाद युवक ने मच्छरों को मारकर उन्हें करीने से पैक किया और सीधे रायपुर नगर निगम कार्यालय लेकर पहुंच गया। दौलल पटेल नाम के इस आदमी ने बताया कि उसे डर था कि उसे काटने वाले मच्छर डेंगू के वाहक हो सकते हैं। घबराकर उसने पहले डॉक्टर से सलाह ली, जिसने उसे मच्छरों की जांच करवाने की सलाह दी। सामाजिक कार्यकर्ता विजय सोना और नगर निगम के विपक्ष के नेता आकाश तिवारी के साथ पटेल ने पॉलीथीन बैग में अच्छी तरह से सील किए गए मच्छरों को नगर निगम मुख्यालय में स्वास्थ्य अधिकारी को सौंप दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने तुरंत डॉक्टरों से संपर्क किया और आशंकाओं को दूर करने के लिए परीक्षण की व्यवस्था की। हालांकि, रिपोर्ट से कुछ राहत मिली क्योंकि ये मच्छर डेंगू फैलाने वाले नहीं बल्कि सामान्य मच्छर निकले। विपक्ष ने इस घटना को हाथोंहाथ लपक लिया। नगर निगम में विपक्ष के नेता आकाश तिवारी ने कहा कि इस घटना ने शहर की मच्छर नियंत्रण व्यवस्था की विफलता को उजागर कर दिया है। कहा कि कागज पर तो लोगों को 'स्वच्छ रायपुर, सुंदर रायपुर' का सपना दिखाया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निवासियों को मच्छरों को मारकर नगर निगम कार्यालय लाना पड़ रहा है। वहीं, लोगों का कहना है कि मच्छरों का प्रकोप चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। लोग डेंगू और मलेरिया के भय में जी रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ साल पहले इसी इलाके के एक युवक की मच्छर के काटने से मौत हो गई थी। आकाश तिवारी ने कहा कि अगर लोगों को खुद मच्छर पकड़ने पड़ रहे हैं और अधिकारियों को समस्या साबित करनी पड़ रही है तो शहर के अन्य हिस्सों की स्थिति का तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है। राज्य के बाकी हिस्सों की तो बात ही छोड़िए। कार्यकर्ता विजय सोना ने बताया कि उन्होंने अपने घर के पास मच्छरों के पनपने की शिकायत नगर निगम के अधिकारियों से बार-बार की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के एक सदस्य की मच्छर जनित बीमारी से मौत हो चुकी है। रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग और लार्वा रोधी छिड़काव तेज किया जाएगा। हालांकि, निवासी अभी भी संशय में हैं। उनका कहना है कि मच्छर नियंत्रण पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद, खुली नालियां और खराब जल निकासी व्यवस्था मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श स्थान बनी हुई है।

नवा रायपुर अटल नगर में नई तहसील, 60 दिन में मांगी आम राय

रायपुर राज्य सरकार ने रायपुर जिले में नई तहसील के गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नवा रायपुर अटल नगर को नई तहसील के रूप में सृजित करने का प्रस्ताव जारी किया गया है। इस संबंध में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की है। अधिसूचना के अनुसार, रायपुर जिले की वर्तमान तहसील रायपुर, मंदिर हसौद, गोबरा नवापारा और अभनपुर की सीमाओं में परिवर्तन कर नई तहसील नवा रायपुर अटल नगर के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से 60 दिवस के भीतर इस प्रस्ताव पर आपत्ति या सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। निर्धारित अवधि के भीतर सचिव छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, नवा रायपुर अटल नगर को लिखित रूप में आपत्ति या सुझाव भेजे जा सकते हैं। 39 गांव होंगे नई तहसील में शामिल प्रस्तावित नई तहसील नवा रायपुर अटल नगर में कुल 6 राजस्व निरीक्षक मंडलों के अंतर्गत 20 पटवारी हल्कों के 39 गांवों को शामिल किया जाएगा। इनमें पलौद, मंदिर हसौद, केंद्री, तोरला, सेरीखेडी और रायपुर-18 कांदुल क्षेत्र के गांव शामिल हैं।अधिसूचना में नई तहसील की सीमाएं उत्तर: मंदिर हसौद, दक्षिण: अभनपुर, पूर्व: गोबरा नवापारा, पश्चिम: रायपुर भी स्पष्ट की गई है।