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छत्तीसगढ़ पुलिस दे रही यात्रियों, चालकों एवं फील्ड स्टॉफ को आपात प्रबंधन का प्रशिक्षण

रायपुर. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा अभियान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज राष्ट्रीय राजमार्ग–53 पर लाइव मॉक-ड्रिल किया गया। मॉक-ड्रिल के दौरान यात्रियों, वाहन चालकों एवं एनएचएआई के फील्ड स्टॉफ को कई तरह की आपात परिस्थितियों से निपटने व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान दौरान विशेषज्ञों ने सड़क दुर्घटना और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान करने के तरीकों का प्रदर्शन भी किया। मॉक-ड्रिल के दौरान विशेषज्ञों ने हार्ट-अटैक की स्थिति में सीपीआर देने के सही एवं वैज्ञानिक तकनीक का लाइव-डेमो दिया। उन्होंने अचानक बेहोशी, अत्यधिक रक्तस्राव, सांस लेने में कठिनाई जैसी मेडिकल आपात स्थितियों में प्राथमिक उपचार की भी जानकारी दी। मॉक-ड्रिल में वाहन में तकनीकी खराबी और सड़क दुर्घटना में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की भी जानकारी दी गई। दुर्घटना के बाद यात्रियों को सुरक्षित ढंग से वाहन से बाहर निकालने, संयम बनाए रखने तथा इस दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों के बारे में भी विशेषज्ञों ने विस्तार से बताया। कोहरे एवं रात्रि यात्रा में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान एनएचएआई द्वारा सर्दियों के मौसम में कोहरे एवं रात में यात्रा के दौरान दुर्घटना की संभावना को कम करने वाहनों पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप लगाए जा रहे हैं। साथ ही वाहन चालकों एवं यात्रियों से हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने तथा निर्धारित गति सीमा का पालन सुनिश्चित करने की अपील भी की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जल्द रिहाई की विकास परिषद ने बनाई लिस्ट

कोरबा. कोरबा आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष केआर शाह ने प्रदेश की अलग-अलग जेलों में बंद आदिवासियों को रिहा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिषद ऐसे आदिवासियों की सूची तैयार करेगी, जो जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी या बेवजह अपराध से अधिक सजा काट रहे हैं। शाह ने बताया कि परिषद इन आदिवासियों की रिहाई के लिए कानूनी सहायता प्रदान करेगी, जिसमें वकीलों का पूरा खर्च भी शामिल होगा। इसका मुख्य उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। मीडिया से चर्चा करते हुए शाह ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने सभी आदिवासी क्षेत्रों में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की तर्ज पर हाई स्कूल खोलने की वकालत की, ताकि हर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके। इसके अलावा शाह ने बस्तर को अलग राज्य बनाने पर भी अपनी सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से क्षेत्र का विकास होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। केआर शाह कोरबा में जयपाल सिंह मुंडा की जयंती की तैयारियों के सिलसिले में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई परिषद की छह प्रमुख मांगों में से एक है।

छत्तीसगढ़ के केशकाल के दरबार मेले में देवी आने पर झूमे बीजेपी सांसद

केशकाल. भंगाराम माईं के दरबार में मेला का शनिवार देर शाम आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के सभी देवी-देवताओं की उपस्थिति रही। भंगाराम मेला के बाद से बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में मेले की शुरुआत होती है। आज कांकेर में भी मेला आयोजित किया गया है। मेले में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार से ग्रामीण क्षेत्रों में आँगा देव की पूजा की जाती है। छोटे-छोटे बच्चे आँगा देव को पकड़े हुए होते हैं, और अचानक उन पर शक्ति का संचार होता है। इस दौरान बच्चे और आँगा देव दोनों एक साथ खेलते और कूदते दिखाई देते हैं। इस अवसर पर कांकेर के सांसद भोजराज नाग भी भंगाराम माईं के मेले में शामिल हुए। उन्हें भी देव का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, और वे सभी देवी-देवताओं के साथ मेले का परिक्रमा करते नजर आए। आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में मेला का बेसब्री से इंतजार किया जाता है। जब देवी-देवताओं का आगमन होता है, तो ग्रामीण उन्हें विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद मेला की शुरुआत करते हैं।

छत्तीसगढ़ के पुलिस कर्मियों की वित्तीय सशक्तिकरण के लिए निवेश और बचत पर कार्यशाला आयोजित

धमतरी. पुलिस द्वारा पुलिस कर्मियों के वित्तीय सशक्तिकरण के उद्देश्य से आज पुलिस कंट्रोल रूम में निवेश एवं बचत विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला पुलिस अधीक्षक धमतरी श्री सूरज सिंह परिहार के निर्देशन एवं उपस्थिति में आयोजित हुई, जिसमें पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सैलरी के बचत पैसों को सुरक्षित निवेश माध्यमों में लगाकर बेहतर रिटर्न प्राप्त करने तथा भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए योजनाबद्ध बचत करने संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में राज्य सरकार के बीच एमओयू (टाईअप) बैंक ऑफ बड़ौदा एवं म्युचुअल फंड विशेषज्ञों की टीम द्वारा सुरक्षित निवेश, एसआईपी एवं म्युचुअल फंड, सरकारी योजनाएँ, आयकर नियम, रिटायरमेंट प्लानिंग और बचत के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई, विवाह, मकान निर्माण और आपतकालीन परिस्थितियों के लिए नियमित बचत एवं वित्तीय अनुशासन अत्यंत आवश्यक है। साथ ही साइबर फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी से बचाव के तरीकों पर भी विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि पुलिस कर्मी किसी भी प्रकार के वित्तीय जाल में न फँसें। एसपी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नववर्ष में पुलिस फोर्स के कल्याण हेतु कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें वित्तीय सुदृढ़ता पहली और महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने कहा कि अनुशासन सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं, बल्कि वित्तीय जीवन में भी उतना ही आवश्यक है। सुरक्षित निवेश, बचत की आदत और योजनाबद्ध आर्थिक प्रबंधन से पुलिस कर्मी स्वयं एवं अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित बना सकते हैं और अनावश्यक ऋण जाल से बच सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की टीम ने पीपीएफ, एनएससी, केवीपी, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, मेडिक्लेम व टर्म इंश्योरेंस जैसी सरकारी एवं बैंकिंग योजनाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की। कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी पाया।

बस्तर आ रहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृहमंत्री अमित शाह

बस्तर. बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन इस साल भी किया जा रहा है। कार्यक्रम 10 जनवरी से 5 फरवरी तक प्रस्तावित है।बस्तर पंडुम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृहमंत्री अमित शाह भी शिरकत करेंगे। वहीं एक दिन पहले 2 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम का लोगो और थीम गीत लॉन्च किया है। दरअसल, बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम और 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संभाग स्तरीय कार्यक्रम में ही राष्ट्रपति और गृहमंत्री शिरकत करेंगे। इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत के अलग-अलग देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, उनके साथ बेटी, भाई और भाभी भी मौजूद रहेंगे। वहीं, उनकी सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और रेलवे ने कमर कस ली है। सुरक्षा प्रोटोकाल के तहत राष्ट्रपति के करनडीह आने-जाने के दौरान जुगसलाई अंडरब्रिज के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया जाएगा। राष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू साये की तरह मौजूद रहेंगी। इतिश्री एक बैंक अधिकारी हैं और मां के साथ अक्सर महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में नजर आती हैं। इसके अलावा, ओडिशा के मयूरभंज से राष्ट्रपति के छोटे भाई तारिणीसेन टुडू और उनकी पत्नी चुडा सकरा टुडू (सकरमणि टुडू) भी इस यात्रा का हिस्सा होंगे। मायके और ससुराल पक्ष के लोगों के साथ राष्ट्रपति का यह आगमन लौहनगरी के लोगों के लिए भी उत्साह का विषय है। 7 से बढ़कर होगी 12 विधा इस साल बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि प्रमुख हैं। 3 चरणों में किया जा रहा आयोजन इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं, शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा। CM बोले- बस्तर पंडुम है बस्तर की आत्मा मुख्यमंत्री ने कहा कि, बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है। आज मां दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहां बस्तर पंडुम-2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया है। बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, कला और विरासत का मंच है। छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुड़ियों के जरिए इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। उन्होंने कहा कि, पिछले साल हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी, तब समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस बार हम राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री समेत भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर हमारे बस्तरवासियों का जोश, उत्साह खूब देखने को मिला। इस बार हम इसे और भव्य बना रहे हैं ताकि यहां की धरोहर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना पाए। इस बार बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धा में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर 12 की गई है। इसमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति तो होगी ही, इसके साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को शामिल किया गया है।  

छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सशक्त सामाजिक सुरक्षा तंत्र, रायपुर में हुआ ऐलान

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से राज्य में वृद्धजनों के लिए सुनियोजित, व्यापक एवं सतत सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ पात्र वरिष्ठ नागरिकों को बिना किसी पृथक “सीनियर सिटीजन कार्ड” के उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए अलग पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु एवं पात्रता का सत्यापन कर योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुगम बनी है। 26 वृद्धाश्रमों के माध्यम से सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन राज्य में वर्तमान में 26 वृद्धाश्रम संचालित हैं, जहाँ निराश्रित, असहाय एवं देखभाल की आवश्यकता वाले वृद्धजनों को निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र एवं आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। यह व्यवस्था ऐसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए संबल बनी है, जिनके पास पारिवारिक या सामाजिक सहारा उपलब्ध नहीं है। 13 प्रशामक गृहों में विशेष देखभाल गंभीर रोगों से ग्रस्त एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित किए जा रहे हैं। यहाँ उन्हें निःशुल्क आवास, निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग एवं सहायक सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अत्यंत संवेदनशील वृद्धजनों को मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके। वृद्धावस्था पेंशन से आर्थिक संबल सामाजिक सुरक्षा के तहत समाज कल्याण विभाग द्वारा बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के पात्र वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों को 680 रुपए प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन नियमित रूप से दी जा रही है। यह पेंशन वृद्धजनों को न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन में सहायक सिद्ध हो रही है। सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा से जीवन में नई ऊर्जा राज्य शासन द्वारा आवश्यकता के अनुरूप वृद्धजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे दैनिक जीवन में अधिक आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना भी संचालित की जा रही है। समग्र संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयास छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट संदेश है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए समग्र सामाजिक सुरक्षा, संरक्षण और सहभागिता सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिकता है। पेंशन, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, सहायक सुविधाएँ और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों को गरिमापूर्ण, सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

रायपुर: वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

रायपुर : वन विभाग का विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम, अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी रायपुर राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं।  विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी। वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है। आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

रायपुर: CG में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर में शांति और विकास की स्थायी शुरुआ

रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।  मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।

बिलासपुर में PM श्री स्कूल के अंदर कुत्ते ने छात्र-टीचर को नोचा

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आवारा कुत्ता स्कूल में घुस आया। पहली कक्षा के छात्र को काट दिया। बच्चे को नोंचते देखकर महिला टीचर बचाने दौड़ी, तो कुत्ते ने टीचर पर भी हमला कर दिया। बच्चे की आंख के पास चोट आई है। घटना सरकंडा क्षेत्र के खमतराई में पीएम श्री स्कूल की है. जानकारी के मुताबिक हेडमास्टर ने अन्य लोगों की मदद से छात्र और शिक्षिका को सिम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां दोनों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया है। बताया जा रहा है कि पागल कुत्ता अब तक 13 लोगों को काट चुका है। इस घटना से स्कूली बच्चों के पेरेंट्स दहशत में हैं। बच्चे के चेहरे में चोट के गंभीर निशान मिले हैं। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, शुक्रवार सुबह (2 जनवरी) को खमतराई के पीएम श्री प्राइमरी स्कूल के स्कूल परिसर में रोजाना की तरह सुबह की प्रार्थना हो रही थी। प्रार्थना के बाद स्कूली बच्चे अपनी-अपनी क्लास में जाने लगे। इसी दौरान एक कुत्ता स्कूल परिसर में घुस आया। कुत्ते ने पहली क्लास के सावन लस्कर का पीछा किया और उसे काट लिया। इससे सावन घायल हो गया। बच्चा जमीन पर गिर गया। बच्चे पर हमला करते देख महिला टीचर सीता कश्यप बचाने के लिए दौड़ी। इस दौरान कुत्ते ने टीचर को भी काट लिया। इससे महिला टीचर सीता कश्यप भी जख्मी हो गईं। महिला टीचर को बनाया शिकार, अब तक 13 पर हमला स्कूली छात्र और एक महिला टीचर को कुत्ते के काटने के बाद अफरा-तफरी मच गई। हेडमास्टर और दूसरे टीचर्स ने मिलकर कुत्ते को स्कूल से बाहर भगाया। कुत्ते को दोबारा स्कूल में आने से रोकने के लिए टीचर शालिनी तिवारी गेट बंद करने गईं, तभी कुत्ते ने उन पर भी हमला किया और उन्हें भी काट लिया। आस-पास के लोग मौके पर पहुंचे। कुत्ते को भगाने में कामयाब रहे। घायल छात्र और दोनों टीचर्स को SIMS अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। बताया जा रहा है कि यह आवारा कुत्ता इलाके में आतंक मचा रहा है। पहले ही 13 लोगों को काट चुका है। हेडमास्टर ने जोन कमिश्नर को लिखा पत्र स्कूल के हेडमास्टर सरोज यादव ने डीईओ, बीईओ के साथ ही नगर निगम के जोन कमिश्नर को पत्र लिखकर कुत्ते के आतंक की जानकारी दी है। उन्होंने स्थानीय लोगों के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों को घटना की जानकारी देकर कुत्ते को रेस्क्यू करने के लिए भी कहा। बताया जा रहा है कि डीईओ, बीईओ के साथ ही नगर निगम के जोन कमिश्नर को पत्र लिखने के बाद भी पागल कुत्ते को अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। इसकी वजह से स्कूल के बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। अभी तक इस कुत्ते को नहीं पकड़ा गया है। रिटायर्ड हेडमास्टर के बेटे और गाय पर किया हमला स्कूल में छात्र और महिला टीचर को काटने के बाद कुत्ता सिद्धि विहार कॉलोनी की तरफ भाग गया। जहां उसने रिटायर्ड हेडमास्टर हरनाम सिंह के बेटे को दौड़ाकर काट लिया। इसके साथ ही एक गाय पर भी हमला कर दिया। इससे गाय घायल हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम का काउ कैचर मौके पर पहुंचा, लेकिन कुत्ते को पकड़ा नहीं जा सका। शहर में पागल और आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। आवारा कुत्तों की संख्या 7 हजार से अधिक है। पिछले तीन महीने में डॉग बाइट के 1625 मामले सामने आए हैं, जिनका सिम्स में उपचार कराया गया है। इस दौरान 7300 से अधिक एंटी रेबीज वैक्सीन की डोज दी गई है। पिछले साल जनवरी में सबसे अधिक 705 मामले दर्ज किए गए। फरवरी में 549 और मार्च में भी 549 केस सामने आए। स्थिति यह है कि औसतन रोजाना 18 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में फर्जी नियुक्तियों पर शिक्षा विभाग के चार कर्मचारी सेवा से बाहर

रायपुर. खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला शिक्षा विभाग की ओर से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वालों पर बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय स्तर पर की गई विस्तृत जांच के बाद चार कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई को विभाग की अब तक की सबसे कड़ी अनुशासनात्मक पहल माना जा रहा है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि टीकमचंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद की नियुक्ति वर्ष 2021 में सहायक ग्रेड-3 सहित अन्य पदों पर जिन आदेशों के आधार पर दिखाई गई थी, वे विभागीय रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं थे। जांच के दौरान नियुक्ति पत्रों पर अंकित क्रमांक और हस्ताक्षर भी आधिकारिक अभिलेखों से मेल नहीं खा सके। मामले के उजागर होने के बाद संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा गया, लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और स्पष्टीकरण नियुक्ति की वैधता साबित करने में असफल रहे। इसके बाद शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए चारों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक करने का आदेश जारी कर दिया।