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शहीद रंजीत कश्यप की कहानी: 3 बेटियों के पिता और बुजुर्ग माता-पिता का था इकलौता सहारा

रायपुर  मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में आतंकवादियों ने असम राइफल्स के एक वाहन पर हमला किया। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए, जबकि 5 घायल हो गए। शहीद जवानों में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बालेंगा गांव निवासी रंजीत कुमार कश्यप भी शामिल हैं।  ग्रामीणों और दोस्तों के मुताबिक रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आया था। करीब एक महीने तक वो अपने परिजनों के साथ रहा। पिछले रविवार को ही ड्यूटी पर लौटा था। उसने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं। इसके बाद रिटायर होकर गांव लौटेगा और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनेगा। परिजन बताते हैं कि, रंजीत शुरू से ही देश की सेवा करना चाहता था। उसका सपना था फोर्स ज्वाइन कर देश की रक्षा करना। रंजीत की तीन बेटियां हैं। एक बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई है। शुक्रवार को हुआ था हमला जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में आतंकियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हमले में एक ऑफिसर और जवान रंजीत कुमार कश्यप शहीद हो गए। इनके अलावा तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, रंजीत कश्यप बस्तर के बालेंगा इलाके के रहने वाले थे। असम में अपनी सेवा दे रहे थे। तलाशी अभियान और श्रद्धांजलि हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और आतंकवादियों की तलाश शुरू कर दी. सेना ने तलाशी अभियान जारी रखा है ताकि हमलावरों को पकड़ा या मार गिराया जा सके. असम राइफल्स के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी के दौरे के बाद मणिपुर की शांति पर सवाल यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर दौरे पर गए थे, उन्होंने चुराचांदपुर में 7000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया था और मणिपुर को शांति और विकास का प्रतीक बनाने का वादा किया था, लेकिन दौरे के कुछ ही दिनों बाद हुई यह आतंकी घटना राज्य में शांति बहाल करने की कोशिशों पर सवाल खड़े करती है.

महापौर–पार्षद निधि के लिए 102.97 करोड़ रुपए जारी, नगरीय निकायों में आएगी रौनक

रायपुर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों को कुल 102 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए हैं। विभाग ने निकायों को पार्षद निधि के कुल 72 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपए, महापौर/अध्यक्ष निधि के कुल 30 करोड़ 63 लाख 75 हजार रुपए आबंटित कर दिए हैं। विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दोनों मदों में 50-50 प्रतिशत राशि निकायों को जारी की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने पार्षद निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 21 करोड़ 96 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 54 नगर पालिकाओं को 23 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए, 120 नगर पंचायतों को 27 करोड़ रुपए की पार्षद निधि जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से 14 नगर निगमों को दस करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए की महापौर निधि आबंटित की गई है। राज्य के 54 नगर पालिकाओं को दस करोड़ 50 लाख रुपए और 120 नगर पंचायतों को दस करोड़ एक लाख 25 हजार रुपए अध्यक्ष निधि जारी की गई है।

जनसेवक की मिसाल: MLA भावना बोहरा ने घायल को निजी वाहन से कराया अस्पताल भेजवाया

कवर्धा पांडातराई के पास शुक्रवार रात दर्दनाक हादसा हो गया. दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. सड़क पर वह खून से लथपथ हालत में वह सड़क पर तड़प रहा था. इस दौरान घटनास्थल से गुजर रही भाजपा विधायक भावना बोहरा ने काफिला रोककर घायल की मदद कर मिसाल पेश की. दरअसल, पंडरिया विधायक भावना बोहरा बिलासपुर से लौट रही थी. इस दौरान सड़क पर हादसे में खून से लथपथ युवक को देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवाया. इसके बाद विधायक भीड़ में पहुंची और घायल युवक के सिर बह रहे खून को रोकने के लिए कपड़ा भी रख दिया. मसीहा की तरह पहुंची विधायक भावना ने अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल अस्पताल में युवक का इलाज जारी है. वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने विधायक भावना बोहरा के इस मानवीय कदम की सराहना की.

6.60 करोड़ कैश के साथ पकड़ी गई दो स्कॉर्पियो, दुर्ग में सनसनी; महाराष्ट्र नंबर की गाड़ियों से बरामदगी

दुर्ग   दुर्ग पुलिस ने कुम्हारी थाना क्षेत्र में दो स्कॉर्पियो वाहनों से 6 करोड़ 60 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। दोनों गाड़ियों में बने गुप्त चेंबर से यह भारी-भरकम राशि बरामद हुई। पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की जानकारी आयकर विभाग को सौंप दी है। कैसे हुआ खुलासा? दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल को सूचना मिली थी कि महाराष्ट्र पासिंग दो स्कॉर्पियो में बड़ी मात्रा में नगदी ले जाई जा रही है। निर्देश पर कुम्हारी पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर वाहनों को रोका। तलाशी के दौरान दोनों गाड़ियों के अंदर विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चेंबर मिले। इन्हीं से करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए। आयकर विभाग को सौंपी गई जांच बरामद नगदी को लेकर पुलिस ने तत्काल आयकर विभाग को सूचित किया। अब आगे की जांच और कार्रवाई आयकर विभाग कर रहा है। फिलहाल शक जताया जा रहा है कि पकड़े गए लोग हवाला कारोबार से जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ जारी गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। आयकर विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई और किस उद्देश्य के लिए ले जाई जा रही थी। आयकर विभाग करेगा कार्रवाई कार से इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने जानकारी आयकर विभाग को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी है। पुलिस ने चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम चुनावी माहौल या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है। आयकर विभाग जांच में जुटा है। वहीं, स्थानीय लोगों की भीड़ थाने में इकट्ठा हो गई और मामले की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी। ASP सुखनंदन राठौर ने बताया कि भारी मात्रा में कैश बरामद होने के बाद पुलिस-आयकर विभाग की संयुक्त टीम इस रकम के स्रोत और इस्तेमाल की जांच कर रही है।

शांति से पहले शर्तें पूरी करें: डिप्टी सीएम विजय शर्मा का नक्सलियों को दो टूक जवाब

रायपुर  नक्सलियों की शांति वार्ता से जुड़े पत्र को लेकर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, नक्सलियों को सबसे पहले आम जनता की हत्या बंद करनी होगी।जंगलों में लगाए गए IED को हटाकर उसकी सूचना सार्वजनिक करनी होगी। इन दोनों शर्तों को नक्सली मानेंगे, तभी किसी स्तर पर चर्चा की संभावना बन सकती है। इसे सरकार की ठोस शर्त बताते हुए उन्होंने कहा कि, जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दो पत्र जारी हुए नक्सलियों की तरफ से गृहमंत्री ने बताया कि, नक्सलियों का पहला पत्र सामने आया है, वो पोलित ब्यूरो मेंबर का है, जबकि दूसरा पत्र एक जूनियर कैडर का है, जो तेलंगाना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इन पत्रों में उठाए गए मुद्दे भ्रामक हैं। राज्य सरकार को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। अगर नक्सलियों की नीयत साफ है, तो उन्हें सबसे पहले अपने कदमों से इसे साबित करना होगा। हिंसा और धमकी के रास्ते पर रहते हुए बातचीत का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस पर साधा निशाना नक्सलियों के पत्र में उठाए सवालों के जवाब में विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय प्रशासन को दबाव में काम करना पड़ा। कई ईमानदार अधिकारी भी उस दौर में फंसाए गए। यही वजह है कि आज जांच में रोज-रोज नए खुलासे हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब कारोबार में बाहरी लोगों को संरक्षण मिला और उससे होने वाला पैसा कांग्रेस भवन तक पहुंचता था। इसी दबाव की राजनीति ने व्यवस्था को चरमराया। लगातार ऑपरेशन चल रहे डिप्टी सीएम ने कहा कि, सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल चुकी है। सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। विकास को हर गांव तक पहुंचाने की रणनीति पर काम हो रहा है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। शांति की बात करनी है तो पहले बंदूकें नीचे रखनी होंगी। आम जनता की हत्या और IED की डर की राजनीति बंद होनी चाहिए। इसके बाद ही सरकार संवाद पर विचार कर सकती है।

युक्तियुक्तकरण से केरवाद्वारी हायर सेकेण्डरी स्कूल में बदला पढ़ाई का माहौल

रायपुर कोरबा जिले के करतला विकासखण्ड अंतर्गत वनांचल ग्राम केरवाद्वारी में स्थित हायर सेकेण्डरी विद्यालय में अब पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बदल गया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया ने यहां के विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दी है। विद्यालय में भौतिकी एवं रसायन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के नियमित व्याख्याता न होने से विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अभिभावक भी चाहते थे कि उनके बच्चों को सभी विषयों की नियमित पढ़ाई का अवसर मिले। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत केरवाद्वारी हायर सेकेण्डरी विद्यालय में भौतिकी, रसायन एवं संस्कृत विषय के व्याख्याताओं की पदस्थापना हुई। इससे विद्यालय में न केवल पढ़ाई का माहौल सुधरा है, बल्कि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों ने बताया कि अब उन्हें कठिन लगने वाले प्रश्न भी सरल ढंग से समझ में आने लगे हैं। शिक्षिकाओं द्वारा किताबों के साथ-साथ व्यावहारिक उदाहरणों से पढ़ाने की शैली ने विषयों को रोचक बना दिया है। छात्राओं ने कहा कि शिक्षिकाएँ सहज और सहयोगी वातावरण में पढ़ाती हैं, जिससे सवाल पूछने में झिझक नहीं होती। विद्यालय के प्राचार्य  सतीश कुमार गुप्ता ने बताया कि नियमित व्याख्याताओं की पदस्थापना से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा है और आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थी विज्ञान संकाय सहित अन्य विषयों में दाखिला लेंगे। ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल ने वनांचल के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया है। 

स्वस्थ छत्तीसगढ़ से स्वस्थ भारत बनेगा और देश को विकसित बनाने मे स्वास्थ्य की अहम भूमिका होगीः स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर देश में 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर तक स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का संचालन किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्हत छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग और यूनिसेफ के द्वारा संयुक्त रूप से छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को लेकर शुक्रवार को दो दिवसीय कार्यशाला की शुरूआत की गयी।  स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यशाला के पहले दिन उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मां से ही संपूर्ण सृष्टि का आधार होता है। ऐसे में प्रसव के दौरान किसी माता की मौत हम सभी के लिए दुख की बात होती है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु की दर 365 थी जो वर्तमान में घटकर 141 हो चुकी है। इसी तरह से राज्य गठन के वक्त शिशु मृत्यु दर 79 थी जो अब 38 हो चुकी है।  जायसवाल ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं और हमारा लक्ष्य है कि आने वाले समय में ये शिशु और मातृ मृत्यु दर शून्य हो जाएं।  स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही स्वस्थ भारत बनेगा और देश को विकसित बनाने में स्वास्थ्य की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन और महिला बाल विकास विभाग की बहनों के संयुक्त प्रयास से आने वाले समय में राज्य के स्वास्थ्य आंकड़ों में सुधार जरूर आएगा। इस मौके पर आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए "छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी" नामक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से न केवल माताओं को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर बल दिया जा रहा है, बल्कि राज्य के उन 30 विकासखंडों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है जहाँ मातृ मृत्यु दर सबसे अधिक है।  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान और उनकी सतत निगरानी आवश्यक है। इसके साथ ही, सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और इसकी दिशा में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को लेकर सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।  गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा विकसित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, समुदाय को मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा समुदाय की भागीदारी को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। “छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी” अभियान के माध्यम से राज्य में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य तय किया गया है और शासन इस दिशा में हरसंभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से सजेगा नवभारत का भविष्य: टंक राम वर्मा

रायपुर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर एवं एनईपी इम्प्लीमेंटेशन सेल द्वारा किया गया।  राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा और रोजगार में सेतु का कार्य करेगी उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत के भविष्य की दिशा और दशा तय करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया। यह नीति 21वीं सदी के नवभारत की आधारशिला मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, सक्षम और श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा नीति के प्रथम चरण में हम प्रवेश कर चुके हैं और इसे सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यह नीति केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक, मानसिक, भावनात्मक और तकनीकी दृष्टि से भी सशक्त बनाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और सुलभता सुनिश्चित करना है। नीति के तहत पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन, विषयों के बीच समन्वय, और शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही उद्योग और शिक्षा की भागीदारी को प्रोत्साहित कर युवाओं को कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।     मंत्री  वर्मा ने कहा कि सरकार ने प्राध्यापकों की कमी दूर करने के लिए 700 पदों की स्वीकृति दी है। डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और ई-लर्निंग सुविधाओं के विस्तार पर भी कार्य हो रहा है। मातृभाषा और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विषयों की कठोर सीमाओं को समाप्त कर लचीलापन प्रदान करने के साथ ही विद्यार्थियों को सीखने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करना। आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक शिक्षा को प्रोत्साहन देगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो समयबद्ध योजना बनाकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नीति के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन का साधन है। इसका सफल क्रियान्वयन विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ ही उन्हें सृजनशील, सामाजिक रूप से जागरूक और राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण बनाएगा। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और संवारने का साधन है। इस नई शिक्षा नीति के माध्यम से आने वाले समय में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शिक्षा व्यवस्था अधिक समग्र तथा विद्यार्थी-केंद्रित होगी।  इस अवसर पर विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा की और शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका के बारे में मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को एनईपी के क्रियान्वयन की गहन जानकारी प्रदान करना और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई दृष्टि विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषयों की दीवारों से मुक्त कर विज्ञान, वाणिज्य और कला जैसे क्षेत्रों को एक साथ पढ़ने की स्वतंत्रता देना है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा में भागीदारी दर को वर्तमान 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, तथा विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सौगात: कुनकुरी के छठघाट तालाब विकास हेतु 5.17 करोड़ मंजूर

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को लगातार विकास की नई सौगातें मिल रही हैं। जिले की जनता की आवश्यकताओं और मांगों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री  साय अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य तथा शिक्षा क्षेत्र में योजनाबद्ध ढंग से विकास कार्यों को अंजाम देने में लगे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा कुनकुरी नगर पंचायत क्षेत्र में छठघाट तालाब के विकास कार्य हेतु 5 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।   इस राशि से तालाब का सौंदर्यीकरण, किनारों का सुदृढ़ीकरण, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक विकास कार्य किए जाएंगे। कार्य पूर्ण होने के पश्चात छठघाट तालाब धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक भव्य स्वरूप प्राप्त करेगा तथा नगर की पहचान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक जिले और नगर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर नगरीय अधोसंरचना तक हर क्षेत्र में सुनियोजित रूप से कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छठघाट तालाब का विकास कुनकुरी नगर की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगा और आने वाले समय में यह नगरवासियों के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा। छठघाट तालाब विकास कार्य की स्वीकृति से क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल नगर की पहचान को निखारेगा, बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को भी और अधिक गरिमामय बनाएगा।

बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के आयोजन से लोगों में बढ़ा सरकार के प्रति विश्वास: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त कर गढ़ेंगे विकास की राह : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के आयोजन से लोगों में बढ़ा सरकार के प्रति विश्वास: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प को पूरा करने राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कर रही है काम रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुवार को सुदर्शन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में साक्षात्कार के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करना, लोगों का विश्वास जीतना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना हमारी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को उन्नत बनाने का कार्य कर रही है। अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अनेक गांव पुनः आबाद हो चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। नक्सलियों की गतिविधियों से निर्दोष लोगों की मौत हो रही थी, आम लोगों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है। हमारी सरकार ने नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार बनने के बाद ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन कर नक्सलवाद को समाप्त करने का प्रयास जारी है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के आयोजन से लोगों में बढ़ा सरकार के प्रति विश्वास मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बस्तर के लोगों को मिल रहा है। वनांचल में तेंदूपत्ता खरीदी का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। नक्सलवादी विचारधारा से लोगों को बाहर निकालकर विकास की धारा में जोड़ने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार लोग शामिल हुए, जिससे यह साबित हुआ कि बस्तरवासी विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने अपनी विदेश यात्रा के बारे में बताया कि यह यात्रा अत्यंत सफल रही। जापान में छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से 24 से 31 अगस्त तक हमें राज्य की कला, संस्कृति और संभावनाओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है और उन्हें नई उद्योग नीति से भी अवगत कराया गया है। नई उद्योग नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग की अपार संभावनाएँ हैं। यहाँ प्रचुर प्राकृतिक संपदा उपलब्ध है। आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में भी यहाँ विशाल संभावनाएँ हैं क्योंकि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वनों से आच्छादित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचलों में भी स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विकास हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो चुकी है। मुख्यमंत्री  साय ने लोगों से आग्रह किया कि गायों को लावारिस न छोड़ा जाए। लावारिस पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। गौवंश की रक्षा करना हम सबका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गोचर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। विकसित भारत के संकल्प के साथ ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा पूरा मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का संकल्प है। यह संकल्प सबकी सहभागिता से ही पूरा होगा और इसे साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ ही अंजोर विजन-2047 (छत्तीसगढ़ विजन) डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य के सर्वांगीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में सहयोग करना चाहिए।