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सेवा की कहानी: पहाड़ी कोरवा बस्ती के नन्हे कदमों को मिला बेहतर माहौल, लालमाटी में नया आंगनबाड़ी भवन बना पोषण और सीखने का केंद्र

रायपुर दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती के नन्हे बच्चों को अब पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और नियमित गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है। सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड की ग्राम पंचायत लालमाटी स्थित पहाड़ी कोरवा बस्ती में 11.69 लाख रुपये की लागत से नया आंगनबाड़ी भवन तैयार किया गया है। स्थायी भवन उपलब्ध होने से बच्चों को एक ही स्थान पर आंगनबाड़ी की विभिन्न सेवाओं से जोड़ने की राह आसान हुई है। वहीं माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं और जानकारियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शासन की योजनाओं और विभागीय अभिसरण के माध्यम से दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में बना नवीन आंगनबाड़ी भवन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 11.69 लाख रुपये में तैयार हुआ नया आंगनबाड़ी भवन पहाड़ी कोरवा बस्ती में नवीन आंगनबाड़ी भवन का निर्माण वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से 11.69 लाख रुपये की लागत से किया गया है। नया भवन मिलने से केंद्र की गतिविधियों के नियमित और व्यवस्थित संचालन के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है। इससे बच्चों के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने के साथ आंगनबाड़ी की सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने में भी सहूलियत हुई है। दूरस्थ बस्ती में ही केंद्र उपलब्ध होने से बच्चों और महिलाओं को विभिन्न सेवाओं एवं गतिविधियों से जोड़ना आसान हुआ है। पहाड़ी कोरवा बच्चों को मिला पोषण और सीखने का बेहतर माहौल आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती में नया भवन बनने से बच्चों के लिए नियमित गतिविधियों के संचालन की बेहतर व्यवस्था हुई है। अब उन्हें निर्धारित स्थान पर पोषण संबंधी सेवाओं के साथ प्रारंभिक शिक्षा और विभिन्न गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। स्थायी भवन से बच्चों को नियमित रूप से केंद्र से जोड़ने और उनके पोषण एवं प्रारंभिक विकास से संबंधित गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में सहायता मिल रही है। अभिभावकों के लिए भी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचाना सुविधाजनक हुआ है। माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी बना सेवाओं का केंद्र नया आंगनबाड़ी भवन केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो रहा है। केंद्र के माध्यम से उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न सेवाओं के साथ पोषण, मातृ एवं शिशु देखभाल तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों से जोड़ा जा रहा है। नया भवन उपलब्ध होने से इन गतिविधियों के आयोजन के लिए भी एक निश्चित स्थान मिला है। बच्चों, माताओं और किशोरी बालिकाओं को एक ही छत के नीचे सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था ने दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती में आंगनबाड़ी केंद्र की पहुंच और उपयोगिता को मजबूत किया है। विभागीय अभिसरण से दूरस्थ जनजातीय बस्ती तक पहुंची सुविधा वीबी जी राम जी और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से तैयार यह भवन दूरस्थ जनजातीय बसाहटों में आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में उपयोगी पहल बनकर सामने आया है। इससे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के साथ महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं के लिए भी स्थानीय स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत लालमाटी की पहाड़ी कोरवा बस्ती की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि योजनाओं के अभिसरण से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाकर बच्चों और महिलाओं को उनके गांव में ही बेहतर सेवाओं से जोड़ा जा सकता है।

कम समय, कम खर्च और आसान प्रक्रिया—साविता ने महसूस किया पंजीयन सेवाओं में बदलाव

रायपुर कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए अधिक समय लगना और उसके बाद नामांतरण के लिए अलग से प्रक्रिया पूरी करना नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता था। पंजीयन सेवाओं में किए गए सुधारों से अब यह तस्वीर बदल रही है। सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जमकानी निवासी श्रीमती साविता पैंकरा ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। कम समय में उनकी रजिस्ट्री पूरी हुई, महिला होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली, पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ी और रजिस्ट्री की प्रति भी सीधे मोबाइल पर प्राप्त हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की पहल से पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं। महिलाओं को पंजीयन शुल्क में राहत देने के साथ रजिस्ट्री और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से आसान बनाया जा रहा है। इन सुधारों से नागरिकों का समय और खर्च कम होने के साथ कार्यालयों की अनावश्यक दौड़भाग भी घट रही है। पहले एक दिन में नहीं होता था काम, अब कम समय में पूरी हुई रजिस्ट्री श्रीमती साविता पैंकरा ने बताया कि पहले संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया में अधिक समय लगता था और कई बार एक दिन में काम पूरा नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था में उन्हें कम समय में पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने की सुविधा मिली। महिला हितग्राही होने के कारण पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का खर्च भी कम हुआ। इस तरह साविता को एक साथ दोहरी राहत मिली—एक ओर शुल्क में बचत हुई, वहीं दूसरी ओर कम समय में पंजीयन पूरा होने से समय और अनावश्यक दौड़भाग से भी राहत मिली। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण ने खत्म किया अलग प्रक्रिया का इंतजार पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाया गया है। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के माध्यम से रजिस्ट्री होने के बाद राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में बार-बार जाने की आवश्यकता कम हुई है। श्रीमती साविता पैंकरा को भी इस सुविधा का लाभ मिला। पंजीयन के बाद उनके नाम से नामांतरण की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ी। इससे संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद अलग से नामांतरण के लिए इंतजार और कार्यालयीन प्रक्रिया की परेशानी कम हुई। मोबाइल पर मिली रजिस्ट्री की प्रति, डिजिटल सुविधाओं ने आसान किया काम तकनीक के उपयोग से पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापित की जाती है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाओं से नागरिकों के लिए रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हुई है। पंजीयन शुल्क का भुगतान नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसे डिजिटल माध्यमों से भी किया जा सकता है। श्रीमती साविता को रजिस्ट्री पूरी होने के बाद उसकी प्रति सीधे मोबाइल पर प्राप्त हुई। इससे पंजीकृत दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया भी उनके लिए आसान हुई। साविता की कहानी—बदलती पंजीयन व्यवस्था का जमीनी अनुभव श्रीमती साविता पैंकरा का अनुभव पंजीयन सेवाओं में आए बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करता है। कम समय में रजिस्ट्री, महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की राहत, ऑटोम्यूटेशन से आसान नामांतरण और मोबाइल पर रजिस्ट्री की प्रति—इन सुविधाओं ने उनके लिए पूरी प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सहज बनाया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से पंजीयन विभाग हितग्राहियों से सीधे संवाद कर इन्हीं बदलावों के अनुभव और सुझाव संकलित कर रहा है। साविता की कहानी बताती है कि तकनीक और प्रक्रिया के सरलीकरण से पंजीयन सेवा अब कम समय, कम खर्च और अधिक सुविधा की दिशा में आगे बढ़ रही है।

हर घर जल रिपोर्टेड गांवों में 2 अक्टूबर को आयोजित होंगे जल अर्पण कार्यक्रम, पूर्ण योजनाएं संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएंगी

रायपुर जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल रिपोर्टेड ऐसे गांव जहां काम पूर्ण हो चुके है और 15 दिनों का सफल ट्रायल रन पूरा हो चुका है, उन गांवों में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर जल अर्पण कार्यक्रमों का आयोजन कर पेयजल योजनाओं को संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किए जाएंगे। जल जीवन मिशन के संचालक ने सभी कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। मिशन संचालक द्वारा कलेक्टरों को जारी परिपत्र में कहा गया है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के ऐसे 'हर घर जल' (HGJ) रिपोर्टेड ग्राम, जहाँ पेयजल आपूर्ति योजनाओं से संबंधित कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुके हैं, किन्तु अब तक न तो उनका 'हर घर जल' (HGJ) प्रमाणीकरण हुआ है और न ही संबंधित ग्राम पंचायत एवं समुदाय को योजनाओं का हस्तांतरण किया गया है, ऐसे सभी 'हर घर जल' रिपोर्टेड ग्रामों में पेयजल आपूर्ति योजनाओं का न्यूनतम 15 दिनों का सफल ट्रायल रन पूर्ण करते हुए 'हर घर जल' प्रमाणीकरण एवं "जल अर्पण दिवस" कार्यक्रम के माध्यम से योजनाओं को संबंधित ग्राम पंचायत एवं समुदाय को निर्धारित हैंडओवर-प्रोटोकॉल के अनुसार विधिवत हस्तांतरण किया जाना है। मिशन संचालक ने 2 अक्टूबर को ग्राम पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभा के दौरान अधिक से अधिक 'हर घर जल' रिपोर्टेड ग्रामों में "जल अर्पण" कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जलापूर्ति योजनाओं के हस्तांतरण हेतु निर्धारित हैंडओवर-प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक मापदंडों का पूर्व सत्यापन एवं नियमानुसार दस्तावेजीकरण समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा है, ताकि विशेष ग्राम सभा में हस्तांतरण एवं प्रमाणीकरण की कार्यवाही सुचारू रूप से संपन्न हो सके। मिशन संचालक ने जल अर्पण कार्यक्रम के माध्यम से हस्तांतरित योजनाओं एवं 'हर घर जल' प्रमाणन से संबंधित ग्रामों की सभी अद्यतन प्रगति/डॉटा/रिपोर्ट, पूर्णता प्रमाण-पत्र, ओएंडएम मैनुअल, एज-बिल्ट ड्राइंग्स (As-built drawings), जल गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और प्रिवेन्टिव मेन्टेनेंस शेड्यूल (Preventive Maintenance Schedule) इत्यादि को जल जीवन मिशन के आईएमआईएस पोर्टल (Jal Arpan Digital Module) पर नियमित एवं समयबद्ध रूप से एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को आईएमआईएस पोर्टल में ये सभी प्रविष्टियां जल अर्पण कार्यक्रम के आयोजन के एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण करने को कहा गया है।

100 रुपए की बचत से शुरू हुआ सफर, आटा-दाल चक्की ने शशिकला को बनाया आत्मनिर्भर

​रायपुर "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है; पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की यह कहावत छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। जीवन में बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा किसी बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनवरत मेहनत और सही मार्गदर्शन से छोटी-सी शुरुआत भी सफलता की एक नई इबारत लिख सकती है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ की निवासी मती शशिकला साहू की कहानी आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक नई किरण बनकर उभरी है। कभी साधारण आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित रहने वाली शशिकला, आज स्वयं की आटा और दाल चक्की की एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। 'सेवा संकल्प अभियान' के दौरान सामने आई उनकी यह प्रेरक यात्रा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला श्रमशक्ति के अनूठे मेल की सुंदर मिसाल पेश करती है।           ​ पति  रूपनारायण साहू के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए शशिकला के मन में लंबे समय से स्वयं की आय का एक स्थायी साधन खड़ा करने की तीव्र इच्छा थी। उनकी इस सोच को धरातल पर उतारने का अवसर तब मिला, जब उन्होंने 11 सितंबर 2018 को गांव के 'दुर्गा स्वयं सहायता समूह' से जुड़कर स्वावलंबन की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाया। इस सफर की शुरुआत बेहद सामान्य थी, जहाँ उन्होंने समूह में हर महीने महज 100 रुपये की छोटी बचत से शुरुआत की। अनुशासन और नियमितता के बल पर जमा की गई यही छोटी-सी राशि आगे चलकर उनके स्वरोजगार की मजबूत बुनियाद बनी।          ​ छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़ने के बाद शशिकला को वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ आजीविका के नए रास्ते तलाशने का दिशा-निर्देश मिला। समूह में उनके अनुशासित योगदान को देखते हुए छह महीने के भीतर बैंक द्वारा समूह को 1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इस आर्थिक संबल ने शशिकला के सपनों को नई उड़ान दी और उन्होंने इस राशि से गांव में ही अपनी पहली आटा चक्की स्थापित की। इससे न केवल ग्रामीणों को अपने ही गांव में गेहूं पिसाने की सुविधा मिलने लगी, बल्कि शशिकला को भी अपने घर-परिवार के पास रहकर ही 150 से 200 रुपये की दैनिक आय होने लगी। इस प्रारंभिक सफलता से मिले आत्मविश्वास ने उनके हौसले को और बढ़ा दिया।        ​ व्यवसाय की बढ़ती मांग को देखते हुए शशिकला ने अपने काम का विस्तार करने का फैसला किया और बैंक से दूसरी बार ऋण लेकर दाल और गेहूं पिसाई के लिए अलग-अलग आधुनिक मशीनें लगाईं। इस विस्तार से उनकी सेवाओं का दायरा बढ़ा और आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे इस प्रसंस्करण इकाई के जरिए प्रतिदिन 200 से 300 रुपये तक कमा रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय लगभग 9 हजार रुपये तक पहुँच गई है। जो सफर महज 100 रुपये की मासिक बचत से शुरू हुआ था, वह आज एक समृद्ध स्वरोजगार का रूप ले चुका है।         ​ अपनी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए मती शशिकला साहू भावुक होकर कहती हैं कि बिहान योजना ने उनके जीवन को एक नई दिशा और पहचान दी है। इससे उन्हें आर्थिक संबल तो मिला ही है, साथ ही समाज में सिर उठाकर जीने का आत्मविश्वास भी हासिल हुआ है। आज वे अपने परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में बराबरी की भागीदार हैं और इसके लिए वे बिहान योजना तथा छत्तीसगढ़ सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के दूरस्थ अंचल से उभरी शशिकला साहू की यह कहानी यह सिद्ध करती है कि जब योजना से मिला अवसर मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आता है। आज शशिकला न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक चमकता हुआ प्रतीक बन चुकी हैं।

डेटा लेबलिंग और एआई में बलरामपुर ने रचा इतिहास

रायपुर छत्तीसगढ़ का बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा लेबलिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहाँ कॉग्निटिव डेटा एनोटेशन सेंटर की स्थापना की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के शिक्षित ग्रामीण युवाओं और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को एआई आधारित अत्याधुनिक रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराना है। प्रिज्मा एआई के साथ हुआ एमओयू कलेक्ट्रेट कक्ष में जिला प्रशासन बलरामपुर-रामानुजगंज और प्रिज्मा एआई के बीच इस सेंटर की स्थापना के लिए एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी, प्रिज्मा एआई के सीईओ डॉ. श्रीराम अय्यर, सीओओ श्री अमिताभ राय चौधरी, सीटीओ श्री विनीत कुमार झा तथा स्व-सहायता समूह की सदस्य सुश्री सपना व सुश्री अनुजा प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। पायलट चरण की मुख्य विशेषताएं  पायलट चरण के तहत बलरामपुर में 10 सीटों का सेंटर शुरू होगा, जिसमें एक समर्पित प्रशिक्षक और गुणवत्ता पर्यवेक्षक तैनात रहेंगे। चयनित प्रतिभागियों को एआई साक्षरता, डिजिटल कौशल, डेटा लेबलिंग, इमेज एवं ऑब्जेक्ट टैगिंग, वर्गीकरण, सत्यापन और गुणवत्ता समीक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभ्यर्थियों की पहचान, छंटनी और चयन एक संरचित प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ेंगी लखपति दीदी  कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 12वीं उत्तीर्ण और स्नातक सदस्यों वाले स्व-सहायता समूहों का बड़ा दायरा है जो स्मार्टफोन और कंप्यूटर चलाने में दक्ष हैं। यह केंद्र पारंपरिक आजीविका से जुड़ी दीदियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़कर स्थानीय स्तर पर ही सम्मानजनक और नियमित आय दिलाएगा, जिससे लखपति दीदी के लक्ष्य को गति मिलेगी। व्यय और जिम्मेदारियों का विभाजन एमओयू के तहत केंद्र की तकनीक, संचालन, प्रशिक्षण, गुणवत्ता पर्यवेक्षण, प्रतिभागियों के पारिश्रमिक, प्रोत्साहन राशि और इंटरनेट कनेक्टिविटी का पूरा खर्च प्रिज्मा एआई द्वारा वहन किया जाएगा। वहीं, जिला प्रशासन परिसर व बुनियादी ढांचे की पहचान, हितग्राहियों के चयन, एनआरएलएम व कौशल विकास विभागों से समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करेगा। यह अनूठी पहल जनजातीय बहुल क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में एक मील का पत्थर साबित होगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय स्थित कार्यालय में आगंतुकों से की मुलाकात

रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय, नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आज विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों एवं आगंतुकों से मुलाकात की। मंत्री  अग्रवाल ने सभी से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित विषयों की जानकारी ली। मुलाकात के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं से मंत्री  अग्रवाल को अवगत कराया। मंत्री ने प्रत्येक आगंतुक की बात ध्यानपूर्वक सुनी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नागरिकों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं का नियमानुसार परीक्षण कर उनका यथासंभव शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, जिन मामलों में अन्य विभागों से समन्वय की आवश्यकता है, उनमें संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि सरकार की योजनाओं और नीतियों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए जनता से निरंतर संवाद और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार के बीच जनता का सीधा संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि ’जनता से जुड़े रहना और उनकी बात सुनना ही सुशासन की पहली सीढ़ी है।' नागरिकों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की दिशा में प्रभावी पहल करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों की शिकायतों और सुझावों को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई की जाए। मंत्रालय में मंत्री से मिलने पहुंचे लोगों ने भी अपनी बात सुने जाने और समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपने क्षेत्र के विकास, जनहित से जुड़े विषयों तथा अन्य आवश्यकताओं से संबंधित सुझाव भी साझा किए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनता के सुझावों और अनुभवों से शासन को जमीनी स्तर की आवश्यकताओं को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और जनहित से जुड़े विषयों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से

रायपुर बस्तर क्षेत्र के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने बस्तर ओलंपिक के तीसरे संस्करण के लिए पंजीयन 1 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे। तीन चरणों में आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक के विकासखंड स्तरीय आयोजन नवम्बर में होंगे। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बस्तर संभाग के आयुक्त और सभी जिलों के कलेक्टरों को बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। बस्तर ओलंपिक में जूनियर वर्ग में 14 से 17 वर्ष आयु के बालक-बालिकाएं तथा सीनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे। नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों एवं पुनर्वासित सदस्यों की प्रतिभागिता सीधे संभाग स्तर पर सुनिश्चित की जाएगी। 1 से 30 अक्टूबर तक होगा पंजीयन बस्तर ओलंपिक के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए 1 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक पंजीयन किए जाएंगे। नवम्बर और दिसम्बर में विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर इनके चरणबद्ध आयोजन होंगे। विकासखंड स्तर की प्रतियोगिताएं 1 नवम्बर से 13 नवम्बर तक, जिला स्तर की प्रतियोगिताएं 16 नवम्बर से 25 नवम्बर तक तथा संभाग स्तर की प्रतियोगिताएं 7 दिसम्बर से 11 दिसम्बर तक प्रस्तावित हैं।  बस्तर ओलंपिक के अंतर्गत एथलेटिक्स में 100 मीटर, 200 मीटर एवं 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो और 4×100 मीटर रिले रेस शामिल हैं। तीरंदाजी (30 मीटर एवं 50 मीटर), बैडमिंटन, फुटबॉल, कराते, कबड्डी, खो-खो और वॉलीबॉल की भी स्पर्धाएं होंगी। हॉकी एवं वेटलिफ्टिंग का आयोजन सीधे जिला स्तर पर किया जाएगा। वहीं सीनियर महिला वर्ग के लिए रस्साकसी को प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में शामिल किया गया है।  बस्तर ओलंपिक के पिछले दो संस्करण रहे काफी सफल बस्तर के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता एवं खेल प्रतिभा को पहचान कर खिलाड़ी के रूप में तैयार करने वर्ष 2024 में राज्य शासन द्वारा बस्तर ओलंपिक के पहले संस्करण का आयोजन किया गया था। पहले संस्करण में एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भागीदारी की थी। वहीं वर्ष 2025 में आयोजित दूसरे संस्करण में 3 लाख 91 हजार खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया था। बस्तर के युवाओं को प्रेरित करने पहले संस्करण में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले 13 और दूसरे संस्करण के 18 खिलाड़ियों को यूथ आइकॉन के रूप में चिन्हित किया गया था।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की पहल पर भरदा में जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान

रायपुर दुर्ग जिले के ग्राम भरदा में विगत 26 सितंबर को अतिवृष्टि और जलभराव से उत्पन्न गंभीर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री  गजेंद्र यादव की त्वरित पहल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से भेंट के दौरान ग्रामीणों और किसानों द्वारा की गई मांग पर संज्ञान लेते हुए, जिला प्रशासन ने 12.87 लाख रूपए की लागत से पक्की निकासी नाली निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।     आवंटन कुल 12.87 लाख रूपए के इस निर्माण कार्य में 2.56 लाख रूपए मजदूरी मद के लिए और 10.31 लाख रूपए सामग्री मद के लिए आवंटित किए गए हैं। यह कार्य वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत कराया जाएगा। यह निकासी नाली पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनाई जाएगी, जिससे बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव से स्थायी रूप से मुक्ति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाएं   जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत विकास कार्यों को स्थानीय मूलभूत आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत मांग करने वाले पात्र ग्रामीणों को 15 दिवस के भीतर 300 रूपए प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। नाली निर्माण की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के तत्काल सर्वेक्षण के निर्देशों पर ग्रामवासियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक नशामुक्ति पदयात्रा में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा में शामिल हुए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ मुख्यमंत्री  साय ने पदयात्रा कर नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया। पदयात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री  साय ने लाल चौक स्थित लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नशामुक्त और स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। नशा केवल किसी एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। युवा स्वस्थ होंगे, शिक्षित और कुशल होंगे तथा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो प्रदेश तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, खेल और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग अपने परिवार, समाज और प्रदेश की प्रगति में करे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। महात्मा गांधी ने संयम, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया था। ऐसे में नशामुक्ति का यह अभियान उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सेवा को सर्वोपरि रखा है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी शासन की यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के विभिन्न कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री  मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रदेशभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही युवाओं को सेवा और राष्ट्र निर्माण के भाव से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गुजरात के वडनगर से निकले बाइक राइडर्स का रायपुर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस यात्रा में बस्तर के युवा भी उत्साहपूर्वक सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा, जिसके कारण वहां विकास की गति बाधित हुई। आज क्षेत्र में शांति और विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार तथा रोजगार के अवसरों के विस्तार पर तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित करने के लिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर सहित आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए द्वार खुलेंगे। हमारा लक्ष्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो नशे से दूर रहकर अपने सामर्थ्य, परिश्रम और नवाचार से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बने। मुख्यमंत्री  साय ने विधायक  पुरंदर मिश्रा द्वारा विगत 27 वर्षों से नशामुक्ति, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसे सामाजिक विषयों को लेकर पदयात्रा आयोजित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आता है। जब कोई अभियान समाज का अभियान बन जाता है, तभी उसके स्थायी और व्यापक परिणाम सामने आते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि इन पदयात्राओं से प्रेरित होकर अब तक हजारों लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह भी अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा और विशेष रूप से युवाओं को स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवाओं से आह्वान किया कि वे नशामुक्ति के संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समाज तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ युवा, एक स्वस्थ परिवार और एक जागरूक समाज मिलकर ही स्वस्थ, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  पुरंदर मिश्रा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  गौरीशंकर वास, फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मती मोना सेन, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मती ममता साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं एवं आमजन उपस्थित थे।

पुलिस मुख्यालय में नारकोटिक्स मामलों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन पर राज्यस्तरीय कार्यशाला

रायपुर  नारकोटिक्स के मामलों में केवल आरोपियों तक पहुंचने के बजाय नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स प्रकरणों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेशभर से उप पुलिस अधीक्षक से सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 70 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स  अमित कुमार ने कहा कि नारकोटिक्स के मामलों में अपराधियों को सजा दिलाने के साथ ही उनके द्वारा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान और जब्ती कर वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना आवश्यक है। इसके लिए प्रभावी और व्यापक विवेचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नारकोटिक्स पदार्थ कहां से आ रहा है, कौन इसकी आपूर्ति कर रहा है और इसे किस तक पहुंचाया जा रहा है, इन सभी पहलुओं पर फॉरवर्ड एवं बैकवर्ड लिंक स्थापित करते हुए वित्तीय जांच की जानी चाहिए। इससे नशे के कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की पहचान कर उसके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। उप पुलिस महानिरीक्षक, नारकोटिक्स मती पारुल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना में विभिन्न संबंधित एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नशे के कारोबार से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान और उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने नारकोटिक्स की सप्लाई रिडक्शन, डिमांड रिडक्शन, हार्म रिडक्शन और रिहैबिलिटेशन के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग, रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर  प्रकाश चंद्र चौहान ने विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि वित्तीय जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि नशे के अवैध कारोबार में अवैध धन कहां से आ रहा है और उसे कहां निवेश किया जा रहा है। द्वितीय सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स, रायपुर के एडिशनल असिस्टेंट डायरेक्टर  सलमान इम्तियाज हुसैनी ने जीएसटी के विश्लेषण के माध्यम से अवैध धन और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मती अनामिका जैन सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।