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सऊदी ग्रैंड प्रिक्स में छत्तीसगढ़ के अनिमेष का कमाल, दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान

रायपुर. छत्तीसगढ़ के युवा धावक अनिमेष कुजुर ने सऊदी अरब में आयोजित सऊदी ग्रैंड प्रिक्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो पदक अपने नाम किए हैं। अनिमेष ने 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया, जबकि 100 मीटर स्पर्धा में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। अनिमेष कुजुर इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। वे वर्तमान में 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक भी हैं। उनकी इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ के खेल जगत में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और एथलेटिक्स से जुड़े लोगों ने इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया है। खेल पदाधिकारियों और प्रशिक्षकों ने दी बधाई सऊदी ग्रैंड प्रिक्स में शानदार प्रदर्शन के बाद एथलेटिक्स संघ से जुड़े पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रेमियों ने अनिमेष कुजुर को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा अलर्ट, रायपुर में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो फंसेंगे

रायपुर. राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो के ऑनलाइन पंजीयन के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस अभियान का शुभारंभ किया। जनहित फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए क्यूआर कोड और ऑनलाइन पंजीयन लिंक के जरिए ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पूरी जानकारी होगी दर्ज ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में ई-रिक्शा मालिक और चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस अभियान से राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। साथ ही वाहन संचालकों का पूरा डेटा भी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। बिना पंजीयन पर होगी कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने 5 जून तक विशेष पंजीयन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 5 जून के बाद बिना पंजीयन के संचालित होने वाले ई-रिक्शा और ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

समर वेकेशन में खुल रहे स्कूलों पर कड़ा एक्शन, DEO को DPI का आदेश जारी

रायपुर. भीषण गर्मी के बीच ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूल संचालित करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर अब कार्रवाई की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को ऐसे स्कूलों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए भी कहा गया है। 20 अप्रैल से 15 जून तक घोषित है ग्रीष्मकालीन अवकाश राज्य सरकार की ओर से सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालयों में 20 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों में बच्चों को बुलाकर नियमित कक्षाएं संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। आदेश की अनदेखी कर स्कूल चला रहे कई निजी संस्थान जानकारी के मुताबिक कुछ अशासकीय विद्यालय शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभिन्न कारणों से स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। शासन ने इसे आदेश का उल्लंघन माना है और ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हाल ही में हाई कोर्ट ने भी अवकाश अवधि के दौरान निजी स्कूलों में कक्षाएं संचालित किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

ग्राम सोनझरी में ‘हर घर जल ग्राम” के रूप में मिली नई पहचान’

कबीरधाम/रायपुर. कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनझरी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी है। वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे इस गांव में अब हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है और गांव को “हर घर जल ग्राम” के रूप में नई पहचान मिली है। पहले ग्राम सोनझरी में खासकर गर्मी के दिनों में, गांव के लोगों को पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को पानी लाने के लिए तपती धूप में दूर-दूर तक जाना पड़ता था और घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। पानी के इस इंतजाम में उनका काफी समय और मेहनत बर्बाद हो जाती थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी और बच्चों की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता था। इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत गांव में तेजी से काम किया गया। इसके अंतर्गत सोनझरी गांव में पाइपलाइन का विस्तार किया गया, जल स्रोतों को सुधारा गया और एक ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया गया। इसके बाद गांव के सभी घरों में घरेलू नल कनेक्शन देकर नियमित रूप से पानी की सप्लाई शुरू की गई। गांव की एक बुजुर्ग निवासी पंचकुंवर बाई ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले इस उम्र में दूर से पानी लाना उनके लिए सबसे मुश्किल काम था, और सुबह होते ही पानी की चिंता सताने लगती थी। लेकिन अब घर के पास ही साफ पानी मिलने से उनका जीवन बेहद आसान हो गया है। उन्होंने इसके लिए शासन और प्रशासन का आभार जताया है। सोनझरी गांव में आई इस बड़ी तब्दीली के बाद अब चौतरफा सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। महिलाओं का कीमती समय बच रहा है, बच्चों की पढ़ाई अब बाधित नहीं होती और साफ पानी मिलने से जलजनित बीमारियों में भी भारी कमी आई है। इस सफलता को आधिकारिक रूप देने के लिए बीते 13 मई 2026 को सोनझरी में एक ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। इस बैठक में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ष्हर घर जलष् प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया गया और सोनझरी को आधिकारिक रूप से “हर घर जल ग्राम” घोषित कर दिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन केवल पानी पहुंचाने की योजना नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण जीवन में सुविधा, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मान का नया सवेरा लाया है।

चार दशक बाद पहली बार गांव पहुंचा प्रशासन, जनगणना कार्य संपन्न

रायपुर  लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और भय के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा रहा बीजापुर जिले का दारेली गांव, अब बदलाव और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। पिछले चार दशकों से इस क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक गतिविधि नहीं हो पाई थी, यहाँ तक कि वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से भी यह गांव वंचित रह गया था, लेकिन अब इतिहास बदलते हुए पहली बार जिला प्रशासन की टीम सीधे दारेली गांव पहुंची और वहां सुचारू रूप से जनगणना का कार्य संपन्न कराया।            मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब उन सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले विकास की कल्पना करना भी बेहद कठिन था। प्रशासनिक अमले का ऐतिहासिक दौरा और आत्मीय स्वागत          इसी कड़ी में कलेक्टर बीजापुर  विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ मती नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी  मुकेश देवांगन तथा उसूर एसडीएम  भूपेंद्र गावरे ने दारेली गांव का सघन दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने उनका आत्मीय और भावुक स्वागत किया। ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ है कि शासन-प्रशासन उनके द्वार तक पहुंचा है। इस दौरान गांव में हुए जनगणना कार्य को ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक और सुखद पहल बताया। शिविर लगाकर बुनियादी दस्तावेज बनाने के निर्देश           कलेक्टर बीजापुर ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और जमीन के पट्टे, आधार कार्ड, बैंक खाते तथा राशन कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की उपलब्धता की समीक्षा की। कई ग्रामीणों के दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्होंने मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांव में विशेष शिविर का आयोजन किया जाए, ताकि सभी पात्र ग्रामीणों का शत-प्रतिशत सैचुरेशन (दस्तावेजीकरण) सुनिश्चित हो सके। मौके पर ही संवेदनशील संज्ञानरू किसान की समस्या का त्वरित समाधान             भ्रमण के दौरान एक स्थानीय किसान ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई कि उसके पिता के निधन के बाद भी लंबे समय से जमीन का नामांतरण नहीं हो पाया है। इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद राजस्व अधिकारियों को नामांतरण प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के कड़े निर्देश दिए और कहा कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी करेंगे। प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली को देखकर किसान भावुक हो गया और उसने अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। जनकल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति की घोषणा            कलेक्टर ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत दारेली के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के भी निर्देश दिए। जो दारेली गांव कभी भय, उपेक्षा और सन्नाटे का प्रतीक माना जाता था, वह आज विकास, आपसी विश्वास और नई उम्मीदों की राह पर कदम बढ़ा चुका है। प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने ग्रामीणों के भीतर शासन के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत किया है।

संताय पोटाई को शिविर में ही मिला नया राशन कार्ड

रायपुर      छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार द्वारा राज्य में सुशासन की नई परिभाषा लिखी जा रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण 'सुशासन तिहार 2026' के रूप में सामने आ रहा है, जो ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए एक बड़ा राहत का माध्यम बन चुका है। जिले के दूरस्थ अंचलों में आयोजित समाधान शिविरों के जरिए प्रशासन सीधे जनता के द्वार पहुँच रहा है, जिससे वर्षों से लंबित समस्याओं का मौके पर ही निपटारा हो रहा है।    ​ इसी कड़ी में नारायणपुर के ग्राम भाटपाल से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। यहाँ के ग्रामीण संताय पोटाई के लिए यह सुशासन तिहार उनके जीवन में एक नई सुबह लेकर आया, जब उन्हें शिविर में ही उनका नया राशन कार्ड तैयार कर सौंप दिया गया। ​वर्षों का इंतजार मिनटों में खत्म       ​संताय पोटाई ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण उनका परिवार जनवितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले रियायती खाद्यान्न से वंचित था। उन्होंने पहले भी कई प्रयास किए, लेकिन भौगोलिक दूरी और प्रक्रियाओं के चलते बात नहीं बन पा रही थी। इस पर उन्होंने कहा कि मैं थक चुका था, लेकिन सुशासन तिहार के शिविर ने मेरी चिंता दूर कर दी। मैंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी और देखते ही देखते त्वरित कार्रवाई करते हुए मेरा नया राशन कार्ड मेरे हाथों में सौंप दिया गया। अब हमारे घर में भी नियमित रूप से सरकारी राशन आएगा। ​मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का जताया आभार      ​नया राशन कार्ड मिलने से संताय पोटाई और उनके परिवार के चेहरे खिल उठे हैं। अब उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती दर पर चावल, शक्कर और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री नियमित रूप से मिल सकेगी। इस त्वरित न्याय के लिए संताय ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सचमुच ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जहाँ दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सरकार खुद गांव आकर काम कर रही है। ​'सुशासन तिहार' से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़      ​ जिला प्रशासन नारायणपुर के मार्गदर्शन में इन शिविरों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई को सरल बनाकर अंतिम व्यक्ति तक लोकतंत्र और विकास का लाभ पहुँचाना है। प्रशासन के इस रुख से न केवल आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासकीय योजनाओं की पहुँच भी शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो रही है।

बलौदाबाजार में ‘नेक्स्ट जेन डायल-112’ वाहनों को राजस्व मंत्री ने दिखाई हरी झंडी

रायपुर  प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आम जनता को त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने बुधवार को जिला मुख्यालय बलौदाबाजार स्थित रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन) परिसर से अत्याधुनिक तकनीकों से लैस 'नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112' वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।       ​ इस नए बेड़े में डायल-112 के 12 सामान्य वाहनों के साथ-साथ गंभीर सड़क हादसों से निपटने के लिए 2 हाई-वे पेट्रोलिंग वैन और त्वरित जांच के लिए 1 मोबाइल फॉरेंसिक वैन शामिल है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, कलेक्टर कुलदीप शर्मा और पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। ​मुख्यमंत्री की मंशानुरूप मजबूत होगी पुलिसिंग: मंत्री  टंक राम वर्मा वाहनों को रवाना करते हुए राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप प्रदेश में पुलिसिंग व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाया जा रहा है। इस आपातकालीन सेवा के विस्तार से जिले के सभी 12 थानों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे किसी भी दुर्घटना, अपराध या आपात स्थिति में केवल एक कॉल पर मिनटों के भीतर मदद पहुंचेगी। ​स्मार्टफोन, जीपीएस और डैश कैम से लैस हैं गाड़ियाँ अधिकारियों ने बताया कि ये नए वाहन पूरी तरह 'हाईटेक' हैं। इन अत्याधुनिक वाहनों में सुरक्षा और त्वरित एक्शन के लिए  जीपीएस (GPS), वायरलेस रेडियो, पीटीजेड (PTZ) कैमरा डैश कैम आदि से लाइव मॉनिटरिंग किया जा सकता है। कंट्रोल रूम से गाड़ियों की लोकेशन ट्रैक कर पीड़ित के सबसे नजदीकी वाहन को तुरंत मौके पर भेजा जाएगा। नागरिक अब केवल वॉयस कॉल ही नहीं, बल्कि एसएमएस, व्हाट्सएप, चैटबॉट, ईमेल और 'SOS-112 इंडिया ऐप' के माध्यम से भी सीधे मदद मांग सकेंगे  ​इस आधुनिक फ्लीट के आने से बलौदाबाजार जिले में अपराध नियंत्रण और सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती महत्वपूर्ण समय) में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी।

मिनपा स्वास्थ्य केंद्र बना उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल, देशभर में मिली पहचान

रायपुर सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र कभी नक्सलवाद, घने जंगलों और कठिन रास्तों के कारण विकास से दूर माना जाता था। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती थी। एक समय ऐसा था जब एक छोटी सी झोपड़ी में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई थीं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हार नहीं मानी और गांव-गांव पहुंचकर लोगों का इलाज किया। लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई गई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं के चलते मिनपा क्षेत्र में अब बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में यहां नया उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तैयार किया गया, जिसमें आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रयोगशाला कक्ष और आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था की गई। आज यह उप स्वास्थ्य केंद्र मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दूरस्थ गांवों के लगभग 3,593 ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी सुविधा बन चुका है। इस सफलता की सबसे बड़ी खासियत स्वास्थ्य कर्मचारियों का समर्पण है। पोट्टेमडगू, दुलेड़, गुंडराजपाड़ और भाटपाड़ जैसे पहुंचविहीन गांवों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को कठिन जंगल रास्तों से गुजरना पड़ता है। कई बार एक दिन में लौटना संभव नहीं हो पाता, तब कर्मचारी गांवों में रुककर ‘नाईट कैंप’ लगाते हैं और रात में भी मरीजों का उपचार करते हैं। इसी मेहनत और सेवाभाव का परिणाम है कि आज मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। हर महीने यहां लगभग 4 सुरक्षित प्रसव कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों का संस्थागत प्रसव के प्रति भरोसा लगातार बढ़ रहा है। मिनपा स्वास्थ्य केंद्र की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। 15 मई 2026 को इस केंद्र ने ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (NQAS) कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर और जिला प्रशासन की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। एक छोटी झोपड़ी से शुरू हुआ यह सफर आज राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों तक पहुंच चुका है। मिनपा की यह कहानी बताती है कि मजबूत संकल्प, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और कर्मचारियों की निष्ठा से सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचाई जा सकती है।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में फिटनेस और वेलनेस को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक — वित्त मंत्री ओपी चौधरी

रायपुर  वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने आज पुलिस लाइन उर्दना, रायगढ़ में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पुलिस जिम का लोकार्पण किया। उन्होंने रिबन काटकर जिम का शुभारंभ किया और जिम कक्ष में स्थापित भगवान हनुमान जी के चित्र पर पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना की। इस अवसर पर वित्त मंत्री  ओपी चौधरी ने जिम में स्थापित आधुनिक फिटनेस उपकरणों का अवलोकन किया और कहा कि वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में शारीरिक फिटनेस और मानसिक वेलनेस दोनों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम के लिए समय निकालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे जनसेवा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। यह आधुनिक जिम न केवल पुलिसकर्मियों बल्कि उनके परिवारजनों और स्थानीय युवाओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा तथा स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली को बढ़ावा देगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  शशि मोहन सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त रखने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए रायगढ़ पुलिस द्वारा योग, खेल और फिटनेस गतिविधियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसी उद्देश्य से पुलिस जिम का उन्नयन कर इसमें अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से पुलिसकर्मी नियमित व्यायाम कर अपनी फिटनेस बनाए रख सकेंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके स्वास्थ्य और कार्य प्रदर्शन दोनों पर पड़ेगा। कार्यक्रम में महापौर  जीवर्धन चौहान, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी,  सभापति  डिग्रीलाल साहू सहित  जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने दिखाई हरी झंडी, मिलेंगी आपातकालीन सेवाएँ

रायपुर  कोरबा जिले को 22 नए डायल 112 वाहनों की सौगात प्राप्त हुई है। आज बुधवार कोरबा में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने औपचारिक कार्यक्रम में इन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये आधुनिक वाहन उन्नत तकनीक से लैस हैं, जिनमें आधुनिक कैमरा, डैश कैमरा, जीपीएस सिस्टम तथा स्मार्ट मोबाइल उपकरण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से नागरिकों को किसी भी आपात स्थिति में और अधिक त्वरित, सटीक एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। प्रदेश में छत्तीसगढ़ डायल-112 फेज-दो (नेक्स्ट जेन) के अंतर्गत अब सभी 33 जिलों में अत्याधुनिक आपातकालीन सेवा का विस्तार किया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश को कुल 400 अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल प्रदान किए गए हैं। इन वाहनों को 18 मई को केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया। डायल 112 सेवा के माध्यम से पुलिस, चिकित्सा, अग्निशमन, आपदा प्रबंधन, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं महिला हेल्पलाइन सहित विभिन्न आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे नागरिकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर समन्वित आपातकालीन सहायता मिल सकेगी। यह व्यवस्था आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ बनाते हुए जिला स्तर पर सुरक्षा एवं सेवाओं की उपलब्धता को बेहतर करेगी। कार्यक्रम के दौरान कटघोरा विधायक  प्रेमचंद पटेल, तथा जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह, महापौर मती संजू देवी राजपूत, कलेक्टर  कुणाल दुदावत, पुलिस अधीक्षक  सिद्धार्थ तिवारी उपस्थित थे। डायल 112 के नए वाहनों के शुभारंभ से जिले में आपातकालीन सेवाओं की पहुंच और क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जिससे नागरिकों को और अधिक सुरक्षित, त्वरित एवं विश्वसनीय सहायता मिल सकेगी।