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उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की

चयन ट्रायल के बाद छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए 130 खिलाड़ी शॉर्टलिस्टेड फ्रेंचाइजी टीमों के खिलाड़ियों के चयन के लिए 8 अक्टूबर को रायपुर में होगा प्लेयर ड्राफ्ट उप मुख्यमंत्री अरुण साव चयन ट्रायल के दोनों दिन पहुंचे हॉकी स्टेडियम, खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की रायपुर.  छत्तीसगढ़ हॉकी लीग (सीएचएल) के पहले सीजन के लिए आयोजित दो दिवसीय चयन ट्रायल आज रायपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में संपन्न हआ। ट्रायल के लिए कुल 373 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 223 खिलाड़ियों ने भाग लिया। दो दिवसीय चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के बाद 130 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों ने चयन ट्रायल में हिस्सा लिया और लीग के पहले सीजन में जगह बनाने के लिए अपना दमखम दिखाया। चयन प्रक्रिया के दौरान खिलाड़ियों के खेल कौशल, प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव लगातार दूसरे दिन ट्रायल स्थल पहुंचे। उन्होंने मैदान पर खिलाड़ियों का खेल देखा, उनसे मुलाकात की और उन्हें अपने खेल को और निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि निरंतर अभ्यास और मेहनत के माध्यम से अपने खेल को बेहतर बनाते रहें। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, "छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के लिए आयोजित चयन ट्रायल का सफल समापन राज्य की हॉकी प्रतिभाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 373 खिलाड़ियों का पंजीकरण और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से खिलाड़ियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि राज्य में हॉकी को लेकर उत्साह और प्रतिभा दोनों मौजूद हैं। 130 खिलाड़ियों का शॉर्टलिस्ट होना इस प्रक्रिया का एक अहम परिणाम है। अब इन खिलाड़ियों को प्लेयर ड्राफ्ट के माध्यम से लीग की छह टीमों का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। हमारी सरकार का उ‌द्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धी माहौल, आवश्यक अनुभव और आगे बढ़ने के अवसर मिलें।" उन्होंने सभी शॉर्टलिस्टेड खिलाड़ियों को आगामी ड्राफ्ट और लीग के लिए शुभकामनाएँ दीं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो, छत्तीसगढ़ हॉकी संघ के अध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव और सचिव फिरोज अंसारी भी इस दौरान मौजूद थे।   चयन ट्रायल के बाद अब लीग के पहले सीजन के लिए टीम गठन की दिशा में अगला महत्वपूर्ण चरण सीएचएल प्लेयर ड्राफ्ट होगा। 8 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होने वाले इस ड्राफ्ट में शॉर्टलिस्ट किए गए 130 खिलाड़ी शामिल होंगे। इन खिलाड़ियों में से छह फ्रेंचाइज़ी टीमें अपने-अपने खिलाड़ी दल का चयन करेंगी। इसके बाद लीग के पहले सीजन के लिए टीमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

आजीविका डबरी से लक्ष्मी प्रसाद को मिला दोहरा लाभ, मछली पालन से आमदनी और खेती को सिंचाई का सहारा

रायपुर, खेत में बनी आजीविका डबरी ने सरगुजा जिले के लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए आय और सिंचाई, दोनों का रास्ता खोल दिया है। डबरी में संग्रहित पानी में मछली पालन कर परिवार अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहा है, वहीं इसी पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की खेती की सिंचाई में भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष से मछली पालन कर रहे लक्ष्मी प्रसाद ने मछली बिक्री से लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित की है। बतौली विकासखंड निवासी लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि उनकी माता के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवार की जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी बनने के बाद उन्होंने इसे केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मछली पालन शुरू कर इसे अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बनाया। इससे परिवार को खेती के साथ आजीविका का एक और साधन मिला है। मछली पालन से लगभग एक लाख रुपये की आमदनी लक्ष्मी प्रसाद के अनुसार डबरी में मछली उत्पादन का आकलन करीब 20 क्विंटल तक है। मछली की बिक्री से उन्हें लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। वे हर साल डबरी में करीब 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं और मछलियों की बढ़वार एवं उत्पादन के अनुसार बिक्री करते हैं। लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं, “पिछले साल से मछली पालन कर रहा हूं। करीब 20 क्विंटल का आकलन है और मछली बेचकर लगभग एक लाख रुपये की आमदनी हुई है। हर साल 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं।” साग-सब्जी और गेहूं की खेती को भी मिल रहा पानी आजीविका डबरी ने परिवार के लिए सिंचाई की सुविधा भी बढ़ाई है। डबरी में संग्रहित पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे आवश्यकता के समय खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिल रही है। एक ही जल संरचना का उपयोग मछली पालन और खेती दोनों में होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। मछली पालन से जहां अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ है, वहीं सिंचाई की सुविधा से खेती को भी सहारा मिला है। जल संरक्षण के साथ आजीविका का बना आधार डबरी में बरसाती पानी के संग्रहण और उसके आजीविका गतिविधियों में उपयोग ने लक्ष्मी प्रसाद के परिवार के लिए नई संभावनाएं तैयार की हैं। उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग कर परिवार खेती के साथ मछली पालन को भी आगे बढ़ा रहा है। लक्ष्मी प्रसाद ने आजीविका डबरी की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि डबरी से मछली पालन के जरिए आय मिलने के साथ खेती-बाड़ी के लिए पानी उपलब्ध होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत लक्ष्मी प्रसाद की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि जल संरक्षण के लिए तैयार छोटी संरचना को आजीविका से जोड़कर ग्रामीण परिवार खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधन भी विकसित कर सकते हैं। आजीविका डबरी उनके परिवार के लिए जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन—तीनों का उपयोगी आधार बन गई है।

हुनर ने दी आत्मनिर्भरता की राह, ब्यूटी पार्लर से किरण को हर माह 12 से 20 हजार रुपये तक की आय

रायपुर कभी प्रशिक्षण के जरिए सीखा गया ब्यूटीशियन का हुनर आज श्रीमती किरण केरकेट्टा की आत्मनिर्भरता का आधार बन गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत छह माह का प्रशिक्षण लेने के बाद किरण ने छोटे स्तर पर अपना ब्यूटी पार्लर शुरू किया। धीरे-धीरे ग्राहक बढ़े और उनका हुनर नियमित आजीविका में बदल गया। आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर परिवार के खर्च में सहयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं, अपने साथ दूसरे लोगों को रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़कर उन्हें भी आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। अम्बिकापुर के पटेलपारा निवासी किरण केरकेट्टा बताती हैं कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से उन्हें छह माह का ब्यूटीशियन प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान सीखे हुनर को उन्होंने स्वरोजगार से जोड़ने का निर्णय लिया और अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। मेहनत के साथ उनका काम आगे बढ़ा और धीरे-धीरे ग्राहक जुड़ते गए। 12 से 20 हजार रुपये तक की मासिक आय से परिवार को मिला आर्थिक सहारा किरण के अनुसार वर्तमान में ब्यूटी पार्लर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 12 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। इस आय से वे परिवार की जरूरतों और घर के खर्च में सहयोग कर पा रही हैं। कौशल प्रशिक्षण से मिला हुनर उनके लिए अब केवल एक कला नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया है। किरण अपनी खुशी साझा करते हुए कहती हैं, “पीएम कौशल विकास के माध्यम से मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का मौका मिला। छह महीने ब्यूटीशियन का कोर्स करने के बाद मैंने अपना छोटा सा ब्यूटी पार्लर शुरू किया। इससे 12 से 20 हजार रुपये तक इनकम हो जाती है और घर का खर्च भी चल जाता है।” खुद बढ़ीं आगे, अब दूसरों को भी हुनर से जोड़ रहीं किरण किरण की सफलता केवल उनकी अपनी आजीविका तक सीमित नहीं है। अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ उन्होंने कुछ लोगों को रोजगार से भी जोड़ा है। इसके अलावा दो से चार महिलाएं उनके पास ब्यूटीशियन का काम सीख रही हैं। इस तरह उन्हें प्रशिक्षण से मिला हुनर अब दूसरे लोगों के लिए भी सीखने और आगे बढ़ने का माध्यम बन रहा है। किरण का कहना है कि कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला और अब उनके काम से दूसरे लोगों को भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। कौशल से स्वरोजगार और स्वरोजगार से दूसरों के लिए अवसर सेवा संकल्प अभियान के तहत किरण केरकेट्टा की यह ‘सेवा की कहानी’ कौशल प्रशिक्षण से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता तक के सफर को सामने लाती है। छह माह के प्रशिक्षण से मिले हुनर को उन्होंने अपनी मेहनत से नियमित आमदनी के साधन में बदला। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ अन्य महिलाओं को भी हुनर सीखने और आजीविका की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मल्हनिया जलाशय में बदली मछुआरों की जिंदगी

रायपुर  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, अधोसंरचना और बेहतर आजीविका के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव अब गांवों तक दिखाई दे रहा है। योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय मत्स्यपालन, केज कल्चर और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि मछुआरों और मछली किसानों की आय तथा रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो।  छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित ग्राम देवरगांव का मल्हनिया जलाशय इसका एक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफटी) के सहयोग से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित के सदस्यों ने पारंपरिक मत्स्याखेट के साथ आधुनिक पिंजरा मछली पालन यानी केज कल्चर को अपनाया है। इससे समिति के सदस्यों के लिए मछली उत्पादन, आय और रोजगार का नया आधार तैयार हुआ है। 54 केज ने बदली आजीविका की तस्वीर वर्ष 2002 से संचालित जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति में वर्तमान में 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हुए हैं। इनमें 26 सदस्य विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बैगा समुदाय से हैं। पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से जलाशय में पारंपरिक मत्स्याखेट कर मछली बेचकर अपनी आजीविका चलाते थे। जलाशय की लीज सहित अन्य खर्चों के बाद समिति की वार्षिक आय लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक सीमित थी। मछुआरों की आजीविका को अधिक स्थायी और आय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग एवं जिला प्रशासन ने आधुनिक पिंजरा मछली पालन को बढ़ावा दिया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और डीएमएफटी के संयुक्त सहयोग से मल्हनिया जलाशय में कुल 54 केज स्थापित किए गए हैं। केन्द्र की योजना, स्थानीय मेहनत और तकनीक का संगम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ मछुआरों एवं मछली किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना में जलाशयों में केज कल्चर सहित अंतर्देशीय मत्स्यपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।  मल्हनिया जलाशय में योजना का यही उद्देश्य स्थानीय स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। केज में उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। पारंपरिक मत्स्याखेट के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक जुड़ने से समिति के सदस्यों को अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार अवसर प्राप्त हो रहे हैं। एक साल में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति की आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। समिति द्वारा एक वर्ष में लगभग 10 से 15 लाख रुपये की मछली का विक्रय किया गया है। वर्तमान में केजों में लगभग 10 से 15 टन मछली उपलब्ध है। इस गतिविधि से समिति की आय के साथ-साथ सदस्यों को नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है। समिति के सदस्यों के अनुसार, केज कल्चर से उन्हें प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इससे परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और आजीविका के लिए केवल पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भरता कम हुई है। मछुआरों के हुनर को मिली आधुनिक तकनीक की ताकत मल्हनिया जलाशय की कहानी यह दिखाती है कि जब पारंपरिक आजीविका को आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग का साथ मिलता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वर्षों से जलाशय से जुड़े मछुआरों ने अपने पारंपरिक अनुभव को केज कल्चर की नई तकनीक के साथ जोड़ा है। इस बदलाव से मछुआरा समिति की आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और सदस्यों को वर्षभर रोजगार से जुड़ने का अवसर मिला है। विशेष रूप से बैगा समुदाय के सदस्यों की भागीदारी इस पहल को आजीविका सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाती है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आधुनिक मत्स्य तकनीक प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता, तकनीक, मूल्य श्रृंखला और मछुआरों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को प्रमुखता दी है। योजना के आधिकारिक उद्देश्यों में मत्स्य क्षेत्र की क्षमता का सतत उपयोग, आधुनिक तकनीक का विस्तार, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मछुआरों और मछली किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा शामिल है।  इसी व्यापक दृष्टिकोण का स्थानीय उदाहरण मल्हनिया जलाशय में दिखाई देता है, जहां सरकारी योजना के सहयोग से पारंपरिक मत्स्याखेट को आधुनिक केज कल्चर से जोड़ा गया है। इससे मछली उत्पादन के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन केन्द्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ हितग्राहियों तक पहुंचाने में राज्य स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह उदाहरण सामने आया है। मल्हनिया जलाशय में 54 केज की स्थापना, मछुआरा सहकारी समिति की भागीदारी और डीएमएफटी के सहयोग का समन्वय यह दर्शाता है कि केन्द्र की योजना, राज्य स्तर का क्रियान्वयन, जिला प्रशासन का सहयोग और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं। आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते मछुआरे आज मल्हनिया जलाशय के मछुआरों के लिए केज कल्चर केवल मछली पालन की एक नई तकनीक नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक आजीविका को अधिक व्यवस्थित और आय-सृजनकारी बनाने का माध्यम बन गया है। 44 सदस्यों वाली समिति के लिए 54 केज के माध्यम से विकसित यह गतिविधि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसरों को मजबूत कर रही है। मल्हनिया जलाशय में आया यह बदलाव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की उस व्यापक सोच से जुड़ता है, जिसमें आधुनिक तकनीक, रोजगार और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सही योजना, तकनीकी सहयोग, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और हितग्राहियों की मेहनत साथ आए तो जलाशय का पानी केवल मछली उत्पादन का साधन नहीं रहता, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकता है।

आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य

रायपुर  राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 30 सितम्बर और 1 अक्टूबर को चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। ट्रायल के आधार पर गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी, बालिकाओं के फुटबॉल, बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के खिलाड़ियों का चयन प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। चयन ट्रायल में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 30 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 30 सितम्बर को खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सीय परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षण किया जाएगा। वहीं 1 अक्टूबर को खेल कौशल का परीक्षण किया जाएगा। चयन ट्रायल स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा, तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) और हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं। चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। अकादमियों के लिए खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम, 2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं खेलवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

सेवा की कहानी: नन्हे कदमों को मिला बेहतर माहौल, पंडरीपानी खास में नया आंगनबाड़ी भवन बना पोषण और सीखने का केंद्र

रायपुर कभी किराए के सीमित भवन में संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के लिए सुविधायुक्त केंद्र बन गया है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पंडरीपानी (खास) में नवीन आंगनबाड़ी भवन बनने से 36 बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में सीखने और पोषण संबंधी गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। नया भवन माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्राम स्तर पर बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की दिशा में तैयार इस भवन में शिक्षण कक्ष, रसोई, भंडारण कक्ष, शौचालय और खुला परिसर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे आंगनबाड़ी की विभिन्न गतिविधियों को नियमित और व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सहूलियत हुई है। किराए के सीमित भवन से मिली मुक्ति, बच्चों को मिला अपना आंगनबाड़ी केंद्र पंडरीपानी (खास) में आंगनबाड़ी केंद्र वर्षों से किराए के भवन में संचालित हो रहा था। पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण बच्चों की पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के संचालन में परेशानी होती थी। बच्चों के लिए बेहतर वातावरण की आवश्यकता को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवीन आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया। नया भवन बनने के बाद केंद्र की गतिविधियों के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध हुआ है। बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलने के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य गतिविधियों को भी बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन बनने के बाद बच्चों की उपस्थिति अधिक नियमित हुई है और समुदाय की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। 36 बच्चों के साथ माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी मिल रही सुविधा नवीन आंगनबाड़ी भवन का लाभ केंद्र से जुड़े 36 बच्चों के साथ 2 शिशुवती माताओं और 10 किशोरी बालिकाओं को भी मिल रहा है। यहां टीकाकरण, माताओं की बैठक और पोषण सप्ताह जैसी गतिविधियों के आयोजन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ है। इस तरह नया आंगनबाड़ी भवन बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा तक सीमित न रहकर पोषण, स्वास्थ्य और सामुदायिक गतिविधियों के संचालन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। माताओं और किशोरी बालिकाओं को भी आवश्यक सेवाओं और गतिविधियों से जुड़ने के लिए बेहतर स्थान मिला है। अभिसरण से 11.69 लाख रुपये में बना भवन, 459 मानव दिवस का सृजन नवीन आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के लिए कुल 11.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस) से 3.69 लाख रुपये और वीबी जी राम जी से 8 लाख रुपये का अभिसरण किया गया। निर्माण कार्य के दौरान 459 मानव दिवस का सृजन भी हुआ। इस प्रकार बच्चों के लिए स्थायी परिसंपत्ति तैयार होने के साथ स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार का अवसर भी मिला। ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद ग्राम पंचायत पंडरीपानी के माध्यम से कार्य का क्रियान्वयन किया गया। निर्माण के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित पर्यवेक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण के साथ समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई। “अब सभी गतिविधियां सुचारू रूप से हो रही हैं” आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुलेखा बताती हैं कि नया भवन मिलने के बाद केंद्र में संचालित होने वाली गतिविधियां अब सुचारू रूप से हो रही हैं। माताओं, किशोरी बालिकाओं और छोटे बच्चों को आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे सुरक्षित वातावरण में उपलब्ध हो रही हैं। सेवा संकल्प अभियान के तहत पंडरीपानी (खास) का यह नवीन आंगनबाड़ी भवन बताता है कि विभागीय अभिसरण से तैयार बुनियादी अधोसंरचना किस तरह बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ माताओं और किशोरी बालिकाओं के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

एशियन गेम्स में भारत की बेटियों का स्वर्णिम प्रदर्शन देश के लिए गौरव का क्षण : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने एशियन गेम्स-2026 में भारतीय महिला खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन और स्वर्णिम उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाली नीरू ढांडा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। नीरू ढांडा ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारत का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने एशियन गेम्स की 4×400 मीटर महिला रिले स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य किरण पहल, पूवम्मा मचेत्तिरा, प्राची और विथ्या रामराज को भी हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय बेटियों ने अपने बेहतरीन तालमेल, गति और खेल कौशल से स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का गौरव बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एशियन गेम्स में भारत की बेटियों का यह स्वर्णिम प्रदर्शन उनके असीम सामर्थ्य और आत्मविश्वास का परिचायक है। भारतीय महिला खिलाड़ी विभिन्न खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर देश को निरंतर गौरवान्वित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों को खेल के क्षेत्र में बड़े सपने देखने और उन्हें अपनी मेहनत एवं लगन से साकार करने की प्रेरणा देंगी। मुख्यमंत्री  साय ने सभी स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत का गौरव बढ़ाती रहेंगी।

सूरज की रोशनी से रोशन हुआ मनोज का घर, बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश के परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के साथ बिजली खर्च में राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित कर परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का है। योजना के तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता भी दी जाती है। इस योजना का लाभ लेकर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के ग्राम कुड़कई निवासी  मनोज कुमार कश्यप ने अपने घर को सौर ऊर्जा से रोशन किया है। करीब तीन महीने पहले उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया। इसके बाद उनके परिवार के बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी आई और वर्तमान में उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। पहले हर महीने 1,300 रुपये आता था बिजली बिल  मनोज कुमार कश्यप बताते हैं कि सोलर पैनल लगवाने से पहले उन्हें हर महीने लगभग 1,300 रुपये बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। घरेलू बजट में बिजली बिल की यह राशि नियमित खर्च का हिस्सा थी। सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद स्थिति बदल गई। अब घर की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा हो रहा है और उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, सोलर पैनल से घर की आवश्यकता से अधिक बिजली बनने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप उनके बिजली खाते में माइनस बिल की स्थिति भी बनी है। यानी सौर ऊर्जा ने उनके लिए केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन का अवसर भी तैयार किया है। ऋण और सब्सिडी ने सौर ऊर्जा अपनाना बनाया आसान  मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने घर में सोलर पैनल स्थापित कराने के लिए बैंक से ऋण लिया। योजना के तहत केन्द्र एवं राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी उनके बैंक खाते में प्राप्त हो चुकी है। केन्द्र सरकार की योजना में पात्र आवासीय उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर स्थापना के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।  सब्सिडी मिलने से सोलर सिस्टम स्थापित करने में होने वाला वित्तीय भार कम हुआ और  मनोज के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना अधिक सुविधाजनक बना। वे कहते हैं कि सौर ऊर्जा अपनाने का निर्णय उनके परिवार के लिए आर्थिक रूप से राहत देने वाला साबित हुआ है। बिजली खर्च से राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा में योगदान  मनोज कुमार कश्यप के लिए सोलर पैनल केवल बिजली बिल कम करने का साधन नहीं है। घर की छत पर स्थापित संयंत्र के माध्यम से उनका परिवार स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में भी योगदान दे रहा है। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का व्यापक उद्देश्य भी घरेलू स्तर पर रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना और परिवारों को अपनी बिजली जरूरतों के लिए सौर ऊर्जा उत्पादन से जोड़ना है।   मनोज कुमार कहते हैं कि पहले हर महीने बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सोलर पैनल लगने के बाद बिजली खर्च में बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उन्हें यह भी महसूस होता है कि उनके घर की छत अब केवल रहने का हिस्सा नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन का माध्यम भी बन गई है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन का स्थानीय उदाहरण प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को घरेलू रूफटॉप सोलर को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया है। केन्द्र सरकार के अनुसार योजना के लिए 75,021 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसका लक्ष्य एक करोड़ आवासीय परिवारों तक रूफटॉप सोलर का लाभ पहुंचाना है। योजना में अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उससे लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था भी शामिल है।  ग्राम कुड़कई के  मनोज कुमार कश्यप की कहानी इसी व्यापक पहल के स्थानीय प्रभाव को सामने लाती है। जहां पहले उनके परिवार को हर महीने लगभग 1,300 रुपये बिजली बिल के रूप में खर्च करने पड़ते थे, वहीं अब वही परिवार अपने घर की छत से बिजली पैदा कर रहा है और बिजली बिल शून्य होने का अनुभव कर रहा है। छत्तीसगढ़ में योजना के लाभ को घर-घर पहुंचाने की दिशा में प्रयास छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में केन्द्र की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से प्रदेश में भी परिवारों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मनोज कुमार कश्यप का अनुभव बताता है कि जब योजना का लाभ वास्तविक हितग्राही तक पहुंचता है, तो उसका असर सीधे परिवार के मासिक बजट और जीवनशैली में दिखाई देता है।  मनोज कुमार कश्यप ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। उनके लिए सोलर पैनल अब बिजली खर्च से राहत, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता इन तीनों का माध्यम बन गया है। मनोज की छत से दिख रही आत्मनिर्भर ऊर्जा की तस्वीर कुड़कई के  मनोज कुमार कश्यप के घर की छत पर लगे सोलर पैनल बदलते ऊर्जा परिदृश्य की एक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। एक ओर परिवार को बिजली बिल में राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर घर स्वयं बिजली उत्पादन कर रहा है और जरूरत से अधिक ऊर्जा ग्रिड में भेज रहा है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सरकारी योजना का लाभ जब परिवार की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं रहता। वह परिवार को नई तकनीक अपनाने, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी देता है।  

सेवा संकल्प यात्रा केवल यात्रा नहीं, सेवा, राष्ट्रभाव और युवा शक्ति को जोड़ने वाला अभियान : मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सेवा संकल्प यात्रा एवं युवा संवाद’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री  साय ने सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गुजरात के वडनगर से लंबी यात्रा तय कर रायपुर पहुंचे बाइक राइडर्स तथा बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे बाइक राइडर्स का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित नए भारत का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ नागरिकों को अपना परिवार मानकर सेवा भाव से राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने दुनिया में अपनी एक नई पहचान बनाई है और आज पूरा देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा देश की युवा शक्ति को सेवा, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। गुजरात के वडनगर से प्रारंभ हुई यात्रा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि से उनकी कर्मभूमि वाराणसी तक सेवा का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है। यात्रा के दौरान युवा स्वच्छता, नशामुक्ति, टीबी मुक्त भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज को जागरूक कर रहे हैं। यह यात्रा युवाओं में राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध और सेवा की भावना को और मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत डेढ़ करोड़ से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए गए। प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ इसमें सहभागिता की, वह प्रधानमंत्री के प्रति जनता के स्नेह और विश्वास को अभिव्यक्त करता है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ से गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने प्रदेश में लंबा समय बिताया है और यहां के जनजीवन को निकटता से देखा और समझा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में उन्हें प्रधानमंत्री  मोदी के साथ कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री की कार्यशैली, अनुशासन, दूरदृष्टि और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य देश के सामने रखा है। इसी लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित राज्य बनने की दिशा में योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर भविष्य की आवश्यकताओं और संभावनाओं के अनुरूप कार्ययोजना बनाई है। शासन की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी हिंसा और भय से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शांति, विश्वास और विकास का वातावरण मजबूत हुआ है। दूरस्थ अंचलों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। बदलते बस्तर में आज नई पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देख रही है। कार्यक्रम के दौरान आयोजित युवा संवाद में बस्तर से आकर रायपुर के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों गोविंद कुमार, दृष्टि ध्रुव, दीपक मरकाम और दीना उइके ने अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बस्तर में आए बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अब बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्कूल, अस्पताल और सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है तथा भय का वातावरण समाप्त होने से बच्चों और युवाओं में भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। विद्यार्थियों ने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी अब भारतीय सेना और सिविल सेवाओं में शामिल होने के साथ डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश एवं प्रदेश की सेवा करने के सपने देख रही है। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर के बच्चों की आंखों में दिखाई दे रहे ये सपने बदलते छत्तीसगढ़ की सबसे सुखद तस्वीर हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन करते हुए राज्यसभा सांसद  राजीव शुक्ला ने सेवा संकल्प यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा के अंतर्गत 1200 युवा लगभग 2000 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान युवाओं द्वारा स्वच्छता, टीबी मुक्त भारत, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न सामाजिक विषयों पर जनजागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, मती लक्ष्मी वर्मा एवं  वी.डी. शर्मा, विधायक  मोतीलाल साहू,  पुरंदर मिश्रा,  किरण सिंहदेव एवं  अनुज शर्मा, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण,  राहुल टिकरिहा,  नवीन मार्कण्डेय सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सेवा संकल्प यात्रा के बाइक राइडर्स तथा बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

दंतेवाड़ा के जावंगा से सफलता की उड़ान: जनजातीय बच्चे NEET-IIT-NIT में चयनित, S&P Global जैसी कंपनियों में कर रहे नौकरी

रायपुर  दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी आज जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस एजुकेशन सिटी ने हिंसा और गरीबी से जूझते जनजातीय बच्चों की किस्मत ही बदल दी। कभी दूरस्थ गांवों के बच्चों के सामने सुरक्षित शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर की बड़ी चुनौती थी। आज यहां की बेटियां नीट पास कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं, युवा एसएंडपी ग्लोबल जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं और खिलाड़ी मैदान परअपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। यह उन बच्चों की कहानी है, जिन्होंने हर चुनौती को मात देकर खुद को साबित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के जावंगा (एजुकेशन सिटी) में 9 मई 2015 को आए थे, जहाँ उन्होंने एजुकेशन सिटी का निरीक्षण किया था और छात्रों से बातचीत की थी। 150 एकड़ में फैला सपनों का शहर             अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है।यहां स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न संस्थान संचालित हैं। यह एजुकेशन सिटीशैक्षिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं है, यहएक पूरी दुनिया है। करीब 150 एकड़ में फैले इस परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं चल रही हैं। यहां 7,436 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें से 5,370 बच्चे यहीं छात्रावासो में रहकर पढ़ाई करते हैं। दूर-दराज के जंगलों और गांवों से आए इन बच्चों को सुरक्षित घर, खाना, पढ़ाई और मार्गदर्शन सब कुछ एक ही छत के नीचे मिल रहा है।इसकी वजह से स्कूल ड्रॉप-आउट की दर 50% से घटकर महज 13% रह गई है।             वो बेटियां जिनके गांवों में कभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं था, आज उन्हीं इलाकों की बेटियां नीट-यूजी पास कर डॉक्टर बनने की कतार में खड़ी हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस साल नीट-यूजी में सफलता पाई है। इन्हें राज्य के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा में दाखिला मिला है। परीक्षा पास करने के साथ ही यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी 'डॉक्टर बेटी' कहलाएगी। डिजिटल क्रांति की नई कहानी    डिजिटल शिक्षा की दिशा में यहां के नवगुरुकुल का प्रयास भी प्रेरक है। यहां युवाओं को आधुनिक डिजिटल कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस केंद्र से प्रशिक्षित लगभग 100 युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। नवगुरुकुल की एक छात्रा का चयन एसएंडपी ग्लोबल में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है। यह उपलब्धि बताती है कि बस्तर की प्रतिभा अब देश की बड़ी कंपनियों तक पहुंच रही है। आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले 95 फीसदी छात्र जनजातीय समुदाय से हैं। मैदान में निखर रही खेल प्रतिभाएं        एजुकेशन सिटीमें पढ़ाई के साथ खेल प्रतिभाओं को भी निखारा जा रहा है। यहां के 'एकलव्य खेल परिसर' में ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं।'खेलो इंडिया' से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं। ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख रहे, बल्किइनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और जीतने का जज्बा पैदा हो रहा है। बेटियों की पढ़ाई को पहली प्राथमिकता    जावंगा एजुकेशन सिटी की सबसे बड़ी खूबी बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान है। यहां कन्या विद्यालयों और छात्रावासों के जरिए ग्रामीण बेटियां सुरक्षित माहौल में पढ़ रही हैं।'स्वामी आत्मानंद स्कूल' में लगभग 1200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। यहां बेहतरीन आवास, भोजन, लाइब्रेरी और लैब जैसी सुविधाओं ने अभिभावकों का भरोसा जीता है। इससे दूरस्थ गांवों की उन बेटियों के सपने सच हो रहे हैं, जिन्हें पहले पढ़ाई के अवसर नहीं मिलते थे।          दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसे इलाके जो कभी नक्सल प्रभावित थे, वहां के अनाथ और हिंसा पीड़ित बच्चों को आस्था विद्या मंदिर ने नया घर दिया है। यहां दाखिला मेरिट से नहीं, बच्चे की जरूरत और हालात देखकर होता है। इन बच्चों को सुरक्षित छत, पढ़ाई, खेल, संगीत और खुशहाल बचपन मिल रहा है। बंदूकों की गूंज के बीच पले-बढ़े ये बच्चे अब किताबों की दुनिया में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। इस मॉडल को सबने सराहा     जावंगा एजुकेशन सिटी की कामयाबी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। प्रतिष्ठित संस्था केपीएमजी ने इसे दुनिया की 100 सबसे बेहतरीन (नवोन्मेषी) परियोजनाओं में शामिल किया है, जिसमें पूरे भारत से मात्र 6 प्रोजेक्ट चुने गए हैं। इस अनूठी पहल के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन को 'प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस शिक्षा मॉडल की सफलता से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी जावंगा का दौरा कर इसकी प्रशंसा कर चुके हैं।जावंगा एजुकेशन सिटी आज आदिवासी बच्चों के सपनों का परिसर बन गया है।