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दिल्ली पुलिस को मिले 12503 करोड़ रुपये, Union Budget 2026 में ट्रैफिक मैनेजमेंट पर विशेष फोकस

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस को 12,503 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. यह राशि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुकाबले करीब पांच फीसदी अधिक है. पिछले बजट में दिल्ली पुलिस को 11931 करोड़ रुपए दिए गए थे, जिसे नए वित्तीय वर्ष में बढ़ा दिया गया है. बजट से मिलने वाली इस राशि का इस्तेमाल दिल्ली पुलिस के रोजमर्रा के खर्चों और विभिन्न योजनाओं के लिए किया जाएगा. इसमें दिल्ली में एक मॉडल ट्रैफिक सिस्टम का विकास, ट्रैफिक सिग्नल्स की स्थापना और ट्रैफिक प्रबंधन को और बेहतर बनाने पर खास ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर भी फोकस रहेगा. बेहतर संचार नेटवर्क, आधुनिक उपकरण और पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग को भी इस बजट का अहम हिस्सा बताया गया है. दिल्ली पुलिस ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी संभालती है.  ऐसे में यह बढ़ा हुआ बजट पुलिसिंग सिस्टम को और प्रभावी बनाने में मददगार माना जा रहा है. इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन की दिशा में एक अहम कदम बताया. उन्होंने कहा कि इस बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है.  उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिया गया है. 

हामिद अंसारी के ‘गजनवी’ वाले बयान पर बवाल, BJP ने कांग्रेस की सोच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की भारतीय इतिहास को लेकर की गई टिप्पणी पर एक बार फिर से बवाल हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम ही ऐसे लोगों का महिमामंडन करता है, जो कि हिंदुओं के खिलाफ थे। एक वीडियो में अंसारी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि गजनवी और लोधी बाहर से नहीं आए थे, बल्कि वह भारतीय लुटेरे थे।   भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने हामिद अंसारी की यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंसारी की टिप्पणी कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का नया उदाहरण है कि कैसे कांग्रेस “हिंदू विरोधियों का महिमामंडन करती है।” पूनावाला ने कहा, "अब कांग्रेस इकोसिस्टम और हामिद अंसारी उस ग़ज़नवी का महिमामंडन कर रहे हैं, जिसने सोमनाथ मंदिर को नष्ट और अपवित्र किया। कांग्रेस इकोसिस्टम महमूद गजनवी का गुणगान करता है। वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का विरोध करते हैं और औरंगजेब व उन लोगों के अपराधों को सफेदपोश बनाते हैं जिन्होंने हिंदुओं पर अत्याचार किए।” इसके अलावा इस मामले में दिल्ली दंगा के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को लपेटे में लेते हुए पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही अलगाववादी सोच रखने वाले लोगों के साथ खड़ी रही है। आपको बता दें हामिद अंसारी वर्ष 2007 में उपराष्ट्रपति पद पर नामित होने से पहले कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। इंटरव्यू में उनकी टिप्पणियां महमूद गजनवी के संदर्भ में थीं, जिन्होंने भारत पर कई आक्रमण किए थे और वह गजनवी वंश के शासक थे। उन्होंने लोदी वंश का भी उल्लेख किया, जो दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक थे। लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने हराया था। दरअसल, उन्होंने अफगानिस्तान तक के क्षेत्र को उस जमाने में भारत का हिस्सा बताया था। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर यह हिस्सा भारत का था, तो फिर यह जो लोग वहां से आए वह भी भारतीय ही हुए।  

पूर्व विधायक ताहिर हुसैन को झटका, दिल्ली दंगा केस में जमानत नहीं मिली

 नई दिल्ली दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में पूर्व AAP विधायक ताहिर हुसैन, सलीम मलिक और अथर खान की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने तीनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक तीनों आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दिए जाने के बाद समानता (पैरिटी) के आधार पर जमानत की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया. इन तीनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं. अभियोजन के मुताबिक, इनकी भूमिका 2020 के दंगों की साजिश में अहम रही है. अथर खान, जो पहले एक कॉल सेंटर कर्मचारी रह चुका है, पर आरोप है कि वह उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अनुसार, अथर ने वहां भड़काऊ भाषण दिए और कथित तौर पर गुप्त बैठकों में हिस्सा लिया, जिनमें 'दिल्ली जलाने का समय आ गया है' जैसे बयान दिए गए. उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट कराने में समन्वय करने का भी आरोप है. वहीं सलीम मलिक पर भी आरोप है कि वह CAA-NRC विरोधी बैठकों के 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में शामिल था. पुलिस के अनुसार, इन आयोजकों में मोहम्मद सलीम खान, सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ गुड्डू भाई, शहनवाज, फुरकान, मोहम्मद अय्यूब, मोहम्मद यूनुस, तबस्सुम, मोहम्मद अयाज और उसका भाई खालिद शामिल थे. गौरतलब है कि 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में पांच आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शारजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा था कि उमर खालिद और शारजील इमाम के खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और सभी आरोपी एक जैसी स्थिति में नहीं हैं. इस मामले में कुल 20 आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से दो अब भी फरार हैं. शेष 18 में से कई ने पहले जमानत याचिकाएं दायर की थीं. इनमें से सात आरोपी अब भी जेल में बंद हैं, जिनमें उमर खालिद, शारजील इमाम, अथर खान, सलीम मलिक, पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन, तसलीम अहमद और खालिद सैफी शामिल हैं.

दिल्ली में यमुना अब गंगा जैसी होगी, मेगा प्लान के तहत डेढ़ साल में बदल जाएगी नदी की तस्वीर

नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण से अंतिम सांसें गिन रही यमुना नदी को जीवनदान देने की तैयारी हो चुकी है. प्रदूषण से गंदी हो चुकी यमुना को गंगा की तरह साफ करने के लिए मेगा प्लान तैयार कर लिया गया है. यमुना की सफाई योजना के तहत दिल्ली सरकार 518.88 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना शुरू करने जा रही है. इस प्रोजेक्ट के तहत न केवल यमुना नदी को साफ किया जाएगा बल्कि गंदे पानी को ट्रीट कर दोबारा उसे यमुना छोड़ने और नदी में पानी का स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की जाएगी. दिल्ली सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यमुना की सफाई योजना में नदी में पैरेलल वाटर सिस्टम, पंपिंग स्टेशन और ऊंचे (एलिवेटेड) चैनल बनाए जाएंगे, ताकि कोरोनेशन पिलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तरह साफ किया गया पानी यमुना नदी तक दोबारा पहुंचाया जा सके. इस परियोजना में जहांगीरपुरी नाले से रोजाना 30 मिलियन गैलन प्रति दिन गंदे पानी को पाइपलाइन के जरिए कोरोनेशन पिलर प्लांट तक लाया जाएगा, जहां उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार इस काम के लिए बंद पाइप सिस्टम (क्लोज डक्ट सिस्टम), पंपिंग स्टेशन और ऊंचे चैनल बनाए जाएंगे. इससे साफ किया गया पानी वजीराबाद बैराज तक पहुंचाया जाएगा, ताकि यमुना में पानी का बहाव बढ़ सके. यह बहाव ई-फ्लो (पर्यावरणीय प्रवाह) कहलाता है, यानी नदी को जीवित और स्वस्थ रखने के लिए जरूरी न्यूनतम पानी का स्तर बनाए रखा जाएगा. कौन उठा रहा खर्च?  प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना की निर्माण लागत केंद्र सरकार देगी, जबकि इसके संचालन और रखरखाव का खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और सबसे बड़ी बात है कि इसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा. यह फंड राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत दिया गया है. परियोजना में क्या-क्या होगा? . जहांगीरपुरी नाले से बिना साफ किया गया गंदा पानी पाइपलाइन से लाना . 64 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का पंपिंग स्टेशन बनाना . ट्रीटमेंट के बाद साफ पानी को पाइप से यमुना तक पहुंचाना  खबर के मुताबिक जहांगीरपुरी नाले को पार करने के लिए ऊंचे RCC चैनल बनाए जाएंगे. इसके लिए दो पंपिंग स्टेशन होंगे. एक 64 MLD का स्टेशन होगा जो गंदा पानी STP तक लाएगा. जबकि दूसरा 318 MLD का पंप हाउस जो साफ पानी को यमुना तक पहुंचाएगा. इसके अलावा, वजीराबाद तक पानी ले जाने के रास्ते में दो ट्रस ब्रिज भी बनाए जाएंगे. केंद्र सरकार के प्लान में थी यमुना की सफाई 24 जून 2025 को एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केंद्र सरकार यमुना को फिर से साफ करने की योजना पर नजर रखे हुए है. खासकर कोरोनेशन पिलर और यमुना विहार प्लांट के जरिए ई-फ्लो बढ़ाने पर. दिल्ली में यमुना का कितना हिस्सा है प्रदूषित? वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक यमुना का 22 किमी का हिस्सा जो कि पूरी नदी का सिर्फ 2 फीसदी है सबसे ज्यादा प्रदूषित है. नदी में इसी हिस्से से सबसे ज्यादा 76 फीसदी प्रदूषण होता है. विशेषज्ञों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अनुसार यमुना को स्वस्थ रखने के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत है, जबकि अभी सिर्फ 10 क्यूमेक्स पानी ही बह रहा है. ऐसे में पानी को साफ कर फिर से पानी पहुंचाने से पानी के स्तर को बनाए रखने में सहायता मिलेगी. अधिकारियों ने बताया कि नया सिस्टम खुले नालों को बायपास करेगा, क्योंकि खुले नाले साफ पानी को दोबारा गंदा कर देते हैं. यमुना कार्यकर्ता भीम सिंह रावत ने कहा कि इससे थोड़ा प्रदूषण जरूर कम होगा, लेकिन पानी की मात्रा अभी भी कम है. उन्होंने कहा, ‘साफ किए गए पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देना होगा. नदी में छोड़ा जाने वाला पानी इनलैंड वाटर स्टैंडर्ड के अनुसार और ज्यादा शुद्ध होना चाहिए.’

होली से पहले खुशखबरी: दिल्ली में किन उपभोक्ताओं को मिलेगा सिलेंडर का पैसा, जानिए पूरी जानकारी

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने एक और चुनावी वादे को पूरा करने का फैसला ले लिया है। राजधानी में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के रसोई गैस उपभोक्ताओं को अब साल में दो मुफ्त सिलेंडर की सौगात मिलेगी। होली और दिवाली के समय सरकार एलपीजी सिलेंडर का पैसा बैंक खाते में भेजेगी। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान इस प्रस्ताव को पास किया। योजना को लागू करने के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है।   पिछले साल दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने संकल्प पत्र में एलपीजी सिलेंडर को लेकर दो वादे किए थे। होली और दिवाली में दो मुफ्त सिलेंडर देने के अलावा गरीबों को 500 रुपये में सिलेंडर उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। सरकार ने अभी साल में दो मुफ्त सिलेंडर देने से जुड़ा प्रस्ताव ही पास किया है। 500 रुपये में सिलेंडर देने का फैसला बाद में अलग से लिया जाएगा। इस होली से हो जाएगी शुरुआत एक साल का शासन पूरा होने से पहले रेखा गुप्ता सरकार ने साल में दो मुफ्त सिलेंडर देने की शुरुआत का फैसला किया है। लाभार्थियों को पहले सिलेंडर का पैसा मार्च में होली से पहले भेजने की तैयारी है। किन्हें मिलेगा यह पैसा दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एचटी को बताया कि इस योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के राशनकार्डधारकों को मिलेगा। सरकार ने मौजूदा राशन कार्ड डेटाबेस के जरिए योग्य लाभार्थियों की पहचान की है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली ढांचे के तहत 'गरीब' के रूप में वर्गीकृत परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। इन परिवारों को होली से पहले सिलेंडर रिफील की कीमत भेजी जाएगी। अभी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 850 रुपये है। आधार से जुड़े बैंक अकाउंट में आएगा पैसा अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत सिलेंडर का बंटवारा नहीं होगा, बल्कि इसे खरीदने लायक पैसे ही अकाउंट में भेजे जाएंगे। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सिलेंडर का पैसा आधार से लिंक बैंक खातों में भेजा जाएगा। लाभार्थी इन पैसों का इस्तेमाल एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए कर पाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि वितरण में पारदर्शिता के लिए डीबीटी के इस्तेमाल का फैसला लिया गया है। लाभार्थियों की सूची और टाइमलाइन बनाने का आदेश संबंधित विभागों को ऑपरेशनल गाइडलाइंस, लाभार्थियों की सूची और फंड ट्रांसफर के लिए टाइमलाइन तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के सुचारू रूप से लागू करने के लिए एलपीजी वितरकों और बैंकिंग पार्टनर्स के साथ समन्वय किया जा रहा है। विभागों को लाभार्थियों का सत्यापन और डीबीटी (डेटाबेस सत्यापन) प्रक्रिया पूरी करने का काम सौंपा गया है, जिसके बाद ही धनराशि जारी की जाएगी।  

4 साल में ही खस्ताहाल स्कूल भवन पर बवाल, स्वाति मालीवाल बोलीं– बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़, सिसोदिया जिम्मेदार

नई दिल्ली दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। साल 2020 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सरकारी स्कूल की चार मंजिला इमारत अब इतनी खराब हालत में पहुंच चुकी है कि उसे 'डेंजरस' घोषित कर बंद करना पड़ा है। इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 4–5 साल में खंडहर बनी 2020 की स्कूल बिल्डिंग, सुरक्षा के चलते स्कूल बंद सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिस स्कूल को 2020 में बनाया गया था, वह महज 4–5 साल में ही खंडहर जैसी हालत में पहुंच गया। उन्होंने स्कूल भवन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इमारत में जगह-जगह दरारें, भारी सीलन, कमजोर दीवारें और कुछ हिस्सों में लेंटर तक नहीं है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल को बंद करना पड़ा। दरारें, सीलन और कमजोर ढांचा, स्वाति मालीवाल ने तस्वीरें-वीडियो जारी कर उठाए सवाल स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि अगर निर्माण कार्य सही तरीके से और मानकों के अनुसार हुआ होता, तो इतनी नई बिल्डिंग को खतरनाक घोषित नहीं करना पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी क्यों नहीं हुई। भ्रष्टाचार का आरोप, करोड़ों खर्च के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल वहीं आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया समर्थकों की ओर से इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में हजारों सरकारी स्कूलों का निर्माण और नवीनीकरण किया गया है और किसी एक इमारत की खराब हालत के आधार पर पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाना गलत है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में निर्माण से जुड़ी खामी पाई गई है, तो उसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार या एजेंसी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।   AAP का पलटवार, आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित, तकनीकी जांच की मांग इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ? क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही बरती गई? और सबसे बड़ा सवाल, बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? घटिया निर्माण या निगरानी में चूक? दिल्ली के स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा सवाल फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है, लेकिन 2020 में बनी एक स्कूल इमारत का इतनी जल्दी जर्जर हो जाना दिल्ली के सरकारी निर्माण कार्यों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।  

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गणतंत्र दिवस से पहले 94 जगहों पर रेड, 70 लोग पकड़े

नई दिल्ली गणतंत्र दिवस से ठीक पहले राजधानी में किसी बड़ी साजिश की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर करारा प्रहार किया है. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले में हाई अलर्ट के दौरान पुलिस ने ‘ऑपरेशन कवच-12’ के तहत एक साथ 94 जगहों पर छापेमारी कर 70 लोगों को गिरफ्तार किया है. सूत्रों के मुताबिक, 26 जनवरी को देखते हुए पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की इनपुट मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं. इसी कड़ी में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस ने 78 विशेष टीमों का गठन कर संवेदनशील इलाकों में एक साथ कार्रवाई की. अचानक हुई इस छापेमारी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई संदिग्ध वाहनों को रोका और उनकी तलाशी ली. जांच में कुछ गाड़ियों से आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ, जिसके बाद उन्हें जब्त कर लिया गया. इसके अलावा अलग-अलग मामलों में पकड़े गए 70 आरोपियों के पास से हथियार, नशीले पदार्थ और नकदी भी बरामद की गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए कई लोग पहले से आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं और गणतंत्र दिवस से पहले किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हो सकते थे. फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित साजिश तो नहीं थी. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ‘ऑपरेशन कवच-12’ का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के मद्देनजर राजधानी में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और किसी भी तरह की साजिश को नाकाम करना है. उन्होंने साफ कहा कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि 26 जनवरी का पर्व शांति और सुरक्षित माहौल में मनाया जा सके.

युवराज केस में उलझी कहानी: मौके पर मौजूद थे लोग, फिर मदद क्यों नहीं मिली? पुलिस के जवाब पर शक गहरा

नई नोएडा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दुखद मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है। 27 साल के युवराज 16 जनवरी 2026 की रात अपनी कार से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के कारण उनकी एसयूवी निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज कार की छत पर चढ़ गए और फोन की फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांगते रहे। उन्होंने अपने पिता को फोन किया और 'पापा, मुझे बचा लो' कहकर गुहार लगाई। करीब दो घंटे तक वो जिंदगी की लड़ाई लड़ते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। इस मामले में अब पुलिस का स्पष्टीकरण आया है। पुलिस ने बताया है कि रेस्क्यू के दौरान उनके पास क्या-क्या संसाधन थे। लेकिन अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने संसाधनों के साथ भी क्यों हाथ बंधे रहे?   हादसे के बाद क्या हुआ? पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। नोएडा पुलिस ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिलते ही पीआरवी न्यूनतम समय में पहुंच गई। टीमों ने लाइफ बाय रिंग, रबर बोट, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च लाइट, लाइफ-सेविंग रोप और एक्सटेंशन लैडर जैसे उपकरणों से रेस्क्यू की कोशिश की। लेकिन घना कोहरा और कम विजिबिलिटी ने काम मुश्किल कर दिया। युवराज को निकालने में देर हुई और कार को बाहर निकालने में चार दिन लग गए। पुलिस के जवाब से सवाल और बढ़े पुलिस का दावा है कि संसाधन पूरे थे और प्रयास किए गए। नोएडा पुलिस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के अंतर्गत हुयी घटना के सम्बन्ध में सूचना, डायल 112 पर प्राप्त होते ही घना कोहरा और न्यूनतम विजिबिलिटी होने के बाद भी पीआरवी न्यूनतम प्रतिक्रिया समय में घटना स्थल पर पहुंची। साथ ही स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस/रेस्क्यू टेंडर मौके पर पहुंचे। सभी प्रकार के उपकरण लाइफ बॉय रिंग, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, सर्च एंड रेस्क्यू लाइट, एयर-फिल्ड रबर बोट, हाइड्रा, लाइफ-सेविंग रोप, ड्रैगन टॉर्च, रेस्क्यू फायर टेंडर और एक्सटेंशन लैडर की मदद से रेस्क्यू के प्रयास किए गए थे।   अब और उठ रहे सवाल नोएडा पुलिस के इस दावे के बाद सवाल और भी ज्यादा हो गए हैं। आखिर इतने उपकरण और टीमें होने के बावजूद युवराज को क्यों नहीं बचाया जा सका? वायरल वीडियो में दिखता है कि रेस्क्यू टीम के जवान दिशा-निर्देश दे रहे थे, लेकिन कोई पानी में नहीं उतरा। एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट मोनिंदर सिंह ने पानी में उतरकर कोशिश की, लेकिन अकेले क्या कर पाता? अब कुछ रिपोर्ट्स में मोनिंदर पर पुलिस दबाव का आरोप लगा है कि उन्होंने बयान बदला। जांच और कार्रवाई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उच्च स्तरीय एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने घटनास्थल पर सीन रीक्रिएट किया। पुलिस ने निर्माण साइट की लापरवाही के लिए लोटस ग्रीन के दो बिल्डरों रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया। नोएडा अथॉरिटी से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान शामिल है। रिपोर्ट 24 जनवरी को सरकार को सौंपी जाएगी। एनजीटी ने भी स्वतः संज्ञान लिया और कई अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सोशल मीडिया पर गुस्सा यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि निर्माण साइट पर बैरिकेडिंग नहीं थी, सुरक्षा मानक टूटे गए। नोएडा जैसे 'स्मार्ट सिटी' में खुले गड्ढे और नाले मौत का जाल बने हुए हैं। युवराज के पिता का कहना है कि अगर समय पर मदद मिलती, तो बेटा बच जाता।  

नक्सलमुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: झारखंड में माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई—अमित शाह

नई दिल्ली झारखंड में माओवादियों के ढेर होने से नक्सलमुक्त अभियान को मिली बड़ी सफलता: अमित शाह नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में 1 करोड़ के कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के मारे जाने पर कहा कि इससे नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, ''आज पश्चिमी सिंहभूम में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक जॉइंट ऑपरेशन में 1 करोड़ का कुख्यात इनामी नक्सली सेंट्रल कमेटी मेंबर 'अनल उर्फ पतिराम मांझी' और 15 अन्य नक्सलियों के अब तक एनकाउंटर से नक्सलमुक्त अभियान को बड़ी सफलता मिली। दशकों से भय और आतंक के पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं। मेरी पुनः शेष बचे नक्सलियों से अपील है कि हिंसा, आतंक और हथियारों से जोड़ने वाली विचारधारा को छोड़ विकास और विश्वास की मुख्यधारा से जुड़ें।" झारखंड के नक्सल प्रभावित पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में गुरुवार को सुरक्षाबलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी माओवादी पतिराम मांझी उर्फ अनल दा और 15 नक्सली ढेर कर दिए गए। मारे गए नक्सलियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने बताया कि मारे गए अन्य नक्सलियों में अनमोल उर्फ सुशांत (बीजेएसएसी), अमित मुंडा (आरसीएम), पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालु, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सूरजमुनी और जोंगा शामिल हैं। इनमें से कई पर झारखंड, ओडिशा और एनआईए ने लाखों रुपए के इनाम घोषित किए थे, और इन सभी के खिलाफ गंभीर नक्सली मामलों के दर्जनों केस दर्ज थे। ये सभी नक्सली केंद्रीय कमेटी सदस्य (सीसीएम) अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते के साथ झारखंड के कोल्हान इलाके में लंबे समय से सक्रिय थे। अनल दा पर झारखंड में एक करोड़ और ओडिशा में एक करोड़ 20 लाख का इनाम घोषित था।

दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल को दो केसों में क्लीन चिट, कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली कथित शराब घोटाले से जुड़े दो केस में आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को राहत मिल गई है। समन को दरकिनार किए जाने की वजह से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज किए गए मुकदमों में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को बरी कर दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) पारस दलाल ने गुरुवार को आदेश पारित किया। विस्तृत आदेश का इंतजार है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएल) की धारा 50 के तहत दिए गए समन को दरकिनार किए जाने पर फरवरी 2024 में ईडी ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।