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NCR प्लान-2041: दिल्ली का बोझ घटाने को नए ग्रीनफील्ड शहरों का खाका तैयार

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती आबादी और दबाव को कम करने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने बड़ा खाका तैयार किया है। अगले सप्ताह मंजूरी के लिए रखे जाने वाले रीजनल प्लान-2041 में 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड स्मार्ट टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही दिल्ली समेत एनसीआर के प्रमुख शहरों को महज 30 मिनट की दूरी पर लाने की योजना है। NCRPB की योजना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए नए स्मार्ट शहर बसाए जाएंगे। इन टाउनशिप में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल अपनाया जाएगा। दिल्ली का बोझ कम करने पर फोकस रीजनल प्लान-2041 प्लान में मौजूदा शहरों और बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का सुझाव दिया गया है। इन शहरों को आत्मनिर्भर और स्व-संपूर्ण बनाया जाएगा ताकि रोजगार, आवास और अन्य सुविधाओं के लिए लोगों को दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े। योजना में उत्तर प्रदेश सरकार के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एरिया (YEIDA) को 20 लाख आबादी वाले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में विकसित करने और हरियाणा में कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास प्रस्तावित पंचग्राम परियोजना का भी जिक्र किया गया है। रीजनल प्लान-2041 की बड़ी बातें     NCR में 5-8 नए स्मार्ट ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव     दिल्ली से प्रमुख एनसीआर शहरों की दूरी 30 मिनट करने की योजना     हाई-स्पीड रेल और हेली-टैक्सी नेटवर्क पर जोर     YEIDA और हरियाणा के पंचग्राम को नए विकास केंद्र के रूप में शामिल किया गया     अगले 15 सालों में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की जरूरत     2030 तक दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर बन सकता है दिल्ली-एनसीआर दिल्ली से जुड़ेंगे एनसीआर के प्रमुख शहर रीजनल प्लान-2041 का सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्ताव 30 मिनट NCR है। इसके तहत दिल्ली और NCR के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय 30 मिनट तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हाई-स्पीड और सीमित स्टॉपेज वाली मास ट्रांजिट रेल प्रणाली, सुपरफास्ट ट्रेनें और हेली-टैक्सी जैसी सुविधाओं की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव है। योजना के अनुसार अन्य रेल सेवाओं से NCR के किसी भी हिस्से तक 60 मिनट और कार से 2 से 3 घंटे के भीतर पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। 2030 तक बनेगा दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर प्लान के अनुसार, साल 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला शहरी क्षेत्र बन सकता है। जो कि जापान की राजधानी टोक्यो को भी छोड़ देगा। अनुमान है कि अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को बसाने और मौजूदा आबादी के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।  

दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी जनगणना में कवर, 14 जून तक चलेगा हाउस लिस्टिंग अभियान

नई दिल्ली  दिल्ली में चल रही जनगणना 2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का अंतिम चरण में है। अब तक कुल 55 लाख से अधिक घरों को कवर किया जा चुका है, जिसमें 76.63 लाख परिवार रहते हैं। यानी 98% घर कवर हो चुके हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगले दो दिनों में 100% जनगणना हो जाएगी। अभी तक जनगणना के हिसाब से दिल्ली की 2.2 करोड़ आबादी कवर की जा चुकी है। दिल्ली में 16 मई से जनगणना-2026 के पहले चरण में हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन का काम शुरू हुआ था। पहले 15 दिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का फिर 1 जून से घर-घर जाकर यह काम चल रहा है जो 14 जून तक चलेगा। अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में कुल 45 हजार से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉक तैयार किए गए थे। अनुमान के मुताबिक हर ब्लॉक में 150-200 घर रखे गए थे। कहां-कहां कितना हुआ काम? आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी जिला सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां अब तक 8.23 लाख घर को कवर किया जा चुका है, जिसमें 6.30 लाख परिवार रहते हैं। वहीं, पुरानी दिल्ली जिला सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र रहा, जहां 2.95 लाख घरों को कवर किया गया है। आउटर नॉर्थ में 99.14 फीसदी, नॉर्थ-वेस्ट में 98.48 फीसदी और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में 98.13 फीसदी घरों को कवर किया जा चुका है। ईस्ट व नॉर्थ जिले में अभी 95 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। जनगणना 2026 की प्रक्रिया दो चरणों में चलेगी जनगणना 2026 का आयोजन दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और आवास गणना का है, जो फिलहाल जारी है। इसके बाद दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) का होगा, जिसकी शुरुआत फरवरी 2027 में की जाएगी। इस चरण में नागरिकों की संख्या और सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाई जाएगी।      क्यों जरूरी होती है जनगणना? अगर अभी तक आप जनगणना में शामिल नहीं हुए हैं तो 14 जून तक का समय है। 14 तक एन्यूमरेटर बचे हुए घरों में एक बार फिर से दस्तक देंगे। दरअसल, गर्मी की छुट्टी के कारण कई घरों में लोग नहीं मिले। जनगणना कर्मी ने इनके पड़ोसियों से अपना नंबर भी शेयर किया है। यह जनगणना इसलिए जरूरी है क्योंकि आंकड़ों के आधार पर ही सरकार अपनी नीतिगत फैसले लेती है।

गुरु रंधावा के जिम पर ताबड़तोड़ गोलियां, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का दावा; दिल्ली में सनसनी

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के मालिकाना हक वाले एक जिम के बाहर अज्ञात हमलावरों द्वारा ताबड़तोड़ फायरिंग की गई है. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।  इस सनसनीखेज हमले की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित पोस्ट और ऑडियो क्लिप के जरिए गैंग ने इस फायरिंग का दावा किया है।  वायरल ऑडियो में कथित तौर पर गैंग के एक सदस्य को यह कहते सुना जा सकता है कि गुरु रंधावा के अभिनेता सलमान खान के साथ करीबी रिश्ते हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया है. ऑडियो में इस हमले को महज एक 'ट्रेलर' बताया गया है।  पुलिस कर रही है जांच घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं और जिम के बाहर के विजुअल्स और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है. पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह वाकई गैंग की ही हरकत है या किसी ने दहशत फैलाने के लिए इस नाम का इस्तेमाल किया है।  दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वायरल हो रहे ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।  दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करते हुए कहा, 11 जून 2026 की सुबह तड़के थाना पश्चिम विहार ईस्ट में "24 आवर्स फिटनेस" जिम, पुष्कर एन्क्लेव, पश्चिम विहार, दिल्ली में फायरिंग की घटना संबंधी एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई. प्रारंभिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि चेहरे को कपड़े से ढके हुए बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने जिम के शीशों पर कुछ राउंड फायरिंग की. इस घटना में किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट नहीं आई है. स्थानीय पुलिस और जिला पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की है तथा मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है. आरोपियों की पहचान, उनकी तलाश और जल्द गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। 

दिल्ली-मेरठ नमो भारत की बढ़ी रफ्तार, 24 घंटे में 1.25 लाख यात्रियों के साथ बना नया कीर्तिमान

 नई दिल्ली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर ने सबसे ज्यादा यात्रियों का नया रिकॉर्ड बनाया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने मंगलवार को जानकारी दी कि नमो भारत ट्रेन से 8 जून को एक दिन में करीब 1,25,500 यात्रियों ने सफर किया।    यह आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा है. आम दिनों में औसतन एक लाख यात्री नमो भारत ट्रेन से सफर करते हैं. NCRTC के मुताबिक, सोमवार को यात्री संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।  क्यों बढ़ रहे हैं यात्री? NCRTC ने बताया कि कई कारणों से लोग नमो भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दरअसल, नमो भारत के जरिए मेरठ से दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हो गया है. सड़क के ट्रैफिक जाम से बचना आसान हो गया है. वहीं,  गर्मी के प्रकोप (40 डिग्री से ऊपर तापमान) के बीच पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें ठंडक और आरामदायक साबित हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले यात्री अब नमो भारत का इस्तेमाल कर रहे हैं।  किस स्टेशन पर सबसे ज्यादा भीड़ रही? दिल्ली में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार स्टेशन सबसे ज्यादा व्यस्त रहे. वहीं, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और बेगमपुल स्टेशन भी काफी भीड़ वाले रहे. इन पांचों स्टेशनों पर कुल यात्रियों में से 40 प्रतिशत से ज्यादा सवारियां होती हैं।  खास बात यह है कि यह स्टेशन मेट्रो, रेलवे, इंटर-स्टेट बस टर्मिनल और शहर की बस सर्विस से कनेक्ट हैं. इससे यात्रियों को आसानी होती है. मेरठ में लोकल मेट्रो सेवाएं भी नमो भारत के ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चल रही हैं. इससे शहर के अंदर भी सफर आसान हो गया है।  यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए NCRTC ने हाल ही में पीक ऑवर्स में 18 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. ये अतिरिक्त ट्रिप्स सुबह और शाम के पीक समय में सराय काले खां से मेरठ साउथ के बीच चलाई जा रही हैं।  NCRTC ने कहा कि नमो भारत अब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के रोजाना के सफर का महत्वपूर्ण साधन बनती जा रही है. इससे समय की बचत, भरोसेमंद सेवा और आरामदायक यात्रा की वजह से लोग सड़क के बजाय इस ट्रेन को चुन रहे हैं. पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें गर्मी से राहत दे रही हैं और लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचा रही हैं. नमो भारत रैपिड रेल अब NCR क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प साबित हो रही है। 

ट्रैफिक चालानों के लिए नई डिजिटल व्यवस्था, 45 दिन में करना होगा फैसला या भुगतान

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार जल्द ही ट्रैफिक चालानों के निपटारे और शिकायतों के समाधान के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपने ई-चालान सिस्टम को अपग्रेड कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म अगले एक महीने के भीतर तैयार हो जाएगा, जिससे चालान जारी करने से लेकर शिकायत दर्ज करने, जुर्माना भरने और अदालत में अपील करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। इस नई व्यवस्था का मकसद ट्रैफिक नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और अदालतों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है। दिल्ली सरकार केंद्र सरकार द्वारा संशोधित मोटर वाहन नियमों को लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत चालान से जुड़े मामलों के लिए पहले डिजिटल शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनानी होगी। ई-चालान सिस्टम में होंगे अहम बदलाव दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के डीसीपी (ट्रैफिक मुख्यालय) एस.के. सिंह ने बताया कि नए नियमों के अनुसार चालान जारी करते समय वाहन चालक, वाहन और चालान करने वाले अधिकारी की तस्वीर लेना अनिवार्य होगा। अपग्रेडेड पोर्टल पर चालान की पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। 45 दिन में करना होगा फैसला नए नियमों के तहत वाहन चालक को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करना होगा या फिर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी होगी। यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो चालान को स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद भुगतान के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मिलेगा। शिकायत खारिज होने पर अदालत में जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य होगा। CCTV चालान भी होंगे शामिल नया सिस्टम CCTV कैमरों और अन्य डिजिटल निगरानी प्रणालियों से जारी होने वाले चालानों को भी जोड़ेगा। मोबाइल नंबर उपलब्ध होने पर ई-चालान तीन दिन के भीतर भेजा जाएगा, जबकि नंबर उपलब्ध न होने पर 15 दिन के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा। Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

स्मार्ट सिटी की ओर दिल्ली, CSIR-CRRI और SPA के साथ सड़क सुधार पर बड़ा समझौता

नई दिल्ली  राजधानी की सड़कों को धूल मुक्त, सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में सरकार ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) से समझौता किया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के साथ इस समझौते के तहत दिल्ली में रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) लागू किया जाएगा, जिसके जरिए सड़कों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी स्थिति, मरम्मत की जरूरत तथा यातायात दबाव का वैज्ञानिक आकलन के साथ प्लानिंग की जा सकेगी। डेटा आधारित रोड मैनेजमेंट सीएम ने कहा, सरकार केवल नई सड़कें बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा अर्बन रोड इकोसिस्टम विकसित कर रही है जो पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब सड़कों का रखरखाव पारंपरिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डेटा आधारित प्रणाली से किया जाएगा। सीएम के मुताबिक, नई व्यवस्था से सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की योजना डेटा आधारित होगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और रोड स्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा। सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने तथा मिकैनाइज्ड रोड स्वीपिंग और डस्ट कंट्रोल के उपायों को लागू किया जाएगा। समझौते के तहत सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को भी वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जाएगा। समझौते की मुख्य बातें…     सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को पुनर्गठित किया जाएगा।     पेवमेंट डिजाइन में तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो भूजल रिचार्ज में सहायक हो।     सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, रोड सेफ्टी और एसेट मैनेजमेंट पर काम होगा।     एसपीए शहरी डिजाइन, स्ट्रीट एस्केप प्लानिंग, पब्लिक स्पेस डिवेलपमेंट, अर्बन लैंडस्केपिंग पर काम करेगी।     सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। आधुनिक रोड मॉडल पर जोर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, यह समझौता रोड स्ट्रक्चर को आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से विकसित करेगा। सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। वहीं, मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, सरकार सड़कों के किनारे स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों, झाड़ियों तथा घास के रोपण के माध्यम से डस्ट पॉल्यूशन कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।  

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद खादर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली  यमुना नदी के खादर क्षेत्र में बसी अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के संरक्षित ओ-जोन इलाके से अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर एक्शन शुरू कर दिया है। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद डीडीए अवैध निर्माणों और बस्तियों को हटाने की कार्रवाई तेज कर सकती है। क्या है दिल्ली का O-Zone ? दिल्ली सरकार के मास्टर प्लान-2021 के अनुसार, यमुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को O-Zone घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर में फैला हुआ है और लगभग 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। राजधानी का यह इलाके का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। नियमों के अनुसार यहां आवासीय निर्माण और स्थायी मकान का निर्माण नहीं किया जा सकता है। क्यों चर्चा में है O-Zone? डीडीए के अनुसार, पिछले कई सालों में यमुना के खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध बस्तियां और कालोनियां विकसित हो गई हैं। इनमें से कई जगहों पर सीवर और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी अभाव है, जिसके कारण गंदा पानी सीधे यमुना में पहुंचता है। इससे नदीं प्रदूषित होती और बाढ़ का खतरा बढ़ता है। दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों के बाद डीडीए इसी ओ-जोन इलाके को मूल अवस्था में लाने के लिए बुलडोजर एक्शन शुरू कर रहा है। दिल्ली के O-Zone में कौन से इलाके? DDA के रिकॉर्ड के मुताबिक, यमुना फ्लडप्लेन के भीतर करीब 90 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां मौजूद हैं। इनमें मदनपुर खादर, जैतपुर, मीठापुर, झंगोला, सोनिया विहार के कुछ हिस्से, खजूरी खास, करावल नगर समेत यमुना किनारे के कई अन्य इलाके शामिल बताए जाते हैं। बता दें ओ-जोन बाढ़ क्षेत्र है, इसलिए कई इलाकों का पूरा हिस्सा इसके अंतर्गत नहीं आता है। बल्कि केवल यमुना के करीब स्थित कुछ हिस्से ही आते हैं।     मदनपुर खादर     जैतपुर     मीठापुर     झंगोला     सोनिया विहार के कुछ हिस्से     खजूरी खास     करावल नगर के कुछ हिस्से     जगतपुर     बुराड़ी के यमुना किनारे वाले क्षेत्र     उस्मानपुर     गढ़ी मांडू     शेरपुर     बेहटा हाजीपुर     ताजपुर खुर्द     छिल्ला गांव क्षेत्र     कोंडली के कुछ हिस्से     मयूर विहार के यमुना किनारे स्थित क्षेत्र     ओखला बैराज के आसपास के इलाके     आईटीओ बैराज के आसपास का फ्लडप्लेन क्षेत्र  

हर्षवर्धन कपूर का बड़ा खुलासा: एक्टिंग नहीं छोड़ी, नई फिल्म पर कर रहे हैं काम

मशहूर एक्टर अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर अक्सर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. वे आखिरी बार फिल्म ‘थार’ में नजर आए थे. इसके बाद लंबे समय तक उनकी कोई नई फिल्म सामने नहीं आई, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ने लगी कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ दी है. अब हर्षवर्धन ने खुद सामने आकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है और अपने फैंस को एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. क्या एक्टिंग छोड़ रहे हैं हर्षवर्धन? खुद दिया जवाब हर्षवर्धन कपूर ने इन अफवाहों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा. उन्होंने साफ किया, “मैंने एक्टिंग से बिल्कुल भी दूरी नहीं बनाई है, जब से ‘थार’ फिल्म रिलीज हुई थी, मैं उसी दिन से एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हू. ‘थार’ को बनने में 5 साल का समय लगा था. इसी तरह विक्रम को ‘भावेश जोशी’ फिल्म बनाने में कई साल लग गए थे.     हर्षवर्धन ने अपनी अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताया अपने आने वाले काम के बारे में बात करते हुए हर्षवर्धन ने बताया कि वे पिछले 2-3 सालों से अपनी अगली फिल्म पर लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा ठीक वैसे ही, मुझे भी इस नई फिल्म को पूरा करने में अब जाकर 2-3 साल लगे हैं, जिसकी शूटिंग आने वाली 30 जून को खत्म होने जा रही है. मैं खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहा हूं. मुझे लगता है कि लोगों को हर साल कलाकारों की कई फिल्में देखने की आदत हो गई है. लेकिन अगर आप ‘भावेश जोशी’, ‘थार’, ‘एके वर्सेस एके’ और ‘रे’ जैसी अलग तरह की फिल्में देखना चाहते हैं, तो यह साल में एक या दो बार मुमकिन नहीं है, यही असल सच्चाई है. खैर, आप सभी का धन्यवाद, और मेरी यह नई फिल्म अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है, 100 प्रतिशत यह बेहद अनोखी और बिल्कुल अलग है.” कैसा रहा है हर्षवर्धन का फिल्मी सफर? हर्षवर्धन कपूर ने सीधे एक्टिंग से नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम सीखा था. इसके बाद साल 2016 में उन्होंने ‘मिर्ज्या’ फिल्म से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा. इसके दो साल बाद वे ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ में नजर आए. इसके बाद उन्होंने नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘एके वर्सेस एके’ और फिर ‘थार’ में अपने एक्टिंग का जलवा दिखाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था.

फायर विभाग की कमी दूर करेंगे अग्निवीर? दिल्ली सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार राजधानी में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली फायर सर्विस में परिचालन के पदों पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सामने आया। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल टीएस संधू ने की। इस बैठक में हाल ही में दक्षिण दिल्ली में लगी भीषण आग में 22 लोगों की मौत के बाद फायर सर्विस की तैयारियों और संसाधनों की समीक्षा की गई। सोमवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा समेत पुलिस और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उपराज्यपाल ने फायर विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उपराज्यपाल ने दिया प्रस्ताव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तरनजीत संधू ने कहा, 'अग्निशमन विभाग के कार्यबल को मजबूत करने के लिए मौजूदा रिक्तियों को भरने की खातिर पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति पर विचार करने का सुझाव दिया।' अधिकारियों ने बताया कि बैठक में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने, नागरिकों की निगरानी बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। पूर्व अग्निवीर बनेंगे फायर फाइटर! एक अधिकारी ने बताया, सरकार अब पूर्व अग्निवीरों को फायर फाइटर के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक प्रशिक्षण और सेवा शर्तों का खाका तैयार करेगी। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती की जाती है। 1,030 पद हैं खाली दिल्ली फायर सर्विस लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। विभाग में स्वीकृत 3,633 पदों में से 1,030 पद खाली हैं, जबकि 412 पद संविदा कर्मियों के माध्यम से भरे गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण फायर ऑपरेटर श्रेणी में 2,367 स्वीकृत पदों में से 552 पद रिक्त हैं। विभाग में वर्तमान में 312 संविदा फायर ऑपरेटर कार्यरत हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया आखिरी बार वर्ष 2011-12 में हुई थी। फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा बैठक में राजधानी में फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें 67 नियमित और 4 डे-टाइम स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2011 में गृह मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में दिल्ली के लिए 99 फायर स्टेशनों की आवश्यकता बताई गई थी। गृह मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली फायर सर्विस अधिनियम, 2007 की धारा 32 को सख्ती से लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत राजधानी की सभी बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा और अग्नि रोकथाम उपायों को अनिवार्य बनाने की बात कही गई। वर्तमान नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से अधिक इमारतें अग्नि सुरक्षा के दायरे में आएंगी और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी।  

दिल्ली-NCR में यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी, Ola-Uber सेवाओं पर 9 दिन का संकट

नई दिल्ली दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ शहरों के लोगों को 9 से 16 जून तक आवाजाही में दिक्कत झेलनी पड़ सकती है. दरअसल चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में ओला, उबर समेत एप बेस्ड कैब ड्राइवर हड़ताल पर हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैब ड्राइवर्स का ये अंदोलन सुबह 10 बजे से शाम 4 बज तक चलेगा. इस दौरान ये सवारियां लाने-लेजाने का काम नहीं करेंगे. ओला-उबर और इनड्राइव की इस हड़ताल का असर करीब 50 हजार यात्रियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. कैब हड़ताल के बीच लोगों को तेज और जलती धूप के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट या फिर ऑटो में सफर करना पड़ेगा।  कैब ड्राइवर क्यों कर रहे हड़ताल? पंजाब की राजधानी चंडीगढ़, मोहलाी और पंचकूला के कैब ड्राइवर्स के आंदोलन की वजह किराए की कीमतों में बढ़ोतरी न किए जाना है. ये लोग लगातार किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. कैब ड्राइवर्स के मुताबिक, साल 2025 में चंडीगढ़ प्रशासन ने उनके लिए किराया 25 किमी. प्रति किमी. तय किया था. इसके बाद से कई बार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी महंगा हो चुका है. लेकिन कैब के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया. 1 साल से किराया नहीं बढ़ने से ये लोग नाराज हैं।  किराया 25 रुपये से35 रुपये प्रति किमी. करने की मांग कैब ड्राइवर्स कह रहे हैं कि सीएनजी 9 रुपये महंगी हो चुकी है. पेट्रोल-डीजल भी लगातार महंगा हो रहा है. ऐसे में ये लोग किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रति किमी. बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं. ड्राइवर एसोसिएशन का कहना है कि किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर वे लोग कई बार अधिकारियों से मिले लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी वजह से उनको अब हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा है।  दिल्ली-NCR में भी हुई थी ऑटो और टैक्सी भी हड़ताल बता दें कि 21 से 23 मई तक दिल्ली-एनसीआर में भी ऑटो और टैक्सी वालों ने हड़ताल की थी. इसका खामियाजा दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के लाखों लोगों को भुगतना पड़ा था. ये हड़ताल इन लोगों ने कमर्शियल वाहनों पर ईसीसी बढ़ाए जाने और BS-4 या उससे पुराने वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर की गई थी. हालांकि ओला, उबर और रैपिड जैसी एप बेस्ड सर्विसेज ने इस समर्थन का सपोर्ट नहीं किया था।