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गौतम बुद्ध नगर में स्कूल सुबह 7:30 से 12:30 तक, डीएम का आदेश लागू

नई दिल्ली नोएडा और आसपास के इलाकों में बढ़ती गर्मी ने अब स्कूलों की दिनचर्या तक बदल दी है। गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने हालात को देखते हुए सभी स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और ‘लू’ चलने का खतरा भी बढ़ गया है। छोटे बच्चों पर इसका असर जल्दी पड़ता है, इसलिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है। नई टाइमिंग क्या है और कब से लागू होगी जारी आदेश के मुताबिक, अब जिले के सभी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ही चलेंगे। यह नया शेड्यूल 27 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और अगली सूचना तक जारी रहेगा। इसका मकसद साफ है कि बच्चों को दोपहर की तेज धूप और खतरनाक गर्मी से दूर रखा जा सके। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल जाना सुरक्षित रहेगा। किन-किन स्कूलों पर लागू होगा आदेश यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। जिले में चल रहे सभी स्कूलों पर यह नियम लागू होगा, चाहे वे निजी हों या किसी भी बोर्ड से जुड़े हों। इसमें सीबीएसई, आईसीएसई, आईबी और यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी संस्थान शामिल हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस आदेश का पालन करना हर स्कूल के लिए जरूरी है। लू और हीटवेव का बढ़ता खतरा उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान ‘लू’ यानी गर्म और सूखी हवाएं चलना आम बात है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है कि दोपहर के समय बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में स्कूल जैसे जगह, जहां बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ मौजूद होते हैं, खासतौर पर संवेदनशील माने जाते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने समय बदलकर जोखिम कम करने की कोशिश की है। दिल्ली स्कूलों में भी सख्त कदम गर्मी से निपटने के लिए दिल्ली के स्कूलों में भी कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। वहां ‘वॉटर बेल’ सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें हर 45 से 60 मिनट के बीच बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाती है। इसके अलावा, खुले मैदान में होने वाली असेंबली और आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है, जो इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां गर्मी के इस मौसम में सिर्फ टाइमिंग बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को खुद भी कुछ सावधानियां अपनानी होंगी। जैसे कि ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप में ज्यादा देर तक न रहना। स्कूलों में भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चे डिहाइड्रेशन से बचें और किसी भी तरह की तबीयत खराब होने पर तुरंत जानकारी दें। आगे क्या हो सकता है फैसला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर गर्मी और बढ़ती है तो आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं अगर मौसम में राहत मिलती है, तो स्कूलों के समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। फिलहाल प्राथमिकता बच्चों की सेहत और सुरक्षा को दी जा रही है।

केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में नहीं होंगे पेश, सत्याग्रह शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे।  उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है।  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है।  अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?  जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है। दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी। मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

जीनोमिक्स क्रांत,AIIMS में भविष्य की चिकित्सा पर चर्चा

 नई दिल्ली बीमारियों का उपचार अब सबके लिए एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि अब यह हर मरीज के जीन (DNA) के आधार पर तय किया जाएगा। इसे प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जिसमें उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और व्यक्तिगत होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा उन्नत तथा प्रभावी हो जाएंगी। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ‘डीएनए डे 2026’ पर आयोजित संगोष्ठी में सामने आई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीनोमिक्स (डीएनए आधारित विज्ञान) के उपयोग से भविष्य में उपचार का तरीका बदलने वाला है। चिकित्सक मरीज की जेनेटिक जानकारी के आधार पर बीमारी का बेहतर निदान और सही उपचार कर सकेंगे। जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर संगोष्ठी में जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर दिया गया। संगोष्ठी का आयोजन डीएनए सोसायटी आफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस-एम्स) ने संयुक्त रूप से कराया। संगोष्ठी में 1953 में डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज और 2003 में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की पूर्णता को भी रेखांकित किया गया। उद्घाटन सत्र डीएनए सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. अशोक शर्मा ने प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आईजीआईबी) के मुख्य वैज्ञानिक प्रो. अभय शर्मा ने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान पर न‌ई जानकारी साझा की। उन्होंने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान के उभरते आयामों को समझाया। कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत मुख्य व्याख्यान में शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो. संजीव गलांडे ने 'कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत किया। डीएसआइ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य प्रो. श्रीकांत कुकरेती ने जीनोमिक्स अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। प्रीमास लाइफ साइंसेज के डा. भास्कर मैती ने स्पैटियल बायोलॉजी और मल्टीओमिक्स तकनीकों के उपयोग को समझाया। 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पहलों को देश में किफायती और सुलभ जीनोमिक चिकित्सा के लिए अहम बताया।

12 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद दोनों हाथ प्रत्यारोपण सफल

नई दिल्ली दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक ऐसी सर्जरी हुई है, जिसने एक महिला की जिंदगी बदल दी. दो बच्चों की मां जिसने एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, अब फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रही है. अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका सफलतापूर्वक दोनों हाथों का ट्रांसप्लांट किया है. जानकारी के मुताबिक, महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. इस हादसे के बाद वह अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं कर पाती थी. खाना खाना, कपड़े पहनना, बच्चों की देखभाल करना, हर काम के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में हाथों का ट्रांसप्लांट उसके लिए नई जिंदगी जैसा साबित हुआ. ब्रेन-डेड व्यक्ति था डोनर यह सर्जरी तब संभव हो सकी जब एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिवार ने उसके हाथ दान करने की सहमति दी. उनके इस फैसले ने एक जरूरतमंद महिला को फिर से जीने का मौका दिया. अस्पताल ने इस परिवार के प्रति आभार जताया और इसे इंसानियत की मिसाल बताया. 12 घंटे तक चली सर्जरी डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी करीब 12 घंटे तक चली. इसमें डोनर के दोनों हाथ महिला के शरीर से जोड़े गए. दाहिना हाथ कोहनी के ऊपर से और बायां हाथ कलाई के पास से जोड़ा गया. डॉक्टरों ने हड्डियां, नसें, मांसपेशियां, खून की नलियां और टेंडन बहुत सावधानी से जोड़े, ताकि हाथों में फिर से ब्लड सर्कुलेशन और हरकत आ सके. अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि यह बेहद कठिन और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें हर मिनट की अहमियत होती है. अगर समय पर सही तरीके से काम न हो, तो ट्रांसप्लांट किए गए अंग को बचाना मुश्किल हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल होने के बाद भी असली सफर अब शुरू हुआ है. महिला को लंबे समय तक दवाएं लेनी होंगी ताकि शरीर नए हाथों को स्वीकार कर सके. इसके साथ ही उसे नियमित फिजियोथेरेपी और अभ्यास की जरूरत होगी, जिससे वह धीरे-धीरे हाथों का इस्तेमाल सीख सके. यह अस्पताल में किया गया दूसरा ऐसा ट्रांसप्लांट है. इस पूरी प्रक्रिया में प्लास्टिक सर्जरी, हड्डी रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोलॉजी, फिजियोथेरेपी और कई अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल थे.

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को राहत, 1000–1500 रुपये में मिलेगा आवास

नोएडा  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या हमेशा सस्ते और सुरक्षित आवास की रही है। बढ़ते किराए, लंबी दूरी और सीमित आय के बीच जीवन यापन करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। अब इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार और प्राधिकरण स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। नोएडा में जहां श्रमिकों के लिए चार बड़े हॉस्टल बनाए जाएंगे, वहीं पूरे राज्य में किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी है, जिससे मजदूरों को उनके कार्यस्थल के पास ही सस्ती और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था मिल सकेगी। नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा। चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा, जिससे श्रमिकों को कार्यस्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त परिवहन खर्च नहीं करना पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में बनेंगे श्रमिक आवास राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय में आवास, औद्योगिक विकास, नगर विकास और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल रहे, जिन्होंने श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा देने पर सहमति जताई। सरकारी एजेंसियों के साथ निजी डेवलपर्स भी होंगे शामिल इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके। 1000 से 1500 रुपये तक होगा किराया इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन श्रमिक आवासों का मासिक किराया लगभग 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह योजना कम आय वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। कुशल और अकुशल दोनों श्रमिकों को मिलेगा लाभ यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार राज्य सरकार पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इस नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला? हाल के वर्षों में नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों ने महंगे किराए, बच्चों की फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध जताया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी श्रमिकों के सामने आवास की गंभीर समस्या सामने आई थी, जिसने इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।  

शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें, एयरलाइंस कंपनियों ने खाका तैयार किया

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले महीने उड़ानें शुरू करने की तैयारी है. एयरलाइंस कंपनियों ने शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की एयरपोर्ट साइट पर बोर्ड बैठक हुई. बैठक में एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में आ रही रुकावटों समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मई के अंत तक एयरपोर्ट से घरेलू और कार्गो विमान सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया. तीन एयरलाइंस कंपनियों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई, जिन्होंने शुरुआत में एयरपोर्ट से 17 फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. 17 शहरों के लिए मिलेगी कनेक्टिविटी बैठक में पूरा खाका तैयार करने और टिकट बुकिंग सेवा शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए. हालांकि, उड़ान के लिए शहरों का चयन अभी नहीं हो सका है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से उड़ान के लिए अंतिम मंजूरी के प्रस्ताव पर भी यापल और नायल के अधिकारियों के बीच बैठक हुई. सुरक्षा और विदेशी CEO का मसला बकास से अभी एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही उड़ान सेवा शुरू की जाएगी. इस दौरान गृह मंत्रालय की आपत्तियों को दूर करने और विदेशी सीईओ से संबंधित मसले को सुलझाने पर भी अधिकारियों के बीच मंथन हुआ. यापल के अधिकारियों ने दावा किया कि इस पर काम शुरू हो गया है और एएसपी के लिए सभी आपत्तियां इसी माह में दूर कर ली जाएंगी, ताकि मई तक उड़ानें शुरू की जा सकें. इंफ्रा पर बड़ा निवेश, 300 करोड़ खर्च होंगे यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट पर अगले दो वर्षों में विमानों को खड़ा करने के लिए 25 नए स्टैंड बनेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वर्तमान में 28 स्टैंड बनकर तैयार हैं, जिनमें तीन कार्गो और 25 व्यावसायिक विमानों के लिए हैं. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज जोड़े गए हैं, जिससे विमान यात्री एक साथ उड़ान भर सकेंगे. एयरपोर्ट के रनवे को प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

लक्ष्मी नगर और शकूर बस्ती में आग का कहर, दमकल विभाग ने किया रेस्क्यू

नई दिल्ली दिल्ली में शुक्रवार रात को आगजनी की दो घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पहली घटना लक्ष्मी नगर में हुई, जहां ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई मकानों को चपेट में ले लिया। वहीं, शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में शुक्रवार देर रात को बिजली के एक ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई आवासीय इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 लोगों को बचाया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, रमेश पार्क स्थित नानक मोटर के पास रात करीब साढ़े 12 बजे आग लगने की सूचना मिली। दमकल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची लेकिन आग जल्द और भड़क गई। आग पर काबू पाने के लिए पानी के सात टैंकर और अन्य अग्निशमन वाहनों को तैनात किया गया। अधिकारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर से आग आसपास की तीन इमारतों में फैल गई, जिससे 14 फ्लैट प्रभावित हुए। दमकलकर्मियों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और प्रभावित फ्लैट में फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। देर रात करीब दो बजे आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद शीतलन अभियान चलाया गया। आग लगने का सटीक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। उधर, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, आग लगने की सूचना शुक्रवार रात 11 बजकर 14 मिनट पर मिली। उसने बताया कि शुरुआत में दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और करीब दो एकड़ क्षेत्र में फैली आग पर काबू पाने के लिए बाद में और गाड़ियों को भेजा गया। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा कि झुग्गियों में इस्तेमाल अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई। आग पर देर रात करीब 12 बजकर 40 मिनट पर काबू पा लिया गया। यह सुनिश्चित करने के लिए शीतलन अभियान जारी है कि आग फिर न भड़के। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है।

CAF फायर फाइटिंग व्हीकल 300 मीटर ऊंचाई तक बुझाएगा आग

नोएडा दिल्ली से सटे नोएडा में तेजी से बढ़ रही हाईराइज बिल्डिंग्स में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए फायर विभाग लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. इसी क्रम में नोएडा में कम्प्रेश्ड एयर फोम (CAF) आधारित हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल का सफल ट्रायल किया गया. यह ट्रायल दिल्ली NCR की सबसे ऊंची बिल्डिंग सुपरनोवा की 45वीं मंजिल पर किया गया है, जहां इस अत्याधुनिक व्हीकल की क्षमता को परखा गया. ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि यह वाहन तकरीबन 300 मीटर की ऊंचाई तक आसानी से पानी और फोम पहुंचाने में सक्षम है, जिससे ऊंची इमारतों में लगी आग पर तेजी से काबू पाया जा सकता है. अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक में पानी और कंप्रेस्ड एयर को मिलाकर एक विशेष प्रकार का फोम तैयार किया जाता है. यह फोम आग बुझाने में अधिक प्रभावी होता है और 100 मंजिल तक की ऊंचाई पर लगी आग को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखता है. इस हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके जरिए अग्निशमन कर्मियों को इमारत के अंदर जाकर आग बुझाने में काफी सहायता मिलती है, जिससे रिस्क कम होता है और रेस्क्यू ऑपरेशन अधिक सुरक्षित बनता है. ट्रायल के दौरान डीजी फायर सुजीत पांडे भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने इस तकनीक को हाईराइज इमारतों के लिए बेहद उपयोगी बताया. DG फायर ने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा.

पारदर्शी मूल्यांकन में कृष्णा नगर विधायक को मिला सम्मान, 51 हजार रुपये मिलेंगे

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा ने 18 वर्षों के बाद सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके लिए गठित चयन समिति की बैठक विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल को सर्वश्रेष्ठ विधायक घोषित किया गया। उन्हें स्मृति चिन्ह और 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। शीघ्र ही समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। डॉ. गोयल पहली बार कृष्णा नगर से विधायक चुने गए हैं। पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया चयन 'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' का चयन पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया है। कुल मूल्यांकन 100 अंकों पर किया गया है, जिसमें 65 अंक विधानसभा के आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर और 35 अंक चयन समिति द्वारा गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर हैं। विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित मूल्यांकन का सबसे बड़ा हिस्सा, 50 अंक सदन में विभिन्न मुद्दों पर होने वाली चर्चा में सदस्य के योगदान पर केंद्रित है। विभिन्न समितियों में विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित हैं। 20 अंक अनुशासन, आचरण और आधुनिकीकरण (डिजिटल और कागजरहित कार्यप्रणाली) से संबंधित हैं। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह पहल उन सदस्यों को सम्मानित करने के लिए है जो विधायी कार्यों में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं और समिति कार्यों में अथक परिश्रम करते हैं। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य, दिल्ली सरकार के विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के प्रधान सचिव रितेश सिंह और दिल्ली विधानसभा के सचिव रणजीत सिंह शामिल रहे।  

AAP का बड़ा कदम: दिल्ली में भाजपा को बिना मुकाबले जीत का मौका क्यों दिया?

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता गंवा देने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) राजधानी की 'छोटी सरकार' यानि दिल्ली नगर निगम (MCD) से भी दूर हो चुकी है। पिछले एमसीडी चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली 'आप' के हालात इन दिनों ऐसे हैं कि लगातार दूसरे साल पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना लड़े जीत का मौका दे दिया है। पंजाब, गुजरात से गोवा तक में विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने इस साल भी दिल्ली में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। दोनों पदों के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। आप के पार्षद और विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने कहा, 'हम प्रयास करते तो संख्याबल जुटा सकते थे। कुछ पार्षद मौजूदा व्यवस्था से नाखुश हैं। लेकिन दूसरे दलों की तरह हॉर्स ट्रेडिंग (वोट खरीद-फरोख्त)करने से फायदा नहीं है।' बुधवार को एक पार्टी की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी ने तीन में से केवल एक रिक्त स्टैंडिंग कमिटी के लिए नामांकन दाखिल किया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस सीट पर वह जीत हासिल कर सकती है। नारंग ने कहा, 'एक बार फिर हमने भाजपा को ना सिर्फ मेयर बल्कि स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बनाने का मौका दिया है, क्योंकि पार्टी किसी भी तरह कमिटी में बहुमत हासिल करने की कोशिश करेगी।'आम आदमी पार्टी ने शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को कमिटी के लिए उतारा है। नारंग ने कहा कि चौधरी अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से इलाके की समस्याओं को उठाते रहे हैं। मेयर-डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमिटी के लिए 5 पदों पर चुनाव मेयर और डिप्टी मेयर के अलावा स्टैंडिंग कमिटी के तीन सदस्यों के लिए भी 29 अप्रैल को ही वोटिंग होगी। 31 मार्च को भाजपा के 6 और आप के तीन प्रतिनिधि 18 सदस्यीय समिति से रिटायर हो गए थे। छह सीटों के लिए चुनाव संबंधित जोन में होंगे जहां के प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हुआ है, जबकि तीन का निर्वाचन सदन में होगा। शेष 9 सदस्यों में भाजपा के पांच और आप के चार सदस्य हैं। बुधवार को भाजपा ने भी एक बैठक करके आगामी चुनाव पर मंथन किया। मेयर पद के लिए भाजपा ने बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव, महिपालपुर के इंद्रजीत सहरावत और मौजूदा मेयर राजा इकबाल सिंह पर विचार किया। मैदान में उतरेगी कांग्रेस एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी ने मैदान छोड़ने का फैसला किया तो कांग्रेस ताल ठोंकने का दमखम दिखा रही है। कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों के लिए उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सदन में 250 सीटों में से भाजपा के 123 और आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। 15 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी से हैं। यह गुट आप से अलग हुआ था। कांग्रेस के 9 पार्षद हैं जबकि एक फॉर्वर्ड ब्लॉक और एक निर्दलीय है। एक सीट खाली है। क्या है वोटों का समीकरण मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में पार्षदों के अलावा दिल्ली के सांसद और विधायक भी हिस्सा लेते हैं। इस हिसाब से भाजपा के पास 141 वोट हैं जबकि आप के पास 106 का संख्याबल है। कांग्रेस के पास दिल्ली से कोई विधायक या सांसद नहीं है। पिछले साल भी आम आदमी पार्टी ने दोनों पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा को बिना लड़े ही जीत का मौका मिल गया था।