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रेलवे की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन 75 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी, सिर्फ जल-वाष्प उत्सर्जन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने पिछले महीने 27 मई को नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन चलाने को मंजूरी दी थी। रेल मंत्रालय के मुताबिक यह ट्रेन जल्द ही शुरू होने के लिए तैयार है। यह 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी। शुक्रवार को दिल्ली और जींद के बीच इसका ट्रायल रन किया गया। इस टेस्ट में इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और ट्रेन के हिलने-डुलने जैसे अहम पहलुओं पर ध्यान दिया गया। सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है देश में हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का मकसद साफ-सुथरे और ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट रेल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। रेलवे मंत्रालय ने कहा कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के जरिए बिजली बनाती है, जिसमें सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल-बेस्ड ट्रैक्शन सिस्टम का एक साफ-सुथरा विकल्प बन जाती है। इस पहल के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन देशों में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं। जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट चुना गया हरियाणा में जींद-सोनीपत सेक्शन को ऑपरेशन के लिए पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेनसेट के लिए जींद में ही हाइड्रोजन स्टोर करने और रिफ्यूलिंग की सुविधा भी बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने और भरने के लिए जरूरी लाइसेंस दे दिया है।      सभी तरह की व्यवस्था की गई है रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, भरोसेमंद और बिना किसी रुकावट के काम करने को पक्का करने के लिए रिफ्यूलिंग ऑपरेशन के लिए हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही टेक्निकल सपोर्ट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स की भी व्यवस्था की गई है। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट का इंतजाम भी किया जा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और सप्लाई करने वाली जगह पर लगे सेफ्टी सेंसर की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाएगी ताकि सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित हो सके। ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा इंडियन रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेनसेट और हाइड्रोजन प्लांट के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल भी तैयार किए हैं, जिन्हें आरडीएसओ ने मंजूरी दी है। इसके साथ ही, शकूरबस्ती में मेंटेनेंस सुविधा के लिए सुरक्षा उपाय, ऑडिट और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तय किए गए हैं। इस मंजूरी में हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी, ​​जरूरी कामों के लिए ट्रेंड और सर्टिफाइड कर्मचारियों की तैनाती और नियमित जांच व मेंटेनेंस शेड्यूल शामिल हैं। शुरुआती दौर में ट्रेन के सुचारू रूप से चलने को सुनिश्चित करने के लिए ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा।

15 जिलों में छापेमारी कर पुलिस ने भारी मात्रा में ड्रग्स और नकदी बरामद की

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में दिल्ली पुलिस को ऑपरेशन कवच 14.0 के तहत नशे का व्यापार करने वालों को शिकंजा कसने में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 48 घंटे चले इस अभियान में ऑपरेशन कवच 14.0 के तहत शहर भर में ड्रग्स और अन्य अपराधों के खिलाफ चौतरफा कार्रवाई की। पुलिस की 15 जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी दिल्ली पुलिस के अनुसार सभी 15 जिलों में पुलिस की 1,474 टीमों ने राजधानी में ताबड़तोड़ छापेमारी कर 255 लोगों को गिरफ्तार किया और 212 मामले दर्ज किए। पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिसमें 237.46 किलोग्राम गांजा, 5.18 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनबिस, 1.1 किलोग्राम हेरोइन, कोकीन, एमडीएमए (MDMA) और चरस शामिल हैं। आरोपियों से 23 लाख से ज्यादा रकम बरामद पुलिस ने आगे बताया कि साथ ही ड्रग्स के कारोबार से कमाई गई 23.27 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद की गई। कश्मीरी गेट और नरेला जैसे इलाकों से कई शातिर तस्करों को भारी मात्रा में हेरोइन और कोकीन के साथ दबोचा गया। ड्रग्स के अलावा पुलिस ने अवैध शराब और हथियारों के सिंडिकेट पर भी तगड़ा एक्शन लिया। इन अपराधियों पर भी पुलिस का एक्शन इलके अलावा पुलिस ने दिल्ली एक्साइज एक्ट के तहत 398 मामले दर्ज कर 405 लोगों को पकड़ा और 53,448 क्वार्टर अवैध शराब बरामद की गई। वहीं, आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 329 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 6 पिस्तौल, 90 देसी हथियार, 147 जिंदा कारतूस और 242 चाकू जब्त किए। जुए के खिलाफ की गई कार्रवाई में भी 600 लोग पुलिस की गिरफ्त में आए और 7.16 लाख रुपये कैश बरामद हुआ। करोड़ों के गहने लेकर गायब हुए बंदर!, यूपी के लखीमपुर का ये मामला सुनकर माथा घुम जाएगा पुलिस से बचने के लिए दूसरे राज्य भाग रहे ड्रग सप्लायर अधिकारियों के अनुसार, इस महा-ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में सक्रिय अपराधियों पर नकेल कसना और ड्रग्स की सप्लाई चेन को पूरी तरह से ध्वस्त करना था। इस कार्रवाई का असर यह हुआ है कि दिल्ली के कई बड़े ड्रग तस्कर भूमिगत हो गए हैं और वे अपना स्टॉक लेकर नोएडा जैसे पड़ोसी इलाकों में भागने को मजबूर हुए हैं।  

2028 तक पूरा होगा DMRC प्रोजेक्ट, दक्षिण-पूर्व दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण कम होने की उम्मीद

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में मेट्रो कनेक्टिविटी को और भी मजबूत बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन ने गोल्डन लाइन' के विस्तार की घोषणा की है। DMRC के फेज V(A) विस्तार के तहत बनने वाला यह 3.9 किलोमीटर लंबा कालिंदी कुंज-तुगलकाबाद कॉरिडोर दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत देगा। कब तक पूरा होगा DMRC का प्रोजेक्ट DMRC ने मैजेंटा और वॉयलेट मेट्रो लाइनों को आपस में जोड़ने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2028 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस नए कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह यमुना रिवरफ्रंट के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व दिल्ली के मुख्य रिहायशी और उभरते इंडस्ट्रियल इलाकों को बेहतर ढंग से जोड़ेगा। नए रूट पर बनाए जाएंगे कितने स्टेशन इस 3.9 किलोमीटर के रूट पर कुल चार स्टेशन बनाए जाएंगे जिसमें सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज एलिवेटेड स्टेशन होंगे, जबकि तुगलकाबाद अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। लोगों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी DMRC के अनुसार, नया कॉरिडोर दक्षिण-पूर्व दिल्ली में रिहायशी इलाकों और इंडस्ट्रियल इलाकों के लिए कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा। यह साकेत और छतरपुर जैसे रिहायशी इलाकों तक सीधी पहुंच भी देगा और साथ ही नोएडा, फरीदाबाद, दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच लिंक को बेहतर बनाएगा। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगा छुटकारा DMRC ने कहा कि नया कॉरिडोर नोएडा-फरीदाबाद रूट के साथ-साथ एयरपोर्ट से जुड़ने वाली सड़कों पर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा। एक अतिरिक्त मेट्रो कनेक्शन देकर, इस प्रोजेक्ट से रोज़ाना सफर करने वालों के लिए यात्रा की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।  

सेफ दिल्ली ऐप: वॉयस कमांड से सेकंडों में मिलेगा SOS अलर्ट, सीधे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे नागरिक

नई दिल्ली  राजधानी में महिलाओं, बुजुर्गों, और छात्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार जल्द ही 'सेफ दिल्ली ऐप' लॉन्च करने जा रही है। दावा है कि यह मोबाइल ऐप किसी भी आपात स्थिति में एक सेकंड से भी कम समय में पुलिस कंट्रोल रूम तक अलर्ट भेज सकेगा। इसके जरिए न केवल लोकेशन, बल्कि घटनास्थल का लाइव ऑडियो, विडियो और GPS भी पुलिस को तुरंत उपलब्ध होगा। रेखा सरकार के सेफ दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि खतरा महसूस होने पर पीड़ित को फोन चलाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल ऐप में पहले से दर्ज किए गए वॉयस कमांड बोलते ही ऐप सक्रिय हो जाएगा और पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। इसके साथ ही ऐप में आपात स्थिति में संपर्क करने के लिए पहले से फीड किए गए मोबाइल नंबर पर SMS और वट्सऐप के माध्यम से परिवार या भरोसेमंद लोगों को भी सूचना भेजी। अधिकारियों का कहना है कि यह ऐप खासतौर पर उन महिलाओं के लिए उपयोगी साबित होगा जो देर रात ऑफिस से घर आती है, वो छात्राएं जो सुनसान रास्तों या कॉलेज कैंपस में अकेली होती है और वरिष्ठ नागरिक जो घर में अकेले रहते हैं। बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ जाएंगे किसी भी आपात स्थिति में वे बिना समय गंवाए पुलिस से सीधे जुड़ सकेंगे। आपात स्थिति में सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज सकेंगे। सरकार का दावा है कि दिल्ली में स्ट्रीट क्राइम, महिलाओं के साथ छेड़छाड़, स्टॉकिंग, लूटपाट, चेन स्नैचिंग, सुनसान इलाकों में होने वाली वारदातों और बुजुर्गों के साथ अपराधों पर अंकुश लगाने वाला यह ऐप देश में अपनी तरह का पहला SOS अलर्ट एक सकड से भी कम समय में पुलिस तक पहुंचेगा। अधिकारियों ने क्या कहा अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के सेंट्रल जिले में सेफ दिल्ली ऐप का एक सफल पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि लाइव विडियो और ऑडियो मिलने से कंट्रोल रूम को घटनास्थल की वास्तविक तस्वीर तुरंत मिल जाएगी। फुटेज होने से अपराधियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सेफ दिल्ली ऐप को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार कर लिया है। सबकुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द इसे कैबिनेट से लॉन्च भी कर दिया जाएगा

पार्सल सेवा में क्रांति की तैयारी, रेलवे लाएगा रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम

 नई दिल्ली रेलवे अपनी ऑनलाइन सेवाओं के तहत ग्राहकों और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी कर रहा है। यह ग्राहकों के लिए पार्सल बुकिंग के अनुभव को बेहतर बना रहा है, जिससे वे अब आसानी से अपनी बुकिंग को ट्रैक कर सकेंगे। रेलवे ने अपने अधिकारियों को इसे लागू करने का काम सौंप दिया है। रेलवे अब पार्सल सेवा को पूरी तरह डिजिटल और ट्रांसपेरेंट बनाने की तैयारी में है। जल्द ही ग्राहक रेलवे से पार्सल बुक करने के बाद उसे रियल-टाइम ट्रैक कर सकेंगे, ठीक उसी तरह जैसे ई-कॉमर्स कंपनियों के पैकेज ट्रैक होते हैं। देशभर में चल रहा अध्ययन रेलवे की अध्ययन टीम ने दिल्ली के प्रमुख पार्सल कार्यालयों जैसे नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार स्टेशन का जायजा लिया और वहां मौजूद समस्याओं को चिह्नित किया। वर्तमान व्यवस्था में मुख्य समस्याएं दिल्ली के स्टेशनों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि पार्सल बुकिंग काउंटर अक्सर शेड और हैंडलिंग एरिया से काफी दूर होते हैं। ग्राहकों को बुकिंग के बाद पार्सल को दूसरी जगह ले जाना पड़ता है। इसके अलावा, पार्सल को कोच में उचित तरीके से नहीं रखा जाता, जिससे नुकसान की आशंका बनी रहती है। ट्रैकिंग और डिजिटल सुविधा की मांग रेलवे अब पार्सल बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक की पल-पल की जानकारी ग्राहकों को ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। इससे पार्सल की पूरी यात्रा घर बैठे ट्रैक की जा सकेगी। सुझाए गए सुधार     पार्सल और यात्रियों की आवाजाही को अलग-अलग रास्तों से किया जाए     पीएमएस ऐप की क्षमता बढ़ाई जाए     पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं     प्लेटफॉर्म तक बैटरी कार्ट या शटल वैन की व्यवस्था     एडवांस्ड वेयरहाउसिंग और मशीनीकृत हैंडलिंग सिस्टम     आरएफआईडी स्कैनिंग अनिवार्य     तापमान नियंत्रित स्टोरेज सुविधा     एक ही ऐप से पार्सल ट्रैकिंग किन समस्याओं पर रेलवे का जोर     गलत डिलीवरी की समस्या: वर्तमान में लेबलिंग और डिजिटल ट्रैकिंग की कमी के कारण कई पार्सल गलत पते पर चले जाते हैं। बुकिंग की जानकारी ग्राहक को SMS, ईमेल या ऐप से नहीं दी जाती।     राजस्व बढ़ाने का अवसर: बेहतर निगरानी और आधुनिक सिस्टम से चोरी और नुकसान के दावों को आसानी से सुलझाया जा सकेगा, साथ ही रेलवे का राजस्व भी बढ़ने की उम्मीद है।     रेलवे बोर्ड का निर्देश: रेलवे बोर्ड की निदेशक प्रतिभा पॉल ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को पत्र लिखकर इन सुझावों के आधार पर पार्सल केंद्रों को आधुनिक बनाने की योजना बनाने को कहा है।  

मरीज की मौत के बाद फोर्टिस अस्पताल में अनियमितताओं की जांच, सीसीटीवी फुटेज से खुलासा

नई दिल्ली  मरीजों के इलाज में कथित लापरवाही और विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ जांच के आदेश दिए है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभागों की संयुक्त टीम ने गुरुवार को अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें कड़े अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। सीएम ने जन सुनवाई के दौरान मिली एक शिकायत के बाद जांच का आदेश दिया था। दरअसल मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में सुनवाई के दौरान एक परिवार ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी कि शालीमार बाग क्षेत्र में उनके बेटे को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था। उनके बेटे को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उसका इलाज करने से पहले उनसे पैसे की मांग की। जिसके चलते सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई। सीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम की निगरानी में जांच के आदेश दिए थे। कई विभागों ने अस्पताल में की जांच सेंट्रल नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के डीएम एस एस परिहार की निगरानी में स्वास्थ्य, नगर निगम, अग्निशमन व अन्य विभागों ने अस्पताल की जांच की। टीम ने अस्पताल में मरीजों के उपचार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों के आधार पर अस्पताल के विभिन्न विभागों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। अस्पताल में नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में कई खामियां और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आए है। इस दौरान बिल्डिंग बायलॉज का दुरुपयोग, अवैध निर्माण, आग बुझाने के सिस्टम में गड़बड़ी, बेसमेंट का मिसयूज और चिकित्सीय नियमों के लिए बनाई गई एसओपी में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। टीम ने की इमरजेंसी विभाग की जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच कर पाया कि जो युवक चाकू लगने से मारा गया था, वह खुद चलकर इमरजेंसी में पहुंचा था। इससे पता चलता है कि अगर उसका सही समय पर इलाज होता तो उसकी जान बच जाती। टीम ने इमरजेंसी विभाग के रिकॉर्ड की भी जांच की है। डीएम के अनुसार इन अनियमितताओं व मरीजों के इलाज में बरती गई लापरवाही को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। जांच की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अस्पताल ने क्या कहा? इस बीच अस्पताल ने बयान जारी कर कहा कि फोर्टिस मरीजों की देखभाल के सर्वोच्च मानकों, चिकित्सीय उत्कृष्टता और सभी नियामकीय प्रावधानों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जैसे ही मामले का औपचारिक विवरण हमारे साथ साझा किया जाएगा, हम उसकी समीक्षा करेंगे और संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग देंगे। मरीजों की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा फैसला, 75 सीएम श्री स्कूलों में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के 75 सीएम श्री स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ सरकार ने उसका चेहरा बदलने का भी फैसला किया है। सीएम रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक्सपेंडिचर एंड फाइनेंस कमिटी (ईएफसी) की बैठक में इसके लिए करीब 264.90 लाख रुपये की मंजूरी दे दी है। इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर सुधार के साथ सीसीटीवी कैमरे आधुनिक सभागार, विज्ञान एवं आईटी पार्क और विशेष कैटिगरी के बच्चों के लिए खास सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। सीएम रेखा गुप्ता के साथ शिक्षा मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी इस बैठक में मौजूद रहे। यह पूरा काम अगले साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा? सीएम ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्कूल भवनों की मरम्मत कराना नहीं, बल्कि ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक परिसर मिले। इस योजना के अंतर्गत स्कूलों के प्रवेश द्वारों का आधुनिक स्वरूप में निर्माण और सौंदर्याकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सीएम श्री स्कूलों की जर्जर इमारतों की समस्या दूर करना, वॉटरप्रूफिंग, बाहरी पेंटिंग, नया प्लास्टर, बाउंड्री वॉल एवं फेंसिंग का निर्माण व मरम्मत, टॉयलेट, पानी की व्यवस्था, सीवर एवं ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ खेल सुविधाओं का विकास, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, मल्टीपरपज हॉल विकसित किए जाएंगे। खराब एलईडी लाइट, सीलिंग फैन, एग्जॉस्ट फैन और पीए (पब्लिक एड्रेस) सिस्टम को बदला जाएगा, ताकि पूरे परिसर में घोषणाएं और आपातकालीन सूचनाएं तेजी से प्रसारित की जा सकें। रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूल परिसरों का स्वरूप भी पूरी तरह बदला जाएगा। आधुनिक डिजाइन वाले सीएम श्री प्रवेश द्वार विकसित किए जाएंगे। खेल मैदानों में आधुनिक आउटडोर गैलरी विकसित की जाएगी, जिसका उपयोग आउटडोर कक्षाओं, मनोरंजन, इंटरैक्टिव गतिविधियों तथा सहयोगात्मक शिक्षण के लिए किया जा सकेगा। बास्केटबॉल कोर्ट में नया टर्फ बिछाया जाएगा। यह सारा कार्य अगल साल के अंत तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।  

ब्रांड पुशिंग का असर, दिल्ली में बीयर बिक्री दोगुनी, आबकारी राजस्व में 17% की बढ़ोतरी

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग द्वारा बियर, शराब की ब्रैंड पुशिंग की नीति का फायदा दिखने लगा है। दिल्ली में शराब की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीने में रेवेन्यू में 17% का इजाफा हुआ है। बियर के नेशनवाइड पॉपुलर बियर बैंड की बिक्री भी दोगुनी हो चुकी है। दो महीने में 885 करोड़ आबकारी विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में पहले दो महीने ( अप्रैल- मई) में शराब की बिक्री से कुल 885 करोड़ का रेवेन्यू मिला था, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसी दौरान बढ़कर 1038 करोड़ रुपये हो गया है। सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री से कुल वास्तविक रेवेन्यू 7148 करोड़ रुपये रखा था, जो इस साल बढ़ाकर 7200 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार का कहना है कि ब्रेड पुशिंग के चलते शराब व बियर की बिक्री में इजाफा हुआ है। इधर, सस्ती बीयर की डिमांड घटी अधिकारी के मुताबिक गर्मियों के दौरान बियर की बिक्री बढ़ जाती है। इसलिए हमने नेशन वाइज पॉपुलर बियर बैंड की पुशिंग 24% से बढ़ाकर 54% कर दी है। इससे बिक्री पर असर पड़ा है। पिछले साल मई 2025 में पॉपुलर ब्रैंड की बियर की बिक्री 2,47,143 थी, जो इस साल बढ़कर 5,96,351 हो गई है। इससे कम पॉपुलर ब्रेड की बिक्री जो 2025 में कुल बिक्री का 76% था, वह घटकर 46 फीसदी पर आ गई है। ब्रांड पुशिंग को लेकर बनाया दबाव अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में आबकारी विभाग ने सभी चार निगमों को ब्रांड पुशिंग को लेकर लगातार दबाव बनाया। इसके अलावा ब्रांडेड शराब की बिक्री को लेकर निगरानी भी बढ़ाई। उसकी नतीजा है कि दिल्ली के जो लोग अच्छी बियर व शराब के लिए दिल्ली की सीमा से सटे दूसरे राज्यों में जाते थे, उन्होंने दिल्ली में ही खरीदारी की। इससे बियर की बिक्री बढ़ी।  

दिल्ली में नया फ्लाईओवर पूरा, पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली की दूरी घटेगी

नई दिल्ली  अगले महीने से एम्स, साउथ एक्स या आईएनए से मयूर विहार फेज-2 और आसपास के इलाकों में आने-जाने वालों का सफर सुहाना होने वाला है। साउथ दिल्ली को पूर्वी दिल्ली से कनेक्ट करने के लिए 3.5 किमी लंबा बनाए जा रहे बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर का अंतिम स्लैब पियर सोमवार को रखा गया। फ्लाईओवर के कुल 79 पियर हैं, जिस पर 80 स्लैब रखे गए हैं। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सोमवार को इसका निरीक्षण किया। पहले 30 जून तक फ्लाईओवर से ट्रैफिक संचालन का प्लान था, लेकिन मौके पर जैसे हालात हैं, उसे देखने के बाद उद्घाटन अगले महीने तक ही संभव है। होगी समय की बचत मंत्री के अनुसार, इस फ्लाईओवर से ट्रैफिक संचालन शुरू होने के बाद एम्स और आईएनए से मयूर विहार फेज-2 और आसपास के इलाकों में आने जाने में महज 10 मिनट का वक्त लगेगा। वर्तमान में नई दिल्ली एरिया के आईएनए, एम्स या सफदरजंग से पूर्वी दिल्ली जाने में कम से कम 50 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। फेज-3 फ्लाईओवर का काम साल 2015 में शुरू हुआ था और साल 2017 में इसे पूरा करना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवाद, अलग अलग विभागों से मंजूरी में देरी और तकनीकी जटिलताओं और प्रशासनिक कारणों से यह प्रोजेक्ट बरसों तक लंबित रहा। देरी की वजह से ही प्रोजेक्ट कॉस्ट में काफी बढ़ोतरी हुई। यमुना के दोनों छोर पर स्थित फ्लड प्लेन एरिया में स्लैब का काम कंप्लीट हो चुका है। यमुना के बीचो-बीच एक स्लैब पियर्स पर रखना था, यह काम भी आज पूरा हो गया है।

अब लाइसेंस और NOC के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर दिल्ली में

नई दिल्ली अब लाइसेंस, होटल रजिस्ट्रेशन, NOC, सीवर कनेक्शन जैसे कामों के लिए दिल्ली की जनता और कारोबारियों को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दिल्ली सरकार ने 23 सेवाओं को तय समय सीमा में उपलब्ध कराने के दायरे में कर दिया है। यानी अब आवेदन करने वालों को पहले से पता होगा कि उनका काम कितने दिनों में होगा और देरी होने पर जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।     दिल्ली सरकार ने 23 नई सेवाओं को दिल्ली राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड डिलिवरी ऑफ सर्विसेज एक्ट, 2011 के तहत शामिल किया है।     इसका मतलब है कि अब कई जरूरी सरकारी सेवाएं तय समय सीमा में देनी होंगी।     सरकार का कहना है कि इससे आम लोगों के साथ, कारोबारियों, होटल, पर्यटन, निर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।     मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का मकसद नागरिकों और कारोबारियों को सरकारी सेवाएं तय समय में उपलब्ध कराना है।     अब विभिन्न विभागों से मिलने वाली महत्वपूर्ण अनुमतियां, लाइसेंस, पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र निर्धारित समय सीमा के भीतर जारी किए जाएंगे।     अनावश्यक देरी कम होगी और बार-बार दफ्तरों के चक्कर नही लगाने पड़ेंगे। किस काम के लिए कितना समय लगेगा?     दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवरेज कनेक्शन 15 दिनों में उपलब्ध कराया जाएगा     पावर डिपार्टमेंट बिजली मीटर से संबंधित आवेदन और कनेक्शन समझौते की प्रक्रिया 60 दिनों में।     खाद्य व्यवसाय के लिए राज्य लाइसेंस के लिए स्थानीय निकाय का एनओसी 60 दिनों में मिलेगी।     होटल पंजीकरण या संचालन अनुमति 60 दिनों में और बूचड़खाना लाइसेंस 60 दिनों में जारी किया जाएगा।     मोबाइल टावर स्थापना की अनुमति 30 दिनों में