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घर खरीदने का सुनहरा मौका: दिल्ली की प्रमुख लोकेशन पर DDA फ्लैट्स, जानिए रेट और लेआउट

नई दिल्ली अफोर्डेबल हाऊसिंग प्रोजेक्ट के तहत DDA आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 'जनता आवास योजना' लेकर आया है। इसके अंतर्गत वह EWS श्रेणी के रेडी टू मूव इन फ्रीहोल्ड 144 फ्लैट्स बेचने जा रहा है। इनमें से 82 EWS फ्लैट्स दिल्ली की प्राइम लोकेशन द्वारका मोड़ पर उपलब्ध हैं और मेट्रो स्टेशन से केवल 100 मीटर की दूरी पर हैं। इन फ्लैट्स का साइज 29.246 SQM से 30.688 स्क्वेयर मीटर तक है, वहीं 62 अन्य फ्लैट्स गांव चंदनहौला छतरपुर मेन रोड पर स्थित हैं और इनका साइज 45.575 SQM से 48.249 स्क्वेयर मीटर के बीच है।   डीडीए की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार द्वारका मोड़ पर उपलब्ध फ्लैट्स की कीमत 12.63 लाख रुपए (टाइप ए) और 13.24 लाख रुपए (टाइप बी) है। वहीं गांव चंदनहौला, SSN मार्ग, छतरपुर मेन रोड पर उपलब्ध फ्लैट्स की कीमत 23.05 लाख रुपए से 24.37 लाख रुपए तक है। इन दोनों योजनाओं के तहत उपलब्ध फ्लैट्स के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए स्कीम ब्रॉशर (योजना पुस्तिका) 31 दिसंबर 2025 से उपलब्ध होंगे, वहीं इनके लिए रजिस्ट्रेशन 7 जनवरी 2026 से शुरू होगा। इन फ्लैट्स की बुकिंग 7 फरवरी 2026 तक की जा सकेगी। दिल्ली विकास प्राधिकरण का कहना है कि इन फ्लैट्स की बुकिंग प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और फ्लैट्स पाने वाले भाग्यशाली लोगों का ड्रॉ 13 फरवरी 2026 को निकाला जाएगा। फ्लैट्स खरीदने के इच्छुक लोगों के देखने के लिए सैम्पल फ्लैट्स भी उपलब्ध हैं। ये फ्लैट्स अस्पताल, स्कूल और बाजारों के निकट हैं। और यहां पर कवर्ड व अनकवर्ड दोनों ही तरह की पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। इन फ्लैट्स के बारे में 1800-110332 पर कॉल करके या फिर डीडीए की वेबसाइट http://dda.gov.in पर विजिट करके भी ज्यादा जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आवेदन के लिए जरूरी आर्थिक शर्त इन EWS फ्लैट के लिए अप्लाई करने वाले आवेदक और संयुक्त/सह-आवेदक की पारिवारिक आय, अगर दोनों परिवारों को अलग-अलग माना जाए, तो 10 लाख रुपए सालाना से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। इस क्लॉज़ के लिए फैमिली इनकम में एप्लीकेंट और उसके पति/उसकी पत्नी(अगर शादीशुदा हैं) की इनकम शामिल है। जॉइंट एप्लीकेंट/को-एप्लीकेंट परिवार का ही होना चाहिए। फैमिली का मतलब है कोई व्यक्ति या उसकी पत्नी या उसका पति या उसके/उस पर निर्भर कोई भी रिश्तेदार, जिसमें अविवाहित बच्चे भी शामिल हैं। एप्लीकेंट (और/या को-एप्लीकेंट) को इस बारे में काबिल अथॉरिटी (संबंधित SDM/तहसीलदार/जारी करने वाली अथॉरिटी के ऑफिस से) से जारी किया गया सालाना फैमिली इनकम सर्टिफिकेट दिखाना होगा। इस बारे में जारी एक प्रेस नोट में डीडीए ने बताया, 'अपने घर का सपना अब होगा सच! डीडीए जनता आवास योजना 2025 के तहत द्वारका मोड़ और गांव चंदनहौला छतरपुर मेन रोड में मात्र 12.63 लाख रुपए से शुरू शानदार EWS रेडी-टू-मूव-इन फ्रीहोल्ड फ्लैट्स उपलब्ध। इस योजना के तहत उपलब्ध फ्लैट्स के स्कीम ब्रॉशर (योजना पुस्तिका) 31 दिसंबर 2025 से उपलब्ध होंगे, वहीं इनके लिए रजिस्ट्रेशन 7 जनवरी 2026 से शुरू होगा।'  

एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से तलब किया विस्तृत जवाब

नई दिल्ली  एयर प्यूरीफायर पर लगाए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को कम करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 दिनों में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने या खत्म करने पर फैसला लेने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की कोई भी बैठक सिर्फ आमने-सामने हो सकती है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक नहीं कर सकते। जस्टिस विकास महाजन और जस्टिस विनोद कुमार की वेकेशन बेंच ने केंद्र सरकार को अपना काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एन. वेंकटरमन ने एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। जस्टिस महाजन की बेंच ने अपने आदेश में कहा, "केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एन. वेंकटरमन ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक अगर होनी है तो वह सिर्फ आमने-सामने ही संभव है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक नहीं हो सकती।" उन्होंने आगे कहा कि एक विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल करने की जरूरत है और याचिकाकर्ता को इसके बाद जवाब दाखिल करने की इजाजत दी। सुनवाई के दौरान वेंकटरमन ने वकील कपिल मदान द्वारा दायर जनहित याचिका की वैधता पर गंभीर आपत्ति जताई। यह तर्क देते हुए कि याचिका पक्षपातपूर्ण थी और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को प्रभावित करने वाले निर्देशों की मांग करने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पक्षकार बनाए बिना दायर की गई थी। केंद्र सरकार के कानून अधिकारी ने कहा, "कल हमारी एक आपातकाल बैठक हुई थी। हमें इस पीआईएल से चिंता है। हमें नहीं पता कि इस याचिका के पीछे कौन है। यह पीआईएल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग तो पार्टी भी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, "सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सहमत होना होगा। वित्त मंत्री सदस्य हैं। अगर किसी चीज पर वोटिंग होनी है तो वह सिर्फ आमने-सामने ही हो सकती है।" एन. वेंकटरमन ने आगे कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जीएसटी में कमी का निर्देश देना "पैंडोरा बॉक्स" खोल सकता है। केंद्र सरकार के कानून अधिकारी ने कहा, "संसदीय समिति ने कुछ सिफारिश की है। एक प्रक्रिया है। हम अभी कुछ नहीं कह रहे हैं। या तो हम कम करेंगे या नहीं। संवैधानिक मुद्दा शामिल है," यह सुझाव देते हुए कि जनहित याचिका को जीएसटी काउंसिल के सामने एक प्रतिनिधित्व के रूप में माना जा सकता है। दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए केंद्र की आपत्तियों का जवाब दिया और तर्क दिया कि एयर प्यूरीफायर पर गलत जीएसटी स्लैब के तहत टैक्स लगाया जा रहा है। वकील मदन ने कहा, नोटिफिकेशन को पढ़ने से यह साफ है कि वे एक अलग शेड्यूल के तहत आते हैं और उन पर गलत तरीके से टैक्स लगाया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि किसी भी देरी से राष्ट्रीय राजधानी में रहने वालों की परेशानी और बढ़ेगी, हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि काउंटर एफिडेविट मंगवाए बिना वह इस मामले में अंतिम निर्देश जारी नहीं कर सकता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।

प्रदूषण संकट में भी दिल्ली सरकार निष्क्रिय, केजरीवाल ने नहीं दिखाई गंभीरता : वीरेंद्र सचदेवा

नई दिल्ली  दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने एलजी की ओर से लिखे पत्र का जिक्र करके पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वीरेंद्र सचदेवा ने शुक्रवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि एलजी के पत्र से यह साफ खुलासा हो रहा है कि किस तरह से अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर उदासीनता बरती। पिछले 12 सालों तक अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम के पद पर काबिज रहे। इसके बावजूद भी उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। इसी का नतीजा है कि दिल्ली के लोगों को दमघोंटू हवा में सांस लेना पड़ रहा है। अगर अरविंद केजरीवाल ने उस समय में वायु प्रदूषण पर कोई ठोस कदम उठाया होता तो आज स्थिति ऐसी नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि एलजी बाकायदा तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से वायु प्रदूषण के समाधान पर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे थे। लेकिन, अफसोस अरविंद केजरीवाल कह रहे थे कि छोड़िए, कुछ दिनों तक यह मुद्दा हावी रहेगा। सामाजिक कार्यकर्ता इसे उठाते हुए कोर्ट का रुख करेंगे। लेकिन, बाद में सब भूल जाएंगे। अरविंद केजरीवाल की बातों से यह साफ जाहिर हो रहा है कि वह दिल्ली के प्रदूषण के मामले को लेकर कितने गंभीर थे। उनकी कोताही की वजह से आज दिल्ली के लोगों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि आज की तारीख में दिल्ली की भाजपा शासित सरकार राष्ट्रीय राजधानी को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। लगातार ऐसे कदम उठा रही है, जिससे लोगों को एक साफ वातावरण मिले। लेकिन, एलजी के पत्र से जिस तरह तत्कालीन मुख्यमंत्री की कार्यशैली उजागर हुई है, उससे आम आदमी पार्टी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दावा किया कि आज हमारी सरकार दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में पूरी तरह से काम कर रही है। किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं कर रही है। हमारी सरकार दिल्ली को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है। लेकिन, हम तत्कालीन सरकार के पाप को ढो रहे हैं।

लेटर ने बढ़ाई सियासी तपिश: AAP ने LG को बताया ‘गजनी’, BJP ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली   दिल्ली में हवा चलने की वजह से एक्यूआई में भले ही कुछ सुधार हो गया है, लेकिन इस बीच राजनीति 'गंभीर श्रेणी' में पहुंच गई है। दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी 'आप' के बीच टकराव और आरोप-प्रत्यारोप चरम पर पहुंच गया है। एलजी विनय सक्सेना की ओर से अरविंद केजरीवाल को लिखे गए लेटर के बाद 'आप' भड़की हुई है। अब फिल्मी पलटवार करते हुए केजरीवाल की पार्टी ने एलजी को 'गजनी' बताते हुए उनका पोस्टर जारी किया है। वहीं, भाजपा ने जवाब देते हुए कहा कि भूले तो दिल्ली को केजरीवाल हैं, इसलिए तस्वीर उनकी ही लगानी चाहिए थी। दरअसल पिछले दिनों एलजी वीके सक्सेना ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के नाम 15 पन्नों का लेटर लिखते हुए उन पर कई आरोप लगाए। एलजी ने कहा कि जब केजरीवाल सीएम थे तो उनके सामने प्रदूषण को लेकर चिंता जाहिर करने पर आप प्रमुख ने इसे नजरअंदाज करने को कहा था। एलजी के मुताबिक केजरीवाल ने कहा था, 'सर यह हर साल होता है। मीडिया इसे 15-20 दिन उठाती है। एक्टिविस्ट और कोर्ट मुद्दा बनाते हैं और फिर हर कोई भूल जाता है। आपको भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।' एलजी की ओर से किए गए इन दावों को पहले तो 'आप' ने खारिज किया और फिर फिल्मी पोस्टर के जरिए पलटवार किया है। 'आप' ने आमिर खान की फिल्म 'गजनी' के पोस्टर में फेरबदल करते हुए एलजी पर निशाना साधा। आप दिल्ली के एक्स हैंडल पर इस पोस्टर को साझा करते हुए LG का मतलब बताया गया- लो क्वालिटी गजनी। पोस्टर पर लिखा गया है, 'दिल्ली में भारी प्रदूषण से गई एलजी की याददास्त, केजरीवाल को लिखा पत्र।' फिल्म के पोस्टर को एडिट करके एलजी का चेहरा लगा दिया गया है। शरीर पर- केजरीवाल इज रिस्पॉन्सिबल, बीजेपी, पलूशन, दिल्ली इन 2025 जैसे शब्द लिखे हैं। 'आप' का कहना है कि सक्सेना भूल गए हैं कि अब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और प्रदूषण से निपटने की जिम्मेदारी उसकी है। वीरेंद्र सचदेवा ने 'आप' पर पलटवार करते हुए कहा कि केजरीवाल दिल्ली को भूले हैं, इसलिए तस्वीर उनकी ही लगानी चाहिए थी। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए पूर्व की आप सरकार को जिम्मेदार बताते हुए कहा, 'जिम्मेदारी हमारी है लेकिन किन चीजों की? उन पापों की जो आपने 12 साल में किए। आज प्रदूषण की जो हालत है उसके लिए जिम्मेदार कौन हैं। एलजी ने जो कहा वह मेरे लिए भी हैरान करने वाला है। उस समय के मुख्यमंत्री, जब एलजी प्रदूषण पर बात करते हैं, तो कहते हैं कि 15-20 दिन का मुद्दा है, मीडिया उठाएगी, कुछ लोग कोर्ट जाएंगे और फिर बात खत्म हो जाएगी। इस पर बात करने की जरूरत नहीं है। आज की हालत के लिए केजरीवाल जिम्मेदार हैं।जहां तक पोस्टर की बात है, गजनी को भूलने की बीमारी थी। दिल्ली में करारी हार के बाद कोई भूला है तो वह अरविंद केजरीवाल हैं। आप के विदूषकों ने तस्वीर गलत लगाई है, अरविंद केजरीवाल की लगानी चाहिए थी जो दिल्ली को भूलकर भाग गए।'  

प्रदूषण पर व्यंग्य बना कानूनी मुसीबत, सांता क्लॉज वीडियो को लेकर AAP नेताओं पर केस दर्ज

नई दिल्ली  दिल्ली पुलिस ने AAP नेता सौरभ भारद्वाज, संजय झा और आदिल अहमद खान के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह FIR सांता क्लॉज़ से जुड़ा एक वीडियो बनाकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में दर्ज की गई है। इस मामले में प्राप्त शिकायत के अनुसार 17 और 18 दिसंबर 2025 को इन नेताओं ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से एक वीडियो पोस्ट किया था। यह वीडियो कनॉट प्लेस में किए गए एक राजनीतिक स्किट (प्रदर्शन) से जुड़ा है। वीडियो में सांता क्लॉज, जो कि ईसाई समुदाय के लिए एक पवित्र और सम्मानित धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीक हैं, को मजाकिया और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। वीडियो में सांता क्लॉज को सड़क पर बेहोश होकर गिरते हुए दिखाया गया और उन्हें राजनीतिक संदेश देने के लिए एक प्रॉप (साधन) की तरह इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, वीडियो में नकली CPR करते हुए सांता क्लॉज का मजाक भी उड़ाया गया, जिससे सेंट निकोलस और क्रिसमस पर्व की पवित्रता को ठेस पहुंची। शिकायत में कहा गया है कि यह सब जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया गया, ताकि ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सके। एडवेंट के अंतिम दिनों में धार्मिक प्रतीक का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल करना ईसाई धर्म का अपमान माना गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक रूप से किसी धार्मिक प्रतीक का मजाक उड़ाना BNS की धारा 302 का उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। यह मामला अधिवक्ता खुशबू जॉर्ज की शिकायत पर दर्ज किया गया है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें भाजपा कार्यकर्ता बताया है। साथ ही भाजपा नेताओं के साथ उनके कुछ फोटोज भी शेयर किए हैं। ‘तब भाजपा के किसी ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई’ उधर इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'सांता क्लॉज की स्किट पर FIR हो गई है। सोशल मीडिया और आप लोगों की ताक़त से आज भाजपा बहुत परेशान हैं। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि भाजपा सरकार को प्रदूषण पर जवाब देना पड़ रहा है, AQI पर चर्चा हो रही है। सांता क्लॉज की स्किट से हमने प्रदूषण के मुद्दे को जन जन तक पहुँचाया, जिससे दिल्ली और केंद्र की सरकार को काफ़ी परेशानी है। ये सोशल मीडिया की ताक़त है कि अरावली पर्वतमाला पर सरकार बैकफुट पर आई है। कुलदीप सिंह सेंगर वाला मामला और उत्तराखंड की अंकिता भंडारी वाला मामला भी उल्टा पड़ रहा है।' इसके आगे उन्होंने लिखा, 'अब डराने, धमकाने के लिए ED, CBI, दिल्ली पुलिस की FIR का दौर चल रहा है। संघियों का प्रॉपगेंडा अब एक्सपोज़ हो रहा है तो डर रहे हैं। अभी इनको और Expose करना है और भी डराना है। भाजपा के ही कार्यकर्ता अब ईसाई का मुखौटा लगाकर कह रहे है , उनकी धार्मिक भावना आहत हो गई, और पुलिस FIR दर्ज कर रही है। जब दिल्ली के लाजपत नगर में सांता क्लॉज की टोपियाँ खींची गई, धमकाया गया, गाली देकर भगाया गया, तब किसी भाजपा के ईसाई कार्यकर्ता की धार्मिक भावना आहत नहीं हुई। जिसकी धार्मिक भावना आहत हुई है उनकी भाजपा के नेताओं के साथ तस्वीर ही तस्वीर है, इनको मुफ्त की पब्लिसिटी नहीं देना।'  

अटल कैंटीन का कमाल: दिल्ली में ₹5 में थाली, जानें क्या-क्या मिलेगा

 नई दिल्ली दिल्ली की भाजपा सरकार अपने एक और चुनावी वादे को पूरा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर राजधानी में अटल कैंटीन की शुरुआत कर रही है। गुरुवार से 100 अटल कैंटीन में लोग महज 5 रुपये में पौष्टिक खाना खा सकते हैं। चावल, रोटी, दाल, सब्जी और अचार वाली यह थाली भले ही आपको 5 रुपये में मिलेगी लेकिन इसकी लागत 30 रुपये है। प्रति थाली करीब 25 रुपये का खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। हर कैंटीन में दोपहर और शाम 500 लोगों को भोजन, 'पहले आओ-पहले पाओ' की तर्ज पर दिया जाएगा। अटल कैंटीन मुख्यतौर पर झुग्गी झोपड़ियों के पास बनाए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोग रहते हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 5 रुपये की थाली में 100 ग्राम चावल या मिलेट, 300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम दाल और अचार परोसी जाएगी। खाना इन कैंटीन में नहीं बनाया जाएगा क्योंकि अधिकतर छोटे ढांचे में बनाए गए हैं। खाना कुछ बड़े किचन में बनाकर कैंटीन में भेजा जाएगा। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि इसका उद्देश्य जरूरमंद लोगों की मदद करना है और सरकार चुनाव में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। 50 कैंटीन तैयार हैं, लेकिन खाना सभी 100 स्थानों पर खिलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 50 कैंटीन ग्रैप-4 के प्रतिबंधों की वजह से तैयार नहीं हो पाए हैं। जल्द इनका निर्माण पूरा हो जाएगा। अटल कैंटीनों का संचालन दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) की ओर से किया जाएगा। सरकार की यह एजेंसी शहरी गरीबों की बेहतरी के लिए काम करती है। एक थाली भोजन की अनुमानित लागत करीब 30 रुपये बताई गई है, जबकि दिल्ली सरकार सब्सिडी देकर इसे 5 रुपये में उपलब्ध कराएगी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में 100 अटल कैंटीन शुरू करने का वादा किया था।

दिल्ली के 13 प्रमुख रेलवे स्टेशन होंगे स्मार्ट और हाईटेक, अमृत भारत योजना से बदलेगा सफर का अनुभव

नई दिल्ली रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों को विश्व स्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत न्यू दिल्ली, आनंद विहार समेत दिल्ली के 13 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा, पहुंच और आराम को बढ़ाना है, ताकि रेलवे स्टेशनों का अनुभव और अधिक सुविधाजनक और आधुनिक बनाया जा सके। ये स्टेशन हो रहे हैं अपग्रेड रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत दिल्ली के प्रमुख 13 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। ये स्टेशन हैं न्यू दिल्ली, आनंद विहार, बिजवासन, दिल्ली कैंट, आदर्श नगर, सराय रोहिल्ला, शाहदरा, हजरत निजामुद्दीन, नरेला, सब्जी मंडी, सफदरजंग, तिलक ब्रिज रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि देशभर में इस योजना के तहत कुल 1,337 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें दिल्ली के ये 13 स्टेशन भी शामिल हैं। इस मुद्दे को दक्षिण दिल्ली के भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने लोकसभा में उठाया था। तेजी से न्यू दिल्ली स्टेशन पर हो रहा काम न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अजमेरी गेट साइड का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है। अब यहाँ यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाएं हैं. अधिक टिकट काउंटर, बेहतर वेटिंग एरिया, आधुनिक पब्लिक एड्रेस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड, व्यापक सीसीटीवी कवरेज, बेहतर लाइटिंग और निर्बाध बिजली आपूर्ति, आरओ पानी की सुविधा, पुरुषों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए अलग शौचालय, भीड़ प्रबंधन के लिए अधिक सीटें वहीं, पहाड़गंज साइड पर भी काम शुरू हो गया है। पुरानी इमारतों को तोड़ा जा रहा है, बेसमेंट बनाया जा रहा है और विभिन्न सुविधाओं को नए स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है।

Delhi में बसों का नया नियम: अब केवल DTC बसें चलेंगी, ‘नो PUC, नो फ्यूल’ रहेगा सख्त

नई दिल्ली दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए हैं। इन फैसलों का सीधा असर राजधानी की हवा, ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर पड़ने वाला है। सरकार का कहना है कि ये कदम न सिर्फ मौजूदा हालात सुधारेंगे, बल्कि लंबे समय में दिल्ली को अधिक स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने में मदद करेंगे। बस संचालन पूरी तरह DTC के तहत कैबिनेट बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया कि अब दिल्ली में बसों का परिचालन पूरी तरह दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के तहत किया जाएगा। इसके तहत क्लस्टर बसों या DIMTS जैसी निजी व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि 100 प्रतिशत DTC संचालन से बस सेवा में एकरूपता आएगी, निगरानी बेहतर होगी और सार्वजनिक परिवहन ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। इससे लोगों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जो अंततः प्रदूषण घटाने में सहायक होगा। ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम रहेगा जारी प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक और सख्त निर्णय लिया गया है। GRAP-4 प्रतिबंध हटने के बाद भी ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम को स्थायी रूप से लागू रखने का फैसला किया गया है। इसके तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस नियम से सड़कों पर चलने वाले अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर प्रभावी रोक लगेगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह कदम केवल अस्थायी उपाय नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में इन फैसलों का सकारात्मक असर दिल्ली के वायु प्रदूषण के स्तर पर साफ दिखाई देगा। जलाशयों और जल स्रोतों का होगा पुनर्जीवन कैबिनेट बैठक में दिल्ली के जलाशयों और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया। इसके तहत झीलों, तालाबों और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण व पुनरुद्धार पर काम किया जाएगा। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा, जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और शहर को स्वच्छ जल स्रोत उपलब्ध होंगे। सरकार का मानना है कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इस दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी है। होलंबी कलां में बनेगा e-Waste Eco Park इलेक्ट्रॉनिक कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने होलंबी कलां में ‘e-Waste Eco Park’ स्थापित करने का फैसला किया है। यह पार्क ई-कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान के लिए समर्पित होगा। इसके जरिए न सिर्फ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जाएगा, बल्कि रीसाइक्लिंग और संसाधनों के पुनः उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रदूषण के खिलाफ समग्र रणनीति दिल्ली सरकार के ये फैसले यह संकेत देते हैं कि राजधानी में प्रदूषण से निपटने के लिए अब टुकड़ों में नहीं, बल्कि समग्र रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती, जल स्रोतों का संरक्षण और ई-कचरे का सुरक्षित निपटान ये सभी कदम मिलकर दिल्ली को अधिक स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकते हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी दिल्ली मेट्रो फेज 5A की हरी झंडी, नए साल में 13 नए स्टेशन खुलेंगे

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्रीमंडल ने बुधवार को दिल्ली मेट्रो के फेज 5A को मंजूरी दे दी है. इसमें 13 स्टेशन होंगे. इस दौरान 12,015 करोड़ रुपये की लागत से 16 किमी लंबी नई लाइन बिछाई जाएगी. यह जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी. अश्विनी वैष्णव ने कहा, " केंद्रीय मंत्रीमंडल ने दिल्ली मेट्रो के फेज 5A को मंजूरी दे दी है, जिसमें 13 स्टेशन होंगे. इस परियोजना के तहत 12,015 करोड़ रुपये की लागत से 16 किमी लंबी नई लाइन बिछाई जाएगी. इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 400 किमी को पार कर जाएगा." 16 किमी लंबे तीन नए कॉरिडोर बनेंगे फेज V (A) के तहत दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) कुल 16 किमी लंबे तीन नए कॉरिडोर बनाएगा. इसका मकसद लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और शहर के कुछ सबसे बिजी हिस्सों पर भीड़ कम करना है. इस विस्तार से मौजूदा नेटवर्क में 13 स्टेशन जुड़ जाएंगे, जिससे रेजिडेंशियल हब, कमर्शियल डिस्ट्रिक्ट और ट्रांजिट इंटरचेंज के बीच लिंक मजबूत होंगे. 'दिल्ली मेट्रो ने बदली लोगों की जिंदगी' कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "दिल्ली मेट्रो के विस्तार के बारे में एक बहुत जरूरी फैसला लिया गया है. हम सभी जानते हैं कि दिल्ली मेट्रो ने दिल्ली के लोगों और शहर में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की जिंदगी में कैसे बदलाव लाया है. इस विस्तार के साथ, दिल्ली मेट्रो में एक नया चैप्टर जुड़ेगा." औसतन 65 लाख यात्री करते हैं मेट्रो का इस्तेमाल केंद्रीय मंत्री बताया "औसतन 65 लाख यात्री रोजाना दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं. कुछ पीक दिन ऐसे होते हैं जब दिल्ली मेट्रो एक दिन में 80 लाख लोगों को ले जाती है." उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल प्रोजेक्ट फेज-VA का कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन तीन साल है. कंस्ट्रक्शन ज्यादातर टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल करके अंडरग्राउंड होगा, जिससे ट्रैफिक में कम से कम रुकावट आएगी.

स्वास्थ्य आपातकाल में भी महंगा टैक्स! एयर प्यूरिफायर पर 18% GST पर HC की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली  दिल्ली में प्रदूषण संकट के बीच हाई कोर्ट ने एयर प्यूरिफायर पर टैक्स कटौती के पक्ष में रुख जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्यों एयर इमरजेंसी के दौरान भी 18 पर्सेंट टैक्स लग रहा है? अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी बताने को कहा है कि क्यों तुरंत टैक्स में कटौती नहीं की जा सकती है। हाई कोर्ट ने प्रदूषण की वजह से आम लोगों को ही रही समस्याओं की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, ‘हम एक दिन में 21 हजार बार सांस लेते हैं। नुकसान की गणना कीजिए।’ चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एयर प्यूरिफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में रखने की मांग की गई है जिससे यह 5 फीसदी जीएसटी स्लैब के दायरे में आ जाएगा। इस पर जवाब के लिए केंद्र सरकार से और समय की मांग किए जाने पर बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘यह उचित समय क्या होता है? जब हजारों लोग मर जाएंगे? इस शहर के हर व्यक्ति को साफ हवा की आवश्यकता है और आप यह भी नहीं दे सकते हैं। कम से कम आप इतना कर सकते हैं कि एयर प्यूरिफायर तक उनकी पहुंच हो।’ अदालत ने कहा- तुरंत सरकार से पूछकर बताएं प्रस्ताव जजों ने तात्कालिक राहत की संभावनाओं पर भी सवाल किए। अदालत ने कहा, 'इस आपातकालीन स्थिति में आप राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अस्थायी कदम के तौर पर इसमें छूट क्यों नहीं दे सकते हैं।' बेंच ने सरकारी वकील से इस पर निर्देश लेने और प्रस्ताव को अदात में 2.30 के बाद रखने को कहा। पीआईएल को अधिवक्ता कपिल मदान ने दायर की और अदालत से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार को एयर प्यूरिफायर को मेडिकल डिवाइस का दर्जा देने का निर्देश दिया जाए। एयर प्यूरिफायर पर मौजूदा समय में 18 पर्सेंट जीएसटी लगाया जाता है।