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मजदूरों को राहत, वर्क फ्रॉम होम पर नया निर्णय और वाहनों के लिए कड़ा फैसला — रेखा गुप्ता सरकार

नई दिल्ली दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन से हालात काफी गंभीर हो चुके हैं. अब मुख्‍यमंत्री रेखा गुप्‍ता की सरकार ने इसको लेकर बड़ा ऐलान किया है. मजदूरों से लेकर वाहन चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए घोषणाएं की गई हैं. दिल्‍ली की रेखा गुप्‍ता सरकार अब एयर पॉल्‍यूशन से निपटने के लिए युद्धस्‍तर पर काम करने में जुट गई है. वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्‍ली सरकार की ओर से कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. दिल्‍ली सरकार ने प्रभावित होने वाले मजदूरों को ₹10000 का मुआवजा देने का ऐलान किया है. साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए भी महत्‍वपूर्ण घोषणा की गई है. सरकार ने 50 फीसद स्‍टाफ के साथ ही ऑफिस चलाने का निर्देश दिया है. 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से ही काम करने (Work From Home – वर्क फ्रॉम होम) का निर्देश दिया गया है. वाहनों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है. दिल्‍ली सरकार के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर बुधवार 17 दिसंबर 2025 को बड़ा ऐलान किया है. उन्‍होंने कहा कि इस गंभीर समस्‍या से निजात पाने के लिए कुछ कड़े निर्णय लिए गए हैं. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘GRAP-3 के चलते कंस्ट्रक्शन वर्कर्स का काम बंद था, जिससे उनकी माली हालत पर फर्क पड़ा. सभी रजिस्‍टर्ड मजदूरों के बैंक खाते में दस हजार रुपये DBT के माध्‍यम से ट्रांसफर किए जाएंगे. ये अभी सोलह दिन का है.’ कपिल मिश्रा ने आगे बताया कि GRAP-4 का भी इन मजदूरों को पैसा दिया जाएगा. दिल्‍ली में वर्क फ्रॉम होम देश की राजधानी दिल्‍ली की सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा फैसला किया है. कपिल मिश्रा ने कहा, ‘⁠दूसरा निर्णय ऑफिस जानेवालों के लिए है. सभी प्रतिष्ठान (सरकारी और प्राइवेट) केवल 50 परसेंट अटेंडेंस के साथ ही चलेंगे. स्‍वास्‍थ्‍य, बिजली, पानी, डिजास्‍टर मैनेजमेंट और पर्यावरण विभाग पर यह 50 फीसद का फॉर्मूला लागू नहीं होगा.’ कपिल मिश्रा ने वर्किंग आवर्स को फ्लेक्सिबल करने की भी अपील की है. बता दें कि दिल्‍ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सर्दियों के मौसम में वर्क फ्रॉम होम के फॉर्मूले का अक्‍सर इस्‍तेमाल किया जाता है. इसके अलावा कार पूलिंग का यूज करने की सलाह भी दी गई है. नहीं मानी बात तो जुर्माना मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कर दिया कि निर्देशों की अवहेलना होने की स्थिति में जुर्माना लगाया जाएगा. दिल्‍ली में एयर पॉल्‍यूशन पर कपिल मिश्रा ने कहा कि हमसे एक गलती तो हुई है. हमने 30 साल का पॉल्‍यूशन को 5 महीने में खत्‍म नहीं कर पाए. उन्‍होंने कहा कि आप सरकार ने कुछ नहीं किया. ये जो भी आप देख रहे हैं ये सब 12 साल के हैं. प्रदूषण हमें विरासत में मिला है. बता दें कि सर्दियों के मौसम में हर साल एयर पॉल्‍यूशन की हालत गंभीर हो जाती है. एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स बेहद ही गंभीर कैटेगरी में पहुंच जाता है, जिसके चलते खुली हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.

नमो भारत स्टेशन बना ‘रीडिंग हब’, यात्री अब वहीं से खरीद सकेंगे मनपसंद किताबें

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्री अब स्टेशन पर ही अपनी पसंदीदा कहानी, किस्से की पुस्तकें भी खरीद सकेंगे। एनसीआरटीसी ने बुकटेल्स के साथ मिलकर आनंद विहार स्टेशन पर पुस्तक मेला शुरू किया है। 21 दिसंबर तक चलने वाले स्टोरी बॉक्स नाम के इस मेले में लोग सुबह 10 से रात 10 बजे तक किताबें खरीद सकेंगे। इस पुस्तक मेले की खास बात यह है कि इसमें बॉक्स-आधारित खरीदारी का विकल्प भी मौजूद है। लोग अलग-अलग किताबें खरीदने के बजाय एक बॉक्स भरकर किताबें चुन सकते हैं और इकट्ठा खरीद सकते हैं। इसके लिए दो अलग-अलग बॉक्स साइज के विकल्प उपलब्ध हैं। यात्री अपनी पसंद और बजट के हिसाब से कोई भी बॉक्स चुनकर, उसमें जितनी किताबें आराम से फिट हो सकें, उतनी भर सकते हैं और पूरे बॉक्स की तय कीमत पर एक साथ खरीद सकते हैं। किताबें खरीदने का ये अनोखा तरीका, लोगों की जेब पर बिना बोझ डाले, उन्हें अलग-अलग तरह की किताबें चुनने और अपनी सभी पसंदीदा किताबें एक ही बार में खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। एनसीआरटीसी के अधिकारी ने बताया कि इस पुस्तक मेले में अलग-अलग तरह की किताबों का कलेक्शन मौजूद है। इनमें फिक्शन, नॉन-फिक्शन, बच्चों की किताबें और नए व युवा लेखकों की किताबें शामिल हैं। इसके अलावा युवा पाठकों के लिए एक खास सेक्शन भी बनाया गया है। मीट एंड ग्रीट सेशन के लिए कई लेखक भी इस पुस्तक मेले में पहुंच रहे हैं। पुस्तक प्रेमी न सिर्फ इन लेखकों से मिलकर बात कर सकते हैं, बल्कि पसंदीदा किताबों पर ऑटोग्राफ भी ले सकते हैं।  

सर्दी–प्रदूषण के बीच ट्रैफिक पुलिस की सुरक्षा, मास्क व विंटर गियर मुहैया

नई दिल्ली राजधानी में प्रदूषण और स्मॉग बढ़ने से दृश्यता कम होने पर दिल्ली यातायात पुलिस ने शीतकालीन सुरक्षा योजना लागू कर दी है। सड़कों पर तैनात छह हजार से अधिक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को प्रदूषण और ठंड के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए एन-95 मास्क और गर्म कपड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रैफिक पुलिसकर्मी सड़कों पर खड़े रहकर यातायात व्यवस्था संभालते हैं। स्मॉग बढ़ने और वायु गुणवत्ता बिगड़ने इनको स्वास्थ्य संबंधी जोखिम अधिक रहता है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मास्क, सर्दियों के कपड़े और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं। कम दृश्यता के चलते हुए जोखिम से निपटने के लिए ट्रैफिक कर्मियों को फ्लोरोसेंट जैकेट प्रदान की गई हैं, ताकि यातायात नियंत्रित करते समय वे सड़क पर चलने वाले लोगों को साफ दिखाई दें। बैरिकेड्स पर रिफ्लेक्टिव फ्लोरोसेंट स्टिकर भी लगाए जा रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के टोडापुर स्थित मुख्यालय में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर कर्मियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। शिविर में सामान्य चिकित्सकों के साथ नेत्र विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक भी शामिल किए जा रहे हैं। यातायात पुलिस ने वाहन चालकों सलाह दी है कि वे रात में फॉग लाइट जलाकर रखें, ताकि दुर्घटनाओं के खतरे को कम किया जा सके।  

स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ा संदेश: प्रदूषण से निपटने को सरकार का साझा संकल्प — सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर अपनी सरकार की रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी सरकार जमीन पर रहकर और दिल्ली के भीतर ही समाधान तलाशते हुए प्रदूषण की चुनौती से निपट रही है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह के उपायों पर समान रूप से काम कर रही है, ताकि प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि बुनियादी ढांचे के उन्नयन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक की पहुंच सुनिश्चित करने पर लगातार काम किया जा रहा है। रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के खिलाफ किसी भी मोर्चे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मेरी दिल्ली, मेरी जिम्मेदारी सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि यह कार्य करने और उसे पूरा करने की हमारी दैनिक प्रतिबद्धता है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी अपील की कि वे सरकार के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि राजधानी को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सके।  

दिल्ली में 17 दिसंबर को भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र पर राष्ट्रीय कार्यशाला

नई दिल्ली नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने काे लेकर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयाेजन 17 दिसंबर को हाेगा। इसका उद्धघाटन केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व मुख्य अतिथि डॉ. जितेंद्र सिंह होंगे। यह आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत भारतीय सर्वेक्षण एजेंसी करेगी, जिसका विषय भू-स्थानिक मिशन: विकसित भारत का एक प्रवर्तक है।  कार्यशाला का उद्देश्य भारत के भू-स्थानिक मिशन को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों के नीति निर्माता, प्रौद्योगिकीविद, उद्योग जगत के नेता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भारत के भू-स्थानिक भविष्य को आकार देने वाले नवाचारों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यशाला में कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें हितधारकों को उभरते अवसरों पर विचार करने, भू-स्थानिक प्रथाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और विभिन्न क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।  

बढ़ते प्रदूषण पर सख्ती: दिल्ली में बिना वैध PUCC वाहनों को पेट्रोल पर रोक

 नई दिल्ली दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बीजेपी सरकार ने कई सख्त फैसलों का ऐलान किया है, जिनका असर आम लोगों से लेकर वाहन चालकों और निर्माण क्षेत्र तक पड़ेगा. दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि इन कदमों का मकसद राजधानी की हवा को साफ करना और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है. पर्यावरण मंत्री मनजींदर सिंह सिरसा ने घोषणा की है कि 18 दिसंबर से पेट्रोल पंपों पर उन वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा, जिनके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) सर्टिफिकेट नहीं होगा. इस नियम की निगरानी कैमरों के जरिए की जाएगी, ताकि कोई उल्लंघन ना हो सके. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी. इसके अलावा दिल्ली के बाहर से आने वाले निजी वाहनों को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं. दूसरे राज्यों में रजिस्टर, बीएस-VI उत्सर्जन मानकों से नीचे के निजी वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह फैसला खासतौर पर उन वाहनों पर लागू होगा, जो अधिक धुआं छोड़कर वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं. दिल्ली की सीमाओं पर तैनात एजेंसियों को इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. निर्माण गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. दिल्ली में ईंट, रेत, सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्रियों के ​परिवहन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दिल्ली वालों से मांगी माफी पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि मौजूदा सरकार को 'प्रदूषण की बीमारी विरासत में मिली है'. उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाया, वही आज विरोध कर रहे हैं.' बीजेपी सरकार द्वारा दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि राजधानी के लैंडफिल साइट्स की ऊंचाई में करीब 15 मीटर की कमी आई है और लगभग 8,000 उद्योगों को कड़े प्रदूषण नियंत्रण मानकों के दायरे में लाया गया है. प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर अब तक 9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. उन्होंने कहा कि लकड़ी जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10,000 हीटर वितरित किए हैं. इसके अलावा, बैंक्वेट हॉल्स में डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं. मंत्री सिरसा ने स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदूषण पर पूरी तरह काबू पाना इतने कम समय में संभव नहीं है. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली के लोगों से माफी मांगता हूं, लेकिन सात-आठ महीनों में प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है.' साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर भी तंज कसते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में उन्होंने मास्क नहीं पहने थे, लेकिन अब मास्क पहनकर घूम रहे हैं. प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने उठाए कई कदम पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि शहर में 62 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट की पहचान की है, जिनमें से 13 क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में प्रदूषण का स्तर कम दर्ज किया गया है. इसके अलावा, 3,427 इलेक्ट्रिक बसों को डीटीसी में शामिल किया गया है ताकि वाहनों से होने वाले ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके. सिरसा ने यह भी बताया कि वैज्ञानिकों की एक समिति गठित की गई है, जो नियमित रूप से बैठक कर प्रदूषण के रुझानों का अध्ययन कर रही है और आगे के उपायों की सिफारिश कर रही है. दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है. 16 दिसंबर 2025 को सुबह के समय AQI 380 से ऊपर दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है. सर्दियों का मौसम आते ही धुंध और स्मॉग की मोटी चादर छा जाने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है. वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों से उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ाने में सहयोग कर रही है. सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा को खराब करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है. इसलिए PUCC चेक को अनिवार्य बनाकर पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा रही है. लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करने की अपील दिल्ली सरकार ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये कदम अस्थायी जरूर हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य को देखते हुए बेहद जरूरी हैं. आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा कर आगे और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि ये कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि ये उपाय 18 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. उन्होंने नगारिकों से नियमों का पालन करने का अनुरोध किया.

दिल्ली विस्फोट मामला: कोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की हिरासत बढ़ाई

नई दिल्ली  दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) केस में अल फलाह यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की न्यायिक हिरासत को साकेत कोर्ट ने 20 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। अदालत ने यह आदेश मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए दिया। जावेद अहमद सिद्दीकी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और प्रवर्तन एजेंसियां उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। साकेत कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए न्यायिक हिरासत बढ़ाना जरूरी है। इससे पहले 12 दिसंबर को मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चार आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था। इनमें डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद और आदिल अहमद शामिल थे। इन सभी को उनकी पिछली हिरासत अवधि पूरी होने के बाद अदालत के सामने पेश किया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। एनआईए ने अदालत को बताया था कि आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. उमर नबी, आदिल अहमद, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान और इरफान अहमद मिलकर एक बड़ी साजिश रच रहे थे। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाना और संवेदनशील इलाकों को निशाना बनाना था। जांच में यह भी सामने आया है कि कार में हुए विस्फोट को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी था। चारों मुख्य आरोपियों को एनआईए की हिरासत खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था। एजेंसी ने उनके खिलाफ जुटाए गए प्रारंभिक सबूतों के आधार पर न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। गौरतलब है कि 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण विस्फोट से पूरे देश में दहशत फैल गई थी। शाम करीब 6:52 बजे एक हाई ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी सफेद हुंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ था। इस हमले में कई लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जांच एजेंसियां इस साजिश से जुड़े हर पहलू की गहन जांच में लगी हुई हैं।

दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे बना हादसों का ज़ोन, घने कोहरे में 30+ वाहनों की टक्कर, 4 की जान गई

फरीदाबाद/नूंह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सोमवार को घने कोहरे ने कहर बरपा दिया। फरीदाबाद और नूंह जिलों में अलग-अलग स्थानों पर हुए हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। कई वाहन आपस में टकराए और दस से अधिक लोग घायल हो गए। मरने वालों में एक सीआईएसएफ का सब इंस्पेक्टर बताया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। फरीदाबाद में सोमवार सुबह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर घना कोहरा हादसों का कारण बन गया। दृश्यता बेहद कम होने से वाहन चालकों को आगे का रास्ता नहीं दिखा और एक के बाद एक टक्कर होती चली गई। फरीदाबाद के कैल गांव के पास दो अलग-अलग सड़क हादसे हुए। यहां पहली दुर्घटना में एक एंडेवर कार सड़क किनारे खड़े कैंटर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि एंडेवर में सवार तीन लोगों में से दो की मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया। मृतकों में एक की पहचान संदीप कुमार निवासी जयपुर के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। इसी स्थान के पास कुछ ही देर बाद दूसरा हादसा भी हुआ। एक कैंटर में पीछे से क्रेटा गाड़ी जा टकराई। गनीमत रही कि क्रेटा चालक बाल-बाल बच गया, लेकिन उसकी गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर यातायात सुचारू कराया। नूंह में भिड़े 30 वाहन, दो की मौत जिला नूंह में भी कोहरे ने बड़ा हादसा करा दिया। सुबह करीब चार बजे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगभग 30 वाहन आपस में भिड़ गए। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दस से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को जिला के राजकीय अस्पताल मांडीखेड़ा में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। हादसा राजस्थान से दिल्ली की तरफ जाते वक्त हुआ। सूत्रों के अनुसार मरने वालों में सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर हरीश कुमार निवासी अलवर और जयपुर निवासी कारोबारी खलील अहमद शामिल हैं। कुछ स्थानों पर ट्रक पलटने की भी सूचना है, जिससे यातायात काफी देर तक बाधित रहा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और एम्बुलेंस के देरी से पहुंचने का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि घना कोहरा हादसों की मुख्य वजह है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे के समय धीमी गति से चलें, फॉग लाइट का प्रयोग करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।  

दिल्ली-NCR की ज़हरीली हवा पर CJI का सवाल— ‘सबसे ज़्यादा मार गरीबों पर ही क्यों?’

नई दिल्ली  दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण चरम पर पहुंच चुका है। जहरीली हवा का मुद्दा सोमवार को सर्वोच्च अदालत में भी उठा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर 17 दिसंबर को सुनवाई होगी। अदालत को बताया गया कि आदेशों के बावजूद स्कूलों पर खेल गतिविधियां हो रही हैं। वहीं, चीफ जस्टिस ने गरीबों पर होने वाले असर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आदेश वही दिए जा सकते हैं, जिनका पालन संभव हो। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने न्याय मित्र की भूमिका निभा रहीं वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि एहतियाती कदम पहले से मौजूद हैं, लेकिन असली मुद्दा उनका खराब अनुपालन है। सिंह ने कहा कि जब तक यह अदालत आदेश नहीं देती है, अथॉरिटीज की ओर से उन प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जाता है जो पहले मौजूद हैं। चीफ जस्टिस ने कहा, 'यह तीन जजों की बेंच के सामने बुधवार को आएगा। इस पर बात होगी।' एक अन्य वकील ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी याचिका का जिक्र करते हुए कहा कि पुराने आदेश के बावजूद स्कूलों में खेल गतिविधियां चल रही हैं। न्याय मित्र ने कहा, 'इस अदालत के आदेश के बावजूद स्कूलों ने खेल गतिविधियों के लिए तरीके निकाल लिए हैं, इनका आयोजन हो रहा है। CAQM एक बार फिर इस कोर्ट के आदेश का उल्लेख कर रहा है।' इस पर सीजेआई ने कहा, ‘सीजेआई ने कहा, ‘हम समस्या को जानते हैं और हम ऐसे आदेश पारित करेंगे जिनका पालन किया जा सके। कुछ निर्देश ऐसे हैं जिन्हें बलपूर्वक लागू किया जा सकता है। इन शहरी महानगरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है। लेकिन गरीबों का क्या होगा…।’ न्याय मित्र ने कहा कि गरीब मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इससे पहले पीठ ने कहा था कि वायु प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका को ‘सामान्य’ मामला नहीं माना जा सकता, जिसे केवल सर्दियों के महीनों में ही सूचीबद्ध किया जाए। उसने कहा था कि इस समस्या के अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए महीने में दो बार मामले की सुनवाई की जाएगी। सोमवार को दिल्ली घनी धुंध की चादर में लिपटी रही, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 498 पर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वायु गुणवत्ता 38 केंद्रों पर ‘गंभीर’ थी, जबकि दो केंद्रों पर यह ‘बेहद खराब’ थी। जहांगीरपुरी में एक्यूआई 498 दर्ज किया गया, जो सभी 40 केंद्रों में सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाला केंद्र रहा।

दिल्ली की राजनीति में बड़ा उलटफेर, फ्री बिजली खर्च में केजरीवाल से आगे रेखा गुप्ता सरकार

नई दिल्ली मुफ्त बिजली योजना पर रेखा गुप्ता सरकार को भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है। बिजली पर दिल्ली सरकार का सब्सिडी बिल पहली बार 4000 करोड़ रुपये से पार जा सकता है। सरकार ने पहले ही इसका बजट बढ़ा दिया था, लेकिन वह भी कम पड़ रहा है। भाजपा सरकार को अनुमान से और अधिक खर्च करने की आवश्यकता होगी।   मीडिया ने सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि 2025-26 में बिजली सब्सिडी पर दिल्ली सरकार को 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करनी होगी। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 3,849 करोड़ रुपये का आवंटन बजट में किया था, जोकि 2024-25 के मुकाबले 250 करोड़ रुपये अधिक था। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली विभाग ने इस मद में अतिरिक्त 361 करोड़ रुपये की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि अतिरिक्त धनराशि की मांग मुफ्त बिजली योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या में लगातार इजाफे के साथ-साथ बिजली वितरण कंपनियों को देय जमा भुगतानों की वजह से है। इस महीने दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में संशोधित बजट को पेश किया जा सकता है। सरकार आवंटन को बढ़ा सकती है। मुफ्त बिजली योजना की शुरुआत 2015-16 में आम आदमी पार्टी सरकार ने की थी। तब दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 52.62 लाख थी और सब्सिडी का खर्च 1442 करोड़ था। पिछले एक दशक में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 69 लाख हो गई जबकि सब्सिडी खर्च तीन गुना हो गया। अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल यह खर्च 4200 करोड़ तक जा सकता है। दिल्ली के कुल बिजली उपभोक्ताओं में से 83 फीसदी घरेलू हैं। 200 यूनिट प्रति माह खर्च करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली जीरो आता है। 201 से 400 यूनिट तक खर्च करने वालों को 50 फीसदी सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 800 रुपये है। 400 से अधिक यूनिट खर्च करने वाले पूरा बिल चुकाते हैं। आधिकारिक डेटा के मुताबिक सर्दियों में जीरो बिल वाले उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। दिसंबर 2022 में 31 लाख कनेक्शन पर जीरो बिल था। जनवरी 2023 में यह संख्या 29 लाख थी। दिसंबर 2023 में यह संख्या बढ़कर 42 लाख हो गई जबकि जनवरी 2024 में 35 लाख हो गई। पिछले साल दिसंबर और इस साल जनवरी में यह संख्या क्रमश: 45 और 40 लाख रही।