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धूल भरी आंधी और बारिश का असर: पंजाब में तापमान गिरेगा, उमस से मिलेगी राहत

चंडीगढ़  पंजाब में आज और कल भी माैसम खराब रहेगा। इससे पहले वीरवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। कई जिलों में तेज धूल भरी आंधी के साथ बारिश हुई जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली।  अमृतसर में दोपहर करीब तीन बजे तेज हवाओं और बारिश के बाद तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई दिनों से 40 डिग्री के आसपास पहुंच रहे तापमान से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। हालांकि दिन के समय मौसम शुष्क रहने के कारण पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में 2.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य में सबसे अधिक 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में भी 1.1 डिग्री की वृद्धि हुई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस एसबीएस नगर में दर्ज किया गया। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते राज्य का तापमान सामान्य के करीब बना हुआ, जबकि 24 घंटे में तापमान में 2.1 डिग्री की बढ़ौतरी देखने को मिली है। वीरवार को राज्य का अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक दर्ज किया गया और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने का अुनमान है।  बठिंडा रहा सबसे गर्म वीरवार को राज्य में सबसे अधिकत तापमान बठिंडा दर्ज किया गया। यहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लुधियाना में लगभग 40.4 डिग्री, पटियाला में 40.6 डिग्री, अमृतसर में 38.8 डिग्री और चंडीगढ़ में लगभग 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क रहा और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी या नाममात्र वर्षा दर्ज की गई। जानें कैसा रहेगा मौसम 5 जून- इस दिन राज्य के पश्चिमी हिस्सों जैसे फरीदकोट, फिरोजपुर,मुक्तसर और फाजिल्का में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। जबकि अन्य पूरे राज्य में बारिश और तेज हवाओं के साथ आंधी का असर दिख सकता है। इस दौरान बादल छाए रहने और हल्की वर्षा की स्थिति बन सकती है। 6 जून- इस दिन पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला और मानसा में बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। 7-8 जून- इन दिनों में मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया। अधिकांश हिस्सों में मौसम काफी हद तक सामान्य या साफ रहने की संभावना है, हालांकि कुछ जिलों में हल्के बादल बने रह सकते हैं।  आंधी के दौरान कई स्थानों पर धूल का गुबार छा गया और दृश्यता प्रभावित हुई। बारिश के बाद मौसम साफ हुआ और तापमान में कमी आई। अमृतसर का अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री जबकि लुधियाना 40.4 और पटियाला 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है। सात जून को भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके बाद आठ और नौ जून को मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 10 जून से नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम फिर बदल सकता है। 

पंजाब की राजनीति में पोस्टर संग्राम: मजीठिया समर्थकों का पलटवार, शहर में छाए नए पोस्टर

 अमृतसर शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर मजीठा हल्के में सियासी पोस्टरबाजी लगातार तेज होती जा रही है। कुछ दिन पहले क्षेत्र में मजीठिया को भगोड़ा बताने वाले पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे। इसके जवाब में अब उनके समर्थकों की ओर से “टाइगर अभी जिंदा है” लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। समर्थकों का कहना है कि पोस्टरों के जरिए यह संदेश दिया गया है कि राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों के बावजूद बिक्रम सिंह मजीठिया का जनाधार कायम है। वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक संदेशबाजी करार दे रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में थाना मजीठा में हिरासत में लिए गए अकाली कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को छुड़वाने के मामले को लेकर बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। जिसके बाद पुलिस लगातार गिरफ्तारी के लिए रेड कर रही है। इसी के बाद से मजीठिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और पोस्टरबाजी लगातार जारी है। एक ओर विरोधी पक्ष मजीठिया को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समर्थक पोस्टरों और सार्वजनिक संदेशों के जरिए उनके समर्थन का प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल मजीठा हल्के में लगी यह नई पोस्टर श्रृंखला लोगों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, आनंदपुर साहिब में हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना की खास बातें

श्री आनंदपुर साहिब पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए श्री आनंदपुर साहिब के संशोधित हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों की उच्च स्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दी गई। यह परियोजना न केवल श्री आनंदपुर साहिब की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहतर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव भी सुनिश्चित करेगी। क्या है हेरिटेज स्ट्रीट प्लान? संशोधित योजना के अनुसार, प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के निकट स्थित गोल चौक से शुरू होगी और तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सीसगंज साहिब तथा गुरुद्वारा भोरा साहिब तक विकसित की जाएगी। इस हेरिटेज कॉरिडोर का उद्देश्य श्री आनंदपुर साहिब के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक सुव्यवस्थित मार्ग से जोड़ना है, ताकि श्रद्धालुओं को इन पवित्र स्थलों के दर्शन के दौरान एकीकृत आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव मिल सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत अनुभव को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। इसके माध्यम से सिख इतिहास और विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच आसान होगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से पहले सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां प्राप्त की जाएंगी। साथ ही, इसके डिजाइन को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और अन्य सक्षम प्राधिकरणों से अनुमोदित कराया जाएगा। निगरानी के लिए हाई-पावर कमेटी सरकार ने परियोजना के सुचारू और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (हाई-पावर कमेटी) गठित करने का भी निर्णय लिया है। यह समिति परियोजना की निगरानी करेगी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी। विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस पंजाब सरकार का मानना है कि श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पंजाब की समृद्ध धार्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: रेल हादसे में पोती खोने वाले दादा को मिलेगा मुआवजा, 28 साल बाद न्याय

चंडीगढ़  वर्ष 1998 के खन्ना रेल दुर्घटना मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब 28 वर्ष बाद पोती की मौत पर उसके दादा को दिए गए चार लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा गया है।  अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की निर्भरता का आकलन केवल आर्थिक आधार पर नहीं किया जा सकता। परिवार के भीतर मिलने वाला प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारा भी निर्भरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जस्टिस पंकज जैन ने केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे की अपील खारिज कर दी। उन्होंने रेलवे दावा अधिकरण के आदेश को सही ठहराया। 26 नवंबर 1998 को खन्ना-लुधियाना रेलखंड पर भीषण हादसा हुआ था। इसे देश के सबसे भयावह रेल हादसों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में दावेदार की पोती सहित परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। कोलकाता जा रही सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरे अमृतसर जाने वाली ट्रेन के छह डिब्बों से टकरा गई थी। दोनों ट्रेनों में करीब 2500 यात्री सवार थे। हादसे में करीब 212 लोगों की मौत हुई थी। मुआवजे पर रेलवे का तर्क  पोती की मृत्यु के बाद रेलवे दावा अधिकरण ने दादा के पक्ष में चार लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार और उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक ने इस आदेश को चुनौती दी। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उनका तर्क था कि रेलवे अधिनियम के तहत केवल वही व्यक्ति मुआवजे का दावा कर सकता है जो मृतक पर आर्थिक रूप से निर्भर हो। निर्भरता की व्यापक अवधारणा सुनवाई के दौरान जस्टिस जैन ने खंडपीठ के एक पूर्व फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि निर्भरता की अवधारणा को संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक जुड़ाव, स्नेह, संरक्षण और देखभाल भी महत्वपूर्ण है। यह आर्थिक सहायता जितनी ही अहमियत रखती है। अदालत ने निर्भरता को केवल वित्तीय दायरे तक सीमित रखने से इन्कार किया। दादा-पोती का भावनात्मक रिश्ता अदालत ने कहा कि दादा-दादी और पोते-पोतियों के बीच एक विशेष भावनात्मक रिश्ता होता है। ऐसे में दादा अपनी पोती पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं थे, इस आधार पर उन्हें मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। दावेदार का कोई अन्य पोता या पोती नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि दादा-दादी की अपने पोते या पोती पर प्रेम, स्नेह, देखभाल और भावनात्मक सहारे के लिए निर्भरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया मुआवजा पूरी तरह न्यायसंगत है। अदालत ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए चार लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा। 

पंजाब की राजनीति में नई हलचल, कांग्रेस के संपर्क में कैप्टन अमरिंदर; BJP से नाराजगी की चर्चा

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्‌डा ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे संपर्क में हैं। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं और हमारे वरिष्ठ साथी हैं। गौरतलब है कि कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त हैं। ऐसे में यह भी हो सकता है कि हुड्‌डा ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी के वाहक बनें। वहीं, हुड्डा के इस दावे पर पंजाब भाजपा ने भी रिएक्शन दिया है। पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। कैप्टन और हुड्‌डा अच्छे दोस्त माने जाते हैं। इस वजह से कयास लगने लगे हैं कि कहीं हुड्‌डा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की कोशिश तो नहीं कर रहे। कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा इसलिए तेज हुई कि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। वहीं इस मामले में पंजाब भाजपा के प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियेवाल ने कहा कि संपर्क में होना कोई बड़ी बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा तो कहती हैं कि हुड्‌डा किसी के संपर्क में नहीं रहते। हुड्‌डा ने सिर्फ संपर्क में होने की बात कही, इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। भाजपा में पूछ नहीं होने से नाराज हैं कैप्टन कैप्टन के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा को इसलिए भी बल मिला है क्योंकि वह लगातार कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं। कैप्टन का कहना है कि कांग्रेस में पंजाब को लेकर उनसे पूछा जाता था, लेकिन भाजपा सीधे ऊपर से फैसले लेती है। मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। इस मामले में भाजपा ने उन से कोई राय नहीं ली गई थी। कैप्टन की BJP से नाराजगी की वजहें:-     प्रधान बनाने से पहले राय नहीं ली: कैप्टन ने केवल ढिल्लों को पंजाब BJP का नया प्रधान बनाने का विरोध किया था। कैप्टन ने कहा था कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब ढिल्लों सक्रिय जरूर थे, लेकिन जमीन (फील्ड) पर उनका प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जैसा होना चाहिए था। इस मामले में भाजपा ने मुझसे कोई राय नहीं ली।     कांग्रेस सलाह लेती, BJP में फैसला ऊपर से: कांग्रेस और भाजपा की कार्य नीति की तुलना करते हुए कैप्टन ने कहा कि मैं कांग्रेस में तीन बार अध्यक्ष रहा और वहां हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी। लेकिन भाजपा में पूरी तरह अलग संस्कृति है। यहां बस फैसला ऊपर से आता है, किसी से पूछा नहीं जाता।     गठबंधन की बात नहीं मान रही भाजपा: कैप्टन अमरिंदर पंजाब में चुनाव को लेकर अकाली दल से गठबंधन के पक्ष में हैं। वह खुलकर इसकी पैरवी करते हैं। इसके उलट भाजपा के नेता बार-बार कह रहे हैं कि हम सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे।     भाजपा में बड़े नेताओं से मुलाकात में दिक्कत: कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक फैमिली की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, BJP में ये सिस्टम नहीं है।     भाजपा ने संवेदना तक व्यक्त नहीं की: कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था- मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन ने कहा था, कांग्रेस को मिस करता हूं कैप्टन ने कुछ समय पहले कहा था कि मैं आज भी कांग्रेस को मिस करता हूं। कांग्रेस एक परिवार की तरह है। मैं जब भी फोन करता था, तो वह मुझसे मिल लेते थे। मगर, भाजपा में ये सिस्टम नहीं है। मेरे जन्मदिन पर राहुल गांधी ने बधाई संदेश भेजा था। हाल ही में मेरे भाई रणधीर के निधन पर भी उनका शोक संदेश आया, लेकिन भाजपा से किसी ने भी संवेदना व्यक्त नहीं की। कैप्टन आए तो कांग्रेस को क्या फायदा? पंजाब कांग्रेस में अभी नेतृत्व को लेकर कलह चल रही है। मौजूदा प्रधान राजा वड़िंग, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी, नेता विपक्ष प्रताप बाजवा समेत कई नेताओं के गुट बने हुए हैं। कांग्रेस हाईकमान चुनाव से पहले पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन की भी सोच रहा है। ऐसे में अगर कैप्टन की वापसी होगी, तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कैप्टन के अधीन ये सारे नेता पहले भी काम कर चुके हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति का दिग्गज चेहरा हैं। 2002 हो या फिर 2017, वे अपने चेहरे के बूते ही कांग्रेस को सत्ता में लाए। यह बात कांग्रेस के भीतर उनके विरोधी भी मानते हैं। पंजाब के गांवों में कैप्टन के आक्रामक रुख को पसंद किया जाता है। वहीं, सामुदायिक सौहार्द के लिए वे शहरी तबके की पहली पसंद हैं। इसके अलावा कांग्रेस में रहते कैप्टन की सियासी पकड़ भी मजबूत थी। 2014 में जब पूरे देश में मोदी लहर चल रही थी, तब भाजपा ने अमृतसर से अपने बड़े नेता अरुण जेटली को लोकसभा चुनाव लड़ने भेजा। कैप्टन वहां उनसे भिड़ने चले गए। कैप्टन को प्रचार के लिए एक महीने का ही वक्त मिला था, लेकिन जेटली हारकर दिल्ली लौटे। ऐसे वक्त में जब भाजपा के कई नेता मोदी के नाम पर जीत गए, कैप्टन ने दिखाया कि पंजाब की राजनीति में उनसे बड़ा सूरमा कोई नहीं है। इसके अलावा पंजाब में बादल परिवार की सत्ता उखाड़ने का काम कैप्टन अमरिंदर ने ही किया है। सांसद पहले ही कह चुके- कैप्टन का वेलकम गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर रंधावा कैप्टन की कांग्रेस में वापसी के हक में हैं। वह चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर कह चुके हैं कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में आएं तो उनका वेलकम है। कैप्टन ने खुद कांग्रेस में … Read more

यादों को गहनों में संजोने का नया ट्रेंड, पंजाब में DNA ज्वेलरी की बढ़ी मांग

जालंधर. पंजाब में अब रिश्तों और यादों को सहेजने का तरीका बदल रहा है। सोने-चांदी की पारंपरिक ज्वेलरी की जगह अब लोग डीएनए ज्वेलरी को तवज्जो दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस ज्वेलरी में अपनों के खून, बाल या दूध के नमूने को ब्लू रेजिन में प्रिजर्व कर लाकेट, अंगूठी और ब्रेसलेट तैयार किए जा रहे हैं। जालंधर के सर्राफा बाजार के ज्वेलर्स की मानें तो बीते 6-8 महीनों में डीएनए ज्वेलरी के आर्डर में व्यापक स्तर पर इजाफा हुआ है। नवजात के जन्म, शादी की सालगिरह, माता-पिता की याद या किसी अपने के बिछड़ने पर लोग भावनात्मक जुड़ाव के लिए ऐसी ज्वेलरी बनवा रहे हैं। एक ग्राहक ने तो अपने दिवंगत पिता के खून की बूंद को लाकेट में हमेशा के लिए सहेज लिया है। फिलहाल जालंधर के अलावा लुधियाना और अमृतसर में भी कुछ चुनिंदा ज्वेलर्स ने यह काम शुरू किया है। कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में डीएनए ज्वेलरी की मांग और बढ़ेगी। ऐसे तैयार होती है डीएनए ज्वेलरी स्वर्णकार संघ जालंधर के अध्यक्ष दीपक निश्चल ने बताया कि ग्राहक से खून का नमूना लिया जाता है। खून को जमने से बचाने के लिए खास ईडीटीए ट्यूब में रसायनों से ट्रीट किया जाता है। इसके बाद ब्लू रेजिन में उस नमूने को डालकर हाई टेम्प्रेचर पर प्रिजर्व किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है और नमूना खराब नहीं होता। तैयार जेम को सोने या चांदी की बेस ज्वेलरी में फिट कर दिया जाता है। एक लाकेट तैयार करने में 7 से 10 दिन का समय लगता है। कीमत 8 हजार रुपये से शुरू होकर डिजाइन के हिसाब से तय की है। युवाओं में भारी क्रेज सराफा बाजार के कारोबारी केशव ज्वेलर्स के मालिक वरुण चोपड़ा का कहना है कि पहले लोग फोटो फ्रेम या टैटू से यादों को सहेजते थे, लेकिन अब डीएनए ज्वेलरी नया ट्रेंड बन गया है। खासकर 25 से 40 साल के युवा वर्ग में इसे लेकर क्रेज देखा जा रहा है। कई एनआरआई परिवार भी विदेश से फोन कर आर्डर बुक करवा रहे हैं। डा. मुनीष मेहता के मुताबिक रेजिन में प्रिजर्व करने के बाद डीएनए का नमूना दशकों तक सुरक्षित रहता है। हालांकि ज्वेलर्स को नमूना लेते समय हाइजीन और मेडिकल प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखना जरूरी होता है। लिहाजा, स्वास्थ्य संबंधी नियमों की पालना करने के बाद इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

वेतन बढ़ोतरी के साथ नई सौगात, छुट्टी के दिन का भी मिलेगा भुगतान; 8 घंटे की ड्यूटी तय

चंडीगढ़  चंडीगढ़ से बड़ी खबर सामने आ रही है। चंडीगढ़ के कर्मचारियों के लिए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। चंडीगढ़ में कर्मचारियों की सैलरी 6% से 10% तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन नियमित सैलरी और आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे 20 हजार कर्मचारियों कोबड़ा लाभ मिलने वाला हैं। इसके लिए प्रशासन ने 2026-27 के लिए नई DC रेट जारी कर दिए हैं। ये नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, जो 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगे। प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक मंथली बेसिस पर रखे कर्मचारियों को सरकारी छुट्टियों के दिनों का भी पूरा वेतन मिलेगा। इसके अलावा, पांच साल से काम कर रहे कर्मचारियों को मूल DC रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। Chandigarh  ऐसे में अब सबसे कम सैलरी वॉच रूम ड्यूटी ऑपरेटर की 18,058 रुपए और सबसे अधिक साइकियाट्रिस्ट की 86,703 रुपए मासिक तय की गई है। इसके अलावा ड्यूटी का टाइम 8 घंटे का रहेगा। 5 साल पूरा करने वालों को ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। खास बात यह है कि यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। ऐसे मिलेगा फायदा प्रशासन की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार, ये दरें संशोधित कर 560 से अधिक श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बढ़ाई गई हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक, जो कर्मचारी 31 मार्च 2026 तक अपने पद पर 5 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें मूल डीसी रेट पर 2% अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यदि इस दौरान उनका ठेकेदार या एजेंसी बदली भी है, तो भी उनकी नौकरी को निरंतर माना जाएगा। इस अतिरिक्त 2% लाभ की गणना वित्तीय वर्ष 2025-26 के वेतन के आधार पर की जाएगी। नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। Chandigarh News प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। इन कर्मचारियों का नहीं बढ़ा वेतन आदेश के मुताबिक, कुछ श्रेणियां ऐसी भी हैं जिनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इनमें असिस्टेंट लेक्चरर, बेयरर, क्लॉक रूम अटेंडेंट, कंसल्टेंट, डेस्क हेल्पर, गेस्ट ट्रेनर और टैक्स कलेक्टर जैसे पद शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इनका ग्रेड पे 7वें वेतन आयोग में उपलब्ध नहीं होने और संबंधित विभागों से कोई सिफारिश न आने के कारण फिलहाल इनके रेट पुराने (वित्तीय वर्ष 2025-26) वाले ही रखे गए हैं। हालांकि, विभाग से ब्योरा मिलने पर इनकी समीक्षा की जा सकती है। पंजाब सरकार आउटसोर्स मुलाजिम करेगी पक्के पंजाब सरकार ने ग्रुप सी और ग्रुप डी की नौकरियों में (आउटसोर्सिंग) व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने जा रही है। सरकार इसके लिए दो कानून 'पंजाब राज्य आउटसोर्स्ड पर्सनल विधेयक-2026' और 'पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सनल विधेयक-2026' को मंजूरी दी है। इससे रज्य के 65,000 कर्मचारियों को लाभ होगा। राज्य के 51 सरकारी विभागों में काम कर रहे कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंध के दायरे में लाया जाएगा। इससे अब वेतन किसी तीसरे ठेकेदार के बजाय सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में आएगा, जिससे कमीशनखोरी और शोषण बंद होगा। भविष्य में इन पदों पर कोई भी भर्ती ठेके पर नहीं होगी। सीवरमैन, फायरमैन और सफाई सेवक जैसे जोखिम भरे पदों के कर्मचारी 3 वर्ष और अन्य श्रेणियों के कर्मचारी 5 वर्ष की सेवा के बाद सीधे सरकारी अनुबंध के पात्र होंगे। इस अनुबंध पर 10 वर्ष पूरे करने के बाद उन्हें स्थायी (नियमित) किया जाएगा। इन कर्मचारियों को अब मातृत्व लाभ और हर साल 10 दिनों की कैजुअल लीव मिलगी।

हवारा की पैरोल याचिका पर सुनवाई, अदालत ने दिल्ली और NCT प्रशासन से मांगा जवाब

चंडीगढ़  पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में दोषी करार दिए गए जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली के डायरेक्टर जनरल (प्रिज़न) को नए सिरे से नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पूर्व में जारी नोटिस के बावजूद दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पहले ही अपना-अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। वहीं, दिल्ली जेल प्रशासन की ओर से जवाब न आने पर अदालत ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 6 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी। दोबारा आतंकी संगठन से जुड़ सकते हैं हवारा इससे पहले सीबीआई ने जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर जवाब दाखिल करते हुए उसकी रिहाई का विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने और दोबारा आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने की आशंका है। सीबीआई ने कहा कि वह पहले भी जेल से फरार हो चुका है। वर्ष 2004 में हवारा और उसके साथियों ने सुरंग खोदकर बुरैल जेल से फरार होने में सफलता हासिल की थी। हवारा का बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हालांकि उसे करीब एक साल बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था। हवारा का संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठनों से रहा है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे किसी भी सूरत में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। हवारा ने मां की सेवा के लिए मांगी पैरोल हवारा ने अपनी वृद्ध और बीमार मां की देखभाल के लिए चार सप्ताह की पैरोल देने की मांग की है। याचिका में उसका कहना है कि वह पिछले लगभग 28 वर्ष 9 माह से जेल में बंद है और इस दौरान उसने कभी पैरोल की मांग नहीं की। उसने यह भी दावा किया कि उसके पैतृक गांव हवारा कलां (जिला फतेहगढ़ साहिब) की पंचायत ने भी पैरोल दिए जाने के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। ऐसे में मानवीय आधार पर उसे अस्थायी रिहाई प्रदान की जानी चाहिए।  सीबीआई ने जताया विरोध हालांकि सीबीआई ने हाई कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में हवारा की पैरोल का जोरदार विरोध किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि उसे पैरोल दी जाती है तो उसके फरार होने की गंभीर आशंका है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि हवारा वर्ष 2004 में चंडीगढ़ की बुडैल जेल से अपने साथियों के साथ सुरंग बनाकर फरार हो चुका है। बाद में उसे लगभग एक वर्ष बाद दोबारा गिरफ्तार किया गया था। ऐसे में उसके पिछले आचरण को देखते हुए उसे पैरोल देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। सीबीआई ने यह भी कहा कि हवारा का संबंध प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से रहा है। एजेंसी के अनुसार पैरोल मिलने की स्थिति में उसके दोबारा अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों के संपर्क में आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उसके आपराधिक रिकॉर्ड और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए किसी भी परिस्थिति में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। 6 जुलाई को होग अगली सुनवाई दूसरी ओर, चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि हवारा वर्तमान में दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। इसलिए पैरोल से संबंधित किसी भी मांग पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र दिल्ली प्रशासन और वहां की जेल अथॉरिटी के पास है। प्रशासन ने कहा कि हवारा को अपनी पैरोल संबंधी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उठानी चाहिए। अब इस मामले में सभी पक्षों के जवाब आने के बाद हाई कोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई में पैरोल याचिका पर आगे विचार करेगा।  

अकाल तख्त साहिब में धार्मिक आयोजन का आगाज, ब्लू स्टार बरसी से पहले श्रद्धालुओं ने किया अखंड पाठ आरंभ

अमृतसर. ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के अवसर पर 6 जून को आयोजित होने वाले श्रद्धांजलि समागम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में वीरवार को श्री अकाल तख्त साहिब में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ किया गया। यह पाठ जून 1984 में श्री हरिमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में सैन्य अभियान के दौरान मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है। श्री अखंड पाठ साहिब के आरंभ अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह सहित कई धार्मिक और प्रबंधकीय हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में संगत ने भी हाजिरी लगाई और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। धामी ने सप्ताह को बताया पीड़ादायक एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि जून का पहला सप्ताह सिख समुदाय के इतिहास का अत्यंत संवेदनशील और पीड़ादायक दौर माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा श्री हरिमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब और अन्य गुरुद्वारा साहिबानों में की गई सैन्य कार्रवाई ने सिख समुदाय को गहरे घाव दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना की यादें आज भी सिख मन में जीवित हैं और इन्हें भुलाया नहीं जा सकता। धामी ने कहा कि उस सैन्य अभियान के दौरान अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों को भी गोलियां लगने से नुकसान पहुंचा था। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवधि के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी जाती है। बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा उठाया एसजीपीसी अध्यक्ष ने इस अवसर पर बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई सिख लंबे समय से विभिन्न जेलों में बंद हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि मानवीय आधार पर ऐसे मामलों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाए। इस मौके पर श्री अकाल तख्त साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नन, सदस्य जत्थेदार मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल, मनजीत सिंह, सचिव बलविंदर सिंह काहलवां समेत एसजीपीसी के अनेक पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जून 1984 की घटनाओं पर विशेष प्रदर्शनी बरसी कार्यक्रम के साथ-साथ जून 1984 की घटनाओं और उस दौरान हुए नुकसान को दर्शाने वाली एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी शुरू की गई है। गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हाल के बाहर लगाई गई इस प्रदर्शनी में उस समय की दुर्लभ तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें श्री अकाल तख्त साहिब को पहुंचे नुकसान और उस दौर की परिस्थितियों को दर्शाया गया है। एसजीपीसी के अनुसार यह प्रदर्शनी 6 जून तक जारी रहेगी। संगत सुबह से शाम तक इसे देख सकेगी और इतिहास के उस महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेगी। श्रद्धांजलि समागम को लेकर धार्मिक परिसर में विशेष तैयारियां भी की जा रही हैं और बड़ी संख्या में संगत के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

किरायेदार को नहीं मिली राहत, मकान मालिक की आवश्यकता को मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश रखा बरकरार

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए किरायेदार को दुकान खाली करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही किया कि किरायेदार यह तय नहीं कर सकता कि मकान मालिक अपनी जरूरतों को किस प्रकार पूरा करे। यदि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक और सद्भावनापूर्ण है तो किरायेदार उसे वैकल्पिक व्यवस्था सुझाकर किराये की संपत्ति खाली कराने की मांग को विफल नहीं कर सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए लुधियाना स्थित एक दुकान के किरायेदार की बेदखली को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किराया नियंत्रक को यह मानकर चलना चाहिए कि मकान मालिक की आवश्यकता वास्तविक है। ऐसे मामलों में किरायेदार यह निर्देश नहीं दे सकता कि मकान मालिक बिना किराये की संपत्ति का कब्जा प्राप्त किए अपनी जरूरतों को अन्य तरीके से पूरा कर ले। लुधियाना का मामला पहुंचा था हाई कोर्ट मामला लुधियाना के ब्राउन रोड स्थित एक दुकान से जुड़ा था। मकान मालिक ने दुकान खाली कराने की मांग यह कहते हुए की थी कि उसका विवाहित पुत्र स्वतंत्र रूप से स्पेयर पार्ट्स का कारोबार शुरू करना चाहता है और इसके लिए उक्त दुकान की आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पुत्र के पास न तो अपनी कोई अन्य दुकान है और न ही वह किसी अन्य व्यावसायिक परिसर पर कब्जा रखता है। ऐसे में उसकी जरूरत वास्तविक और उचित है। किरायेदार ने दी थी बेदखली आदेश को चुनौती दूसरी ओर किरायेदार ने बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं को संपत्ति का मालिक साबित करने में विफल रहा है, इसलिए उसे बेदखली याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि संपत्ति पहले एक पारिवारिक ट्रस्ट के अधीन थी, लेकिन वर्तमान में उसका स्वामित्व पूरी तरह संबंधित मकान मालिक के पास है। दस्तावेजों और जिरह के दौरान दिए गए बयानों से उसके मालिकाना अधिकार पर्याप्त रूप से सिद्ध होते हैं। इसलिए वह किराया प्राप्त करने और किरायेदार के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही शुरू करने का हकदार है। ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का हुआ उल्लेख हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि स्वामित्व संबंधी विवाद को अलग भी रख दिया जाए, तब भी किरायेदार का मामला टिक नहीं सकता। अदालत ने ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949 का उल्लेख कर कहा कि कानून में "मकान मालिक" की परिभाषा में ट्रस्टी भी शामिल है। इसलिए किराया प्राप्त करने वाला ट्रस्टी भी बेदखली याचिका दायर कर सकता है। बेटे की जरूरत को वास्तविक बताया कोर्ट ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि "स्वयं के उपयोग" का अर्थ केवल मकान मालिक के व्यक्तिगत उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आश्रित परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को भी इसमें शामिल माना जाएगा। अदालत ने माना कि बेटे के स्वतंत्र व्यवसाय के लिए दुकान की आवश्यकता पूरी तरह वास्तविक है और इसमें किसी प्रकार का दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य नहीं दिखता। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 के अपीलीय आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि न पाते हुए किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और बेदखली के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही लंबित सभी अन्य आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।