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Cyber Fraud का बढ़ता जाल: पंजाब में करोड़ों की ठगी, निवेश और वीजा के नाम पर लोगों को बनाया शिकार

चंडीगढ़   पंजाब में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। पिछले चार महीनों के दौरान मोहाली और राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर ठगों ने 30.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। इस अवधि में ऑनलाइन धोखाधड़ी के 13 बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें निवेश, वीजा, नौकरी, प्रॉपर्टी और हनी ट्रैप जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया गया। मामलों की शिकायत मिलने के बाद मोहाली साइबर क्राइम थाना, स्टेट क्राइम और स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है। क्रिप्टो निवेश के नाम पर 19.84 करोड़ की ठगी सबसे बड़ा मामला लुधियाना के व्यवसायी जगदीप सिंघाल से जुड़ा है। साइबर ठगों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर 19.84 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर उनका विश्वास जीता और एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के माध्यम से निवेश करवाया। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 15 अलग-अलग बैंकों के 75 फर्जी खातों के जरिए निकाली गई। फर्जी निवेश कंपनी बनाकर 3.62 करोड़ की धोखाधड़ी होशियारपुर निवासी तरनजीत सिंह भल्ला से भी निवेश के नाम पर 3.62 करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने ‘अटालिया’ नामक कंपनी में निवेश कराने के लिए सेबी और आरबीआई के कथित दस्तावेज दिखाए तथा हर महीने 3 प्रतिशत और सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का झांसा दिया। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। नौकरी, वीजा और हनी ट्रैप के जरिए भी ठगी साइबर ठगों ने रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी दिलाने, बैंक ऋण से राहत दिलाने और पैसे दोगुने करने के नाम पर भी लोगों से लाखों रुपये ऐंठे। हनी ट्रैप के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक युवक को इंस्टाग्राम पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए जाल में फंसाया गया और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 4.50 लाख रुपये वसूल लिए गए। वहीं, एक महिला को इंस्टाग्राम लिंक भेजकर निवेश का झांसा दिया गया और उससे 70 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। प्रॉपर्टी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म फ्रॉड भी सामने आए खरड़ में एक दंपती ने सोशल मीडिया पर कोठी बेचने का विज्ञापन देकर छह लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपये का बयाना लिया। बाद में संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री करवा दी गई। इसी तरह एचएसबीएस कैपिटल नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए चार लोगों से 27.88 लाख रुपये की ठगी की गई। शुरुआत में कुछ लाभ दिखाकर विश्वास जीता गया और बाद में निवेशकों की रकम ब्लॉक कर दी गई। विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी जॉर्जिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के वर्क वीजा दिलाने के नाम पर भी कई लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने दर्जनों युवाओं से लाखों रुपये वसूल लिए, लेकिन न तो वीजा मिला और न ही रकम वापस की गई। पुलिस ने जारी की एडवाइजरी पुलिस अधिकारियों ने लोगों से ऑनलाइन निवेश, सोशल मीडिया ऑफर और डिजिटल लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों पर भरोसा न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

खाने-पीने की चीजों में गड़बड़ी! दूध और पनीर के 8 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे

अमृतसर. अमृतसर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विभिन्न डेयरियों से लिए गए दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 12 नमूनों में से 8 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इतना ही नहीं, इनमें दो नमूने मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए, जबकि छह नमूने गुणवत्ता के निर्धारित मानकों से कम पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डेयरियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग का कहना है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। 21 मई को लिए गए थे सेंपल सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. जी.एस. पन्नू ने बताया कि पंजाब खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निर्देशों पर 21 मई को शहर की विभिन्न डेयरियों से दूध, पनीर, दही और अन्य दुग्ध उत्पादों के कुल 12 नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों को जांच के लिए खरड़ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि केवल चार नमूने ही निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। जानें किनके सेंपल हुए पास व फेल रिपोर्ट के अनुसार रामतीर्थ मार्ग स्थित गिल डेयरी से लिए गए पनीर के दो नमूनों में से एक नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया गया, जबकि दूसरा निम्न गुणवत्ता का निकला। पुतलीघर स्थित गुरु नानक डेयरी से लिया गया दूध का नमूना भी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसी तरह गुरु डेयरी से लिए गए दूध और पनीर के नमूने भी निर्धारित स्तर से नीचे पाए गए। जांच में शर्मा डेयरी का दही तथा छाबड़ा डेयरी का पनीर भी निम्न गुणवत्ता का पाया गया। इसके अलावा इंडिया गेट क्षेत्र स्थित ढिल्लों डेयरी से लिया गया पनीर का नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है। यह तथ्य सबसे अधिक चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कानूनी कार्रवाई करेगा सेहत विभाग खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन डेयरियों के नमूने फेल पाए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट या गुणवत्ता से समझौते को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. पन्नू ने उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दूध, पनीर, दही और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, स्वच्छता और विश्वसनीयता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। लोगों को केवल भरोसेमंद विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर बाजार से नमूने लेकर जांच की जाएगी ताकि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ पहुंच सकें।

धमकी भरे संदेशों से हड़कंप, पंजाब के धार्मिक स्थलों, अदालत और रेलवे स्टेशन को बनाया निशाना

चंडीगढ़. पंजाब में धार्मिक स्थलों, सरकारी संस्थानों और न्यायिक परिसरों को बम से उड़ाने की धमकियों के बीच सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। इसी बीच स्टेट स्पेशल आपरेशन सेल (एसएसओसी) ने मोहाली से एक विदेशी आधारित आतंकी आपरेटिव के दो सहयोगियों को गिरफ्तार कर एक आईईडी बरामद की है। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाने की साजिश नाकाम कर दी गई। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पंजाब के  प्रमुख मंदिरों, पंजाब सचिवालय और न्यायिक अदालत परिसरों को ई-मेल के जरिए बम धमकियां मिली हैं। लगातार मिल रही धमकियों के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। पंजाब पुलिस के अनुसार एसएसओसी की टीम ने मोहाली में कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सार्वजनिक महत्व के ढांचे को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी। पुलिस अब इस माड्यूल के विदेशी हैंडलरों, सहयोगियों और अन्य लिंक की जांच कर रही है। कंट्रोल रूम में मिला ई-मेल उधर, पंजाब सचिवालय के कंट्रोल रूम को गुरुवार को एक ई-मेल मिला, जिसमें परिसर में बम होने का दावा किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ते और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने सचिवालय परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि जांच के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। साइबर सेल ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी है। इसी तरह अमृतसर के दुर्ग्याणा मंदिर, पठानकोट के मुक्तेश्वर मंदिर, जालंधर के देवी तालाब मंदिर, बठिंडा के मैसर मंदिर और पटियाला के काली देवी मंदिर समेत छह धार्मिक स्थलों को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इसके बाद इन सभी स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अदालत परिसरों में आम लोगों की एंट्री पर रोक धमकी भरे ई-मेल का असर न्यायिक परिसरों पर भी दिखाई दिया है। मोहाली जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आदेश जारी कर 5 जून तक मोहाली, खरड़ और डेराबस्सी स्थित अदालत परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अदालतों में केवल मुकदमों से संबंधित पक्षकारों और आरोपितों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है, जबकि आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। आदेशों के अनुसार सभी प्रवेश द्वारों पर सघन जांच की जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से परिसर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही सामान्य कामकाज शुरू होगा। न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी किसी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां हुई सतर्क लगातार मिल रही धमकियों और मोहाली में आईईडी बरामद होने की घटना को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। पुलिस का कहना है कि राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है तथा किसी भी आतंकी या आपराधिक नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा।

नियमितीकरण पर फिलहाल ब्रेक, हाईकोर्ट के आदेश से PRTC कर्मचारियों की बढ़ी चिंता

चंडीगढ़. पंजाब रोडवेज एवं पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के एकल पीठ के आदेश पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए 31 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है और तब तक संबंधित कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। डिवीजन बेंच के समक्ष पीआरटीसी की ओर से अपील में 22 अप्रैल 2026 को पारित उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें एकल पीठ ने कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए निगम को छह सप्ताह के भीतर उन्हें नियमित करने का निर्देश दिया था। एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित कर्मचारियों को नियमित माना जाएगा। 21 मई के आदेशों का दिया गया हवाला सुनवाई के दौरान पीआरटीसी की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण से जुड़ा समान कानूनी प्रश्न पहले से ही एक अन्य मामले में हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने 21 मई 2026 को पारित एक अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पीईपीएसयू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बनाम जसदीप सिंह व अन्य मामले में भी यही मुद्दा लंबित है और उस प्रकरण की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित है। दलीलों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले में नोटिस जारी कर दिया और वर्तमान अपील को भी उसी तारीख पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया, जिस दिन समान प्रकृति का दूसरा मामला सुना जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि इस अपील को एलपीए-1410-2026 के साथ सुना जाएगा ताकि नियमितीकरण के मुद्दे पर एक समान दृष्टिकोण अपनाया जा सके। यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि निजी प्रतिवादियों यानी कर्मचारियों की सेवाओं के संबंध में संबंधित विभाग यथास्थिति बनाए रखे। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल न तो कर्मचारियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और न ही उनकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई बदलाव किया जाएगा। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से एकल पीठ के नियमितीकरण संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन पर रोक लग गई है और अंतिम निर्णय आने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।

सुरक्षा एजेंसियों को मिली बड़ी सफलता, मोहाली में विस्फोटक सामग्री समेत दो आरोपी पकड़े गए

चंडीगढ़. पंजाब में एक बड़े आतंकी षड्यंत्र को पुलिस ने नाकामयाब कर दिया। पुलिस ने मोहाली से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी विदेश में बैठे एक आतंकी संचालक के संपर्क में थे और सार्वजनिक महत्व के एक महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बनाने की साजिश पर काम कर रहे थे। डीजीपी पंजाब गौरव यादव की तरफ से साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण (IED) बरामद किया गया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस विस्फोटक का इस्तेमाल किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान या ढांचे को निशाना बनाने किया जा सकता था। बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं तथा पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई राज्य विशेष अभियान प्रकोष्ठ की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों संदिग्धों को दबोचा। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों को विस्फोटक सामग्री कहां से मिली, उन्हें निर्देश कौन दे रहा था और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से नेटवर्क के अन्य सदस्यों, संचालकों और साजिश के पूरे तंत्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश से जुड़े तार पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के तार विदेश में सक्रिय एक आतंकी संचालक से जुड़े हुए हैं। जांच का फोकस अब उन सभी कड़ियों तक पहुंचने पर है जो इस षड्यंत्र का हिस्सा हो सकती हैं। अधिकारियों को आशंका है कि नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय पर की गई इस कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया है। यदि साजिश सफल हो जाती तो जनहानि के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंच सकता था।

बरसात की तैयारी तेज, पंजाब में 1400 जलभराव हॉटस्पॉट और हजारों किमी सीवर लाइन होगी दुरुस्त

चंडीगढ़  मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने राज्यभर में अब तक का सबसे बड़ा सीवरेज सफाई अभियान शुरू किया है।स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वर्षा शुरू होने से पहले पंजाब के सभी शहरों और कस्बों में 2,200 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनों की सफाई तथा 1,400 पुराने सीवर ओवरफ्लो हाटस्पाट्स को दुरुस्त किया जाएगा। बैंस ने बताया कि इस अभियान के तहत 800 किलोमीटर मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों और 1,400 किलोमीटर मोहल्लों की शाखा सीवर लाइनों की सफाई की जाएगी। विभाग ने ऐसे 1,400 स्थानों की पहचान की है जहां हर वर्ष मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो की समस्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने इस बार स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है कि पंजाब के किसी भी शहर या कस्बे में सीवर ओवरफ्लो नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। पटियाला में 93 और नंगल में सात किमी सीवर लाइनों की होगी सफाई मंत्री अनुसार जालंधर में 108 किलोमीटर सीवर लाइन और 47 हाटस्पाट, पटियाला में 93 किलोमीटर, लुधियाना में 40 किलोमीटर और 42 हाटस्पाट, बठिंडा में 55 किलोमीटर और 39 हाटस्पाट, मोहाली में 36 किलोमीटर, जीरकपुर में 14 किलोमीटर और 15 हाटस्पाट, खरड़ में 11 किलोमीटर और 11 हाटस्पाट, धूरी में सात किलोमीटर और तीन हाटस्पाट, कोटकपूरा में 21 किलोमीटर तथा नंगल में सात किलोमीटर सीवर लाइनों की सफाई की जा रही है। जेई से एसई स्तर तक तय होगी जवाबदेही हरजोत बैंस ने कहा कि स्थानीय निकायों और सीवरेज बोर्ड के जेई तथा अन्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुपर सक्शन मशीनों और हाई-कैपेसिटी जेटिंग उपकरणों की तैनाती की गई है। अभियान की प्रगति की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से रोजाना की जाएगी और जेई से लेकर एसई स्तर तक जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों को मैदान में रहने के निर्देश दिए गए हैं और विधायकों व नगर परिषद प्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ा गया है ताकि इस बार लोगों को जलभराव, सीवर बैकफ्लो और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों से राहत मिल सके।

दोस्ती से सियासी टकराव तक: भगवंत मान और रवनीत बिट्टू के बीच बढ़ी जुबानी जंग

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में कभी गहरी दोस्ती के लिए चर्चित रहे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच अब सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री मान ने मीडिया से बातचीत में बिट्टू पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि वह जल्द ही अपना मंत्री पद और राज्यसभा सीट दोनों गंवा सकते हैं। भगवंत मान ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने रवनीत बिट्टू को विधानसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने के लिए कहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इसी वजह से वह कह रहे हैं कि बहुत हो गया राज्यसभा और लोकसभा।” राजनीतिक गलियारों में यह बयान इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि मान और बिट्टू कभी बेहद करीबी मित्र माने जाते थे। आम आदमी पार्टी के 2022 में सत्ता में आने और भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही दोनों नेताओं के बीच अच्छे संबंध थे। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच निजी और राजनीतिक मुद्दों पर नियमित बातचीत होती थी। हालांकि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती गईं और अब आम आदमी पार्टी तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का असर उनके व्यक्तिगत संबंधों पर भी दिखाई देने लगा है। दोनों नेताओं के बीच तनाव उस समय खुलकर सामने आया जब हाल ही में हुए शहरी निकाय चुनावों के दौरान रवनीत बिट्टू संगरूर और धूरी पहुंचे। उन्होंने भाजपा नेता प्रोफेसर ओंकार सिंह का समर्थन किया, जिन्हें चुनावी क्षेत्र में कथित रूप से नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था। प्रोफेसर ओंकार सिंह कभी भगवंत मान के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद मान ने उन्हें अपना ओएसडी नियुक्त किया था, लेकिन बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद ओंकार सिंह भाजपा में शामिल हो गए और धूरी क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करने लगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा क्षेत्र धूरी में रवनीत बिट्टू द्वारा ओंकार सिंह का समर्थन करना मान को पसंद नहीं आया, जिसके बाद दोनों नेताओं के संबंधों में खटास और बढ़ गई। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यह सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। कभी दोस्ती के लिए मिसाल माने जाने वाले भगवंत मान और रवनीत बिट्टू अब पंजाब की राजनीति में अलग-अलग मोर्चों पर आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

पंडोरी की तलाश में पहुंची पुलिस, देर रात छापेमारी के बाद खाली हाथ लौटी टीम

अमृतसर  शिरोमणि अकाली दल की बीसी विंग के प्रधान एवं पार्षद इंद्रजीत सिंह पंडोरी के निवास पर बीती रात करीब ढाई बजे पुलिस की कई टीमें पहुंचीं। चार पुलिस वाहनों में पहुंचे अधिकारियों ने पंडोरी के घर पहुंचे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि देर रात पुलिस कर्मियों ने घर पर पहुंचकर इंद्रजीत सिंह पंडोरी के बारे में पूछताछ की। जब परिवार के सदस्य बाहर आए तो उन्होंने पुलिस को बताया कि पंडोरी घर पर नहीं हैं। इसके बाद पुलिस टीम बिना किसी कार्रवाई के वहां से लौट गई। सूत्रों के अनुसार पुलिस इंद्रजीत सिंह पंडोरी को हिरासत में लेने के उद्देश्य से पहुंची थी, लेकिन उनके घर पर नहीं मिलने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि पुलिस किस मामले में उन्हें हिरासत में लेने पहुंची थी, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह मजीठा में शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के समर्थक जोबनजीत सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में मजीठिया अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और उसे पुलिस हिरासत से छुड़वा लिया था।

बारिश से पहले एक्शन मोड में सरकार, 1400 हॉटस्पॉट और 2200 किमी सीवर नेटवर्क होगा दुरुस्त

चंडीगढ़. मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने राज्यभर में अब तक का सबसे बड़ा सीवरेज सफाई अभियान शुरू किया है। स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बुधवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वर्षा शुरू होने से पहले पंजाब के सभी शहरों और कस्बों में 2,200 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनों की सफाई तथा 1,400 पुराने सीवर ओवरफ्लो हाटस्पाट्स को दुरुस्त किया जाएगा। बैंस ने बताया कि इस अभियान के तहत 800 किलोमीटर मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों और 1,400 किलोमीटर मोहल्लों की शाखा सीवर लाइनों की सफाई की जाएगी। विभाग ने ऐसे 1,400 स्थानों की पहचान की है जहां हर वर्ष मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो की समस्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने इस बार स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है कि पंजाब के किसी भी शहर या कस्बे में सीवर ओवरफ्लो नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। पटियाला में नंगल में होगी सफाई मंत्री अनुसार जालंधर में 108 किलोमीटर सीवर लाइन और 47 हाटस्पाट, पटियाला में 93 किलोमीटर, लुधियाना में 40 किलोमीटर और 42 हाटस्पाट, बठिंडा में 55 किलोमीटर और 39 हाटस्पाट, मोहाली में 36 किलोमीटर, जीरकपुर में 14 किलोमीटर और 15 हाटस्पाट, खरड़ में 11 किलोमीटर और 11 हाटस्पाट, धूरी में सात किलोमीटर और तीन हाटस्पाट, कोटकपूरा में 21 किलोमीटर तथा नंगल में सात किलोमीटर सीवर लाइनों की सफाई की जा रही है। जेई से एसई स्तर तक जवाबदेही हरजोत बैंस ने कहा कि स्थानीय निकायों और सीवरेज बोर्ड के जेई तथा अन्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुपर सक्शन मशीनों और हाई-कैपेसिटी जेटिंग उपकरणों की तैनाती की गई है। अभियान की प्रगति की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से रोजाना की जाएगी और जेई से लेकर एसई स्तर तक जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों को मैदान में रहने के निर्देश दिए गए हैं और विधायकों व नगर परिषद प्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ा गया है ताकि इस बार लोगों को जलभराव, सीवर बैकफ्लो और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों से राहत मिल सके।

अभिभावकों को राहत: पंजाब में स्कूल फीस वृद्धि पर लगी सीमा, CM मान ने किया ऐलान

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य के निजी स्कूल अब सालाना पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी, साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में अमृतसर में फीस को लेकर सामने आई दुखद घटना के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। बच्चों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिन स्कूलों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उनकी जांच कर अतिरिक्त वसूली गई रकम अभिभावकों के खातों में रिफंड करवाई जाएगी। इस संबंध में नया कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जो राज्य के सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा। मान ने स्पष्ट किया कि पांच प्रतिशत की सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी। स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य शुल्क और फंड भी इसके दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के लिए अपनाए जाने वाले अन्य रास्तों को बंद करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत फीस नियमन संबंधी कानून प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका, जिससे कई स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने का अवसर मिला। नई व्यवस्था शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। निगरानी के लिए बनेगी रेगुलेटरी बाॅडी फीस वृद्धि संबंधी शिकायतों की निगरानी और जांच के लिए रेगुलेटरी बॉडी का गठन किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगी कि फीस में बढ़ोतरी केवल वास्तविक खर्च और विकास कार्यों के आधार पर हो तथा संस्थान मुनाफाखोरी न करें। सरकार निजी स्कूलों के वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की कमेटी स्कूलों के पिछले तीन से पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई कानून के उल्लंघन पर पहली बार 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर जुर्माना बढ़कर दो लाख रुपये तक हो सकता है। तीसरी बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता या संबद्धता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष फीस वृद्धि को चुनौती भी दे सकेंगे।