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स्कूल में हेड टीचर को अचानक सीने में उठा दर्द, पानी पीते ही गिरे और गई जान

लुधियाना. सरकारी प्राइमरी स्कूल हैबोवाल खुर्द में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल के हेड टीचर हरजीत ग्रेवाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद वह पानी पीते समय अचानक नीचे गिर पड़े। स्कूल के अध्यापक उन्हें तुरंत नजदीकी क्लीनिक लेकर गए, जहां से उन्हें दयानंद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, हरजीत ग्रेवाल मंगलवार को रोजाना की तरह स्कूल पहुंचे थे। उन्होंने सुबह प्रार्थना सभा में भी हिस्सा लिया। इसके बाद कुछ दफ्तरी काम निपटाया और कक्षाएं भी लीं। स्कूल के अध्यापकों के मुताबिक, वह सामान्य नजर आ रहे थे और किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हो रही थी। बाद में वह स्कूल में राउंड पर निकले। इस दौरान वह विद्यार्थियों से बातचीत कर रहे थे। अचानक उन्होंने सीने में दर्द होने की शिकायत की।  विद्यार्थियों ने पिलाया पानी वहां मौजूद विद्यार्थियों और अध्यापकों ने उन्हें पानी दिया। पानी पीने के दौरान ही वह अचानक नीचे गिर पड़े। इसके बाद स्कूल में मौजूद अध्यापकों ने उन्हें संभाला और तत्काल नजदीकी क्लीनिक पहुंचाया। क्लीनिक में प्राथमिक जांच के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें दयानंद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। अध्यापक उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। ड्रग जनगणना ड्यूटी के दौरान हुआ था हमला बताया जा रहा है कि हरजीत ग्रेवाल पहले ड्रग जनगणना ड्यूटी के दौरान हमले का भी शिकार हुए थे। ड्यूटी के दौरान उन पर चाकू से हमला किया गया था, जिसमें उन्हें चोटें आई थीं। हालांकि मंगलवार को हुई मौत का संबंध उस घटना से था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। स्कूल के अध्यापकों ने बताया कि हरजीत ग्रेवाल नियमित रूप से स्कूल में सक्रिय रहते थे। वह राउंड के दौरान बच्चों से बातचीत करते और उनकी गतिविधियों पर नजर रखते थे। मंगलवार को भी वह सामान्य तरीके से अपने काम में लगे हुए थे। अचानक हुई उनकी मौत से स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों में शोक का माहौल है।

चंडीगढ़ स्टेशन के पुनर्निर्माण से रेल यातायात प्रभावित, 12 ट्रेनें कैंसिल; कई का संचालन मोहाली से

चंडीगढ़ चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण के कारण यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। रेलवे ने निर्माण कार्य के लिए 36 दिन का ब्लॉक मंजूर किया है। यह काम तीन चरणों में होगा। इस दौरान स्टेशन पर पिलर मजबूत करने और फुट ओवरब्रिज पर छत डालने का काम किया जाएगा। निर्माण कार्य के चलते चंडीगढ़ और कालका से चलने वाली 12 ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कई ट्रेनों को चंडीगढ़ के बजाय अंबाला और साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) से चलाया जाएगा। कुछ ट्रेनों को चंडीगढ़-अंबाला के बीच आंशिक रूप से रद्द कर शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। इसके अलावा, कई ट्रेनों के प्लेटफॉर्म भी बदले गए हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निर्माण एजेंसी अहलूवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स को एक महीने के भीतर दूसरी बार अंबाला मंडल से ब्लॉक की मंजूरी मिली है। इस बार 36 दिन का ब्लॉक तीन हिस्सों में लगाया जा रहा है। प्रत्येक चरण 12 दिन का होगा। रेलवे की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहला ब्लॉक 10 से 21 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद दूसरा चरण 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक और तीसरा चरण 4 से 15 अक्टूबर तक चलेगा। इन 36 दिनों के दौरान अलग-अलग चरणों में निर्माण कार्य किया जाएगा। काम की वजह से स्टेशन के प्लेटफार्म और ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ेगा। 6 ट्रेनें अंबाला से चलेंगी ब्लॉक के दौरान रेलवे ने 6 ट्रेनों को अंबाला से संचालित करने का फैसला किया है। वहीं, 8 ट्रेनों को साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) रेलवे स्टेशन से चलाया जाएगा। इससे चंडीगढ़ से यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए मोहाली या अंबाला तक पहुंचना पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के संचालन स्टेशन और समय की जानकारी रेलवे से जरूर जांच लें। 20 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले ब्लॉक के दौरान चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की साफ-सफाई और धुलाई के लिए भी प्लेटफार्म में बदलाव किया गया है। 10 से 21 सितंबर तक करीब 20 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदले गए हैं। रेलवे के अनुसार, प्लेटफार्म नंबर 1 और 2 से चलने वाली कुछ ट्रेनों को दूसरे प्लेटफार्म से रवाना किया जाएगा। प्लेटफार्म की जानकारी दोबारा जांचनी होगी 4 से 15 अक्टूबर तक इन ट्रेनों के लिए प्लेटफार्म नंबर 3, 4 और 6 का इस्तेमाल किया जाएगा। बदलाव के कारण यात्रियों को स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन के प्लेटफार्म की जानकारी दोबारा जांचनी होगी। ब्लॉक के अलग-अलग चरणों में अन्य ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया जाएगा। कुछ ट्रेनों को चंडीगढ़ की बजाय मोहाली या अंबाला से चलाया जाएगा। यात्रियों के लिए सितंबर-अक्टूबर रहेगा परेशानी वाला चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण का काम लंबे समय से चल रहा है। स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने के लिए अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य किया जा रहा है। अब पिलर की फिलिंग और कॉनकोर्स से जुड़े फुट ओवरब्रिज पर रूफ डालने के काम के कारण रेलवे को बड़े स्तर पर परिचालन में बदलाव करना पड़ रहा है। 36 दिन के इस ब्लॉक के कारण सितंबर से अक्टूबर के बीच चंडीगढ़ से ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर स्टेशन पहुंचना होगा। जिन यात्रियों की ट्रेन मोहाली या अंबाला से चलेगी, उन्हें वहां तक पहुंचने के लिए भी अतिरिक्त समय रखना पड़ेगा।

पंजाब के DA-DR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का रुख, कर्मचारियों के बाद सरकार ने खटखटाया SC का दरवाजा

चंडीगढ़. पंजाब के करीब 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और करीबन 4 लाख पेंशनर्स पिछले तीन वर्ष से महंगाई भत्ते के इंतजार में हैं। लंबित डीए और डीआर के भुगतान का मामला सड़क से हाई कोर्ट तक पहुंचने के बाद अब यह कर्मचारियों और सरकार के बीच सबसे बड़ा टकराव का कारण बन गया है। इससे सरकार के खजाने पर 25 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। कर्मचारी इसे अपना हक मान रहे हैं लेकिन सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों को पहले से ही ज्यादा वेतन मिल रहा है। 1. विवाद क्या है? केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि पंजाब राज्य कर्मचारियों को 42 प्रतिशत मिल रहा है। मुलाजिम संगठनों का कहना है कि इससे भी बड़ी विसंगति ये है कि पंजाब सरकार में ही तैनात आइएएस, आइपीएस, आइएफएस व ज्यूडिशियल अधिकारियों को 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है और बाकी सभी कर्मचारियों को 42 प्रतिशत। इसे दोहरा मापदंड बताते हुए कर्मचारी अदालत में गए। कर्मचारी यूनियनों के मुताबिक आप सरकार मार्च 2022 में आई, लेकिन उसने तब से सिर्फ एक ही डीए किस्त जारी की है। जुलाई-दिसंबर 2022 की 4 प्रतिशत किस्त, जो दिसंबर 2023 में एक महीने से ज्यादा चली हड़ताल के बाद दी गई। जनवरी 2023 के बाद से सरकार ने कोई किस्त जारी नहीं की, इसलिए 1 जनवरी 2026 तक बकाया 18 प्रतिशत हो गया है। 2. 8 अप्रैल 2026 हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता निर्मल सिंह धनोआ व अन्य की याचिका पर पंजाब सरकार को आदेश दिया कि सभी बकाया डीए/डीआर को 30 जून 2026 तक जारी किया जाए और कर्मचारियों को आइएएस-आइपीएस के बराबर डीए दिया जाए। इससे करीब 7.5 लाख कर्मचारियों को फायदा होना था। पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, वित्तीय हालत खराब होने का हवाला दिया तो कोर्ट ने खारिज कर दिया। 3. 3 अगस्त 2026 चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी। आदेश दिया कि 15 दिन के अंदर सारा बकाया चुकाओ। मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। 4. डेडलाइन के बाद सरकार का स्टैंड डीए भुगतान की डेडलाइन 17 अगस्त को खत्म हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। उल्टा 18 अगस्त को वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र भेजकर कहा कि धनोआ केस के आधार पर तय हुए मामलों को वित्त विभाग की मंजूरी के बिना लागू न किया जाए। इसी पत्र को आधार बनाकर कर्मचारियों ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना की कार्रवाई करने का आग्रह किया। डेडलाइन खत्म होते ही 17 अगस्त को कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर कर दी। 21 अगस्त को सुनवाई में सरकार ने समय मांगा, कोर्ट ने अगली तारीख 27 सितंबर 2026 तय की है। 5. कर्मचारी फिर कर सकते हैं हड़ताल कर्मचारियों का सड़क पर आंदोलन तेज है। कर्मचारी संगठनों ने 27 अगस्त को महाहड़ताल की थी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि हड़ताल और बातचीत इकट्ठे नहीं हो सकती। सरकार ने नोटिस जारी किया तो कर्मचारी संगठनों ने लुधियाना में बैठक करके अगली रणनीति के तहत अब सात सितंबर तक समय दिया है। कहा है कि शो-कॉज नोटिस वापस न हुए तो 8 सितंबर को मास कैजुअल लीव लेकर हड़ताल की जाएगी और मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे। अब आगे क्या पंजाब सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है। अब कर्मचारी संगठनों ने पहले से ही दायर की गई केविएट की वजह से दोनों पक्षों को सुनवाई का मौका मिलेगा और उसके बाद तय होगा सरकार की एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट किस तरह आगे बढ़ती है।

सरहिंद नहर में दरार से मचा हड़कंप, रूपनगर के गांवों में भरा पानी; अलर्ट जारी

रूप नगर. श्री चमकौर साहिब के नजदीकी गांव भैरों माजरा के पास बुधवार सुबह सरहिंद नहर अचानक एक किनारे से टूट गई। इससे आसपास के कई गांवों में पानी घुसने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। नहर फटने के कारण तीन मोटरसाइकिलें पानी के तेज बहाव में बह जाने की भी सूचना है। हालांकि, इस घटना में जानी नुकसान होने से बचाव हो गया। जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासियों ने कुछ दिन पहले नहर के किनारे छोटी-सी खड्ड से पानी रिसता हुआ देखा था। इसकी सूचना संबंधित विभाग को भी दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग ने समय रहते मौके पर पहुंचकर रिसाव को बंद करने के लिए कार्रवाई की होती तो नहर का किनारा टूटने से रोका जा सकता था। बताया जा रहा है कि बाद में लोगों की मदद से मोटरसाइकिल बचा ली गईं। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक किनारा टूटा और पानी तेजी से आसपास के क्षेत्र में फैलने लगा। इसी दौरान गांव भैरों माजरा के कुछ युवक जिम जाने के लिए मोटरसाइकिलों पर निकले थे। अचानक पानी के तेज बहाव और जमीन धंसने के कारण वे गिर पड़े और उनकी मोटर साइकिलें हाथ से छूटकर पानी में बह गईं। युवकों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित बचा लिया। घटना के बाद इलाके में संबंधित विभाग के प्रति लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समय रहते विभाग को स्थिति से अवगत करवा दिया था, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उधर, घटना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज जसवीर सिंह गढ़ी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर नहर के किनारे को भरने तथा पानी के बहाव को रोकने के प्रयासों में जुट गए। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

अनुराग वर्मा पर ED का शिकंजा, ₹348 करोड़ के CLU मामले में फिर समन

जालंधर. पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जमीन घोटाले से जुड़े एक मनी लांन्ड्रिंग मामले में फिर समन जारी कर सात सितंबर को जालंधर स्थित जोनल कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले ईडी ने अनुराग वर्मा को 31 अगस्त को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, वह उस दिन ईडी के सामने पेश नहीं हो सके थे। उन्होंने जांच एजेंसी से समय बढ़ाने की मांग करते हुए अनुरोध किया था कि मांगे गए जरूरी दस्तावेज और रिकार्ड इकट्ठा करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। उनकी इस मांग के बाद अब ईडी ने उन्हें 7 सितंबर के लिए नई तारीख दी है। यह मामला मोहाली स्थित ‘सनटेक सिटी’ और ‘एल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हुई कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। ईडी द्वारा लगभग 348 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। अनुराग वर्मा वर्तमान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात हैं, लेकिन जिस समय ये कथित गड़बड़ियां हुई थीं, उस समय वह मकान निर्माण और शहरी विकास विभाग के प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे थे। जांच के दायरे में अधिकारियों की भूमिका जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि निजी बिल्डरों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जमीन के उपयोग में बदलाव की मंजूरी कैसे दी गई। प्रोजेक्ट्स के स्वीकृत लेआउट में गैर-कानूनी बदलाव करने की अनुमति देते समय किन सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया। क्या नियमों को दरकिनार करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों की क्या भूमिका थी।

पंजाब में खेलों का महासंग्राम, 10 लाख खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे; QR कोड से होगा पंजीकरण

पटियाला पंजाब सरकार ने ‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। खेलों का चौथा सत्र पांच सितंबर को बठिंडा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम से शुरू होगा। इसमें करीब 10 लाख खिलाड़ी 38 खेलों में हिस्सा लेंगे। पहली बार चार पैरा खेल भी प्रतियोगिता का हिस्सा होंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क और आसान बनाई गई है। खेल विभाग ने पहली बार क्यूआर कोड आधारित पंजीकरण की सुविधा शुरू की है। खिलाड़ी किसी भी समय और कहीं से भी महज 15 सेकंड में पंजीकरण कर सकेंगे। पंजीकरण खेल विभाग की वेबसाइट के माध्यम से भी किया जा सकता है। इस सत्र में 14 वर्ष से 70 वर्ष से अधिक आयु तक के नौ आयु वर्गों में मुकाबले होंगे। पैरा खेलों में एथलेटिक्स, पावरलिफ्टिंग, बैडमिंटन और व्हीलचेयर बास्केटबॉल शामिल हैं। राज्य स्तरीय पदक विजेताओं को स्वर्ण के लिए 10 हजार रुपये, रजत के लिए सात हजार और कांस्य के लिए पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। प्रतियोगिताओं का समापन 29 नवंबर को पटियाला में होगा।  9 आयु वर्ग, 16 जिलों में राज्य स्तरीय आयोजन इस सीजन में 14 साल से लेकर 70 साल से अधिक उम्र तक के नौ आयु वर्गों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। खेल पंजाब के सभी 153 ब्लॉकों में कराए जाएंगे, जिला स्तरीय मुकाबले 23 जिलों में होंगे और राज्य स्तरीय खेल 16 जिलों में आयोजित होंगे। खेलों का समापन 29 नवंबर को पटियाला में होगा। खास बात यह है कि पहली बार लड़कों और लड़कियों, दोनों के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया है, ताकि उभरते खिलाड़ियों को बड़ा मंच मिल सके। विजेताओं के लिए आकर्षक इनाम राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतने वालों को 10,000 रुपये, रजत के लिए 7,000 रुपये और कांस्य के लिए 5,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। सीएम मान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे आयोजन को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। पहली बार लड़के-लड़कियों का क्रिकेट पहली बार लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया है। प्रतियोगिताएं पंजाब के सभी 153 ब्लॉकों और 23 जिलों में होंगी। राज्य स्तरीय मुकाबले 16 जिलों में आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों का उद्देश्य गांवों, कस्बों और शहरों की छिपी प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।  अमृतसर जिले में ‘खेडां वतन पंजाब दियां-2026’ के ब्लॉक स्तरीय मुकाबले 8 सितंबर से 17 सितंबर तक दो चरणों में करवाए जाएंगे। इन प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी नेशनल स्टाइल, कबड्डी सर्कल स्टाइल, वॉलीबॉल स्मैशिंग, वॉलीबॉल शूटिंग और खो-खो के मुकाबले शामिल होंगे। इस वर्ष टेनिस बॉल क्रिकेट को प्रदर्शन खेल के तौर पर भी शामिल किया गया है। पहले चरण में पांच ब्लॉकों में मुकाबले पहले चरण में 8 से 11 सितंबर तक चौगावां, तरसिक्का, अटारी, वेरका और अजनाला ब्लॉक में मुकाबले होंगे। वहीं दूसरे चरण में 14 से 17 सितंबर तक म्युनिसिपल कॉरपोरेशन, रईया, मजीठा, जंडियाला गुरु और हरशा छीना ब्लॉक में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेल मुकाबलों में भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी पंजाब खेल विभाग की वेबसाइट (https://sports.punjab.gov.in) पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। खिलाड़ियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना पंजीकरण करवाकर अधिक से अधिक संख्या में खेलों में हिस्सा लें और अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करें।

कनाडा से भारत पैसे भेजना होगा आसान, UPI के जरिए कम खर्च में होगा फास्ट ट्रांसफर

जालंधर  .कनाडा में बसे पंजाबियों और भारत के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं। शिक्षा, कारोबार, निवेश और धन भेजने से यह रिश्ता और गहरा हुआ है। भारत और कनाडा यूपीआई के माध्यम से सीमा पार धन भेजने पर बात कर रहे हैं। दुकानदारों को सीधे भुगतान की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है। कनाडा में भारतीय समुदाय की आर्थिक और सामाजिक मौजूदगी काफी बड़ी है। वर्ष 2024 में 5 लाख 10 हजार 235 भारतीय नागरिक अध्ययन-अनुमति धारक थे। कनाडा की 2025 की आव्रजन रिपोर्ट के अनुसार, भारत से कुल 1,25,530 लोगों को स्थायी निवास मिला। इनमें 94,105 आर्थिक श्रेणी में और 31,425 परिवार पुनर्मिलन श्रेणी में थे।  भारत-कनाडा की पहली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन ने वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने सीमा पार धन भेजने और दुकानदारों को सीधे भुगतान के अवसर तलाशने पर जोर दिया। कनाडा में भागीदार भुगतान सेवा प्रदाताओं के माध्यम से यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी बात हुई। यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। दोनों देशों को तकनीकी, नियम-कायदों, सुरक्षा और विदेशी मुद्रा पहलुओं पर काम करना होगा।  कनाडा में भारतीय समुदाय की उपस्थिति कनाडा में वर्ष 2025 के अंत में करीब 6 लाख 91 हजार 215 अध्ययन-अनुमति धारक मौजूद थे। भारत विदेशी विद्यार्थियों के प्रमुख स्रोत देशों में बना रहा। स्थायी निवास के मामले में भी भारत कनाडा के महत्वपूर्ण स्रोत देशों में शामिल है। पंजाबी समुदाय की कारोबारी मौजूदगी भी कनाडा में मजबूत है। पंजाबी वाणिज्य मंडल के नेटवर्क में 2,500 से अधिक सदस्य और 200 से अधिक कारोबार जुड़े हैं। कनाडा सरकार पंजाबी कारोबारियों की अलग अधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं कराती है। यूपीआई से परिवारों और विद्यार्थियों को लाभ इस पहल का सीधा लाभ कनाडा में रहने वाले भारतीयों को मिलेगा। वे नियमित रूप से भारत में अपने परिवारों को पैसा भेजते हैं। यूपीआई आधारित भुगतान व्यवस्था से धन भेजने की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और कम खर्चीली हो सकती है। वर्तमान में बैंकिंग माध्यमों और धन हस्तांतरण सेवाओं में शुल्क लगता है। कनाडा में पढ़ रहे भारतीय विद्यार्थियों के परिवारों के लिए यह बड़ी राहत होगी। फीस, किराया या आपात स्थिति में धन भेजना आसान और तेज हो सकता है। कारोबारियों और भारत के लिए अवसर यूपीआई का फायदा केवल परिवारों को धन भेजने तक सीमित नहीं रहेगा। भारत से कनाडा जाने वाले विद्यार्थी, पर्यटक और कारोबारी भारतीय बैंक खाते से भुगतान कर सकेंगे। पंजाबी कारोबारियों के लिए भी यह पहल महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। भारत से सामान खरीदने, सेवाओं का भुगतान करने या कारोबार से जुड़े भुगतान आसान होंगे। सीए दिनेश सरना ने कहा कि यूपीआई से पंजाबियों के परिवार और कारोबार दोनों को फायदा होगा। यह भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 

DA-DR बकाया भुगतान का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मान सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की याचिका

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तीन अगस्त के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में कहा है कि वह राज्य कर्मचारियों को समान श्रेणी के केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर टेक-होम (हाथ में आने वाला) वेतन देने के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने को तैयार है। हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के समान डीए प्रतिशत को यांत्रिक रूप से लागू करने का विरोध किया है। राज्य का तर्क है कि पंजाब में कई पदों पर मूल वेतन केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक है। ऐसे में केवल डीए प्रतिशत की तुलना से वास्तविक समानता नहीं हो सकती। सरकार ने सात प्रतिनिधि श्रेणियों के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे हैं। इनमें से पांच में 42 फीसदी डीए के बावजूद पंजाब कर्मचारियों की कुल परिलब्धियां संबंधित केंद्रीय कर्मचारियों से अधिक बताई गई हैं।  सरकार का कहना है कि उसने बकाया राशि से इन्कार नहीं किया है और 13 फरवरी 2025 को मंजूर लिक्विडेशन प्लान के तहत चरणबद्ध भुगतान किया जा रहा है। राज्य ने कहा कि केंद्रीय दर के अनुरूप डीए करने पर सालाना करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पंजाब का वेतन-पेंशन खर्च राजस्व प्राप्तियों का करीब 51 फीसदी है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और मौजूदा भुगतान योजना जारी रखने की अनुमति मांगी है। 

Punjab Prisons में नशे पर हाईकोर्ट सख्त, 44% कैदी नशे की गिरफ्त में; हर सप्ताह होगी सुनवाई

चंडीगढ़  पंजाब सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की जेलों में 35,449 कैदियों में से 15,768 नशे पर निर्भर हैं। यानी करीब 44 प्रतिशत कैदी नशे के आदी हैं। हाईकोर्ट ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे गंभीर स्थिति और क्या होगी। सरकार को कैदियों को नशे की निर्भरता से बाहर निकालने के लिए प्रभावी नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों में बड़ी संख्या युवाओं की है। ऐसे में सवाल है कि उन्हें इस निर्भरता से बाहर निकालने के लिए क्या नीति अपनाई जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार अमृतसर जेल में 4,918 कैदियों में से 2,124 नशे पर निर्भर हैं। बठिंडा जेल में 1,978 कैदियों में 1,064 नशे के आदी हैं। एक जेल में 69% कैदी उपचार के तहत मामला हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद सुनवाई में आया। मानसा सत्र मंडल के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट में जेलों में नशे की समस्या और उपचार की स्थिति सामने आई थी। एक जेल में 767 कैदियों में 530 बाह्य रोगी ओपिओइड उपचार केंद्र से जुड़े मिले। यह संख्या करीब 69 प्रतिशत है। अदालत ने कहा कि नशे पर निर्भर कैदियों को अचानक दवा नहीं मिलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। हालांकि इसका समाधान तलाशना होगा। कैदियों को हमेशा इस स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता।  हर सप्ताह होगी सुनवाई हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की हर सप्ताह सुनवाई होगी। हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से उनकी जेलों में नशे पर निर्भर कैदियों का ब्योरा मांगा गया है। केंद्र सरकार को भी सहयोग करने को कहा गया है। अदालत ने केंद्र को पीजीआईएमईआर निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक सहायता लेने के निर्देश दिए हैं। 

पंजाब के किसानों का चंडीगढ़ बॉर्डर पर धरना, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से डेरा; पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

 चंडीगढ़  मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज दूसरा दिन है। पंजाब के 32 किसान संगठनों की ओर से सात दिन के पक्के मोर्चे के ऐलान के बाद किसानों की संख्या में और इजाफा हुआ। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोर्चे पर पहुंच रहे हैं।  आईसर इंस्टीट्यूट से जगतपुरा की तरफ आने वाले मार्ग पर पुलिस ने एक तरफ का रास्ता बंद कर दिया है। सड़क के एक हिस्से से ही दोनों ओर का ट्रैफिक निकाला जा रहा है। इसके चलते वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले किसानों ने शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जाने वाली व्यस्त सड़क के एक किनारे अपने ट्रैक्टर-ट्रेलर खड़े कर दिए और धरने के लिए टेंट लगा लिए, जो 7 सितंबर तक चलेगा. जानकारी के अनुसार जैसे-जैसे शाम होगी, भीड़ बढ़ने की आशंका है क्योंकि सैकड़ों किसानों को राशन के साथ विरोध स्थल तक पहुंचाया जा रहा है।  चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एसकेएम को सेक्टर 48 में एक विरोध स्थल आवंटित किया गया है, जहां प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने के लिए एक विशाल मंच बनाया गया था. इस आंदोलन की वजह से हवाई अड्डे की ओर जाने वाले लोगों को सात दिवसीय आंदोलन की शुरुआत के साथ ही मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि प्रदर्शनकारियों को दो लेन वाले राजमार्ग के एक तरफ अपने वाहन पार्क करने की अनुमति दी गई है।  मोहाली के उपायुक्त कोमल मित्तल ने कहा कि वे सड़क पर दोतरफा यातायात के एक तरफ को खुला रखने की कोशिश करेंगे. एसकेएम में 32 किसान संगठन शामिल हैं, जिनमें भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) राजवाल, कीर्ति किसान यूनियन और पंजाब किसान यूनियन शामिल हैं. हालांकि, एसकेएम की सहयोगी सदस्य बीकेयू उगराहन इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है।  एसकेएम अन्य मांगों के साथ-साथ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पंजाब की नदी के जल से संबंधित सभी पूर्व समझौतों को रद्द करने, भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में राज्य के प्रतिनिधित्व की बहाली, बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने और 2024 के आपदा प्रबंधन अधिनियम को वापस लेने की मांग कर रहा है।  पंजाब में, बीकेयू (उग्राहन) ने राज्य और केंद्र सरकारों के किसान विरोधी निर्णयों और नीतियों के खिलाफ 30 अगस्त को 17 जिलों में उपायुक्तों के कार्यालयों के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. बीकेयू (उग्राहन) भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने, पंजाब की भूमि पूलिंग नीति को समाप्त करने, किरायेदार किसानों के स्वामित्व अधिकारों को समाप्त करने और किसानों और मजदूरों के लिए कृषि ऋणों की पूर्ण माफी की मांग कर रहा है।  32 किसान संगठनों के किसान पहुंचे मोर्चे पर पंजाब के 32 किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सात दिन तक चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है। मंगलवार बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे थे। सेक्टर-48 के पास ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या बढ़ने के बाद पार्किंग की जगह कम पड़ गई। किसानों के मुताबिक, वे अपने मुद्दों को लेकर पहुंचे हैं। वहीं, पुलिस ने सेक्टर-48 की तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही रोकने के लिए बैरियर लगाए हैं। 20 हजार से ज्यादा किसानों के पहुंचने का दावा किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने दावा किया कि मोर्चे में 20 हजार से ज्यादा किसान पहुंच चुके हैं। फेज-11 स्थित कैंडी होटल में किसान नेताओं की बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। फेज-11 से जगतपुरा तक सड़क के एक हिस्से पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। इसके चलते मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है। कई बड़े किसान नेता करेंगे संबोधित पक्के मोर्चे के दौरान किसान संगठनों के कई बड़े नेता मंच से किसानों को संबोधित करेंगे। इनमें बीकेयू-राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, बीकेयू-टोंग के अध्यक्ष हरविंदर सिंह रंधावा, बीकेयू-डकोंदा के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल, बीकेयू-कादियां के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियां, बीकेयू-मशहूर के अध्यक्ष रेशम सिंह और एसकेएम पंजाब के अध्यक्ष परमजीत सिंह समेत कई नेता शामिल हैं। इसके अलावा राजिंदर सिंह घुमान, कुलवंत सिंह राजेवाल और हरिंदर सिंह लखोवाल समेत अन्य किसान नेता भी मोर्चे में मौजूद हैं। सरकार से मांगों पर जवाब मांग रहे किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर सरकार को जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों पर अब एक-एक मीटर का हिसाब देना होगा। आंदोलन में भारत-अमेरिका कृषि समझौते का विरोध, पानी से जुड़े मुद्दों का समाधान, नए कानूनों को लेकर मांगें और 500 रुपए प्रति क्विंटल की मांग प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। किसान संगठनों का कहना है कि सात दिन के पक्के मोर्चे के दौरान सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बनाया जाएगा।