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Employment Report: रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे, 63 फीसदी कर्मचारी नियमित वेतनभोगी

लुधियाना पंजाब में रोजगार के मामले में लुधियाना सबसे आगे है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 57 प्रतिशत है, जो दिल्ली (41.2 प्रतिशत) और फरीदाबाद (44 प्रतिशत) से बेहतर है। नियमित वेतनभोगियों की हिस्सेदारी भी 63 प्रतिशत है, जो कई बड़े शहरों के बराबर या उनसे बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार लुधियाना में औद्योगिक गतिविधियां तेज होने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योगों में कुशल श्रमिकों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को देखते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं। लुधियाना में स्वरोजगार करने वालों का प्रतिशत 34.7 है जबकि आकस्मिक श्रमिक (कैजुअल लेबर) 2.3 प्रतिशत हैं। शहर की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो फरीदाबाद (4.9 प्रतिशत) और दिल्ली (5.3 प्रतिशत) से कम है। हालांकि महिलाओं की श्रम भागीदारी अब भी चिंता का विषय है। महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 22.8 प्रतिशत है। महिलाओं में बेरोजगारी दर 3.8 प्रतिशत जबकि पुरुषों में 3.4 प्रतिशत है। दिल्ली में महिलाओं की बेरोजगारी 8.4 प्रतिशत और पुरुषों की 4.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। अमृतसर में रोजगार की तस्वीर कमजोर रिपोर्ट के अनुसार अमृतसर में रोजगार की स्थिति लुधियाना के मुकाबले कमजोर है। यहां श्रमिक जनसंख्या अनुपात 45.8 प्रतिशत है जबकि पुरुषों में यह 69 प्रतिशत और महिलाओं में केवल 21.2 प्रतिशत है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सरकार रोजगार बढ़ाने के प्रयास कर रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी नहीं मिल पाए हैं। महिलाओं की श्रम भागीदारी यहां भी काफी कम बनी हुई है।  बेरोजगारी दर 8.7%, महिलाओं पर ज्यादा असर अमृतसर की कुल बेरोजगारी दर 8.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो लुधियाना से काफी अधिक है। पुरुषों में यह 7.6 प्रतिशत और महिलाओं में 12.3 प्रतिशत है। शहर में स्वरोजगार का प्रतिशत 43.9 है। स्वरोजगार में 49.2 प्रतिशत पुरुष और 25.9 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं आकस्मिक श्रमिकों की हिस्सेदारी 11.3 प्रतिशत है। रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं की रोजगार भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह अब भी संतोषजनक स्तर से काफी नीचे है।

क्या कांग्रेस छोड़ेंगे मनीष तिवारी? पंजाब चुनाव से पहले बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

चंडीगढ़. कांग्रेस सांस मनीष तिवारी की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सियासी महकमे में हड़कंप मच गया। सांसद ने कांग्रेस को लेकर गुरुवार को सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर किया उन्होंने लिखा कि…. "पंजाब के लिए नए वर्किंग प्रेसिडेंट और पोल पैनल की घोषणा की तो उसमें उनका नाम नहीं था। पार्टी द्वारा उन्हें संगठन के फेरबदल से बाहर कर दिया गया। पोल पैनल से जुड़े आर्टिकल पर रिएक्शन देते हुए तिवारी ने कहा कि काश उनके पास लोगों और संस्थाओं की इनसिक्योरिटी के लिए कोई एंटीडोट होता। काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की इनसिक्योरिटी का कोई इलाज होता! कांग्रेस ने मुझे पिछले 45 सालों में काफी कुछ दिया है और मैंने भी अपनी पूरी एडल्ट जिंदगी दशकों से कांग्रेस की सेवा में लगा दी है। क्या होगा, क्या होगा, जो होगा, वो होगा।" – मनीष तिवारी, चंडीगढ़ सांसद क्या है मामला? दरअसल, बुधवार को पंजाब विधानसभा 2027 चुनाव को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने संगठनात्मक नियुक्तियों का एलान किया था। इसमें चुनाव संबंधी समितियों के अध्यक्षों और सह-अध्यक्षों के नाम शामिल थे। वहीं, चंडीगढ़ से तीन बार सांसद और पंजाब के दिग्गज नेताओं में शामिल मनीष तिवारी को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। जिसके बाद आज उन्होंने एक्स पर यह टिप्पणी की। बता दें कि मनीष तिवारी अभी चंडीगढ़ से सांसद हैं। साल 2019 में वह पंजाब के आनंदपुर साहिब से और लुधियाना से भी सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस लिस्ट में इन नामों को मिली जिम्मेदारी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल की प्रेस रिलीज के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तुरंत असर से इन अपॉइंटमेंट्स को मंजूरी दे दी है। अनाउंसमेंट के मुताबिक, चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है, जबकि विजय इंदर सिंगला इलेक्शन मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरपर्सन होंगे। सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है, और अमर सिंह मैनिफेस्टो कमेटी को लीड करेंगे। पार्टी ने यह भी कन्फर्म किया कि अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि प्रताप सिंह बाजवा पंजाब में कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी के लीडर बने रहेंगे।

तेंदुओं के मानव बस्तियों में प्रवेश पर रोक, कलेसर में तैयार होंगे विशेष घास के मैदान

यमुना नगर. वन महोत्सव के दौरान तीन राज्यों की सीमा से सटे कलेसर नेशनल पार्क में इस बार केवल पौधे नहीं लगाए जाएंगे। जंगल को और बेहतर बनाने के लिए घास के खुले मैदान (ग्रासलैंड), ग्रीन कॉरिडोर और स्थायी जल स्रोत भी विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य तेंदुओं और दूसरे वन्यजीवों को जंगल में ही भोजन और पानी उपलब्ध कराना, उनका प्राकृतिक आवास मजबूत करना। इसके साथ ही उन्हें आबादी की ओर आने से रोकना है। 25 हजार एकड़ के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव विहार कलेसर में 50 तेंदुओं की मौजूदगी मानी जा रही है। उनकी बढ़ती संख्या को देखते हुए वन्य प्राणी विभाग ने जंगल के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से पांच से सात हेक्टेयर क्षेत्र में घास के मैदान विकसित करने की योजना बनाई है। इन मैदानों में हिरण, जंगली सूअर, खरगोश और सांभर जैसे शाकाहारी वन्यजीव बढ़ेंगे, जो तेंदुओं का प्राकृतिक शिकार हैं। इससे तेंदुओं को भोजन के लिए जंगल छोड़कर गांवों या आबादी की ओर जाने की जरूरत कम पड़ेगी। जलस्रोत भी बनेंगे कलेसर नेशनल पार्क उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क की मोहांड रेंज सहारनपुर उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सिम्बलबाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से ग्रीन कॉरिडोर के जरिये जुड़ा है। वन विभाग इन रास्तों से अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती करेगा। गांवों के पास सोलर फेंसिंग और मवेशियों के लिए मजबूत बाड़ लगाने की भी योजना है। जंगल में स्थायी जल स्रोत भी बनाए जाएंगे, ताकि गर्मी और सूखे के समय वन्यजीवों को पानी के लिए जंगल से बाहर न जाना पड़े।

थानों में कबाड़ बने 7,402 जब्त वाहन हटाए, पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने राज्यभर के पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े जब्त और लावारिस वाहनों के निपटारे के लिए चलाए गए विशेष अभियान में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू किए गए इस अभियान के तहत पिछले एक महीने में 7402 वाहनों का निपटारा किया गया है। इससे पुलिस थानों में वर्षों से जमा वाहनों के कारण बढ़ रहे दबाव में कमी आई है और थानों में जगह की समस्या से भी राहत मिलने लगी है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार अभियान शुरू होने से पहले राज्यभर के विभिन्न पुलिस थानों और यूनिटों में कुल 55,721 वाहन पुलिस हिरासत में थे। इसी दौरान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, संदिग्ध गतिविधियों और अवैध कामकाज के खिलाफ चलाए गए सघन जांच अभियान के चलते 3355 और वाहन जब्त किए गए। इसके बाद कुल संख्या बढ़कर 59,076 तक पहुंच गई थी। हालांकि, एक महीने के भीतर 7402 वाहनों का निपटारा होने के बाद अब पुलिस हिरासत में कुल 51,674 वाहन शेष रह गए हैं। लंबित मामलों का हो रहा निपटारा डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ पुलिस प्रशासन लंबित मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर निपटा रहा है। उन्होंने कहा कि वाहनों की सघन जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन इसके साथ जब्त वाहनों के मामलों में कानूनी प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। उन्होंने बताया कि बेहतर समन्वय और पेशेवर फॉलोअप के कारण कम समय में बड़ी संख्या में वाहनों का निपटारा संभव हो सका। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अभी भी 8121 वाहनों से संबंधित आवेदन कानूनी जांच के अधीन हैं। इसके अलावा मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धारा 52ए के तहत 1276 आवेदन ऐसे हैं जिनमें इन्वेंट्री और फोटोग्राफी के कानूनी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। इन मामलों में अदालतों और संबंधित अधिकारियों की मंजूरी के बाद आगे की कार्रवाई होगी। जालंधर पुलिस ने हटाए सर्वाधिक वाहन जिला और कमिश्नरेट स्तर पर भी इस अभियान का व्यापक असर देखने को मिला। जालंधर पुलिस कमिश्नरेट ने 5993 वाहनों में से 779 वाहनों का निपटारा किया। मोगा पुलिस ने 2367 में से 697 वाहन हटाए, जबकि बठिंडा में 3008 में से 631 वाहनों का निपटारा किया गया। फिरोजपुर में 2649 में से 586 वाहन, लुधियाना ग्रामीण में 1618 में से 538 वाहन तथा लुधियाना कमिश्नरेट में 7471 में से 460 वाहनों का निपटारा किया गया। इसके अलावा तरनतारन में 2033 में से 302 और फाजिल्का में 2216 में से 283 वाहनों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रिलीज या डिस्पोज किया गया। और तेज होगी मुहीम स्पेशल डीजीपी ला एंड आर्डर प्रवीण कुमार सिन्हा ने कहा कि पंजाब पुलिस का लक्ष्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावी और समयबद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में हिरासत में खड़े वाहनों की रिहाई और निपटारे की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा, ताकि पुलिस थानों में अनावश्यक रूप से खड़े वाहनों का बोझ कम हो और पुलिस संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

पंजाब के फिरोजपुर में नहर कटाव से 400 एकड़ फसल डूबी, भारी नुकसान से किसान परेशान

फिरोजपुर. फिरोजपुर जिले के ममदोट क्षेत्र में गुरुवार को लक्ष्मण नहर में कटाव आने से सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। गांव राहू के हिठाड़ के निकट नहर टूटने के बाद तेज बहाव का पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे करीब 400 एकड़ में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई। अचानक खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। घटना के बाद प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में गहरा रोष देखने को मिला। ग्रामीणों के अनुसार, नहर में अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पानी का दबाव बढ़ गया और नहर में कटाव आ गया। इसके बाद तेज बहाव का पानी सीधे खेतों में पहुंच गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में खेत पानी से भर गए और धान की फसल डूब गई। किसानों का कहना है कि कई खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। किसानों ने सिंचाई विभाग पर लगाए आरोप प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी देने के बावजूद काफी देर तक सिंचाई विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने यह भी कहा कि कटाव वाले स्थान पर तत्काल मरम्मत शुरू नहीं होने से पानी लगातार खेतों में फैलता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि धान के मौसम में लक्ष्मण नहर में पहले भी कई बार इसी तरह कटाव की घटनाएं हो चुकी हैं। उनका दावा है कि हर बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। किसानों का कहना है कि यदि नहर की समय-समय पर मजबूती से मरम्मत और निगरानी की जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। राहत कार्य शुरू करने की रखी मांग किसानों ने यह भी मांग उठाई कि जब तक नहर में पानी की आपूर्ति बंद नहीं होगी, तब तक कटाव को पूरी तरह भरना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार पानी रोकने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की गई, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रभावित किसानों ने सरकार और सिंचाई विभाग से मांग की है कि नहरों में पानी छोड़ने से पहले उनकी क्षमता और स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाए। साथ ही कटाव वाले हिस्सों की समय रहते मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े। किसानों ने प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कराने, नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।

पंजाब की महिलाओं को मिली बड़ी सौगात, बैंक अकाउंट में पहुंचे ₹3,000

लुधियाना. पंजाब सरकार की बहुप्रतीक्षित मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना का बुधवार को औपचारिक शुभारंभ होते ही प्रदेश की लाखों महिलाओं के मोबाइल फोन पर बैंक मैसेज आने लगे हैं। जैसे ही खातों में तीन-तीन हजार रुपये और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं के खातों में 4,500 रुपये जमा होने के संदेश पहुंचे, महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। पूरे दिन महिलाएं एक-दूसरे से यही पूछती रहीं कि उनके खाते में पैसे आए या नहीं। योजना के शुभारंभ के अवसर पर लुधियाना के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों ने बड़ी स्क्रीन लगाकर मुख्यमंत्री का लाइव संबोधन दिखाया। कार्यक्रम के बाद देर शाम से महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर होने का सिलसिला शुरू हो गया। चार वर्ष बाद योजना पर हुआ अमल गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को हर माह एक हजार रुपये तथा एससी वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। लगभग चार वर्ष बाद सरकार ने इस योजना को अमलीजामा पहनाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि एक जुलाई से योजना लागू मानी जाएगी और शुरुआत में तीन माह की राशि एक साथ लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। इसी कारण सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 3000 रुपये और एससी वर्ग की महिलाओं को 4500 रुपये मिल रहे हैं। महिलाओं ने शाम आठ बजे तक किया इंतजार बसंत विहार, काकोवाल रोड निवासी माधुरी ने बताया कि वह सुबह से ही बैंक खाते में राशि आने का इंतजार कर रही थीं। शाम तक पैसा नहीं पहुंचने पर थोड़ी निराशा हुई, लेकिन रात करीब आठ बजे तीन हजार रुपये जमा होने का मैसेज मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए यह सरकार की सराहनीय पहल है। इसी क्षेत्र की गीता ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले योजना का फार्म भरा था। दोपहर से ही वह बार-बार मोबाइल पर बैंक मैसेज देख रही थीं। आखिरकार रात करीब आठ बजे उनके खाते में भी तीन हजार रुपये जमा होने का संदेश मिला। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पंजाब CM भगवंत मान बेंगलुरु में करेंगे विपश्यना, एक हफ्ते तक नहीं करेंगे सरकारी कार्यक्रम

चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक सप्ताह के प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु रवाना हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह करीब सात दिनों तक एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में रहेंगे। इस दौरान प्राकृतिक उपचार, शरीर की शुद्धि, योग, ध्यान और विशेष खानपान के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक बैठकों और विभिन्न सरकारी गतिविधियों में व्यस्त रहे हैं। लगातार कामकाज और यात्रा के कारण उन्हें पहले भी थकान की शिकायत हुई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ समय आराम करने और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने एक सप्ताह का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम तय किया है। प्राकृतिक चिकित्सा से गुजरेंगे सीएम सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया से गुजरेंगे। साथ ही योग, ध्यान और विशेष आहार योजना का पालन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बेहतर बनाना तथा व्यस्त दिनचर्या के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करना है। बेंगलुरु स्थित निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उनके रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उपचार और खानपान की योजना में बदलाव भी किया जा सकता है। रवाना होने से पहले खत्म किए सभी कार्य स्वास्थ्य कार्यक्रम पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी निर्देश भी दिए, ताकि उनकी अनुपस्थिति के दौरान विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी पंजाब सरकार का नियमित कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। विभागों को आवश्यक निर्देश पहले ही दिए हैं और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में भी रहेंगे।

DA Hike: केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी, 42% महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 17 जुलाई को आंदोलन संभव

चंडीगढ़  पंजाब के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए आज का दिन अहम रहने वाला है। लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और पे-कमिशन एरियर के मामले में आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई करेगी। इस सुनवाई पर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की नजर।  बुधवार को हाईकोर्ट की छुट्टियों के बाद पहले दिन भी मामला सूचीबद्ध था, लेकिन देर शाम सुनवाई होने के कारण सरकार की ओर से ही पक्ष रखा जा सका। अब आज कर्मचारी संगठनों की दलीलें भी सुनी जाएंगी, जिसके बाद अदालत आगे का फैसला करेगी। सिंगल बेंच ने 30 जून तक भुगतान का दिया था आदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 8 अप्रैल को पंजाब सरकार को 30 जून तक लंबित डीए का भुगतान करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को सरकार ने डबल बेंच में चुनौती दी। डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार से सीलबंद लिफाफे में भुगतान की योजना मांगी थी। अब गुरुवार की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि सरकार ने बकाया डीए के भुगतान के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है। सरकार किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव रखती है या वित्तीय स्थिति का हवाला देकर और समय मांगती है, इस पर फैसला निर्भर करेगा। केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी फिलहाल पंजाब के कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत डीए अभी भी लंबित है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई बोनस या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा है। इसी आधार पर कर्मचारी बकाया डीए के भुगतान की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों हो रहे लामबंद कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती और भुगतान को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं आता, तो 17 जुलाई को पंजाब में महारैली और महाबंद का ऐलान किया जा सकता है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या करीब 40 लाख लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मुद्दे का राजनीतिक असर भी आगामी समय में देखने को मिल सकता है।  

Footpath Encroachment: हाई कोर्ट ने कहा- फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए हैं, अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई करें

चंडीगढ़  पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित तरीके से चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। पैदल लोगों के लिए बनाए गए फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने लुधियाना नगर निगम को शहर के फुटपाथों पर अतिक्रमण की शिकायतों की तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका लुधियाना के जसबीर सिंह ने दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि शहर में फुटपाथों की हालत बेहद खराब है और बड़ी संख्या में उन पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे लोगों को मजबूरन व्यस्त सड़कों पर चलना पड़ता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच नगर निगम और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें और ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। फुटपाथों पर रेहड़ी-फड़ी वालों और अन्य अवैध कब्जों के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया।  

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिया एक सप्ताह का ब्रेक, विपश्यना साधना के लिए पहुंचे बेंगलुरु

 चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक सप्ताह के प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु रवाना हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह करीब सात दिनों तक एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में रहेंगे। इस दौरान प्राकृतिक उपचार, शरीर की शुद्धि, योग, ध्यान और विशेष खानपान के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक बैठकों और विभिन्न सरकारी गतिविधियों में व्यस्त रहे हैं। लगातार कामकाज और यात्रा के कारण उन्हें पहले भी थकान की शिकायत हुई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ समय आराम करने और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने एक सप्ताह का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम तय किया है। प्राकृतिक चिकित्सा से गुजरेंगे सीएम सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया से गुजरेंगे। साथ ही योग, ध्यान और विशेष आहार योजना का पालन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बेहतर बनाना तथा व्यस्त दिनचर्या के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करना है। बेंगलुरु स्थित निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उनके रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उपचार और खानपान की योजना में बदलाव भी किया जा सकता है। रवाना होने से पहले खत्म किए सभी कार्य स्वास्थ्य कार्यक्रम पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी निर्देश भी दिए, ताकि उनकी अनुपस्थिति के दौरान विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी पंजाब सरकार का नियमित कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। सभी विभागों को आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में भी रहेंगे।