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लातेहार में बड़ा सड़क हादसा: अनियंत्रित बस घाटी में गिरी, 5 की जान गई

रांची   झारखंड के लातेहार जिले से एक बड़ा हादसा हो गया, जहां महुआडांड़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत ओरसा घाटी में एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में अब तक 5 महिलाओं के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य यात्रियों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ से पिकनिक मनाने जा रहे थे लोग प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त बस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर स्थित ज्ञान गंगा हाई स्कूल की है। अपुष्ट सूत्रों की मानें तो बस में क्षमता से अधिक लगभग 80 लोग सवार थे, जो छत्तीसगढ़ से लोध फॉल (Lodhi Fall) घूमने जा रहे थे। ओरसा घाटी के खतरनाक मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस पलट गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई।   बचाव कार्य और चिकित्सा सहायता घटना की सूचना मिलते ही महुआडांड़ थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे। बस के नीचे अभी भी कुछ घायलों और शवों के दबे होने का अनुमान है, जिन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं। अस्पताल में मची अफरा-तफरी महुआडांड़ का सरकारी अस्पताल घायलों से पूरी तरह भर गया है। घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि स्थानीय प्रखंड के निजी क्लीनिकों के प्रैक्टिसनर भी स्वेच्छा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं और डॉक्टरों की मदद कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता वर्तमान में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को तुरंत इलाज प्रदान करना है। चिकित्सा सहायता: घटना की गंभीरता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टरों की टीम जुटी हुई है। स्थानीय क्लीनिकों के प्राइवेट प्रैक्टिसनर्स भी घायलों की जान बचाने के लिए स्वेच्छा से डॉक्टरों की मदद कर रहे हैं।

क्या तेजस्वी बनेंगे RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष? लालू यादव की बीमारी के बीच सियासी हलचल तेज

पटना राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) की कमान पूरी तरह से तेजस्वी यादव के हाथों में आने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनित किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जानकारी मिल रही है कि 25 जनवरी को इसका ऐलान कर दिया जाएगा। विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव ऐक्शन में हैं। आगामी रणनीति और विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा की जा रही है। पटना में तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर कोर केमेटी और लोकसभा, राज्यसभा सदस्यों के साथ बैठक की। तेजस्वी को राजद में लालू यादव के बाद नंबर टू का दर्जा पहले से प्राप्त है। पार्टी में नीति निर्धारण हो या कोई बड़ा फैसला, यह काम तेजस्वी यादव ही करते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही लालू प्रसाद यादव ने यह पावर तेजस्वी को सौंप दिया था। विधानसभा चुनाव में टिकट काटने से लेकर बांटने तक का काम उन्होंने ही किया। कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिल जाने के बाद उनकी ताकत और बढ़ जाएगी। 25 जनवरी को पार्टी कार्यसमिति की बैठक पटना में बुलाई गई है। इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी बैठक में तेजस्वी यादव की नई जिम्मेदारी की घोषणा हो सकती है। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वे अक्सर बीमार रहते हैं। इसे देखते हुए तेजस्वी के हाथों में पार्टी की कमान सौंपे जाने की चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा है कि यह लालू प्रसाद की मजबूरी है। वंशवादी परंपरा के तहत वे अपनी कुर्सी परिवार से बाहर के किसी पार्टी नेता को नहीं दे सकते। जदयू प्रवक्ता मनीष कुमार ने कहा है कि तेजस्वी यादव चाहे कुछ भी बन जाएं पर वे बिहार की जनता से दूर हो चुके हैं। वे बिहार वासियों के प्रति उदासीन रहते हैं।  

बस में मॉडिफिकेशन करने वालों पर परिवहन विभाग करेगा सख्त कार्रवाई

रांची. जिला परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पर स्लीपर बसों की विशेष जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर सख्ती दिखाई गई और कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए। जांच के क्रम में कुल 21 बसों की जांच की गई। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआइआरटी) द्वारा स्लीपर बसों के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं करने पर संबंधित बस संचालकों को नोटिस जारी किया गया। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि चेसिस में एक्सटेंशन लगाकर बनाई गई बस बॉडी को तत्काल संचालन से हटाया जाएगा। सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण अब केवल किसी अप्रूव्ड टेस्ट एजेंसी की मंजूरी के साथ फार्म-22/22ए के आधार पर ही किया जाएगा। हर बस के पंजीकरण के समय लेआउट ड्राइंग अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी, जिसमें बस के आयाम, दरवाजों की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच का स्पष्ट विवरण हो। इसके अलावा बस बॉडी निर्माता की मान्यता की वैधता की भी जांच अनिवार्य की जाएगी। उप परिवहन आयुक्त-सह-सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल) रांची हरविंश पंडित, मोटरयान निरीक्षक रांची विमल किशोर सिंह तथा जिला परिवहन पदाधिकारी रांची अखिलेश कुमार ने संयुक्त रूप से सभी स्लीपर बसों की गहन जांच की। अधिकारियों ने बताया कि स्लीपर कोचों में चालक के केबिन में लगाए गए पार्टीशन दरवाजे को तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कुछ बसों से मौके पर ही पार्टीशन हटाने को कहा गया। इसके अलावा, सभी स्लीपर कोचों के बर्थ में लगे स्लाइडर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अग्नि सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्लीपर बसों में एफडीएसएस (फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम) लगाने के लिए बस आपरेटरों को एक माह का समय दिया गया है। साथ ही सभी बसों में न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के फायर एक्सटिंग्विशर (ग्रीन जोन) की उपलब्धता और कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है। खादगढ़ा बस स्टैंड पर उपस्थित वाहन मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सीआईआरटी द्वारा जारी सभी सुझावों और निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने पर सहमति जताई और तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह अभियान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा राज्य सरकार की सड़क सुरक्षा नीतियों के अनुरूप है, जिसमें यात्रियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

झारखंड में रात की ठण्ड से मिल सकती है राहत

रांची. झारखंड में रांची समेत कई जिलों में सुबह और रात के वक्त कनकनी कायम है। पिछले 24 घंटों के दौरान कई जिलों में शीतलहर की स्थिति बनी रही। वहीं मौसम विभाग ने शनिवार को भी राज्य के छह जिलों में शीतलहर चलने की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में सिमडेगा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, रामगढ़ और बोकारो शामिल हैं। विभाग ने अगले चार दिनों के दौरान राज्य के न्यूनतम तापमान में पांच डिग्री तक चढ़ने का अनुमान व्यक्त किया है। ऐसे में 20 जनवरी से रात की कनकनी से राहत मिल सकती है। इधर, कई जिलों में बीते 24 घंटे के दौरान न्यूनतम तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रहा। शुक्रवार को रांची का मैकलुस्कीगंज सबसे ठंडा रहा। वहां के स्थानीय तापमापी यंत्र के अनुसार, न्यूनतम तापमान शून्य दर्ज किया गया। वहीं कांके का तापमान तीन डिग्री रहा। जिलों की बात करें तो खूंटी का न्यूनतम तापमान 2.6 रहा। गुमला का न्यूनतम तापमान शुक्रवार को दो डिग्री वृद्धि के 2.8 दर्ज किया गया। गुरुवार को यहां का पारा 0.8 डिग्री था। इधर, मामूली कमी के साथ रांची का न्यूनतम तापमान 8.2 डिग्री दर्ज किया गया। मेदिनीनगर, कोडरमा, लातेहार, गुमला आदि जिलों के तापमान में एक से दो डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान अब भी नौ डिग्री से नीचे या उसके करीब है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, आनेवाले सात दिनों में आसमान पूरी तरह साफ रह सकता है। इससे दिन में धूप और कड़ी होगी, जिससे कनकनी से राहत मिल सकती है। अधिकतम तापमान में भी वृद्धि का अनुमान है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही झारखंड के लोगों को राहत मिल जाएगी।

विराट रामायण मंदिर में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, सीएम नीतीश ने देखी ऐतिहासिक घटना

मोतिहारी विश्व के सबसे बड़े और चर्चित शिवलिंग को 54 दिनों की कड़ी साधना के बाद मोतिहारी में बन रहे विराट रामायण मंदिर में स्थापित कर दिया गया। बनारस और पटना के पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ मंडप में विधि-विधान से पूजा के बाद रामायण मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना कार्य शनिवार (17 जनवरी 2026)संपन्न हुआ। महावीर मंदिर ट्र्स्ट पटना की अगुआई में मोतिहारी के कल्याणपुर पंचायत के कैथवलिया गांव में शिवलिंग स्थापना के ऐतिहासिक क्षणों के गवाह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा समेत लाखों लोग बने। विश्व के करोड़ों लोगों ने इंटरनेट पर पूरेविधान को ऑनलाइन भी देखा। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और आचार्य किशोर कुणाल के पु्त्र शायन कुणाल और उनकी पत्नी सांसद शाम्भवी चौधरी ने यजमान की भूमिका में भोलेनाथ का आवाहन किया। बनारस, अयोध्या व हरिद्वार से पहुंचे आचार्यों ने विधि- विधान से पूजा संपन्न कराई। अयोध्या से पधारे 21 बटुकों ने स्वास्ति वाचन किया तो भक्ति और मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र हो गया। मंडप में पूजन के बाद शिवलिंग की पूजा और आरती की गई। दो क्रेन की मदद से शिवलिंग को उठाकर कर चबूतरे पर स्थापित करने में 30 मिनट का समय लगा। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार व ऋचाओं से कैथेवलिया के जानकीनगर में बन रहे विराट रामायण मंदिर का इलाका गूंज उठा। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ मंदिर का भ्रमण किया और निर्माण कार्य का जायजा लिया। प्राण प्रतिष्ठा विधान में शामिल होने के लिए शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सर्दी और कच्चे रास्तों की चुनौती देते हुए आस पास के कई जिलों से लोग कैथवलिया पहुंचे। 8 जनवरी को महाबलीपुरम से शिवलिंग पहुंचने के दिन से ही कैथवलिया में मेला लगा है। माना जा रहा है कि श्रद्धालुओं की भीड़ आने वाले दिनों में और बढ़ेगी। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 मेट्रिक टन वजन वाला है जो ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है। तामिलनाडु के महाबलीपुरम में इसका निर्माण कराया गया। 96 चक्के वाले ट्रक से इसे 21 नवम्बर को वहां से रवाना किया गया। रास्ते भर शिवलिंग की पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की गई।

रांची में अतिक्रमण कर बनाए 50 निर्माण बुलडोजर से तोड़े

रांची. व्यस्त मार्ग रातू रोड में नगर निगम की इन्फोर्समेंट टीम की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। पांच घंटे से अधिक समय तक न्यू मार्केट चौक से पिस्का मोड़ तक सड़क के एक छोर से अतिक्रमण हटाया गया। 50 से अधिक अवैध संरचना को ध्वस्त किया गया। दुकान-प्रतिष्ठान के बाहर सीढ़ियों पर किए गए अतिक्रमण और निर्माण को ढाह दिया गया। दुकान के ऊपर लगे शेड को भी हटाया गया। टीम ने अभियान के क्रम में दो दर्जन से अधिक ठेला-खोमचा, स्टील के काउंटर, टेबल-कुर्सी, बेंच, बांस-बल्ली व लोहे के चदरे समेत अन्य सामान को जब्त किया। कई जगहों पर दुकानदारों ने अभियान का विरोध का प्रयास किया, लेकिन टीम की ओर से व्यवस्था के अलावा कार्रवाई के संबंध में बताए जाने पर ऐसे लोग पीछे हट गए। नालों पर सामान नहीं रखने की दी गई सख्त हिदायत अभियान के क्रम में प्रतिष्ठान संचालक एवं दुकानदारों को फिर से अतिक्रमण करने और नालियों पर सामान रखने समेत शेड को सड़क तक विस्तार देने के मामले पकड़ में आने पर कठोर कार्रवाई को चेताया। निगम का यह प्रयास है कि सार्वजनिक सड़क अतिक्रमण मुक्त रहे और फुटपाथ पर किसी तरह का कब्जा नहीं हो। बताया गया कि अवैध अतिक्रमण को लेकर अभियान आगे भी जारी रहेगा।

HEC सरकारी कंपनी पर 280 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया

रांची. झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) पर बकायेदारों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सबसे बड़ा बकायेदार हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) है, जो हर महीने 80 से 90 लाख रुपये की बिजली खपत करने के बावजूद बिजली बिल के एवज में एक रुपये का भी भुगतान नहीं कर रहा है। स्थिति यह है कि एचईसी पर जेबीवीएनएल का बकाया 280 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और अगर यही रफ्तार रही तो यह राशि जल्द ही 350 करोड़ रुपये के पार चली जाएगी। इस गंभीर मुद्दे पर शुक्रवार को रांची एरिया बोर्ड की बैठक में गहरी चिंता जताई गई। बैठक में एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने बताया कि इतनी बड़ी राशि को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि बैठक में केवल एक ही एजेंडा पर चर्चा हुई है, बड़े बकायेदारों से बिजली बिल वसूला जाए, नहीं तो कनेक्शन काटा जाए। बताया गया कि पिछले चार महीनों से सरकार की ओर से 200 यूनिट फ्री बिजली के एवज में जेबीवीएनएल को भुगतान नहीं मिल रहा है, जिसके कारण एनटीपीसी और डीवीसी को भुगतान अटक गया है। निगम पर एनटीपीसी का करीब 450 करोड़ और डीवीसी का लगभग 300 करोड़ रुपये बकाया है। बैठक में रांची एरिया बोर्ड के सभी कार्यपालक अभियंता शामिल हुए। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब रिलेशन मेंटेन करने के बजाय बकायेदारों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करें और जरूरत पड़े तो बिजली कनेक्शन काटें। रिंग रोड के अंदर 90 हजार हाई वोल्टेज कंज्यूमर मौजूद, जल्द होगा वसूली इस मौके पर जीएम मनमोहन कुमार ने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति तभी संभव है जब उपभोक्ता समय पर बिजली बिल का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि जैसे निगम की जिम्मेदारी लगातार बिजली देने की है, वैसे ही उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वे समय पर बिलें। उन्होंने कहा कि रांची रिंग रोड के अंदर हाई वोल्टेज कंज्यूमर की संख्या 90 हजार है, जिससे वसूली के लिए 21 से 23 जनवरी तक योजना बनाकर वसूली किया जाएगा। सबसे पहले वेस्ट डिविजन में वसूली के लिए कार्रवाई होगी, अंत में कोकर डिविजन में वसूली होगी। उन्होंने कहा कि कई अन मीटर और डिफेक्टिव मीटर के भी मामले सामने आए है, इसकी जांच कर इसे ठीक किया जाए।

बिहार पुलिस 50 एडवांस ड्रोन से यातायात और भीड़ करेगी कण्ट्रोल

पटना. बिहार पुलिस अब कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य में पहली बार बिहार पुलिस की एक अलग ड्रोन यूनिट का गठन किया जाएगा। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और यातायात कण्ट्रोल करेगी। एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ड्रोन यूनिट के गठन से पुलिसिंग अधिक प्रभावी, तेज और तकनीक आधारित बनेगी। ड्रोन यूनिट का गठन, 50 आधुनिक ड्रोन खरीदेंगे एडीजी सुधांशु कुमार के अनुसार, इस यूनिट के लिए कुल 50 आधुनिक ड्रोन खरीदे जाएंगे, जिन पर लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 40 ड्रोन राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों को दिए जाएंगे, जबकि 10 ड्रोन विशेष कार्यों के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को मिलेंगे। इन ड्रोन की खरीद केंद्र सरकार की ASUMP (असिस्टेंस टू स्टेट्स एंड ड्यूटीज फॉर मॉडर्नाइजेशन ऑफ पुलिस) योजना के तहत की जा रही है। उम्मीद है कि यह ड्रोन यूनिट मार्च तक पूरी तरह सक्रिय हो जाएगी। निगरानी में होगा ड्रोन का प्रमुख उपयोग ड्रोन तकनीक का एक प्रमुख उपयोग यातायात निगरानी में होगा। एडीजी ने बताया कि ड्रोन कैमरों की मदद से बिना हेलमेट वाहन चलाने, गलत लेन में ड्राइविंग करने, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने और जाम लगाने जैसी स्थितियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों के खिलाफ ऑनलाइन चालान की कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ड्रोन यूनिट बड़े आयोजनों, त्योहारों, वीआईपी मूवमेंट और संवेदनशील इलाकों में भीड़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऊंचाई से पूरे क्षेत्र की लाइव निगरानी संभव होगी, जिससे स्थिति का तुरंत आकलन कर पुलिस बल की प्रभावी तैनाती की जा सकेगी। अपराधियों पर होगी सख्त निगरानी STF को दिए जाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर दियारा क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में सक्रिय अपराधियों की निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने कहा कि, इन इलाकों में पुलिस की भौतिक पहुंच सीमित रहती है, लेकिन ड्रोन के जरिए अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा। ड्रोन यूनिट के गठन से बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। इससे अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। पुलिसिंग में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

कांग्रेस नेता छत्रपति यादव के भोज में पहुंचे दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस में गुटबाजी और तेज हो गई है। बिहार कांग्रेस के नाराज गुट की ओर से शुक्रवार को मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक छत्रपति यादव के पटना स्थित आवास पर आयोजित इस भोज में दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कई जिला अध्यक्ष समेत प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे कई नेता शामिल हुए। यह भोज सूबे के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। दही-चूड़ा भोज का आयोजन एआईसीसी सदस्य आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, राजकुमार राजन एवं नागेंद्र पासवान विकल की ओर से किया गया। छत्रपति यादव ने कहा कि भोज में सभी कांग्रेसियों के अलावा उन नेताओं को भी बुलाया गया जिन्हें प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में निमंत्रण नहीं दिया गया था। आनंद माधव ने कहा कि यह कोई राजनीतिक भोज नहीं है। बीते सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी का आधिकारिक दही-चूड़ा भोज आयोजित हुआ था। उसमें नाराज गुट के नेता नहीं दिखे थे। पार्टी के सभी 6 विधायकों ने भी इससे दूरी बनाए रखी थी। हालांकि, नेताओं की नाराजगी की बात से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इनकार किया था। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश कांग्रेस के एक गुट ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर पैसे लेकर बाहरियों को चुनाव में टिकट देने का आरोप लगाया था। चुनाव नतीजों में पार्टी को करारी हार मिली तो नाराज गुट का विरोध तेज हो गया। पटना से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। अब इस गुट को दो पूर्व अध्यक्ष अखिलेश सिंह और मदन मोहन झा का भी खुलकर समर्थन मिल गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में गुटबाजी चरम पर पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर, एनडीए की ओर से कांग्रेस के सभी 6 विधायकों के पाला बदलने के दावे भी किए जा रहे हैं।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में खत्म होगा आरजेडी, कांग्रेस और RLM में टूट का सस्पेंस?

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 2 फरवरी से होने जा रही है। यह सत्र कई मायनों में रोचक रहने वाला है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठित एनडीए की नई सरकार का सदन में 3 फरवरी को पहला बजट पेश करेगी। सदन की कार्यवाही के दौरान विधायकों के सीटिंग अरेंजमेंट पर भी सबकी निगाहें रहेंगी। दरअसल, लालू एवं तेजस्वी यादव के राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के दावे और अटकलबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब इन दावों से सस्पेंस बजट सत्र में खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं। बिहार चुनाव में प्रचंड जीत और नई सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं की ओर से विपक्ष में टूट के दावे किए जाने लगे। विधानसभा में 25 सदस्यों वाली आरजेडी और 6 सदस्यों वाली कांग्रेस के अधिकतर विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने और खरमास के बाद पाला बदलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे सियासी पारा गर्माया हुआ है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस बात को लगातार खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस विधायकों की पार्टी के भोज से दूरी बीते सोमवार को पटना स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया। इसमें पार्टी के कोई भी विधायक नहीं पहुंचे। इससे विपक्ष में टूट के दावों को और बल मिल गया। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में सब कुछ ऑल इज वेल होने का दावा किया। मगर विधायकों की गैरमौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम में भी खटपट चल रही है। बिहार चुनाव में RLM के 4 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे। इनमें से कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को छोड़ अन्य 3 विधायक शीर्ष नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी भाजपा से नजदीकी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया, जो किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ गई और कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। इसी वजह से पार्टी के 3 विधायक एकजुटता दिखा रहे हैं। पिछले दिनों तीनों विधायक (माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह) ने उन्होंने कुशवाहा की लिट्टी पार्टी से दूरी बनाए रखी। हाल ही में वे भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के दही-चूड़ा भोज में दिखे। इससे कुशवाहा की पार्टी में बिखराव की अटकलें लगाई जा रही हैं। बजट सत्र में खत्म होगा सस्पेंस? खरमास खत्म हो गया है लेकिन विभिन्न दलों में टूट और खटपट के दावों पर फिलहाल संशय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा के बजट सत्र में यह सस्पेंस खत्म हो जाएगा। सदन के अंदर आरजेडी-कांग्रेस के विधायक विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे या नहीं, साथ ही आरएलएम के विधायकों का सीटिंग अरेंजमेंट कैसा होगा, यह 2 फरवरी को सत्र के पहले दिन स्पष्ट हो जाएगा।