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नामांकन से पहले हंगामा! रेलवे फाटक पर फंसे अनंत सिंह, समर्थकों ने इंजन तक पहुंचकर खोला गेट

पटना  जेडीयू के उम्मीदवार अनंत सिंह का नामांकन के लिए निकला रोड शो उस समय कुछ देर के लिए रुक गया, जब बाढ़ रेलवे गुमटी का फाटक बंद हो गया. ट्रेन क्रॉसिंग के कारण फाटक गिरा तो अनंत सिंह का काफिला रास्ते में फंस गया और उन्हें वहीं रुकना पड़ा. घटना के दौरान अनंत सिंह ओपन जीप में सवार थे और तेज धूप के बीच समर्थकों के साथ आगे बढ़ रहे थे. फाटक बंद होने के कारण जब ट्रेन काफी देर तक नहीं गुजरी, तो उनके समर्थक परेशान होकर रेल इंजन के पास पहुंच गए और ट्रेन को जल्दी निकलवाने की कोशिश करने लगे. मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि अनंत सिंह काफी देर तक इंतजार करते रहे. उनके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी, क्योंकि नामांकन दाखिल करने का समय नजदीक आ रहा था. कुछ देर बाद जब ट्रेन को आगे बढ़ाया गया, तब जाकर रेलवे गुमटी का फाटक खोला गया और अनंत सिंह का काफिला आगे बढ़ सका. फाटक बंद होते ही रुक गया अनंत सिंह का काफिला यह मामला बाढ़ रेलवे स्टेशन के पास का बताया जा रहा है. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि जैसे ही फाटक बंद हुआ, अनंत सिंह का पूरा काफिला, जिसमें कई गाड़ियां और समर्थक शामिल थे रुक गया. समर्थक लगातार "छोटे सरकार जिंदाबाद" के नारे लगा रहे थे, जबकि अनंत सिंह अपनी जीप से हालात का जायजा लेते नजर आए. जेडीयू की टिकट पर लड़ रहे चुनाव, सबसे पहले भरा नामांकन अनंत सिंह इस बार मोकामा विधानसभा सीट से जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और सोमवार को नामांकन दाखिल करने निकले थे. बताया जा रहा है कि वे इस चुनाव में जेडीयू के टिकट पर नामांकन करने वाले पहले प्रत्याशी हैं. घटना के दौरान मीडिया कर्मी और स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे. कुछ मिनटों की इस रुकावट के बाद जैसे ही फाटक खुला, काफिले में लोगों राहत की सांस ली और रोड शो दोबारा शुरू हो गया.

तारापुर से सम्राट चौधरी की चुनौती, भाजपा ने डिप्टी CM को पुश्तैनी सीट से बाहर किया

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने अपने कद्दावर नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तारापुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। सम्राट तारापुर से 16 अक्टूबर को नामांकन करेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की कैंडिडेट लिस्ट अभी नहीं आई है। तारापुर सिर्फ एक चुनावी सीट नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी के परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ी भूमि है। उनके पिता शकुनी चौधरी यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं, जबकि उनकी मां पार्वती देवी भी एक बार इसी सीट से विधानसभा पहुंची थीं। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी मौजूदा वक्त में विधान परिषद के सदस्य हैं। सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प रही है। वे हमेशा से विधान परिषद के सदस्य नहीं रहे, बल्कि पहले राजद (RJD) से दो बार विधायक बन चुके हैं। भाजपा में आने से पहले वो दो बार राजद के विधायक बने हैं। खगड़िया जिले की परबत्ता सीट से सम्राट चौधरी पहली बार 2000 और दूसरी बार 2010 में विधानसभा पहुंचे थे। उनसे हारने और उनको हराने वाले जेडीयू नेता रामानंद प्रसाद सिंह भी परबत्ता से चार के विधायक रहे। रामानंद के बेटे संजीव सिंह 2020 में परबत्ता से जेडीयू के विधायक बने थे लेकिन अब तेजस्वी यादव के साथ हैं और अब राजद के टिकट पर लड़ेंगे। हाल ही में प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को घेरते हुए एक पुराना मामला उठाया। उन्होंने तारापुर हत्याकांड (1995) का जिक्र किया और उनकी उम्र और रिहाई पर सवाल उठाए। जानकार बताते हैं कि यह केस भी तारापुर के चुनावी माहौल से जुड़ा था, जब उनके पिता शकुनी चौधरी ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। इस पुराने विवाद ने अब फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है, खासकर तब जब सम्राट खुद उसी सीट से ताल ठोकने जा रहे हैं।  

एक तरफ NDA तैयार, दूसरी तरफ महागठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान जारी

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख (17 अक्टूबर) में अब केवल चार दिन शेष हैं, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध गहराता जा रहा है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी सीट-बंटवारा रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। महागठबंधन में सीट बंटवारे पर तनाव महागठबंधन की बातचीत में मुख्य विवाद आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या को लेकर है। विपक्षी खेमे के सूत्रों के अनुसार, आरजेडी अपने प्रमुख सहयोगी कांग्रेस को 243 सदस्यीय विधानसभा में 55 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है, जबकि कांग्रेस कम से कम 60 सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस ने पहले ही 90 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की छंटनी कर ली है और सीट बंटवारे पर सहमति बनने का इंतजार कर रही है। सोमवार को बिहार के लिए एआईसीसी प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने पत्रकारों से कहा, "सीट बंटवारे के अंतिम रूप लेने के बाद उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। हमारा प्रयास है कि बिहार के लोगों के लिए एक अच्छी सरकार बने। गठबंधन को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और बिहार को इसका लाभ मिलना चाहिए।" तेजस्वी और कांग्रेस नेताओं की बैठक महागठबंधन में शामिल आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दल, मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और अन्य सहयोगी दलों ने अपनी बातचीत को तेज कर दिया है। सोमवार शाम को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कृष्णा अल्लावरु के साथ बंद कमरे में चर्चा की। इससे पहले, तेजस्वी ने बिहार कांग्रेस प्रमुख राजेश राम और पार्टी नेता शकील अहमद खान के साथ प्रारंभिक विचार-विमर्श किया था। पटना में, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के बाहर टिकट के दावेदारों की भीड़ लगी रही। लालू ने कुछ उम्मीदवारों को पार्टी के चुनाव चिह्न सौंपे, लेकिन सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। वहीं, वामपंथी दलों, विशेष रूप से सीपीआई (एमएल) लिबरेशन ने कुछ चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को पार्टी चिह्न जारी करना शुरू कर दिया है। महागठबंधन में जल्द समझौते की उम्मीद महागठबंधन के कुछ नेताओं का मानना है कि अगले एक-दो दिनों में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो सकता है। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, “हमें अपने नेताओं मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव पर पूरा भरोसा है। हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे जल्द से जल्द सीट बंटवारे को अंतिम रूप दें और इसकी घोषणा करें।” एनडीए ने सीट बंटवारे को दिया अंतिम रूप दूसरी ओर, एनडीए ने अपनी सीट-बंटवारा रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) (जेडी(यू)) दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें दी गई हैं। इसके अलावा, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को छह-छह सीटें आवंटित की गई हैं। राज्य बीजेपी प्रमुख दिलीप जायसवाल ने कहा कि एनडीए के सभी पांच सहयोगी दलों द्वारा मंगलवार तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने की संभावना है और दोनों चरणों के लिए नामांकन इस सप्ताह पूरा कर लिया जाएगा। चुनाव की तारीखें चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 121 सीटों पर होगा, जिसके लिए नामांकन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर है। दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को 122 सीटों पर होगा, और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। जैसे-जैसे नामांकन की समय सीमा नजदीक आ रही है, बिहार की सियासी गर्मी बढ़ती जा रही है। महागठबंधन के लिए समय की कमी एक बड़ी चुनौती है, जबकि एनडीए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। अब यह देखना बाकी है कि विपक्षी गठबंधन कब तक अपने मतभेदों को सुलझा पाता है और अपने उम्मीदवारों की घोषणा करता है।

राहुल-खरगे से नहीं हुई बात, कांग्रेस ने कसा शिकंजा – विपक्षी गठबंधन में दरार?

पटना  बिहार चुनाव के लिए आज से नॉमिनेशन का आगाज है. एनडीए ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला दे दिया, मगर महागठबंधन अब भी सीट शेयरिंग में उलझा है. सीट शेयरिंग को लेकर राजद और कांग्रेस के बीच तलवार खींचती चली जा रही है. दोनों के स्टैंड से दरार बढ़ती ही जा रही है. एक तरफ राजद नेता तेजस्वी यादव राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मिले बिना दिल्ली से पटना लौट आए. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपनी मर्जी से 76 उम्मीदवार तय कर राजद को आंख दिखा दी है. उधर राजद ने तो सिंबल भी बांटना शुरू कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अब सीट शेयरिंग का इंतजार नहीं करेगी और जल्द ही टिकट वितरण शुरू करने की तैयारी में है. यह सब तब हो रहा है, जहब पहले से ही सीटों की संख्या पर पेच फंसा हुआ है. उधर मनोज झा और इमरान प्रतापगढ़ी के शायराना अंदाज वाले पोस्ट से पता चल रहा है कि कांग्रेस और राजद के बीच सीटों पर बात नहीं बन पा रही है. दोनों में कुछ सीटों को लेकर झगड़ा चल रहा है. इसके कारण ही सीटों का बंटवारा अब तक नहीं हो पाया है. क्यों हो रही खींचतान? दरअसल, तेजस्वी यादव सोमवार को दिल्ली पहुंचे थे. उनका मकसद कांग्रेस के टॉप नेतृत्व से सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति बनाना था. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी की राहुल गांधी और खरगे से मुलाकात नहीं हो सकी. तेजस्वी बगैर मिले ही पटना लौट गए. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की अधिक सीटों की डिमांड राजद मानने के मूड में नहीं है. उधर सूत्रों का कहना है कि तेजस्वी के पटना पहुंचने से पहले ही लालू यादव ने कुछ कैंडिडेट को सिंबल बांटना शुरू कर दिया था. यह सब तब हो रहा है जब बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब तक महागठबंधन में सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है. कांग्रेस ने अलग लड़ने की कर ली तैयारी? हालांकि, लालू यादव के बेट और राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी ने पटना लौटते ही कहा कि हम सब मिलकर लड़ेंगे और एक दो दिन में सीटों का ऐलान हो जाएगा. हालांकि, इसके बाद ही कांग्रेस की ओर से यह बात सामने आई कि उसने 76 कैंडिडेट की लिस्ट तैयार कर ली है. कांग्रेस ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. पार्टी ने 76 उम्मीदवारों की आंतरिक लिस्ट तैयार कर ली है और जल्द ही उन्हें टिकट देने की प्रक्रिया शुरू करेगी. कांग्रेस का कहना है कि अब वह और इंतजार नहीं कर सकती है. यह कदम महागठबंधन में दरार का स्पष्ट संकेत है, क्योंकि पहले सीट शेयरिंग फाइनल होने के बाद ही कैंडिडेट्स अनाउंस करने की परंपरा रही है. मगर दोनों तरफ से कुछ कैंडिडेट्स को सिंबल देने की बात सामने आ चुकी है. कहां फंसा है पेच सूत्रों की मानें तो महागठबंधन में दरार की मुख्य वजह सीटों का बंटवारा है. राजद को लग रहा कि कांग्रेस औकात से अधिक सीट मांग रही है. कांग्रेस को लगता है कि राजद उसे कम सीट दे रही है. कांग्रेस राहुल गांधी की यात्रा में जुटी भीड़ से उत्साहित है. 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने 70 सीटों पर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन इस बार राजद उसे 55 से 60 सीटें ही देना चाहती है. जबकि कांग्रेस 70 सीटों से कम पर मानने को तैयार नहीं है. यही वजह है कि कांग्रेस ने 76 कैंडिडेट की लिस्ट तैयार कर ली है. इसके अलावा, वीआईपी के मुकेश सहनी की सीटों को लेकर भी पेच हैं. कुल मिलाकर महागठबंधन में अभी पेच ही पेच नजर आ रहा है.  

CPI-ML ने सीट बंटवारे से पहले ही बांटे सिंबल, लिस्ट में सुशांत सिंह राजपूत की बहन भी

पटना महागठबंधन सीट बंटवारे की घोषणा अब तक नहीं हुई है लेकिन, भाकपा माले ने अपने आठ निवर्तमान विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी। इतना ही नहीं उन्हें सिंबल भी थमा दिया है। आज से यह सभी अपना नामांकन पर्चा दाखिल करेंगे। इनमें पालीगंज से संदीप सौरव दरौली से सत्यदेव राम, दरौंदा से अमरनाथ यादव, जीरा देवी से अमरजीत कुशवाहा, फुलवारी से गोपाल रविदास, दीघा से दिव्या गौतम, डुमरांव से अजीत कुशवाहा घोसी से रामबली यादव शामिल हैं। माले की ओर से इसकी पुष्टि भी कर दी गई है।  जानिए कौन हैं दिव्या गौतम दिव्या गौतम का नाम इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। क्योंकि वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की ममेरी बहन हैं और छात्र नेत्री भी रह चुकी हैं। उन्होंने 2012 में AISA की ओर से पटना विश्वविद्यालय का छात्र संघ चुनाव भी लड़ा था। वह दूसरे स्थान पर रही थीं। इतना ही नहीं उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से ली जाने वाली प्रशासनिक सेवा परीक्षा भी पास की है। किसी कारणवश उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज में पढ़ने का अवसर चुना। दिव्या मूल रूप से खगड़िया जिले के चौथम प्रखंड की पूर्वी बैरन पंचायत निवासी हैं। अब इस बार दीघा विधानसभा से भाजपा वाले ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। महागठबंधन में सीट बंटवारे की घोषणा आज बता दें कि महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर जो पेज फंसा हुआ था वह लगभग खत्म हो चुका है। राजद और कांग्रेस के बीच सारी बात फाइनल हो चुकी है मुकेश सहनी को भी तेजस्वी यादव ने लगभग मना लिया है। सूत्र बता रहे हैं कि सभी घटक दलों की सहमति के बाद महागठबंधन ने सीट बंटवारे का फार्मूला करीब करीब तय कर लिया है। संभावना है कि आज शाम तक सीटों का एलान भी कर दिया जाए। इधर, वामदल में भाकपा माले को 19 सीट, सीपीआईएम को छह, सीपीआई को चार मिलने की बात सामने आ रही है। इसीलिए वामदल ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

चिराग को सीटें तो मिलीं, लेकिन क्या पसंदीदा इलाके भी मिलेंगे? NDA में खींचतान तय!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में रविवार को सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने का फॉर्मूला तय हुआ है, तो चिराग पासवान की मन की मुराद पूरी हो गई है. चिराग की पार्टी एलजेपी (आर) को 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान को एनडीए में मन के मुताबिक सीटों की संख्या तो मिली, लेकिन क्या पसंदीदा सीटें भी मिल पाएंगी? एनडीए में अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है कि एलजेपी किन 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 2020 के चुनाव में चिराग एनडीए का हिस्सा नहीं थे, उस समय जेडीयू 115 सीट पर चुनाव लड़ी थी और बीजेपी ने 110 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. जेडीयू और बीजेपी चिराग को सीटें देने के लिए कम सीटों पर लड़ने को राज़ी हो गई हैं, लेकिन असली मामला अब उन सीटों पर फंसा है, जहां पर जेडीयू, बीजेपी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का कब्ज़ा है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं. इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को हुआ. एनडीए में चिराग की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं. चिराग की पार्टी लगातार 30 से 35 सीटें मांग रही थी और उसी लिहाज़ से उसे 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान का एनडीए में बढ़ता क़द अब किसी से छिपा नहीं है. बिहार की राजनीति में उन्हें अब 'किंगमेकर' के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल ये है कि चिराग पासवान में ऐसी क्या ख़ास बात है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों अपनी सीटों का नुक़सान उठाकर भी उन्हें ज़्यादा महत्व देने का काम किया है.  चिराग को पसंदीदा सीटें भी मिलेंगी? एनडीए में सीट शेयरिंग के मामले में चिराग पासवान 30-35 सीटों पर दावेदारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के दख़ल के बाद चिराग पासवान 29 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हुए हैं. इसका ऐलान भी रविवार को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कर दिया, ऐसे में मामला उन सीटों पर फंस सकता है, जहां पर बीजेपी और जेडीयू ने 2020 में कब्ज़ा जमाया था. चिराग पासवान ने जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने का अभी तक प्लान बनाया है, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर जेडीयू और बीजेपी का कब्ज़ा है. बीजेपी और जेडीयू क्या अपनी जीती हुई सीटें एलजेपी के लिए छोड़ने को तैयार होंगी? जेडीयू ने जिस तरह से पिछले चुनाव में सीटें जीती थीं, उनमें से छोड़ना उसके लिए आसान नहीं है. माना जा रहा है कि एलजेपी की दावे वाली चार सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है तो तीन सीटों पर जेडीयू के विधायक हैं. इसके अलावा एक सीट पर जीतनराम मांझी की पार्टी का कब्ज़ा है. चिराग का बढ़ता सियासी क़द चिराग पासवान अपने पिता और बिहार के दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान की सियासी विरासत को संभाल रहे हैं. राम विलास पासवान का बिहार में गहरी जड़ें वाला दलित वोट बैंक था. दलितों में ख़ासकर दुसाध समुदाय में है, यह समुदाय राज्य में एक बड़ा जनसमूह है. एनडीए के लिए इनका साथ जीत में बड़ी भूमिका निभा सकता है.  2020 में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से बाहर रहकर 135 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ़ 1 सीट जीत पाई थी. चिराग पासवान भले ही सीटें जीतने में सफल नहीं रहे, लेकिन एनडीए से बाहर जाकर लड़ने पर नीतीश कुमार की पार्टी को गहरा झटका दिया था. एनडीए में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.  2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग को लेकर 2020 से बिल्कुल अलग रणनीति है। चिराग की पार्टी एनडीए के साथ ही चुनाव लड़ रही है. गठबंधन में उन्हें लड़ने के लिए 29 सीटें मिली हैं, जिस पर वह ख़ुश हैं. चिराग की कैसे बढ़ी अहमियत 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. वह पांच सीटों पर चुनाव लड़े थे और सभी पांचों पर जीत दर्ज किए थे. यह नतीजा उनके संगठन और जनाधार की मज़बूती दिखाता है. इसी के बाद से बीजेपी और जेडीयू दोनों को यह समझ में आ गया कि चिराग पासवान अब केवल सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताक़त बन चुके हैं. बीजेपी को बिहार में जहां सवर्ण और शहरी वोटरों का समर्थन मिलता है तो जेडीयू को कुर्मी और पिछड़े वर्ग का. ऐसे में चिराग की पार्टी दलित समुदाय को जोड़ती है, जिससे गठबंधन की सामाजिक पकड़ और मज़बूत होती है. यही वजह है कि उन्हें 29 सीटें तो मिल गई हैं, लेकिन क्या मनमर्ज़ी वाली सीटें भी मिलेंगी? चिराग की सियासी महत्वाकांक्षा चिराग पासवान की सियासी महत्वाकांक्षा अब सिर्फ़ कुछ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. वह ख़ुद को बिहार की अगली पीढ़ी के नेताओं में स्थापित करना चाहते हैं. वह बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं, जिससे बीजेपी के साथ उनका रिश्ता और मज़बूत हुआ है. इस बार किंगमेकर बनने का सपना लेकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, जिसके लिए एक-एक सीट पर नज़र गड़ाए हुए हैं. बिहार में इस बार के सीट बंटवारे ने यह साफ़ कर दिया है कि एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान अब छोटे सहयोगी नहीं, बल्कि मुख्य चेहरा बन गए हैं. चिराग की पार्टी की मज़बूती और दलित वोट बैंक पर पकड़, आने वाले चुनावों में एनडीए के लिए चिराग कितनी रोशनी साबित होते हैं या फिर अपनी सियासी उम्मीदों को उजाला करेंगे?

देश के श्रेष्ठ संस्थानों में शामिल हुआ IIT पटना, मिला छठा स्थान, वर्ल्ड रैंकिंग में भी शानदार जगह

पटना  आईआईटी पटना ने एक बार फिर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का लोहा मनवाया है। प्रतिष्ठित टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में संस्थान को विश्वस्तर पर 601–800 रैंक बैंड में जगह मिली है। देश के सभी आईआईटी में आईआईटी पटना छठे स्थान पर रहा है। संस्थान के निदेशक प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे आईआईटी पटना परिवार के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा, यह सफलता हमारे शिक्षकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। यह हमारी उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में विश्वविद्यालयों को शिक्षण, शोध, उद्योग सहयोग और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे कई मानकों पर परखा जाता है। आईआईटी पटना ने सभी मानकों पर संतुलित प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से संस्थान को शोध गुणवत्ता में 70.4 का उत्कृष्ट स्कोर प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, शिक्षण में 34.8, शोध परिवेश में 22.5, उद्योग सहयोग में 36.0 तथा अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण में 22.8 का स्कोर प्राप्त हुआ। संस्थान का कुल स्कोर 39.0 से 43.5 के बीच रहा, जो मुख्य शैक्षणिक और शोध मानकों में संतुलित प्रगति को दर्शाता है। आईआईटी पटना अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर लगातार अग्रसर है, जहां निरंतर विकास, नवाचार और वैश्विक सहयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है।  

RJD ने खोले पत्ते! तेज प्रताप यादव महुआ से लड़ेंगे, 21 सीटों पर उम्मीदवार घोषित

पटना तेजप्रताप यादव ने नवगठित जनशक्ति जनता दल के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट में 21 उम्मीदवारों के नाम हैं। बिहार चुनाव 2025 के लिए तेज प्रताप यादव की अध्यक्षता वाली जनशक्ति जनता दल ने 21 प्रत्याशियों का एलान किया है। तेज प्रताप यादव खुद भी चुनाव लड़ेंगे. तेज प्रताप यादव महुआ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे। वहीं महनार- जय सिंह राठी, हिसुआ- रवि राज कुमार , शाहपुर- मदन यादव और पटना साहिब से मीनू कुमारी को टिकट दिया गया है।   जनशक्ति जनता दल के 21 उम्मीदवार महुआ           तेज प्रताप यादव  मनेर           शंकर यादव बेलसन           विकास कुमार कवि बख्तियारपुर   गुलशन यादव शाहपुर           मदन यादव पटना साहिब  मीनू कुमारी महुआर          जय सिंह राठी हिसुआ          रवि राज कुमार बिक्रमगंज     अजीत कुशावाहा जगदीशपुर     नीरज राय  अत्री           अविनाश वजीरगंज     प्रेम कुमार प्रत्याशी बेनीपुर          अवध किशोर झा दुमाओ          दिनेश कुमार सूर्या  गोविंदगंज     आशुतोष प्रत्याशी मधेपुरा            संजय यादव नरकटियागंज     तौरीफ रहमान बरौली          धर्मेंद्र क्रांतिकारी कुचायकोट     ब्रज बिहारी भट्ट बनियापुर        पुष्पा कुमारी मोहिउद्दीन नगर     सुरभि यादव  RJD से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल के नाम से नई पार्टी बना ली थी। अब वह अपनी दम पर चुनावी मैदान में हैं और अपने परिवार के खिलाफ बगावती तेवर दिखा चुके हैं। इससे वह आरजेडी को चुनाव में काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।   

सीट शेयरिंग में बराबरी, पर भाजपा का बढ़ता प्रभुत्व बना बड़ा सवाल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय कर लिया है। फॉर्मूले के तहत, भाजपा और जदयू इस बार 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। वहीं, एनडीए के सहयोगी दलों को 41 सीटें दी गई हैं। सहयोगी दलों में लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) को 6-6 सीटें दी गई हैं। इस बार भाजपा और जदयू दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इंफो इन डाटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "2025 के बिहार चुनावों में, भाजपा और जेडीयू प्रत्येक 101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि सहयोगी एलजेपी (आरवी), एचएएम और आरएलएम 41 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। पहली बार, भाजपा और जेडीयू दोनों बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, जो राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व और प्रभाव को दर्शाता है।" इससे पहले के सीट बंटवारे पर अगर हम नजर डालें तो 2005 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में जदयू 139 सीटों और भाजपा 102 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में जदयू को 88 सीटों पर, जबकि भाजपा को 55 सीटों पर सफलता मिली थी। इसी तरह, 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू 141 और भाजपा 102 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस चुनाव में जदयू ने 115 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 91 सीटें मिलीं। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू के रास्ते अलग-अलग हो गए थे। इस चुनाव में जदयू महागठबंधन के साथ थी और नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस के सहयोग से सत्ता में वापसी की थी। इस चुनाव में भाजपा ने 157 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन केवल 53 सीटों पर ही जीत हासिल की थी। इसके अलावा, 86 सीटों पर एनडीए के सहयोगी दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें महज 5 सीटों पर ही जीत दर्ज की थी। वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू 115 सीटों पर, भाजपा 110 सीटों पर और अन्य सहयोगी दल 18 सीटों पर चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में भाजपा ने 74 सीटों पर और जदयू ने 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, सहयोगी दल 8 सीट जीतने में कामयाब रहे थे। हालांकि, 2025 में भाजपा और जदयू के बीच 101-101 सीटों का बराबर बंटवारा हुआ है। इस बदलाव से यह साफ है कि भाजपा बिहार की राजनीति में अब जूनियर पार्टनर नहीं रही। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह बराबरी का फॉर्मूला चुनावी मैदान में दोनों दलों के बीच समान साझेदारी का संदेश देगा।

मौसम अपडेट: झारखंड में सूखा सन्नाटा, अगले 10 दिन तक बारिश का कोई संकेत नहीं

रांची झारखंड में फिलहाल मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है और अगले कुछ दिनों में बारिश की कोई विशेष संभावना नहीं है। भारतीय मौसम विभाग के रांची केंद्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदा हो रहा है, जिससे राज्य में तापमान में हल्की-फुल्की बदलाव के साथ मौसम स्पष्ट बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 18 अक्टूबर के बीच आसमान साफ रहने की उम्मीद है, जिससे किसानों को फसल कटाई में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन भू-जलस्तर पर इससे प्रभाव पड़ने की आशंका भी बनी रहेगी। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया कि 13 से 16 अक्टूबर के बीच झारखंड में मौसम शुष्क रहेगा और बारिश की संभावना नहीं है। 17 और 18 अक्टूबर को भी बारिश की संभावना नहीं बताई गई है। हालांकि अक्टूबर के पहले 12 दिनों में राज्य में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आसमान वर्षा किसानों और जल प्रबंधन के लिए चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में शुष्क मौसम जारी रहने से फसल की कटाई में राहत मिलेगी, लेकिन भू-जलस्तर पर इससे दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अगले सप्ताह तक भी बारिश का वितरण असमान रहा, तो जल-मोतीकरण, सिंचाई परियोजनाओं और भू-जल पुनर्चक्रण पर गंभीर विचार जरूरी होगा।