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सावधान बिहार! तापमान में तेज गिरावट और घना कोहरा, मौसम विभाग ने जारी किया नया अपडेट

पटना राज्य में तापमान में कोई बड़ा बदलाव फिलहाल नहीं दिख रहा है और ठंड की स्थिति यथावत बनी रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, आगामी तीन दिनों के दौरान राज्य के कई इलाकों में सुबह के समय हल्के से मध्यम स्तर तक का कोहरा छा सकता है। विशेष रूप से गंगा किनारे बसे क्षेत्रों में देर तक धुंध बने रहने के आसार जताये गये हैं, जिससे सुबह की द्दश्यता प्रभावित हो सकती है। विभाग ने बताया है कि इस दौरान मौसम में किसी प्रकार के बड़े उतार- चढ़ाव की संभावना नहीं है। पूर्वानुमान के मुताबिक आगामी पांच दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। यानी फिलहाल राज्य में ठंड की मौजूदा स्थिति जैसी है, वैसी ही बनी रहने वाली है। मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सुबह के समय वाहन चलाते समय सतर्क रहें।

कुशवाहा की पार्टी में भूचाल: बेटे को मंत्री बनाए जाने के विरोध में चार नेताओं का इस्तीफा

पटना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के चार वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। चारों ने पत्र लिखकर रालोमो की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ, प्रदेश महासचिव सह लखीसराय जिला संगठन प्रभारी प्रमोद यादव, प्रदेश महासचिव सह नालंदा जिला संगठन प्रभारी राजेश रंजन उर्फ गुरु मुखिया और प्रदेश प्रवक्ता सह प्रदेश महासचिव राहुल कुमार शामिल हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ ने इस्तीफा देते हुए कहा कि मैं पिछले 9 वर्ष से उपेंद्र कुशवाहा के साथ काम कर रहा हूं लेकिन अब कई राजनीतिक और सांगठनिक निर्णय से अपने को जोर नहीं पा रहा हूं। ऐसी स्थिति में अब काम करना संभव नहीं रह गया है। इसलिए पार्टी की अपनी जिम्मेदारी और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना ही मैं उचित समझता हूं। वही रालोमो के प्रदेश महासचिव सह लखीसराय जिला संगठन प्रभारी प्रमोद यादव ने कहा कि मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि बिहार चुनाव में पार्टी द्वारा शेखपुरा विधानसभा के लिए मजबूत दावेदारी पेश नहीं किया गया। इतना ही नहीं बिना कारण बताए ही पार्टी के शेखपुरा जिला कमेटी को भंग कर दिया गया। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।   योग्य विधायक रहने के बावजूद बेटे को मंत्री बनाया प्रमोद यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में योग्य विधायक रहने के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को बिहार सरकार में मंत्री पद की शपथ दिलाई यह गलत है और मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष के फैसले से असहमत हूं। वहीं रालोमो के प्रदेश प्रवक्ता राहुल कुमार ने कहा कि पिछले 9 साल से मैं उपेंद्र कुशवाहा के साथ हूं। लेकिन अब पार्टी के निर्णय में अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा हूं ऐसी स्थिति में काम करना संभव नहीं है इसलिए पार्टी की अपनी जिम्मेदारी और प्राथमिक सदस्यता से अब मैं त्यागपत्र दे रहा हूं। सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ बयान बर्दाश्त नहीं प्रदेश महासचिव सा नालंदा जिला संगठन प्रभारी राजेश रंजन उर्फ गुरु मुखिया ने कहा कि मैं भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। पहला कारण यह है कि बिहार चुनाव में शेखपुरा विधानसभा के लिए मजबूत दावेदारी पेश नहीं की गई। दूसरा कारण यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 24 नवंबर को सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर आरोप लगाकर मक्खी उड़ाने जैसा अभद्र बयान दिया था। उनके खिलाफ कोई भी बयान दे, यह मुझे बर्दाश्त नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के इन कार्यों से मैं असहमत हूं। इसलिए मैंने अब पार्टी दी।

बाहरी चमक-दमक, अंदर बदहाली: आरा पुलिस लाइन रोड पर गड्ढों और पानी ने रोकी रफ्तार

आरा आरा शहर के प्रवेश द्वार पर ‘नगर निगम में आपका स्वागत है’ का बोर्ड भले ही चमकता दिखाई दे, लेकिन असली तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है। पुलिस लाइन के समीप मुख्य सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। गड्ढों में भरा पानी और लगातार बना रहने वाला जलजमाव रोजाना लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। यही वह प्रमुख मार्ग है, जहां से जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिस लाइन के कर्मचारी और एसपी–डीएसपी तक रोजाना गुजरते हैं, फिर भी सड़क की दुर्दशा पर किसी की नजर नहीं पड़ती। सड़क की हालत इतनी खराब है कि यह चलने लायक भी नहीं बची, लेकिन मजबूरी में लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस लाइन के पास से बक्सर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और जलभराव ने आवागमन को बेहद कठिन बना दिया है। वाहन चालकों से लेकर पैदल यात्रियों तक, सभी को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह मार्ग शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और रोजाना हजारों लोग यहां से गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित आवाजाही के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि और न ही अधिकारी सड़क की बदहाली पर ध्यान दे रहे हैं। वर्षों से मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था की मांग की जा रही है, लेकिन न तो सड़क ठीक हुई और न ही जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था बन पाई। इससे नगर निगम और सड़क निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोग कहते हैं कि जब पुलिस लाइन के सामने की सड़क की यह हालत है, तो बाकी इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

ग्रामीणों का हल्ला: हाथियों से परेशान होकर सड़क पर बैठकर किया NH-143 जाम

रांची झारखंड में जंगली हाथियों का झुंड लगातार सक्रिय है। वहीं, सिमडेगा में हाथियों के झुंड से परेशान होकर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों ने सिमडेगा राउरकेला एनएच-143 पर सड़क जाम कर विरोध जताया है। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि ठेठईटांगर प्रखंड के जोराम पावर ग्रिड के पास हाथियों के झुंड ने उत्पात मचाया हुआ है। हाथियों के झुंड को देख कोई भी वहां से गुजरने से डरता है। स्कूली बच्चे भी आए दिन वहां से गुजरते हैं जिसके चलते उनकी जान पर भी खतरा मंडराया रहता है। वहीं, इसके चलते हाथियों से परेशान होकर सड़क पर बैठ कर आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच जाम कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से हाथियों का झुंड गांव के आसपास घूम रहा है, जिससे फसलों को नुकसान हो रहा है और लोगों में दहशत का माहौल है। हाथी के दहशत के कारण ग्रामीण खेत के फसल भी नहीं काट पा रहे हैं।  

दिन की धूप में भी ठंड का असर, झारखंड की सड़कों पर लोग सन्नाटे में

रांची झारखंड में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। ठंड का असर अब स्पष्ट रूप से महसूस होने लगा है। लगातार राज्य में न्यूनतम तापमान गिर रहा है जिससे दिन -प्रतिदिन कनकनी बढ़ रही है। मौसम विभाग के मुताबिक कई जिलों में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक अचानक गिर गया है। 24 घंटे में यह 8 डिग्री तक पहुंच गया है। गुमला में सबसे कम 8.8 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक जहां एक स्वेटर पहनना मुश्किल था। वहीं, अब लोग दो स्वेटर, मफलर और इनर तक पहनकर बाहर निकल रहे हैं। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है जैसे कर्फ्यू लग गया हो। दोपहर में धूप सेकना इतना मुश्किल हो गया है क्योंकि, हवा में इतनी कंपकंपी है कि मानो कि हिमालय की ठंडी हवा सीधा शरीर को छू रही हो। सुबह-शाम विशेष एहतियात बरतने की जरूरत जानकारों के अनुसार उत्तरी हवाओं के सक्रिय रहने से रात का पारा तेजी से नीचे जा रहा है। ग्रामीण इलाकों और खुले क्षेत्रों में धुंध की तीव्रता और अधिक रहेगा। मौसम विभाग ने बताया कि बदलते तापमान के कारण लोगों से सुबह-शाम विशेष एहतियात बरतने की अपील की गई है। इधर, गुमला में मंगलवार को सबसे कम न्यूनतम तापमान लगभग 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे अधिक तापमान गोड्डा में 28.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।  

शराबबंदी पर जीतन राम मांझी का बयान— कानून सही, बदनामी की असली वजह कुछ और

भोजपुर बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी अब तक का सबसे अच्छा कानून है और इससे बढ़कर कोई कानून हो ही नहीं सकता। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शराब ने उनके परिवार में भी कई मुश्किलें पैदा की थीं, जिसके बाद उन्होंने शराब छोड़ने की सलाह दी। शराबबंदी बेहद जरूरी इस वजह से बताया उन्होंने कहा कि शराब छोड़ने के बाद ही वे शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ पाए और उनका भाई इंस्पेक्टर बना, लेकिन आज वो इस दुनिया में नहीं है। मांझी ने कहा कि शराब इंसान को निशाचर बना देती है। इसलिए शराबबंदी बेहद जरूरी है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि पदाधिकारी और ब्रोकर्स की वजह से बिहार शराबबंदी की बदनामी झेलते आया है। मांझी ने आरोप लगाया कि कई पदाधिकारी और ब्रोकर्स मिलकर शराबबंदी को बदनाम कर रहे हैं। 'असर कमज़ोर पड़ रहा' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून की मंशा साफ है लेकिन बीच की कड़ी में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण इसका असर कमज़ोर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को निगरानी तंत्र को और मजबूत करना चाहिए ताकि गलत तरीके से शराब बेचने वाले और कानून का दुरुपयोग करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सके। मांझी के इस बयान ने एक बार फिर शराबबंदी को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अयोध्या में रहकर भी कार्यक्रम से दूरी… विनय कटियार बोले— हम फ्रीस्टाइल आदमी हैं

पटना  बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन से उभरे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बड़े नेताओं में शामिल विनय कटियार अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संपूर्ण होने के बाद 25 नवंबर को आयोजित ध्वजारोहण समारोह में शामिल नहीं हुए। रामजन्मभूमि ट्रस्ट से निमंत्रण मिलने के बाद भी कार्यक्रम में नहीं जाने को लेकर किसी नाराजगी की वजह से इनकार करते हुए कटियार ने कहा कि वो फ्रीस्टाइल आदमी हैं। कटियार ने कहा कि कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने इलाज के लिए कानपुर जाना था, इसलिए वो अयोध्या से निकल आए। बता दें कि मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में कल राम मंदिर पर ध्वजा का आरोहण संपन्न हुआ था।   राम मंदिर ध्वजारोहण के दिन 25 नवंबर को ही विनय कटियार ने अपने लखनऊ आवास पर एक पत्रकार से बातचीत में कहा कि सब लोग तो वहां आ गए थे। कटियार ने कहा कि उनको लखनऊ आना था और कानपुर में मुंह का इलाज करवाने भी जाना है, इसलिए वो अयोध्या से निकल आए। कटियार ने कहा कि उन्हें निमंत्रण आया था, लेकिन वो गए नहीं। उन्होंने कहा- ‘अरे कहां झंझट में पड़ें। मंदिर तो बन ही गया। केवल झंडा फहराना है। देश के प्रधानमंत्री आ गए। और भी प्रमुख लोग आए। केवल झंडा ही फहराना था। हमारे घर से उसका शिखर दिखाई देता है। उन्होंने झंडा फहरा दिया। हम उसके बाद यहां चला आए।’ पत्रकार उनके मन की बात निकालने की कोशिश करता है, लेकिन कटियार खुलकर नहीं बोलते हैं। कार्यक्रम में नहीं रहने के सवाल पर कटियार कहते हैं- ‘इसकी कोई जरूरत नहीं थी। देश के प्रधानमंत्री आ गए। सब कुछ आ गए। सब तो आ गए वहां। फिर क्या दिक्कत है।’ पत्रकार ने और कुरेदते हुए अंदर की बात (कथित नाराजगी) का सवाल पूछा तो कटियार ने कहा- ‘कोई अंदर की बात नहीं है। हम फ्रीस्टाइल आदमी हैं। मंदिर ही बनवाया है। उसमें सब लोग पहुंच गए और हम निकल आए थे। चारों तरफ रोड जाम कर दिए गए थे। प्रधानमंत्री आए हैं। स्वाभाविक है, उनकी भी सुरक्षा का सवाल है।’ असंतुष्ट होने के सवाल पर कटियार ने कहा कि उन्हें लखनऊ-कानपुर आना था, इसलिए नहीं गए। उन्होंने कहा कि वो असंतुष्ट नहीं हैं।  

शेरपुर-दिघवारा परियोजना शीघ्र पूरा हो: अधिकारियों को सीएम नीतीश कुमार की सख्त हिदायत

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दानापुर-बिहटा ऐलिवेटेड कॉरिडोर तथा शेरपुर-दिघवारा गंगा पुल के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने दानापुर-बिहटा ऐलिवेटेड कॉरिडोर का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ली। इस दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के पूर्ण होने से बिहटा से कोईलवर तक यातायात सुगम होगा। पटना शहर को एन0एच0-922 और कोईलवर पुल से जोड़ने में मदद मिलेगी। यह एनएच-922 को रिंग रोड (कन्हौली मोड़) एनएच-139 को एम्स गोलम्बर से जोड़नेवाले एक महत्त्वपूर्ण फीडर कॉरिडोर के रूप में कार्य करेगा। इस परियोजना के तहत बिहटा अन्तर्राट्रीय हवाई अड्डा के लिये विशेष कनेक्टिविटी मिलेगी। उन्होंने कहा कि हम लगातार इस परियोजना का निरीक्षण करते रहे हैं और समय-समय पर इसके संबंध में सुझाव देते रहे हैं। कार्य को जल्द से जल्द से पूर्ण करें। मुख्यमंत्री ने शेरपुर-दिघवारा गंगा पुल के निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। पटना शहर पर यातायात का बोझ कम होगा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शेरपुर-दिघवारा परियाजना के पूर्ण होने से पटना शहर पर यातायात का बोझ कम होगा साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था और सुदृढ़ एवं सुगम होगी। उन्होंने कहा कि छपरा, सीवान, गोपालगंज और हाजीपुर की ओर जानेवाले लोगों को अब पटना शहर से होकर गुजरने की आवश्यता नहीं होगी। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्यवासियों को एक जगह से दूसरे जगह जाने का वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। हम लगातार इसका निरीक्षण करते रहे हैं, जल्द से जल्द इस कार्य को पूर्ण करें। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, पथ निर्माण विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुदुकलकट्टी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

पहले एक सड़क की दूरी, अब 200 मीटर का फ़ासला… नीतीश–लालू संबंधों में नई खाई?

पटना समाजवादी विचारधारा के दलों में एक-दूसरे के लंबे समय तक साथी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बीच दूरियां और बढ़ गई हैं। दोनों की राजनीतिक दूरियां पिछले 20 साल में समय-काल के हिसाब से बदलती रही हैं, लेकिन दोनों एक सड़क के आर-पार रहते थे। नई सरकार में नीतीश और लालू के आवास के बीच की दूरी अब लगभग 200 मीटर पार कर जाएगी। भवन निर्माण विभाग ने पूर्व सीएम राबड़ी देवी को विधान परिषद में विपक्ष की नेता की हैसियत से मिले 10, सर्कुलर रोड वाले बंगले का आवंटन रद्द कर दिया है और उन्हें 39, हार्डिंग रोड पर नया सरकारी आवास दिया गया है। राबड़ी के सीएम पद से हटने के बाद से परिवार दो दशक से इसी बंगले में रहा रहा था।   लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने राबड़ी देवी का बंगला बदलने को लालू यादव के अपमान की कोशिश बताया है। रोहिणी का इसी आवास पर चुनावी हार के कारण तेजस्वी यादव से झगड़ा हुआ था। लड़ाई के बाद घर से निकली रोहिणी ने कहा था कि उनका कोई परिवार नहीं है, उनको परिवार से निकाल दिया गया है। रोहिणी ने ट्वीट करके कहा है- ‘सुशासन बाबू का विकास मॉडल। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना पहली प्राथमिकता। घर से तो निकाल देंगे, बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालिएगा। सेहत नहीं तो कम से कम लालू के राजनीतिक कद का ही सम्मान रखते।’ लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने आवास बदलने को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई कहा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यह कदम नीतीश सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बढ़ते दखल का प्रमाण है। बता दें कि सरकार ने कैबिनेट में शामिल 26 मंत्रियों के लिए आवास आवंटित कर दिया है। इसमें 13 पुराने मंत्रियों का बंगला नहीं बदला गया है। लेकिन 13 नए मंत्रियों को जो आवास आवंटित हुए हैं, उसमें तेज प्रताप यादव का 26 एम स्ट्रैंड रोड वाला आवास भी शामिल है। अब यह आवास बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र रौशन को मिल गया है। नीतीश कैबिनेट के 13 नए मंत्रियों के आवास का पता दिलीप कुमार जायसवाल, उद्योग मंत्री- 2, स्ट्रैंड रोड सुरेंद्र मेहता, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री- 33, हार्डिंग रोड श्रेयसी सिंह, आईटी एवं खेल मंत्री- 4, स्ट्रैंड रोड संजय सिंह टाइगर, श्रम संसाधन मंत्री- 41, हार्डिंग रोड अरुण शंकर प्रसाद, पर्यटन तथा कला संस्कृति मंत्री- 25, हार्डिंग रोड रामकृपाल यादव, कृषि मंत्री- 43, हार्डिंग रोड नारायण प्रसाद, आपदा प्रबंधन मंत्री- 12, हार्डिंग रोड रमा निषाद, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री- 3, सर्कुलर रोड लखेंद्र कुमार रौशन, एससी एवं एसटी कल्याण मंत्री- 26 एम, स्ट्रैंड रोड प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, सहकारिता एवं पर्यावरण मंत्री- 27, हार्डिंग रोड संजय पासवान, गन्ना उद्योग मंत्री- 21, हार्डिंग रोड संजय सिंह, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री- 13, हार्डिंग रोड दीपक प्रकाश, पंचायती राज मंत्री- 24 एम, स्ट्रैंड रोड  

राजनीति और सरकारी सुविधाएं अस्थायी: तेज प्रताप यादव के बाद राबड़ी देवी को बंगला छोड़ना पड़ेगा

पटना बिहार में सत्ता परिवर्तन का असर अब नेताओं के सरकारी आवासों पर दिखने लगा है. नई सरकार के गठन के बाद भवन निर्माण विभाग ने पुराने आवंटन की समीक्षा शुरू कर दी है और कई नेताओं को अपने सरकारी घर खाली करने पड़ रहे हैं. इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेज प्रताप यादव का नाम भी शामिल हो गया है. बता दें कि तेज प्रताप यादव बिहार सरकार में पूर्व मंत्री भी रहे हैं और फिलहाल पटना के 26 M स्ट्रैंड रोड वाले आवास में रह रहे थे. यह बंगला उन्हें हसनपुर से जीत के बाद 2020 में आवंटित किया गया था. लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीट बदली और महुआ से चुनाव लड़ा. परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. विधायक पद समाप्त होने के साथ अब उनका आवास भी उनसे वापस ले लिया गया है और इसे नई सरकार में मंत्री बने लखिन्दर कुमार रौशन को आवंटित कर दिया गया है. राबड़ी देवी को भी बदलना होगा आवास तेज प्रताप के बाद उनकी मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर भी आवास बदलाव का निर्देश लागू हुआ है. वे लगभग दो दशकों से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले में रह रही थीं. हालांकि अब बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्हें नया आवास दिया जा रहा है. भवन निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास में बंगला नंबर 39 नए आधिकारिक निवास के रूप में आवंटित किया गया है. नीतिगत नियमों के तहत हो रही कार्रवाई भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियम आधारित है. पद और दायित्व बदलने पर आवास पुनः आवंटित करना अनिवार्य होता है. हाल ही में जारी सूची में मंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं के लिए नए आवास तय किए गए हैं. साफ है कि बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन का प्रभाव अब मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तक पहुंच चुका है. राबड़ी देवी को बंगला खाली करना पड़ेगा  . सत्ता परिवर्तन के बाद बिहार में केवल मंत्रिपरिषद ही नहीं बदला, बल्कि अब नेताओं के सरकारी ठिकानों का पता भी बदलने लगा है. राज्य सरकार के भवन निर्माण विभाग ने फैसला लिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला छोड़ना पड़ेगा. प्रशासन की ओर से इसके निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं और उनके लिए नया बंगला भी आवंटित कर दिया गया है. बता दें कि राबड़ी देवी विधान परिषद् में विपक्ष की नेता हैं और करीब 16 जनवरी 2006 से 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रह रही थीं. अब सरकारी आदेश के तहत उन्हें हार्डिंग रोड स्थित केंद्रीय पूल आवास बंगला नंबर 39 में स्थानांतरित किए जाने का निर्णय हुआ है. भवन निर्माण विभाग ने कहा है कि विधान परिषद् में विपक्ष के नेता के लिए यह बंगला निर्धारित किया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब वह पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं और वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी तो उन्हें बंगला क्यों खाली करना पड़ा. दरअसल, इसके पीछे की वजह तेजस्वी यादव का आठ साल पहले उठाया गया वह कदम है जो इस फैसले का कारण बना है. जो लड़ाई शुरू की थी, वही भारी पड़ी राबड़ी देवी के बंगले को लेकर राजद समर्थकों में यह चर्चा है कि राबड़ी देवी के पता में बदला होना सत्ता में बदलाव का असर है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी आदेश की जड़ अदालत का वह फैसला है जिसे तेजस्वी यादव ने खुद आगे बढ़ाया था. वास्तविकता तो यह है कि जिस ‘सिस्टम सुधार’ की लड़ाई तेजस्वी यादव ने लड़ी आज वही सिस्टम उनके परिवार के लिए कड़ा साबित हो गया है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा तो इसकी वजह मौजूदा नीतीश सरकार नहीं, बल्कि उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा दायर वह याचिका है जिसके आधार पर पटना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास देने की व्यवस्था खत्म कर दी थी. कब और कैसे मिला था 10, सर्कुलर रोड? राबड़ी देवी जिस बंगले में वर्तमान में रह रही हैं, वह उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आवंटित किया गया था. बता दें कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के सत्ता में लौटने के बाद एक बड़ा निर्णय लिया गया था, वह यह कि बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं मिलेंगी. इसी व्यवस्था के तहत यह आवास राबड़ी देवी को मिला और वे 16 जनवरी 2006 से यहां रह रही हैं. लेकिन, जब बिहार की सियासत आगे बढ़ी तो तेजस्वी यादव के एक कदम ने इसके नियम बदल दिए. तेजस्वी का केस जिसने परंपरा बदल दी मामला 2017 का है. तेजस्वी यादव उस समय बिहार के उपमुख्यमंत्री थे और 5, देशरत्न मार्ग स्थित आधिकारिक आवास में रहते थे. लेकिन जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ फिर से सरकार बनाई, तब तेजस्वी यादव को बंगला खाली करने का आदेश दिया गया. सरकार की ओर से कहा गया कि वह बंगला उपमुख्यमंत्री के पद का है, न कि किसी व्यक्ति का. सरकारी नोटिस के बाद तेजस्वी यादव हाईकोर्ट पहुंचे और दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और उच्च पदों से जुड़े लोगों के आवास और सुविधाओं में नियमों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए. हाईकोर्ट की जांच और बड़ा खुलासा हाईकोर्ट की डबल बेंच में मुख्य न्यायाधीश एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान भवन निर्माण विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी. दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि- 2010 में सरकारी नियमों में बदलाव किया गया था और उसके बाद राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतन राम मांझी, डॉ. जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को आजीवन सरकारी आवास, सुरक्षा और स्टाफ की सुविधा दी गई थी. यही वह बिंदु था जिससे अदालत असहमत हुई. 2019 का वो फैसला जिसका असर अब दिख रहा 19 फरवरी 2019 को पटना हाईकोर्ट ने तेजस्वी यादव की याचिका खारिज करते हुए उनका आवास खाली कराने का आदेश दिया. लेकिन इसके साथ ही अदालत ने एक बड़ा बदलाव लागू किया- पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला और … Read more