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मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं। ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। बाहर निकलली और मैडम के बतइली "आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।" 3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए। भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं। हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: 1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली। 2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे। 3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं। 4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए। 5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे। 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

बिहार के अस्पताल में दर्दनाक हादसा, आग लगने से 7 मरीजों की जान गई, कई घायल

मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर में गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। ब्रह्मपुरा इलाका स्थित 'प्रसाद हॉस्पिटल' में सुबह अचानक भीषण आग लग गई। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग के कारण पूरे अस्पताल भवन में घना धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इन मरीजों की हुई मौत – शशांक कुमार, औराई, मुजफ्फरपुर  गीता देवी, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर  ⁠उदय कुमार, तरियानी, शिवहर  कृष्ण नंदन  चंचला कुमारी ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में थे भर्ती- विशंभरपुर शिवहर के रहने वाले उदय कुमार चार दिन से अस्पातल में भर्ती थे। ब्रेन सर्जरी होने के बाद आईसीयू में थे। इनसे मिलने पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा अस्पताल में थीं। साला नीतीश भी था। सभी लोग साथ में थे। शोर होने पर जानकारी मिली, लेकिन जब तक पहुंचे, तब तक उदय कुमार की मौत हो चुकी थी। दिस्तौलिया, कथैया की रहने वाली गीता देवी एक जून को भर्ती हुई थीं। शुगर और बीपी से ग्रसित थीं। उनका डायलिसिस चल रहा था। ये जानकारी उनके बेटे अनीश ठाकुर ने दी। गोरिगमा डीह, मीनापुर के रहने वाले कृष्णनंदन सिंह डॉ. संजीव के यूनिट में इलाजरत थे। फेफड़ा में पानी था। 22 मई से भर्ती थे। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन कर्मियों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अस्पताल के विभिन्न वार्डों में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। आईसीयू में मौजूद मरीजों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। देखते ही देखते जहरीला धुआं पूरे अस्पताल में फैल गया, जिससे कई मरीजों की हालत और गंभीर हो गई। कई मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें आसपास के सुरक्षित अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आईसीयू वार्ड धुएं से भर गया था- दमकल कर्मी अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। जब दमकल की टीम अस्पताल पहुंची तो आईसीयू वार्ड पूरी तरह धुएं से भरा हुआ था। बचाव अभियान के दौरान कई मरीजों को गंभीर स्थिति में बाहर निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि कई मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। शॉर्ट सर्किट माना जा रहा आग की वजह शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप कई परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर वहां से चले गए। इससे कई मरीज समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच गए। एक पीड़ित स्वजन ने बताया कि उनके पिता आईसीयू में भर्ती थे और आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकालने में काफी देर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन से किसी प्रकार की मदद नहीं की गई। परिजनों का यह भी कहना है कि हादसे के बाद मृतकों के शवों की जानकारी देने में भी अस्पताल प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। मृतकों की संख्या और हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 13 बेड के वार्ड में 15 मरीज DM सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि 13 बेड लगे हुए थे, जिसमें 15 मरीज भर्ती थे। अभी 3 मरीजों के मरने की पुष्टि हुई है। आग की घटना के चलते ICU वार्ड के इंचार्ज भी झुलस गए हैं, जिन्हें बगल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों का भी रेस्क्यू कर आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बुजुर्ग महिला ने जान बचाकर गार्ड को जानकारी बीपी लो होने के बाद एक बुजर्ग महिला को इसी ICU वार्ड में भर्ती कराया गया था। आग लगने की घटना के बीच महिला ने न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि गार्ड को भी घटना के बारे में बताया। मरीजों के स्वजनों ने डीएम से बताई आपबीती डीएम ने मरीजों के स्वजनों से बात की। इस दौरान मरीजों के स्वजनों ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल सिस्टम काम नहीं कर रहा था। अस्पताल की अव्यवस्था के बारे में शिकायत की। एक स्वजन ने बताया कि सीढ़ी का गेट बंद था, जिसकी वजह से लोगों को नहीं बचाया जा सका। उनका कहना है कि अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।

सिवान से पटना तक सफर पर बढ़ा खर्च, यात्रियों को अब देने होंगे ज्यादा पैसे

 सिवान  बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने बसों के किराये में बढ़ोतरी कर दी है। अब साधारण से लेकर डीलक्स बसों में सफर करना महंगा हो गया है। 2021 की तुलना में अब यात्रियों को 15 प्रतिशत अधिक पैसे देने होंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीलक्स बसों से सिवान से पटना (वाया छपरा) का सफर पहले 213 रुपये में होता था, अब उसे लिए यात्रियों को 245 रुपये देने होंगे। इसी प्रकार लग्जरी बसों का किराया भी काफी बढ़ गया है। किराये में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे में छपरा, हाजीपुर, पटना आने-जाने वाले यात्रियों का मासिक बजट बिगड़ना तय माना जा रहा है। बता दें कि डीजल और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इससे निगम को लगातार हीं आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। डीलक्स बस से सिवान से छपरा के लिए लगेगा 114 रुपये किराया गौर करने वाली बात है कि डीलक्स बस से सिवान से दारौंदा के लिए पहले 30 रुपये किराया देना पड़ता था, जो अब बढ़कर 35 रुपये हो गया है। एकमा के लिए पहले 50 रुपये और अब 58 रुपये, छपरा के लिए पहले 98 रुपये और अब 114 रुपये, शीतलपुर के लिए 154 रुपये और अब 181 रुपये तथा हाजीपुर के लिए पहले 186 रुपये और अब 219 रुपये किराया देना होगा। इसी प्रकार पटना से हाजीपुर तक सफर के लिए 58 रुपये, शीतलपुर के लिए 91 रुपये, छपरा के लिए 148 रुपये, एकमा के लिए 200 रुपये तथा सिवान के लिए 245 रुपये किराया देना होगा। पीपीपी मोड में चलने वाली गाड़ियों पर भी लागू होगा किराया गौर करने वाली बात है कि किराया में यह बढ़ोतरी केवल निगम की अपनी बसों के लिए हीं नहीं हैं, बल्कि लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) योजना के तहत चलने वाली सभी निजी बसों पर भी यहीं किराया लागू होगा। इस नए आदेश के जारी होने के साथ हीं किराये से संबंधित पूर्व में निर्गत सभी आदेश व नियम अब संशोधित माने जाएंगे। वहीं निजी बसों का किराया ट्रांसपोर्टरों की आगामी दिनों में होने वाली बैठक के बाद बढ़ने की संभावना है। शहर के मजहरूल हक बस स्टैंड स्थित सरकारी बस डिपो से मिली जानकारी के अनुसार, सिवान से छपरा होते हुए पटना जाने के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की कुल पांच बसें चलाई जाती है। इसमें से एक बस में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण उसका परिचालन पूरी तरह से बंद है। ऐसे में वर्तमान समय में चार बसें अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। पदाधिकारियों की मानें तो पहली बस सुबह पांच बजे पटना के लिए रवाना होती है, जो पटना से दोपहर 12.20 बजे यात्रियों को लेकर लौटती है। वहीं, दूसरी बस दोपहर 12.20 बजे व तीसरी बस दोपहर 1.20 बजे पटना जाती है। वहीं पटना से शाम पांच बजे व 5.30 बजे वापसी करती हैं।  

पश्चिम बंगाल कार्रवाई के बाद सीमावर्ती बिहार में चौकसी सख्त, वाहनों की गहन जांच जारी

किशनगंज पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के सहारे निवास कर रहे लोगों के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई का असर अब सीमावर्ती बिहार-नेपाल क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई के दबाव में कुछ संदिग्ध तत्व सीमावर्ती रास्तों का उपयोग कर बिहार और नेपाल की ओर रुख कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए किशनगंज जिले से सटे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया है। सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने किशनगंज के लगभग 122 किलोमीटर लंबे भारत-नेपाल बॉर्डर पर अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में वाहनों और यात्रियों की हो रही जांच दिघलबैंक, ठाकुरगंज, गलगलिया, खानीबाड़ी और फतेहपुर सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। सीमा से होकर गुजरने वाले वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जबकि यात्रियों की पहचान का सत्यापन भी किया जा रहा है। सीमा चौकियों के अलावा वैकल्पिक रास्तों और पगडंडियों पर भी सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध आवाजाही को रोका जा सके। सीमा पार करने के नियम हुए सख्त सुरक्षा कारणों से सीमा पार करने की प्रक्रिया को भी अधिक कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अब केवल आधार कार्ड के आधार पर सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यात्रियों को वोटर पहचान पत्र, पासपोर्ट अथवा अन्य वैध सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। वहीं, बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा। घुसपैठ और तस्करी रोकना प्राथमिकता सीमावर्ती इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। खुली भारत-नेपाल सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठ, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं हैं। एसएसबी के सहायक कमांडेंट प्रियरंजन चकमा ने बताया कि सीमा क्षेत्र में गश्त और निगरानी को और मजबूत किया गया है। जवानों को हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई है तथा संदिग्ध व्यक्तियों की गहन जांच की जा रही है। आम लोगों से भी सहयोग की अपील सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन अथवा सुरक्षा बलों को देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की सतर्कता से भी मजबूत होती है।  

उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने वाले विश्वविद्यालयों को जल्द मिलेगा वेतन-पेंशन का भुगतान

पटना  राज्यपाल सैयद अता हसनैन की सख्ती के बाद राज्य के पांच विश्वविद्यालयों ने पूर्वमें खर्च राशि का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने 213 करोड़ 34 लाख रुपये का हिसाब नहीं दिया था। तब राज्यपाल ने इस मामले में कुलसचिवों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इन विश्वविद्यालयों ने अपना हिसाब क्लियर करते हुए पूरी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। विश्वविद्यालयों को वेतन-पेंशन में 434.86 करोड़ जल्द मिलेगा इसे महालेखाकार कार्यालय को उपलब्ध करा दिया गया है क्योंकि इस मामले में महालेखाकार कार्यालय से वित्तीय अनियमितता का संदेह जताया था। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालयों की आडिट में कमियों काे भी चिन्हित किया है जिस पर स्पष्टीकरण कुलसचिवों से मांगा गया है। वहीं विभाग द्वारा अगले सप्ताह तक विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मियों के पेंशन मद में तीन माह का वेतन एकमुश्त राशि 434 करोड़ 86 लाख रुपये जारी करने की तैयारी हो रही है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो.एनके अग्रवाल ने अन्य विश्वविद्यालयों से भी खर्च राशि का आडिट रिपोर्ट के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने को कहा है। विभाग के स्तर से महालेखाकार कार्यालय को भेजी गई आडिट रिपोर्ट उन्होंने अक्टूबर, 2021 से नवंबर, 2022 के बीच महालेखाकार द्वारा किए गए आडिट में पायी गयी कमियों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा है कि जिस तरह पांच विश्वविद्यालयों ने सभी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा किया है उसी तरह अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी उपयोगिता प्रमाण पत्र जल्द जमा किया जाना चाहिए। उन विश्वविद्यालयों के लिए वेतन और पेंशन के भुगतान के संबंध में, जितनी जल्दी संभव हो, निर्णय लिया जा सकता है, जिनकी उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में लंबित मामलों की दर शून्य प्रतिशत है।

कोचिंग सेंटर विवाद के बाद बिहार में सियासत गर्म, छात्रों की पढ़ाई पर असर

पटना राजधानी पटना में खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर में तोड़फोड़, मारपीट और बवाल की घटना से सभी हैरान हैं। खान सर ने छात्रों से कह दिया है कि कोचिंग सेंटर को अगले आदेश तक बंद रखा जाएगा। इधर अचानक कोचिंग सेंटर बंद होने से कई छात्र परेशान दिखे और खान सर के समर्थन में सड़क पर भी बैठ गए। इस पूरे हो-हंगामे ने सम्राट चौधरी सरकार का भी ध्यान खींचा है। बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस घटना के बाद स्पष्ट तौर से कहा है कि अब राज्य में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाई जाएगी। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि सरकार चाहती है कि कोचिंग संस्थानों पर उसका नियंत्रण हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों ताकि छात्रों को परेशानी ना झेलनी पड़े। खान सर के कोचिंग सेंटर में हुई घटना को लेकर शुरू से ही कहा जा रहा है कि यह दो कोचिंग संस्थानों के आपसी वर्चस्व का नतीजा है। खुद खान सर ने पास के ही एक अन्य कोचिंग सेंटर को इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार बताया। उनका कहना था कि छात्रों से कम फीस लेने की वजह से दूसरे कोचिंग सेंटर वाले नाराज चल रहे थे और उन्होंने पहले धमकी भी दी थी। बहरहाल इस तोड़फोड़ और बवाल के बाद सरकार ने अब सख्त रवैया अपनाने का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने कहा है कि सरकार अगले तीन महीने में कोचिंग संस्थानों के लिए नई नीति बनाएगी। एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोचिंग सेंटर ये सब जो षड़यंत्र कर रहे हैं वो सब अब बंद हो जाएगा। कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसेंगे। कोचिंग संस्थान सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है। इससे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई है। मंत्री ने आगे कहा कि मंगलवार को कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में वो खुद डीजीपी से बात करेंगे और पूरे मामले की जांच करवाएंगे। जो भी इसमें दोषी पाया जाएग उसपर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार विधि-व्यवस्था के नियंत्रण में जो भी बाधा होगी उसे दूर करेगी। जो गड़बड़ करेगा वो जेल के अंदर रहेगा और जिसने भी यह परिस्थिति उत्पन्न की है उसे पुलिस छोड़ेगी नहीं। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया आपको बता दें कि खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुए हमले के मामले में पुलिस ताबड़तोड़ ऐक्शन ले रही है। अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें एक शख्स एक अन्य कोचिंग सेंटर का डायरेक्टर बताया जा रहा है। पुलिस ने 4 लोगों पर नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। कोचिंग सेंटर पर हमले और तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। इसमें कुछ लोग खान सर के गार्ड की बेरहमी से धुनाई करते और कोचिंग सेंटर पर ईंट फेंकते नजर आ रहे हैं। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई में जुटी हुई है।

मतदाता सूची सुधार अभियान: धनबाद के 2372 बूथों पर रोज 3 घंटे मिलेंगी सेवाएं

धनबाद  झारखंड में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले की तैयारी की प्रक्रिया चल रही है। 30 जून से एसआइआर होना है। मतदाताओं की सुविधा और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियों को लेकर धनबाद जिला निर्वाचन विभाग ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। चार जून से धनबाद जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। इस संबंध में उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी आदित्य रंजन जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेंगे। जिला निर्वाचन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, बीएलओ की बूथ पर नियमित उपस्थिति से मतदाताओं को विभिन्न कार्यों के लिए कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। निर्धारित समय के दौरान अनमैप्ड मतदाताओं की मैपिंग, मतदाता सूची से संबंधित त्रुटियों का सुधार, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पता परिवर्तन तथा अन्य निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा सकेंगे। धनबाद में कुल 2,372 मतदान केंद्र वर्तमान में जिले में 2,372 मतदान केंद्र हैं, जहां बीएलओ प्रतिदिन तीन घंटे उपलब्ध रहेंगे। हालांकि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 2,484 हो जाएगी। जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कालिदास मुंडा ने बताया कि प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन तीन घंटे अपने संबंधित बूथ पर रहना अनिवार्य होगा। इससे आम मतदाताओं को सीधे बूथ स्तर पर सेवाएं मिल सकेंगी और अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान व मैपिंग का कार्य भी तेजी से पूरा होगा। मदताता सूची को अद्यतन बनाने में मिलेगी मदद उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से एसआईआर अभियान को भी गति मिलेगी और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध एवं अद्यतन बनाने में सहायता मिलेगी। निर्वाचन विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से मतदाताओं की भागीदारी बढ़ेगी और चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाया जा सकेगा।  

RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची  राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है। यह शिकायत शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि ने शिकायत कर खुलासा किया है। मालूम हो कि इससे पहले भी बुंडू ट्रामा सेंटर में आउटसोर्स के माध्यम से बहाली में पैसे लेने का मामला आया था जिस पर कानूनी कार्रवाई चल रही है और और एक कर्मचारी अजय सेठ को भी हटाया गया है शिकायत क बाद निदेशक डा. राजकुमार ने जांच कमेटी गठित किया है। उधर समानता एजेंसी की और से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के अनुसार रिम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत मानव बल उपलब्ध कराने के लिए एम-एस समंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर, लिफ्ट अपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (वार्ड बाय), लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य पदों पर मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी को करीब 1000 मानव बल नियुक्त करना है, लेकिन अभी भी कई पद खाली रखे गए हैं। नियुक्ति के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि ली गई। आरोप है कि यह रकम संबंधित रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित कराने के एवज में वसूली गई। शिकायतकर्ता ने कहा है कि कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में जमीन, गहने तक बेच दिए या कर्ज लेकर राशि का भुगतान किया। पत्र में कहा गया है कि बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों का लाभ उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स व्यवस्था में मानव बल रखने के नाम पर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है। अधिकारियों को जानकारी होने का भी आरोप इस कथित वसूली की जानकारी आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है। दावा किया गया है कि इस विषय की जानकारी मौखिक रूप से संस्थान स्तर पर पहले भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले की सूचना रिम्स के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नियुक्तियों की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे। बताया जा रहा है कि अगर प्रबंधन सही से जांच करती है और सभी कर्मियों के रोजगार की सुरक्षा का वादा करती है तो सभी ऐसे पीड़ितों का नाम सामने लाया जाएगा। किन-किन पदों का किया गया उल्लेख शिकायत में जिन पदों पर कथित रूप से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से मानव बल रखने और अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से :     नर्सिंग स्टाफ     कंप्यूटर अपरेटर     वार्ड बाय     मल्टी टास्किंग स्टाफ     लिफ्ट आपरेटर     लैब टेक्नीशियन     पैरामेडिकल स्टाफ     अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पदों के अलावा भी अन्य श्रेणियों में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसकी जांच आवश्यक है। एसीबी जांच की मांग शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड से कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची, भुगतान विवरण, एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। यह भी मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों से कथित रूप से राशि ली गई है, उन्हें राहत प्रदान की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियुक्ति के बदले पैसे लेने जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर पड़ता है। योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर चयन होने की स्थिति में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्स एजेंसियों के चयन, नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और कार्य आवंटन की नियमित आडिट व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। अब निगाहें रिम्स प्रशासन पर शिकायत पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासी परिषद से जुड़े पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें रिम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि

महिला शिक्षिकाओं को नजदीकी पंचायत में पोस्टिंग, पुरुष शिक्षकों का भी होगा ट्रांसफर

पटना बिहार में अपने तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया है कि जून के महीने में टीचरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग होगी। मंगलवार को शेखपुरा में एक कार्यक्रम में मौजूद सीएम सम्राट चौधरी ने यह भी बताया है कि पुरुष और महिला टीचरों की कहां पोस्टिंग होगी। सम्राट चौधरी ने कहा कि उन्होंने निर्देश दिया है कि जो महिला शिक्षिका हैं उन्हें बगल वाले पंचायत में पोस्टिंग मिलेगी। सम्राट चौधरी ने कहा, 'आपकी चिंता सरकार की चिंता है। हमने शिक्षकों को कहा है कि जून के महीने में सभी का ट्रांसफर होगा। जो महिला शिक्षिका हैं उनको उनके पंचायत के बगल वाले पंचायत में पोस्टिंग किया जाए। जो पुरुष शिक्षक हैं उनको बगल के प्रखंड में ट्रांसफर कर दिया जाए। पूरी व्यवस्था उनके घर में रहे। वो घर से जाकर हमारे बच्चों को पढ़ाने का काम कर सकें। हम उनको घर का किराया नहीं दे रहे हैं लेकिन हम व्यवस्था को लेकर उनके साथ खड़े होना चाहते हैं। हमारी शिक्षा की व्यवस्थाा सुदृढ़ हो उसको आगे बढ़ाना है।' छात्रों-अभिभावकों की शिकायतों का 30 दिन में होगा निपटारा- शिक्षा मंत्री इधर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का हर हाल में अधिकतम 30 दिनों के अंदर समाधान करना होगा। निष्पादन नहीं कर सकने की स्थिति में कारण बताना होगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के माध्यम से छात्रवृत्ति, नामांकन, प्रमाण पत्र, विद्यालय संबंधी शिकायतों एवं अन्य शैक्षणिक समस्याओं का समाधान अधिक सरल और सुगम हो सकेगा। शिक्षा विभाग ने इसको लेकर एसओपी बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत सारी शिकायतों की कैटेगरी बनायी जा रही है। इसके बाद उनके निष्पादन के लिए दिनों का निर्धारण किया जाएगा। इसमें यह बताया जाएगा कि किस शिकायत का निष्पादन कितने दिनों में किया जाएगा। किसी प्रकार की शिकायत को किसी सूरत में लंबित नहीं रखा जा सकेगा। शिक्षा विभाग ने तैयार किया है सिंगल विंडो सिस्टम छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की सारी समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर करने के लिए शिक्षा विभाग ने सिंगल विंडो सिस्टम तैयार किया है। विभाग की ओर से टोल-फ्री नंबर 14417 और 18003454417 जारी किया जा चुका है। इन नंबरों पर आमजन शिक्षा, शिक्षण व्यवस्था, छात्र-छात्राओं तथा विद्यालय संबंधी शिकायतें एवं समस्याएं दर्ज कर सकते हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं जनहितकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। अब विद्यार्थी और अभिभावक टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे, जिनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला, रांची-बिहार तक फैला नेटवर्क सामने आया

जमशेदपुर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का बड़ा घोटाला सामने आया है। रसुनिया, रुचाप और चौका जैसी पंचायतों से ये कंप्यूटर जनरेटेड सरकारी प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बांटे गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र रांची जिले के लोगों के हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल के निवासियों को भी फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू तो की, लेकिन अब इसकी रफ्तार इतनी धीमी हो गई है कि लोगों को लीपापोती का डर सताने लगा है। ऐसे खुला घोटाले का राज इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा मई के पहले हफ्ते में हुआ। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने रुचाप पंचायत में पश्चिम बंगाल (बाघुड़िया) के एक व्यक्ति को पकड़ा। वह व्यक्ति प्रखंड के कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता को पैसे देकर अपना फर्जी जन्म प्रमाण पत्र लेकर लौट रहा था। शिकायत के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने जांच के आदेश दिए। पंचायत सचिवों और ऑपरेटर राकेश गुप्ता से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। लेकिन इसके बाद से ही ऑपरेटर राकेश गुप्ता इलाके से गायब है और जांच ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। सरकारी प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल नियम के मुताबिक, एक साल से अधिक उम्र के व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, पंचायत स्तर पर वेरिफिकेशन, प्रखंड कार्यालय की जांच और अंत में अनुमंडल कार्यालय की मंजूरी अनिवार्य होती है। बड़ा सवाल यह है कि इतनी सख्त और लंबी प्रक्रिया होने के बावजूद चार हजार फर्जी आवेदन कैसे पास हो गए? स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि इतना बड़ा खेल बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं चल सकता। सिर्फ निचले कर्मचारियों को मोहरा बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है। इस मामले को लेकर हाल ही में राजनीतिक दलों ने भी धरना-प्रदर्शन कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पहले भी हो चुके हैं ऐसे कांड झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और बोकारो में भी बिल्कुल ऐसा ही रैकेट पकड़ा गया था। वहां भी बाहरी लोगों को झारखंड का निवासी बनाने के लिए हजारों फर्जी प्रमाणपत्र बेचे गए थे। चाकुलिया मामले में पंचायत सचिव और प्रज्ञा केंद्र संचालकों समेत पांच लोग जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद चांडिल प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। अब जनता इस पूरे गिरोह के पर्दाफाश और सख्त कार्रवाई का इंतजार कर रही है। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। -तालेश्वर रविदास, प्रखंड विकास पदाधिकारी, चांडिल