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ठनका-आंधी से बिहार बेहाल: आज भी भारी बारिश का अलर्ट, 70 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती है हवा

पटना  बिहार में आज भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पटना समेत राज्य के 15 जिलों में झमाझम बारिश के साथ वज्रपात और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। आईएमडी की ओर से राज्य भर में खराब मौसम के दुष्प्रभाव से बचने की चेतावनी दी गई है। बीते 24 घंटों में खराब मौसम ने कम से कम 21 लोगों की जान ले ली। 18 की मौत ठनका की चपेट में आने से हुई जबकि तीन लोग आंधी के शिकार बन गए। आज सूर्योदय का वक्त 05:00 AM तो सूर्यास्त शाम 06:43 PM बजे बताया गया है। हवा मेंनमी का स्तर 41 % है, वहीं वायुमंडलीय दबाव 1008 के स्तर पर है। अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री सी के आसपास रहेगा। धूप निकलने पर उमस भी बढ़ेगा। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आज 30 मई शनिवार को राज्य के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर,दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, भोजपुर, सारण, गोपालगंज, गया, सिवान, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, नवादा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है बीते 24 घंटों में बिहार का मौसम खतरनाक रहा है। बेमौसम बारिश ने बिहार में कहर बरपाया। शुक्रवार को मौसम के बुरे प्रभाव से कम से कम 21 लोगों के मौत की खबर है। आंधी से सैंकड़ों की संख्या में पेड़ और बिजली के पोल गिर गए जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई ट्रेनें ट्रैक पर फंसी रहीं तो चार विमानों को डायवर्ट करना पड़ा। आठ डिग्री तक अधिकतम तापमान में आई कमी मौसमविदों के मुताबिक मौसम में आए बदलाव से आठ डिग्री तक अधिकतम तापमान में कमी आई है। सर्वाधिक कमी पटना में 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुई। सीवान के जीरादेई में 8.3 डिग्री, अरवल में 6.6 डिग्री, औरंगाबाद में 8.1 डिग्री, गया में 7.9 डिग्री, डेहरी में 7.8 डिग्री, वैशाली में 6.4 डिग्री, दरभंगा में 3.6 डिग्री, सुपौल में 2.3 डिग्री, भागलपुर में 1.5 डिग्री, शेखपुरा में 5.3 डिग्री, सबौर में 8.2 डिग्री, मधुबनी में दो डिग्री, नालंदा में 7.5 डिग्री, छपरा में 5.6 डिग्री की कमी आई है। शुक्रवार को राज्य में सर्वाधिक अधिकतम तापमान कैमूर में 34.5 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट से भीषण गर्मी से बिहार वासियों को राहत मिली।

मॉडल स्कूलों में नहीं मिले छात्र, झारखंड सरकार ने स्थानीय स्तर पर सीट भरने का लिया फैसला

रांची. राज्य के माॅडल स्कूलों में नामांकन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रवेश परीक्षा के परिणाम में हुई लंबी देरी और बेहद कम सफलता प्रतिशत के कारण इस बार भी हजारों बच्चों का अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई का सपना अधूरा रह गया। इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रह गई। जिसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) ने भी पूरी स्थिति पर खेद जताया है। परिषद अब इस व्यवस्था में बदलाव के संकेत भी दिए हैं। अगले सत्र से प्रवेश परीक्षा का आयोजन खुद जेईपीसी कराने की तैयारी में जुट गया है। ताकि परिणाम और नामांकन प्रक्रिया सरल कर समय पर पूरी की जा सके। जैक द्वारा जारी परिणाम के अनुसार इस वर्ष माॅडल स्कूल प्रवेश परीक्षा में 3479 परीक्षार्थी शामिल हुए, लेकिन मात्र 1165 छात्र-छात्राएं ही सफल हो सके। यानी करीब 35 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा पास कर पाए, जबकि लगभग 65 प्रतिशत सीटें खाली रहने की आशंका पैदा हो गई है। पूरे राज्य में माॅडल स्कूलों में लगभग 3280 सीटें उपलब्ध हैं। ऐसे में अब अधिकांश स्कूलों में नामांकन के बावजूद सीटें रिक्त रह सकती हैं। दूसरी ओर अप्रैल माह तक छात्र-छात्राएं परिणाम का इंतजार करते रहे, जबकि अधिकतर निजी और सरकारी स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी थी। अब जब झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने माॅडल स्कूल परीक्षा 2026 का परिणाम जारी किया है तो स्थिति और चिंताजनक हो गई है। अब स्थानीय स्तर पर भरी जाएंगी सीटें माॅडल स्कूल प्रभाग प्रभारी धीरसेन ए. सोरेंग ने बताया कि खाली सीटों को अब स्थानीय स्तर पर भरने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार भी परिणाम में देरी से सत्र प्रभावित होगा। हालांकि नामांकन पूरा होने के बाद छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी ताकि पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराया जा सके। उन्होंने कहा कि माॅडल स्कूल की वर्तमान नामांकन नीति में बदलाव की जरूरत है। यह योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने इससे हाथ खींच लिया। अब राज्य सरकार इन स्कूलों का संचालन कर रही है, लेकिन पुरानी नीति ही लागू है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए आनलाइन प्रवेश परीक्षा अभी भी चुनौती बनी हुई है। डिजिटल संसाधनों और अंग्रेजी माध्यम की तैयारी के अभाव में बड़ी संख्या में बच्चे सफल नहीं हो पा रहे हैं। रिजल्ट में देरी से बढ़ी परेशानी प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के बाद महीनों तक परिणाम जारी नहीं होने से अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कई अभिभावक इस उम्मीद में बच्चों का अन्य स्कूलों में नामांकन नहीं करा सके कि माडल स्कूल का परिणाम जल्द जारी होगा। लेकिन अप्रैल समाप्त होने के बाद परिणाम आने से अब उनके सामने विकल्प सीमित हो गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों के लिए माडल स्कूल कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सबसे बड़ा विकल्प माने जाते हैं। लेकिन समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अब कई बच्चों को सामान्य सरकारी स्कूलों का रुख करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं सीटें यह पहला अवसर नहीं है जब माडल स्कूलों में नामांकन प्रभावित हुआ हो। पिछले वर्ष भी अगस्त-सितंबर तक नामांकन प्रक्रिया चलती रही थी, जिसके कारण करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली रह गई थीं। इस बार स्थिति और गंभीर दिखाई दे रही है। राज्य के 82 माडल स्कूलों में नए सत्र की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। कई स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पहुंच चुकी हैं और शिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई है। राजधानी रांची में आठ माडल स्कूल संचालित हैं, जहां अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि कई स्कूल अभी भी आधारभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। क्या है माॅडल स्कूल योजना माॅडल स्कूलों की स्थापना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को छठी कक्षा में गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इन स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित शिक्षक और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई थी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा प्राप्त कर सकें। जहां कम खर्च में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा मिलती है।

किराया नहीं चुकाने वालों पर प्रशासन का एक्शन, हजारीबाग में दुकानें होंगी सील

हजारीबाग. नगर निगम की दुकानों का वर्षों से किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक गई है। करोड़ों रुपये बकाया रहने के बाद नगर निगम प्रशासन सख्त मूड में आ गया है। बुधवार को सहायक नगर आयुक्त विपिन कुमार ने राजस्व संग्रह को लेकर समीक्षा बैठक कर साफ शब्दों में कहा कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि जमा नहीं करने वाले दुकानदारों की दुकानों को सील कर नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नगर निगम क्षेत्र के राजस्व संग्रह की समीक्षा बैठक में बताया गया कि शहर के में 21 स्थानों पर लगभग एक हजार से अधिक म्युनिसिपल शॉप संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन दुकानों पर कुल बकाया राशि लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपये पहुंच चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 400 से अधिक ऐसे दुकानदार हैं जिनका किराया दो वर्षों से अधिक समय से लंबित है और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये से अधिक बकाया है। सहायक नगर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि नगर पालिका अधिनियम 2013 के तहत कार्रवाई करते हुए लंबे समय से बकायेदार दुकानों को सील किया जाएगा। इसके साथ ही उन दुकानों का नया आवंटन करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। निगम प्रशासन के इस सख्त रुख से बकायेदारों में हड़कंप मच गया है। बैठक में विशेष रूप से मटवारी स्थित म्युनिसिपल शॉप की स्थिति पर चिंता जताई गई। यहां लगभग 158 दुकानों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 51 लाख से अधिक बकाया है। चलेगा राजस्व वसूली अभियान सहायक नगर आयुक्त ने आज शुक्रवार से विशेष राजस्व वसूली अभियान चलाने का निर्देश देते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई का आदेश दिया। साथ ही कहा कि निगम की संपत्तियों का उपयोग कर व्यापार करने वाले दुकानदार यदि समय पर किराया नहीं देंगे तो अब सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नगर प्रबंधक सह नोडल पदाधिकारी उपेंद्र कुमार, राजस्व निरीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार सूरज कुमार समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।

कोसी नदी के कटाव से खगड़िया का पीपापुल बंद, आवागमन ठप होने से बढ़ी परेशानी

खगड़िया. पसराहा थाना क्षेत्र के पैकात पंचायत को बिरवास के पास जोड़ने वाला कपसिया-बीरवास पीपापुल का एक जेटी मधेपुरा जिला के रतवारा थाना क्षेत्र के कपासिया की ओर से कोशी नदी बढ़ते जलस्तर और कटाव के कारण एप्रोच पथ से बीते गुरुवार को नीचे चला गया जिसके कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के परियोजना अभियंता बबलू कुमार शुक्रवार को इसे चालू करने के लिए पहुंचे किंतु वर्ष के कारण समाचार परेशान तक यह चालू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि एक हाइड्रा मंगाया गया था उससे ऊपर नहीं हुआ दो हाइड्रा मंगा कर इसे ऊपर कर दिया जाएगा। जेटी को खोलकर बीच में एक 12 मीटर का पीपा लगाया जाएगा। इसके बाद जेटी को जोड़ देने से यह चालू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एक जेटी नीचे गया था जिसमें पांच गीडर है वह नीचे चला गया है जो करीब 20 मीटर लंबा है। कोसी में कटवा के कारण ऐसा हुआ है। वह मरमती कार्य को लेकर स्थल पर बने हुए हैं। विभाग की ओर से इस पीपापुल को दुरुस्त कर आगामी 15 जून तक चालू रखने का आदेश दिया है, क्योंकि मानसून की तैयारियों के तहत हर साल 15 जून को इस अस्थायी पुल को हटा लिया जाता है। पैकात पंचायत के मुखिया शिकू पासवान देवठा पंचायत के मुखिया आलोक कुमार ने कि इस पीपा पुल से मधेपुरा खगड़िया भागलपुर की करीब 2 लाख की आबादी का आवागमन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां खगड़िया जिला के गोगरी सर्किल नंबर एक पैकात पंचायत की 15 हजार की आबादी देवठा पंचायत के 10 हजार की आबादी कोयला पंचायत के 15 हजार की आबादी के अतिरिक्त परबत्ता प्रखण्ड के सौर उतरी पंचायत सौर दक्षिणी पंचायत की आबादी तथा भागलपुर जिला के रायपुर आशा टोला आदि के साथ-साथ मधेपुरा जिला की बड़ी आबादी का आवागमन इस मार्ग से होता था जो इस पुल को धसने के बाद से बंद हो गया है। अब उन्हें लंबी दूरी तय करनी होगी गौरतलब है कि इस पीपापुल का उद्घाटन इस वर्ष बीते 28 जनवरी को हुआ था और महज कुछ महीनों के भीतर ही इसके बंद होने से लोगों के सामने आवाजाही का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसकी गुणवत्ता की पोल खोलने लगी है समाचार परेशान तक बिहार राज्य फूल निर्माण विभाग के परियोजना अभियंता बबलू कुमार स्थल पर बने हुए थे उन्होंने कहा कि हाइड्रा मंगाया जा रहा है इसे शीघ्र जोड़कर चालू किया जाएगा

नौकरी का मौका! AIIMS देवघर में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर होगी भर्ती, ऑफलाइन करना होगा आवेदन

देवीपुर/देवघर. एम्स देवघर ने विभिन्न गैर-शैक्षणिक पदों पर संविदा आधारित नियुक्ति के लिए योग्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किया गया है। संस्थान द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से 11 माह के लिए की जाएगी, जिसे आवश्यकता एवं संतोषजनक कार्य प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। भर्ती प्रक्रिया के तहत ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑफिसर, सीनियर प्रोग्रामर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, असिस्टेंट ब्लड ट्रांसफ्यूजन ऑफिसर, लॉ ऑफिसर, सिक्योरिटी ऑफिसर, असिस्टेंट इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल), सैनिटेशन ऑफिसर तथा बायोमेडिकल इंजीनियर समेत कई महत्वपूर्ण पदों को भरा जाएगा। विभिन्न पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता, अनुभव एवं आयु सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है। एम्स देवघर प्रशासन के अनुसार आवेदन केवल ऑफलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित आवेदन प्रपत्र भरकर आवश्यक प्रमाण-पत्रों एवं दस्तावेजों के साथ संस्थान को निर्धारित अवधि के भीतर भेजना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि रोजगार समाचार में विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर निर्धारित की गई है। एम्स देवघर की वेबसाइट पर सब उपलब्ध संस्थान ने अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पूर्व विस्तृत विज्ञापन का अध्ययन करने की सलाह दी है, ताकि पदवार योग्यता, अनुभव, वेतनमान एवं चयन प्रक्रिया संबंधी सभी जानकारियों की सही जानकारी प्राप्त हो सके। एम्स प्रबंधन द्वारा कहा गया है कि यह भर्ती संस्थान की विभिन्न सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इच्छुक अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी एवं आवेदन प्रपत्र के लिए एम्स देवघर की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन कर सकते हैं।

क्या बिहार में बदलने वाला है सियासी समीकरण? सम्राट फैक्टर से बढ़ी नीतीश की चिंता

पटना. बिहार की राजनीति इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रमों और अंदरखाने चल रही सियासी हलचलों के कारण चर्चा के केंद्र में है। विधान परिषद चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है। एक ओर पूर्व सीएम नीतीश कुमार लगातार सक्रिय होकर राजनीतिक संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी और कृष‍ि मंत्री व‍िजय कुमार सिन्‍हा दिल्‍ली में हैं। दिल्ली में चिराग पासवान, ग‍िरिराज सिंह समेत बिहार के कई नेताओं से सीएम की मुलाकात हुई है। इसके अलावा विजय सिन्‍हा की भी कई नेताओं से मुलाकात की तस्‍वीरें सामने आई हैं। इधर, विपक्ष में भी नई हलचल दिखाई दे रही है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव फैमिली में तेजस्वी के बेटे इराज के बर्थडे की पार्टी में एक फिर एकजुटता दिखाई दी है। इसके अलावा दूसरी ओर राजद संगठन में बदलाव की चर्चाओं ने बिहार की सियासत को और गर्म कर दिया है। सत्ता के भीतर क्या बदल रहा है? हाल के दिनों में हुए घटनाक्रमों ने सबसे ज्यादा ध्यान एनडीए के भीतर के समीकरणों पर खींचा है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार लगातार संगठन और सरकार दोनों पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा तब और तेज हो गई, जब नीतीश कुमार अचानक उपमुख्यमंत्री व‍िजय कुमार चौधरी के आवास पहुंच गए। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने सरकार और कैबिनेट के कामकाज को लेकर विस्तार से चर्चा की। जाते समय उनका यह कहना कि शाम को घर आइएगा और एक-एक चीज बताइएगा कि क्या चल रहा है, कई राजनीतिक अर्थ निकाल रहा है। बिहार की सियासत के जानकार विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य बातचीत नहीं, बल्कि सत्ता संरचना के भीतर बदलते संतुलन का संकेत भी हो सकता है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी बेचैनी? राजनीतिक जानकारों की मानें तो बिहार में हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार के फैसलों की गति और शैली दोनों में बदलाव दिखा है। पहले जहां बड़े फैसलों में जदयू नेतृत्व की सीधी भागीदारी महसूस की जाती थी, वहीं अब भाजपा नेतृत्व अधिक सक्रिय नजर आ रहा है। एन्काउंटरों को लेकर भी पिछले दिनों सियासी माहौल गरमाया था। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जदयू सरकार के भीतर अपनी भूमिका को लेकर अतिरिक्त सतर्क हो गई है? या फिर नीतीश कुमार यह संदेश देना चाह रहे हैं कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद राजनीतिक नियंत्रण अब भी उनके हाथ में है। जदयू कार्यालय पहुंचकर दिया संगठनात्मक संदेश विजय चौधरी के आवास से निकलने के बाद नीतीश कुमार सीधे जदयू कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सबकुछ सामान्य है। गौर करें कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार कम से कम 5 बार जदयू कार्यालय पहुंचकर नेताओं कार्यकर्ताओं से मेल-मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि जदयू नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना चाहता है कि पार्टी अब भी पूरी तरह सक्रिय और संगठित है। भाजपा की दिल्ली सक्रियता ने बढ़ाई अटकलें इधर, भाजपा खेमे की दिल्ली सक्रियता ने भी सियासी चर्चाओं को हवा दी है। कृषि मंत्री व‍िजय कुमार सिन्‍हा के दिल्ली दौरे और वहां की बैठकों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे 'मार्गदर्शन प्राप्त करने वाला' दौरा बताया और बिहार के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की बात कही है। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि वहां वे शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। वहां से चिराग पासवान आदि बिहार के नेताओं के साथ बैठक के बाद की उनकी तस्वीरें सामने आई हैं। ऐसे में इसे बिहार में होने वाले एमएलसी चुनाव की रणनीतिक तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हम पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पहले ही सार्वजनिक रूप से एमएलसी चुनाव को लेकर एनडीएम में एक सीट की डिमांड कर चुके हैं। विपक्ष में भी बढ़ी हलचल उधर, विपक्षी खेमे में भी गतिविधियां तेज हैं। तेजस्‍वी यादव के बेटे इराज के पहले जन्मदिन के मौके पर गाजियाबाद में आयोजित कार्यक्रम में परिवार की मौजूदगी को राजद में एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इराज के बर्थडे सेलिब्रेशन में तेज प्रताप यादव मौजूद रहे थे। हालांकि, रोह‍िणी आचार्य की गैरमौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। इस बीच लालू प्रसाद स्‍वास्‍थ्‍य जांच के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। इसके साथ ही राजद में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी अंदरखाने मंथन चल रहा है। पार्टी के भीतर कई नए नामों की चर्चा हो रही है, जिससे संगठनात्मक बदलाव की संभावनाओं को बल मिल रहा है। आनंद मोहन के बयानों से बढ़ी सियासी गर्मी उधर, पूर्व सांसद आनंद मोहन लगातार अपने बयानों से राजनीतिक हलचल बढ़ा रहे हैं। उनके हालिया बयान सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिशें अब तेज हो चुकी हैं और आने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले सभी दल अपने-अपने आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं। बीते साल बिहार की राजनीति में कदम रखने वाले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पुरजोर तरीके से उतरने का एलान किया है। बता दें कि बांकीपुर सीट भाजपा का 40 साल से गढ़ रही है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले समय में प्रशांत किशोर किस तरह चुनौती पेश कर पाते हैं। कारण कि विधानसभा चुनाव में पीके की पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। जानकारों का मानना है कि विजय सिन्हा के 'सब्जेक्ट बदल दिए जाने' वाले बयान ने भी भाजपा के लिए टेंशन बढ़ाई है। सिन्हा … Read more

किशनगंज के जनता हाट में NIA की दबिश, बड़े ऑपरेशन के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा

किशनगंज. ब‍िहार के सीमांचल के क‍िशनगंज जिला अंतर्गत पोठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर पंचायत के जनता हाट इलाके में शुक्रवार की सुबह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एनआईए की टीम के पहुंचते ही स्थानीय लोगों में अफरातफरी का माहौल बन गया। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) और अन्य सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने जनता हाट निवासी मनोज रविदास, पिता लखन रविदास, के घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कई घंटों तक चली और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। कई घंटों तक चली तलाशी, युवक को साथ ले गई टीम स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह अचानक बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के पहुंचने से गांव में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जवानों ने घर के अंदर और आसपास के क्षेत्र की गहन तलाशी ली। दस्तावेजों, मोबाइल उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की गई। छापेमारी के दौरान मनोज रविदास को टीम अपने साथ लेकर चली गई। हालांकि, उसे किस आधार पर हिरासत में लिया गया, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है। कार्रवाई के बाद से पूरे गांव में तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं। संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और इनपुट की चर्चा ग्रामीणों के बीच यह चर्चा बनी हुई है कि जांच एजेंसियों को कुछ संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और संचार से जुड़े इनपुट मिले थे। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर एनआईए ने यह कार्रवाई की है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी सुरक्षा एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए की कार्रवाई आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में की जाती है। ऐसे में इस कार्रवाई को भी संवेदनशील जांच के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। सामान्य परिवार से जुड़ा है मामला, ग्रामीणों में हैरानी जानकारी के अनुसार, मनोज रविदास जनता हाट में चप्पल की दुकान चलाता है, जबकि उसके पिता लखन रविदास खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार के सदस्य स्तब्ध हैं और किसी भी प्रकार की जानकारी से इनकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उन्हें इस तरह की कार्रवाई की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। छापेमारी के बाद से परिवार और आसपास के लोग मानसिक तनाव में हैं। गांव में बढ़ी हलचल, बड़ी संख्या में जुटे लोग छापेमारी की खबर जैसे ही इलाके में फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। गांव में कई घंटों तक भीड़ और चर्चा का माहौल बना रहा। लोग अलग-अलग तरह की अटकलें लगा रहे हैं, लेकिन किसी के पास ठोस जानकारी नहीं है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे इलाके को नियंत्रित रखा गया और किसी को भी घर के आसपास अनावश्यक रूप से जाने की अनुमति नहीं दी गई। जांच एजेंसियां पूरी तरह सतर्क, आगे की कार्रवाई पर नजर फिलहाल एनआईए और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को गंभीरता से जांच रही हैं और सभी पहलुओं की गहन छानबीन की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी बड़े नेटवर्क या संवेदनशील इनपुट से जुड़ी हो सकती है, जिसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। ग्रामीणों की निगाहें जांच के अगले कदम पर घटना के बाद जनता हाट और आसपास के क्षेत्रों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है। लोग अब जांच एजेंसियों के अगले कदम और आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं। पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण इसे बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

JPSC अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट, जून में आएगा प्रीलिम्स रिजल्ट और अगस्त में मेन्स एग्जाम

रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग जून माह के पहले या दूसरे सप्ताह में सिविल सेवा संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी कर सकता है। अगस्त माह में इसकी मुख्य परीक्षा आयोजित किए जाने की तैयारी है। आयाेग ने 19 अप्रैल को संपन्न प्रारंभिक परीक्षा में दोनों पत्रों में पूछे गए प्रश्नों का अंतिम मॉडल उत्तर जारी कर दिया है। इसके आधार पर ही प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया जाएगा। आयोग ने सामान्य अध्ययन (प्रथम पत्र) एवं सामान्य अध्ययन (द्वितीय पत्र) दोनों का मॉडल उत्तर जारी किया है। पूर्व में जारी मॉडल उत्तर में अभ्यर्थियों की आपत्तियों के बाद आयोग ने पहले प्रश्नपत्र में आयोग ने दो प्रश्नों को ड्राप किया है। वहीं, एक प्रश्न में दो विकल्प सही पाए गए हैं। इनमें सभी अभ्यर्थियों को समान अंक दिए जाएंगे। दूसरे प्रश्नपत्र में इस तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है। इससे पहले आयोग ने दोनों प्रश्न पत्रों का मॉडल उत्तर जारी करते हुए उनपर अभ्यर्थियों से 20 अप्रैल से 24 अप्रैल तक आपत्तियां मांगी थीं। निर्धारित तिथि तक अभ्यर्थियों से प्राप्त आपत्तियों पर आयोग द्वारा विषय-विशेषज्ञों के समीक्षा के बाद अंतिम माडल उत्तर प्रकाशित किया गया। प्रारंभिक परीक्षा के माध्यम से कुल विज्ञापित पदों के 15 गुना अभ्यर्थियों का चयन मेधा सूची के आधार पर मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए किया जाएगा। यह मेधा सूची दोनों पत्रों के प्राप्तांकों के योग के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होगा। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आवश्यक अंक 32 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 34 प्रतिशत तथा पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5 प्रतिशत निर्धारित है। अंतिम परिणाम मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंकों के आधार पर किया जाएगा।

बोधगया से दिल्ली तक हाई-लेवल मीटिंग्स, PM मोदी के आमंत्रण पर कल भारत आएंगे म्यांमार राष्ट्रपति

बोधगया. भारत और म्यांमार के संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए म्यांमार यूनियन रिपब्लिक के राष्ट्रपति मिन आंग हाइंग 30 मई से 3 जून तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर हो रहे इस दौरे को दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत से जुड़े प्रमुख व्यवसायी शामिल रहेंगे। मिली जानकारी के अनुसार, अपनी वर्तमान भूमिका में यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा होगा। दौरे के कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई को विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर बोधगया पहुंचेंगे। भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया में उनके आगमन को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राष्ट्रपति यहां विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। इसके बाद 1 जून को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेताओं के बीच भारत-म्यांमार संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग और निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। अपने भारत दौरे के दौरान राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 2 जून को मुंबई भी जाएंगे, जहां वे उद्योग एवं व्यापार से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ विभिन्न संस्थानों का दौरा करेंगे। भारत सरकार के अनुसार म्यांमार, भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और महासागर नीति का महत्वपूर्ण साझेदार देश है। ऐसे में इस उच्चस्तरीय दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। म्यांमार राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व काउंसलेट जेनरल ने किया एयरपोर्ट का निरीक्षण म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के प्रस्तावित बोधगया दौरे को लेकर गया जी एयरपोर्ट पर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। म्यांमार के काउंसलेट जेनरल तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार को गया जी एयरपोर्ट पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था, वीवीआईपी प्रोटोकॉल एवं विशेष विमान के लैंडिंग संबंधी अनुमति और व्यवस्थाओं की समीक्षा करने पहुंचे थे। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर एयरपोर्ट प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। म्यांमार के राष्ट्रपति शनिवार को विशेष विमान से सुबह 9:10 बजे सीधे गया जी एयरपोर्ट पहुंचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के तहत वे दोपहर 3: 45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे। गया जी एयरपोर्ट पर जिलाधिकारी व एसएसपी ने की बैठक म्यांमार के महामहिम राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के प्रस्तावित बोधगया दौरे को लेकर गया जी जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर गुरुवार को गया जी एयरपोर्ट परिसर में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर व एसएसपी सुशील कुमार की अध्यक्षता में एडवांस सिक्योरिटी लाइजनिंग (एएसएल) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एयरपोर्ट के कार्यवाहक निदेशक अवधेश कुमार, पुलिस प्रशासन, विशेष सुरक्षा एजेंसियों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रपति के आगमन से लेकर प्रस्थान तक की सुरक्षा व्यवस्था, वीवीआईपी मूवमेंट, रूट चार्ट, एयरपोर्ट सिक्योरिटी, ट्रैफिक कंट्रोल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। डीएम शशांक शुभंकर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एयरपोर्ट परिसर से लेकर शहर के प्रमुख मार्गों और बोधगया तक विशेष निगरानी रखने, संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने तथा सभी व्यवस्थाओं को समय रहते दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया।

स्वच्छता अभियान में जीविका दीदियों का कमाल, बिहार ने हासिल किया बड़ा मुकाम

पटना. भारत सरकार की ओर से जारी “स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025” की रिपोर्ट में बिहार को पूर्वी भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया है। यह उपलब्धि ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत जनजागरूकता अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन के लिए संचालित विविध योजनाओं के संचालन में जीविका दीदियों तथा ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता का परिणाम मानी जा रही है। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण एवं उसके नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने, घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था विकसित करने तथा कचरे के समुचित निपटान की दिशा में जीविका दीदियों ने प्रभावी कार्य किए हैं। जीविका दीदियों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने स्वच्छता अभियान को व्यापक जन समर्थन प्रदान किया है। विदित हो कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग एवं जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में बिहार को पूर्वी भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया है। पूर्वी क्षेत्र के राज्यों में बिहार प्रथम, ओडिशा द्वितीय, झारखंड तृतीय तथा पश्चिम बंगाल चौथे स्थान पर रहा। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर से कचरा उठाव, इसके निष्पादन एवं साफ-सफाई के लिए राज्य भर में वार्ड स्तर पर रखे गए एक लाख 30 हजार अधिक स्वच्छता कर्मियों, ग्राम पंचायत स्तर पर योगदान दे रहे आठ हजार से अधिक स्वच्छता पर्यवेक्षकों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 के अंतर्गत देशभर के 33 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 744 जिलों तथा 20,659 गांवों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 3.22 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तथा 1.03 लाख से अधिक सार्वजनिक संस्थानों एवं सामुदायिक परिसरों का आकलन किया गया। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्रथम चरण शुभारंभ वर्ष 2014 से अब तक 1 करोड़ 50 लाख 54 हजार व्यक्तिगत शौचालायों एवं भूमिहीन परिवारों के लिए 9,431 सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण हुआ है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान – द्वितीय चरण (2020- 21 से 2026-27) अंतर्गत राज्य के सभी वार्डों से घर-घर से ठोस अपशिष्ट का संग्रह किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के सभी वार्डों में प्रति वार्ड एक पैडल रिक्शा एवं ग्राम पंचायत स्तर पर एक ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। ठोस अपशिष्ट के समुचित निष्पादन के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7221 अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (डब्लूपीआई) का निर्माण किया गया है। प्लास्टिक अपशिष्टों के उचित निष्पादन के लिए प्रखंड / अनुमंडल स्तर पर 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई स्थापित किए गए हैं। तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 2,13,452 सामुदायिक सोक पिट, 83 344 जंक्शन चैंबर एवं 24,664 नाली निकासी बिंदु इत्यादि का निर्माण किया गया है। राज्य के सभी जिलों में 38 गोबरधन बायोगैस इकाई का निर्माण किया गया है।