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अब बिना ट्रांजिट पास नहीं आएगी बालू-गिट्टी, नियम तोड़ने पर लगेगा जुर्माना

भागलपुर. बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर, मोरंग एवं अन्य लघु खनिजों के परिवहन पर निगरानी कड़ी करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी लघु खनिज लदे वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत 10 जून से ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 20 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिला खनिज पदाधिकारी बलवंत कुमार के अनुसार अब झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों से बिहार आने वाले खनिज वाहनों को आनलाइन पंजीकरण कराकर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। जिला खनन विकास पदाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन, फर्जी चालान और अनियमित खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत वाहन मालिक, ट्रांसपोर्टर और खनिज कारोबारी आईएसटीपी बिहार पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण के बाद प्राप्त लागिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जाएगा। विभाग ने समय रहते सभी संबंधित लोगों से प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग द्वारा ट्रांजिट पास शुल्क भी निर्धारित कर दिया गया है। यदि खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं आयतन के आधार पर दर्ज खनिज के लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क लिया जाएगा। भुगतान केवल आनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। नए नियम के अनुसार खनिज स्रोत स्थल से परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज के अनुरूप ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। इसकी वैधता परिवहन चालान की अवधि के बराबर होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास संबंधित राज्य का वैध चालान और आईएसटीपी दोनों दस्तावेज होना आवश्यक होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान दोनों में से कोई भी दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समाहरण, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली-2019 तथा संशोधित नियमावली-2026 के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जुर्माना दस लाख तक हो सकती है। खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्यों के कारण खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी मात्रा में बालू, गिट्टी और पत्थर दूसरे राज्यों से मंगाए जा रहे हैं। अब तक इनके परिवहन की कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिससे वास्तविक आंकड़े जुटाने में कठिनाई होती थी। नई आनलाइन प्रणाली लागू होने के बाद राज्य में आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। इससे एक ही चालान पर बार-बार ढुलाई, अवैध परिवहन और राजस्व चोरी जैसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी। सरकार को आयातित खनिजों का सटीक डाटा उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि राजस्व संग्रह में भी वृद्धि होगी। बिहार सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था खनन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

हाईकोर्ट आदेश के बाद भी पेंशन विवाद जारी, बुजुर्ग कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें

 रांची  रांची नगर निगम के करीब 450 सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर नगर निगम प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल रही बढ़ी हुई पेंशन को बंद कर राज्यकर्मियों की तर्ज पर पेंशन भुगतान व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर अप्रैल और मई महीने की पेंशन भी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में बुजुर्ग पेंशनधारियों के सामने परिवार चलाने, दवाइयां खरीदने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद निगम के सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्यकर्मियों की तरह अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। बाद में हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को भी स्पष्ट किया कि निगम कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से ही पेंशन का लाभ दिया जाए, न कि किसी कृत्रिम समय या तिथि से। साथ ही कोर्ट ने निगम को शेष पेंशनरी लाभ का भुगतान तीन माह के भीतर करने का निर्देश दिया था हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप रांची नगर निगम पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष अवध बिहारी तिवारी ने निगम प्रशासन के प्रस्तावित फैसले का विरोध करते हुए इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन देने और बकाया राशि भुगतान का निर्देश दिया है, लेकिन निगम प्रशासन अब नियमों की अलग व्याख्या कर पेंशन कम करने की कोशिश कर रहा है। इस संबंध में अवमानना याचिका भी दायर की गई है। अवध तिवारी ने बताया कि अभी हमें छठे वेतन मान के अनुसार पेंशन मिलता है, अगर निगम बिहार के तर्ज में हमें पुराना पेंशन देना शुरू करता है तो हमें प्रत्येक माह वर्तमान में मिलने वाले पेंशन से पांच से सात हजार रुपये कम मिलेंगे। 32 अधिकारियों का वेतन, पेंशनरों पर बोझ निगम में हाल के वर्षों में झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग से करीब 32 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है, जिनके वेतन भुगतान का अतिरिक्त बोझ निगम पर पड़ा है। आर्थिक दबाव के बीच निगम प्रशासन पेंशन मद में कटौती की तैयारी कर रहा है। हालांकि पेंशनधारियों का कहना है कि वित्तीय संकट का बोझ बुजुर्ग कर्मचारियों पर डालना अन्यायपूर्ण है। दवा और घर खर्च चलाना मुश्किल पेंशनधारियों का कहना है कि अप्रैल और मई महीने की पेंशन नहीं मिलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। अधिकांश पेंशनर 70 से 85 वर्ष की आयु के हैं और नियमित रूप से दवाइयों पर निर्भर हैं। कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार पेंशन ही है। ऐसे में दो माह से भुगतान नहीं होने के कारण दवा खरीदना, बिजली-पानी का बिल चुकाना और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

प्यार और विदेश के झांसे में फंसाने की साजिश, 36 घंटे में पुलिस ने किया बड़ा रेस्क्यू

पूर्वी चंपारण पूर्वी चंपारण पुलिस ने प्रेमजाल और मानव तस्करी से जुड़े एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए महज 36 घंटे के भीतर चार नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में एक मौलवी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर लड़कियों को प्यार, सुनहरे भविष्य और विदेश घुमाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाने का आरोप है। चार नाबालिग लड़कियों के लापता होने से मचा हड़कंप सिकरहना अनुमंडल के शिकरगंज थाना क्षेत्र से चार नाबालिग लड़कियों के अचानक लापता होने के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। मदरसे की छात्रा के जरिए संपर्क में आया आरोपी पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी असफाक मदरसे में पढ़ने वाली एक छात्रा के संपर्क में आया था। उसने पहले छात्रा का विश्वास जीता और फिर मोबाइल फोन के जरिए लगातार बातचीत कर उसे अपने प्रभाव में ले लिया। इसके बाद उसने छात्रा की सहेलियों को भी अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी लड़कियों को बेहतर जिंदगी, शादी और विदेश यात्रा के सपने दिखाकर बहला-फुसला रहा था। छात्रा के बयान से मानव तस्करी की आशंका हुई मजबूत मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब बरामद की गई एक छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसने आरोपी को फोन पर किसी व्यक्ति से यह कहते हुए सुना था कि लड़कियों को कहीं ले जाकर बेच दिया जाएगा। इस जानकारी के बाद पुलिस को मानव तस्करी की आशंका और अधिक प्रबल लगी तथा जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। शिकायत के बाद मदरसे से हटाया गया था आरोपी जानकारी के अनुसार आरोपी की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद परिजनों ने मदरसा प्रबंधन से शिकायत की थी। शिकायत के बाद उसे मदरसे से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद आरोपी मोबाइल फोन के जरिए लड़कियों के संपर्क में बना रहा और उन्हें अपने साथ ले जाने में सफल हो गया। एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर सिकरहना एसडीपीओ अभिषेक कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी अनुसंधान, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और लगातार छापेमारी के आधार पर पुलिस ने ढाका थाना क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। मोबाइल फोन जब्त, गिरोह से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। अब जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित मानव तस्करी गिरोह तो सक्रिय नहीं था। पुलिस मोबाइल फोन के डेटा, कॉल डिटेल और आरोपी के संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि चारों नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने चार मासूम लड़कियों को संभावित मानव तस्करी के चंगुल में फंसने से बचा लिया। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।  

अवैध खनिज ढुलाई पर रोक की तैयारी, बिहार में ट्रांजिट पास सिस्टम लागू

छपरा  बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में अन्य राज्यों से लघु खनिज लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। विभाग के अनुसार 10 जून से बाहरी राज्यों से बालू, पत्थर तथा अन्य लघु खनिज लेकर बिहार आने वाले सभी वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) लेना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना, अवैध ढुलाई पर रोक लगाना तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित करना है। विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यदि परिवहन चालान में खनिज की मात्रा वजन के रूप में दर्ज है तो ट्रांजिट पास के लिए 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन तथा मात्रा आयतन के रूप में अंकित होने पर 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से एक ही चालान का बार-बार उपयोग कर खनिज ढुलाई की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही बिहार में आयातित खनिजों का सटीक आंकड़ा भी उपलब्ध हो सकेगा। पोर्टल पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन खनिज विकास पदाधिकारी सर्वेश कुमार संभव ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित वाहन मालिकों को आईएसटीपी पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद प्राप्त लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। अन्य राज्यों से खनिज स्रोत पर परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज की मात्रा के अनुसार ऑनलाइन ट्रांजिट पास प्राप्त करना आवश्यक होगा। ट्रांजिट पास का भुगतान भी पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। विभाग ने यह भी बताया है कि आईएसटीपी की वैधता मूल खनिज परिवहन चालान की वैधता के अनुरूप होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास ट्रांजिट पास के साथ-साथ संबंधित राज्य द्वारा निर्गत वैध खनिज परिवहन चालान भी होना जरूरी है। जांच के दौरान दोनों में से कोई एक दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2019, यथा संशोधित 2026 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनिज परिवहन में जब्त किए गए वाहनों को निर्धारित जुर्माना जमा करने के बाद ही छोड़ा जाएगा। सारण के खनिज विकास पदाधिकारी ने सभी वाहन मालिकों और परिवहनकर्ताओं से नए नियमों का पूर्ण अनुपालन करने की अपील की है।  

बिजली से वंचित टोलों पर प्रशासन का फोकस, DC ने दिए सख्त निर्देश

लोहरदगा झारखंड के लोहरदगा जिले में अब बिजली से वंचित टोलों और गांवों तक भी बिजली सुविधा पहुंचाने की दिशा में प्रशासन ने पहल तेज कर दी है. जिले के उपायुक्त संदीप कुमार मीणा की अध्यक्षता में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न बिजली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना तथा संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन टोलों और गांवों में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए. उपायुक्त ने कहा कि जिन क्षेत्रों तक पहुंच पथ उपलब्ध है, वहां जुलाई माह तक हर हाल में विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि ग्रामीणों को बिजली की सुविधा मिल सके. सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अपनाए जाएंगे तकनीकी विकल्प बैठक के दौरान उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने कहा कि जिन दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क या पहुंच पथ उपलब्ध नहीं है, वहां विशेष प्रकार के पोल और अन्य तकनीकी उपायों का इस्तेमाल किया जाए. इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक अनुमति प्राप्त कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने कहा कि तकनीकी चुनौतियों के कारण किसी भी गांव या टोले को बिजली सुविधा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. नए चिन्हित गांवों का होगा भौतिक सत्यापन उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं को निर्देश दिया कि हाल में चिह्नित किए गए गांवों और टोलों का भौतिक सत्यापन किया जाए. सत्यापन के बाद वहां बिजली आपूर्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. उन्होंने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके. कोई भी परिवार बिजली से वंचित नहीं रहेगा उपायुक्त संदीप कुमार मीणा ने स्पष्ट कहा कि जिले का कोई भी परिवार बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए. इसके लिए सभी संबंधित पदाधिकारी और अभियंता जिम्मेदारी के साथ कार्य करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं को धरातल पर उतारना सुनिश्चित करें. बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों और संबंधित पदाधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्यों को पूरा करने का भरोसा दिलाया.

SAIL-BHEL पर संकट: कमजोर प्रदर्शन के बाद महारत्न दर्जे पर सवाल

बोकारो  भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) का महारत्न दर्जा खतरे में पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय और लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने दोनों कंपनियों को चेतावनी नोटिस जारी कर वित्तीय स्थिति में सुधार लाने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। इस दौरान कंपनियों के प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी। एक वर्ष बाद पुनः समीक्षा की जाएगी और यदि निर्धारित वित्तीय मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो दोनों कंपनियों का महारत्न दर्जा वापस लेकर उन्हें नवरत्न श्रेणी में रखा जा सकता है। 5 हजार करोड़ रुपये का चाहिए वार्षिक लाभ सरकार के नियमों के मुताबिक किसी कंपनी को महारत्न का दर्जा बनाए रखने के लिए लगातार तीन वर्षों में औसतन कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित करना आवश्यक है। बताया जा रहा है कि सेल इस अनिवार्य मानक को पूरा नहीं कर सकी है, जिसके कारण उसे चेतावनी नोटिस जारी किया गया है। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन संचालित भेल को भी अपेक्षित वित्तीय प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण लोक उद्यम विभाग की ओर से चेतावनी दी गई है। विभाग ने कंपनी प्रबंधन को लाभप्रदता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा है। सेल को 2010 और भेल को 2013 में मिला था दर्जा गौरतलब है कि सेल को मई 2010 में तथा भेल को फरवरी 2013 में नवरत्न से पदोन्नत कर महारत्न का दर्जा प्रदान किया गया था। महारत्न का दर्जा मिलने से कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होती है। ऐसे में यह दर्जा बनाए रखना दोनों सार्वजनिक उपक्रमों के लिए प्रतिष्ठा और कारोबारी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

राजगीर क्रिकेट स्टेडियम की डेडलाइन तय, खेल ढांचे को मिलेगा बड़ा विस्तार

पटना बिहार में खेलों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना, खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को खेल परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया। राजगीर क्रिकेट स्टेडियम के लिए तय हुई डेडलाइन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राजगीर में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही पटना के डुमरी खेल परिसर में विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम विकसित करने की योजना को भी तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। गांवों तक पहुंचेगी खेल सुविधाएं बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4700 पंचायतों में 5266 खेल मैदानों का निर्माण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष खेल मैदानों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए पंचायत स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। मुख्यमंत्री ने VB-G RAM G (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) के माध्यम से पंचायतों में खेल मैदानों के निर्माण पर भी जोर दिया। खिलाड़ियों को मिलेगा हर संभव सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल उपकरण, कोचिंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए खेल प्रशिक्षण केंद्रों को और मजबूत किया जाए तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री ने पटना स्थित मोइनुल हक स्टेडियम के पुनर्विकास कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को गति दी जाए। इसके अलावा स्टेडियम तक बेहतर सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि बड़े खेल आयोजनों के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की समस्या न हो। पंचायतों में खेल संस्कृति विकसित करने की तैयारी मुख्यमंत्री ने पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सव और प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से पूर्व खिलाड़ियों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को मजबूत किया जाए। साथ ही जिला और प्रखंड स्तर पर खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं तथा आउटडोर स्टेडियमों के निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, खेल विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सरकारी टेंडर में भ्रष्टाचार केस में नया मोड़, संतोष कुमार को भेजा गया जेल

पटना बिहार में सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने ठेकेदार रिशु श्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। संतोष एसवीयू में दर्ज केस (05/2025) के उन चार नामजद अभियुक्तों में शामिल है, जिसमें रिशु श्री की गिरफ्तारी हो चुकी है। संतोष कुमार उस मातृस्वा कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल था, जिस पर कई सरकारी ठेकों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। यह कंपनी रिशु श्री की बताई जाती है। माना जा रहा है कि इस मामले में अब बड़े अधिकारियों पर जांच एजेंसी हाथ डाल सकती है। सरकार इस मामले में किसी को बख्शने के मूड में नहीं है। संतोष पर भ्रष्टाचार में शामिल रहे बिहार सरकार के अधिकारियों तक नकदी और महंगे गिफ्ट पहुंचाने के भी आरोप हैं। एसवीयू ने संतोष की गिरफ्तारी के बाद उसे निगरानी कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए 11 जून तक बेऊर जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसी उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है। सरकारी ठेकों में लेन-देन में उसकी मुख्य भूमिका दर्ज एफआईआर के मुताबिक सरकारी ठेकों में रिशुश्री और अधिकारियों के बीच हुए भ्रष्ट लेन-देन में संतोष कुमार की मुख्य भूमिका रही थी। इस मामले में पटना से गिरफ्तार करने के बाद उससे पूछताछ की गयी। फिर न्यायालय में पेशी कर जेल भेज दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि रिशु श्री के कहने पर संतोष कुमार ने कई सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों तक रिश्वत के रूप में नकद व महंगे गिफ्ट पहुंचाए। संतोष पर भ्रष्ट अधिकारी-कर्मियों के लिए अचल संपत्तियां खरीदने का भी आरोप है। एसवीयू संतोष के जरिए उन अधिकारियों तक पहुंचना चाहती है जिन्हें टेंडर माफिया कमीशन के रूप में नगद या सेवा का लाभ पहुंचाते थे। इसके लिए पैसे की व्यवस्था मातृस्वा कंस्ट्रक्शन कंपनी में फर्जी व मनगढ़ंत खर्चे दिखा कर की गयी थी। इस संबंध में ईडी ने 20 जनवरी 2025 को संतोष का बयान भी दर्ज किया है। संतोष पटना के जक्कनपुर थाना अंतर्गत मीठापुर बी एरिया बंगाली रोड के रहने वाले हैं। एसवीयू ने बताया कि रिशुश्री ने संतोष कुमार के नाम से मातृस्वा कंस्ट्रक्शन प्रा लि के अलावा मेसर्स अर्बन इन्वायरमेंटल सॉल्युशंस प्रा लि कंपनी भी बना रखी थी और इनके माध्यम से सरकारी टेंडर प्राप्त करता था। ठेके हासिल करने को बनाई थी कई कंपनियां एसवीयू के मुताबिक रिशु श्री ने सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कई कंपनियां बना रखी थी। इन कंपनियों के माध्यम से उसने कई सरकारी परियोजनाओं में उप ठेकेदार बन कर काम किया। कंपनियों में अपने करीबियों को निदेशक बना रखा था, ताकि उनसे मनमुताबिक काम कराया जा सके। दर्ज एफआईआर में रिशु श्री और संतोष कुमार के अलावा आईएएस संजीव हंस और मेसर्स मातृस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार भी नामजद अभियुक्त हैं। इनके अलावा एफआईआर में बिहार सरकार के कई अज्ञात सरकारी अधिकारी व अन्य को भी आरोपित बनाया गया है।

गिरफ्तारी पर सस्पेंस: खान सर के वकील का दावा, FIR में उनका कोई रोल नहीं

पटना खान सर पर दर्ज एफआईआर और उनकी संभावित गिरफ्तारी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनके वकील अरविंद कुमार मऊआ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि खान सर सरेंडर नहीं करेंगे. उनकी ओर से सोमवार को कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दाखिल की जाएगी. लेकिन अभी नहीं हुई है. शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में अरविंद कुमार मऊआ ने कहा कि खान सर के कोर्ट पहुंचकर सरेंडर करने की खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा कि खान सर कोर्ट नहीं पहुंचे थे. सरेंडर करने की बात सही नहीं है. खान सर के वकील ने क्या-क्या बताया? खान सर के वकील ने आगे बताया कि खान सर पर कोई धारा नहीं लगता है,ना कोई लगाया गया है. जो भी आरोप है गार्ड्स पर है. हवाई फायरिंग हुई है. जिसके लिए 25(9) आर्म्स एक्ट का प्रोविजन लॉ में आया हुआ है. जो बेलेबल सेक्शन है. वकील अरविंद कुमार मऊआ ने आगे बताया कि सोशल मीडिया के वायरल वीडियो के आधार पर FIR दर्ज की गई है. खान सर का नाम डिस्क्लोजर स्टेटमेंट पर इंसर्ट कर दिया गया है. जबकि उनकी कोई भूमिका नहीं है. पत्रकारों ने पूछा कि बॉडीगार्ड ने बयान दिया है कि खान सर के कहने पर गोली चलाई गई. इसपर उनके वकील ने कहा कि बॉडीगार्ड का इस तरह का कोई स्टेटमेंट नहीं है, वो डिस्क्लोजर स्टेटमेंट है. वैसा कोई स्टेटमेंट बॉडीगार्ड्स के द्वारा नहीं दिया गया है. पत्रकारों से बातचीत करते खान सर के वकील अरविंद कुमार मऊआ गिरफ्तारी होगी या नहीं? वकील ने पुलिस पर छोड़ा फैसला जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पुलिस खान सर को गिरफ्तार कर सकती है, तो वकील ने कहा कि यह पूरी तरह पुलिस का अधिकार क्षेत्र है. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी करनी है या नहीं, यह फैसला पुलिस को करना है. शुक्रवार को दर्ज हुई थी एफआईआर शुक्रवार को फैसल खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद से खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर माहौल गर्म बना हुआ है. कोचिंग संस्थान के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जुटे रहे और खान सर के समर्थन में नारेबाजी करते दिखाई दिए. शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक छात्रों की भीड़ कोचिंग के बाहर डटी रही. पुलिस ने कई बार छात्रों से वहां से हटने की अपील की, लेकिन समर्थक लगातार मौके पर मौजूद रहे. पुलिस को है खान सर की तलाश मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब खान सर की तलाश कर रही है. पुलिस टीम मुसल्लहपुर स्थित खान ग्लोबल स्टडीज परिसर भी पहुंची थी, लेकिन वहां खान सर नहीं मिले. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला जिन धाराओं में दर्ज हुआ है, वे गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में आती हैं. ऐसे में जांच के दौरान पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है. किन धाराओं में दर्ज हुआ है मामला? खान सर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(9), 27 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच एजेंसियों के अनुसार ये धाराएं गंभीर अपराधों से जुड़ी मानी जाती हैं और इनमें गिरफ्तारी का प्रावधान है. क्या कहती है BNS की धारा 109? BNS की धारा 109 हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से संबंधित है. जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की जान लेने की कोशिश करता है तो यह धारा लागू हो सकती है. इसमें बंदूक, चाकू या अन्य खतरनाक हथियार से हमला करने जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं.     इस अपराध में 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.     इसे गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. आज फिर हो सकती है पुलिस की कार्रवाई पुलिस सूत्रों के अनुसार खान सर की गिरफ्तारी के लिए दोबारा प्रयास किया जा सकता है. शुक्रवार को भी पुलिस ने कार्रवाई की कोशिश की थी, लेकिन कोचिंग के बाहर छात्रों की भारी भीड़ जुटने के कारण स्थिति संवेदनशील हो गई थी. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सोमवार को अग्रिम जमानत याचिका पर क्या कदम उठाया जाता है और उससे पहले पुलिस क्या कार्रवाई करती है. क्या है पूरा विवाद? यह पूरा मामला 2 जून की रात खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच हुए विवाद से जुड़ा है. आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद के दौरान मारपीट हुई, जिसमें खान ग्लोबल के सुरक्षा गार्ड चुनचुन घायल हो गए. इस मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. वायरल वीडियो के बाद बढ़ीं मुश्किलें इसी विवाद के बीच खान सर के दो निजी सुरक्षा गार्डों का फायरिंग करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ. इसके बाद पुलिस ने खान सर और दोनों गार्डों से पूछताछ की. पुलिस के अनुसार पूछताछ में गार्डों ने बताया कि विवाद के दौरान बड़ी संख्या में लोग कोचिंग के बाहर पहुंच गए थे. उनका आरोप है कि हंगामे के बीच फायरिंग हुई, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया. अब पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है.

अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्ती, कांके डैम की ड्रोन मैपिंग कराएगा नगर निगम

 रांची विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रांची नगर निगम ने शहर की प्रमुख जलसंपदा कांके डैम के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम और अंचल प्रशासन की टीम के साथ वार्ड संख्या 1 स्थित कांके डैम के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्वच्छता, अतिक्रमण, अवैध कब्जा, निर्माण कार्यों और ड्रेनेज व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। नगर आयुक्त ने मिशन गली, कांके डैम तट से लेकर कांके डैम पार्क तक के क्षेत्र का भ्रमण करते हुए अधिकारियों को डैम संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए स्वच्छता शाखा, नगर निवेशक शाखा, अभियंत्रण शाखा, ट्रांसपोर्ट शाखा, भू-संपदा शाखा और अंचल कार्यालय के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने डैम में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि डैम में सीधे गिरने वाले सभी नालों की पहचान कर उनके प्रवाह को तत्काल रोका जाए। साथ ही घरों से निकलने वाले गंदे पानी को डायवर्ट करने, सोकपिट निर्माण को बढ़ावा देने तथा डैम में किसी भी प्रकार के प्रदूषित तरल अपशिष्ट के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। कांके डैम के कैचमेंट एरिया की सुरक्षा को लेकर भू-संपदा शाखा और अंचल प्रशासन को पूरे क्षेत्र की मापी कराने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया गया। एंड टू एंड वाकवे निर्माण शहरवासियों के लिए कांके डैम को एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। अभियंत्रण शाखा को पूरे कैचमेंट एरिया में एंड टू एंड वाकवे निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे लोगों को मार्निंग और इवनिंग वाक की बेहतर सुविधा मिल सके। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जलाशयों के संरक्षण से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नियमानुसार किसी भी जलाशय की अधिगृहित भूमि से 15 मीटर की परिधि के भीतर किसी प्रकार का भवन या अन्य निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में योजनाबद्ध तरीके से कांके डैम को अतिक्रमण मुक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाते हुए इसे शहरवासियों के लिए एक आकर्षक और प्रस्तुत करने योग्य स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। डैम साइड स्थित अवैध खटालों पर होगी कार्रवाई नगर आयुक्त ने कहा कि कैचमेंट एरिया में आने वाली सभी अवैध संरचनाओं और अतिक्रमणों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डैम क्षेत्र में संचालित अवैध खटालों, अवैध निर्माणों और अवैध बाउंड्री वॉल को लेकर भी निगम सख्त रुख अपनाने जा रहा है। नगर आयुक्त ने इनफोर्समेंट टीम को तत्काल कार्रवाई कर ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध गतिविधि किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। डैम की निगरानी के लिए होगी ड्रोप मैपिंग डैम क्षेत्र की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए ड्रोन मैपिंग कराने का निर्णय लिया गया है। ड्रोन सर्वे के माध्यम से पूरे कैचमेंट एरिया का प्लाटवार आकलन किया जाएगा, जिससे अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की सटीक पहचान हो सके चिन्हित मामलों में नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कांके डैम में तेजी से फैल रही जलकुंभी और जमा हो रही गाद को हटाने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नगर आयुक्त ने स्वच्छता और ट्रांसपोर्ट शाखा को पोकलेन मशीन और वीड हार्वेस्टिंग मशीन की मदद से नियमित सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया। साथ ही डैम के किनारों पर उगी झाड़ियों और घासों की छंटाई भी कराई जाएगी ताकि क्षेत्र की सुंदरता और स्वच्छता बनी रहे।