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अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्ती, कांके डैम की ड्रोन मैपिंग कराएगा नगर निगम

 रांची विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रांची नगर निगम ने शहर की प्रमुख जलसंपदा कांके डैम के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम और अंचल प्रशासन की टीम के साथ वार्ड संख्या 1 स्थित कांके डैम के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्वच्छता, अतिक्रमण, अवैध कब्जा, निर्माण कार्यों और ड्रेनेज व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। नगर आयुक्त ने मिशन गली, कांके डैम तट से लेकर कांके डैम पार्क तक के क्षेत्र का भ्रमण करते हुए अधिकारियों को डैम संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए स्वच्छता शाखा, नगर निवेशक शाखा, अभियंत्रण शाखा, ट्रांसपोर्ट शाखा, भू-संपदा शाखा और अंचल कार्यालय के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने का आदेश दिया गया है। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने डैम में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि डैम में सीधे गिरने वाले सभी नालों की पहचान कर उनके प्रवाह को तत्काल रोका जाए। साथ ही घरों से निकलने वाले गंदे पानी को डायवर्ट करने, सोकपिट निर्माण को बढ़ावा देने तथा डैम में किसी भी प्रकार के प्रदूषित तरल अपशिष्ट के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। कांके डैम के कैचमेंट एरिया की सुरक्षा को लेकर भू-संपदा शाखा और अंचल प्रशासन को पूरे क्षेत्र की मापी कराने और उसकी घेराबंदी करने का निर्देश दिया गया। एंड टू एंड वाकवे निर्माण शहरवासियों के लिए कांके डैम को एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी तैयार की जा रही है। अभियंत्रण शाखा को पूरे कैचमेंट एरिया में एंड टू एंड वाकवे निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे लोगों को मार्निंग और इवनिंग वाक की बेहतर सुविधा मिल सके। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जलाशयों के संरक्षण से जुड़े सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नियमानुसार किसी भी जलाशय की अधिगृहित भूमि से 15 मीटर की परिधि के भीतर किसी प्रकार का भवन या अन्य निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में योजनाबद्ध तरीके से कांके डैम को अतिक्रमण मुक्त, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाते हुए इसे शहरवासियों के लिए एक आकर्षक और प्रस्तुत करने योग्य स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। डैम साइड स्थित अवैध खटालों पर होगी कार्रवाई नगर आयुक्त ने कहा कि कैचमेंट एरिया में आने वाली सभी अवैध संरचनाओं और अतिक्रमणों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डैम क्षेत्र में संचालित अवैध खटालों, अवैध निर्माणों और अवैध बाउंड्री वॉल को लेकर भी निगम सख्त रुख अपनाने जा रहा है। नगर आयुक्त ने इनफोर्समेंट टीम को तत्काल कार्रवाई कर ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध गतिविधि किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। डैम की निगरानी के लिए होगी ड्रोप मैपिंग डैम क्षेत्र की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए ड्रोन मैपिंग कराने का निर्णय लिया गया है। ड्रोन सर्वे के माध्यम से पूरे कैचमेंट एरिया का प्लाटवार आकलन किया जाएगा, जिससे अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की सटीक पहचान हो सके चिन्हित मामलों में नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा कांके डैम में तेजी से फैल रही जलकुंभी और जमा हो रही गाद को हटाने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नगर आयुक्त ने स्वच्छता और ट्रांसपोर्ट शाखा को पोकलेन मशीन और वीड हार्वेस्टिंग मशीन की मदद से नियमित सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया। साथ ही डैम के किनारों पर उगी झाड़ियों और घासों की छंटाई भी कराई जाएगी ताकि क्षेत्र की सुंदरता और स्वच्छता बनी रहे।  

शिक्षा मंत्री सख्त: 10 साल पुराने मुकदमों की 15 दिन में होगी पहचान और समीक्षा

पटना बिहार का शिक्षा विभाग वर्षों से मुकदमों के बोझ तले दबा जा रहा है। हाल यह है कि विभाग 10145 मुकदमों में उलझा हुआ है। हालांकि अब इसके निपटारे की कार्ययोजना बनायी जा रही है। विभाग लंबित मुकदमों में से 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर बिहार मुकदमा नीति के प्रावधानों के अंतर्गत उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करेगा। लंबित मुकदमों के मामले को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसे लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। उन्होंने कहा कि मुकदमे न केवल प्रशासनिक संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि ये शिक्षकों, कर्मियों और आम नागरिकों के हितों से जुड़े निर्णयों में भी अनावश्यक विलंब का कारण बनते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों की विशेष सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण किया जाए। मंत्री ने 15 दिनों के भीतर दस वर्ष से अधिक पुराने मामलों की पहचान, वर्गीकरण और प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर बिहार मुकदमा नीति के अनुरूप कार्रवाई प्रारंभ करने को कहा है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। विभागीय स्तर पर इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। मुकदमों के बोझ से मुक्त होने पर विभाग का समय, ऊर्जा और संसाधन सीधे तौर पर जनहितकारी कार्यों में लगाए जा सकेंगे। विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत ढांचे के विकास में, शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की लंबित समस्याओं के समाधान में तथा सरकारी शिक्षा योजनाओं के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन में इसका उपयोग हो सकेगा। इससे प्रशासनिक निर्णय-प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार मुकदमा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शिक्षा विभाग के मुकदमों के बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। बिहार सरकार जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा विभाग इस दिशा में सुशासन की एक नई नजीर पेश करेगा।

मौसम बदलेगा मिजाज: पूरे झारखंड में बारिश के आसार, पलामू-गढ़वा में 40°C तक पहुंचेगा पारा

 रांची  झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची (IMD Ranchi) ने राज्य के विभिन्न जिलों के लिए आज का मौसम पूर्वानुमान (Jharkhand Weather Forecast) जारी कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज पूरे राज्य में कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज ऐसा कोई जिला नहीं बचेगा, जहां एक-दो स्थानों पर बारिश न हो। यानि पूरे झारखंड में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा, बिजली कड़कने और बादल गरजने का भी अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 की रफ्तार से हवा चलेगी। बारिश के बाद जहां कई स्थानों में चुभती गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं जिन स्थानों पर बारिश नहीं होगी, वहां तापमान बढ़ेगा इन स्थानों पर बढ़ेगा तापमान मौसम विभाग के मुताबिक, आज झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में पारे का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। पलामू और गढ़वा जैसे उत्तर-पश्चिमी जिले आज सबसे गर्म रहने वाले हैं, जहां अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 40°C तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, राजधानी रांची सहित मध्य झारखंड के इलाकों जैसे खूंटी और गुमला में आज अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 24°C से 25°C के आसपास बने रहने की उम्मीद है, जिससे यहां थोड़ी राहत रहेगी। इसके विपरीत, संताल परगना और उत्तर-पूर्वी झारखंड के देवघर, धनबाद और दुमका जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 36°C के आसपास रहेगा, जबकि गोड्‌डा और पाकुर में यह 37°C तक जा सकता है। दक्षिण झारखंड के जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में भी पारा 38°C के करीब रहने से दोपहर में उमस भरी गर्मी का अहसास होगा। मौसम विभाग की आज के लिए जरूरी चेतावनी वज्रपात (बिजली गिरने) से सावधान: जिन 15 जिलों में बारिश का अनुमान है, वहाँ तेज हवाओं के साथ बिजली कड़कने की आशंका है। मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों या पक्के मकानों में शरण लें। पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। दोपहर में निकलने से बचें: पलामू, गढ़वा और चतरा के लोग दोपहर 12 से 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर ही घर से बाहर निकलें।

फायरिंग केस में नाम आने के बाद खान सर का सरेंडर, जानें पूरा मामला

पटना खान सर पर प्राथमिकी दर्ज हुए 24 घंटे बीत गए लेकिन पटना पुलिस उनको गिरफ्तार नहीं कर पाई। अब फैजल खान पटना सिविल कोर्ट पहुंच चुके हैं। वह सरेंडर करेंगे। कोर्ट में पेश होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार रात्रि से शनिवार सुबह तक पटना पुलिस की टीम खान सर के कोचिंग के पास तो छात्रों की भीड़ जुटने लगी। विधि व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए पटना पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक गिरफ्तार नहीं किया। देर रात छात्रों की संख्या कम हुई लेकिन इसके बावजूद खान सर ने न तो सरेंडर किया और न ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। शनिवार दोपहर खान सर सरेंडर करने कोर्ट पहुंच गए।   छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे इधर, शनिवार सुबह खान सर के कोचिंग से जुड़े छात्रों को मैसेज आया कि खान सर आज क्लास लेंगे। वह सुबह 10 से 11 बजे क्लास लेंगे। हालांकि, उन्होंने क्लास तो नहीं लिया लेकिन वह सरेंडर करने जरूर सामने आए। पटना पुलिस ने छात्रों से फिर से अपील की है कि वह किसी कोचिंग वालों के बहकावे में नहीं आएं। विधि व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की मदद करें। पटना पुलिस निष्पक्ष होकर कार्रवाई कर रही है। खान सर पर गोली चलाने के आदेश देने का आरोप थाने में दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि दोनों सुरक्षा गार्डों ने लोगों में भय और दहशत फैलाने तथा सार्वजनिक रूप से हथियार का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से फायरिंग की। दोनों अंगरक्षकों ने कबूल किया है कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही फायरिंग की। दोनों ने स्पष्ट कहा कि कुछ लोग उग्र होकर कोचिंग के बाहर सुरक्षा गार्ड को बेरहमी से पीट रहे थे। इतना ही नहीं कुछ अन्य असमाजिक तत्व बैनर और पोस्टर भी फाड़ने लगे। हंगामा के बाद हमलोग खान सर के साथ बाहर आए। हंगामा देखकर खान सर ने कहा कि देख क्या रहे हैं हो, अविलंब फायर करो जो होगा मैं समझ लूंगा। इस आदेश के बाद हमलोगों ने दो दो राउंड फायरिंग की। खान सर को कितने साल की सजा हो सकती है? पटना पुलिस ने फैसल खान उर्फ खान सर पर बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 (9)/ 27/ 35 के तहत हत्या के प्रयास और लापरवाही से हथियार (जैसे बंदूक या पिस्टल) लहराने या इस्तेमाल करने का केस दर्ज होता है। पटना हाईकोर्ट के वकील आलोक आनंद ने कहा कि गोली चलाने का आरोप खान सर के दोनों अंगरक्षकों पर लगा है। अगर यह बात साबित हो जाती है कि खान सर के आदेश पर दोनों अंगरक्षकों ने गोली चलाई तो वह भी सामान्य रूप से बीएनएस की धारा 109 में दोषी पाए जाएंगे। अगर दोषी पाए गए तो 10 साल तक की सजा उन्हें हो सकती है। उनपर आर्म्स एक्ट की धारा 35 भी लगी है। इससे खान सर नहीं बच सकते हैं। जो धाराएं लगाई हैं वह खान को परेशान करेगी।    

निशांत समेत 8 नामों का ऐलान, सामाजिक समीकरण साधने में जुटा एनडीए

पटना बिहार विधान परिषद की एक सीट पर उपचुनाव और 9 सीटों पर चुनाव को लेकर एनडीए ने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। एनडीए के दोनों प्रमुख दलों जदयू और भाजपा ने अपने-अपने कोर वोटरों का पूरा ध्यान रखा है। इन आठ उम्मीदवारों में पांच अतिपिछड़ा समाज से जबकि तीन महिलाएं हैं। जदयू ने तीन जबकि भाजपा ने दो अतिपिछड़ों को मौका दिया है। भाजपा ने अपने हिस्से की चार सीटों में से दो सवर्णों के हवाले किया है। घोषित उम्मीदवारों में भाजपा के संजय मयूख को छोड़कर निशांत समेत शेष सात उम्मीदवार पहली बार विधान परिषद जाएंगे। एनडीए की ओर से 9वीं सीट पर मंत्री दीपक प्रकाश का भी विधान परिषद जाना तय है। जल्द ही रालोमो उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी। जदयू ने उम्मीदवारों के चयन में आधार वोट के साथ क्षेत्रीय संतुलन को भी साधा है। जदयू की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी दी गयी है। पार्टी के चार उम्मीदवारों में एक पिछड़ा तो तीन अति पिछड़ा हैं। इनमें एक कुर्मी, एक नोनिया, एक कुम्हार और एक धानुक जाति से हैं। भाजपा प्रत्याशियों में दो सवर्ण और दो अतिपिछड़ा हैं। सवर्ण में एक राजपूत तो एक कायस्थ हैं जबकि अतिपिछड़ा में एक नाई और दूसरी प्रजापति हैं। चार में एक महिला को भी है। इनमें तीन पहली बार तो एक तीसरी बार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। जदयू की सूची में पहला नाम निशांत का है। उन्हें जदयू का अगला चेहरा माना जा रहा है। डॉ. भारती मेहता बीते 25 वर्षों से जदयू के लिए काम कर रही हैं। इस समय जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं, शिवरानी प्रजापति 20 वर्षों से पार्टी में सक्रिय हैं। वे बेतिया जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं। अति पिछड़ी वर्ग में कुम्हार जाति से आती हैं। ललन प्रसाद समता पार्टी के समय से यानी लगभग 32 वर्षों से पार्टी के काम में जुटे हैं। अति पिछड़ा वर्ग के धानुक जाति से आते हैं। भोजपुरी सिने स्टार पवन सिंह काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़े थे। हाल के दिनों में पवन सिंह की मुलाकात भाजपा के शीर्ष नेताओं से हुई थी। उसी समय से कयास लगाया जा रहा था कि पवन सिंह को कुछ अहम जिम्मेवारी दी जाएगी। वहीं, डॉ. संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। वे लगातार तीसरी बार उच्च सदन के सदस्य होंगे। इसके पहले पार्टी ने गंगा प्रसाद और मंगल पांडेय को लगातार तीन बार विधान परिषद भेजा था। अनिल कुमार ठाकुर अतिपिछड़ा वर्ग में नाई जाति से आते हैं। वे अभी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वहीं शीला पंडित (प्रजापति) अभी बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं। वह डॉ. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहते प्रदेश मंत्री और सम्राट चौधरी के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुकी हैं।

यात्री के साथ लापरवाही पड़ी भारी, सीट न देने पर रेलवे पर लगा हजारों का जुर्माना

पटना  भारतीय रेलवे में लाखों यात्री हर दिन रिजर्वेशन कर सफर करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि कंफर्म टिकट मिलने के बाद उनकी सीट सुरक्षित होगी। बिहार में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर कंफर्म टिकट होने के बावजूद भी चार यात्रियों को रिजर्व्ड सीट नहीं मिली। उन्हें पूरा सफर खड़े होकर करना पड़ा। इस मामले के सामने आने के बाद यात्रियों के अधिकारों को लेकर बहस शुरू हो गई थी और अब उपभोक्ता आयोग ने इस पर बड़ा फैसला दे दिया है। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में रेलवे की गलती मानी है और चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा है।  यह मामला उस समय सामने आया जब चार यात्री उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से बिहार के आरा के लिए LTT-पटना एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे। यात्रियों के पास पहले से कंफर्म रिजर्व टिकट था लेकिन ट्रेन में चढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी निर्धारित बर्थ पर दूसरे लोग बैठे हुए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि सीटों पर रेलवे स्टाफ मौजूद था और कई बार अनुरोध के बावजूद सीट खाली नहीं कराई गई।  रेलवे अधिकारियों ने नहीं की मदद यात्रियों ने मौके पर अपनी समस्या हल कराने की कोशिश की। उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन, रेलवे सेवा पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें शिकायत संख्या भी जारी हुई, लेकिन यात्रा के दौरान उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। बाद में यात्रियों ने टीटीई से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें भीड़ का हवाला देकर किसी तरह यात्रा पूरी करने को कहा गया। नतीजा यह हुआ कि चारों यात्रियों को पूरा सफर खड़े होकर तय करना पड़ा।  कोर्ट ने क्या कहा? मामला भोजपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन पहुंचा। सुनवाई के दौरान आयोग ने यात्रियों की ओर से पेश किए गए टिकट, शिकायत रिकॉर्ड और अन्य सबूतों पर विचार किया। आयोग ने माना कि यात्रियों ने वैध आरक्षण कराया था लेकिन उन्हें नियमों के अनुसार रिजर्व्ड सीट नहीं दी गई। इसे रेलवे की सेवा में गंभीर कमी माना गया।  आयोग ने कहा कि यात्रियों को सिर्फ असुविधा नहीं हुई बल्कि उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ी। आयोग ने यह भी माना कि किसी यात्री को कंफर्म सीट के बावजूद खड़े होकर यात्रा करने के लिए मजबूर करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद रेलवे को चारों यात्रियों को मुआवजा देने के लिए कहा गया।  रेलवे को कितना भुगतान करना होगा? फैसले में रेलवे को निर्देश दिया गया कि यात्रियों की टिकट राशि 1,876.80 रुपये ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा यात्रियों को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी दिया जाए। आयोग ने आदेश दिया कि यह भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।  सभी को पता होना चाहिए नियम भारत में रोजाना लाखों लोग रेल से सफर करते हैं। ज्यादातर लोगों को अपने अधिकारों के बारे में नहीं पता होता और उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर आपका टिकट कंफर्म है और सीट रिजर्व है तो ट्रेन में आपको आरक्षित सीट मिलनी चाहिए। अगर आपकी सीट पर कोई और बैठा हो तो आप रेलवे कर्मचारियों से कहकर सीट खाली करवा सकते हैं। अगर रेलवे मदद नहीं करता है तो कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन या कंज्यूमर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।   

हेमंत सोरेन को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें? जमीन घोटाले में 8 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

रांची. ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना निर्णय आठ जून को सुनाएगी। मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए हेमंत सोरेन ने पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वह इस मामले में निर्दोष है। उनके खिलाफ लगे सभी आरोप निराधार हैं। मामले में हेमंत सोरेन सहित 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोप तय किया जाना है। समय / वर्ष     घटनाक्रम वर्ष 2024     बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025     हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026     ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026     विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत इस डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय के इस फैसले के बाद केस में आगे क्या होगा- यदि डिस्चार्ज याचिका स्वीकार होती है: अगर अदालत हेमंत सोरेन की दलीलें मान लेती है, तो उन्हें इस मामले से बरी किया जा सकता है (यानी उन पर ट्रायल नहीं चलेगा)। यदि डिस्चार्ज याचिका खारिज होती है: अगर अदालत याचिका खारिज कर देती है, तो अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत हेमंत सोरेन और अन्य सभी 18 आरोपितों पर कोर्ट में औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame of Charges) किए जाएंगे और नियमित ट्रायल शुरू होगा। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।

पूजा सिंघल दंपती ने कोर्ट के निर्देश पर सरेंडर किए पासपोर्ट, विदेश यात्रा से लौटने के बाद कार्रवाई

रांची ईडी कोर्ट में मनी लांड्रिंग में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा ने बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। दोनों हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं, जहां वे अपनी बेटी के इलाज के लिए गए थे। इससे पहले पूजा सिंघल और अभिषेक झा ने अदालत में याचिका दाखिल कर पासपोर्ट रिलीज करने तथा विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया था कि उनकी बेटी गंभीर न्यूरोलाजिकल बीमारी से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए सिंगापुर जाना आवश्यक है। अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए शर्त रखी थी कि वे 31 मई तक रांची लौट आएंगे और वापसी के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेंगे। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए दोनों बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। चिल्ड्रेन कोर्ट से हत्या के मामले में नाबालिग बरी चिल्ड्रेन कोर्ट ने हत्या के मामले के नाबालिग आरोपित को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है। घटना को लेकर युवती के पिता ने 23 मई 2024 को लापुंग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि बेटी नाबालिग लड़के से बातचीत करती थी। 15 मई 2024 को घर से सहेली के मिलने के निकली, लेकिन वापस नहीं आई। पिता ने हत्या करने का आरोप लगाते हुए नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष पाई गई, जिसके कारण उसका मामला अलग कर चिल्ड्रेन कोर्ट में चलाया गया। बैटरी चोरी के मामले में पांच आरोपित बरी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मयंक मलियाज की अदालत ने टेलीकाम टावर से बैटरी चोरी के मामले में लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका। मामले से शहनवाज, साजिद अंसारी, रिजवान, आर्यन खान तथा नायर आलम को बरी किया गया। मामला नामकुम (खरसीदाग ओपी) थाना से जुड़ा था। प्राथमिकी के अनुसार 26 जुलाई 2024 की रात करीब 2:30 बजे एक टेलीकाम टावर के शेल्टर का ताला तोड़ कर वहां रखी 48 बैटरियों में से 24 एक्साइड बैटरियां अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को गवाह प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। अदालत ने समन, वारंट, एसएसपी को पत्र और अंतिम अवसर तक प्रदान किया, लेकिन इसके बाद एक भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह नो एविडेंस का मामला है। दहेज उत्पीड़न मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज न्यायायुक्त की अदालत ने वैवाहिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें केवल पति सुखराम हजाम के संज्ञान लिया गया था। यह मामला शिकायतवाद से जुड़ा है। मामले में शिकायतकर्ता सुरेखा प्रमाणिक ने आरोप लगाया था कि पति के साथ-साथ सास-ससुर एवं अन्य ससुराल वालों ने भी उसे प्रताड़ित किया और पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता ने दलील दी थी कि जांच के दौरान गवाहों ने सभी आरोपितों की भूमिका की पुष्टि की है। इसलिए उनके खिलाफ भी संज्ञान लिया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं। ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। बाहर निकलली और मैडम के बतइली "आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।" 3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए। भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं। हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है: 1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली। 2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे। 3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं। 4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए। 5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे। 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

बिहार के अस्पताल में दर्दनाक हादसा, आग लगने से 7 मरीजों की जान गई, कई घायल

मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर में गुरुवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। ब्रह्मपुरा इलाका स्थित 'प्रसाद हॉस्पिटल' में सुबह अचानक भीषण आग लग गई। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। आग के कारण पूरे अस्पताल भवन में घना धुआं फैल गया, जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक मरीज गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इन मरीजों की हुई मौत – शशांक कुमार, औराई, मुजफ्फरपुर  गीता देवी, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर  ⁠उदय कुमार, तरियानी, शिवहर  कृष्ण नंदन  चंचला कुमारी ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में थे भर्ती- विशंभरपुर शिवहर के रहने वाले उदय कुमार चार दिन से अस्पातल में भर्ती थे। ब्रेन सर्जरी होने के बाद आईसीयू में थे। इनसे मिलने पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा अस्पताल में थीं। साला नीतीश भी था। सभी लोग साथ में थे। शोर होने पर जानकारी मिली, लेकिन जब तक पहुंचे, तब तक उदय कुमार की मौत हो चुकी थी। दिस्तौलिया, कथैया की रहने वाली गीता देवी एक जून को भर्ती हुई थीं। शुगर और बीपी से ग्रसित थीं। उनका डायलिसिस चल रहा था। ये जानकारी उनके बेटे अनीश ठाकुर ने दी। गोरिगमा डीह, मीनापुर के रहने वाले कृष्णनंदन सिंह डॉ. संजीव के यूनिट में इलाजरत थे। फेफड़ा में पानी था। 22 मई से भर्ती थे। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। अग्निशमन कर्मियों ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अस्पताल के विभिन्न वार्डों में फंसे मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। आईसीयू में मौजूद मरीजों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। देखते ही देखते जहरीला धुआं पूरे अस्पताल में फैल गया, जिससे कई मरीजों की हालत और गंभीर हो गई। कई मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें आसपास के सुरक्षित अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आईसीयू वार्ड धुएं से भर गया था- दमकल कर्मी अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। जब दमकल की टीम अस्पताल पहुंची तो आईसीयू वार्ड पूरी तरह धुएं से भरा हुआ था। बचाव अभियान के दौरान कई मरीजों को गंभीर स्थिति में बाहर निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि कई मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। शॉर्ट सर्किट माना जा रहा आग की वजह शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप कई परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर वहां से चले गए। इससे कई मरीज समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच गए। एक पीड़ित स्वजन ने बताया कि उनके पिता आईसीयू में भर्ती थे और आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकालने में काफी देर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन से किसी प्रकार की मदद नहीं की गई। परिजनों का यह भी कहना है कि हादसे के बाद मृतकों के शवों की जानकारी देने में भी अस्पताल प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। मृतकों की संख्या और हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 13 बेड के वार्ड में 15 मरीज DM सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि 13 बेड लगे हुए थे, जिसमें 15 मरीज भर्ती थे। अभी 3 मरीजों के मरने की पुष्टि हुई है। आग की घटना के चलते ICU वार्ड के इंचार्ज भी झुलस गए हैं, जिन्हें बगल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों का भी रेस्क्यू कर आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बुजुर्ग महिला ने जान बचाकर गार्ड को जानकारी बीपी लो होने के बाद एक बुजर्ग महिला को इसी ICU वार्ड में भर्ती कराया गया था। आग लगने की घटना के बीच महिला ने न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि गार्ड को भी घटना के बारे में बताया। मरीजों के स्वजनों ने डीएम से बताई आपबीती डीएम ने मरीजों के स्वजनों से बात की। इस दौरान मरीजों के स्वजनों ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल सिस्टम काम नहीं कर रहा था। अस्पताल की अव्यवस्था के बारे में शिकायत की। एक स्वजन ने बताया कि सीढ़ी का गेट बंद था, जिसकी वजह से लोगों को नहीं बचाया जा सका। उनका कहना है कि अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।