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बिहटा टेक्नोलॉजी सेंटर उद्घाटन: बिहार के विकास को लेकर सरकार का नया रोडमैप

पटना मंगलवार को पटना से सटे बिहटा में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से बनाए गए टेक्नोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया गया है। उस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में इस टेक्नोलॉजी सेंटर को बिहार के विकास में एक अहम मोड़ बताया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने बताया कि 28 नवंबर 2027 को नई सरकार के एक साल पूरा होने पर उनका टारगेट क्या है। सीएम ने इस दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार बदल रहा है। अगर बिहार को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले एमएसएमई की पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी। एमएसएमई ने जितना काम किया है उसे देखकर मैं अचंभित हूं। बिहार में 1 करोड़ 86 लाख लोग MSME से जुड़े और लगभग एक लाख करोड़ का बाजार है। ये बिहार है। अब तक बिहार को कोई नहीं देखता था। लोग सोचते थे कि यहां जनसंख्या अधिक है तो यहां गरीबी इसी वजह से है। लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था में 14 करोड़ बिहारी एक उपभोक्ता के तौर पर इस देश को जीएसटी देने का काम कर रहे हैं। इसलिए आज बिहार बदल रहा है और जब बिहार बदलेगा तब ही तो हम समृद्ध हो पाएंगे। सम्राट चौधरी ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने सड़क, बिजली और घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत से बिजली से जुड़ी चीजों को मजबूती देने का काम किया है। लेकिन हमारा टारगेट है कि अगले 20 नवंबर को जब इस सरकार के एक साल पूरे हो तो हम जरुर आश्वस्त करते हैं कि हमारा प्रयास है कि बिहार में जो निवेश नहीं होता है तो सबसे पहले 5 लाख करोड़ का निवेश इसी बिहार की धरती पर लाने का काम किया जाएगा और सभी लोग उद्योग से जुड़ेंगे। ' सम्राट चौधरी ने गिनाए तीन बड़े फैसले इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन बड़े फैसले हमलोगों ने ली है। पहला- डिग्री कॉलेज। जिन बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे अनुमंडल या ब्लॉक में जाना पड़ता था। इस बार हमलोगों ने तय किया है कि जुलाई माह जितने भी बिहार में वैसे ब्लॉक हैं जो बिना डिग्री कॉलेज के हैं उन सभी ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोलने का काम किया जाएगा। इसके बाद सीएम ने कहा कि बिहार में लोग चिंतित रहते थे हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ेंगे। हमलोगों ने तय किया है कि 533 ब्लॉक में एक-एक मॉडल स्कूल खोलेंगे ताकि वहां के बच्चे वहीं पढ़ाई करेंगे उन्हें बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। तीसरे बड़े फैसले के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इसके बाद मैंने कहा कि एक सहयोग कार्यक्रम चलाइए। इसके तहत हम महीने में 2 कैंप लगाएंगे। 2 कैंप लगाकर ब्लॉक, अंचल और थाने की समस्या को ऑन स्पॉट हमारे पदाधिकारी समाप्त करने का काम करेंगे।

बिहार टाउनशिप योजना: किसानों को चार गुना मुआवजा और विकास में साझेदारी

पटना बिहार की 11 नई सेटेलाइट टाउनशिप के दायरे में जो जमीन आयेगी, उसके मालिक किसान इसमें भागीदार होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टाउनशिप क्षेत्र में जिस किसान की जमीन आयेगी, उसमें कोई भी भूमिहीन नहीं होगा। सरकार किसानों को 55 फीसदी जमीन विकसित कर वापस देगी। टाउनशिप के लिए खाता-खेसरा के साथ प्रारूप का प्रकाशन अक्तूबर-नवंबर तक होगा। इसके बाद प्रारूप पर लोगों से आपत्ति और सुझाव लिये जायेंगे। यह जानकारी नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि जो किसान टाउनशिप के लिए जमीन नहीं देना चाहेंगे, सरकार उनसे बाजार दर से चार गुना अधिक कीमत पर खरीदेगी। जमीन अधिग्रहण डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी। विवाद का निपटारा ट्रिब्यूनल करेगा। जमीन मालिकों के साथ बैठक में सहमति के आधार पर सब तय होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव राजीव कुमार श्रीवास्तव, अपर सचिव मनोज कुमार भी उपस्थित थे। प्रस्तावित टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में भूमि के लेनदेन पर अस्थायी प्रतिबंध जमीन भू-मालिकों के कल्याण के लिए है। विकास की सुगबुगाहट होते ही बिचौलिए किसानों को उनकी जमीन कम कीमत पर खरीद लेते हैं। यह रोक सुनिश्चित करती है कि भू-मालिक बेशकीमती जमीन कम कीमत पर न बेचे। योजना पूरी होने पर जब ढांचा तैयार हो जाएगा, तब वही भू-मालिक संपत्ति अच्छे दरों पर बेचने या विकसित करने के हकदार होंगे। यह कदम उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है। यह योजना पूरी तरह पारदर्शी है। ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक, हर चरण में भू-मालिकों या सार्वजनिक परामर्श लिया जाएगा। सड़क व बुनियादी ढांचा के लिए 22 फीसदी क्षेत्र टाउनशिप में 22 प्रतिशत क्षेत्र सड़क और बुनियादी ढांचा के लिए होगा। पांच प्रतिशत जमीन में पार्क, खेल मैदान, उद्यान, खुला क्षेत्र, स्कूल, औषधालय, अग्निशमन जैसी सुविधाएं होंगी। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास के लिए तीन फीसदी भूखंड का उपयोग होगा। मूलभूत संरचना यथा-सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर आदि के विकास के लिए 15 फीसदी भूमि प्राधिकार के द्वारा लागत वसूली के लिए रखी जाएगी। प्रारूप पर सहमति के बाद हटेगी भूमि निबंधन पर रोक सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चिह्नित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक है। पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर के लिए 31 मार्च 2027 और मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी के लिए 30 जून 2027 तक रोक है। प्रारूप पर किसानों की सहमति बनते ही जमीन खरीद-बिक्री पर रोक हट जायेगी

23 निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का एडमिशन, 580 में से 279 चयनित

  हजारीबाग झारखंड में हजारीबाग जिले के अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के प्रवेश कक्षा में सत्र 2026-27 के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन संबंधित पहली सूची शिक्षा विभाग ने जारी किया. इसमें मिले 580 आवेदनों में सत्यापन के बाद लगभग 180 आवेदन को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है. शेष आवेदनों के साथ मौजूद कागजात पर अभिभावकों से उनका पक्ष मांगा गया है. आवेदक 28 अप्रैल शाम 4:00 बजे तक अपना पक्ष रख सकते हैं. जिला शिक्षा अधीक्षक सह अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया सत्यापित सभी 580 बच्चों की सूची को हजारीबाग nic.com पर डाला गया है. इसमें 180 आवेदन के आवश्यक कागजात जांच में सही मिलने पर सभी को विचाराधीन (अंडर कंसीडरेशन फॉर रेंडमाइजेशन) की श्रेणी में रखा गया है. क्या है मामला? निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने पोर्टल बनाकर निर्धारित समय सीमा यानी 14 मार्च 2026 तक 580 आवेदन प्राप्त किया है. नियम अनुसार इसमें अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के लिए 279 बच्चों की सूची शिक्षा अधिकारी/कर्मी की एक टीम तैयार करने में जुटी है. अंतिम रूप से तैयार सूची संबंधित स्कूलों को भेजा जाएगा. आरटीई में गरीब बच्चों का नामांकन होना है. इसके लिए आरटीई के संकल्प पत्र में बच्चों के अभिभावकों को 72,000 का इनकम सर्टिफिकेट (आय प्रमाणपत्र) अनिवार्य किया गया है. हजारीबाग में आरटीई के तहत 23 निजी स्कूलों में 279 बच्चों के नामांकन के लिए पहली सूची जारी हुई है. कुल 580 आवेदन मिले थे, जिनमें करीब 180 आवेदन विचाराधीन रखे गए हैं. किस निजी स्कूल में कितना नामांकन बरही- डीएवी पब्लिक स्कूल – नर्सरी – 10 बड़कागांव-डीएवी पब्लिक स्कूल उरीमारी-एलकेजी-08 बरकट्ठा-डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो-वन-20 चौपारण-सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा-वन-20 शहरी क्षेत्र-दिल्ली पब्लिक स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-जैक एंड जिल स्कूल सिंघानी-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-लॉर्ड कृष्णा स्कूल अमृतनगर-वन-10 शहरी क्षेत्र-संत पॉल स्कूल-वन-10 शहरी क्षेत्र-सरस्वती शिशु विद्या मंदिर कुम्हारटोली-वन-10 शहरी क्षेत्र-नेशनल पब्लिक स्कूल-वन-20 शहरी क्षेत्र-संत स्टेफन स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-श्री रामकृष्ण शारदा मठ एंड मिशन-नर्सरी 12 शहरी क्षेत्र-माउंट एग्माउंट स्कूल-एलकेजी- 15 शहरी क्षेत्र-डीएवी पब्लिक स्कूल-नर्सरी-15 शहरी क्षेत्र-नमन विद्या-नर्सरी- 07 शहरी क्षेत्र- रोजबड स्कूल- एलकेजी- 07 शहरी क्षेत्र-ओएसिस स्कूल हजारीबाग-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-न्यू हजारीबाग पब्लिक स्कूल हूपाद- नर्सरी-10 इचाक-चैंपियन बेसिक अकैडमी-वन-20- कटकमदाग-एंजेलस हाई स्कूल सिरसी-एलकेजी-10 कटकमदाग- दिल्ली पब्लिक स्कूल शंकरपुर-एलकेजी-10 कटकमसांडी-संत अगस्टिन हाई स्कूल कंचनपूर-वन-10 डाडी-डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए-नर्सरी-05

मखाना खेती पर सरकार मेहरबान, अररिया के किसानों को 75 फीसदी तक अनुदान

अररिया. मिथिलांचल की पारंपरिक पहचान और वैश्विक सुपरफूड मखाना अब अररिया के खेतों में अपनी सफेदी बिखेरने को तैयार है। बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना का विस्तार करते हुए अररिया समेत राज्य के 16 जिलों को इसमें शामिल किया है। कोसी और सीमांचल के कुछ जिलों तक यह खेती अब तक मुख्य रूप से सीमित थी, लेकिन अब अररिया के किसान भी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस पहल के तहत मखाना की खेती करने वाले जिले के किसानों को लागत पर 75 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जाएगा। इस निर्णय से जिले के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आने की उम्मीद है। जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि अररिया को मखाना उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में पहचान मिलेगी। एटीएम पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बिहार सरकार ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को भारी सब्सिडी (अनुदान) मिलेगी। साथ ही कौशल विकास के तहत प्रखंड स्तर पर चयनित 10 किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के तहत मखाना विकास योजना 2026-27 के तहत मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण पर 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है। कौशल विकास के तहत, प्रखंड स्तर पर दस किसानों को मखाना की आधुनिक खेती (जैसे स्वर्ण वैदेही, सबोर मखाना) और उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। किसानों को बीज वितरण योजना के तहत रियायती दरों पर बीज मिलेगा। इसके अलावा, मखाना खेती के पारंपरिक उपकरणों के लिए भी 75% की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रखंड क़ृषि पदाधिकारी राजीव कुमार झा ने बताया कि इस योजना से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि आधुनिक तरीकों से मखाना की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

रांची में जीईएल चर्च चुनाव: मार्शल केरकेट्टा लगातार दूसरी बार मॉडरेटर निर्वाचित

रांची झारखंड और असम के प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थानों में से एक, गोस्सनर इवेंजिलिकल चर्च छोटानागपुर एंड असम (जीइएल चर्च) को अपना नया नेतृत्व मिल गया है. मंगलवार को रांची के गोस्सनर कंपाउंड स्थित एचआरडीसी (HRDC) सभागार में आयोजित सेंट्रल काउंसिल की बेहद महत्वपूर्ण बैठक के दौरान चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई. इस चुनाव में बिशप मार्शल केरकेट्टा ने एक बार फिर बाजी मारी और उन्हें लगातार दूसरी बार जीइएल चर्च के ‘मॉडरेटर’ के पद पर चुन लिया गया. खबर लिखे जाने तक डिप्टी मॉडरेटर के पद के लिए वोटों की गिनती और चुनावी प्रक्रिया जारी थी, जिसे लेकर चर्च के सदस्यों के बीच भारी उत्सुकता देखी गई. छह दिग्गज उम्मीदवारों के बीच था कड़ा मुकाबला जीइएल चर्च के इस लोकतांत्रिक चुनाव में चर्च के छह अनुभवी बिशप उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे. इनमें निवर्तमान मॉडरेटर बिशप मार्शल केरकेट्टा के अलावा, पूर्व डिप्टी मॉडरेटर बिशप मुरेल बिलुंग, बिशप सीमांत तिर्की, बिशप मोहन लाल सिंह मंजर, बिशप दीपक केरकेट्टा और बिशप पावेल लुगुन शामिल थे. चुनावी मैदान में इन कद्दावर नामों की मौजूदगी ने मुकाबले को काफी दिलचस्प बना दिया था. मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सेंट्रल काउंसिल के कुल 44 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. महासचिव ने की परिणामों की घोषणा वोटों की गिनती पूरी होने के बाद जीइएल चर्च के महासचिव ईश्वर दत्त कंडुलना ने आधिकारिक तौर पर परिणामों की घोषणा की. बिशप मार्शल केरकेट्टा के नाम की घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. चर्च के पदाधिकारियों और परिषद के सदस्यों ने इसे चर्च की स्थिरता और विकास के लिए एक सकारात्मक कदम बताया. चुनाव परिणाम आने के बाद नवनिर्वाचित मॉडरेटर को पुष्पगुच्छ भेंट कर बधाई देने वालों का तांता लग गया. बुधवार को क्राइस्ट चर्च में होगा भव्य पद ग्रहण समारोह चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें बुधवार को होने वाले औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं. नवनिर्वाचित मॉडरेटर और डिप्टी मॉडरेटर का पद ग्रहण समारोह बुधवार, 29 अप्रैल को सुबह सात बजे मेन रोड स्थित ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च में आयोजित किया जाएगा. इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विशेष प्रार्थना सभा होगी, जिसमें चर्च के विभिन्न अंचलों से आए पादरी, प्रचारक और मसीही समुदाय के लोग शामिल होंगे.

ग्रामीण इलाकों में आधुनिक हेल्थकेयर, एक छत के नीचे मिल रहीं सभी सुविधाएं

रांची झारखंड के रांची जिले के अनगड़ा के लोगों के लिए शालिनी अस्पताल अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की नई उम्मीद बन गया है. यह अस्पताल आधुनिक मशीनों और नए चिकित्सा उपकरणों से लैस है और लोगों को सुरक्षित, भरोसेमंद और अच्छी इलाज की सुविधा दे रहा है. अब लोगों को इस बात की जरूरत नहीं है कि अच्छा इलाज सिर्फ बड़े शहरों में ही मिलता है. इस अस्पताल की वजह से अब ग्रामीण और आसपास के मरीजों को छोटे-बड़े इलाज के लिए दूर शहर नहीं जाना पड़ेगा. एक ही छत के नीचे मिल रहीं कई अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में माताओं और बच्चों के इलाज की खास सुविधा है. यहां अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी की जाती है. इसके साथ ही खून की जांच, एक्स-रे, ईसीजी और सामान्य सर्जरी जैसी सभी जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मरीजों को मिल रही हैं. नेत्र चिकित्सा में बनाई नई पहचान, फेको विधि से हो रही सर्जरी शालिनी अस्पताल ने आंखों के इलाज में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहां हर साल हजारों मरीजों का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया जाता है. अभी यहां रोजाना आधुनिक ‘फेको’ विधि से सर्जरी हो रही है. यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है, इसमें टांके नहीं लगते, समय कम लगता है और दर्द भी बहुत कम होता है. मरीजों को स्क्रीन पर दिखाई जाती है आंखों की स्थिति नई ओपीडी मशीनों के बाद मरीजों को उनकी आंखों की हालत स्क्रीन पर साफ दिख जाती है. इससे वे खुद समझ पाते हैं कि मोतियाबिंद कैसे बढ़ रहा है और समय पर इलाज क्यों जरूरी है. सर्जरी के दौरान उन्नत लेंस लगाए जाते हैं, जिससे मरीजों की नजर पहले से ज्यादा साफ और बेहतर हो जाती है. मरीजों को मिल रहे हैं बेहतर परिणाम: राणा विकास अस्पताल के प्रबंधक श्री राणा विकास ने बताया कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है. अब मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं और संक्रमण का खतरा भी काफी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को उसके घर के पास ही अच्छी और उच्च गुणवत्ता वाली इलाज सुविधा मिले. अस्पताल की टीम हर मरीज की देखभाल पूरी जिम्मेदारी और ध्यान से करती है.

आरक्षण तय करने की प्रक्रिया बदली, राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किया संशोधित

 मधुबनी बिहार में प्रस्तावित पंचायत आम निर्वाचन 2026 की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए ‘प्रपत्र-1’ के प्रारूप प्रकाशन की तिथि में बदलाव कर दिया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रकाशन 27 अप्रैल 2026 को होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से अब इसे 4 मई 2026 को जारी किया जाएगा। आयोग ने इसके साथ ही आरक्षण निर्धारण से संबंधित पूरी संशोधित समय-सारणी भी जारी कर दी है। आरक्षण तय करने का आधार: क्या है ‘प्रपत्र-1’? ‘प्रपत्र-1’ पंचायत चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राजस्व ग्रामवार आबादी का विस्तृत ब्योरा शामिल रहता है। इसी के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाता है। अर्थात किस वार्ड या पंचायत की सीट महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी, यह पूरी तरह इसी प्रपत्र पर निर्भर करता है। ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों के लिए यह दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभाता है। संशोधित कार्यक्रम एवं प्रमुख तिथियां: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ेगी-     4 मई 2026: ‘प्रपत्र-1’ का प्रारूप प्रकाशन     4 मई से 18 मई 2026: दावा और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि     4 मई से 22 मई 2026: प्राप्त आपत्तियों का निपटारा     11 मई से 29 मई 2026: अपील वादों की सुनवाई     5 जून 2026: ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन     9 जून 2026: जिला गजट में अंतिम आंकड़ों का प्रकाशन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां केवल जनसंख्या संबंधी तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी प्रकार की आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। कहां उपलब्ध होगा प्रपत्र-1: आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रकाशन के स्थान भी निर्धारित किए हैं। यथा ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए संबंधित ग्राम पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय, जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड, अनुमंडल तथा जिला पदाधिकारी कार्यालय साथ ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा अधिकारियों को सख्त निर्देश: राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि डाटा प्रविष्टि और सत्यापन कार्य को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। संशोधित कार्यक्रम के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर ‘प्रपत्र-1’ का प्रकाशन सुनिश्चित करने तथा पूरी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है। संभावित उम्मीदवारों में बढ़ी सक्रियता: तिथि में बदलाव के बावजूद जिले में चुनावी तैयारियों के लिए जुटे संभावित उम्मीदवारों की नजर अब 4 मई पर टिक गई है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी पंचायत या वार्ड की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। जिले से लेकर प्रखंड व पंचायत के राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव के बाद सरगर्मी तेज हो गई है। कई संभावित दावेदार अब अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। बता दें कि बिहार में वर्ष 2026 के अंत तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। ऐसे में ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन होते ही आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और इसके साथ ही चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।  

पंचायत चुनाव की तैयारी तेज: बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने जनसंख्या डेटा प्रकाशन 4 मई को किया

पटना बिहार में होने वाले आगामी पंचायत आम निर्वाचन की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार होने वाले प्रपत्र-1 यानी राजस्व ग्रामवार जनसंख्या विवरण के प्रकाशन की पूर्व निर्धारित तिथि में बदलाव कर दिया है। अब इसका प्रारूप प्रकाशन 27 अप्रैल को नहीं बल्कि 04 मई को किया जाएगा। इस कारण से लिया गया निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हए बताया कि किसी अपरिहार्य कारणों से समय-सारणी में संशोधन किया गया है। नए शेड्यूल के तहत अब निर्वाचन क्षेत्रों के लिए जनसंख्या आधारित आंकड़ों का मिलान और सत्यापन नए सिरे से तय समय-सीमा में पूरा किया जाएगा। संयुक्त निर्वाचन आयुक्त का कहना है कि डाटा प्रविष्टि और इसके सत्यापन का कार्य चुनावी पारदर्शिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। दावा और आपत्ति के लिए मिलेगा समय राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि प्रपत्र-1 के प्रारूप प्रकाशन के बाद यदि किसी नागरिक या मतदाता को इसके आंकड़ों को लेकर कोई शिकायत है, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आपत्ति दर्ज कराने की तिथि 04 मई से 18 मई तक निर्धारित की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग का स्पष्ट रूप से कहना है कि आपत्ति का आधार केवल वर्ष 2011 की जनसंख्या ही मान्य होगी।  राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्धारित 4 मई की समय-सीमा के भीतर प्रपत्र-1 का प्रकाशन सुनिश्चित करें ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई और विलंब न हो। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: सीएम सम्राट चौधरी कब करेंगे मंत्रिमंडल विस्तार? 'नई विकास टीम' पर मंथन जारी; विजय सिन्हा का क्या होगा? विशेष जानकारी कहाँ से लें? आम जनता की सुविधा के लिए आयोग ने प्रकाशन स्थलों की सूची भी जारी की है। पंचायत एवं पंचायत समिति सदस्य पद के लिए ग्राम पंचायत कार्यालय और प्रखंड (Block) कार्यालय बनाया गया है। वहीं जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि किसी भी तरह की जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.sec.bihar.gov.in से भी जानकारी ली जा सकती है। ऑनलाइन सुविधा और टोल-फ्री नंबर राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाताओं के लिए इस बार तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। नागरिक आयोग की वेबसाइट पर जाकर न केवल प्रपत्र-1 देख सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन दावा या आपत्ति भी दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, किसी भी प्रकार की सहायता, सुझाव या शिकायत के लिए आयोग के टोल-फ्री नंबर 1800-3457-243 पर संपर्क किया जा सकता है।  

टॉपर देने वाला स्कूल भी जांच में कोडरमा में शिक्षा विभाग की सख्ती, शिक्षकों से स्पष्टीकरण

कोडरमा  झारखंड बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का रिजल्ट इस बार काफी खराब रहा है. पिछले साल जिला पहले नंबर पर था, लेकिन इस बार 20वें स्थान पर पहुंच गया है. इससे कई सवाल उठ रहे हैं. खासकर सालभर चलाए गए प्रोजेक्ट इम्पैक्ट, प्रोजेक्ट रेल और आवासीय कोचिंग जैसी योजनाएं भी सवालों में हैं. शिक्षा विभाग के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसी को गंभीर मानते हुए विभाग ने 40 स्कूलों के प्रिंसिपल, प्रभारी प्रिंसिपल और जिन विषयों में छात्र फेल हुए, उन शिक्षकों से जवाब मांगा है. सभी को दो दिन के अंदर बताना होगा कि उनके स्कूल का रिजल्ट 100% क्यों नहीं रहा. अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा जिला शिक्षा पदाधिकारी अविनाश राम के स्तर से जारी पत्र में कहा गया है कि वार्षिक माध्यमिक परीक्षा 2026 में कोडरमा जिले का परीक्षाफल काफी निराशाजनक रहा है. पूर्व में कई बार बैठक और वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उपायुक्त और मेरे स्तर से शत प्रतिशत परिणाम हासिल करने को लेकर कई निर्देश दिया गया था, लेकिन आप लोगों के द्वारा कार्य में शिथिलता बरती गई है जिसके परिणाम स्वरूप कोडरमा जिले में 93़86 प्रतिशत छात्र छात्राएं उतीर्ण हुए हैं. जो राज्य के औसत प्रतिशत से भी कम है. पत्र में आगे कहा गया है कि आखिर किस परिस्थिति में आपके विद्यालय का प्रदर्शन अपेक्षाकृत शत-प्रतिशत नहीं रहा. अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ तो अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की जाएगी. बता दें कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में कोडरमा जिले से 12,214 छात्र छात्रायें शामिल हुए थे ,जिसमे से 11,465 सफल रहे ,जबकि 749 असफल रहे़ उतीर्ण करने वालों में प्रथम श्रेणी से 6196, द्वितीय श्रेणी से 4513 और तृतीय श्रेणी से 756 छात्र-छात्राएं शामिल हैं. जिला टॉपर देने वाले स्कूल के प्राचार्य से भी स्पष्टीकरण बताया जाता है कि शिक्षा विभाग ने जिन 40 स्कूलों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक-शिक्षिकाओं से स्पष्टीकरण मांगा है उसमें इस वर्ष जिला टॉपर देने वाला विद्यालय भी शामिल है़. इस वर्ष के परिणाम में उत्क्रमित उच्च विद्यालय सोनपूरा जयनगर की राजनंदिनी जिला टॉपर बनी थी, जबकि रानी जिले में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस विद्यालय से परीक्षा देने वाले कुल 130 विद्यार्थियों में दो अनुतीर्ण हो गए़. ऐसे में शत प्रतिशत परिणाम नहीं रहने पर विभाग ने प्रधानाध्यापक और अनुतीर्ण विषय के शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है. किसी में एक-दो तो किसी में 25-28 बच्चे हो गए हैं फेल जानकारी सामने आई है कि जिले के कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनके 1 या 2 बच्चे अनुर्तीर्ण हुए हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जहां से परीक्षा देने वाले कुल विद्यार्थियों में 25 से 28 की संख्या में विद्यार्थी अनुतीर्ण हो गए हैं. हालांकि, इन विद्यालयों से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी ज्यादा है. इनसे मांगा गया है स्पष्टीकरण सीएच प्लस टू विद्यालय झुमरीतिलैया, गांधी उच्च विद्यालय झुमरीतिलैया, राजकीयकृत 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस 2 उच्च विद्यालय कोडरमा, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गझंडी, खरकोटा, इंदरवा देहाती, उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय पथलडीहा, डुमरडीहा, मेघातरी, इंदरवा देहाती, कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय, कोडरमा, सर्वोदय 2 उच्च विद्यालय मरकच्चो, परियोजना 2 उच्च विद्यालय देवीपुर, परियोजना बालिका उच्च विद्यालय मरकच्चो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय जगदीशपुर, उत्क्रमित उच्च विद्यालय अम्बाडीह, सिमरिया, योगिडीह, राज्य सम्पोषित 2 उच्च विद्यालय बासोडीह, परियोजना 2 उच्च विद्यालय, मीरगंज, उत्क्रमित उच्च विद्यालय पोखरडीहा, राजाबर, पचाने, उत्क्रमित उच्च विद्यालय ढाब, बच्छेडीह, लक्ष्मीपुर, जानपुर, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय मसमोहना, बेहराडीह, ढुब्बा, रामेश्वर मोदी महादेव मोदी 2 उच्च विद्यालय, चंदवारा, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय ढाब, जयपुर कांको, उत्क्रमित उच्च विद्यालय उरवां, जौंगी, विरसोडीह, हरणो, उत्क्रमित 2 उच्च विद्यालय बेंदी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय गोदखर और सोनपुरा.

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: धनबाद के 54 पुलिसकर्मियों का तबादला रद्द, वापस होंगे तैनात

रांची. झारखंड पुलिस के तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में प्रशासनिक दृष्टिकोण से धनबाद से हटाए गए 54 पुलिसकर्मी वापस होंगे। हटाए गए पुलिसकर्मियों की याचिका डब्ल्यूपी (एस) नंबर 1781/2025 में 16 अप्रैल 2026 को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने तत्कालीन स्थानांतरण आदेश को रद करते हुए उक्त आदेश दिया है। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि उक्त के आलोक में तत्काल कार्रवाई करें। पुलिसकर्मियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि बिना किसी आरोप के प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण गलत है। सामान्य स्थानांतरण व प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण में अंतर होता है। सामान्य स्थानांतरण में जिस जिले से स्थानांतरित हुए, उसी जिले में वापसी संभव है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण मतलब अनुशासनहीनता के आरोप में स्थानांतरण। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण के लिए पुलिस मैनुअल में नियम है कि इसे किसी भी परिस्थिति में निरस्त नहीं किया जा सकता है। जिस पर यह लगता है, उसे दूसरे जिले में ही स्थानांतरित किया जा सकता है। इस स्थिति में उनकी उसी जिले में पुन: वापसी नहीं हो सकती है। हटाने व स्थानांतरण हुआ था आदेश जिन 54 पुलिसकर्मियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाया गया था, उन्हें हटाने संबंधित आदेश 24 फरवरी 2025 को हुआ था। वहीं, 11 मार्च 2025 को उन्हें स्थानांतरित करने संबंधित चिट्ठी जारी हुई थी। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण किए जाने के विरोध में ही इन पुलिसकर्मियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मई 2025 को तत्कालीन एसएसपी धनबाद की अनुशंसा पर कोयला क्षेत्र बोकारो के तत्कालीन डीआइजी सुरेंद्र कुमार झा ने 28 जनवरी को 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण प्रशासनिक दृष्टिकोण से करने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की थी। डीजीपी के आदेश पर सभी 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण हो भी गया था। डीजीपी के आदेश पर डीआइजी कार्मिक ने 24 फरवरी को प्रशासनिक दृष्टिकोण लगाते हुए सभी 54 पुलिसकर्मियों का विभिन्न जिला-इकाइयों में स्थानांतरण-पदस्थापन कर दिया था। इसके बाद एसडीपीओ बाघमारा की पांच मई को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर पर डीजीपी ने उन 54 पुलिसकर्मियों में से दो सिपाही संजय कुमार महतो व गौरव कुमार सिंह के स्थानांतरण को रद करते हुए पुन: धनबाद जिले में वापस कर दिया था। यह प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाने संबंधित पुलिस मैनुअल के विरुद्ध आदेश था। जिसका अन्य पुलिसकर्मियों ने विरोध किया था। स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता: एसोसिएशन झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत से दिए गए निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय उन 54 पुलिसकर्मियों के पक्ष में है, जिन्हें तत्कालीन धनबाद एसएसपी व तत्कालीन डीजीपी ने नियम विरुद्ध तरीके से प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देकर विभिन्न जिलों में स्थानांतरित कर दिया था। यह जीत उन कर्मियों के धैर्य की भी है। सभी मंचों पर संबंधित आग्रह के बावजूद कहीं सुनवाई नहीं हुई तो निराश होकर उक्त पुलिसकर्मियों ने स्थानांतरित जिला बल में योगदान दिया था। न्यायालय ने उनकी बातों को सुना और माना कि उक्त कर्मियों के साथ नियम संगत करवाई की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। पुलिस मुख्यालय से 24 फरवरी 2025 को निर्गत आदेश को निरस्त करते हुए न्यायालय ने सभी पुलिसकर्मियों को पुनः धनबाद जिला बल में योगदान कराने के लिए पुलिस मुख्यालय झारखंड को आदेशित किया है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन की ओर से भी निरंतर यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के नाम पर स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पुलिस हस्तक नियम (पुलिस मैनुअल) के प्रविधानों की अनदेखी कर, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों के पुलिस अधीक्षक तक बिना किसी ठोस आधार के पदाधिकारियों की पसंद-नापसंद के आधार पर स्थानांतरण की अनुशंसा कर देते हैं। सदस्यों को इसका खामियाजा परिवार के साथ-साथ उनके मनोबल पर भी पड़ता है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डीजीपी से मांग की है कि सभी जिलों के सक्षम पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका जारी की जाए, ताकि भविष्य में बिना भेदभाव के ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के तहत होने वाले स्थानांतरणों में ''पुलिस हस्तक नियम'' का कड़ाई से पालन हो सके।