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अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश,गोपालगंज लूट केस में मुंबई तक जुड़े तार

 गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में दीपक ज्वेलर्स में हुई सनसनीखेज लूट और हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार अपराधी के बयान से पता चला है कि इस पूरी वारदात की साजिश गुजरात के एक होटल में रची गई थी और इसमें अंतरराज्यीय गिरोह शामिल था, जिसके तार मुंबई तक जुड़े हैं। गुजरात के होटल में बनी थी साजिश भोरे थाना क्षेत्र के लाला छापर स्थित दीपक ज्वेलर्स में हुई इस वारदात को लेकर गिरफ्तार अपराधी सुमित सिंह उर्फ रोहित ने पुलिस को बताया कि करीब 20 दिन पहले गुजरात के उमरगांव स्थित होटल ‘दर्शन’ में गिरोह के सभी सदस्य इकट्ठा हुए थे। यहीं पर कुख्यात मनिंदर मिश्रा उर्फ बड़का भैया और गोलू मिश्रा ने लूट की पूरी योजना बनाई थी। लूट के लिए करोड़ों का लालच, 10-10 लाख का वादा अपराधियों को बताया गया था कि ज्वेलर्स की दुकान में करोड़ों के जेवरात हैं। लूट के बाद मिलने वाले हिस्से से सभी मुंबई में आराम की जिंदगी जी सकते हैं। गिरोह के हर सदस्य को काम के बदले 10-10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। मुंबई से मंगाए गए थे आधुनिक हथियार वारदात को अंजाम देने के लिए हथियारों का बड़ा जखीरा मुंबई से मंगाया गया था। सुमित ने बताया कि गोलू मिश्रा खुद मुंबई गया था और वहां से हथियार लेकर आया। इसके बाद विशाल यादव और सुमित को मुंबई बुलाया गया, जहां उन्हें एक बैग दिया गया, जिसमें 7 पिस्टल और 200 जिंदा कारतूस थे। इसके बाद सभी ट्रेन से वलसाड से गोरखपुर पहुंचे और फिर गोपालगंज पहुंचे। विरोध करने पर गोली मारने का था आदेश अपराधियों को साफ निर्देश दिया गया था कि लूट के दौरान अगर कोई विरोध करे, तो उसे सीधे गोली मार दी जाए। इसी वजह से दुकान में घुसते ही अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गिरोह में विशाल यादव, शत्रुघ्न राम, रोहित राम, फरमान और गोल्डन जैसे अपराधी शामिल थे। सभी दो बाइक और एक बोलेरो से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। झाड़ियों से बरामद हुए जेवरात और हथियार पुलिस ने गिरफ्तार सुमित की निशानदेही पर करमासी गांव के एक बगीचे से लूटे गए सोने-चांदी के जेवरात और घटना में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर लिए हैं। सुमित ने बताया कि घटना के बाद जब भीड़ ने उनका पीछा किया, तो वह डर गया और जेवरात व हथियार झाड़ियों में छिपाकर भागने की कोशिश की। पुलिस इस मामले में बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।  

जमीन कब्जा केस में जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय को कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा

 गोपालगंज गोपालगंज से जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को बड़ी राहत मिली है। जमीन कब्जे और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के एक गंभीर मामले में कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर 7 मई तक रोक लगा दी है। विधायक के साथ उनके सहयोगी राहुल तिवारी को भी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है। इस फैसले के बाद गोपालगंज की सियासत में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? यह पूरा विवाद गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के बेलहिया से जुड़ा है। आरोप है कि विधायक अमरेंद्र पांडेय और उनके करीबियों ने फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। इस मामले में उन पर भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण देने का भी गंभीर आरोप है। किरण सिन्हा नामक महिला की शिकायत के बाद मीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पिछले दिनों विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट में हुई जोरदार बहस सोमवार को इस मामले पर कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। विधायक की ओर से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन मिश्र ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के सामने दलील दी कि विधायक को राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस डायरी और एलसीआर रिकॉर्ड की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक विधायक के खिलाफ कोई भी सख्त कदम न उठाया जाए। 7 मई को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की है। तब तक पुलिस डायरी और अन्य संबंधित दस्तावेजों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। विधायक पप्पू पांडेय के समर्थकों के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। विधायक ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार और शासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

पलामू प्रमंडल में हड़कंप,झारखंड पुलिस ने जमीन माफियाओं के खिलाफ कसी कमर

गढ़वा गढ़वा समेत पूरे पलामू प्रमंडल में जमीन के काले कारोबार के जरिए खूनी खेल खेलने वाले माफियाओं और सफेदपोशों की अब खैर नहीं. पलामू प्रमंडल के डीआईजी किशोर कौशल ने भू-माफियाओं के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ‘मिशन मोड’ ऑपरेशन का बिगुल फूंक दिया है. डीआईजी ने प्रमंडल के तीनों जिलों गढ़वा, पलामू और लातेहार के पुलिस कप्तानों को एक सप्ताह के भीतर सक्रिय भू-माफियाओं की रिपोर्ट सौंपने को कहा है. सिंडिकेट के मास्टरमाइंड पर होगी सीधी कार्रवाई मिली जानकारी के अनुसार, इस निर्देश के मिलते ही गढ़वा पुलिस ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है. पुलिस अब केवल छोटे दलालों को नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से सिंडिकेट चलाने वाले ‘मास्टरमाइंड’ को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी में है.  पलामू प्रमंडल में जमीन माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी. डीआईजी ने गढ़वा, पलामू और लातेहार पुलिस से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. बड़े आरोपियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई पुलिस की चिंता हाल के दिनों में गढ़वा जिले में जमीन विवाद के कारण फायरिंग और हत्या जैसी घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ाई है. जांच में सामने आया है कि कई रसूखदार लोग अपराधियों को फंडिंग कर रहे हैं. पुलिस अब इनके मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है. पुलिस की रणनीति इस बार माफियाओं को भागने का मौका नहीं देने की है. कहा गया कि तीनों जिलों की पुलिस संयुक्त समन्वय के साथ छापेमारी करेगी. सूची फाइनल होते ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी. तीन श्रेणियों में बंटेंगे माफिया पुलिस की ओर से तैयार की जा रही लिस्ट में माफियाओं को उनके अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों (ए, बी और सी) में बांटा जा रहा है. श्रेणी-ए (हाई रिस्क):- वैसे बड़े खिलाड़ी जिनका सीधा कनेक्शन संगठित आपराधिक गिरोहों से है. श्रेणी-बी (मिड लेवल):- सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले और बिचौलिये. श्रेणी-सी (एजेंट): -जमीन चिह्नित करने वाले छोटे मददगार. इन पर पुलिस की पैनी नजर फर्जी खतियान और डीड बनाकर सरकारी या निजी जमीन हड़पने वाले. जमीन विवाद को जानबूझकर खूनी संघर्ष में तब्दील करने वाले तत्व. जमीन के धंधे में अपराधियों को पैसा लगाने वाले पर्दे के पीछे के फाइनेंसर. क्या कहते हैं डीआईजी? पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी, किशोर कौशल ने कहा कि प्रमंडल के तीनों जिलों से एक सप्ताह के भीतर सूची मांगी गई है. रिपोर्ट मिलते ही चिह्नित माफियाओं के विरुद्ध सीसीए और गैंगस्टर एक्ट जैसी कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी. जमीन विवाद के नाम पर रंगदारी और हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी. 

झारखंड के 14 कोषागारों में फर्जी निकासी, 200 से ज्यादा कर्मचारी जांच के घेरे में

 रांची  झारखंड में वेतन निकासी के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट में राज्य के 33 में से 14 कोषागारों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी गई है. जांच में पुष्टि हुई है कि 200 से अधिक पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों ने सिस्टम की तकनीकी खामियों का सहारा लेकर एक ही महीने में दो-दो बार वेतन और एरियर की निकासी की. इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को कुल 31.47 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें से केवल दोहरा वेतन भुगतान ही 7.67 करोड़ रुपये का है. डीएसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कानून के रखवाले ही आरोपी पाए गए हैं. महालेखाकार द्वारा जारी सूची में डीएसपी स्तर के अधिकारी- नौशाद आलम, राजेश यादव, मणिभूषण प्रसाद और मुकेश कुमार महतो के नाम शामिल हैं. इन अधिकारियों ने अपनी विभिन्न पदस्थापनाओं के दौरान नियम विरुद्ध तरीके से दोहरा वेतन और एरियर उठाया है. इनके अलावा बड़ी संख्या में सिपाही, सहायक शिक्षक और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं. इन 14 जिलों के कोषागारों में हुई गड़बड़ी महालेखाकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जिन 14 कोषागारों में फर्जी निकासी की पुष्टि की है, उनमें हजारीबाग, बोकारो, रांची, देवघर, पलामू, गोड्डा, जमशेदपुर, तेनुघाट, गुमला, चाईबासा, महेशपुर, खूंटी, सरायकेला और रामगढ़ शामिल हैं. ऑडिट के अनुसार, कुल 614 कर्मचारियों ने इस पूरे खेल को अंजाम दिया है. सिपाही से लेकर शिक्षक तक ने की लूट जांच रिपोर्ट में सिपाही बिरसा राकेश कुमार चौधरी, अशोक संजय, चंदन कुमार तिवारी, अरविंद यादव, शंकर राम और सुरेंद्र राम के नाम प्रमुखता से दर्ज हैं. इन्होंने तकनीकी लूपहोल का फायदा उठाकर दोहरा भुगतान प्राप्त किया. महालेखाकार ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और राशि की वसूली की सिफारिश की है.

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक परीक्षा स्थगित

रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड इंटरमीडिएट एवं स्नातक प्रशिक्षित विशेष शिक्षा सहायक शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की तिथि बढ़ा दी है। आयोग ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताया है। पहले यह परीक्षा पांच मई से सात मई तक आयोजित होनेवाली थी, लेकिन अब यह 20 मई से 23 मई तक रांची स्थित केंद्रों पर सीबीटी मोड में आयोजित की जाएगी। आयोग ने सोमवार को इसकी सूचना जारी करते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को उनके द्वारा दी जाने वाली परीक्षा की तिथि की सूचना शीघ्र ही उनके पंजीकृत मोबाइल में एसएमएस तथा ईमेल के माध्यम से दी जाएगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को नियमित रूप से वेबसाइट देखने के भी निर्देश दिए हैं। अगले माह जारी होगा एएनएम नियुक्ति परीक्षा का परिणाम झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड एएनएम नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा का अंतिम माॅडल उत्तर जारी कर दिया है। अभ्यर्थी इसे एक मई मध्यरात्रि तक इसे आयोग की वेबसाइट पर जारी लिंक के माध्यम से देख सकते हैं। आयोग मई माह में इस परीक्षा का परिणाम जारी करेगा। इससे पहले आयोग ने परीक्षा का औपबंधिक माडल उत्तर जारी करते हुए उसपर एक से सात अप्रैल तक आपत्तियां मांगी थी। प्राप्त आपत्तियों की विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा के बाद आयोग ने अंतिम माडल उत्तर जारी किया। यह परीक्षा 18 एवं 19 मार्च को हुई थी।

मैथिली ठाकुर का पप्पू यादव पर गुस्सा: ‘उसे कभी माफ नहीं कर पाऊंगी’

पटना  बिहार की राजनीति में महिलाओं के सम्मान को लेकर एक नई जंग छिड़ गई है। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा महिलाओं की राजनीति को लेकर दी गई अमर्यादित टिप्पणी पर भाजपा की विधायक मैथिली ठाकुर ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को गया सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अलीनगर विधायक ने पप्पू यादव के बयान को घिनौना करार देते हुए कहा कि इस कृत्य के लिए वह उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में महिलाओं के संघर्ष को बिस्तर जैसे शब्दों से तौलना पूरी नारी जाति का अपमान है। "पप्पू यादव के अपने घर में भी महिला नेत्री हैं" विधायक मैथिली ठाकुर ने पप्पू यादव को उनके परिवार की याद दिलाते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "पप्पू यादव जी को यह शोभा नहीं देता, क्योंकि उनके अपने परिवार में भी महिला राजनीति में सक्रिय रही हैं। उनकी पत्नी रंजीत रंजन सांसद हैं। फिर भी उन्होंने ऐसा बयान देकर करोड़ों महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचाई है।" मैथिली ठाकुर ने सवाल किया कि क्या वह अपनी पार्टी और परिवार की महिलाओं के बारे में भी यही राय रखते हैं? उन्होंने कहा कि इस तरह की अभद्र टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज के नैतिक मूल्यों पर चोट है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैथिली ठाकुर हुई भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैथिली ठाकुर भावुक भी हुईं। उन्होंने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए कहा, "मेरे पिता ने मुझे पूरी समझदारी और भरोसे के साथ राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। हर परिवार अपनी परंपराओं और मूल्यों के आधार पर निर्णय लेता है। आज की महिलाएं अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर पंचायत से लेकर संसद तक पहुँच रही हैं, लेकिन पप्पू यादव जैसे नेता उनकी सफलता को 'नेताओं के बिस्तर' से जोड़कर उनकी मेहनत पर पानी फेरना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, हालांकि यह कृत्य माफी के लायक भी नहीं है। विधायक मैथिली ठाकुर ने केवल विवाद पर ही नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल खोखले नारों के पीछे नहीं भागता, बल्कि वह धरातल पर होने वाले कार्यों को देख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए सरकार में महिलाओं की भूमिका बढ़ी है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'नारी शक्ति' को जो सम्मान मिला है, उसे ऐसे विवादित बयानों से धूमिल नहीं किया जा सकता।

ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए मुजफ्फरपुर के 76 गांवों में जमीन खरीद-बिक्री बंद

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. राज्य सरकार ने टाउनशिप के मास्टर प्लान तैयार होने तक जमीन की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर 30 जून 2027 तक रोक लगा दी है. इस फैसले का असर जिले के 76 राजस्व गांवों पर पड़ेगा, जहां अब निर्धारित अवधि तक जमीन का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा. पहले तैयार होगा मास्टर प्लान यह कदम बिहार सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य के 11 प्रमुख शहरों में आधुनिक सुविधाओं से लैस नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किए जाने हैं. सरकार का मानना है कि बिना योजना के जमीन की खरीद-बिक्री से भविष्य में विकास कार्यों में बाधा आ सकती है, इसलिए पहले मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. ये गांव होंगे प्रभावित मुजफ्फरपुर में जिन इलाकों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें मुख्य रूप से कांटी, कुढ़नी, मरवन और मुसहरी प्रखंड के कई गांव शामिल हैं. कांटी क्षेत्र के रोशनपुर, बंगरा, मधोपुर मछिया, पानापुर करियात, रसूलपुर करियात, काबिलपुर और शंभूपुर भोज जैसे गांव इस सूची में हैं. वहीं कुढ़नी प्रखंड के मोथौर, गौरेया, खड़ौना डीह, तारसन किशुनी, मधौल, लदौरा, सुमेरा और डुबाही सहित कई अन्य गांव भी प्रभावित होंगे. मरवन प्रखंड के बड़ी संख्या में गांव जैसे भटौना, मंसूरपुर, खलीलपुर, रायपुरा, गोपालपुर, मधुबन और कोदरिया निजामुद्दीन को भी इस रोक के दायरे में रखा गया है. इसके अलावा मुसहरी प्रखंड के परमानंदपुर, धरमपुर, चौसीवान, पताही और खबड़ा क्षेत्र के कुछ गांव भी शामिल हैं. कोई खुश, कोई दुखी इस निर्णय के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोगों और स्थानीय निवासियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. जहां कुछ लोग इसे भविष्य के सुनियोजित विकास के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं कई जमीन मालिक और बिचौलिये इससे परेशान हैं, क्योंकि इससे फिलहाल जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह ठप हो गई है. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप बनने से मुजफ्फरपुर का शहरी विस्तार बेहतर तरीके से होगा, ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी. मास्टर प्लान तैयार होने के बाद ही आगे की जमीन अधिग्रहण और विकास प्रक्रिया शुरू की जाएगी.  

केंद्र सरकार की नई पहल,शहरों के रोजगार और अर्थव्यवस्था का तैयार होगा विस्तृत रिपोर्ट कार्ड

रांची तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार बड़े शहरों के समग्र विकास के लिए ठोस डेटा आधारित नीति तैयार करेगी। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने देश के उन 47 शहरों के लिए सिटी लेवल स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट (नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट) तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक है। इसमें झारखंड के दो शहर रांची और धनबाद का चयन हुआ है, जिसके आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से विशेष शहरी नीति निर्माण योजना बनानी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को समझना और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करना है। क्यों आवश्यकता पड़ी केंद्र का मानना है कि देश के कई शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के रूप में उभर रहे हैं। संरचनात्मक बदलाव के बावजूद शहर स्तर पर आधिकारिक आंकड़ों की उपलब्धता सीमित है, जिससे साक्ष्य-आधारित शहरी नीति निर्माण और नियोजन में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर जो भी आर्थिक आंकड़े जारी होते थे, वे मुख्य रूप से देश या राज्य स्तर के होते थे। शहरों के भीतर रोजगार की क्या स्थिति है या वहां का व्यापार कैसा चल रहा है, इसका कोई सटीक सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय के अधीन ‘एनएसओ’ ने यह नई पहल शुरू की है। इसमें रांची और धनबाद जैसे शहरों को स्वतंत्र इकाई मानकर उनका डेटा अलग से संकलित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं। पड़ोसी राज्यों में यूपी के सात शहर, बिहार के केवल एक चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 10 शहर शामिल हैं। झारखंड के दो शहर के अलावा उत्तर प्रदेश के 7 शहर, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के 2-2 और बिहार के एक शहर का चयन किया गया है। दो भागों में तैयार होगी रिपोर्ट पहली रिपोर्ट में दस लाख से अधिक आबादी वाले संबंधित शहरों का विस्तृत रोजगार प्रोफाइल होगा। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को शामिल करते हुए कुल छह प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटरों) का विश्लेषण किया जाएगा। इनमें श्रम बल सहभागिता दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगारी दर, रोजगार की स्थिति और विभिन्न उद्योगों में रोजगार का वितरण शामिल होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि शहरों में रोजगार के अवसर किस क्षेत्र में अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। दूसरी रिपोर्ट असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर केंद्रित होगी। इसमें उन आर्थिक गतिविधियों (रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, निर्माण मजदूर और छोटे घरेलू उद्योग) को शामिल किया जाएगा, जो सरकारी विनियमन या कराधान के दायरे से बाहर हैं। इसमें कुल 13 संकेतकों के आधार पर विश्लेषण होगा। इसमें प्रतिष्ठानों की संख्या, स्वामित्व और साझेदारी आधारित प्रतिष्ठानों का प्रतिशत, किराए पर काम कर रहे कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों का अनुपात, महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी और व्यापार में इंटरनेट के उपयोग का प्रतिशत आदि प्रमुख हैं। इससे असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उसकी चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।

लैंड पूलिंग मॉडल से बदलेगा बिहार का शहरी ढांचा, किसानों को मिलेगा 55% विकसित जमीन

  पटना बिहार में शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए सम्राट सरकार ने 11 सैटेलाइट सिटी विकसित करने की बड़ी योजना का ऐलान किया है. इस योजना को लेकर नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि इन टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण पारदर्शी तरीके से किया जाएगा और किसानों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सबसे अहम सवाल मुआवजे को लेकर है, जिस पर सरकार ने साफ किया है कि किसानों को जमीन के बदले बाजार दर का चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसके अलावा किसानों को विकसित जमीन में भी हिस्सा मिलेगा. सरकार के मुताबिक, किसानों की कुल जमीन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा डेवलप करके वापस दिया जाएगा, जिसमें सड़क, ड्रेनेज और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद होंगी. यानी किसान केवल जमीन देने वाले नहीं, बल्कि इस प्रोजेक्ट के “शेयर होल्डर” भी बनेंगे. सरकार का दावा है कि सैटेलाइन सिटी योजना से जमीन की कीमत में कम से कम 10 गुना तक बढ़ोतरी होगी, जबकि पुनपुन इलाके में यह बढ़ोतरी 20 गुना तक हो सकती है. 5 प्रतिशत जमीन आरक्षित रखने का भी प्रावधान प्रधान सचिव ने बताया कि सभी सैटेलाइट टाउन मुख्य शहरों से करीब आधे घंटे की दूरी पर विकसित किए जाएंगे, ताकि कनेक्टिविटी बेहतर रहे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके. हर टाउनशिप में निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा. स्थानीय लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 5 प्रतिशत जमीन आरक्षित रखने का भी प्रावधान किया गया है. किसान को भूमिहीन नहीं होने दिया जाएगा! सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जमीन अधिग्रहण लैंड पूलिंग मॉडल पर होगा और किसी भी किसान को भूमिहीन नहीं होने दिया जाएगा. परियोजना शुरू करने से पहले किसानों की सहमति ली जाएगी और किसी तरह की शिकायत के समाधान के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. अक्टूबर-नवंबर तक ड्राफ्ट प्लान होगा जारी जारी फिलहाल जिन इलाकों को सैटेलाइट टाउन के लिए चिन्हित किया गया है, वहां मार्च 2027 तक सीमित दायरे में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई गई है. हालांकि यह रोक पूरे इलाके में नहीं, बल्कि हर टाउनशिप के आसपास 10-11 गांवों तक सीमित है. सरकार इस साल अक्टूबर-नवंबर तक इन सैटेलाइट टाउनशिप का ड्राफ्ट प्लान जारी करेगी. इसके साथ ही बिहार के 43 शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है. सरकार का कहना है कि यह पूरी योजना पारदर्शिता के साथ लागू की जाएगी, जिससे राज्य में योजनाबद्ध शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. सवाल-जवाब के रूप में समझें पूरी बात सवाल: बिहार में सैटेलाइट सिटी को लेकर क्या बड़ा ऐलान हुआ है? जवाब: नगर विकास विभाग ने राज्य में 11 सैटेलाइट सिटी विकसित करने की योजना की घोषणा की है. इसका मकसद शहरी विकास को तेज करना और नए आर्थिक केंद्र तैयार करना है. सवाल: अगर जमीन ली जाएगी तो किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा? जवाब: सरकार के मुताबिक किसानों को जमीन के बदले बाजार दर का चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही उन्हें विकसित जमीन में भी हिस्सा मिलेगा. सवाल: किसानों को विकसित जमीन में कितना हिस्सा मिलेगा? जवाब: कुल जमीन का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा डेवलप करके किसानों को वापस दिया जाएगा, जिसमें सड़क, ड्रेनेज और बिजली जैसी सुविधाएं होंगी. सवाल: क्या किसान पूरी तरह जमीन से वंचित हो जाएंगे? जवाब: नहीं, सरकार का कहना है कि किसी भी किसान को भूमिहीन नहीं होने दिया जाएगा. उन्हें इस योजना में शेयर होल्डर की तरह शामिल किया जाएगा. सवाल: जमीन की कीमत कितनी बढ़ सकती है? जवाब: सरकार का दावा है कि जमीन की कीमत कम से कम 10 गुना तक बढ़ेगी, जबकि कुछ क्षेत्रों जैसे पुनपुन में यह बढ़ोतरी 20 गुना तक हो सकती है. सवाल: क्या जमीन अधिग्रहण में किसानों की सहमति जरूरी होगी? जवाब: हां, सरकार ने साफ किया है कि किसानों की आम सहमति के बाद ही परियोजना पर काम शुरू होगा. सवाल: क्या जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगेगी? जवाब: हां, जिन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है वहां मार्च 2027 तक सीमित दायरे में खरीद-बिक्री पर रोक रहेगी, जो हर टाउनशिप के आसपास 10-11 गांवों तक लागू होगी. सवाल: स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा? जवाब: हर सैटेलाइट टाउन में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 5 प्रतिशत जमीन आरक्षित होगी. सवाल: अगर किसी को शिकायत होगी तो क्या व्यवस्था है? जवाब: शिकायतों के निपटारे के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा, जहां लोग अपनी समस्याएं रख सकेंगे. सवाल: योजना कब तक लागू होगी? जवाब: सरकार इस साल अक्टूबर-नवंबर तक ड्राफ्ट प्लान जारी करेगी और आने वाले समय में 43 शहरों के लिए मास्टर प्लान भी तैयार किया जा रहा है.  

ठेले का चाट बना जानलेवा, पूरे गांव में मचा कोहराम

 गिरिडीह गिरिडीह जिला स्थित सदर प्रखंड के लेदा-बजटो गांव में फूड पॉइजनिंग ने भीषण कहर बरपाया है, जिससे 6 वर्षीय एक मासूम की मौत हो गई. इसके अलावा 22 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं. घटना के बाद रविवार सुबह पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया. प्रशासनिक अमला और स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत हरकत में आई. शनिवार शाम खाया चाट, सुबह होते ही शुरू हुई उल्टी-दस्त जानकारी के अनुसार, शनिवार की शाम करीब 5 बजे एक अज्ञात व्यक्ति गांव में ठेले पर गुपचुप और छोला बेच रहा था. गांव के बच्चों समेत कई ग्रामीणों ने उससे चाट खरीदी और खाई. रविवार की सुबह होते-होते सभी को तेज बुखार, पेट में असहनीय दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई. देखते ही देखते पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई. इलाज के दौरान मासूम ने तोड़ा दम फूड पॉइजनिंग का सबसे घातक असर बजटो गांव निवासी रिंकू देवी के 6 वर्षीय पुत्र रंजन कुमार पर हुआ. उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे सदर अस्पताल लाए, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. बेटे की मौत से मां रिंकू देवी का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरे गांव में शोक की लहर है. सदर अस्पताल में मरीजों का तांता, प्रशासन अलर्ट घटना के बाद 22 से अधिक बीमार लोगों को एंबुलेंस और निजी वाहनों से सदर अस्पताल लाया गया, जहां सभी को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है. मरीजों में 5 साल के बच्चों से लेकर 45 साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं. सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह की निगरानी में सभी का इलाज चल रहा है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. डीसी और सिविल सर्जन ने जाना हाल, ठेले वाले की तलाश तेज सूचना मिलते ही डीसी रामनिवास यादव के निर्देश पर एसडीएम, एसडीपीओ, सिविल सर्जन और पुलिस के कई अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे. अधिकारियों ने मृतक के परिजनों से मिलकर सांत्वना दी और घायलों का हाल जाना. सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है. इधर, पुलिस उस अज्ञात ठेले वाले की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम सैंपल जांच के लिए बुलाई गई है.