samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच निवेश सम्मेलन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर भोपाल में होगा इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव भोपाल में जुटेंगे फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश संभावनाओं को लेकर फ्रांसीसी उद्योग जगत के साथ होगा मंथन एग्री, ईवी, टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और स्किल सेक्टर्स पर रहेगा फोकस कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा 12 मई को कॉन्क्लेव मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे वैश्विक निवेशकों से संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने उद्योग, अधोसंरचना, नीति सुधार, लॉजिस्टिक्स, स्किल डेवलपमेंट और निवेश सुविधा के क्षेत्र में जिस तेज गति से कार्य किया है, उसने दुनिया की बड़ी कंपनियों का ध्यान राज्य की ओर आकर्षित किया है। फ्रांस की प्रतिष्ठित कंपनियों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की भोपाल में मौजूदगी इसी बढ़ते विश्वास का संकेत मानी जा रही है। भोपाल में 12 मई को होने जा रहे इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्यप्रदेश वैश्विक निवेश मानचित्र पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कुशाभाऊ अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में यह आयोजन केवल एक निवेश बैठक नहीं, बल्कि उस बदलती औद्योगिक सोच और वैश्विक संवाद का विस्तार है। इसमें मध्यप्रदेश अब निवेश प्राप्त करने वाले राज्य की भूमिका से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारियों का सक्रिय केंद्र बन रहा है। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में फ्रांस के राजदूत, फ्रांसीसी उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और प्रदेश के उद्योग प्रतिनिधि शामिल होंगे। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच दीर्घकालिक औद्योगिक, तकनीकी और संस्थागत साझेदारी होगी। इससे राज्य सरकार फ्रांसीसी कंपनियों को मध्यप्रदेश के औद्योगिक वातावरण, निवेश संभावनाओं, नीति समर्थन और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक इको-सिस्टम से अवगत कराएगी। कार्यक्रम में एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल एवं ईवी, कंज्यूमर गुड्स एवं रिटेल, डिफेंस एवं एविएशन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, फार्मा एवं मेडिकल डिवाइसेस, रिन्यूएबल एनर्जी, टेक्सटाइल, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा। इन सेक्टर्स में मध्यप्रदेश को उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य सरकार का प्रयास केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और सतत औद्योगिक विकास आधारित साझेदारी के मॉडल के रूप में स्थापित करना है। कॉन्क्लेव में पारंपरिक निवेश चर्चा के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग, रिसर्च कोलैबोरेशन और संस्थागत भागीदारी पर भी विशेष ध्यान रहेगा। फ्रांस की कई प्रतिष्ठित कंपनियां पहले से मध्यप्रदेश में संभावनाएं तलाश रही हैं। 'सनोफी' द्वारा एम्स भोपाल के साथ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में चर्चा की जा रही है। 'डसॉल्ट सिस्टम्स' राज्य में वर्चुअल ट्विन टेक्नोलॉजी के माध्यम से शहरी विकास, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्किल डेवलपमेंट और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं दिख रही है। 'डेकाथलॉन' राज्य में सोर्सिंग, रिटेल विस्तार, सप्लाई चेन और स्पोर्ट्स आधारित स्किलिंग मॉडल विकसित करने में रुचि दिखा रही है। सिस्ट्रा द्वारा सड़क, मेट्रो, रेलवे, जल प्रबंधन, अर्बन प्लानिंग, डेटा सेंटर और केबल कार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। वहीं सूफलेट माल्ट द्वारा माल्टिंग बार्ली आधारित कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, किसान क्षमता विकास और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर प्रस्ताव साझा किया गया है। 'डुनासिस' द्वारा भारत में मैन्युफैक्चरिंग लोकलाइजेशन पर केंद्रित निवेश प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। कॉन्क्लेव में सनोफी, डसॉल्ट सिस्टम्स, सूफलेट माल्ट, सिस्ट्रा, ईडीएफ, एंजी, मोनिन, रॉयल कैनिन, लैक्टालिस, वर्टो मोबिलिटी, टेक्नीक सोलैर, जियोडिस इंडिया और अन्य प्रतिष्ठित फ्रांसीसी कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए फ्रांस के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। इंडो-फ्रेंच कॉन्क्लेव के जरिए जीआईएस 2027 में फ्रांस की प्रभावी भागीदारी और फ्रांसीसी निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करना है। कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है। इससे निवेश प्रस्तावों की नई संभावनाएं तैयार होंगी, फ्रांसीसी कंपनियों और मध्यप्रदेश आधारित उद्योगों के बीच साझेदारी को गति मिलेगी, तकनीकी सहयोग और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर बनेंगे तथा राज्य में भविष्य के लिए सेक्टर आधारित औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार होगा। प्रदेश के लगभग 60 से 80 उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी भी कार्यक्रम में प्रस्तावित है। इनके और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच बी-2-बी और बी-2-जी बैठकें आयोजित होंगी, जिनमें संभावित निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। इसकी शुरुआत 11 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय भ्रमण से हुई, जहां प्रतिनिधियों को प्रदेश की जनजातीय कला, संस्कृति और विरासत से परिचित कराया गया। दूसरे दिन 12 मई को फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर भीमबेठका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण करेगा। यह भ्रमण मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर बनेगा। कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में 12 मई को आयोजित होने वाले मुख्य सत्र में मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश प्रोत्साहन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और निवेश सुविधा सिस्टम पर विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। “अनलॉकिंग मध्यप्रदेश: पॉलिसी, पार्टनरशिप्स एंड पाथवेज फॉर सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट” विषय पर विशेष पैनल चर्चा भी आयोजित होगी, जिसमें फ्रांस की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम के मुख्य सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष मध्यप्रदेश की औद्योगिक दृष्टि, निवेश संभावनाओं, अधोसंरचना विकास और भविष्य की विकास रणनीति को प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न फ्रांसीसी कंपनियों द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रस्तुत किए जाएंगे तथा महत्वपूर्ण एमओयू का आदान-प्रदान भी होगा। कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और फ्रांसीसी कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच विशेष वन-टू-वन बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में संभावित निवेश, तकनीकी सहयोग और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह कॉन्क्लेव इस बात का संकेत है कि मध्यप्रदेश अब केवल निवेश आमंत्रित करने वाला राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक औद्योगिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी और भविष्य आधारित विकास मॉडल का उभरता हुआ केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार ऐसे नए अंतर्राष्ट्रीय संवाद स्थापित कर रहा है, जो राज्य को भारत के सबसे सक्रिय और विश्वसनीय निवेश गंतव्यों में मजबूत पहचान दिला रहे हैं।  

वीडी और मुख्यमंत्री के सामने चुनौतियां, एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों पर ब्रेक

भोपाल मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर इन दिनों निगम-मंडलों, बोर्डों और विकास प्राधिकरणों के खाली पदों को भरने को लेकर भारी कशमकश देखी जा रही है। राजनीतिक नियुक्तियों की प्रतीक्षा लंबी होती जा रही है, क्योंकि पार्टी के अंदर प्रभावशाली पदों पर काबिज होने के लिए अलग-अलग गुटों में खींचतान चरम पर है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 31 से अधिक महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है, जिससे संगठन और सरकार के बीच सामंजस्य बैठाना चुनौती बन गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण पर वर्चस्व की लड़ाई राजधानी (MP) के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) के अध्यक्ष पद को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है। हालांकि पहले चेतन सिंह का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन मंत्रियों और विधायकों की निजी महत्वाकांक्षाओं ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। हर गुट चाहता है कि इस प्रभावशाली पद पर उनका अपना व्यक्ति बैठे ताकि शहर के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर उनका नियंत्रण बना रहे। इंदौर की नियुक्ति में दिल्ली का हस्तक्षेप इंदौर विकास प्राधिकरण के मामले में पेच और भी पेचीदा हो गया है। बताया जा रहा है कि हरिनारायण यादव का नाम चयन के बेहद करीब था, लेकिन ऐन वक्त पर इंदौर के ही एक रसूखदार नेता ने दिल्ली दरबार में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए इस पर रोक लगवा दी। इस ‘वीटो’ के बाद अब नए समीकरण तलाशे जा रहे हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है। 50 दिग्गज नेताओं की सक्रिय लॉबिंग पार्टी के भीतर लगभग 50 से ज्यादा कद्दावर नेता ऐसे हैं जो अब तक सत्ता की मुख्यधारा में कोई पद हासिल नहीं कर पाए हैं। ये सभी नेता अब बचे हुए निगमों और आयोगों में अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। नेताओं का यह दबाव ही है कि सरकार और संगठन चाहकर भी अंतिम सूची पर मुहर नहीं लगा पा रहे हैं। इन प्रमुख संस्थानों में खाली पड़ी हैं कुर्सियां प्रदेश (MP) के कई बड़े और प्रभावकारी संस्थानों में नेतृत्व का अभाव है। इनमें नीति एवं योजना आयोग, खनिज विकास निगम, पर्यटन बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग जैसे महत्वपूर्ण नाम शामिल हैं। इसके साथ ही गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, मदरसा बोर्ड, और विभिन्न क्षेत्रीय विकास प्राधिकरणों (जैसे महाकौशल और बुंदेलखंड) में भी नियुक्तियां न होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। राजस्व पर बढ़ता अतिरिक्त वित्तीय भार इन राजनीतिक नियुक्तियों का एक पहलू सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी है। एक अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही आलीशान कार्यालय, सरकारी वाहन, ड्राइवर और स्टाफ का लंबा-चौड़ा अमला जुड़ जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक राजनीतिक नियुक्ति से सरकारी खजाने पर हर महीने औसतन 3 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, जो अंततः जनता के टैक्स के पैसे से ही वहन किया जाता है। पुराने चेहरों की वापसी ? हाल की कुछ नियुक्तियों ने पार्टी के भीतर असंतोष की आग को और हवा दी है। विनोद गोटिया, सत्येंद्र भूषण सिंह और महेंद्र सिंह यादव जैसे नेताओं को दोबारा अहम जिम्मेदारियां मिलने से नए और ऊर्जावान कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। फिलहाल मध्यप्रदेश भाजपा में नियुक्तियों का पूरा मामला सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों में उलझा हुआ है।

2022 नियम उल्लंघन के कारण 3500 अभ्यर्थी 2027 नगर निकाय चुनाव में नहीं लड़ सकेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ने के नियमों का पालन नहीं करने पर 2022 का चुनाव लड़ चुके 3500 अभ्यर्थियों को आगामी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की ओर से ये कार्रवाई लगातार सुनवाई के बाद की गई है। ये वे प्रत्याशी हैं, जो चुनाव खर्च का सही ब्यौरा पेश नहीं कर पाए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अक्टूबर-नवंबर 2026 में प्रस्तावित उपचुनाव के साथ साल 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां भी शुरु कर गी हैं। 2022 के चुनाव में जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित 30 दिन की अवधि में निर्वाचन व्यय का ब्योरा नहीं दिया था, उन्हें सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए उन्हें आयोग के भोपाल स्थित कार्यालय आने की जरूरत भी नहीं है। NIC ने की ऑनलाइन सुनवाई व्यवस्था आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने संबंधित अभ्यर्थी के जिला मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) से जुड़कर पक्ष रखने की व्यवस्था की है। हर गुरुवार सुनवाई के लिए डेढ़ घंटे निर्धारित किए हैं। अब तक करीब 3,500 अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण कर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया है। इसमें कुछ लोगों को 2 साल तो कुछ को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। यानी इस हिसाब से ये सभी 2027 के जून-जुलाई में होने वाले निकाय चुनाव तक अयोग्यता अवधि पूरी नहीं कर पाएंगे। इसलिए ये चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। खर्च का हिसाब न देने वाले अयोग्य घोषित यही नहीं, जिन नेताओं को 5 साल के लिए अयोग्य घोषित किया गया है, वो 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। नियम के मुताबिक, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों में हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पाई-पाई का ब्यौरा देना जरूरी होता है। लेकिन, आयोग की जांच में सामने आया कि, इन 3500 अभ्यर्थियों ने या तो खर्च का हिसाब दिया और ना ही ऐसी जानकारी दी, जिसे पूरा और संतोषजनक माना जाए। आयोग ने इन सभी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया, लेकिन साक्ष्य पेश न कर पाने के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। भोपाल के 82 अभ्यर्थी प्रदेशभर की बात करें तो यहां 3500 के आसपास अभ्यार्थी अयोग्य घोषित किए गए हैं। जबकि, इनमें भोपाल के 82 और बैरसिया के 3 अभ्यर्थियों सहित जिला स्तर पर बड़ी सूची तैयार की गई है। बता दें कि, भोपाल में 100 डिफॉल्टरों की लिस्ट बनाई गई थी, इनमें से सिर्फ 12 ने ही स्पष्ट जानकारी आयोग को उपलब्ध कराई है, इसी के चलते अब यही अभ्यार्थी आगे चुनाव लड़ सकेंगे, बाकी 82 को दो और पांच साल तक के लिए बाहर किया गया है। अयोग्यता की अवधि 2 से 5 साल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगा है, जो आगामी उपचुनावों या अगले स्थानीय चुनावों में फिर से दावेदारी की तैयारी कर रहे थे। अयोग्य घोषित होने के बाद अब ये अभ्यर्थी अयोग्यता की अवधि (2 से 5 वर्ष तक) पूरी होने तक किसी भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे। भोपाल में 82 अभ्यार्थियों पर एक्शन भोपाल के अलग अलग वार्डों में हुई इस कार्रवाई ने क्षेत्र के समीकरण तक बदल दिए हैं। 2 और 5 साल के लिए प्रतिबंधित होने वाले प्रमुख नामों में जिन्हें शामिल किया गया है, वो कुछ इस प्रकार हैं…। -वार्ड-1 से इमाम खां एडवोकेट, बेनी प्रसाद मीना को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड-2 से शेलेंद्र सोनू तोमर जैसे अभ्यर्थियों को 2 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। -वार्ड 12 से समीर खान और वसीम खान को अयोग्य घोषित किया गया है। -वार्ड 19 से ओसाफ अली, आदिल खां और महेंद्र सिंह को अयोग्य घोषित किया गया है। -अन्य दिग्गज: बसंती बाई, हरीश कुशवाह, इमाम हुसैन, रु म्याना रशीद, नंदा परिहार और अंजली यूनानी को भी अयोग्य घोषित किया है। पारदर्शिता से समझौता नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा कि, चुनाव में धनबल के उपयोग पर लगाम लगाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने से आगे चुनाव लड़ने वाले ये सुनिश्चित करेंगे कि, अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के 30 दिन के भीतर चुनाव खर्च का ब्यौरा देना है।

मध्य प्रदेश में मौसम का बदलाव: 8 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में गर्मी बरकरार

भोपाल मध्य प्रदेश में मौसम अब फिर से बदलता हुआ दिख रहा है। एक्टिव दो टर्फों और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते सोमवार को भी कई जिलों में आंधी और बारिश का असर बना रहेगा। मौसम विभाग ने मंडला, सिवनी सहित आठ जिलों के लिए चेतावनी दी है। इधर, भोपाल, इंदौर, और उज्जैन के कुछ इलाकों में तेज गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। रविवार को रतलाम सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मई में यह पहली बार है जब यह तापमान इतना ऊँचा गया। मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव से लोगों को उमस और गर्म हवाओं दोनों का सामना करना पड़ रहा है। इंडिया भू-आवरण विभाग की भोपाल शाखा के अनुसार बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है। हल्की बारिश और बूंदाबांदी का भी अनुमान है। रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदलता रहा। इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, और शहडोल संभाग के करीब 18 जिलों में कहीं बादल छाए रहे, तो कहीं हल्की बारिश हुई। कई जगहों पर तेज हवा से थोड़ी राहत मिली, लेकिन दिन चढ़ने के साथ गर्मी फिर से बढ़ गई। IMD भोपाल के अनुसार, सोमवार को बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में 30 से 40Km प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी और बारिश का अनुमान है। इसकी वजह टर्फ और चक्रवात का एक्टिव होना है।रविवार को तीन सिस्टम एक्टिव रहे। इससे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के 18 जिलों में मौसम बदला रहा। कहीं बादल छाए तो कहीं बूंदाबांदी हुई। आज इन जिलों में तेज गर्मी का असर मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, छतरपुर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और शाजापुर में तेज गर्मी पड़ेगी।रतलाम में रिकॉर्ड 45.5 डिग्री पारा रविवार को प्रदेश के कई शहरों में तेज गर्मी पड़ी। रतलाम में इस सीजन मई में पहली बार पारा 45.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यहां लगातार दूसरे दिन प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया गया। शाजापुर में 44 डिग्री, धार में 42.4 डिग्री, खंडवा में 42.1 डिग्री और नर्मदापुरम में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। रायसेन, नरसिंहपुर, सागर और गुना में पारा 40 डिग्री से अधिक रहा।प्रदेश के 5 बड़े शहरों में उज्जैन में सबसे ज्यादा 42.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। भोपाल में 40.4 डिग्री, इंदौर में 41.9 डिग्री, ग्वालियर में 38.4 डिग्री और जबलपुर में 38.9 डिग्री सेल्सियस रहा। कल से हीट वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने 12 मई से प्रदेश में हीट वेव यानी लू का अलर्ट जारी किया है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में लू चल सकती है।मई में पहली बार तेज गर्मी का दौर प्रदेश में 30 अप्रैल से आंधी-बारिश का दौर शुरू हो गया था। लगातार 11 दिन यानी 10 मई तक बारिश हुई। कभी वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर रहा तो कभी चक्रवात और टर्फ का। इसी वजह से मई के पहले सप्ताह में बारिश हुई। रतलाम सबसे गर्म रविवार को प्रदेश के कई शहरों में तेज गर्मी का दौर देखने को मिला। इनमें सबसे अधिक तापमान रतलाम में रिकॉर्ड हुआ। सीजन में पहली बार प्रदेश का अधिकतम तापमान 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। यहां लगातार दूसरे दिन प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज हुआ। इसके अलावा शाजापुर में 44 डिग्री, धार में 42.4 डिग्री, खंडवा में 42.1 डिग्री और नर्मदापुरम में 42 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। इसके अलावा, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर और गुना में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। प्रदेश के 5 बड़े शहरों का तापमान बड़े शहरों में सबसे अधिक तापमान उज्जैन में 42.4 डिग्री दर्ज हुआ। इसके बाद इंदौर में 41.9 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, जबलपुर में 38.9 डिग्री और ग्वालियर में 38.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कल से हीट वेव का अलर्ट मौसम विभाग ने 12 मई से प्रदेश में हीट वेव यानी लू चलने का अलर्ट जारी किया है। बताया जा रहा है कि, इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों में लू का अधिक असर देखने को मिल सकता है। खास बातें -दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव होने से सोमवार को एमपी के 8 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना है। -बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी बारिश हो सकती है। -30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है। -वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, राजगढ़, नीमच, मंदसौर, छतरपुर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और शाजापुर में तेज गर्मी पड़ेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में कर रहा नए आयाम स्थापित

वन्यजीव संरक्षण में नए आयाम स्थापित कर रहा है मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नेशनल पार्क में दो मादा चीतों को प्राकृतिक आवास में किया मुक्त प्रोजेक्ट चीता को प्रदेश में मिली नई रफ्तार-बोत्सवाना से लाए गए दोनों मादा चीते- अब स्थानीय परिवेश में घुल मिल कर रहने लगे हैं चीतें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेशवासियों को 'प्रोजेक्ट चीता' के रूप में बड़ी सौगात मिली है। मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। चीता पुनर्वास के लिए श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को दो मादा चीतों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। ये दोनों चीते बोत्सवाना से लाए गए हैं, इसके बाद इन्हें कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़े में रखा गया था। अब दोनों चीते उनके लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की इस पहल से प्रदेश में जारी प्रोजेक्ट चीता को विस्तार और नई रफ्तार मिली है, यह कदम वन्यजीवों के साथ हमारी सहअस्तित्व की भावना को प्रकट करता है। बोत्सवाना से चीतों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी तथा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का भी आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को कूनो नेशनल पार्क में चीतों को मुक्त करने के बाद मीडिया से चर्चा कर रहे थे। 57 हो गई है प्रदेश में चीतों की संख्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी मध्यप्रदेश में अब 5000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर चीते मुक्त विचरण करते हुए अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में राज्य में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हो चुकी है, चीते अब परिवार की तरह घुल-मिलकर रहने लगे हैं। प्रदेश के श्योपुर, कूनो, पालनपुर, राजगढ़ सहित मालवा और चंबल के क्षेत्र में चीते विचरण करते नजर आते हैं। कई बार तो ये मध्यप्रदेश से राजस्थान तक फर्राटा भरते हैं। उल्लेखनीय है कि इन चीतों के आगमन के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या, देश में जन्मे शावकों सहित, बढ़कर 57 हो गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के पुत्र- पुत्रवधू को दिया सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के पुत्र- पुत्रवधू को दिया सुखद दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के सुपुत्र केसरी नंदन और पुत्रवधू प्रेरणा के परिणय सूत्र में बंधने पर उन्हें हार्दिक बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य तथा सुख-शांति और समृद्धि से परिपूर्ण जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैवाहिक कार्यक्रम में सागर के निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर नव-दंपति को आर्शीवाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार और उनके परिजन से भेंट कर खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भी आत्मीय चर्चा की। इस अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, नवकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री राकेश शुक्ला, विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, विधायक शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं परिजन उपस्थित थे।  

गेहूं की उपज में एमपी का जलवा, हरियाणा और पंजाब से आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी में लाभान्वित होनेवाले किसानों की संख्या 10 लाख से पार हो गई है। इसी के साथ प्रदेश ने हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा दिया है। राज्य सरकार ने तमाम चुनौतियों के बीच शनिवार रात तक 10 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर 63 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा। मप्र ने इसी के साथ रेकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश में रोज औसतन 5 लाख मीट्रिक टन खरीदी हो रही है। गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख 23 मई तय की गई है। तब तक प्रदेशभर में 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी होगी। भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही प्रदेश के भोपाल, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर संभाग के जिलों में 9 अप्रेल से और बाकी संभाग में 15 मई से खरीदी चल रही है। गेहूं बेचने कुल 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। खरीदी कोटा पूरा होने पर भी सभी किसान गेहूं नहीं बेच पाए तो सरकार तारीख बढ़ा सकती है। मध्यप्रदेश में हो रहे सर्वाधिक किसान लाभान्वित, अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में अभी तक 9.10 लाख किसान, पंजाब में 7.5 लाख किसान, उत्तरप्रदेश में 2 लाख किसान और राजस्थान में 1.67 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। वहीं मध्यप्रदेश में अभी तक 10 लाख से अधिक किसान उपार्जन प्रक्रिया में लाभान्वित हो चुके हैं। स्वयं मैदान में उतरे मुख्यमंत्री, केंद्रों पर किसानों से संवाद किया, संगठनों के प्रमुखों से मिले गेहूं खरीदी के दौरान शुरू के दिनों में जब किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा तो सीएम डॉ. मोहन यादव स्वयं मैदान में उतरे। केंद्रों पर किसानों से संवाद किया। किसान संगठनों के प्रमुखों से मिले। संभागायुक्तों, कलेक्टरों के साथ वीसी में दो टूक कहा कि किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाए। किसान परेशान न हों, ऐसा माहौल बनाएं। पिछली कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को भी केंद्रों पर जाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद खरीदी में तेजी से सुधार आया। राज्य- किसानों ने गेहूं बेचा- खरीदी की अंतिम तारीख मध्यप्रदेश- 10 लाख- 23 मई हरियाणा -9.10 लाख- 15 मई पंजाब- 7.5 लाख- 10 मई उत्तरप्रदेश- 2 लाख- 15 जून राजस्थान- 1.67 लाख- 31 मई प्रमुख बिंदु एमपी में 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य अभी 63 लाख टन की हुई खरीदी किसानों के आंकड़ों में मध्यप्रदेश आगे हरियाणा और पंजाब को पछाड़ा एमपी में 10 लाख किसानों से गेहूं खरीदा

इंदौर में भयावह हादसा, 5 बसें जलकर खाक, 4 धमाकों से मचा हड़कंप, चश्मदीद बोले – गैस सिलेंडर फटा

इंदौर इंदौर के तीन इमली चौराहे पर सोमवार दोपहर को बड़ा हादसा हो गया। यहां खड़ी बसों में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते चार से पांच बसें उसकी चपेट में आ गईं। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी ऊंचाई तक उठी आग की लपटें प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग की लपटें काफी ऊंचाई तक उठती दिखाई दीं, जिससे आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया। शॉर्ट सर्किट की आशंका  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शॉर्ट सर्किट के चलते आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि आग लगने की असली वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। घटना में फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर मौजूद है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पार्किंग में 20 से ज्यादा बसें खड़ी थीं प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह एक बस में मरम्मत का काम किया जा रहा था। इसी दौरान वेल्डिंग के दौरान बस ने आग पकड़ ली। कुछ ही देर में लपटें एक के बाद एक पांच बसों तक पहुंच गई।स्थानीय नागरिकों ने बताया कि हादसे के वक्त मौके पर 20 से ज्यादा बसें खड़ी थीं। आनन-फानन में इन्हें यहां से हटाया गया। आसपास रिहायशी बस्ती होने की वजह से लोगों में घबराहट फैल गई। वे घरों से बाहर निकल आए। इंदौर के नवलखा की घटना  घटना इंदौर के नवलखा इलाके की बताई जा रही है. यहां पर बसों की पार्किंग होती है, साथ बसों की मरम्मत का काम भी किया जाता है. जानकारी के मुताबिक वेल्डिंग में एकदम से चिंगारी निकली थी, जिससे आग लग गई. आग एकदम से फैली और बसों को चपेट में लेना शुरू कर दिया. बताया जा रहा है कि गैस सिलेंडर फटने जैसी आवाजें भी आई हैं. जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. क्योंकि आसपास बड़ी बस्ती बनी हुई है. ऐसे में लोग घरों से बाहर निकल आए थे. क्योंकि धमाका तेज हुआ था. जबकि आग लगने की वजह से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।  इंदौर में लोगों ने जताया गुस्सा  बताया जा रहा है कि यह रिहायशी इलाका है. यहां बसों की पार्किंग और मरम्मत का पहले विरोध हो चुका है. कई बार चेतावनी भी दी गई है. लेकिन लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों पर रोक नहीं लगाई जा रही है. जिससे परेशानियां हो रही हैं. वहीं इस घटना ने एक बार फिर से चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. क्योंकि इस तरह की घटना से बड़ी जनहानि का डर बना रहता है. जबकि लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  फिलहाल बसों में लगी आग पर काबू पाया जा रहा है. क्योंकि एक बाद एक लाइन से खड़ी कई बसों में आग लगी है. जिसे लपटे फैल रही हैं. दमकल की गाड़ियां आग बुझाने की कोशिश में जुटी हैं।  पार्षद बोले- कई बार शिकायत की स्थानीय पार्षद मनीष शर्मा ने कहा- रिहायशी इलाके में निजी बसों की पार्किंग और मरम्मत को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है। सुनवाई नहीं होने से हमेशा बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। पार्षद शर्मा मौके पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा- जब तक बसें यहां से नहीं हटतीं और इसका समाधान नहीं निकलता, मैं धरने पर ही बैठा रहूंगा।

उद्योगों को बढ़ावा देने MPIDC की नई पहल, जमीन आवंटन में भारी छूट और ऑनलाइन सिस्टम लागू

 ग्वालियर प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआइडीसी) ने औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की प्रक्रिया को न केवल पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है, बल्कि इसे बिचौलिया मुक्त भी कर दिया है। अब ग्वालियर-चंबल अंचल सहित पूरे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन आवंटन के लिए किसी दलाल के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। एमपीआइडीसी ने अपनी आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है। पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन हुई जमीन बुकिंग विभाग के नए नियमों के मुताबिक, अब देश भर के उद्योगपति सीधे एमपीआइडीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उपलब्ध प्लाट देख सकते हैं। अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से प्लाट को ऑनलाइन ही बुक किया जा सकता है। बुकिंग के बाद उद्योगपतियों को सीधे कार्यालय से संपर्क करना होगा, जिससे भ्रष्टाचार और समय की बर्बादी की गुंजाइश खत्म हो गई है। विभाग के अफसरों का स्पष्ट कहना है कि अब किसी मिडिल मैन की जरूरत नहीं है, तकनीक ने उद्यमियों और सरकार के बीच की दूरी को खत्म कर दिया है। छोटे और बड़े उद्योगों के लिए बंपर रियायतें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार जमीन की कीमतों में भारी छूट भी दे रही है। यह छूट उद्योगों के आकार और जमीन के क्षेत्र के आधार पर तय की गई है। यदि कोई उद्यमी अपनी यूनिट लगाने के लिए एक हेक्टेयर तक की जमीन लेता है, तो उसे सरकारी दर पर 75 प्रतिशत की भारी छूट दी जाएगी। यह कदम छोटे स्टार्टअप और स्थानीय युवाओं को उद्योग से जोड़ने के लिए उठाया गया है। मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए भी राहत के द्वार खोले गए हैं। यदि कोई निवेशक 20 हेक्टेयर तक की जमीन लेता है तो उसे 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी। निवेश के लिए इसलिए चुनें ग्वालियर अंचल एमपीआइडीसी अंचल के औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे कि सीतापुर, मालनपुर, पिपरसेवा, जडेरुआ, बनमोर सहित नए विकसित किए जा रहे क्षेत्र मोहना, गुरावल, परीक्षा अहीर, चैनपुरा, पिपरौदा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। विभाग के मुताबिक, वैश्विक स्तर की सुविधाओं और जमीन की इन सस्ती दरों के कारण न केवल प्रदेश के, बल्कि देश भर के बड़े औद्योगिक घराने ग्वालियर की ओर रुख कर रहे हैं। अभी तक औद्योगिक क्षेत्रों में इंडस्ट्रीज के लिए जमीन लेने के लिए उद्योगपतियों को सीए सहित अन्य लोगों के माध्यम से आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब इस सिस्टम को बदला गया है। अब जिसे भी प्लाट लेना है तो वह सीधे एमपीआइडीसी के पोर्टल पर प्लाट, उसकी जगह देख सकता है और बुक करा सकता है। इसके बाद सीधे कार्यालय में संपर्क करता है तो उसे जमीन आवंटित हो जाएगी और उन्हें नियमानुसार छूट भी मिलेगी। अनीषा श्रीवास्तव, डायरेक्टर, एमपीआइडीसी  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: प्रदेश ने चीतों को परिवार का हिस्सा बनाया, कूनो में 2 मादा चीते विमुक्त

श्योपुर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर , उन्हें पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। आज देश में चीता पुनर्स्थापना का यह प्रोजेक्ट सफलता के साथ में आयामों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।  इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यह बात उन्होंने श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 2 मादा चीतों को खुले जंगल में विमुक्त करते हुए कही।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो नदी के किनारे स्थित चीता रिलीज साइट पर सीसीवी -2, सीसीवी -3 चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।  नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही हैं और आज प्रदेश ने देशभर में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में है। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती गुड्डी बाई आदिवासी,   श्री शशांक भूषण,  श्री राघवेन्द्र जाट,  श्री सुमित सिंघल, श्री शुभम मुदगल, श्री बाबू सिंह यादव, श्री कौशल गोयल आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  इसके साथ ही पीसीसीएफ श्रीमती समिता राजौरा , डीआईजी श्री संजय कुमार जैन,  कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर कुमार अग्रवाल, डीएफओ कुनो श्री आर थिरूकुराल, सामान्य श्री केएस रंधा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती सौम्या आनंद, एडीएम श्री रूपेश उपाध्याय, एडिशनल एसपी श्री प्रवीण भूरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  प्रदेश में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद  वहीं, गिद्ध संरक्षण में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक पहुंचा, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। कुनो नेशनल पार्क अब केवल चीता परियोजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गांधी सागर और नौरादेही को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ की योजना मंजूर  सरकार ने नए अभ्यारण्यों और संरक्षण क्षेत्रों पर भी फोकस बढ़ाया है। सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई, जबकि ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए अभ्यारण्य बनाए जा रहे हैं। ताप्ती क्षेत्र को प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है। इसके साथ ही घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए, हाथी और जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए भी विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना मंजूर की है। वहीं, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश अब संरक्षण, विकास और स्थानीय भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला देश का प्रमुख राज्य बनता जा रहा है।