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फर्जी इनकम टैक्स रिफंड मामले में बड़ा खुलासा, खंडवा के कारोबारी में मचा हड़कंप

खंडवा  फर्जी कंपनी बनाकर 263 करोड़ रुपये इनकम टैक्स रिफंड के फर्जीवाड़े में खंडवा के सराफा कारोबारी के नाम सीबीआई ने नोटिस जारी किया है। गुरुवार को सीबीआई का कांस्टेबल दिल्ली से नोटिस तामील करवाने आया। इससे हड़कंप मच गया। सराफा कारोबारी अंकित जैन को इससे पहले वाट्सएप और डाक से सीबीआई से नोटिस जारी हो चुके हैं। यह सिलसिला वर्ष 2022 से चल रहा है। गुरुवार सुबह करीब सात बजे नोटिस तामील कराने आए व्यक्ति को फर्जी समझकर वहां भीड़ जमा हो गई। भाजपा नेता सुधांशु जैन सहित स्वजन वास्तविकता जानने के लिए उसे कोतवाली थाने लेकर पहुंचे। यहां काफी देर तक नोटिस और तामील करवाने वाले की वैधता को लेकर बहस चली। इनकम टैक्स फर्जीवाड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सराफा कारोबारी जैन को पूछताछ के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत नोटिस जारी कर 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। बिलासपुर में घर में खड़ी कार पर लगा दिया टोल Tax…FASTag से रुपए कटने का मैसेज देखकर मालिक हैरान दिल्ली से आए सीबीआई कांस्टेबल रिझपाल सिंह ने बताया कि सीबीआई के दिल्ली कार्यालय से उसे नोटिस तामील करवाने के लिए भेजा गया है। इससे पूर्व डाक और वाट्सएप से भी नोटिस भेजे गए थे लेकिन इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया गया। नोटिस फर्जी होने जैसी कोई बात नहीं है। सीबीआई के नोटिस के संबंध में आरोपित अंकित जैन ने बताया कि पूर्व में वाट्सएप और टेलीफोन पर लगातार नोटिस व सूचना मिलने पर खंडवा पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर अवगत करवा चुके हैं। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। मेरे पैनकार्ड का फर्जी तौर पर प्रयोग हुआ है। बताया जाता है कि तानाजी मंडल के मुंबई में बैंक खाते में करीब 263 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स रिफंड जमा हुआ था। यह राशि खाते से निकलने पर बैंक द्वारा इसका सोर्स पूछा गया था। इस पर उन्होंने खंडवा के अंकित जैन की फर्म से यह राशि एमओयू के तहत मिलने का पत्र दिया था। एमओयू में अंकित जैन का पैन कार्ड नंबर, हस्ताक्षर तथा मोबाइल नंबर का उल्लेख था। इस आधार पर सीबीआई द्वारा उन्हें इस मामले में पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है।  

सफर होगा और आरामदायक, भोपाल एक्सप्रेस में जुड़ेगा अतिरिक्त एसी कोच

 भोपाल भोपाल से दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ी राहत देने वाला फैसला लिया है। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या और ट्रेनों में लंबी वेटिंग को देखते हुए रेलवे ने भोपाल एक्सप्रेस में स्थायी रूप से एक अतिरिक्त थर्ड एसी कोच जोड़ने का निर्णय लिया है। इस एक कोच के जुड़ने से ट्रेन में करीब 72 अतिरिक्त यात्री सफर कर सकेंगे। इससे रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। थर्ड एसी कोच जोड़ा जाएगा रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 12155 रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन भोपाल एक्सप्रेस में यह अतिरिक्त थर्ड एसी कोच 24 जून 2026 से जोड़ा जाएगा। वहीं वापसी दिशा में गाड़ी संख्या 12156 हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति भोपाल एक्सप्रेस में यह सुविधा 27 जून से लागू होगी। रेल अधिकारियों का क्या कहना रेलवे अधिकारियों का कहना है कि भोपाल एक्सप्रेस में लंबे समय से यात्रियों का दबाव बढ़ रहा था। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और सप्ताहांत में ट्रेन में सीट मिलना मुश्किल हो जाता था। कई यात्रियों को लंबी वेटिंग के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब अतिरिक्त थर्ड एसी कोच लगने से यात्रियों को अधिक आरक्षित सीटें मिलेंगी और वेटिंग लिस्ट कम करने में मदद मिलेगी। कंफर्म सीट मिलने में हो रही थी परेशानी भोपाल एक्सप्रेस राजधानी दिल्ली और भोपाल के बीच चलने वाली प्रमुख ट्रेनों में से एक है। इस ट्रेन से रोजाना बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी, पर्यटक और इलाज के लिए जाने वाले यात्री सफर करते हैं। ऐसे में एक अतिरिक्त कोच जुड़ने से यात्रियों को न केवल सीट मिलने में आसानी होगी, बल्कि यात्रा पहले की तुलना में ज्यादा आरामदायक और व्यवस्थित भी हो सकेगी।  

CM मोहन यादव ने भोपाल से रवाना की ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’

भोपाल  धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक स्मृति, इन तीनों के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' ने भोपाल से अपनी पहली यात्रा शुरू की. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से रवाना हुई यह विशेष तीर्थ यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि हजार वर्षों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक चेतना की यात्रा के रूप में देखी जा रही है. मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए श्रद्धालु शामिल हैं. सोमनाथ मंदिर, जो भारतीय इतिहास और सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक माना जाता है, इस यात्रा का केंद्र बिंदु है।  रानी कमलापति स्टेशन से दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है. हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से इस तरह की विशेष तीर्थ यात्रा श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को और आसान बनाएगी. मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बताते हुए इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताया।  गंगोत्री से गंगा सागर तक बिखर रहा आनंद : CM मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधु जिनके चरण पखारता है, मस्तक पर जिनके चंद्र देव बिराजे हैं, अक्षय स्वाभिमान के ज्योतिर्लिंग, भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन. सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान के साथ है. द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण ने जब अधर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी, तब पूरा समय चक्र ही बदल गया. हम सभी जानते हैं कि एक हजार साल पहले भारत को काली छाया का ग्रहण लग गया था. उस समय बाबा सोमनाथ ने इस ग्रहण को नष्ट किया था. सोमनाथ हमारे विकास का पर्याय भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा प्रारंभ हुई.  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, पुल, पुलिया, सड़क, नगर, कारखाने के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी लेकर चल रही है. इस सनातन संस्कृति पर हमें गर्व है. प्रधानमंत्री मोदी के मन में भी सनातन धर्म के साथ सबको लेकर चलने की भावना है. यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. हमें अयोध्या और मथुरा में जो आनंद आता है, वही आनंद पश्चिम बंगाल के काली घाट पर आता है. आज भगवान की दया से गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है. लोकतंत्र की नई बयार पूरे देश को उत्साह-उमंग से भर रही है।  हमले के बाद भी लहराती रही सनातन संस्कृति की ध्वजा : मोहन यादव सीएम डॉ. यादव ने लोगों से कहा कि इस यात्रा के जरिये आपको बाबा सोमनाथ के दर्शन का लाभ मिलेगा. मेरी ओर से सभी यात्रियों को बधाई. वहीं, पास में चार पीठों में से एक द्वारका पीठ भी है. यहां भगवान कृष्ण ने लीलाएं कर हमारे हृदय में छवि बनाई. सोमनाथ मंदिर पर दुश्मनों ने 17 बार आक्रमण किए थे. लेकिन, हमारी सनातन संस्कृति की ध्वजा लहराती रही. एक हजार साल बाद सोमनाथ का शिखर आसमान से बात कर रहा है. दुश्मन लाख चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो बाबा सोमनाथ चाहें. उन्होंने तीर्थयात्रियों से कहा कि आप बाबा सोमनाथ से आशीर्वाद लेना कि दुनिया में चारों ओर खुशहाली हो. यह सांस्कृतिक जानगरण राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करे. उन्होंने कहा कि जीवन भी एक यात्रा है. जीवन की इस यात्रा में हम आते हैं और शरीर छोड़ते हैं. लेकिन, इस बीच परमात्मा ने हमें जो मौका दिया है, इस मौके का उपयोग हम परोपकार में करें।  देवलोक बनने से बदल जाती है अर्थव्यवस्था : मुख्यमंत्री सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थानों पर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है. हमारी सरकार कई देवलोक बनवा रही है. महाकाल लोक बनने के बाद आर्थिक रूप से पूरा इको-सिस्टम बदल गया. साल 2022 से पहले उज्जैन में एक वर्ष में 25-30 हजार लोग आते थे, आज रोज डेढ़ लाख लोग दर्शन करने उज्जैन आ रहे हैं. इस तरह पूरा माहौल बदल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह के देवलोक बनने के बाद होटल वालों, ठेले वालों, ऑटो वालों, दुकान वालों के जीवन में बदलाव आता है. भारतवासी जब एक-दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, तो एक-दूसरे को अपनी-अपनी संस्कृति से परिचित कराते हैं. इससे आंतरिक एकता का निर्माण होता है. यही एकता एकात्मवाद में परिवर्तित होती है।  मेरी अपनी ओर से सभी तीर्थयात्रियों को बधाई श्रद्धालुओं का बड़ा कारवां मध्यप्रदेश से पहली बार निकल रही इस यात्रा में 1,100 श्रद्धालुओं का दल शामिल है. यह विशेष रेलगाड़ी भोपाल के साथ-साथ उज्जैन रेलवे स्टेशन से भी यात्रियों को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई. यात्रा के दौरान श्रद्धालु सोमनाथ पहुंचेकर दर्शन, पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सोमनाथ से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक कथाओं को साझा किया जाएग।  धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव सरकार और संस्कृति विभाग के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है. यह पहल धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करने का प्रयास है. रेलवे के माध्यम से सामूहिक तीर्थ यात्रा ने बुजुर्गों, परिवारों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाया है. यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं, आवास और कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है।  ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की पृष्ठभूमि संस्कृति संचालनालय के निदेशक एन.पी. नामदेव के अनुसार, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का मूल उद्देश्य देशभर में भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, आस्था और ऐतिहासिक संघर्षों की स्मृति को जीवंत करना है. यह पर्व राष्ट्र की गौरवमयी विरासत के उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीकात्मक महाकुंभ है, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।  इतिहास से भविष्य तक की यात्रा सोमनाथ मंदिर को भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता और अटूट श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. हजार वर्षों के उतार-चढ़ाव के बावजूद इस मंदिर का पुनर्निर्माण और उसकी निरंतर परंपरा भारतीय सांस्कृतिक जीवटता को दर्शाती है. ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा' … Read more

मध्यप्रदेश का बड़ा लक्ष्य: टेक्सटाइल सेक्टर से 2030 तक 5 अरब डॉलर का निर्यात

मध्यप्रदेश टेक्सटाइल सेक्टर में बड़ा लक्ष्य, 2030 तक 5 अरब डॉलर निर्यात का टारगेट उद्योग, कौशल और ग्लोबल बाजार को जोड़कर बनाया रोडमैप भोपाल  मध्यप्रदेश ने टेक्सटाइल सेक्टर में वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करते हुए इसके लिए एक स्पष्ट और समग्र कार्ययोजना तैयार की है। इसी उद्देश्य से राज्य निर्यात कार्य योजना के अंतर्गत वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र पर राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक एमपीआईडीसी, भोपाल में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने की। बैठक में उद्योग जगत के प्रतिनिधि निर्यात संवर्धन परिषदों, वित्तीय संस्थानों, एमएसएमई इकाइयों और पारंपरिक वस्त्र समूहों के प्रतिनिधियों ने राज्य की निर्यात क्षमता को सशक्त बनाने के लिए सुझाव दिए। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में मध्यप्रदेश की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये रणनीति बनाना था। 11 जिलों पर फोकस, उत्पादन से निर्यात तक पूरी रणनीति राज्य में टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 11 जिलों को चिन्हित किया गया है। इनमें सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर, खरगोन, उज्जैन और भोपाल को चैंपियन जिले तथा जबलपुर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर को आकांक्षी जिले के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन जिलों में उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित करने की रणनीति बनाई गई। पीएम मित्र पार्क से निवेश और रोजगार को बल धार के पीएम मित्र पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल सेक्टर को नई गति मिल रही है। यहां 38 कंपनियों द्वारा 21,500 करोड़ रूपए के निवेश की प्रतिबद्धता सामने आई है, जिससे लगभग 55 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। यह विकास राज्य को टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। कौशल विकास और नए निर्यातकों पर विशेष जोर बैठक में यह तय किया गया कि राज्य में एक लाख से अधिक युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए समर्थ 2.0, निफ्ट भोपाल के विस्तार और चैंपियन जिलों में नए प्रशिक्षण संस्थानों का उपयोग किया जाएगा। राज्य से एक हजार नए निर्यातकों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला स्तरीय निर्यात समितियों, एक्ज़िम बैंक, ईसीजीसी और अन्य संस्थाओं के सहयोग से छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जाएगा। लॉजिस्टिक्स और अधोसंरचना होगी मजबूत निर्यात को आसान और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पीथमपुर में नया इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किया जा रहा है और मण्डीदीप में मौजूदा सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही पीएम मित्र पार्क से इंदौर तक कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा रहा है। राज्य में कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जहां परीक्षण, डिजाइन और मूल्य संवर्धन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे एमएसएमई इकाइयों को गुणवत्ता सुधार में सहायता मिलेगी। नई तकनीक और डिज़ाइन से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए टेक्सटाइल इकाइयों में ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल गुणवत्ता प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। डिज़ाइन क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए निफ्ट भोपाल में तकनीकी वस्त्र, टिकाऊ फैशन और ब्रांडिंग आधारित नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो सके। ग्लोबल बाजार और एफटीए का लाभ उठाने की रणनीति राज्य ने अमेरिका, यूरोप, यूनाइटेड किंगडम, यूएई और जापान जैसे प्रमुख बाजारों को ध्यान में रखते हुए निर्यात रणनीति तैयार की है। यूके, यूएई, ईएफटीए और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए जिला स्तर पर उत्पाद मैपिंग और उद्योग समन्वय किया जाएगा। पारंपरिक वस्त्रों को मिलेगा वैश्विक मंच “टेक्सटाइल्स ऑफ एमपी” अभियान में चंदेरी, माहेश्वरी, बाग प्रिंट और बाटिक प्रिंट जैसे पारंपरिक उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाएगी। इससे कारीगरों को नए बाजार मिलेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। उद्योग की भागीदारी से तैयार हो रहा मजबूत तंत्र बैठक में प्रमुख टेक्सटाइल कंपनियों, निर्यात परिषदों और उद्योग संगठनों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए व्यावहारिक सुझाव दिए। इससे राज्य में उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है, जो निर्यात वृद्धि के लिए आवश्यक है। प्राप्त सुझावों को राज्य निर्यात कार्य योजना में शामिल करते हुए इसे निर्धारित समय सीमा में केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की रणनीति को आगे बढ़ाते हुए टेक्सटाइल सेक्टर में राज्य को अग्रणी बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।  

मप्र मौसम अपडेट: ग्वालियर और 11 जिलों में बारिश का अलर्ट, कुछ शहरों में तापमान रहेगा अधिक

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। एक तरफ ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, वहीं दूसरी तरफ भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तेज गर्मी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विभाग ने गुरुवार को 11 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से मौसम लगातार बदल रहा है। कई जिलों में बादल, आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला बना हुआ है। गुरुवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज जिलों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।  इधर दूसरी तरफ प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम का दूसरा रुख भी देखने को मिल रहा है, जहां गर्मी धीरे-धीरे अपना असर दिखा रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर समेत करीब 40 से ज्यादा जिलों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और कई जगह पारा 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। खासकर निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, रतलाम, नीमच और मंदसौर जैसे जिलों में गर्म हवा और तेज धूप लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4 दिन तक ऐसा ही मिला-जुला मौसम बना रहेगा, यानी कहीं बारिश तो कहीं लू जैसे हालात। वहीं 9 और 10 मई को प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी तेज रहने का अनुमान है, जबकि 10 मई के बाद एक नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिसका असर कुछ दिन बाद देखने को मिलेगा। पिछले कुछ दिनों के हालात देखें तो मध्य प्रदेश में लगातार छठे-सातवें दिन भी मौसम बदला हुआ रहा है और कई जिलों में आंधी-बारिश ने गर्मी से थोड़ी राहत दी है। धार, बालाघाट, पीथमपुर और मुलताई जैसे इलाकों में तेज हवाओं और बारिश के कारण सड़कें भीग गईं और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश के बीचोंबीच एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है, जबकि दूसरा सिस्टम ऊपरी हिस्से में बना हुआ है और पूर्वी मध्य प्रदेश से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इसी वजह से मौसम में यह अस्थिरता बनी हुई है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में मई के महीने में अक्सर गर्मी और बारिश दोनों का ट्रेंड देखा जाता है, जहां कभी तापमान 46 से 48 डिग्री तक पहुंच जाता है तो कभी अचानक बौछारें राहत दे देती हैं। इस बार भी वही पैटर्न देखने को मिल रहा है और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि आने वाले दिन मौसम तेजी से बदल सकता है। अगले चार दिन मौसम रहेगा अस्थिर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले चार दिन तक प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। अगले दो दिन कुछ हिस्सों में आंधी और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन 9 और 10 मई से गर्मी का असर ज्यादा बढ़ेगा। इसके बाद 10 मई से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिसका असर अगले दो दिनों में देखने को मिल सकता है। लगातार सातवें दिन बदला मौसम प्रदेश में बुधवार को लगातार सातवें दिन भी कहीं आंधी तो कहीं बारिश का दौर बना रहा। धार समेत कई जिलों में मौसम बदला हुआ नजर आया। मई की शुरुआत में लगातार बारिश होने से फिलहाल भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री से नीचे बना हुआ है। प्रदेश में क्यों बदल रहा मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश के मध्य हिस्से और ऊपरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इसके साथ ही पूर्वी हिस्से से एक ट्रफ लाइन गुजर रही है। इन तीनों सिस्टमों के संयुक्त असर से प्रदेश में आंधी, बादल और बारिश की स्थिति बनी हुई है।  थल-पुथल वाला मौसम रहेगा मौसम विभाग की माने तो अगले 4 दिन तक प्रदेश में उथल-पुथल वाला मौसम रहेगा। अगले 2 दिन तक कुछ जिलों में बारिश और आंधी चलने के आसार है। वहीं, 9 और 10 मई को पूरे प्रदेश में गर्मी पड़ेगी। 10 मई से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। जिसका असर अगले 2 दिन बाद देखने को मिल सकता है। छह दिन से बारिश का दौर प्रदेश में बुधवार को लगातार सातवें दिन भी आंधी-बारिश का दौर बना रहा। धार समेत कई जिलों में असर देखने को मिला। यानी, इस बार मई के शुरुआत छह दिन तक बारिश हुई है। मौसम में बदलाव होने से गर्मी का असर कम हुआ है। प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री से नीचे चल रहा है। 10 मई से नया सिस्टम मौसम विभाग की माने तो अभी कुछ दिन तक प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर बना रहेगा। वर्तमान में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) प्रदेश के बीचोंबीच में एक्टिव है तो दूसरा ऊपरी हिस्से में है। एक ट्रफ भी पूर्वी हिस्से से गुजर रही है। इस वजह से मौसम बदला हुआ है।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की गहन समीक्षा की शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर निर्माण करते हुए शीघ्र भर्ती प्रक्रिया के लिए विज्ञापन करें जारी नियत समय पर हो प्रवेश, परीक्षा और परिणाम भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने  मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों के साथ, विश्‍वविद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति सहित विविध विषयों की विस्तृत समीक्षा की। मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, शासन के नियमों के अनुरूप रोस्टर निर्माण करते हुए भर्ती प्रक्रिया के लिए शीघ्र विज्ञापन जारी करें। मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक, अकादमिक एवं प्रशासनिक सुधार की दृष्टि से, रिक्त पदों की पूर्ति करना हमारी प्राथमिकता है। मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय शैक्षणिक कैलेंडर का दृढ़ता के साथ शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें, इसके लिए पिछले सत्र के परीक्षा परिणाम समयपूर्वक घोषित किए जाएं जिससे अगले सत्र में नियत समय पर प्रवेश, परीक्षा एवं परिणाम सुनिश्चित हो सकें। मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र हितों की रक्षा, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया है कि सभी विश्वविद्यालय अपने छात्रावासों को विद्यार्थियों की आवश्यकता अनुरूप बेहतर बनाएं और छात्रों को सुलभ रूप से गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हो। मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों के छात्रावासों के निरीक्षण के लिए एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए, यह कमेटी छात्रावासों में विद्यार्थियों को दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता का निरीक्षण करेगी। मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा डिजिटल मूल्यांकन को लेकर हो रहे क्रियान्वयन की गति को बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावी रूप से बनाए रखना हमारा ध्येय है और पारदर्शितापूर्ण परीक्षा पद्धति के लिए डिजिटल मूल्यांकन की महती आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय डिजिटल मूल्यांकन की पद्धति को लागू करने के लिए प्रयास करें। मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने शैक्षणिक अमले के कार्यों के मूल्‍यांकन के लिए भी आंतरिक पद्धति विकसित करे जिससे शैक्षणिक एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो सके। मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को अन्‍य भारतीय भाषाओं को क्रेडिट से जोड़कर पढ़ाने की कार्ययोजना को भी शीघ्र लागू करने के प्रयास करने के निर्देश दिए। उल्‍लेखनीय है कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल को तमिल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर को कन्नड़, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर को मराठी एवं तेलगू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को तेलगू एवं पंजाबी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा को सिंधी और गुजराती, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को मलयालम,सिंधी और असमिया, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को गुजराती, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिन्दवाड़ा को तमिल और मराठी, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को बांग्ला, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन को गुजराती, महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय चित्रकूट को उड़िया और महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय उज्जैन को उड़िया भाषा सिखाने के लिए भाषा का आवंटन किया गया है। ये विश्वविद्यालय, उक्त आवंटित भाषा सिखाने के लिए क्रियान्वयन कर रहे हैं। मंत्री परमार ने सभी विश्वविद्यालयों को समर्थ पोर्टल पर क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाएं और स्वयं पोर्टल पर हर विद्यार्थी को कम से एक कोर्स में पंजीयन कराएं। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने सभी विश्वविद्यालयों को सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर अपनी ग्रेडिंग सुधारने के लिए भी निर्देशित किया। राजन ने सभी विश्वविद्यालयों को कर्मचारी कल्याण से जुड़े विविध विषयों को शीघ्र निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबित पेंशन प्रकरण एवं अनुकम्पा नियुक्ति प्रकरणों का शीघ्र निदान करें। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा अनिल पाठक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

CM ने 8-मंजिला भोपाल निगम भवन का उद्घाटन किया, जनता सेवाओं और सोलर प्लांट का होगा लाभ

भोपाल  तुलसी नगर (सेकंड स्टॉप) पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय तैयार है। यह अटल भवन के नाम से जाना जाएगा। यह 43 करोड़ से बना है। यहां एक ही छत के नीचे पूरी नगर सरकार होगी। अब तक नागरिकों को अलग-अलग कामों के लिए शहर के कई हिस्सों में जाना पड़ता था।यह प्रदेश की पहली नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जो जियोथर्मल तकनीक से लैस है। पार्किंग पर लगे सोलर पैनलों से 300 किलोवाट बिजली बनेगी। नवनिर्मित मुख्यालय का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। इसके लोकार्पण के साथ नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। एक जगह पर आ जाएंगे सभी विभाग बिल्डिंग की शुरुआत के बाद निगम के सभी विभाग एक ही बिल्डिंग में आ जाएंगे। हालांकि, दो महीने पहले से ही कई ऑफिस शिफ्ट किए जा चुके हैं। अब सेंट्रल वर्कशॉप, हाउसिंग फॉर ऑल, सिविल, जनसंपर्क, विद्युत, बीसीएलएल, जल कार्य, सीवेज, स्वच्छ भारत मिशन, जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, झील प्रकोष्ठ, एनयूएलएम, राजस्व, गोवर्धन परियोजना, अतिक्रमण, बिल्डिंग परमिशन शाखाएं एक ही जगह पर लगेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एंटर होते ही जनसुविधा केंद्र स्थापित किया गया है। जहां एक ही स्थान पर सभी विभागों से संबंधित जानकारी आवेदक को मिलेगी। बिल्डिंग परमिशन समेत कई जनसुविधा भी यहां मिलेंगी। अभी कई जगह पर संचालित ऑफिस अभी भोपाल के कई स्थानों पर निगम के ऑफिस में शाखाएं संचालित की जा रही हैं। आईएसबीटी और माता मंदिर में महापौर, अध्यक्ष और कमिश्नर के कक्ष के साथ कई शाखाएं हैं। शाहपुरा में बिल्डिंग परमिशन शाखा है, जबकि फतेहगढ़ में स्वास्थ्य शाखा लग रही है। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर बनाई गई है बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर नगर निगम का नया मुख्यालय भवन बना है। बिल्डिंग के ठीक सामने परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि, इसकी दिशा उत्तर-दक्षिणी होने की वजह से बिजली उत्पादन में असर पड़ सकता है। एक बिल्डिंग, 3 कमिश्नर बिल्डिंग की पूरी डिजाइन निगम के तत्कालीन कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी ने बनवाई थी। उनकी मौजूदगी में बिल्डिंग का आधे से ज्यादा काम हुआ, जबकि बाकी काम हरेंद्र नारायण के समय हुआ। अब संस्कृति जैन के समय बिल्डिंग शुरू की जा रही है। किस फ्लोर पर क्या?     ग्राउंड फ्लोरः जनसंपर्क, टैक्स काउंटर, विवाह पंजीकरण और बच्चों के लिए विशेष गेम जोन।     पहली से चौथी मंजिलः महापौर, एमआईसी सदस्य, भवन अनुज्ञा, जलकार्य, सीवेज और राजस्व विभाग।     पांचवीं से सातवीं मंजिलः योजना प्रकोष्ठ, आईटी, स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य और उद्यान विभाग।     आठवीं मंजिलः कमिश्नर स्टाफ और स्मार्ट सिटी का मुख्य कार्यालय 10 जगहों पर बिखरे दफ्तर अब एक छत के नीचे अब तक नगर निगम के कार्यालय माता मंदिर, पीएचई दफ्तर, आइएसबीटी, स्मार्ट सिटी कार्यालय, न्यू मार्केट, श्यामला हिल्स, शाहपुरा और फतेहगढ़ सहित शहर के 10 अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से निगम के अधिकांश विभाग एक ही परिसर में कार्य करेंगे, जिससे आम नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मुख्यालय भवन के भू-तल पर विवाह पंजीयन, भवन अनुज्ञा, स्मार्ट सिटी और कर संबंधी काउंटर बनाए गए हैं। पहली मंजिल पर महापौर, निगम परिषद अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और परिषद कार्यालय के साथ कॉन्फ्रेंस हॉल रहेगा। नगर निगम आयुक्त का कार्यालय भवन की आठवीं मंजिल पर बनाया गया है। बड़े नेताओं की मौजूदगी में होगा लोकार्पण लोकार्पण कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री Kailash Vijayvargiya, मंत्री Vishvas Sarang, प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, राज्यमंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा और महापौर मालती राय सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। नीमच के सोलर प्लांट का भी शुभारंभ नगर निगम ने नीमच जिले की धमपुरा तहसील में 10.5 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया है। करीब 45 करोड़ रुपये की इस परियोजना में निगम ने 14 करोड़ रुपये निवेश किए हैं, जबकि शेष राशि निजी कंपनी द्वारा लगाई गई है। गाजियाबाद की टेक्नोसिस कंपनी के साथ 25 वर्षों का अनुबंध किया गया है। इस परियोजना से ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

डीजीपी मकवाणा: रेलवे, पुलिस और प्रशासन के समन्वय से सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन

रेलवे–पुलिस–प्रशासन के समन्वय से सुनियोजित भीड़ प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के साथ होगा सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन – डीजीपी मकवाणा सिंहस्थ 2028 की तैयारियों हेतु रेलवे अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समन्वय बैठक कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर आधुनिक तकनीक और ICCC व्यवस्था लागू करने की तैयारी भोपाल सिंहस्थ 2028 के सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित आयोजन के दृष्टिगत आज कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार, भोपाल में पुलिस, रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी सिंहस्थ के दौरान संभावित अत्यधिक भीड़, यातायात प्रबंधन, रेल संचालन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आधारभूत संरचना के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना पर चर्चा की गई। विशेष रूप से पूर्व में आयोजित महाकुंभ-2025, प्रयागराज के अनुभवों से सीख लेते हुए आधुनिक तकनीकों, बेहतर समन्वय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक रहने की संभावना है, जिसके लिए पूर्व से ही व्यवस्थित एवं चरणबद्ध योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भीड़ प्रबंधन के लिए संयुक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा शाही स्नान एवं अन्य प्रमुख अवसरों पर विशेष ट्रैफिक एवं भीड़ नियंत्रण योजना तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्राउड मैनेजमेंट के तहत एंट्री एवं एग्जिट मार्ग पृथक-पृथक रखे जाएं तथा अंतिम समय में प्लेटफॉर्म परिवर्तन से बचा जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो। पुलिस महानिदेशक ने उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल के साथ-साथ ओंकारेश्वर रोड एवं सीहोर क्षेत्र के स्टेशनों को भी ध्‍यान में रखते हुए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर बल दिया। उन्होंने फुटओवर ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने, पर्याप्त संकेतक, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम एवं अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डीजीपी ने अपराध नियंत्रण के संबंध में जीआरपी एवं आरपीएफ को विशेष सतर्कता बरतने, इंटेलिजेंस तंत्र को मजबूत करने तथा सभी स्टेशनों, होल्डिंग एरिया एवं पार्किंग स्थलों पर सीसीटीवी कवरेज एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए संयुक्त टीमें सदैव तैयार रहें, जिससे किसी भी स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उत्तरप्रदेश डीजी (रेल) प्रकाश डी. ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव साझा करते हुए बताया कि बड़े आयोजनों में भीड़ का सटीक आकलन (क्राउड असेसमेंट) अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने 2013 की घटना सहित पूर्व घटनाओं से सीख लेते हुए मल्टी-लेवल क्राउड मैनेजमेंट, प्लेटफॉर्म सुरक्षा, पृथक एंट्री-एग्जिट, कलर कोडिंग, साइनएज, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं होल्डिंग एरिया आधारित भीड़ नियंत्रण व्यवस्था को अत्यंत प्रभावी बताया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), रियल-टाइम मॉनिटरिंग, व्हाट्सएप/डिजिटल समन्वय एवं स्पेशल ट्रेनों के प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि रेलवे नेटवर्क में किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पड़ता है, इसलिए भीड़ को विभिन्न स्तरों पर फिल्टर एवं नियंत्रित करना आवश्यक है। डीजी आरपीएफ सुसोनाली मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ जैसे आयोजन में विभिन्न रेलवे जोनों—विशेष रूप से वेस्टर्न, वेस्ट सेंट्रल एवं सेंट्रल रेलवे के मध्य सुदृढ़ समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि रेलवे द्वारा प्रतिदिन लाखों यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाता है तथा किसी एक स्थान की घटना का व्यापक प्रभाव पूरे नेटवर्क पर पड़ता है। उन्होंने अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन, रेलवे बोर्ड स्तर पर सतत मॉनिटरिंग, संयुक्त प्रशिक्षण, एनडीआरएफ के साथ समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र एवं इंटेलिजेंस सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। साथ ही बड़े आयोजनों में आंतरिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। रतलाम मंडल रेल प्रबंधक अश्‍विनी कुमार ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के लिए रेलवे द्वारा संभावित भीड़, यात्री आवागमन के समय एवं विभिन्न मार्गों के विश्लेषण के आधार पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरकनेक्टिविटी एवं संचालन में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं तथा प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय एवं फीडबैक आधारित सुधार किए जा रहे हैं। उज्जैन में प्रस्तावित व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए पुलिस अधीक्षक उज्जैन प्रदीप शर्मा ने बताया कि सिंहस्थ-2028 का आयोजन 09 अप्रैल से 08 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। शाही स्नान के अवसरों पर एक ही दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला विकसित किया जा रहा है तथा घाटों का विस्तार लगभग 37 किलोमीटर तक किया जा रहा है। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार एक किलोमीटर घाट पर निर्धारित समय में हजारों श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता विकसित कर बड़े स्तर पर भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर इंदौर-देवास मार्ग से सर्वाधिक आवागमन तथा रेलवे के माध्यम से 2 से 2.5 करोड़ यात्रियों के आगमन की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें नए फुट ओवर ब्रिज, सैटेलाइट स्टेशन विकास, त्रिस्तरीय पार्किंग, होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, साइडिंग लाइन, जल आपूर्ति व्यवस्था एवं ऑप्टिकल फाइबर आधारित संचार तंत्र का निर्माण शामिल है। ट्रेन संचालन के लिए विशेष रणनीति के तहत 2016 की तुलना में तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही पेंडुलम मूवमेंट आधारित शॉर्ट-डिस्टेंस मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल-हेडेड ट्रेन संचालन, दिशा-आधारित प्लेटफॉर्म निर्धारण एवं लंबी दूरी की ट्रेनों का पूर्व नियोजित डायवर्जन सुनिश्चित किया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी एवं एआई आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम, बैकअप पावर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, साइबर सुरक्षा, वेंडर मैनेजमेंट एवं एक्सेस कंट्रोल को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही RPF-GRP के संयुक्त प्रशिक्षण, मेडिकल टीमों की उपलब्धता एवं त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में सभी अधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि पूर्व अनुभवों, तकनीक के प्रभावी उपयोग, सुदृढ़ समन्वय एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से सिंहस्थ 2028 का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न … Read more

सीनियर IAS अधिकारियों का पुनर्वितरण, ACS होम ने संभाला सामान्य प्रशासन विभाग, अतिरिक्त जिम्मेदारी जनसंपर्क

भोपाल   मध्य प्रदेश में एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। कुछ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई है।  ACS संजय कुमार शुक्ल अपर मुख्य सचिव गृह , ACS शिवशेखर शुक्ला अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन और अरविंद दुबे संचालक जनसंपर्क (अतिरिक्त प्रभार)होंगे। इस बाबत आदेश भी जारी  हो गए हैं। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले और नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। नए आदेश के तहत दो वरिष्ठ अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, वहीं एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी  संजय कुमार शुक्ल को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसके साथ ही शुक्ल को विमानन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। वहीं दूसरी ओर  1994 बैच के ही वरिष्ठ अधिकारी शिवशेखर शुक्ल को अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा उन्हें संस्कृति विभाग एवं आयुक्त-सह-संचालक, स्वराज संस्थान का प्रभार दिया गया है।

उपज का सही मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का संदेश – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कृषक कल्याण वर्ष-2026 उपज का एक-एक दाना कीमती, भुगतान में देरी बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री की किसान हितैषी नीति से चौरई के 64 किसानों को मिलेंगे लगभग एक करोड़ रुपये सभी मंडियों में समय-सीमा में हो भुगतान, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और मंडी बोर्ड की सक्रियता का परिणाम है कि कृषि उपज मंडी समिति चौरई की अपील पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा 64 कृषकों को उनके द्वारा विक्रय की गई उपज की राशि 96 लाख 51 हजार 500 रुपये के भुगतान करने के आदेश प्रसारित हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसान के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि उपज मंडी समिति चौरई में पंजीकृत अनुज्ञप्तिधारी फर्म ज्ञाताट्रेडर्स, चौरई के द्वारा कृषकों से खरीदी गई अधिसूचित कृषि उपज का भुगतान नहीं करने पर मंडी समिति ने त्वरित कार्रवाई की। न्यायालय तहसीलदार, चौरई द्वारा फर्म से वसूली के लिए आर.आर.सी. जारी कर 96,51,500 रुपये (छियानबे लाख इक्यावन हजार पांच सौ रुपये) की वसूली की गई और राशि मंडी समिति के खाते में जमा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सिविल कोर्ट/जिला कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने पर मंडी समिति की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर में अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दायर की गई। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 30 अप्रैल 2026 को किसान हित में निर्णय पारित कर भुगतान की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "उपज का एक-एक दाना कीमती है। मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर भुगतान हमारी प्राथमिकता है।" उन्होंने मंडी बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सभी मंडी समितियां यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्थिति में किसानों के भुगतान में लापरवाही न हो। खरीदी गई कृषि उपज का भुगतान समय-सीमा में कराया जाए। मंडी बोर्ड द्वारा सभी मंडी सचिवों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि किसान हित सर्वोपरि है और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी। माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार किसानों को भुगतान की कार्यवाही मंडी समिति चौरई द्वारा समय-सीमा में की जाएगी।