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जंगल बचाने की मुहिम तेज, कई जगहों पर मिला अवैध कब्जा

नरसिंहपुर जिले के वन क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध बसाहट और वन भूमि के दुरुपयोग की मिल रही शिकायतों के बाद अब वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शासन के निर्देश पर जिले के सभी वन परिक्षेत्रों में वन सीमा रेखाओं का सत्यापन अभियान शुरू कर दिया गया है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मानचित्र के साथ जंगलों में पहुंचकर सीमाओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि किन-किन स्थानों पर वन भूमि का दुरुपयोग हो रहा है और कहां अतिक्रमण किया गया है। बताया जा रहा है कि करेली और गाडरवारा वन परिक्षेत्र में यह अभियान तेज गति से चल रहा है। सत्यापन के दौरान कई स्थानों पर वन भूमि के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं, जिनमें संबंधित लोगों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान कुछ स्थानों पर वन क्षेत्र के भीतर विद्युत ट्रांसफार्मर लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। अब इसकी विस्तृत जांच कर विद्युत वितरण कंपनी से पत्राचार किया जाएगा कि ट्रांसफार्मर लगाने के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति के स्थापना पाई जाती है तो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जिले में सघन वन क्षेत्र होने के बावजूद कई स्थानों पर वन भूमि का उपयोग खेती सहित अन्य कार्यों में किया जा रहा है। वन विभाग समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी करता रहा है, लेकिन अब व्यापक स्तर पर सीमा सत्यापन के जरिए स्थिति स्पष्ट करने और सख्ती से नियंत्रण करने की तैयारी है। वनभूमि के दुरुपयोग से यह नुकसान वन क्षेत्र घटने से जैव विविधता पर सीधा असर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित पर्यावरण संतुलन बिगडऩे का खतरा भूजल स्तर और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वनक्षेत्र की सीमा लाइन का सत्यापन कार्य निरंतर चल रहा है। जहां भी अतिक्रमण मिल रहा है उसे हटाने के पूर्व संबंधितों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कुछ जगह वनभूमि में ट्रांसफार्मर मिलने की जानकारी सामने आई है, आगे नियमानुसार कार्रवाई होगी। सुनील वर्मा, एसडीओ गाडरवारा वन विभाग

कहीं ढांचे तो कहीं कब्जे: नाले-नालियों की सफाई में आ रहीं कई अड़चनें

नरसिंहपुर बारिश से पहले नगरीय क्षेत्र में नाले-नालियों की साफ-सफाई के लिए नगर पालिका का अमला सक्रिय हो गया है, लेकिन अतिक्रमण इस अभियान की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है। शहर के कई वार्डों में नालियों पर कच्चे-पक्के कब्जों के कारण सफाई कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्टेशनगंज क्षेत्र के कृष्ण वार्ड में हालात सबसे अधिक गंभीर हैं। यहां जगह-जगह नालियों पर अतिक्रमण होने से सफाई कर्मचारियों को कचरा निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर नालियों के ऊपर पक्का फर्श, सीढिय़ा और चबूतरे तक बना दिए गए हैं, जिससे नालियां पूरी तरह ढंक गई हैं। इसी तरह निरंजन वार्ड और कामत वार्ड में भी नाले-नालियों पर कब्जे के कारण सफाई कार्य प्रभावित रहा है।  स्थिति यह है कि नालियों में लंबे समय से जमा कचरा और मलबा अब सफाई के दौरान बाहर निकल रहा है, जिससे पूर्व में सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कृष्णा वार्ड में नालियों के ऊपर अतिक्रमण की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। कई जगह नालियां पूरी तरह बंद हैं और लोगों ने उन पर स्थायी कब्जा कर लिया है। ऐसे में जब सफाई अमला मौके पर पहुंचता है, तो सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि सीमित संसाधनों में बेहतर तरीके से सफाई कैसे की जाए। कृष्णा वार्ड में नाले-नालियों के ऊपर अतिक्रमण है। वार्ड की अधिकांश सडक़ें संकीर्ण वार्ड की अधिकांश सडक़ें संकरी होने के कारण जलभराव की समस्या भी यहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक बनी रहती है। बारिश के दिनों में कमराय स्कूल से लगी सडक़ पर नालियों का गंदा पानी भर जाता है। यही पानी पास स्थित वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर तक पहुंचता है, जिससे हर साल नागरिकों के साथ-साथ कर्मचारी और छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है। नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो बारिश के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं। नगर प्रशासन को ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी करना चाहिए जो जानबूझकर नाले-नालियों में कचरा डालकर पानी की निकासी बाधित करते हैं। कई स्थानों पर नालियों के ऊपर पक्का फर्श, सीढिय़ा और चबूतरे तक बना दिए गए हैं अतिक्रमण हटे बिना सफाई मुश्किल कई वार्डों में नालियों पर कच्चे-पक्के कब्जे पक्का फर्श, सीढिय़ां और चबूतरे बन रहे बाधा संकरी सडक़ों के कारण बढ़ता है जलभराव बारिश में स्कूल व शासकीय परिसरों तक पहुंचता गंदा पानी समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेंगी समस्याएं नाले-नालियों की सफाई के लिए निरंतर कार्य चल रहा है। जेसीबी मशीन के साथ ही कर्मचारियों की टीम लगी है। कई जगह अतिक्रमण मिल रहा है उसे हटाने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में जल्द ही कार्रवाई होगी।- इंजी. पुरुषोत्तम बाडबुद्धे, नगरपालिका नरसिंहपुर

उज्जैन में चमत्कारिक खोज! महाकाल मंदिर परिसर से निकला नया शिवलिंग, गुफानुमा संरचना भी मिली

उज्जैन उज्जैन में बाबा महाकाल के आंगन में एक बार फिर 'महादेव प्रकट हुए'। महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में चल रही खुदाई के दौरान यहां एक प्राचीन शिवलिंग मिला। इसके साथ ही एक गुफानुमा संरचना भी निकली। मंदिर परिसर में पूर्व में भी प्राचीन प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। मई 2020 में परमारकालीन मंदिर के अवशेष और मूर्तियां मिली थीं। महाकालेश्वर मंदिर परिसर की इस खुदाई ने छह वर्ष बाद फिर उज्जैन की प्राचीन विरासत को जीवंत करने के संकेत दिए हैं। टनल और वेटिंग हॉल निर्माण के दौरान खुदाई में ये शिवलिंग और गुफानुमा संरचना मिलीं। इस प्राचीन वैभव ने न सिर्फ आस्था में बढ़ोत्तरी की, बल्कि क्षेत्र की गहरी पुरातात्विक परतों की ओर भी ध्यान खींचा है। करीब 1000-1200 वर्ष पुराना बताया जा रहा संभावना जताई जा रही है कि यह शिवलिंग और गुफा परमार कालीन हो सकते हैं। इन्हें करीब 1000-1200 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। महाकालेश्वर मंदिर के प्रस्तावित गेट-4 के पास निर्माण कार्यों के लिए खुदाई का काम चल रहा है। शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे पोकलेन ऑपरेटर को खुदाई के दौरान शिवलिंग दिखा तो तुरंत खुदाई रोक दी गई। इसके बाद पुजारियों ने विधि- विधान से पूजा-अर्चना कर शिवलिंग को सुरक्षित करवा दिया। शिवलिंग के साथ अन्य अवशेष जैसे नंदी प्रतिमा या प्राचीन स्थापत्य के हिस्से मिलने की संभावना इस क्षेत्र को संभावित पुरातात्विक स्थल के रूप में स्थापित करती है विशेषज्ञों के अनुसार, शिवलिंग के साथ अन्य अवशेष जैसे नंदी प्रतिमा या प्राचीन स्थापत्य के हिस्से मिलने की संभावना इस क्षेत्र को संभावित पुरातात्विक स्थल के रूप में स्थापित करती है। अब इस खोज का अहम पहलू इसकी प्राचीनता तय करना है। जल्द ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य पुरातत्व विभाग की टीम वैज्ञानिक परीक्षण करेगी। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पूर्व में भी पुरानी प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। मई 2020 में महाकाल मंदिर विस्तार के दौरान 25- 30 फीट गहराई में परमारकालीन मंदिर के अवशेष और मूर्तियां मिली थीं। वर्तमान खोज उसी ऐतिहासिक श्रृंखला का विस्तार हो सकती है। प्रमुख बिंदु महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रहा निर्माण कार्य खुदाई में निकला प्राचीन वैभव शिवलिंग और गुफा मिले बाबा महाकाल के आंगन में 'प्रकट हुए महादेव' खुदाई के दौरान मिले शिवलिंग की पुजारियों ने की पूजा-अर्चना गुफानुमा संरचना भी सहेजी

नेक्स्ट जेन टैलेंट समिट 2026 में श्री कल्याणी नृत्य कला समिति के 9 छात्रों ने जीते पुरस्कार, दीक्षा अस्थाना ने दी बधाई

भोपाल  2 अप्रैल को रविंद्र भवन के अंजलि सभागृह में राज्य सरकार की मिनिस्ट्री आफ कल्चर द्वारा हिंदुस्तान आर्ट एंड म्यूजिक समिति के माध्यम से, नेक्स्ट जेन टैलेंट समिट 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय संगीत और नृत्य कला की स्पर्धा में श्री कल्याणी नृत्य कला कौशल समिति के कथक नृत्य में पारंगत 9 छात्रों ने पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इस उपलब्धि पर श्री कल्याणी नृत्य कला कौशल समिति की कत्थक शिक्षिका और संस्थापक श्रीमती दीक्षा अस्थाना ने सभी छात्रों को उनके इस प्रयास पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं तथा आशा व्यक्त की है भविष्य में और अधिक संख्या में यहां की छात्राएं ऐसी उपलब्धि प्राप्त करेंगी ।

आईपीएस अधिकारियों के थोकबंद तबादले, कई जिलों में एसपी की बदली जिम्मेदारी

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में थोकबंद तबादले करते हुए 23 जिलों के पुलिस अधीक्षकों को बदल दिया गया है. इसके अलावा पुलिस मुख्यालय में भी सीनियर पुलिस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रदेश के भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच सहित 21 जिलों के एसपी को बदला गया है. इसके अलावा भोपाल देहात और इंदौर देहात के पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. उधर पुलिस ट्रेनिंग में नए-नए प्रयोगों के लिए चर्चा में रहने वाले एडीजी राजाबाबू सिंह को एडीजी रेल बनाया गया है. इसके अलावा कई रेंज के आईजी को भी बदल दिया गया है. इन जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले प्रदेश के 21 जिलों में नए पुलिस अधीक्षक बनाए गए हैं. इसमें भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, झाबुआ, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंडला, दतिया, सीहोर, सिंगरौली, दमोह, सिवनी जिले शामिल हैं. इसके अलावा भोपाल और इंदौर देहात के दो और पुलिस अधीक्षकों को भी बदला गया है. इस तरह कुल 23 एसपी को बदला गया है. यह पुलिस अधीक्षक बदले गए मनोज कुमार राय– पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. राहुल कुमार लोढ़ा – पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सिमाला प्रसाद – पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. असित यादव – पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) को उप पुलिस महानिदेशक (ग्वालियर रेंज, ग्वालियर) बनाया गया. विवेक सिंह – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) को उप पुलिस महानिदेशक (शहडोल रेंज, शहडोल) बनाया गया. शैलेन्द्र सिंह चौहान – पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, भोपाल) बनाया गया.   कुमार प्रतीक – पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) को उप पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स, इन्दौर) बनाया गया.   शिव दयाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) को उप पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. मयंक अवस्थी – पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून और व्यवस्था, इन्दौर) बनाया गया. अरविन्द तिवारी – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को सेनानी (34वीं वाहिनी, विसबल, धार) बनाया गया. सूरज कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) को पुलिस अधीक्षक (जिला-भिण्ड) बनाया गया. यांगचेन डोलकर भुटिया – पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) बनाया गया. गुरूकरण सिंह – सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) को पुलिस अधीक्षक (जिला-रीवा) बनाया गया. दीपक कुमार शुक्ला – पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) को सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) बनाया गया. अमन सिंह राठौड़ – पुलिस अधीक्षक (जिला-शिवपुरी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, इन्दौर) बनाया गया. अनुराग सुजानिया – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) बनाया गया. सचिन शर्मा – संयुक्त आवासीय आयुक्त (नई दिल्ली) को पुलिस अधीक्षक (जिला-धार) बनाया गया. वाहनी सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) को पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इन्दौर) बनाया गया. विकास कुमार सहवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-सागर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-2, भोपाल) बनाया गया. धर्मराज मीना – सेनानी (32वीं वाहिनी, विसबल, उज्जैन) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) बनाया गया. समीर सौरभ – पुलिस अधीक्षक (जिला-मुरैना) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (रेडियो, भोपाल) बनाया गया. रजत सकलेचा – पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) को पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) बनाया गया. अगम जैन – पुलिस अधीक्षक (जिला-छतरपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) बनाया गया. मनीष खत्री – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुनील कुमार मेहता – पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) बनाया गया. देवेन्द्र कुमार पाटीदार – पुलिस अधीक्षक (जिला-बुरहानपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-झाबुआ) बनाया गया. रामशरण प्रजापति – पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) को सहायक पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) बनाया गया. सुन्दर सिंह कनेश – पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) को पुलिस अधीक्षक (रेल, जबलपुर) बनाया गया. राजेश व्यास – पुलिस उपायुक्त (आसूचना एवं सुरक्षा, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) बनाया गया. विनोद कुमार सिंह – पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) को सेनानी (24वीं वाहिनी, विसबल, रतलाम) बनाया गया. पंकज कुमार पाण्डे – सहायक पुलिस महानिदेशक (भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (देहात, भोपाल) बनाया गया. प्रकाश चन्द्र परिहार – पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-पांढुर्ना) बनाया गया. दिलीप कुमार सोनी – पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) को पुलिस अधीक्षक (जिला-आगर मालवा) बनाया गया. राजेन्द्र कुमार वर्मा – पुलिस अधीक्षक (पीटीसी, इंदौर) को पुलिस अधीक्षक (देहात, इन्दौर) बनाया गया. विक्रांत मुराब – सहायक पुलिस महानिदेशक (अ.वि., पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) बनाया गया. सुरेन्द्र कुमार जैन – पुलिस अधीक्षक (पीटीएस, रीवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मऊगंज) बनाया गया. आशीष खरे – जोनल पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा, जबलपुर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-डिंडौरी) बनाया गया. अंकित जायसवाल – पुलिस अधीक्षक (जिला-नीमच) को पुलिस अधीक्षक (रेल, भोपाल) बनाया गया. राजेश रघुवंशी – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-खण्डवा) को पुलिस अधीक्षक (जिला-मण्डला) बनाया गया. मोती उर्र रहमान – पुलिस अधीक्षक (जिला-अनूपपुर) को सेनानी (9वीं वाहिनी, विसबल, रीवा) बनाया गया. श्रुतकीर्ति सोमवंशी – पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) को सेनानी (13वीं वाहिनी, विसबल, ग्वालियर) बनाया गया. मयूर खण्डेलवाल – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दतिया) बनाया गया. सोनाक्षी सक्सेना – पुलिस उपायुक्त (आसूचना व सुरक्षा, भोपाल) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सीहोर) बनाया गया. शियाज, के.एम. – सेनानी (हॉकफोर्स, बालाघाट) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिंगरौली) बनाया गया. आनंद कलादगी – पुलिस उपायुक्त (जोन-4, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-दमोह) बनाया गया. कृष्ण लालचंदानी – पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) को पुलिस अधीक्षक (जिला-सिवनी) बनाया गया. आयुष गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-जबलपुर) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, भोपाल) बनाया गया. आदर्शकांत शुक्ला – प्रभारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एन्टी नक्सल आपरेशन, बालाघाट) को पुलिस उपायुक्त (जोन-4, भोपाल) बनाया गया. नरेन्द्र रावत – माननीय राज्यपाल के परिसहाय को पुलिस उपायुक्त (जोन-1, इन्दौर) बनाया गया. अभिषेक रंजन – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (जिला-उज्जैन) को पुलिस उपायुक्त (जोन-3, इन्दौर) बनाया गया. राहुल देशमुख – सीएसपी (कोतवाली, उज्जैन) को माननीय राज्यपाल का परिसहाय बनाया गया. सीनियर पुलिस अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी रवि कुमार गुप्ता – विशेष पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) को विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण एवं निदेशक, पुलिस अकादमी, भौरी भोपाल) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. राजाबाबू सिंह – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण, पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेल, भोपाल) बनाया गया. डी.पी. गुप्ता – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत एवं मानव अधिकार, भोपाल) को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सामुदायिक पुलिसिंग, आरटीआई, लोक सेवा गारंटी आदि) बनाया गया. सोलोमन यश कुमार मिंज – अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पुलिस मुख्यालय, भोपाल) को … Read more

हर दो दिन में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश से आम की फसलें होंगी प्रभावित, पैदावार में गिरावट

शहडोल   मध्य प्रदेश में पिछले दो तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी व बूंदाबांदी से मौसम तेजी से बदला है. शहडोल में भी पिछले दो दिनों से मौसम इसी तरह बदल रहा है, जिसने आम की फसलों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है।  शहडोल में दो दिन से आंधी बारिश शहडोल जिले के किसान भोलू गुप्ता बताते हैं, '' पिछले दो दिन से तेज गर्मी से राहत मिली हुई है, जिस तरह से सूर्य देव का पारा चढ़ा हुआ था, उससे हालत खराब थी लेकिन पिछले दो दिन से मौसम ऐसा बदला है, कि शाम को ठंडक महसूस हो रही है. आंधी और बारिश से मौसम ठंडा हो गया है पर कई फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।  बदलते मौसम से आम को बड़ा नुकसान मौसम के इस बदलते मिजाज से किस तरह का नुकसान हो सकता है? इसे लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' जो आंधी तूफान आया है इससे जो पेड़ वर्गीय फसल है जैसे आम, केला आदि तो इनके गिरने से तो निश्चित ही नुकसान होता है लेकिन अन्य कई वजहों से भी फल प्रभावित होते हैं. तूफान में आम की कमजोर डगालें व फूल टूटने से आने वाले आमों की संख्या कम हो जाती है, इससे सबसे ज्यागदा नुकसान होता है।  सब्जी व अन्य फसलों का क्या होगा? कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' इसके अलावा सब्जी वर्गीय फसलों की बात करें या गर्मी की फसल मूंग-उड़द की बात करें तो जब तक ओले नहीं गिरेंगे तब तक ज्यादा नुकसान नहीं है. बारिश हो रही है, मौसम ठंडा है तो इसका फायदा ही इन फसलों को मिलेगा. बस जिस तरह से तेज आंधी चल रही है उसका असर आम की फसल पर जरुर पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल वक्त से पहले ही झड़ रही है।  तूफानी आंधी न मचाई तबाही  तेज आंधी ने शहडोल में कई स्थानों पर जमकर नुकसान किया, कहीं शादी का टैंट उड़ा दिया, तो कहीं बिजली के खंबे और पेड़. बिजली की तारों पर पेड़ गिरने से कई इलाकों में ब्लैक आउट हो गया और बिजली कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे. इसके अलावा कई गांव में कई घंटे तक ब्लैकआउट रहा, शुक्रवार को पूरे दिन लाइट अप एंड डाउन चलती रही, क्योंकि लगातार मेंटेनेंस का कार्य चलता रहा। 

जबलपुर-इटारसी के बीच रेलवे की तीसरी लाइन पूरी, दिल्ली तक तेज़ी से दौड़ेंगी ट्रेनें

नर्मदापुरम   जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है. अब विभिन्न स्तरों पर इसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है. परीक्षण पूरा होने के बाद काम शुरू होगा. तीसरी लाइन बनने से जबलपुर-नर्मदापुरम के बीच ट्रेनों का आवागमन तेज हो जाएगा. इसका असर ये होगा कि राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो जाएगी. क्रॉसिंग के लिए हॉल्ट की समस्या भी खत्म होगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन के बीच तीसरी लाइन की योजना के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी को जानकारी दी. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का इसके लिए आभार जताते हुए कहा "यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है. तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी. समयबद्धता में सुधार आएगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. नर्मदापुरम, नरसिंहपुर समेत आसपास के जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।  ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी तीसरा ट्रैक बिछने से इस बिजी रूट पर ट्रेनें सनसनाती हुई निकलेंगी. अभी इस रेल लाइन पर ट्रैफिक का प्रेशर रहता है. इस कारण क्रॉसिंग कर सुपरफास्ट ट्रेनों को पहले निकाला जाता है. अब एक और ट्रैक बनने से ये समस्या खत्म हो दाएगी. जाहिर है इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगा. तीसरा ट्रैक बनने से जबलपुर और इटारसी के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. माना जा रहा है कि डीपीआर की परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे बजट आवंटित करेगा. इसके बाद टेंडर होगा।  इटारसी से मानिकपुर तक प्लानिंग भी शामिल इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे की प्लानिंग के अनुसार इटारसी रेलवे जंक्शन से जबलपुर होकर मानिकपुर तक जाने वाले रेलवे लाइन का विस्तार करने की है. यहां पर तीसरा ट्रैक बिछाने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन की भी स्वीकृति की मांग रेलवे बोर्ड की गई है. ये तीसरी लाइन डलने के बाद इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर रेल लाइन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। 

बीजेपी का नया कदम, जिला प्रशिक्षण वर्गों में नेताओं के लिए मोबाइल प्रतिबंधित, नीट-यूपीएससी जैसी परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है. इस बीच पार्टी ने नेताओं के लिए एक और टास्क की शुरुआत कर दी है. भाजपा अपने नेताओं की परीक्षा लेगी. जिसका आयोजन जिला स्तर पर किया जाएगा. खास बात यह है कि यह परीक्षा नीट-यूपीएससी एग्जाम की तरह होगी. जिसमें मोबाइल फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा. इसके अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिसमें पार्टी की नीति रीति से नेताओं और कार्यकर्ताओं को अवगत कराया जाएगा. निकाय और पंचायत चुनाव से पहले भाजपा इसी तैयारी में लगी है।  बीजेपी लेगी परीक्षा दरअसल, एमपी में भाजपा अपने संगठन को और मजबूत करने में जुटी है. जिसके लिए सभी जिलों में जिला प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जाना है.  इस दौरान नेताओं का टेस्ट लिया जाएगा. जिसमें नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह मोबाइल फोन पहले ही जमा करा लिए जाएंगे. परीक्षा कक्ष के अंदर किसी तरह की जानकारी नेताओं को लेना बंद रहेगी. इसके लिए एक मोबाइल काउंटर बनाया जाएगा, जहां सभी के मोबाइल जमा होंगे और उसके बाद ही उन्हें टेस्ट देना होगा. इस टेस्ट के जरिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की क्षमता को समझना चाहती है।  नीट-यूपीएससी की तरह मोबाइल रहेगा बैन जिला प्रशिक्षण वर्गों में शामिल होने वाले नेताओं के मोबाइल नीट-यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तरह पहले ही जमा करा लिए जाएंगे। इसके लिए प्रशिक्षण स्थल पर एक मोबाइल काउंटर बना होगा। जहां एक टोकन नंबर देकर मोबाइल जमा करा लिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद होगी परीक्षा प्रशिक्षण वर्ग के बाद नेताओं को पोस्ट टेस्ट देना होगा। यानी प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने क्या सीखा, उनको क्या जानकारी मिली, उन्हें किस सत्र में बताई गई कौन सी बात याद रही। प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा में प्रशिक्षण में बताई गई जानकारी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बीजेपी नेताओं को देगी ट्रेनिंग बीजेपी नेताओं की परीक्षा के बाद उन्हें ट्रेनिंग भी देगी. क्योंकि पहले जिला प्रशिक्षण वर्ग होगा, उसके बाद नेताओं को पोस्ट देस्ट देना होगा. प्रशिक्षण में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने क्या सीखा, उन्हें पार्टी से संबंधित क्या जानकारी मिली. किस सत्र में कौन सी बात बताई गई. इससे जुड़े सवाल पूछा जाएंगे. खास बात यह है कि परीक्षा के बाद भी भाजपा अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग भी दिलाएगी. ताकि भविष्य के हिसाब से नेताओं को तैयार किया जा सके. माना जा रहा है कि बीजेपी इस प्रयोग के जरिए संगठन को मजबूत करने में जुटी है।  मध्य प्रदेश में अगले साल पंचायत और निकाय चुनाव की प्रक्रिया होने वाली है. ऐसे में भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसलिए एमपी के अलग-अलग जिलों में भाजपा जल्द ही अपने प्रशिक्षण शिविर की तैयारियां शुरू करने वाली है। 

प्रदेश में जनगणना 2027 की शुरुआत, 33 सवालों का जवाब देना होगा घर आए कर्मचारियों को

भोपाल  मध्य प्रदेश में 1 मई से जनगणना-2027 के 'हाउस लिस्टिंग' यानी मकानों की सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। इस बार की जनगणना खास है क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल है। आपके घर पहुंचने वाले प्रगणक आपसे 33 मुख्य सवाल पूछेंगे। इसमें आपके मकान की स्थिति, दीवारों में इस्तेमाल सामग्री से लेकर घर में कौन सा अनाज खाया जाता है, इसकी जानकारी भी ली जाएगी। इन चीजों का देना होगा ब्यौरा पहले फेज में मुख्य रूप से सुविधाओं और संपत्तियों पर फोकस रहेगा: घर की संपत्ति: गाड़ी, लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन। मकान की बनावट: दीवार और छत की सामग्री। खान-पान: परिवार में इस्तेमाल होने वाला मुख्य अनाज। जातिगत गणना: ध्यान रहे कि जाति से जुड़े सवाल इस बार नहीं, बल्कि फरवरी 2027 में होने वाले दूसरे चरण में पूछे जाएंगे। पूरी तरह गुप्त रहेगी जानकारी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने स्पष्ट किया है कि लोगों को अपनी संपत्ति बताने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। गोपनीयता: आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह गुप्त रहेगी और किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। सरकारी लाभ: जनगणना का मकसद केवल विकास की योजनाएं बनाना है। इससे किसी के सरकारी लाभ या पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुरक्षा: डेटा पूरी तरह 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड' है, यानी सर्वर तक पहुंचने के दौरान इसे कोई नहीं देख सकता। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना है और डेटा प्रोटेक्शन हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लोग बेझिझक और सही जानकारी साझा करें। आपके सहयोग से ही बेहतर सरकारी नीतियां बन सकेंगी। कार्तिकेय गोयल, निदेशक (जनगणना-2027, MP & CG) 1.5 लाख कर्मचारियों की फौज तैनात इस महा-अभियान के लिए मध्य प्रदेश में करीब 1.5 लाख कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनमें से ज्यादातर स्कूल शिक्षक हैं। हाउस लिस्टिंग का यह काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली रफ्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 मई को प्रथम चरण का करेंगे भूमिपूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट को गति देने के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने जमीन देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली प्रमुख परियोजना है। इस परियोजना में 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सुनियोजित विकास किया जाएगा। परियोजना में 1300 हैक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है और इसकी कुल लागत 2360 करोड़ रु. निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भू-स्वामियों से सहमति के साथ जमीन प्राप्त करना थी, क्योंकि शहर के समीप होने के कारण भूमि का बाजार मूल्य अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति को समझते हुए किसानों के हित में बेहतर निर्णय लिया। इससे विकास और किसानों के हितों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस निर्णय के बाद किसानों की भागीदारी में तेजी आई है। योजना में किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन दी जाती है, यानी ऐसी जमीन जिसमें सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। अब 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसानों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय के स्थायी स्रोत बनेंगे। परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 3 मई को सेक्टर-ए, ग्राम नैनोद, इंदौर में किया जाएगा। प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड़ रु. है, जिसके तहत प्रारंभिक अधोसंरचना विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। परियोजना से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना विकसित होगी, कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी द्वारा भू-स्वामियों से लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है और उन्हें योजना के लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।