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मध्यप्रदेश पुलिस की वाहन चोरों पर प्रभावी कार्यवाही विगत एक माह में 109 चोरी किए गए दोपहिया वाहन बरामद

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में वाहन चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने हेतु लगातार सख्त एवं सुनियोजित कार्यवाहियां की जा रही हैं। इसी क्रम में विगत एक माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन चोरों के गिरोहों का पर्दाफाश करते हुए 109 चोरी किए गए दोपहिया वाहन बरामद किए हैं। जबलपुर थाना माढोताल पुलिस ने अंतर्राज्यीय वाहन चोर एवं वाहन काटने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए जबलपुर एवं रायपुर (छत्तीसगढ़) से चोरी किए गए 15 वाहन जप्त किए। इसी प्रकार थाना लाडगंज पुलिस ने 2 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 वाहन बरामद किए, जबकि थाना पाटन पुलिस द्वारा एक आरोपी को गिरफ्तार कर 7 दोपहिया वाहन जप्त किए गए। इस प्रकार तीनों कार्यवाहियों में पुलिस ने चोरी किए गए 34 दुपहिया वाहन बरामद किए हैं। राजगढ़ थाना ब्यावरा सिटी पुलिस ने अंतरजिला मोटरसाइकिल चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर 2 आरोपियों से 15 मोटरसाइकिलें जप्त कीं। वहीं थाना सुठालिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 चोरी की गई मोटरसाइकिलें बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार दोनों कार्यव‍हियों में पुलिस ने चोरी किए गए कुल 25 वाहन बरामद किए हैं। रतलाम रतलाम पुलिस ने वाहन चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 09 मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इस कार्रवाई में 1 मुख्य आरोपी एवं 3 बाल अपचारियों को पकड़ा। वहीं थाना स्टेशन रोड पुलिस ने भी 4 मोटरसाइकिलें बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इस प्रकार कुल 13 मोटरसाइकिलें बरामद की गई। अन्य जिलों में भी की गई कार्यवाही बैतूल जिले में भैंसदेही पुलिस द्वारा अंतर्राज्यीय वाहन चोरो को गिरफ्तार कर 10 मोटरसाइकिलें, खरगोन पुलिस ने 7 मोटरसाइकिल, ग्वालियर जिले में 5 वाहन, गुना जिले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 मोटरसाइकिलें, शिवपुरी जिले में 4,मंदसौर जिले में 3 मोटरसाइकिलें तथा शाजापुर एवं कटनी जिलों में 2-2 मोटरसाइकिल बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी कार्यवाहियों में पुलिस की तत्परता, तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग एवं प्रभावी समन्वय प्रमुख रूप से सामने आया है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वाहन चोरी जैसे अपराधों पर नियंत्रण हेतु सतत अभियान जारी है तथा भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रखी जाएगी।  

सजा सुनते ही टूटा बंदी, शहडोल जेल में गला काटकर आत्महत्या की कोशिश

शहडोल न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद एक बंदी ने जिला जेल में खौफनाक कदम उठा लिया। बुधवार सुबह बंदी ने किसी धारदार वस्तु से अपना गला काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिससे जेल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जेल प्रशासन ने बंदी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार जारी है और हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार बंदी पंकज कटारे मंगलवार को न्यायालय से दुष्कर्म एवं पाक्सो एक्ट के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद से तनाव में था। बुधवार सुबह जब सुरक्षाकर्मी बैरक खोलने पहुंचे तो उन्हें बंदी की चादर पर खून के निशान दिखाई दिए। संदेह होने पर जब सुरक्षाकर्मी पास पहुंचे तो देखा कि पंकज कटारे के हाथ में टीन की चादर का छोटा नुकीला टुकड़ा था, जिससे वह अपने गले को काट रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे रोका और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां सर्जन डाॅ. अपूर्व पांडे ने उसका उपचार किया। डाॅक्टरों ने बताया कि बंदी के गले में गहरा घाव था, जिस पर चार टांके लगाए गए हैं। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर है और संभवतः गुरुवार तक उसे अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। जेलर सुनील बैशवाड़े ने बताया कि पंकज कटारे पिछले एक वर्ष से जेल में बंद है और इस दौरान उससे मिलने उसके परिजन कभी नहीं आए और न ही किसी वकील की व्यवस्था की गई। शायद इसी कारण वह मानसिक तनाव में था और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद उसने यह कदम उठाया। जानकारी के अनुसार पंकज कटारे पहले भी दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट चुका है। करीब एक साल पहले ही वह जेल से छूटा था, जिसके बाद उसने पांडवगर क्षेत्र में एक सुनसान घर में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था, जिसके बाद से वह फिर जेल में बंद था।  

मंत्री टेटवाल ने “स्कूल चलें हम” के तहत प्रवेशोत्सव में पुस्तक और मिठाई वितरण कर विद्यार्थियों का किया उत्साहवर्धन

भोपाल राजगढ़ के सारंगपुर के पीएम  ग्रुप शाला स्कूल में प्रवेशोत्सव में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल बच्चों के बीच पहुंचे और उन्हें अपने हाथों से मिठाई और पुस्तकें वितरित कीं। नए सत्र के पहले दिन बच्चों के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दिया। मंत्री  टेटवाल ने औपचारिकता से हटकर विद्यार्थियों के साथ सहज संवाद किया। उन्होंने बच्चों से किताब पढ़वाई और बीच-बीच में सवाल पूछकर उनकी समझ को परखा। कई बच्चों ने आत्म-विश्वास के साथ जवाब दिए, जिस पर उन्होंने उनकी सराहना की। मंत्री  टेटवाल ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि इसी तरह के विद्यालय से उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई थी, इसलिए वे भली-भांति समझते हैं कि शुरुआती कक्षाओं में मजबूत आधार कितना महत्वपूर्ण होता है। प्रवेशोत्सव के इस आयोजन में बच्चों को पुस्तकों के साथ मिठाई भी बांटी गई, जिससे विद्यालय का वातावरण उत्साह और अपनत्व से भरा नजर आया। नवप्रवेशी विद्यार्थियों को सहज तरीके से विद्यालय से जोड़ने का यह प्रयास प्रभावी रूप में दिखाई दिया। प्रदेश में शुरू हुए प्रवेशोत्सव के तहत शासकीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें प्रारंभ से ही शिक्षा के प्रति सकारात्मक रूप से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।  

योजनाएं जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की पहल- राज्यपाल पटेल

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनजातीय वर्ग का समग्र विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन), धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समाज के समग्र विकास और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह बात राज्यपाल  पटेल ने बुधवार को मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के कन्हारीकला में दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर के आयोजन में जनसमूह को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि दूध का पहले बच्चों के पोषण में उसके बाद अतिरिक्त दूध को बेचकर आय बढ़ाने में उपयोग करें। पशुओं की देखभाल बच्चों की तरह ही करनी चाहिए। समय पर चारा, पानी और बीमारी होने पर दवाइयों का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर सिकलसेल जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक एक करोड़ 28 लाख लोगों की जांच की जा चुकी है।  उन्होंने जेनेटिक कार्ड को बीमारी की रोकथाम का तरीका बताया। कार्ड का मिलान कर विवाह करने का परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि गर्भस्थ और प्रसूति के 72 घंटे के भीतर नवजात शिशुओं की भी जांच संभव है। जांच के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इन प्रयासों से बच्चों का वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य सुरक्षित होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं से जनजातीय क्षेत्रों में जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण और जांच के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए कहा। राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम के दौरान बैगा जनजातीय नृत्य प्रस्तुति की सराहना की। जनजातीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करना सभी की जिम्मेदारी बताई। प्रवास के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य शिविर, पशु मेले एवं प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गो-पूजन किया। गो-माता को फूल माला पहनाई और गुड़-केला खिलाया। संबंधितों के साथ चर्चा में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पर्यावरण के समन्वित विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला आंगनवाडी हैं, जहां उनके समग्र विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने कहा कि हरित भविष्य के लिए पौधारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण के साथ बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए घर में उपयोग किए गए पानी से आंगनवाड़ी की पोषण वाटिका की सिंचाई करने के लिए कहा है। राज्यपाल के आंगनवाड़ी आगमन पर आत्मीयता, संस्कार और उत्सव का समन्वय देखने को मिला। राज्यपाल की आंगनवाड़ी में उपस्थिति पर नन्ही बच्ची प्रिया भारतीय और राज्यमंत्री  लखन पटेल ने जन्मदिवस की खुशियों को केक काटकर साझा किया। राज्यपाल ने परिसर में अशोक का पौधा रोपित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय समाज तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी की पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है। उन्होंने  किसानों को पशुपालन अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल  पटेल का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्यपाल सुनिश्चित कर रहे हैं कि शासन की योजनाएं धरातल पर सही तरीके से लागू हो। उन्होंने कहा कि पहले जनजातीय क्षेत्रों में सिकलसेल की जानकारी नहीं हो पाती थी, लेकिन अब लगातार जांच शिविर आयोजित होने से लोग जागरूक हुए है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य शिविरों में जाकर जांच कराने की अपील की है। पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के विकास का मील का पत्थर और एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने राज्यपाल  पटेल द्वारा जनजातीय कल्याण के लिये किए जा रहे कार्यों की सराहना की। सरकार द्वारा पशुपालन से बैगा परिवारों को रोजगार द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने का प्रयास बताते हुए दुग्ध उत्पादन को आय और स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण बताया। पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। राज्यपाल  पटेल ने किया हितलाभ वितरण कार्यक्रम में बैगा समाज के प्रतिनिधि द्वारा राज्यपाल  पटेल का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। राज्यपाल  पटेल ने मंडला जिले के 50, डिंडौरी जिले के 24 एवं बालाघाट जिले के 20 बैगा जनजाति के कुल 94 हितग्राहियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत पशु प्रदाय किए। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, टीबी फूड बास्केट,  एचवीपी प्रमाण पत्र, वन काष्ठ लाभांश भी प्रदान किए।  

भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट सख्त, प्लाटून कमांडर चयन निरस्त कर फिर से आवेदन का आदेश

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने होमगार्ड में प्लाटून कमांडर की चयन प्रक्रिया को दूषित पाते हुए उसे निरस्त कर दिया। कोर्ट ने नए सिरे से चयन प्रक्रिया के लिए दोबारा विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए हैं। आरोप था कि लिखित व शारीरिक परीक्षा के पहले ही नियमविरुद्ध तरीके से स्क्रीनिंग कमेटी ने अभ्यर्थियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी सविनय कुमार गर्ग की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मप्र नगर सेना वर्ग-तीन भर्ती नियम, 2000 के तहत प्लाटून कमांडर के कुल 199 स्वीकृत पद हैं। इनमें से छह प्रतिशत पद इन-सर्विस उम्मीदवारों से भरे जाते हैं। होमगार्ड डीजी ने 27 जनवरी, 2026 को चार पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इस पद के लिए कुल 24 लोगों ने आवेदन किया था। नियमानुसार शारीरिक व लिखित परीक्षा के बाद स्क्रीनिंग कमेटी उम्मीदवारों का एसीआर देखने के बाद चयन सूची जारी करती है। दलील दी गई कि नियमविरुद्ध तरीके से परीक्षा के पहले ही स्क्रीनिंग कमेटी ने याचिकाकर्ता सहित छह उम्मीदवारों को अपात्र बताकर परीक्षा से वंचित कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि भोपाल में 16 मार्च शारीरिक परीक्षण और 17 को लिखित परीक्षा आयोजित थी, लेकिन विभाग ने 13 मार्च को ही 18 पात्र उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। दलील दी गई कि पूरी प्रक्रिया विधि-सम्मत नहीं है।  

सिंहस्थ 2028 की तैयारी और विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प, बजट में महिला सशक्तिकरण और कृषि समृद्धि को मिली नई रफ़्तार

भोपल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि समृद्धि और बुनियादी अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी है। बजट में लाडली बहना जैसी सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिये पर्याप्त बजट का प्रावधान करते हुए किसानों को राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विस्तार और शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही आगामी सिंहस्थ:2028 की तैयारियों के लिये भी अभी से बड़े बजटीय प्रावधान कर प्रदेश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास किया गया है। महिला सशक्तिकरण पर फोकस प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए बजट में 23,883 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 1,801 करोड़ रुपये तथा सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत 3,863 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह प्रावधान महिला एवं बाल स्वास्थ्य और पोषण को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। किसानों के लिए राहत और सुविधाओं का विस्तार कृषि क्षेत्र को सशक्त करने के लिए भी बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अटल कृषि ज्योति योजना के लिए 13,914 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 5 हॉर्स पॉवर तक के कृषि पंपों और एक बत्ती कनेक्शन के लिए निःशुल्क बिजली सुविधा की प्रतिपूर्ति के लिये 5,276 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 5,501 करोड़ रुपये तथा प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना को नई गति ग्रामीण विकास और अधोसंरचना के विस्तार के लिए भी सरकार ने बड़े बजटीय प्रावधान किए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 6,850 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे हर गरीब परिवार को पक्की छत मिल सकेगी। ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए लगभग 2968 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं शहरी परिवहन को बेहतर बनाने के लिए मेट्रो परियोजनाओं के लिये 656 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4,454 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक शिक्षा के लिए 11,444 करोड़ रुपये तथा समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,649 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नेशनल हेल्थ मिशन के लिए 4,600 करोड़ रुपये तथा आयुष्मान भारत को मजबूत करने के लिए भी पर्याप्त बजट दिया गया है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिए 3,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ‘वेदान्त पीठ’ की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। रोजगार और निवेश को बढ़ावा प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 2,550 करोड़ रुपये का निवेश प्रोत्साहन पैकेज तथा एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार’ योजना के तहत 10,428 करोड़ रुपये का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत मध्यप्रदेश का बजट 2026-27 सामाजिक सुरक्षा, कृषि समृद्धि और अधोसंरचना विकास के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

सांदीपनी विद्यालय सागर में आयोजित प्रवेश उत्सव में हुए शामिल मेधावी छात्राओं को किया सम्मानित

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि हर घर में शिक्षा का दीप जलना चाहिए और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करती है। मंत्री  राजपूत सागर स्थित सांदीपनी विद्यालय (महारानी लक्ष्मीबाई कन्या विद्यालय) में आयोजित प्रवेश उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जागरूकता, नए सपनों की शुरुआत और उज्ज्वल भविष्य की ओर पहला कदम है। जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय की दहलीज पर कदम रखता है, तो वह केवल स्कूल में प्रवेश नहीं करता बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दुनिया में प्रवेश करता है। मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रवेश उत्सव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चा विद्यालय से जुड़े, शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन को सफल बनाए। आज भी कई बच्चे ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि हर घर का हर बच्चा स्कूल जाए और अपने सपनों को पूरा करे। मंत्री  राजपूत ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें, क्योंकि आज की शिक्षा ही कल के सशक्त भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप सहित विभिन्न छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। मंत्री  राजपूत ने मेधावी एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक और छात्राएं उपस्थित रहीं। 

इंदौर में नगर निगम और पुलिस करेंगी बेसमेंट पार्किंग खाली, चार जोन में ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन होगा

 इंदौर  शहर की प्रमुख इमारतों की बेसमेंट में पार्किंग के उपयोग की जगह पर व्यावसायिक उपयोग पर अब रोक लगाई जाएगी। नगर निगम बेसमेंट से दुकानों व गोदाम को खाली करवाएगा। बेसमेंट में पार्किंग के अलावा अन्य उपयोग पाए जाने पर भवन को सील किया जाएगा। पुलिस के साथ मिलकर नगर निगम की टीम आगामी दिनों में कार्रवाई शुरू करेगी। यह निर्णय सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुआ। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चार जोन में बांटे गए ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। वर्तमान में शहर में अभी तक तीन हजार ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हुए हैं और एक आकलन के मुताबिक फिलहाल शहर में 11 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं। ऐसे में जो ई-रिक्शा चालक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। ई-रिक्शाओं को कलर कोड से रंगा जाएगा आठ एसीपी जोन के माध्यम से चार सेक्टर में बांटे गए ई-रिक्शाओं को उस क्षेत्र के विशेष कलर कोड से रंगा जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस कार्रवाई भी करेगी। इसके अलावा इंदौर में निर्धारित 16 ब्लैक स्पाट पर आईडीए, एनएचएआई, एमपीआईडीसी और नगर निगम सहित अन्य एजेंसियों सुधार के लिए जल्द से जल्द काम करेगी। शहर के कई रहवासी व व्यावसायिक इलाकों से सड़कों में स्पीड ब्रेकर के लिए मांग के प्रस्ताव समिति के पास पहुंचे हैं। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस उस क्षेत्र का निरीक्षण कर वहां के ट्रैफिक स्थिति का आकलन कर स्पीड ब्रेकर निर्माण के लिए अनुमति देगी। बैठक में नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, एसपी ग्रामीण यांगचेन भूटिया, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी, अपर आयुक्त आकाश सिंह, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन, अपर कलेक्टर रोशन राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। बसों के रूट में परिवर्तन किया गया बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और जनहानि को रोकना है। इसके लिए इंजीनियरिंग सुधारों के साथ-साथ सतत मानिटरिंग की जा रही है। संबंधित विभागों को दिए गए निर्देशों के पालन की नियमित समीक्षा भी की जा रही है तथा आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दिए गए निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया राजवाड़ा क्षेत्र में सिटी बसों के खड़े होने से यातायात बाधित हो रहा था। इसलिए बसों के रूट में परिवर्तन किया गया है, जिससे ट्रैफिक में सुधार देखने को मिला है। हालांकि यात्रियों को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। आठ मार्गों पर किया जा रहा सुधार यातायात व्यवस्था सुधार के लिए शहर के आठ प्रमुख मार्गों को चिन्हित किया गया है, जहां अतिक्रमण और अव्यवस्थित संरचना के कारण जाम की स्थिति बनती थी। इन मार्गों पर अतिक्रमण हटाने, लेफ्ट टर्न व्यवस्थित करने तथा विद्युत खंभों एवं डीपी शिफ्टिंग की कार्रवाई जारी है, जिससे यातायात सुगम बनाया जा सके। ट्रैफिक सुधार के लिए दिए गए ये निर्देश     सड़क किनारे खड़े वाहनों पर चालानी कार्रवाई होगी, वाहनों पर लाक लगाया जाएगा।     एयरपोर्ट के सामने बन रहे मेट्रो स्टेशन व बिजासन माता मंदिर के बीच रिक्त भूमि पर एयरपोर्ट टर्मिनल के सामने से सर्विस रोड बनाई जाएगी।     बायपास एवं अन्य प्रमुख मार्गों जहां पर दुर्घटनाएं संभावित रहती हैं उन क्षेत्रों के चिह्नित रहवासियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे आवश्यकता पड़ने पर वे पीड़ितों को तुरंत सीपीआर दे सकेंगे।     निर्माणाधीन पुल-पुलियाओं और सड़कों के वैकल्पिक मार्गों की मरम्मत जल्द की जाए।  

3029 एलपीजी सिलेण्डर जब्त और 9 मामलों में एफआईआर की गई दर्ज

भोपाल  प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने के कारण देश और प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मध्यप्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सप्लाई में किसी प्रकार की रुकावट नहीं है।  राजपूत ने अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें तथा घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) से बचें। कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2215 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 3029 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं और 9 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा 544 पेट्रोल पंपों की जांच भी की गई, जिनमें 2 मामलों में प्रकरण दर्ज कर एफआईआर दर्ज की गई है। जिला आपूर्ति अधिकारियों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के अनुरूप सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम के अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सतत आपूर्ति की जा रही है। उपभोक्ताओं की मांग को देखते हुए गैस बॉटलिंग प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित प्लांट और वितरकों के स्टॉक की निरंतर समीक्षा की जा रही है। पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारु प्रदेश में सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। पेट्रोल पंपों पर किसी प्रकार की कमी नहीं है और कंपनियों के डिपो से नियमित रूप से आपूर्ति जारी है। बढ़ती मांग को देखते हुए ऑयल कंपनियों के डिपो को भी अधिक समय तक संचालित किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखा जा सके। पीएनजी कनेक्शन विस्तार पर जोर सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के अंतर्गत प्रदेश में कार्यरत 10 संस्थाओं को पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां आवासीय परिसर, स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज, कम्युनिटी किचन और आंगनवाड़ी केंद्रों को आवेदन प्राप्त होने के पांच दिन के भीतर पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पीएनजी कनेक्शन की प्रगति की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, एडीएम, जिला आपूर्ति अधिकारी और संबंधित सीजीडी संस्थाओं के अधिकारी समीक्षा करेंगे। 

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय काल-गणना के प्रणेता और न्यायप्रियता के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य की गाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की गलियों में प्रतिध्वनित होगी। धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आगामी 3 से 5 अप्रैल, 2026 (विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष) तक भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में यह आयोजन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को जीवंत करेगा। इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा। इस वृहद आयोजन का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जन-मानस को परिचित कराना है। बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित प्राचीन भारतीय कालगणना के ऐतिहासिक केंद्र उज्जैन में पिछले वर्ष विश्व की पहली 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' की सफल स्थापना के बाद, अब इसे देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास अन्तर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को यह वैदिक घड़ी समर्पित की जा रही है। इस घड़ी की विशेषता न केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है। इसके लिए एक विशेष ऐप भी लॉन्च किया गया है जो विश्व की 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उज्जैन से शुरू होकर काशी के गलियारों तक पहुँचने वाली यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध कर रही है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने का कार्य भी कर रही है। महानाट्य के सांस्कृतिक गौरव की निरंतर यात्रा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की यात्रा वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई थी। सफलता के सोपान चढ़ते हुए इस नाटक का मंचन अब तक उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है, जहाँ हज़ारों दर्शकों ने इसे सराहा है। अप्रैल 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित इसके मंचन को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भी विशेष रूप से सराहा था। उन्होंने इस प्रस्तुति को सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और भारतीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनुकरणीय प्रयास बताया। महानाट्य विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय का संगम सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उज्जैनी के महान सम्राट के जीवन, उनके अदम्य साहस और न्यायप्रियता को जीवंत करता है। नाटक के माध्यम से 57 ईसा पूर्व प्रारंभ हुए 'विक्रम संवत्' के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्त्व को सशक्त संवादों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों को इसमें जहाँ 'सिंहासन बत्तीसी' और 'बेताल पच्चीसी' के रोचक प्रसंग देखने को मिलेंगे, वहीं भविष्य पुराण के गंभीर संदर्भों से भी परिचय होगा। महानाट्य प्रस्तुति का एक मार्मिक पक्ष विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को पहुँचाई गई क्षति को भी दर्शाना है। इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के 'नवरत्नों'—महाकवि कालिदास और महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर—की विद्वता को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया है। अत्याधुनिक तकनीक और भव्यता का मेल सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की लगभग 1 घंटे 45 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। नाटक को सजीव बनाने के लिए मंच पर रथ, अश्व (घोड़े), पालकी और ऊँटों का प्रयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग मंचों और अत्याधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किये जाएंगे। विविध प्रदर्शनियाँ और सामाजिक संकल्प महानाट्य के साथ-साथ आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जा रही हैं। इनमें सम्राट विक्रमादित्य व अयोध्या, भारतीय ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा पर केंद्रित 'आर्ष भारत', शिव पुराण, चौरासी महादेव,  हनुमान और मध्यप्रदेश के पवित्र स्थानों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि 'स्वच्छ और समृद्ध मध्यप्रदेश' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करता है, ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकें। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: एक गौरवशाली प्रस्तुति उज्जैन की पावन धरा और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करने के लिए 'महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन एक ऐतिहासिक पहल है। इस भव्य नाटक की परिकल्पना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई है, जो भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस कालजयी कृति का लेखन पद्म डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, जिनकी लेखनी ने इतिहास के पन्नों को सजीव कर दिया है। नाटक का कुशल निर्देशन संजीव मालवीय द्वारा किया गया है, जबकि प्रस्तुति संयोजक के रूप में राजेश सिंह कुशवाहा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली कलाकृति की प्रस्तुति ' विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन' द्वारा की जा रही है। यह महानाट्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के साहस, न्याय और सुशासन के आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हमारी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण रखने में सहायक सिद्ध होती हैं। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण: दिग्गज कलाकारों का सशक्त अभिनय सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, त्याग और उनके नवरत्नों की विद्वता अब रंगमंच पर अपने अभिनव से रंग बिखेरने को तैयार है। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण दिग्गज कलाकारों का अभिनय है।नाटक के केंद्रीय पात्र सम्राट विक्रमादित्य की गरिमामयी भूमिका में विक्रम सिंह चौहान और डॉ. राहत पटेल नज़र आएंगे। वहीं, उनके बचपन के संघर्षों को कृष्णा राठौर (बाल विक्रमादित्य) जीवंत करेंगे। कथा को सूत्र में पिरोने का कार्य प्रख्यात सूत्रधार दुर्गेश बाली करेंगे। राजा गर्दभिल्ल की चुनौतीपूर्ण भूमिका में चेतन शाह और शंकर राव साठे अपने अभियान का प्रदर्शन करेंगे। महारानी वीरमति के रूप में रेणुका देशपांडे और भर्तृहरि के किरदार में सूरज चौधरी दर्शकों को उस कालखंड … Read more