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राज्यों में सहयोग और सौहार्द का समय है, सीएम मोहन यादव का बयान, काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां बाबा के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद अधिकारियों के साथ चर्चा हुई। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने मंदिर की SOP को समझा। मंदिर के सीईओ ने बताया- हमारे यहां 115 विग्रह है, जिसमें 14 प्रधान महादेव हैं। हमने उनके रुद्राभिषेक और उसके महत्व के बारे में डिजिटल और बुकलेट के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। लोग यहां पर रुद्राभिषेक करते हैं। इससे भीड़ अलग-अलग जगह पर डाइवर्ट हो जाती है। दरअसल, 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेला का आयोजन होना है। प्रत्येक 12 साल में शिप्रा नदी के तट पर होने वाले इस आयोजन को लेकर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु जुड़ते हैं। इन्हीं सब तैयारियों को लेकर सीएम यादव काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और मंदिर के एसओपी के बारे में उन्होंने अधिकारियों से जानकारी ली, ताकि इन महत्वपूर्ण जानकारी से सिंहस्थ कुंभ को सफल बनाया जा सके। मोहन यादव ने कहा- प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में आने का मौका मिला है। बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर यहां पर दो राज्यों के बीच होने वाले सहयोग सम्मेलन में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी। मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राकेश सचान उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री, गिरीश यादव उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या भी मौजूद रहीं।

सीएम ने किया ऐलान: एमपी का ‘एक जिला-एक उत्पाद’ मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर बनेगा उदाहरण, वाराणसी में करेंगे साझा

भोपाल  मुख्यमंत्री  मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) को एक मजबूत आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस सशक्त मॉडल को 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उत्तर प्रदेश के नवाचारों से भी अनुभव साझा किए जाएंगे।  हर जिले की पहचान को मिला आर्थिक विस्तार ओडीओपी के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट और धार का बाघ प्रिंट जैसे उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं। यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आय के अवसर मिल रहे हैं। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्य प्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों  राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान मध्यप्रदेश के इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ओडीओपी मॉडल को वर्ष 2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ, जो प्रदेश के मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम और स्थानीय उत्पादकों की क्षमता को दर्शाता है। निर्यात और बाजार से जुड़ रहा मॉडल प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के जरिए इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा रही है।  एमपी-यूपी सम्मेलन से बढ़ेगा सहयोग वाराणसी में होने वाले एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्री, अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल होंगे। इस दौरान ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टिकोण को मजबूत करेगा और कारीगरों व उद्यमियों के लिए नए बाजार अवसर खोलेगा। साथ ही दोनों राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से इस मॉडल को और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।  

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर, इन-हाउस डिज़ाइन और निर्माण

सब-स्टेशन मेंटेनेंस के लिए 36 फीट ऊँचाई का मैन लिफ्टर इन-हाउस डिज़ाइन एवं निर्माण एमपी ट्रांसको में नई पहल भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने पारेषण कार्यों में नवाचार और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एमपी ट्रांसको टीकमगढ़ द्वारा सब स्टेशनों में मेंटेनेंस कार्यों के लिए 36 फीट तक ऊँचाई पर काम करने में सक्षम एक मैन लिफ्टर का सफलतापूर्वक डिज़ाइन एवं निर्माण इन-हाउस किया गया है। यह अभिनव "मैन लिफ्टर" विशेष रूप से सब स्टेशनों में स्थापित ऊँचाई पर स्थित उपकरणों के सुरक्षित, कुशल और समयबद्ध रखरखाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस उपकरण की सहायता से मेंटेनेंस स्टॉफ अब ऊँचे स्ट्रक्चर, इंसुलेटर, बस बार तथा अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों तक आसानी से पहुँच सकता है। इससे स्कैफोल्डिंग या लेडर के उपयोग की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी, जिससे जोखिम और श्रम दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। मात्र 39 हजार मे तैयार सब स्टेशन में ही उपलब्ध स्क्रैप मटेरियल और बाहर से न्यूनतम सामग्री खरीद कर इस लिफ्टर को तैयार किया गया है। बाजार में इस लिफ्टर की कीमत ढाई लाख रुपए से प्रारंभ होती है पर इसे सिर्फ 39000 रूपये में इन हाउस ही तैयार कर लिया गया। इन हाउस लिफ्टर तैयार करने में सागर के अधीक्षण अभियंता एम वाय मंसूरी, के मार्गदर्शन में टीकमगढ़ के कार्यपालन अभियंता आर. पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता जी. पी. राय का योगदान रहा। मेंटेनेंस की दक्षता में होगी बढ़ोतरी यह नवाचार कार्यस्थल की सुरक्षा को बढाने के साथ , मेंटेनेंस कार्यों की दक्षता में सुधार करेगा तथा मरम्मत के दौरान होने वाले डाउनटाइम को भी कम करेगा। स्थानीय स्तर पर डिज़ाइन कर तैयार किया गया यह मैन लिफ्टर एमपी ट्रांसको की इन-हाउस नवाचार क्षमता का उदाहरण है।  

EWS प्रमाणपत्र विवाद में फंसी केरल कैडर की एमपी मूल की IPS अधिकारी, डिमोशन का संकट

खरगोन  देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।  शिकायत के बाद शुरू हुई जांच निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।  केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है। कहां उलझा मामला? जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है। 

नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे कलेक्टर और 162 अधिकारी, क्या होगा खास?

इंदौर  इंदौर जिले में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने इस बार सत्र के पहले दिन को उत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों का स्वागत तिलक लगाकर और वंदन के साथ किया जाएगा। इस दौरान स्कूलों में विशेष बाल सभाओं का आयोजन होगा, जिससे बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाया जा सके। सत्र के प्रारंभ में ही विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी सुनिश्चित किया गया है ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए।  प्रशासनिक अधिकारियों की अनूठी पहल और कलेक्टर की क्लास स्कूल चले हम अभियान के अंतर्गत इंदौर जिले में एक विशेष कार्यक्रम 4 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस दिन जिले के 162 प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न सरकारी स्कूलों में पहुंचेंगे और वहां विद्यार्थियों की क्लास लेंगे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक 2 में जाकर बच्चों को पढ़ाएंगे और उनके साथ संवाद करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों का मनोबल बढ़ाना है। विशेष भोज और शैक्षणिक गतिविधियों पर जोर सत्र के पहले दिन विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोज की व्यवस्था की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी और डीपीसी (DPC) द्वारा इस संबंध में लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। विभाग का लक्ष्य नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आकर्षक बनाना है। इसके साथ ही साल की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों को पटरी पर लाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। नामांकन वृद्धि के लिए शिक्षकों का घर-घर संपर्क अभियान सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। 'ज्यादा नामांकन' अभियान के तहत प्रत्येक विद्यालय से एक शिक्षक को घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षक बच्चों के शैक्षिक स्तर का आकलन करेंगे और उन्हें स्कूल में प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस रणनीति से विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष सरकारी स्कूलों में छात्रों का ग्राफ बढ़ेगा। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और अभिभावकों का सम्मान होगा शिक्षा विभाग ने इस बार केवल छात्रों ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों को भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। जिन विद्यार्थियों ने पिछली कक्षाओं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, उनके माता-पिता को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अभिभावकों के सम्मान से बच्चों का मनोबल बढ़ेगा और वे भविष्य में और भी बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रेरित होंगे। 

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम

उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी। तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं। डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी। इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं। विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।  

भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

धार धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में चल रहे विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच की कार्यवाही से असंतुष्टि जताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है।  सुनवाई की तारीख को लेकर आपत्ति मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को होने वाली प्रस्तावित सुनवाई से पहले, उनकी आपत्तियों पर 1 अप्रैल को ही विचार किया जाए। सोसायटी का मानना है कि उनकी दलीलों को सुने बिना प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सर्वे की वीडियोग्राफी पर अड़ा पेंच मुस्लिम पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि 11 मार्च को हाईकोर्ट में प्रस्तुत उनके आवेदन पर 16 मार्च को उचित सुनवाई नहीं हुई। उनकी प्रमुख मांग है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी के फुटेज उन्हें उपलब्ध कराए जाएं। आवेदन में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने पूर्व में उनकी याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना था, जिसके कारण उन्हें शीर्ष अदालत की शरण लेनी पड़ी। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने बीते 11 मार्च को एएसआई द्वारा किए जा रहे सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की आधिकारिक मांग की थी। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि 16 मार्च को हुई पिछली सुनवाई के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय पर न तो कोई चर्चा की गई और न ही अदालत की ओर से कोई ठोस आदेश पारित किया गया।     जजों के निरीक्षण के बाद बढ़ी सरगर्मी हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने भारी सुरक्षा के बीच धार पहुंचकर भोजशाला का बारीकी से निरीक्षण किया था। जजों ने एएसआई के अधिकारियों से सर्वे की प्रगति और परिसर के भीतर मंगलवार को हनुमान चालीसा/पूजा और शुक्रवार को नमाज के आयोजनों की व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी ली थी। इस निरीक्षण के तुरंत बाद मुस्लिम पक्ष का सुप्रीम कोर्ट जाना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। 2 अप्रैल की सुनवाई क्यों है अहम? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर 2 अप्रैल को होने वाली सुनवाई ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की प्रारंभिक रिपोर्ट पर केंद्रित हो सकती है। मुस्लिम पक्ष चाहता है कि इस सुनवाई से पहले 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट उनकी दलीलें सुन ले, ताकि हाईकोर्ट की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। यह मामला न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि एएसआई की कार्यप्रणाली और डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता पर भी बड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है। याचिका की वैधता पर उठाए सवाल कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर की गई मूल याचिका की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य ही नहीं है, इसके बावजूद मामले की कार्यवाही को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। इन्हीं तकनीकी और कानूनी आधारों को मुख्य बिंदु बनाते हुए अब सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। वर्तमान में सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।

प्रदेश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक : मंत्री गोविंद सिंह राजपूत

किसी प्रकार की कमी नहीं, अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि भारत में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और देश व प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। इससे पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति निरंतर बनी हुई है और किसी प्रकार की रुकावट की स्थिति नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सहित पूरे देश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में पीएनजी कनेक्शन लेने का भी आग्रह किया, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम हो और स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त भंडार बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के अनुरूप एलपीजी सिलेंडरों का निरंतर वितरण किया जा रहा है। वहीं कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा निर्धारित प्राथमिकता क्रम और आवंटन प्रतिशत के आधार पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सतत रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं तथा जिला स्तर तक बॉटलिंग प्लांट और वितरकों के पास उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी ऑयल कंपनियों के पास पेट्रोल और डीजल (एमएस/एचएसडी) का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) पर भी पेट्रोल और डीजल की किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है। कंपनियों के डिपो से पेट्रोल और डीजल की लगातार आपूर्ति की जा रही है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बढ़ी हुई मांग को देखते हुए ऑयल कंपनियों के डिपो अतिरिक्त समय तक कार्य कर रहे हैं जिससे मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 2,110 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 2,933 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए तथा 9 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अतिरिक्त 391 पेट्रोल पंपों की जांच की गई, जिसमें एक प्रकरण दर्ज कर एफआईआर कराई गई है। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रकों और ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को पेट्रोल पंपों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं द्वारा घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन से संबंधित मांग एवं शिकायतों के पंजीयन और उनके निराकरण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के जिन शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पाइपलाइन के आसपास के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। अन्य जिलों में पाइपलाइन विस्तार के बाद पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही सीजीडी संस्थाओं को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने के लिए सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन संस्थाओं द्वारा संबंधित शहरों के लिए दूरभाष नंबर भी जारी किए गए हैं, जिन पर उपभोक्ता संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनमें अवंतिका गैस लिमिटेड द्वारा पीथमपुर, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के लिए संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि गैल गैस लिमिटेड द्वारा देवास, रायसेन, शाजापुर और सीहोर के लिए संपर्क सुविधा दी गई है। इसी प्रकार नवेरिया गैस लिमिटेड द्वारा धार, थिंक गैस द्वारा भोपाल, राजगढ़ और शिवपुरी, आईओसीएल द्वारा गुना, मऊगंज, रीवा, अशोकनगर और मुरैना, बीपीसीएलद्वारा मैहर, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली तथा गुजरात गैस लिमिटेड द्वारा उज्जैन, देवास, इंदौर, रतलाम और झाबुआ क्षेत्रों के लिए दूरभाष नंबर जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ता अपनी मांग या शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मंत्री राजपूत ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आवश्यकता अनुसार ही पेट्रोल और डीजल की खरीद करें तथा अनावश्यक संग्रह से बचें। ऑयल कंपनियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि एलपीजी, पेट्रोल, डीजल, पीएनजी और सीएनजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।  

राज्यमंत्री पटेल ने गायत्री शक्ति पीठ में गौशाला का किया निरीक्षण, गौमाता की हुई पूजा

बेल पत्र का लगाया पौधा भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने गायत्री शक्तिपीठ भोपाल परिसर में गौशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने गौमाता की पूजा-अर्चना कर प्रदेश एवं देश की खुशहाली एवं समृद्धि की प्रार्थना की। मंत्री पटेल ने गौशाला के संचालन, पशुपालन व्यवस्था एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं-विशेष रूप से नस्ल सुधार एवं अपग्रेडेशन-पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गौ उत्पादों के संवर्धन एवं दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए भी संचालकों को प्रेरित किया। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार से आए जगदीश चंद्र कुलमी (मध्यप्रदेश जोनल समन्वयक) एवं राजेश पटेल (व्यवस्थापक एवं म.प्र. जोन समन्वयक) द्वारा राज्यमंत्री पटेल का गायत्री मंत्र दुपट्टा, शॉल, श्रीफल एवं पान का पौधा भेंट कर स्वागत किया। राज्यमंत्री पटेल ने राम स्मृति उपवन के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य संवर्धन अभियान का अवलोकन कर उपवन परिसर का भ्रमण किया। उन्होंने गायत्री मंदिर परिसर में बेल पत्र का पौधा लगाया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान प्रदीप नीखरा, विनोद गुप्ता, सूरज परमार, अशोक नेमा जिला समन्वयक रमेश नागर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।  

राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड की बैठक सम्पन्न

दिव्यांगजन कल्याण एवं सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार विमर्श और राज्य में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड का गठन किया गया है। राज्य स्तरीय दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की बैठक सोमवार को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में संचालनालय, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, भोपाल में आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, निःशक्तजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष सहायता निधि स्थापित करने और उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही राज्य दिव्यांग खेल प्राधिकरण के गठन पर भी विचार किया गया, जिससे खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सके। ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र के उपयोग में राज्य को अधिक अधिकार देने तथा दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट मैदान विकसित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने पर सहमति बनी। दिव्यांगजनों की स्वास्थ्य एवं पहचान संबंधी सुविधाओं को सरल बनाने के लिए UDID कार्ड के साथ ही आयुष्मान कार्ड जारी करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही UDID कार्ड निर्माण हेतु निजी अस्पतालों एवं चिकित्सकों को अधिकृत करने और मनरेगा में कार्यरत परिजनों की मजदूरी प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष प्रावधान करने पर भी चर्चा हुई। प्रत्येक जिले में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे दिव्यांगजनों की विभिन्न समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर हो सके। साथ ही जिला स्तर पर दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के गठन तथा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत लोकल लेवल कमेटी की बैठक हर तीन माह में आयोजित करने पर जोर दिया गया। बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए लीगल गार्जियनशिप प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा “घरौंदा योजना” के अंतर्गत प्रत्येक जिले में केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया। दिव्यांगजनों के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए NHFDC के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने तथा संबंधित बैंकों को योजनाओं की जानकारी से अवगत कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक जिला मुख्यालय में दिव्यांगजनों के लिए दुकानों का आरक्षण और कैंटीन/व्यवसाय से जुड़े विज्ञापनों की जानकारी सभी स्वैच्छिक संस्थाओं तक पहुंचाने पर भी बल दिया गया। सार्वजनिक भवनों की सुगम्यता सुनिश्चित करने के लिए एक्सेस ऑडिट कराने और विशेष सोशल ऑडिट टीम के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया। भोपाल के वॉटर स्पोर्ट्स पार्क सहित अन्य स्टेडियमों में दिव्यांगजनों के लिए वॉटर स्पोर्ट्स की व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी।