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Special Train: दिवाली-छठ पर यात्रियों को राहत, प्रयागराज से हडपसर के लिए 21 अक्टूबर से विशेष ट्रेन शुरू

भोपाल दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने प्रयागराज से हडपसर के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस ट्रेन का लाभ बीना, रानी कमलापति और इटारसी के यात्रियों को भी मिलेगा। ये गाड़ियां चलेंगी – गाड़ी संख्या 04107 प्रयागराज-हडपसर स्पेशल 21 अक्टूबर से 18 नवंबर तक प्रत्येक बुधवार को प्रयागराज से रात 10:20 बजे रवाना होगी। यह बीना रात 11:35 बजे, रानी कमलापति अगले दिन रात 2 बजे और इटारसी सुबह 3:35 बजे पहुंचेगी। हडपसर में शाम 7:30 बजे पहुंचेगी। वापसी शेड्यूल – वापसी में गाड़ी संख्या 04108 हडपसर-प्रयागराज स्पेशल 22 अक्टूबर से 19 नवंबर तक प्रत्येक गुरुवार को रात 10:40 बजे चलेगी। यह इटारसी दोपहर 12:20, रानी कमलापति 2:15 और बीना शाम 4:45 बजे पहुंचेगी। ट्रेन में 21 कोच होंगे, जिनमें 12 स्लीपर, छह सामान्य, एक थर्ड एसी और दो एसएलआरडी कोच शामिल हैं।  

मध्यप्रदेश में 27% OBC आरक्षण की उम्मीद बरकरार, हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार तलाश रही नए विकल्प

भोपाल  हाईकोर्ट से रद्द हो चुके 27 फीसद ओबीसी आरक्षण पर सरकार चुप नहीं बैठेगी। कई स्तर पर कानूनी सलाह ली जा रही है। सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना सबसे ज्यादा है। हालांकि अभी यह अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है। कई स्तर पर कानूनी सलाह ली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुला सकती है, जिसमें सभी बिंदुओं पर चर्चा की जानी है। नए सिरे से उन राज्यों का अध्ययन भी कराया जा सकता है, जहां पूर्व से ओबीसी वर्ग को 27 फीसद या उससे अधिक आरक्षण की पात्रता है। बता दें कि विपक्ष और ओबीसी महासभा पहले ही सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान कर चुके हैं। आगले कदम क्या होने चाहिए, इस पर मंथन कानूनी मामलों के जानकारों के मुताबिक सरकार दो तरीके से आगे बढ़ सकती है। पहला, फिर से सुप्रीम कोर्ट जाए। दूसरा, जातिगत जनगणना के नतीजों का इंतजार। एक कैबिनेट मंत्री का कहना है कि मप्र में ओबीसी आरक्षण बड़ा मुद्दा रहा है, आने वाले समय भी रहेगा। ऐसे में संवैधानिक कदम उठाए जाएंगे, इस दिशा में निश्चित ही विचार-विमर्श चल रहा है। जानकारों का कहना है कि कई राज्यों में आरक्षण की सीमा 50% से अधिक है लेकिन वहां की सरकारों ने इसके लिए विशेष स्थिति वाले तर्क दिए थे। मप्र में ऐसा नहीं हो पाया, इसके लिए कई पक्ष जिम्मेदार हैं। राजनीतिक समीकरण भी सक्रिय राजनीतिक समीकरण के आधार पर भी यह बड़ा विषय है, चूंकि मप्र में ओबीसी एक बड़ा वर्ग है और अन्य राज्यों की तुलना में आरक्षण मामलों में पिछड़े है। आने वाले चुनावों में विपक्ष द्वारा ओबीसी आरक्षण को मुद्दा बनाया जाना तय है तो ओबीसी वर्ग के संगठनों में भी अंदरूनी स्तर पर कई दौर की चर्चा जारी है। बता दें तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने 2019 में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के कानून के लिए अध्यादेश लाया था, जो विवादों में पड़ा। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट में कई दौर की सुनवाई हुई और अंततः हाल में हाईकोर्ट ने कानून को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी मांग जानकारी के लिए बता दें कि, 9 अक्टूबर को जबलपुर हाईकोर्ट ने 27 फीसदी आरक्षण करने की मांग को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने 13% होल्ड पदों पर तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही जो नियुक्तियां 27 फीसदी के हिसाब से पिछले कुछ वर्षों में हो चुकी है, उन्हें बरकरार रखने और आगे होने वाली भर्ती प्रक्रिया में से निम्न पदों की संख्या को एडस्ट करने का भी आदेश दिया था। 15 महीने वाली कांग्रेस सरकार ने कर दिया था लागू कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश में ओबीसी का आरक्षण बढ़ाकर 27 फीसदी करने की घोषणा कर लागू भी कर दिया था। इसके बाद यह मामला कोर्ट में चले गया था। कोर्ट ने कहा है कि ओबीसी वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में 2019 में 14 से 27 फीसदी आरक्षण कर दिया था। बाद में यह न्यायिक प्रक्रिया में आ गया।

उज्जैन में 200 आयुर्वेद छात्र 7 दिन से आंदोलन पर, अस्पताल का गेट बंद होने से डॉक्टर-मरीज परेशान

उज्जैन उज्जैन के आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे करीब 200 आयुर्वेद छात्र-छात्राओं ने सोमवार को कॉलेज और अस्पताल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी। बीते सात दिनों से धरना दे रहे विद्यार्थियों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई। तालाबंदी के कारण सुबह अस्पताल पहुंचने वाले डॉक्टरों, अन्य स्टाफ और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ₹9,383 से बढ़ाकर ₹21,500 करने की मांग प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की मांग है कि बीएएमएस इंटर्न को मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाकर 21,500 रुपये प्रतिमाह किया जाए। विद्यार्थियों के मुताबिक, वर्तमान में मध्यप्रदेश में बीएएमएस इंटर्न को महज 9,383 रुपये मानदेय दिया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में इंटर्न को इससे अधिक स्टाइपेंड मिलता है। एमबीबीएस इंटर्न के बराबर मानदेय की मांग विद्यार्थियों का कहना है कि बीएएमएस और एमबीबीएस इंटर्न समान तरह की ड्यूटी करते हैं, लेकिन स्टाइपेंड में बड़ा अंतर है। उनका तर्क है कि समान कार्य के लिए समान मानदेय मिलना चाहिए। विद्यार्थियों ने सरकार से मांग की है कि बढ़ा हुआ स्टाइपेंड तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांग पूरी करने संबंधी लिखित आदेश चाहिए। सद्बुद्धि यज्ञ और रक्तदान कर चुके हैं छात्र स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं पिछले सात दिनों से धरना दे रहे हैं। इस दौरान वे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ सद्बुद्धि यज्ञ और रक्तदान जैसे कार्यक्रम भी कर चुके हैं। इसके बावजूद मांग पर निर्णय नहीं होने से नाराज विद्यार्थियों ने सोमवार को कॉलेज और अस्पताल के गेट पर तालाबंदी कर दी। तालाबंदी के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को परेशानी हुई। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रमुख मांग बीएएमएस इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाकर एमबीबीएस इंटर्न के बराबर करना है।

इंदौर में सरकारी योजनाओं के निर्माण कार्यों पर सवाल, सीसी रोड से लेकर संबल योजना तक 45 केस दर्ज

 इंदौर  सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतें किस तरह अलग-अलग स्तरों पर सामने आ रही हैं, इसकी तस्वीर दो आंकड़ों से मिलती है। एक ओर 4 सितंबर 2024 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच सरकारी योजनाओं से जुड़े 45 प्रकरण दर्ज किए गए। दूसरी ओर लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों में 44 अपराध पंजीबद्ध होने की जानकारी है। लोकायुक्त के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा रिश्वत लेते पकड़े जाने यानी ट्रैप कार्रवाई का है। दर्ज 44 अपराधों में 40 ट्रैप के, एक पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति से जुड़े छापों के मामले हैं। एसपी (लोकायुक्त) डा. राजेश सहाय के मुताबिक सरकारी योजनाओं से संबंधित 45 प्रकरणों की सूची में पंच परमेश्वर योजना सबसे ऊपर है। इसके तहत 18 मामले दर्ज हैं। प्रधानमंत्री कुटीर निर्माण योजना के पांच और प्रधानमंत्री सीसी रोड निर्माण से जुड़े चार प्रकरण सूची में हैं। मनरेगा की पशुपालन योजना के तीन मामले दर्ज किए गए, जबकि मनरेगा समग्र शिक्षा अभियान के तहत बाउंड्रीवॉल निर्माण और शौचालय रिपेयरिंग से जुड़े मामलों की संख्या क्रमश: एक और दो है। प्रधानमंत्री सोलर पैनल सब्सिडी योजना से जुड़े दो प्रकरण भी सूची में शामिल हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री सड़क निर्माण, संबल योजना, राज्य मार्ग सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास के तहत सीसी रोड निर्माण, बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं। पंच परमेश्वर योजना में 18 प्रकरण होना जांच का अहम बिंदु है। लोकायुक्त इंदौर के वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार कुल 44 अपराध पंजीबद्ध किए गए। इनमें 40 ट्रैप प्रकरण हैं। यानी दर्ज मामलों में लगभग 91 प्रतिशत ट्रैप कार्रवाई से संबंधित हैं। एक मामला पद के दुरुपयोग और तीन आय से अधिक संपत्ति के मामलों में छापे से जुड़े हैं। ट्रैप मामलों की बड़ी संख्या बताती है कि लोकायुक्त की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले मामलों का हिस्सा प्रमुख है। वहीं, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति से जुड़े मामलों की संख्या कम है। हालांकि, ये आंकड़े केवल दर्ज प्रकरणों का वर्गीकरण बताते हैं, इनसे भ्रष्टाचार के सभी मामलों की वास्तविक संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। 27 मामलों में चालान, छह में सजा लोकायुक्त के आंकड़ों में 27 मामलों में चालान पेश किए जाने और छह मामलों में सजा होने की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई की प्रगति का अहम संकेतक है। दोनों सूचियां भ्रष्टाचार के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं। सरकारी योजनाओं के मामलों में सड़क निर्माण, आवास, ग्रामीण विकास और अन्य योजनाओं से जुड़े प्रकरण हैं, जबकि लोकायुक्त के वार्षिक आंकड़ों में ट्रैप कार्रवाई का दबदबा दिखाई देता है।

लाड़ली बहना योजना पर शिवराज सिंह चौहान की दोटूक, सरकारें बदलें लेकिन महिलाओं को मिलने वाली मदद जारी रहे

भोजपुर  मध्य प्रदेश में शुरू हुई लाड़ली बहना योजना के बाद अब देश की हर सरकार को महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की योजनाएं बनानी पड़ रही हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-4 के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह योजना वर्तमान में मुख्यमंत्री ने जारी रखी है और भविष्य में भी हर सरकार को इसे जारी रखना पड़ेगा, क्योंकि यदि बहनें नाराज हो गईं तो किसी की खैर नहीं है। मध्य प्रदेश की इस पहल के बाद देश के विभिन्न राज्यों में लाड़की बहना और मैया सम्मान योजना जैसे अलग-अलग नामों से महिलाओं को वित्तीय सहायता दी जा रही है। बहनों को उठानी पड़ती थी परेशानी केंद्रीय मंत्री चौहान ने बचपन के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने महिलाओं को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते देखा है। एक-दो हजार रुपये के लिए भी गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की बहनों को परेशानी उठानी पड़ती थी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाड़ली बहना योजना की नींव रखी थी, ताकि महिलाओं के हाथ में आर्थिक ताकत आ सके। पैसे मिलने के बाद महिलाओं की सामाजिक और पारिवारिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब घर में उनका सम्मान बढ़ा है और परिवार के सदस्य भी उनकी राय को महत्व देने लगे हैं। चौहान ने कहा, महिलाओं के राजनीतिक दृष्टिकोण में भी बड़ा परिवर्तन आया है। पहले माना जाता था कि परिवार का मुखिया जिस दल को समर्थन देगा, घर की महिलाएं भी उसी दिशा में मतदान करेंगी। अब स्थिति बदल चुकी है और महिलाएं अपनी निर्णय क्षमता को पहचानकर खुद तय करती हैं कि किसे वोट देना है। उन्होंने एक घटना का उदाहरण भी दिया, जिसमें लाड़ली बहना योजना का लाभ लेने वाली महिला पर एक राजनीतिक दल को वोट देने का दबाव बनाया गया था और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई थी। उस मामले में उन्होंने स्वयं प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।  महिलाओं ने की 3,000 रुपये देने की मांग कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं से पूछा कि लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि कितनी होनी चाहिए। इस पर कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने 3,000 रुपये करने की मांग की। इस पर शिवराज ने कहा कि योजना की राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3,000 रुपये की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने इस योजना को जारी रखा है और आने वाले समय में सरकारों को महिलाओं के हित में ऐसी योजनाएं चलानी होंगी। हालांकि, योजना की राशि कब बढ़ेगी और बढ़ोतरी किस चरण में होगी, इस बारे में उन्होंने कोई समयसीमा नहीं बताई। महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई योजना शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने बचपन से गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करते देखा है। कई महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। कभी 1,000 या 2,000 रुपये के लिए उन्हें पति या परिवार के दूसरे सदस्यों से पैसे मांगने पड़ते थे। कई महिलाओं के पास अपने मायके जाने तक के लिए पैसे नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं की इसी स्थिति को बदलने के लिए लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं के हाथ में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाना था, ताकि वे अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें और आर्थिक फैसले लेने में आत्मनिर्भर बनें। आर्थिक सहायता मिलने से परिवार में बढ़ा महिलाओं का सम्मान शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि योजना शुरू होने के बाद उन्होंने महिलाओं से पूछा था कि आर्थिक सहायता मिलने से उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आया है। उनके मुताबिक, कई महिलाओं ने बताया कि अब परिवार में उनका सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सास उनसे पहले के मुकाबले अधिक स्नेह से बात करने लगीं और पति भी उनकी राय तथा जरूरतों को ज्यादा महत्व देने लगे। शिवराज के अनुसार, यह योजना केवल पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की ताकत देने का भी प्रयास है। दूसरे राज्यों में भी शुरू हुईं महिलाओं के लिए योजनाएं केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना शुरू होने के बाद दूसरे राज्यों में भी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की मांग बढ़ी। इसके बाद अलग-अलग राज्यों में महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ राज्यों में लाड़ली बहना, कहीं लड़की बहना और कहीं मंईयां सम्मान योजना जैसे नामों से महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। शिवराज ने कहा कि महिलाओं ने अपनी ताकत पहचान ली है। अब वे अपने अधिकारों और जरूरतों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हैं। महिलाएं खुद तय करती हैं कि किसे वोट देना है शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले यह माना जाता था कि परिवार का मुखिया या गांव का प्रभावशाली व्यक्ति जिस राजनीतिक दल का समर्थन करेगा, परिवार के दूसरे सदस्य भी उसी दल को वोट देंगे। महिलाओं के मतदान को लेकर भी ऐसी ही धारणा थी। उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है और महिलाएं अपने फैसले खुद लेने लगी हैं। वे अपनी पसंद के उम्मीदवार और राजनीतिक दल को वोट देने का निर्णय स्वयं करती हैं। इस दौरान उन्होंने एक महिला से जुड़ी घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि लाड़ली बहना योजना के बाद उस पर कांग्रेस को वोट देने का दबाव बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। शिवराज के मुताबिक, महिला के उनके पास पहुंचने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। लाड़ली बहना के साथ लखपति दीदी अभियान पर भी जोर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महिलाओं को केवल सरकारी आर्थिक सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनका लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आमदनी बढ़ाना होना चाहिए। इसके लिए लखपति दीदी अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सालाना आमदनी कम से कम एक लाख रुपये होनी चाहिए। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण, बैंक से सहायता और कम ब्याज पर … Read more

MP News: कान्हा के सूपखार में जंगली भैंसों की वापसी, काजीरंगा से लाए गए 8 भैंस; 3 साल में 50 बसाने का लक्ष्य

सूपखार  मध्यप्रदेश में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया। कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया। तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य श्रीमती मौसम बिसेन, पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनुपमा नेताम, मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगतसिंह नेताम,श्री रविंद्र मणि त्रिपाठी, प्रमुख सचिव वन श्री राघवेन्द्र सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) डॉ. समिता राजोरा, बालाघाट के पुलिस उप महानिरीक्षक श्री विनीत जैन, कलेक्टर श्री कुमार सत्यम, पुलिस अधीक्षक श्री आदित्य मिश्रा, कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक श्री प्रकाश वर्मा, उप संचालक (कोर) सुश्री अमिथा के.बी., उप संचालक (बफर), समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी तथा स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा।  

MP News: किसानों की तरक्की सरकार की प्राथमिकता, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोहराया संकल्प

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के सर्वांगीण विकास के लिये प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि उपज मंडी समिति प्रांगण, देवास में आयोजित 'बलराम कृषि महोत्सव' एवं जिला स्तरीय किसान मेले का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों एवं अन्नदाताओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां चामुंडा और मां तुलजा भवानी की पावन धरा पर कृषि विभाग द्वारा किसानों के हित में आयोजित यह महाअभियान अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि माताजी की कृपा और शासन के कड़े निर्णयों से प्रदेश को नक्सलवाद से मुक्ति मिली है। देवास के किसानों की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिले के अन्नदाता उन्नत तकनीकों और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कई उत्कृष्ट नवाचार कर रहे हैं, जिससे देवास पूरे प्रदेश में कृषि क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपेक्स बैंक प्रशासक श्री महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए देवास प्रदेश का 45वां जिला है, जहां बलराम कृषि महोत्सव का भव्य आयोजन हो रहा है। विधायक श्रीमती गायत्री राजे पवार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों और देवास मंडी व्यवस्था को अभूतपूर्व संबल प्रदान किया है। किसान मेले का मुख्य उद्देश्य कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, प्राकृतिक व जैविक खेती तथा श्रीअन्न (मिलेट मिशन) को बढ़ावा देना रहा। मेले में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा रबी सीजन के दृष्टिगत कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों जैसे गेहूं, चना, मसूर एवं सरसों की प्रमाणित किस्मों पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। मंडी प्रांगण में आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों एवं कृषि नवाचारों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई। समारोह के दौरान देवास जिले के प्रगतिशील किसानों ने अपने नवाचारों के अनुभव भी साझा किए। इसमें देवास विकासखण्ड के ग्राम छोटी चुरलाय निवासी कृषक श्री धर्मेन्द्र सिंह राजपूत ने प्राकृतिक और आधुनिक खेती के समन्वय से मॉडल फार्मिंग और आय वृद्धि के बारे में बताया, ग्राम कनोरिया की श्रीमती पवित्रा नागर ने प्राकृतिक खेती के तरीकों और उसके परिणामों पर चर्चा की, सोनकच्छ के ग्राम अरनिया कला निवासी श्री नारायण सिंह सेंधव ने शेडनेट व पॉलीहाउस के जरिए उद्यानिकी फसलों के प्रबंधन की जानकारी दी, ग्राम पोलाय जागीर के श्री लक्ष्मीनारायण ने किसान उत्पादक संगठन के जरिए उत्पादों की मार्केटिंग व्यवस्था पर प्रकाश डाला तथा टोंकखुर्द के ग्राम चौबारधीरा की श्रीमती संगीता कुशवाह ने प्राकृतिक खेती के सफल क्रियान्वयन के व्यावहारिक अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले कृषकों में आधुनिक खेती के लिए देवास के श्री धर्मेन्द्र सिंह राजपूत, उन्नत पशुपालन के लिए श्री दौलत यादव, प्राकृतिक खेती के लिए श्रीमती पवित्रा नागर तथा फसल विविधीकरण के लिए ग्राम मेंडकी धाकड़ के श्री जगदीश नागर शामिल हैं। इसी क्रम में उद्यानिकी फसल (शेडनेट एवं पॉलीहाउस) हेतु सोनकच्छ के श्री नारायण सिंह सेंधव, एफपीओ मार्केटिंग के लिए श्री लक्ष्मीनारायण, प्राकृतिक खेती के लिए टोंकखुर्द की श्रीमती संगीता कुशवाह, खातेगांव की श्रीमती चिंताबाई कुमरे एवं बागली के श्री बांकेसिंह कर्मा को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कन्नौद विकासखण्ड के ग्राम खेरखेड़ा से प्राकृतिक खेती के सफल क्रियान्वयन एवं प्रसार के लिए श्रीमती ज्योति राव तथा श्री रामभरोसे बैरागी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लीला भेरूलाल अटारिया, महापौर श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल, डॉ. रायसिंह सेंधव, पूर्व देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री राजेश यादव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं किसान उपस्थित रहे।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने की एमपी ट्रांसको की सराहना, 23 साल पुराने ट्रांसफार्मर को मिला नया जीवन

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने आगामी रबी सीजन में बढ़ने वाली विद्युत मांग के मद्देनजर सागर जिले के 132/33 केवी सब स्टेशन राहतगढ़ में अतिरिक्त 40 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया है। साथ ही सब स्टेशन की कुल स्थापित क्षमता 40 एमवीए से बढ़कर 80 एमवीए हो गई है। पहले एक, अब दो ट्रांसफार्मर उपलब्ध ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि राहतगढ़ सब स्टेशन में पहले 40 एमवीए क्षमता का एक ही पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित था। अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से अब यहां दो पॉवर ट्रांसफार्मर उपलब्ध हैं। इससे सब स्टेशन की कुल क्षमता दोगुनी होने के साथ विद्युत पारेषण व्यवस्था को अतिरिक्त क्षमता और संचालन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था मिली है। किसी एक ट्रांसफार्मर के रखरखाव या तकनीकी समस्या की स्थिति में दूसरे ट्रांसफार्मर की उपलब्धता से विद्युत आपूर्ति व्यवस्था के प्रबंधन में सुविधा होगी। यह व्यवस्था आगामी रबी सीजन में बढ़ने वाली विद्युत मांग को पूरा करने में भी सहायक होगी। ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने करीब 23 वर्ष पुराने पॉवर ट्रांसफार्मर की इन-हाउस रिकंडीशनिंग कर उसे पुनर्स्थापित करने के एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं तकनीकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि पुराने ट्रांसफार्मर की तकनीकी जांच, आवश्यक सुधार एवं रिकंडीशनिंग कर उसे पुनः उपयोग में लाना कंपनी के अभियंताओं के तकनीकी कौशल और अनुभव को दर्शाता है। 23 वर्ष पुराने ट्रांसफार्मर की इन-हाउस रिकंडीशनिंग एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता टेस्टिंग श्री एम वाय मंसूरी के अनुसार राहतगढ़ में स्थापित किया गया 40 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर लगभग 23 वर्ष पुराना है। इससे पहले यह ट्रांसफार्मर मनसकरा, जबलपुर और अमरपाटन, मैहर में अपनी उपयोगी सेवाएं दे चुका है। एमपी ट्रांसको ने इस ट्रांसफार्मर की रिकंडीशनिंग अपने स्तर पर कराई। इस प्रक्रिया में ट्रांसफार्मर की गास्केट बदलने, विभिन्न स्थानों से होने वाले तेल के रिसाव को दूर करने तथा निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार ट्रांसफार्मर का वैक्यूम करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए गए। ट्रांसफार्मर का इंसुलेटिंग ऑयल बदलने के साथ तेल एवं इंसुलेशन से संबंधित आवश्यक तकनीकी मानकों की जांच भी की गई।  

3 लाख लोगों को लगाना होगा 5 किमी का चक्कर

भोपाल शहर में एक के बाद एक रास्ते बंद होने से पुराने भोपाल के कई इलाकों के रहवासियों की परेशानी बढ़ गई है। बरखेड़ी रेलवे फाटक बंद होने के बाद वाहन चालकों के लिए बाग उमराव दूल्हा अंडरब्रिज ही प्रमुख वैकल्पिक रास्ता था, लेकिन अब रेलवे ने इस रास्ते पर भी आवाजाही बंद कर दी है। इससे बाग उमरावदूल्हा, सोनिया कॉलोनी, महामाई का बाग, पुष्पा नगर, बरखेड़ी, ऐशबाग और जहांगीराबाद सहित आसपास के इलाकों के लोगों को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। कई वाहन चालकों का सफर करीब पांच किलोमीटर तक बढ़ गया है। परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि बोगदा पुल से बरखेड़ी फाटक की ओर जाने वाली सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा मेट्रो निर्माण के चलते पहले से बंद है। वहीं, 90 डिग्री का ब्रिज बनकर तैयार होने के बावजूद उस पर यातायात शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में लोगों के पास वैकल्पिक रास्तों के सीमित विकल्प बचे हैं। बैरल लंबाई और सुधार के लिए 6 दिसंबर तक बंद रहेगा रास्ता रेलवे ने पुल नंबर 835/1 की बैरल लंबाई बढ़ाने और संरचनात्मक सुधार के लिए आठ अक्टूबर से छह दिसंबर तक 63 दिन का ट्रैफिक ब्लाक लिया है। सुरक्षा के मद्देनजर अंडरब्रिज पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। अब वाहन चालकों को सुभाष नगर अंडरब्रिज और ओवरब्रिज से होकर निकलना पड़ रहा है। इसका असर रोजाना काम पर जाने वालों से लेकर विद्यार्थियों और मरीजों को अस्पताल ले जाने वाले परिजनों तक पर पड़ रहा है। सुभाष नगर अंडरब्रिज और ओवरब्रिज ही अब एकमात्र विकल्प अंडरब्रिज बंद होने के बाद आसपास के वाहन चालकों को सुभाष नगर अंडरब्रिज और ओवरब्रिज की ओर भेजा जा रहा है। यातायात पुलिस ने भी लोगों से निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की है। खासकर अंडरब्रिज के आसपास के दोपहिया और तीन पहिया वाहन चालकों को भी सुभाष अंडरब्रिज का उपयोग करना होगा।  

भोजपुर में 31 सड़कों का भूमिपूजन- हर गांव को सड़क से जोड़ना हमारा लक्ष्य- शिवराज सिंह चौहान

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र भोजपुर और मंडीदीप के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने भोजपुर के विनेका में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण का शुभारंभ किया। साथ ही रायसेन जिले में 84 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 31 सड़कों का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए सरकार की योजनाओं और कार्ययोजना पर विस्तार से संवाद किया। दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण भी किया। इसके अलावा सेवा संकल्प अभियान के तहत विद्यार्थियों को आवश्यक सामग्री वितरित की और अलग-अलग शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। नवरात्रि के पावन अवसर पर शिवराज सिंह चौहान रायसेन स्थित कंकाली मंदिर भी पहुंचे। यहां उन्होंने मां कंकाली के दर्शन-पूजन कर देशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। हर गांव को सड़क से जोड़ना हमारा लक्ष्य केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, हमारा प्रयास है कि हर गांव सड़क से जुड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। भोजपुर में आज 31 सड़कों का भूमिपूजन किया गया है, जो आसपास के छोटे-छोटे मजरा-टोलों को जोड़ने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि अभी 30 सड़कें और शेष हैं। उनके लिए भी प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, सड़क निर्माण के लिए आबादी सहित निर्धारित मापदंडों का ध्यान रखना पड़ता है, लेकिन हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक गांवों और बस्तियों तक सड़क सुविधा पहुंचे। रायसेन जिले को गरीबी मुक्त गांव का पहला मॉडल बनाएंगे केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प गांवों को गरीबी से मुक्त बनाना है। गरीबी मुक्त गांव का अर्थ केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि हर परिवार को स्थायी आजीविका से जोड़ना है। हर परिवार के पास कोई न कोई काम-धंधा और कमाई का साधन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार की टीम को भेजा गया है और इसी महीने रायसेन में बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत सरकार और प्रदेश सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बैठक में हर गांव की मैपिंग की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि किन परिवारों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं है और उन्हें किस प्रकार रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है। खेती से संबंधित प्रोसेसिंग, पशुपालन, मछली पालन, बकरी पालन, गाय पालन, मधुमक्खी पालन और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में आजीविका के मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रायसेन जिले में गरीबी मुक्त गांव का देश का पहला मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। गरीबी किसी के माथे पर कलंक बनकर नहीं रहनी चाहिए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गरीबी और मजबूरी में जीवन बिताना बहुत कठिन होता है। हमारा प्रयास है कि किसी भी परिवार को मजबूरी में जीवन न जीना पड़े। गरीबी किसी के माथे पर कलंक बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान को गति देने के लिए विधायक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार और भारत सरकार की टीमें मिलकर काम करेंगी। हमारा लक्ष्य है कि हर परिवार को आजीविका का साधन मिले और उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो। किसानों को उन्नत खेती का प्रशिक्षण दिलाएगी सरकार केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को बेहतर बनाने के लिए उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों के एक समूह को हाल ही में भुवनेश्वर भेजा गया है। किसानों के आने-जाने, रहने, खाने और प्रशिक्षण की व्यवस्था सरकार की ओर से की जा रही है। किसानों को दिल्ली, भुवनेश्वर, पंजाब और देश के अन्य उन क्षेत्रों में ले जाया जाएगा, जहां खेती के बेहतर तरीके अपनाए जा रहे हैं। वहां कृषि वैज्ञानिक किसानों को नई तकनीकों, आधुनिक पद्धतियों और खेती के नए प्रयोगों की जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को उन्नत खेती के तरीके सीखने होंगे। सरकार प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों की मदद करेगी, ताकि खेती की लागत, उत्पादन और आमदनी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सके। फल, फूल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल सोयाबीन और धान की खेती से किसानों की सभी जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। अब खेती में विविधता लाने की आवश्यकता है। किसानों को फल, फूल, सब्जियों और औषधीय पौधों की खेती की ओर भी बढ़ना होगा।