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रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत, इंदौर हाईकोर्ट ने 50 दिन की सीमा हटाई; 300 दिन के अर्जित अवकाश का दावा मजबूत

इंदौर   मध्यप्रदेश में टीचर्स के लिए अर्जित अवकाश पर इंदौर हाईकोर्ट नया फैसला आया है। हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सहायक शिक्षकों को 300 दिन की अर्जित अवकाश (लीव एनकैशमेंट) का लाभ न देने के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार के सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट देने संबंधी आदेशों को रद्द कर नए सिरे से विचार के लिए अफसरों को भेज दिया। इसी के साथ रिटायर्ड टीचर्स के लिए 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता खुल गया है। जस्टिस दीपक खोट की एकलपीठ ने 11 याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया। खास बात यह है कि वित्त विभाग ने भी हाल ही में प्रदेश में कर्मचारी के लिए अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं। अभिभाषक अभिनव धानोतकर ने बताया, इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा है, अफसरों ने वित्त विभाग के 1991 और 2008 के परिपत्रों के आधार पर शिक्षकों को सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट का लाभ दिया, जबकि 28 जुलाई 2018 को मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम, में संशोधन व 8 मार्च 2019 के प्रपत्र पर विचार नहीं किया। कोर्ट की टिप्पणी… कोर्ट ने टिप्पणी की, विवादित आदेशों में यह भी नहीं बताया गया कि वर्ष वार अवकाश की गणना कैसे की गई और 50 दिन कैसे तय किए। इसलिए आदेश विधिसम्मत नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा, सिविल सेवा के नियमानुसार कर्मचारियों के अवकाश का पूरा रिकॉर्ड संधारित करना विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अवकाश की गणना ही वर्ष वार उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कर्मचारी के अधिकारों का सही निर्धारण नहीं किया जा सकता। संशोधन व 8 मार्च 2019 के नवीनतम परिपत्र पर विचार नहीं किया। कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान बता दें कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान है। इसको लेकर वित्त विभाग ने हाल ही में सभी विभागों को निर्देश जारी कर कर्मचारी के पूरे सेवाकाल में अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने को कहा है। अधिक अवकाश होने पर उसका कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति प्रदेश के विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति बनी है। वित्त विभाग के नए निर्देश से इसकी समाप्ति के साथ ही बड़ी स्पष्टता भी मिल गई है। वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी प्रक्रिया सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, असमर्थता पेंशन अथवा सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अवकाश नकदीकरण की गणना की प्रक्रिया भी वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी है।

Bhopal Eastern Bypass: ₹3900 करोड़ से बनेगी 10-लेन सड़क, राजधानी की कनेक्टिविटी होगी और बेहतर

भोपाल   मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।  राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है। शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा। वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा। एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके। वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी। रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा। पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है। रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

ESIC अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पहल, राज्यमंत्री गौर ने केंद्रीय मंत्री से किया आग्रह

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग की केंद्रीय मंत्री मांडविया को राज्यमंत्री गौर ने लिखा पत्र भोपाल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, सोनागिरी के उन्नयन के संबंध में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उल्लेख किया है कि यह अस्पताल भोपाल, मंडीदीप, सतलापुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों तथा उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। वर्तमान में लगभग 6.5 लाख बीमित कामगार इस अस्पताल से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में यह अस्पताल राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं द्वारा संचालित था, लेकिन दिनांक 22 जून 2023 को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसका संचालन अपने हाथ में ले लिया और आज भी भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के नियंत्रण में है। इसलिए बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए इसका 300 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेष चिकित्सकों एवं मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता और सेकेंडरी व सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है।  

औद्योगिक विकास को नई दिशा, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 10वें अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश समित के पूर्व रवींद्र भवन में ही दो पवेलियन में विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के एमएसएमई एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उद्यमिता, नवाचार तथा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनेक उत्पादों की जानकारी ली और स्टार्टअप एवं सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यमियों से चर्चा कर उनका उत्साह वर्धन किया प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टाल लगाये गए थे ।ड्रोन निर्माण समाधान, आईओटी-आधारित फिजियोथेरेपी उपकरण, सोलर वाटर हीटर एवं डीट पंप, रेलवे तथा रक्षा इंजीनियरिंग उत्पाद, पेटेंटयुक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स एवं ईवी चार्जिंग समाधान, कृषि-अवशेष पैलेट्स तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उत्पादों सहित विविध नवाचारी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'बाजार से' नामक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो ग्राहकों एवं व्यवसायों को जोड़ता है तथा इसे देश के पहले एआई-संचालित बाज़ार के रूप में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांसकारी स्टॉल पर बांस से बनी अनेक वस्तुओं की जानकारी ली। एमएसएमई विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के सात जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक समर्पित पवेलियन (एमपी पवेलियन) भी स्थापित किया गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीतियों एवं योजनाओं संबंधी एमएसएमई की जिज्ञासाओं के निवारण संबंधी एक हेल्पडेस्क तथा उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेसिलिटेशन डेस्क की भी स्थापना की गई। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) सहित विभिन्न संस्थानों ने भी राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के विकास के लिये इस प्रदर्शनी में सहभागिता की। 

क्लीन ट्रांसपोर्ट को मिलेगी नई रफ्तार, इंदौर में EV-ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव; निवेशकों ने दिखाई रुचि

इंदौर  इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों। ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई। कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए। सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया। एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।  

दोबारा घर बसाने का सपना पड़ा महंगा, सागर में शादी के 3 दिन बाद दुल्हन नकदी-जेवर लेकर गायब

सागर/ जैसीनगर  जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया। महिला को विधवा बताकर की ठगी पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था। सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली। तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की। बिचौलिए से की जा रही पूछताछ पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।  

MP में डीपफेक से सनसनी! उज्जैन की MBBS छात्रा और भोपाल की मां-बेटी के वीडियो वायरल, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

उज्जैन / भोपाल मध्यप्रदेश के उज्जैन में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का फेक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार छात्रा और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा तरक्की से जलन रखने वाले रिश्तेदारों ने ही उसे बदनाम करने की साजिश रची थी. आरोपियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान जमा कराई गई छात्रा की तस्वीर हासिल की और तकनीकी माध्यमों से उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।  पिता की शिकायत के बाद सामने आया मामला जानकारी के अनुसार मक्सी रोड क्षेत्र के एक किसान ने 20 जून की रात पंवासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो आया, जिसमें उनकी नाबालिग बेटी के नाम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो दिनों तक गोपनीय रूप से जांच की और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया।  BLO से हासिल की गई छात्रा की तस्वीर जांच में सामने आया कि छात्रा की तस्वीर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जमा दस्तावेजों से हासिल की गई थी. पुलिस के अनुसार बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने एसआईआर फॉर्म में लगी छात्रा की फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी. बाद में यह तस्वीर अन्य आरोपियों तक पहुंची. इसी तस्वीर का उपयोग कर AI और डीपफेक जैसी डिजिटल एडिटिंग के जरिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।  MBBS की पढ़ाई और परिवार की तरक्की बनी वजह पंवासा थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता अपने गांव और समाज की पहली लड़की है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है. पुलिस का दावा है कि छात्रा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से कुछ रिश्तेदार नाराज थे. परिवार की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखते हुए आरोपियों ने उसे बदनाम करने की साजिश रची. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का उद्देश्य कथित तौर पर परिवार पर सामाजिक दबाव बनाना था ताकि छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सके।  उज्जैन: MBBS कर रही छात्रा बनी रिश्तेदार की साजिश का शिकार उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक MBBS छात्रा के फोटो को अश्लील वीडियो से जोड़कर सोशल मीडिया और गांव के वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह साजिश छात्रा के ही रिश्तेदार ने रची थी। उसका मकसद छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छात्रा का फोटो सरकारी रिकॉर्ड से एक महिला BLO ने आरोपियों को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद फोटो को एडिट कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और गांव के ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। महिला BLO को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है। सरकारी रिकॉर्ड से मिला फोटो पुलिस के मुताबिक, छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी फोटो जुटाना आसान नहीं था। आरोपी को पता चला कि छात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान BLO को अपना फोटो दिया था। वहीं से फोटो हासिल कर उसे डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश को घटना की वजह माना जा रहा है। भोपाल: शादी से इनकार पर मां-बहन को बनाया निशाना भोपाल के करोंद इलाके में एक युवक को अपनी प्रेमिका से शादी से इनकार करना भारी पड़ गया। आरोप है कि युवती ने बदला लेने के लिए युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की AI से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल कर दिए। पीड़ित परिवार का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी तनाव में है और पूरा परिवार बदनामी झेल रहा है। परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई पीड़ित परिवार ने पहले छोला थाना में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी युवती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि AI और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करने में सावधानी बरतने और संदिग्ध कंटेंट दिखने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दे रहे हैं। चार महीने पहले तैयार किया गया था फेक वीडियो पुलिस जांच में पता चला कि कथित फेक वीडियो करीब चार महीने पहले तैयार किया गया था. बताया जा रहा है कि छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी तस्वीर जुटाना आसान नहीं था. आरोपियों को जब पता चला कि छात्रा की फोटो सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध है, तो उसी का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किया गया. कुछ समय बाद यह वीडियो छात्रा के पिता तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली।  तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आबिद पटेल, एहसान पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार बताया जा रहा है।  मोबाइल जब्त, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी जांच एजेंसियों ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि वीडियो बनाने, एडिट करने और प्रसारित करने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाया जा सके. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और इसके प्रसार … Read more

नव्य, दिव्य और भव्य होगा सिंहस्थ 2028′, CM डॉ. मोहन यादव बोले- तैयारियां तेज़ी से जारी

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, हर दिन करीब 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान शिप्रा नदी पर हो रहा 853.46 करोड़ रूपए से 22 नए पुलों का निर्माण सिंहस्थ हमारी आस्था का महासंगम, उज्जैन और करीबी जिलों में चल रहे हैं 25 हजार करोड़ के विकास कार्य अधोसंरचना विकास कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन उज्जैन में सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प पर हुई वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से पापों का शमन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : 2028 एक नई मिसाल कायम करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य जनों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखने हम सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने पर उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य के काल का वैभव पुन: प्राप्त कर धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा के नवीन घाटों और मौजूदा घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। सभी श्रद्धालु मां शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें, इसके लिए हमारी सरकार हर तरह के प्रबंध कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। देशभर में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है। हमारी धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियां देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को लालायित कर रही हैं। उज्जैन काल और महाकाल की नगरी है। सौभाग्यशाली लोगों को ही उज्जैन आने का अवसर मिलता है। सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए उज्जैन में दूरगामी दृष्टि के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य जारी हैं। यहां किए जा रहे कार्य परमात्मा के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए हर बार पिछली चुनौतियों को लेकर मंथन हुआ है। यह कार्यशाला भी इसी उद्देश्य के लिए आयोजित की गई है। सिंहस्थ : 2028 के लिए समितियों का होगा गठन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं भी स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति की बैठकों में शामिल होने का अवसर भी मिला। सिंहस्थ समितियों में हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते हैं। आगामी सिंहस्थ के लिए सभी समितियों का गठन होना है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सिंहस्थ है। पहले के सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराने की चुनौती थी। लेकिन वर्ष 2022 के बाद उज्जैन शहर में होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य शुरू हुए। श्रद्धालुओं के सुविधाजनक आवागमन के लिए अब कोई सड़क ऐसी नहीं बच रही है, जिसे चौड़ा न किया गया हो। शिप्रा नदी पर घाटों का निर्माण कार्य जारी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना शिप्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने देवस्थानों पर सुविधाएं विकसित करने का काम कर रही है। शिप्रा में पक्के घाटों के निर्माण से मिट्टी का कटाव थमेगा, साथ ही नदी की धारा अविरल और एक जैसी बनी रहेगी। विकसित की जा रही है बेहतर रोड कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने-जाने के लिए आसपास के सभी शहरों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। पड़ोसी राज्यों से भी चर्चा कर श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। दूसरी ओर रेलवे लाइन के विकास कार्य भी आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब फतेहाबाद का ट्रैक चालू हो गया है और नागदा जाने के लिए रेलगाड़ियों को अब उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री ने उज्जैन में एक नए रेलवे स्टेशन की सौगात दी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के जरिए पिछले सिंहस्थ आयोजनों में उज्जैन में सेवाएं दे चुके सभी अनुभवी अधिकारियों और नागरिकों से जो भी सुझाव मिलेंगे, हम उन सुझावों पर बेहतर अमल कर सिंहस्थ : 2028 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में सिंहस्थ 2028 को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में देश विदेश से आने … Read more

उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं गुणवत्ता सत्र संपन्न उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में दी गई व्यावहारिक जानकारी भोपाल अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर शनिवार को रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा “उत्पाद गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक के लिए“सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश—हार्ट ऑफ इंडिया, हार्ट ऑफ ग्रोथ” की थीम पर हुए सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, प्रतिष्ठित निजी कंपनियों एवं संस्थागत खरीदारों से जोड़ने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई। सत्र में विशेष रूप से बीएचईएल, गेल, एनसीएल और पावरग्रिड सहित सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों एवं प्रतिष्ठित निजी कंपनियों से प्रदेश के एमएसएमई उद्यमियों ने सीधा संवाद किया। भारतीय मानक ब्यूरो के मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने दी मानकीकरण, प्रमाणन और शुल्क रियायतों की जानकारी दी।भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक की RAMP योजना के अंतर्गत वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर बीएचईएल, गेल इंडिया लिमिटेड, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, Resonia, JadeBlue, FabIndia और Olam Agri सहित सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने व्याखान एवं प्रेजेंटेशन दिया | कार्यक्रम में प्रदेश के पंजीकृत एमएसएमई उद्यमियों को इन संस्थाओं की खरीद प्रणाली, वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया, निविदाओं में भागीदारी, तकनीकी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं, समयबद्ध आपूर्ति तथा आपूर्ति शृंखला में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। बीएचईएल के विभाग अध्यक्ष पंकज कुमार झा एवं  प्रबंधक सुमीनाक्षी सिंह ने संस्थान की खरीद प्रक्रिया, वेंडर पंजीकरण व्यवस्था तथा एमएसएमई के लिए उपलब्ध खरीद अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश के सक्षम उद्यमों को निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप बीएचईएल की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। Resonia के सहायक उपाध्यक्ष दीपांकर बरगली ने कॉर्पोरेट वेंडर ऑनबोर्डिंग, खरीद प्रक्रिया और व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी साझा की। गेल इंडिया लिमिटेड के नवीन जमालमुडी ने वेंडर पंजीकरण, निविदा प्रक्रिया, तकनीकी योग्यता और आपूर्ति शृंखला की आवश्यकताओं से उद्यमियों को अवगत कराया। उन्होंने संस्थागत खरीद में भागीदारी के लिए उद्यम पंजीकरण, आवश्यक अभिलेखों, तकनीकी क्षमता और डिजिटल उपस्थिति के महत्व पर बल दिया। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के विपुल जैन ने एनसीएल के साथ व्यवसाय करने, वेंडर के रूप में पंजीकरण कराने और संस्थान की खरीद प्रक्रिया में भाग लेने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सुपल्लवी मिश्रा ने विद्युत पारेषण क्षेत्र में सामग्री आपूर्ति, सिविल कार्य, रखरखाव सेवाओं और अन्य श्रेणियों में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा क्रमशः JadeBlue के अमित खामर ने परिधान खुदरा क्षेत्र में उत्पाद गुणवत्ता, निरंतर आपूर्ति और समयबद्ध डिलीवरी से संबंधित अपेक्षाओं पर जानकारी दी। FabIndia की सुनलिनी गर्ग ने पारंपरिक शिल्प, हथकरघा वस्त्र, गृह-सज्जा और कारीगर आधारित उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए उपलब्ध वेंडर डेवलपमेंट अवसरों पर प्रकाश डाला। Olam Agri के निर्देश त्रिवेदी ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कमोडिटी एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी और लॉजिस्टिक्स से संबंधित खरीद अवसरों की जानकारी दी। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान यह रेखांकित किया गया कि बड़े सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी मूल्य, निर्धारित समय पर आपूर्ति, तकनीकी क्षमता और आवश्यक प्रमाणनों का अनुपालन महत्वपूर्ण है। प्रेजेंटेशन के बाद क्रेता–एमएसएमई संवाद और व्यावसायिक नेटवर्किंग बैठकें आयोजित की गईं। इनमें पंजीकृत उद्यमियों को संस्थागत खरीदारों के प्रतिनिधियों के समक्ष अपने उत्पाद, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा संबंधित संस्थाओं की वर्तमान एवं संभावित खरीद आवश्यकताओं पर सीधे चर्चा करने का अवसर मिला। मानक ब्यूरो का हुआ विशेष सत्र कार्यक्रम के समानांतर आयोजित भारतीय मानक ब्यूरो के विशेष सत्र का संचालन ब्यूरो के अधिकारी मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने किया। दोनों अधिकारियों ने एमएसएमई उद्यमियों को भारतीय मानकों, उत्पाद प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों, BIS लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया और उद्यमों के लिए उपलब्ध शुल्क रियायतों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानकीकरण और प्रमाणन को केवल वैधानिक अनुपालन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार में विश्वसनीयता, उपभोक्ताओं के विश्वास और बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुँच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र में बताया गया कि 22 जून 2026 की स्थिति में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 22 हजार 860 से अधिक भारतीय मानक विकसित किए गए हैं। कुल 1,477 उत्पाद BIS प्रमाणन के दायरे में हैं तथा मानव स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सहित विभिन्न कारणों से 600 से अधिक उत्पादों के लिए अनिवार्य प्रमाणन लागू है। देशभर में 53 हजार से अधिक BIS लाइसेंस संचालित हैं। उद्यमियों को लागू भारतीय मानक की पहचान करने, मानक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करने, कारखाना निरीक्षण, उत्पाद नमूना परीक्षण तथा लाइसेंस प्रदान किए जाने की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीआईएसअधिकारियों ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के संबंध में बताया कि इनका उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ाना, मानव, पशु एवं पादप स्वास्थ्य की रक्षा करना, पर्यावरण संरक्षण तथा अनुचित व्यापार व्यवहारों को रोकना है। उद्यमियों को यह भी बताया गया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के अंतर्गत चिन्हित उत्पादों का निर्माण, आयात अथवा विक्रय निर्धारित भारतीय मानकों और प्रमाणन आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक होता है। सत्र में एमएसएमई के लिए BIS द्वारा प्रदान की जा रही विशेष शुल्क रियायतों की जानकारी भी दी गई। सूक्ष्म उद्यमों एवं स्टार्टअप्स को वार्षिक न्यूनतम मार्किंग शुल्क में 80 प्रतिशत, लघु उद्यमों को 50 प्रतिशत तथा मध्यम उद्यमों को 20 प्रतिशत तक रियायत उपलब्ध है। महिला उद्यमियों को संबंधित उद्यम श्रेणी में मिलने वाली रियायत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान किए जाने का प्रावधान है। यह स्पष्ट किया गया कि वेंडर डेवलपमेंट और उत्पाद मानकीकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम उद्यमों को संभावित खरीदारों और नए बाजारों से जोड़ता है, जबकि BIS मानकों का अनुपालन और उत्पाद प्रमाणन उन्हें संस्थागत खरीद एवं बड़ी आपूर्ति शृंखलाओं की गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं … Read more

मध्य प्रदेश में 43 जिलों के लिए वर्षा चेतावनी, एंट्री के बाद थमा मानसून; 2-3 दिन और नहीं मिलेगी राहत

भोपाल  मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश के बाद उसकी रफ्तार थम सी गई है। मौसम विभाग ने राज्य के 43 जिलों में आज शनिवार को मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की संभावना भी जताई गई है। विभाग के अनुसार, मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। सामान्य स्थिति में इस समय तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन सिस्टम के कमजोर पड़ने के कारण इसमें 2-3 दिन की और देरी होने की संभावना है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे देर से पहुंचने वाला है।. मानसून ने 24 जून को दी थी दस्तक गौरतलब है कि प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी। पहले ही दिन इंदौर, धार, आलीराजपुर, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई थी। हालांकि, इसके बाद से परिस्थितियां थमी हुई हैं, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 48 से 72 घंटों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल हो रहा है। शनिवार को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान इस बीच, शनिवार को राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग समेत प्रदेश के करीब 40 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग, नीमच, मंदसौर और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। एमपी के कई हिस्सों में दिखा आंधी-बारिश का दौर इससे पहले, शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी और भारी बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब दो इंच और उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी बरसा। शाजापुर, दतिया, राजगढ़ और मंडला समेत कई इलाकों में मौसम बदला रहा। इस बदलते मौसम के बीच बालाघाट और देवास जिलों से दर्दनाक हादसे भी सामने आए, जहाँ आकाशीय बिजली गिरने और दीवार ढहने की अलग-अलग घटनाओं में कुल 5 लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। कहां-कहां है अलर्ट? मौसम केंद्र ने रीवा, सागर, जबलपुर, शहडोल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल सहित कुल 43 जिलों में आज बारिश-आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का भी अनुमान है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। खासकर सोयाबीन, मक्का और दलहन की फसलों पर अतिरिक्त नजर रखने की जरूरत है। कब तक सुधरेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 48-72 घंटों में एक नया सिस्टम सक्रिय होने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्य भर में मानसून की गति बढ़ सकती है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुरकलां जैसे उत्तरी जिलों में सामान्य बारिश में सबसे ज्यादा देरी हो सकती है। वर्षा के आंकड़ों में सुधार पिछले तीन दिनों की बारिश से प्रदेश की औसत वर्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। 1 जून से अब तक सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी। लगातार बारिश के कारण बारिश का घाटा घटा है, हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। एमपी में तेज बारिश…सिवनी में 2 इंच पानी गिरा इससे पहले शुक्रवार को तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। सिवनी में करीब 2 इंच पानी गिर गया। शाजापुर के शुजालपुर, अकोदिया समेत आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं, दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। बालाघाट के बैहर तहसील के बिरवा ग्राम पंचायत में बिजली गिरने से 2 बच्चों सहित 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग झुलस गए। मृतकों की पहचान लल्की मेरावी, झामसिंह ताराम (35) और सतीश वलके के रूप में हुई है। वहीं, देवास के खटांबा गांव में सूरज की पूजा के दौरान आंधी-बारिश से गैलरी गिर गई। हादसे में 2 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत 3 लोग घायल हो गए। मृतकों की पहचान लक्ष्मीबाई और भगवंताबाई के रूप में हुई है। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। खरगोन में तापमान सबसे कम 30 डिग्री पहुंच गया। खंडवा में 30.1 डिग्री, सागर में 31.1 डिग्री, छिंदवाड़ा में 31.8 डिग्री, बैतूल में 32.7 डिग्री, सिवनी-उमरिया में 33.2 डिग्री, धार में 33.4 डिग्री, नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल-इंदौर में 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।