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मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने वाली हैं, 74 हजार लोकेशन की नई गाइडलाइन जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों के लिए जमीन और मकान खरीदना भी मंहगा होने जा रहा है. राजस्व और पंजीयन विभाग ने प्रदेश के करीब 74 हजार लोकेशन का विस्तृत सर्वे पूरा कर नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार कर लिया है. यह गाइडलाइन 1 अप्रैल 2026 से लागू की जाएगी. हालांकि अब इस प्रस्ताव को पहले उप जिला मूल्यांकन समिति, फिर जिला मूल्यांकन समिति में चर्चा के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा. वहां से अंतिम स्वीकृति मिलते ही नई दरें प्रभावी हो जाएंगी. कलेक्टर गाइड लाइन में पहली बार एआई का प्रयोग इस बार कलेक्टर गाइडलाइन के तहत दर निर्धारण की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से बिलकुल अलग और हाईटेक बनाई गई है. पंजीयन विभाग ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया है. एमपी इलेक्ट्रानिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के सहयोग से जिलों की एक साल पुरानी और वर्तमान सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया गया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि बीते एक वर्ष में किन क्षेत्रों में नया विकास हुआ है. सैटेलाइट इमेज के जरिए यह चिह्नित किया गया कि जहां पहले खाली जमीन थी, वहां अब प्लाटिंग, कॉलोनी, सड़क या व्यावसायिक निर्माण तो नहीं हो गया. जिन स्थानों पर तेजी से विकास हुआ है. डायवर्सन के डेटा का किया गया व्यापक विश्लेषण नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कृषि भूमि के आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में हुए डायवर्सन का डेटा लिया गया है. जिन क्षेत्रों में कृषि भूमि का स्वरूप बदल चुका है और विकास कार्य शुरू हो गए हैं, वहां अब कृषि दरों के बजाय प्लाट के अनुरूप दरें तय की जाएंगी. कृषि विभाग से भी भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी लेकर क्रास वेरिफिकेशन किया गया है. इससे जमीन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य के ज्यादा करीब तय करने का दावा किया जा रहा है. भोपाल सहित प्रदेशभर में प्राइम लोकेशन पर बढ़ोत्तरी अधिकारियों के अनुसार भोपाल की करीब 500 लोकेशन सहित प्रदेश के कई प्रमुख शहरों और ग्रामीण-शहरी सीमावर्ती इलाकों में दरों में बढ़ोतरी संभावित है. खासतौर पर उन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जहां बाजार में प्रापर्टी का वास्तविक सौदा गाइडलाइन से अधिक कीमत पर हो रहा है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 55 जिलों के 60 हजार स्थानों पर औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी. तकनीकी सर्वे में यह सामने आया था कि कई क्षेत्रों में सुविधाओं और निर्माण गतिविधियों के कारण जमीन का बाजार भाव पहले से कहीं अधिक हो चुका है. कलेक्टर गाइड लाइन में एआई के प्रयोग से यह होगा लाभ राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एआई द्वारा किए गए सर्वे और सैटेलाइट इमेज के आधार पर कलेक्टर गाइडलाइन के निर्धारण से कई फायदे होंगे. इससे जहां अंडरवैल्यू रजिस्ट्रियों पर रोक लग सकेगी, वहीं नई गाइडलाइन लागू होने के बाद बाजार मूल्य के अनुरूप ही दरें तय होंगी. कृषि से आवासीय या व्यावसायिक बनी जमीन का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा. वहीं कम कीमत दिखाकर होने वाली रजिस्ट्रियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. इससे राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी. साथ ही सभी जिलों में एक समान और वैज्ञानिक पद्धति से दर निर्धारण संभव होगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद होगी लागू मध्य प्रदेश पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक अमित तोमर ने बताया कि "नई कलेक्टर गाइडलाइन का मसौदा तैयार किया जा रहा है. जल्द ही संबंधित समितियों की बैठक बुलाकर प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा. केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की स्वीकृति के बाद 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में नई दरें लागू कर दी जाएगी. तोमर ने बताया कि नई व्यवस्था से जहां पारदर्शिता बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं आम खरीदारों और निवेशकों के लिए प्रापर्टी सौदे पहले से महंगे हो सकते हैं.

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार

वंदे मातरम का राष्ट्रगीत होने पर केंद्र सरकार का आभार  भोपाल  वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसका एक ऐतिहासिक महत्व ही नहीं देशभक्त की भावना और मातृभूमि के प्रति सम्मान प्रकट के लिए है यह गीत वकील चंद चटर्जी द्वारा रचित किया गया था यह उसे अवसर का है जब देश गुलामी की जंजीरों में झगड़ा हुआ था तब स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक बना इसका गायन राष्ट्रीय गौरव एवं बलिदानों की याद और देश प्रेम के समर्पण के प्रतीक स्वरूप है भारत की संविधान सभा ने वर्ष 1950 भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। शुरू में वंदे मातरम की रचना स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास "आनंदमठ" (1882 में प्रकाशित) में शामिल किया गया था। इसे पहली बार 1896 में कलकत्ता में कांग्रेस अधिवेशन में भी रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। 'वंदे मातरम्' भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है। 'सुजलाम सुफलाम'  जो भारत माता की सुंदरता (स्वच्छ जल, फलदार, शीतल हवा, फसलों से हरी-भरी) का वर्णन करता है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा का स्रोत रहा है। श्री बंकिम चंद्र चटर्जी ने यह गीत बंगाल के हुगली नदी के पास वर्ष 1876 में लिखा था, और इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी फिर यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास पुस्तक 'आनंद मठ' में शामिल किया गया, जो संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर आधारित था। बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों का मुख्य नारा बन गया था, जिससे देशभर में स्वदेशी आंदोलन को बल मिला। इसका प्रथम गायन वर्ष 1896 में रविंद्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार लय और संगीत के साथ गाया। एवं रायहाना तैयबजी कांग्रेस के एक अधिवेशन में वंदे मातरम गाने वाली पहली मुस्लिम महिला थीं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रमुख व्यक्ति थीं और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए जानी जाती थीं वंदे मातरम विवाद के विषय में इतिहास के अनुसार यह था कि मुख्य रूप से इसके कुछ अंश को लेकर उठा था जिस पर कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई थी 1937 में कांग्रेस ने भी राष्ट्रगान बनाने हेतु निर्णय लिया था और यह विवाद देश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना रहा यह विवाद केवल उसे मुद्दे पर आधारित रहा जो भारत माता को देवी के रूप में चित्रित करती है सभी धर्म विशेष कर इस्लाम को भी यह गीत स्वीकार था इसलिए 24 जनवरी 1950 में भारत सरकार ने  'जन गण मन' के साथ 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। इसकी संरचना:  में छह छंद हैं, शुरु आती दो संस्कृत में और बाकी बांग्ला में हैं। इसका महत्व: यह है की यह गीत भारत के लोगों को एकता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति गहरी भक्ति सिखाता है, और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया।वंदे मातरम गीत यह शोधपत्र राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हैदराबाद राज्य और विशेष रूप से हैदराबाद, कर्नाटक के वंदे मातरम आंदोलन पर केंद्रित है। वंदे मातरम आंदोलन हैदराबाद के निज़ाम राज्य के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रभावी और सबसे लोकप्रिय नारा था। वंदे मातरम, यह एक शब्द ऐसा है जो हमें इतिहास में ले जाता है। यह हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को, आत्मविश्वास से भर देता है और हमारे भविष्य को यह नया साहस प्रदान करता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जिसे पूरा न किया जा सके । ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है जिसे हम भारतीय हासिल न कर सकें। वंदे मातरम का अर्थ है "मैं तुम्हें नमन करता हूँ, माँ" "मैं तुम्हारी वंदना करता हूँ, माँ," जिसमें 'माँ' भारत माता को कहां गया है जो की हमारी मातृभूमि की प्रतीक है,  जो देश के प्रति गहरे प्रेम, सम्मान और भक्ति को व्यक्त करता है, विशेषकर वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका को याद करना है। वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणादायक संकल्प था भारत सरकार ने जैसा की अपेक्षा थी ऐसे वंदे मातरम गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों का सम्मान किया है जिसके लिए हम कृतज्ञ हैं डॉ.राजेंद्र प्रसाद आचार्य  पूर्व सदस्य धर्मस्य विशेषज्ञ समिति मध्य प्रदेश शासन

टी-90 टैंकों का जबलपुर फैक्ट्री में अपग्रेड, पहली बार मिलेगा नया रूप

जबलपुर वाहन निर्माणी जबलपुर सैन्य वाहनों के साथ अब युद्धक टैंक उत्पादन क्षेत्र में कदम रख चुका है। टी-72 युद्धक टैंक की सफल टेस्टिंग के बाद निर्माणी अब पहली बार टी-90 टैंक को आकार देने के अपने अभियान में जुटने जा रही है। देश में चेन्नई के बाद जबलपुर टैंकों को नया आकार देने वाला शहर बन गया है। एमआरओ प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में चेन्नई से दो टी-90 टैंक की पहली आने जा रही है। जिसे नया स्वरूप प्रदान करने निर्माणी की 150 सदस्यीय दक्ष इंजीनियरों की टीम तैयार है। टी-90 में तकनीकी सुधार के साथ विभिन्न कलपुर्जों पर कार्य निर्माणी के लिए अपनी तरह का पहला होगा। अभी तक वह सुरंगरोधी वाहन व सैन्य उपयोगी ट्रकों पर ही फोकस करती रही है। श्रमिक सूत्रों के अनुसार वीएफजे पहली बार भारतीय सेना के प्रमुख टी-90 भीष्म टैंकों के ओवरहालिंग (मरम्मत और नवीनीकरण) का कार्य करने जा रही है। घातक टैंकों को किया जा रहा अपग्रेड टी-72 टैंकों की मरम्मत में सफलता के बाद, वीएफजे अब टी-90 टैंकों की खेप को नया आकार देगा, जिससे इन टैंकों की युद्ध क्षमता और आयु में वृद्धि होगी। वीएफजे अपनी एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग) क्षमताओं का विस्तार करते हुए टी-90 जैसे घातक टैंकों को अपग्रेड करने जा रहा है। टी-72 के सफल ट्रायल के बाद, टी-90 टैंकों की ओवरहालिंग की सप्लाई चेन स्थापित की जा रही है। यह टैंक अपनी मारक क्षमता, सुरक्षा (एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर) और जैविक-रासायनिक हमलों से निपटने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, जिसे ‘भीष्म’ भी कहा जाता है। इस पहल से सेना के बख्तरबंद फॉर्मेशन की परिचालन तत्परता सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही यह कदम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। तकनीक व गुणवत्ता पर भी कार्य निर्माणी टैंकों के सफल मरम्मत को लेकर नए सिरे से कार्य कर रही है। यही कारण है कि अपनी दक्ष टीम के साथ नगर के ट्रिपल आईटीडीएम के छात्रों की मदद भी तकनीक में ली जा रही है। जिससे भविष्य में शक्तिशाली टैंक तैयार किए जा सकें। नया आकार देने के साथ इसकी गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जा रहा है। ताकि इनका प्रदर्शन पूर्व के मुकाबले बेहतर हो और कोई त्रुटि न रहे जाए। टैंकों के लिए एमआरओ प्रोजेक्ट में नया प्लांट विकसित किया गया है।

किसानों के खाते में ₹4,000 का इंतजार खत्म, पीएम किसान सम्मान निधि से मिलेगी राहत

भोपाल  किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना की 22वीं किस्त का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। कृषि मंत्रालय ने इस किस्त के ट्रांसफर की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। क्या खास है इस बार? जिन किसानों की 21वीं किस्त रुक गई थी, उनके खाते में 21वीं और 22वीं किस्त का पैसा एक साथ आएगा। यानी ऐसे किसानों के खाते में 4-4 हजार रुपये क्रेडिट होंगे। बाकी किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये जल्द ही ट्रांसफर किए जाएंगे। कब आएगी अगली किस्त? पिछली किस्त 2025 में आई थी। सूत्रों की मानें तो होली से पहले यानी मार्च की शुरुआत में 22वीं किस्त जारी हो सकती है। इस साल होली 4 मार्च को है, इसलिए संभावना है कि सरकार इसे होली का तोहफा मानते हुए किसानों के खाते में भेज दे। किसान की किस्त का पैसा सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में आएगा। PM Kisan Yojana के तहत हर किसान को साल में तीन बार 2-2 हजार रुपये मिलते हैं। अगर पिछली किस्त रुक गई थी तो अब 4 हजार रुपये एक साथ मिलने वाले हैं। लाभार्थी सूची में नाम कैसे जांचें पीएम किसान योजना के तहत लाभार्थी सूची में नाम देखना अब बेहद आसान हो गया है। किसान घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से अपनी स्थिति जांच सकते हैं। इसके लिए पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फार्मर कॉर्नर में उपलब्ध लाभार्थी सूची के विकल्प पर जाना होता है। वहां राज्य, जिला, तहसील, ब्लॉक और गांव का चयन करने के बाद पूरी सूची खुल जाती है। इस सूची में किसान अपना नाम और पिछली किस्तों की भुगतान स्थिति आसानी से देख सकते हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि वे अगली किस्त के लिए पात्र हैं या नहीं। ई-केवाईसी क्यों है जरूरी सरकार ने 22वीं किस्त के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है। जिन किसानों की ई-केवाईसी पूरी नहीं है, उनकी किस्त रोकी जा सकती है। ई-केवाईसी प्रक्रिया आधार आधारित होती है और इसे पीएम किसान पोर्टल पर ओटीपी के जरिए पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा किसान का बैंक खाता आधार से लिंक होना और डीबीटी सुविधा चालू होना भी जरूरी है। कई मामलों में बैंक खाता आधार से लिंक न होने की वजह से भुगतान अटक जाता है या वापस चला जाता है। समय रहते जरूरी सुधार करें किसानों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपनी ई-केवाईसी, बैंक डिटेल और आधार लिंकिंग की स्थिति जांच लें। अगर किसी भी तरह की गलती है तो उसे तुरंत सही करवाएं, ताकि 22वीं किस्त मिलने में कोई परेशानी न हो। सही जानकारी और समय पर अपडेट से किसान बिना किसी रुकावट के योजना का लाभ उठा सकते हैं।

AIIMS भोपाल में ‘मैजिक नाइफ’ की मदद से डेंटल सर्जरी में क्रांतिकारी बदलाव

भोपाल एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दांतों की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला एक मल्टीपल टूल विकसित किया है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है. यह उपकरण डेंटल इम्प्लांट और ओरल सर्जरी को आसान और कम समय में पूरा करने में मदद करेगा.  दरअसल, दांतों के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को एक ही उपकरण से  कट लगाना, पकड़ना और इम्प्लांट करना  जैसे अलग अलग काम करने होते हैं.  इससे निजात पाने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने डेंटल इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी के लिए एक मल्टीपर्पज सर्जिकल टूल बनाया है. यह एक 'स्विस नाइफ' की तरह काम करता है, जिसमें सर्जरी के तमाम स्टेपस् के लिएजरूरी  कई टूल्स एक ही डिवाइस में मिलते हैं.  इस 'स्विस नाइफ' की 5 बड़ी विशेषताएं     ऑल-इन-वन डिज़ाइन यानी सर्जरी के दौरान अलग-अलग दर्जनों औजारों की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रक्रिया आसान होगी.     कम उपकरणों के उपयोग से संक्रमण का खतरा कम होगा और शल्य चिकित्सा की सटीकता बढ़ेगी.     प्रक्रिया कम समय में पूरी होने से मरीजों को कम असुविधा होगी और उनकी रिकवरी तेज होगी.     इसका डिजाइन काफी छोटा और हल्का है, जो इसे मोबाइल क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों के लिए आदर्श बनाता है.     वहीं, महंगे विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होने से दंत चिकित्सा की लागत में कमी आएगी.  विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेटेंट न केवल एम्स भोपाल के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती प्रदान करता है. आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिकों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. इस स्वदेशी उपकरण के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय हैं. उनके साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. ज़ेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने सह-आविष्कारकों के रूप में इस पर काम किया. टीम का उद्देश्य सर्जरी के दौरान बार-बार उपकरण बदलने की जटिलता और उससे होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करना था. 

भोपाल में 12 फरवरी को भवन विकास निगम कार्यशाला, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता

12 फरवरी को भोपाल में भवन विकास निगम की क्षमता संवर्धन कार्यशाला मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे मुख्य अतिथि भोपाल  लोक निर्माण से लोक कल्याण के विजन को सशक्त आधार देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा निरंतर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तत्वावधान में एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि यह कार्यशाला निर्माण क्षेत्र से जुड़े अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग, परियोजना क्रियान्वयन इकाई, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के लगभग 2,000 अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण कैलेंडर एवं परियोजना प्रबंधन पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा तथा परियोजना प्रबंधन प्रणाली–2.0 डिजिटल प्रबंधन प्रणाली का प्रदर्शन एवं औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम एवं मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं—केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान, भारतीय राजमार्ग अभियंता अकादमी, इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई तथा स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ क्षमता निर्माण, हरित भवन अवधारणा, आधुनिक भवन निर्माण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण तथा निर्माण क्षेत्र में नवाचार जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही  विक्रांत सिंह तोमर द्वारा क्षमता निर्माण विषय पर विशेष व्याख्यान दिया जाएगा। मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा विकसित परियोजना प्रबंधन प्रणाली पोर्टल–2.0 एक उन्नत डिजिटल प्रबंधन प्रणाली है। इससे समस्त निर्माण कार्यों का सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं दक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इस प्रणाली में प्रत्येक परियोजना के लिए उत्तरदायी–जवाबदेह–समय-सीमा प्रणाली के माध्यम से संबंधित अधिकारी, सक्षम स्वीकृतकर्ता तथा निर्धारित समय-सीमा स्पष्ट रूप से दर्ज रहती है, जिससे सतत निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित होती है। प्रक्रिया नियंत्रण द्वार प्रणाली के अंतर्गत आवश्यक कार्य, अभिलेख एवं स्वीकृतियाँ पूर्ण होने के पश्चात ही अगले चरण की अनुमति प्रदान की जाती है। मानक कार्य प्रणाली के अनुसार कार्य निष्पादन से सभी परियोजनाओं में एकरूपता एवं प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित होती है, वहीं स्वचालित पत्र निर्माण सुविधा से विभागीय पत्राचार त्वरित, पारदर्शी एवं कागजरहित बनता है। क्षमता संवर्धन कार्यशाला न केवल प्रदेश के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं दक्षता को सुदृढ़ करेगी, बल्कि अभियंताओं एवं तकनीकी अधिकारियों को नवीनतम तकनीकी ज्ञान, गुणवत्ता आधारित निर्माण प्रक्रिया तथा सतत विकास के सिद्धांतों से भी अवगत कराएगी। लोक निर्माण विभाग की यह पहल “लोक निर्माण से लोक कल्याण” के संकल्प को तकनीकी सुदृढ़ता, डिजिटल नवाचार और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से नई दिशा प्रदान करेगी।  

सरकारी योजना के तहत महिलाओं को मिलेगा 1500 रुपये, 14 फरवरी से शुरू; स्टेटस चेक करने का तरीका

भोपाल   मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना की 33वीं किस्त का इंतज़ार  महिलाएं बेसब्री से कर रही हैं. स्कीम की 32वीं किस्त 16 जनवरी को जारी की गई थी. नियमों के मुताबिक हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच किस्तें जारी की जाती हैं, इसलिए लोग फरवरी 2026 की किस्त जारी होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. जिन महिलाओं को इस बार पैसे नहीं मिलेंगे वे ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकती हैं. लाडली बहना योजना अपडेट मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक अहम पहल बन गई है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें. मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव 14 फरवरी को खंडवा जिले में होने वाले कार्यक्रम से 33वीं किस्त महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करेंगे। इस बार कार्यक्रम खंडवा जिले के पंधाना में आयोजित होगा। लाडली बहना योजना के अलावा पंधाना विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का उदघाटन भी मुख्यमंत्री करने वाले हैं। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 32वीं किस्त 16 जनवरी को नर्मदापुरम से जारी की गई थी। पिछली बार पात्र महिलाओं के खाते में 1856 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस बार महिलाओं को यही सौगात मिलने वाली है। इस बीच लाडली बहना योजना से करीब 1 लाख से ज्यादा नाम कम हो चुके हैं। क्यों कम हुए लाडली बहना योजना से नाम लाडली बहना योजना जब शुरू हुई थी, तब इसमें 1.32 करोड़ नाम जुड़े थे। लेकिन बाद में इसे 1.29 करोड़ और फिर 1.26 करोड़ कर दिया गया। पिछले महीने इस योजना से एक लाख नाम और कम हो गए। जानकारी के मुताबिक जो महिलाएं पात्रता की शर्त पूरी नहीं कर रही थीं, उनके नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा जिनकी उम्र 60 साल हो चुकी है, उनके नाम भी योजना से हटा दिए गए हैं। गाइडलाइंस के मुताबिक इस योजना का लाभ 60 की उम्र तक ही मिल सकता है। कैसे चेक करें स्टेटस अगर आप इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि आपका नाम लिस्ट में है भी या नहीं, तो आप ऑनलाइन पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाकर पता कर सकते हैं। यहां आपके पास दो विकल्प होंगे। आप चाहें तो अंतिम सूची में जाकर अपना नाम चेक कर सकती हैं। या फिर 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' में जाकर भी स्टेटस चेक कर सकती हैं। इस पर क्लिक करने के बाद बस आपको अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी ही भरना है। इसके बाद मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफाई करना है, आपका स्टेटस खुल जाएगा। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि, 14 फरवरी को सीएम मोहन यादव खंडवा आ रहे हैं। वे पंधाना में लाडली बहना योजना की राशि अंतरित करेंगे।  14फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खंडवा जिले के पंधाना का दौरा प्रस्तावित है। यह से लाडली बहना योजना की राशि का विवरण किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री डॉ मोहन पंधाना विधानसभा में अभी जितने में कार्य पूरे हो चुके है उन निर्माण कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि सीएम के दौरे को लेकर विधायक की अध्यक्षता में विभागों की बैठक भी ली गई है। सारी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बता दें कि लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की बेहद महत्वपूर्ण योजना है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में इस योजना का शुभारंभ किया था। जिसके तहत लाभार्थी महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलती है। फरवरी में इस योजना की 33वीं किस्त जारी की जाएगी।  क्या बजट में लाडली बहना को लेकर होगा ऐलान लाडली बहना योजना में नए रजिस्ट्रेशन लंबे समय से शुरू नहीं हुए हैं। ऐसे में प्रदेश की महिलाएं 18 फरवरी को आने वाले बजट से उम्मीदें लगाए बैठी हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव से उन्हें बड़ी सौगात मिल सकती है। इसके अलावा इस साल लाडली बहना योजना का पैसा बढ़ाने की भी बात है, उसे लेकर बजट में घोषणा हो सकती है।  

“देश के विभिन्न राज्यों में किसान कर्ज की स्थिति: एमपी में ₹74,420, आंध्र में ₹2.45 लाख

भोपाल देश के किसानों की आर्थिक स्थिति पर संसद में पेश ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश के हर किसान परिवार पर औसत बकाया 74,420 रुपए का कर्ज है। यह राष्ट्रीय औसत 74,121 रुपए के लगभग बराबर है। आंकड़े केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में दिए। रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में किसानों पर कर्ज का बोझ मध्य भारत की तुलना में काफी अधिक है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह सबसे कम है। दरअसल, संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के किसानों की मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। वहीं आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण 74,121 रुपए है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं। टीएमसी सांसद कालिपद सरेन खेरवाल के सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी दी। एमपी की स्थिति: राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ ₹1,13,865 है, वहीं मध्य प्रदेश में यह ₹74,420 पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (₹21,443) की तुलना में एमपी के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। दक्षिण के राज्यों के किसान सबसे ज्यादा कर्जदार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रति कृषक परिवार पर औसत बकाया ऋण ₹74,121 है। चौंकाने वाली बात यह है कि दक्षिण भारतीय राज्यों के किसान कर्ज के मामले में उत्तर भारत के मुकाबले कहीं आगे हैं । केसीसी (KCC) का कर्ज ₹10 लाख करोड़ के पार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत बकाया धनराशि ₹10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण (NSS 77वां दौरा) साल 2019 में ही किया गया था। राजस्थान कर्ज के मामले में आगे     राजस्थान: ₹1,13,865     मध्य प्रदेश: ₹74,420     उत्तर प्रदेश: ₹51,107     बिहार: ₹23,534 इन राज्यों में बोझ कम     नागालैंड: सिर्फ ₹1,750     मेघालय: ₹2,237     अरुणाचल प्रदेश: ₹3,581 किसानों की आया बढ़ाने में जुटी राज्य सरकार इधर, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने बढ़ती लागत और ऋण दबाव को देखते हुए वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। राज्य में जून 2026 तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध रहेगा। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर किसानों को पुनर्वित्त के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की योजना लागू है। साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा सहित नदी जोड़ो परियोजनाओं से सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय औसत के करीब, राजस्थान से बेहतर दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश में किसानों की स्थिति कर्ज के मामले में कई राज्यों से बेहतर है। जहां पड़ोसी राज्य राजस्थान में प्रति किसान परिवार कर्ज का बोझ 1,13,865 रुपए है। वहीं मध्य प्रदेश में यह 74,420 रुपए पर टिका है। हालांकि, छोटे राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ (21,443) की तुलना में मध्यप्रदेश के किसानों पर कर्ज का दबाव अधिक है। केसीसी का कर्ज 10 लाख करोड़ के पार शिवराज ने सदन में बताया कि 30 सितंबर 2025 की स्थिति के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया धनराशि 10.39 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी 2026 तक का एकदम सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि पिछला बड़ा सर्वेक्षण साल 2019 में ही किया गया था। उत्तरप्रदेश-बिहार में औसत बोझ कम आंध्र प्रदेश प्रति किसान परिवार औसत 2,45,554 के साथ देश में सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। इसके बाद केरल (2,42,482), पंजाब (2,03,249), हरियाणा (1,82,922) और तेलंगाना (1,52,113) का स्थान है। इसके विपरीत नागालैंड में औसत कर्ज मात्र 1,750, मेघालय में 2,237 और अरुणाचल प्रदेश में 3,581 दर्ज किया गया। उत्तर और मध्य भारत में राजस्थान (1,13,865) के किसान अपेक्षाकृत अधिक कर्जदार पाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश (51,107) और बिहार (23,534) में औसत बोझ कम है। कर्ज में टॉप-5 राज्य राज्य         कर्ज रुपए में आंध्रप्रदेश    2,45,554 केरल          2,42,482 पंजाब         2,03,249 हरियाणा    1,82,922 तेलंगाना    1,52,113 एमपी सरकार की रणनीति: 'किसान कल्याण वर्ष' और जीरो ब्याज योजना बढ़ते कर्ज और खेती की लागत को देखते हुए मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। सरकार की ओर से किसानों को राहत देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं।     ब्याज मुक्त ऋण: प्रदेश में किसानों को जून 2026 तक 0% ब्याज पर फसल ऋण (Crop Loan) मिलता रहेगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को 4% अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा।     डिफॉल्टरों को राहत: सरकार ने सहकारी बैंकों के उन किसानों को फिर से मुख्यधारा में लाने की योजना बनाई है जो कर्ज के कारण डिफॉल्टर हो गए थे।     सिंचाई विस्तार: नर्मदा-क्षिप्रा और अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य है, ताकि खेती को लाभकारी बनाया जा सके। एमपी में भी बढ़ रहा किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा आंकड़ों के मुताबिक, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) कर्ज का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मध्य प्रदेश में भी ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों के माध्यम से केसीसी का वितरण तेजी से हुआ है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज किसानों की निवेश क्षमता बढ़ाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के उचित दाम (MSP) और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यह कर्ज किसानों के लिए बोझ बन जाता है।  

महाकाल की नगरी में 9 भव्य द्वार, सनातन गौरव की शुरुआत, सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है। यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है। योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने। स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे। रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे। यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट     अमृत द्वार 9.68 करोड़     पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़     गज द्वार 8.51 करोड़     कालगणना द्वार 11.07 करोड़     उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़     सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़     त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़     विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़     डमरू द्वार 13.29 करोड़ सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है। नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता     अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।     पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।     गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।     कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।     उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।     सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।     त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।     विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।     डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत। (नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।) 

बागेश्वरधाम :नागपुर की रबड़ी, राजस्थान के रसगुल्ले के बीच 301 जोड़ों का महाशिवरात्रि विवाह समारोह

छतरपुर  छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर धाम एक बार फिर भव्य आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर 15 फरवरी को यहां 300 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। सभी अतिथियों को औपचारिक आमंत्रण भेजे जा चुके हैं और धाम समिति ने उनके आगमन को लेकर संकेत भी जारी कर दिए हैं। देशभर के दिग्गज राजनेताओं को न्योता बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि पर सामूहिक कन्या विवाह की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष यह आयोजन अपने सातवें संस्करण में प्रवेश कर रहा है, जिसे लेकर खास उत्साह है। समारोह में देश के कई बड़े राजनीतिक चेहरों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन की व्यापकता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जा रही है। बुंदेलखंड के जिलों के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल संभाग से अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। धाम परिसर में भव्य तैयारियां जोरों पर हैं। खजुराहो के बागेश्वर धाम में 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि पर होने वाली 301 जोड़ों के विवाह समारोह की तैयारियां आखिरी दौर में हैं। 12 फरवरी से तीन दिन कल्चरल नाइट होगी। इन दिनों में करीब 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है. मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं। 100 एकड़ में कार्यक्रम की व्यवस्था है। बारातियों के लिए बुफे की व्यवस्था रहेगी। पिछले साल इलाहाबाद में हुए महाकुंभ की तर्ज पर 11 तोरण द्वार भी बनाए गए हैं। मुख्य कार्यक्रम में छह प्रदेशों के मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश के राज्यपाल, विदेशी मेहमान, सेलिब्रिटी और खिलाड़ी शामिल होंगे। दो किमी दूर से नजर आने लगती है सजावट अलसुबह अभी सूरज नहीं निकला है। जैसा कि बताया गया था कि शादी के लिए बागेश्वरधाम तिरंगा थीम पर सजाया जाएगा। उसकी झलक धाम के पांच किलोमीटर दूर से ही नजर आने लगती है। सड़क के दोनों पर तिरंगा थीम पर लाइटिंग की गई है। कुछ देर में धाम के मुख्य मंदिर के सामने पहुंच गए। यहां आरती हो रही है। दूर-दूर से दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की भी भीड़ है। जिस जगह पर समाराेह होना है, वहां 24 घंटे काम चल रहा है। सामान से भरी लारियां आ रही हैं। सेवादार सही जगह पर सामान अनलोड कराने में व्यस्त हैं। किसी में टेंट का सामान है, तो किसी में खाने-पीने का। कोलकाता से आए कारीगर रंग-बिरंगा छत्री नुमा टेंट लगा रहे हैं। दूसरे लोग डोम के लिए पाइप कस रहे हैं। राज मिस्त्री करीब छह लाख लोगों के लिए बनने वाले खाने के लिए बड़ी-बड़ी भट्टियां बना रहे हैं। शादी वाली इस जगह की जिम्मेदारी संभाल रहे सेवादार नितेंद्र चौबे कहते हैं कि चार दिन बचे हैं, सभी काम समय से पूरे हो जाएंगे। पंडित प्रदीप मिश्रा से लेकर मोरारी बापू तक आएंगे नितेंद्र कहते हैं- पहले 300 बेटियों की शादी होनी थी, लेकिन अब ये संख्या 301 हो गई है। उसी हिसाब से तैयारियां हो रही हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली की मुख्यमंत्री कन्याओं को आशीर्वाद देने आ रहे हैं। 12 फरवरी को गुरुकुलम के भूमिपूजन के लिए एमपी के राज्यपाल मंगुभाई पटेल आने वाले हैं। 13 से 15 फरवरी तीनों दिन अलग-अलग लोग आएंगे। इसमें संत राजेंद्र दास, इंद्रेश कुमार, अनिरुद्धचार्य, पुंडरीक महाराज, मोरारी बापू, बाबा रामदेव, पंडित प्रदीप मिश्रा और रमेश भाई ओझा का आना तो तय हो चुका है। कई दूसरे संत भी आएंगे, लेकिन उनकी अभी तारीख फिक्स नहीं हुई है। कुछ खिलाड़ी भी आने वाले हैं- उमेश यादव और शिखर धवन का आना तय हो चुका है। 1500 विदेशी भक्त भी आएंगे शादी समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर कहते हैं कि आस-पास के ग्रामों में पीले चावल बांटे जा रहे हैं। विदेश से करीब 1500 भक्त आएंगे। अभी करीब 100 श्रद्धालु आ चुके हैं। दुबई, नेपाल, फिजी आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और लंदन से गुरुभाई आना शुरू हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के तो एमएलए भी आ रहे हैं। तीन दिन में 10 से 12 लाख लोगों के आने का अनुमान है। बहुत बड़ी व्यस्था होनी है। भारत में धाम से रजिस्टर्ड 75 सेवादारों के संगठन अलग-अलग जगह हैं। इनके करीब 12 हजार सदस्य शादी समारोह की व्यवस्था संभालने आ रहे हैं। उनकी अलग-अलग ड्यूटी लगाई जाएगी। धीरेंद्र शास्त्री को पसंद है मटर-पनीर की सब्जी भंडारा प्रभारी कपिल साहू के पास भंडार की जिम्मेदारी है। शादी पंडाल के आसपास ये तीन जगह होगा। एक बराता-घराती के लिए तो दूसरा सेवादारों के लिए। वहीं, तीसरा– शादी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए। इसके अलावा, धाम में आठ-दस जगह भी भोजन-फल की व्यवस्था है। वह कहते हैं कि गुरु धीरेंद्र शास्त्री को मटर-पनीर की सब्जी बहुत पसंद है, वो खासतौर पर शादी वाले दिन ही बनाई जाएगी। ये खास सब्जी आने वाले पांच सीएम के अलावा अन्य VVIP को भी परोसी जाएगी। इसमें सबसे खास बात है कि इस बार माल-पुआ के साथ लाखों मेहमानों के लिए नागपुर से रबड़ी और राजस्थान से रसगुल्ले मंगवाए जा रहे हैं। अस्थायी अस्पताल भी बनाया समारोह के लिए प्रशासन द्वारा यहां अस्पताल भी बनाया गया है। राजनगर बीएमओ और बागेश्वर धाम में स्वास्थ व्यवस्था प्रभारी अवधेश चतुर्वेदी ने बताया कि टीम 24 घंटे काम करेगी। तीन शिफ्ट में 50 स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी पर रहेंगे। जिनमें डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड बॉय और ड्रेसर शामिल हैं। अस्पताल में ऑक्सीजन, पलंग और आपातकालीन दवाओं की सुविधा रहेगी। फिलहाल 6 बेड की व्यवस्था की गई है। दो एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। 12 से 14 फरवरी के दौरान तीन और एम्बुलेंस आ जाएंगी। हालत गंभीर होने पर मरीज को छतरपुर रेफर किया जाएगा। इसलिए दी जा रही 30-30 हजार रुपए की FD समारोह के मुख्य व्यवस्थापक धीरेंद्र गौर को बनाया गया है। इस बार नव दंपत्ति को बाइक और होम आटा-चक्की नहीं दी जा रही है। धीरेंद्र गौर कहते हैं कि इन दो उपहार से नए परिवार का खर्च बढ़ रहा था, इसलिए इस बार प्रत्येक जोड़े को 30- 30 हजार की फिक्स डिपॉजिट (FD) दी जा रही है। इसके साथ ही सोने की लौंग और बाली। मंगलसूत्र के … Read more