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क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी फिर से बहाल, मुख्यमंत्री ने किया वादा पूरा

महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी हुई बहाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रांति गौड़ से किया वादा निभाया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर संवेदनशील, मानवीय और प्रतिबद्ध नेतृत्व का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर व मध्यप्रदेश की प्रतिभावान खिलाड़ी क्रांति गौड़ से किए वादे को निभाते हुए उनके पिता श्री मुन्ना सिंह की वर्षों से निलंबित नौकरी को सोमवार को पुनः बहाल करवा दिया है। यह निर्णय न केवल एक परिवार के लिए राहत लेकर आया है बल्कि सरकार की संवेदनशीलता, खिलाड़ियों के प्रति सम्मान और न्यायप्रिय दृष्टिकोण का स्पष्ट उदाहरण है। गौरतलब है कि विगत दिनों महिला वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की प्रतिभाशाली क्रिकेटर क्रांति गौड़ से उनके पिता की नौकरी बहाल करने का आश्वासन दिया था। जिसे उन्होंने नियमों के तहत निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार पुलिस मुख्यालय द्वारा श्री मुन्ना सिंह को पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री मुन्ना सिंह, जो मध्यप्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे, वर्ष 2012 में चुनावी ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही के कारण निलंबित कर दिए गए थे। बीते 13 वर्षों से लंबित यह मामला अब मुख्यमंत्री की पहल से सकारात्मक समाधान तक पहुँचा है। क्रांति गौड़ का सपना हुआ साकार इस निर्णय से गौड़ परिवार को न केवल आर्थिक और सामाजिक संबल मिला है बल्कि क्रांति गौड़ का वह सपना भी साकार हुआ है, जिसमें वे अपने पिता को सम्मानपूर्वक पुलिस वर्दी में सेवानिवृत्त होते देखना चाहती थीं।  

2026 में मध्य प्रदेश के लिए बड़ी सौगातें, नए साल में युवाओं और किसानों को मिलेगा विशेष लाभ

भोपाल  नव वर्ष का उत्साह हर तरफ चरम पर है। इस बार साल 2026 विशेष महत्व रखने वाला है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार नई पहल शुरू करेगी। किसान कल्याण को देखते हुए ये वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत किसान कल्याण के कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। खेत और गांव को आगे बढ़ने के नए मौके सृजित किए जाएंगे।  वहीं, युवाओं की बात करें तो 40 हजार पदों पर पुलिस की नई भर्तियां होने की संभावना है। इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी। तो चलिए यहां आपको क्रमश: बता रहे हैं क्या-क्या नई सौगातें मिलेंगी।  कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा कृषि वर्ष को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस बैठक में सीएम ने कहा था कि वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को लाभ पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। कृषि से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रदेश में कृषि में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। धान की खेती को प्राथमिकता देते हुए, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर के क्षेत्रों में नवाचारों से किसानों को अवगत कराने के लिए उन्हें विभिन्न देशों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को दोगुने से अधिक बढ़ाना और कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवा, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी नए साल 2026 की शुरुआत में कई खुशखबरी सामने आ रही हैं। पहली, विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। बजट सत्र में विधायकों को सभी जरूरी दस्तावेज़, प्रश्न-उत्तर और नोट्स टैबलेट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी बजट प्रस्तुति टैबलेट के माध्यम से पेश करेंगे। सदन में हर विधायक की टेबल पर स्थायी टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे पूरी कार्यवाही बिना कागज के संचालित होगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की कैबिनेट भी ई-कैबिनेट होगी और बैठक का एजेंडा टैब पर भेजा जाएगा। नए साल में युवाओं को इन भर्तियां मिलेंगे नए अवसर एमपी में पुलिस में चालीस हजार भर्तियां की जाएंगी। एमपी पुलिस बोर्ड के द्वारा ये भर्तियां आयोजित होंगी। लेकिन इसका अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सहायक प्रोफेसर भर्ती 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के अंतर्गत आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में कुल 949 पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार एमपीपीएससी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा कर पाएंगे। वहीं, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पूरे साल का भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया है. साल की शुरुआत में ग्रुप-1, ग्रुप-2 और ग्रुप-5 के तहत स्टाफ नर्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है.युवाओं के लिए यह बेहतर मौका हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर विजिट करें। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इससे पुलिस भर्तियों में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत पदों की भर्ती मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा की जायेगी। आगामी वर्षों की भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा की जायेंगी। पूर्व में  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा था कि पुलिस, जेल और नगर सेना एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी कोर्सेस में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियों में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस भर्ती पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने 7,500 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है। इसलिए अब हर साल 7,500-7,500 पदों पर भर्ती कर तीन साल में पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी अब छठवें वेतनमान का पद पात्रतानुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिया जाएगा। गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बहुत जल्द गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मसलों का समुचित समाधान निकाला जाएगा। MP: सरकार के 15 लाख कर्मचारियों की बल्लेबले दूसरी बड़ी खुशखबरी कर्मचारियों के लिए है। मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य सरकार अपने 15 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस हेल्थ कवरेज प्रदान करेगी। इस योजना में सामान्य बीमारी पर 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन पर 10 लाख रुपये तक इलाज की सुविधा शामिल होगी। योजना स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता समेत कुल लगभग 15 लाख लोगों के लिए लागू होगी। कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी या पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक का अंशदान देंगे, जो सरकार के हिस्से के साथ मिलकर बीमा प्रीमियम में तब्दील होगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च अपने जेब से करना पड़ता है … Read more

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: विदेश में हुए अपराध पर भी भारत में दर्ज होगी FIR

जबलपुर   विदेश में अपराध होने के बाद भारत में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने की मांग मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. हाई कोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा "पुलिस एफआईआर दर्ज कर प्रारंभिक जांच कर रही है. प्रकरण में चार्जशीट दायर नहीं की गयी है. ट्रायल कोर्ट ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है तो ऐसी स्थिति में एफआईआर को निरस्त नहीं किया जा सकता." महिला के पति व सास-ससुर की याचिका खारिज जापान निवासी वैभव जैन तथा राजस्थान निवासी उनके पिता पुनीत व माता निकिता जैन की तरफ याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया "वैभव का विवाह भोपाल निवासी महिला से जनवरी 2023 में जयपुर राजस्थान में हुआ था. वैभव तथा उसकी पत्नी जापान में नौकरी करते थे. विवाह के बाद वैभव अपने माता-पिता को जापान ले गया." आरोप है कि जापान में पत्नी अपने पति के माता-पिता के साथ विवाद करती थी. वह जापान छोड़कर भोपाल स्थित अपने मायके आकर रहने लगी. जापान से लौटकर महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई पत्नी ने पति व उसके माता-पिता के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया "अपराध विदेश में घटित हुआ है. इसलिए धारा 188 के तहत केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना कोई जांच नहीं की जा सकती." महिला की तरफ से तर्क दिया गया "शुरुआती जांच में केन्द्र सरकार की मंजूरी आवश्यक नहीं है." केस प्रारंभिक स्टेज पर होने का तथ्य एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा "रिकॉर्ड के अनुसार पीड़ित का आरोप है कि अपराध जापान के साथ भारत में भी किया गया है. आरोपों के अनुसार भारत लौटने के बाद भी पति द्वारा उसे प्रताड़ित किया गया. पीड़िता की शिकायत पर अपराध सिर्फ दर्ज किया गया है. धारा 188 की मंजूरी संज्ञेय अपराध तथा ट्रायर स्टेज में लागू होती है. पुलिस जांच कर रही है और चार्जशीट दायर नहीं की गयी है." हाई कोर्ट ने इस आदेश के साथ याचिका खारिज कर दी. 

एमपी में पीएम स्वनिधि 2.0: स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा ब्याज मुक्त लोन, बैंक लौटाएंगे काटी गई राशि

भोपाल   मध्यप्रदेश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य में 'पीएम स्वनिधि 2.0' के तहत लोन नियमों में बड़ा सुधार किया गया है। अब बैंकों की मनमानी पर लगाम लगेगी और हितग्राहियों को बिना किसी कटौती के पूरा लोन उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने 14 फीसदी की ब्याज दर पर सहमति देते हुए करोड़ों रुपये के रिफंड का रास्ता भी साफ कर दिया है। साथ ही समय पर लोन चुकाने वाले वेंडर्स को 50 हजार रुपए तक की अगली लोन लिमिट का लाभ मिलेगा। अब स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगी पूरी लोन राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्वनिधि योजना' को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को बैंकों द्वारा ब्याज की रकम काटकर लोन देने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुसार, बैंकों ने पूर्व में हितग्राहियों के लोन से जो ब्याज की राशि काटी थी, उसे अब वापस लौटाया जाएगा। यह कुल राशि लगभग 120 करोड़ रुपए है। दरअसल, पीएम स्वनिधि योजना ऐसे छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए हैं, जिन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए छोटे लोन की जरूरत पड़ती है। योजना के तहत केंद्र 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी देता है और बैंक का बाकी बचा ब्याज अनुदान मप्र सरकार देती है। हितग्राहियों को शून्य ब्याज पर पूरी रकम देने का प्रावधान है, लेकिन कुछ बैंक हितग्राहियों को ब्याज की रकम काटकर ये राशि दे रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इसकी वजह से हितग्राहियों का योजना से मोहभंग हो रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा गया। मंत्रालय ने राज्य सरकार से अपर कैप लगाने की सहमति दे दी है यानी अब हितग्राहियों को 14 फीसदी ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा और बैंक बिना ब्याज काटे ये राशि हितग्राहियों को देंगे।  14% ब्याज दर पर मिलेगा लोन दरअसल, केंद्र सरकार इस योजना में 7 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देती है, जबकि शेष ब्याज का भुगतान मध्यप्रदेश सरकार करती है। प्रावधान के अनुसार, हितग्राहियों को यह लोन 'शून्य ब्याज' पर मिलना चाहिए। लेकिन बैंक अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही ब्याज की रकम काटकर लोन दे रहे थे, जिससे छोटे व्यापारियों का नुकसान हो रहा था। अब राज्य सरकार ने वित्त मंत्रालय की सहमति से 14% ब्याज की 'अपर कैप' लगा दी है। इसका मतलब है कि अब बैंक बिना किसी कटौती के पूरी राशि वेंडर को देंगे और ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। पीएम स्वनिधि योजना में एमपी नंबर-1 दरअसल, पूरे देश में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान हासिल किया है। सितंबर 2025 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश ने अब तक 13 लाख 46 हजार से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों को इस योजना से जोड़कर रिकॉर्ड बनाया है। राज्य सरकार ने इन हितग्राहियों को 2 हजार 78 करोड़ रुपए का लोन वितरित किया है, साथ ही छोटे कारोबारियों को ब्याज के बोझ से मुक्त रखने के लिए अब तक 30 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी भी जारी की जा चुकी है, जो मध्यप्रदेश को इस कल्याणकारी योजना में देश का सिरमौर राज्य बनाती है। जानें क्यों बदला गया सिस्टम पीएम स्वनिधि योजना को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 'संजीवनी' माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकों द्वारा ब्याज की अग्रिम कटौती (Upfront Deduction) से वेंडर्स को पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद हितग्राही इस योजना से दूर हो रहे थे। इसी तकनीकी बाधा को दूर करने और योजना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 'स्वनिधि 2.0' वाले बदलाव किए गए हैं। योजना की 4 बड़ी ताकत 1. बिना गारंटी 'वर्किंग कैपिटल' का सहारा: कोविड-19 की मार झेलने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह योजना बिना किसी गारंटी के 'वर्किंग कैपिटल' (कार्यशील पूंजी) उपलब्ध कराती है। इसमें आपको किसी को जमानत देने या कागज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। 2. तीन किस्तों में मिलता है लाभ: योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि जैसे-जैसे आपका कारोबार बढ़े, लोन की राशि भी बढ़ती जाए:     पहली किस्त: ₹10,000 (कारोबार शुरू करने के लिए)     दूसरी किस्त: ₹20,000 (पुराना लोन चुकाने पर पात्र)     तीसरी किस्त: ₹50,000 (समय पर भुगतान करने पर बड़ी मदद) 3. प्रभावी रूप से 'जीरो परसेंट' ब्याज: यह योजना छोटे व्यापारियों पर कर्ज का बोझ नहीं डालती। केंद्र सरकार लोन पर 7% की ब्याज सब्सिडी देती है। मध्यप्रदेश में इससे ऊपर का जितना भी ब्याज बैंक लगाता है, उसका पूरा भुगतान राज्य सरकार करती है। यानी हितग्राही के लिए यह कर्ज पूरी तरह ब्याज मुक्त है। 4. डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 'कैशबैक' ईनाम: योजना सिर्फ कर्ज नहीं देती, बल्कि आधुनिक व्यापार से भी जोड़ती है। जो वेंडर्स डिजिटल पेमेंट (UPI/QR Code) का उपयोग करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से ₹1200 सालाना तक का कैशबैक सीधे बैंक खाते में दिया जाता है। समय पर भुगतान और बड़े लाभ योजना की सबसे अच्छी शर्त यह है कि यदि कोई हितग्राही महज 3 महीने की समय सीमा में लोन की मूल राशि चुका देता है, तो वह तुरंत अगले बड़े लोन (20 हजार और फिर 50 हजार) के लिए पात्र हो जाता है। इससे न केवल उनकी क्रेडिट हिस्ट्री सुधरती है, बल्कि कारोबार के विस्तार के लिए बड़ी पूंजी भी सुनिश्चित होती है।    योजना में अब तक क्या हो रहा था योजना के तहत मध्य प्रदेश में 32 सरकारी और निजी बैंक लोन बांट रहे थे। नियम के अनुसार, बैंकों को हर तीन महीने में सरकार से ब्याज सब्सिडी की राशि का दावा (क्लेम) करना होता है, जिसे सरकार सीधे हितग्राही के लोन खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करती है। लेकिन, ज्यादातर बैंक इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय एक आसान रास्ता अपना रहे थे:     ब्याज की एडवांस कटौती: बैंक हितग्राही को लोन देते समय ही ब्याज की अनुमानित राशि काटकर शेष रकम देते थे।     सब्सिडी क्लेम में देरी: वे सरकार से सब्सिडी का क्लेम 6 महीने या उससे भी अधिक समय के बाद करते थे। इस देरी के कारण कई बार हितग्राहियों के लोन … Read more

भोपाल के कई इलाकों में अतिक्रमण हटाए जाने की तैयारी, 1.30 लाख लोग प्रभावित—मंडला और छतरपुर में नई परियोजनाओं से संकट

भोपाल  भोपाल में भोज वेटलैंड व भदभदा, कलियासोत, मदन महल हिल्स में अतिक्रमण हटाए जाने हैं। मंडला में चुटका मप्र एटॉमिक पावर प्लांट, छतरपुर में डायमंड ब्लॉक लीज परियोजना, न्यू सिंगरौली कोयला खदान परियोजना से 1.30 लाख लोग प्रदेश में बेघर हो सकते हैं। विकास में बाधक बने घर हटाए – 2023 में झुग्गी-झोपड़ी, अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के तहत 90 घर तोड़े। इन्हीं वजह से 2022 में 489 घर व दुकानें तोड़ी गईं।  – 2023 में कई परियोजनाओं में आड़े आ रहे 390 अन्य घर खाली कराए। इंदौर में 157 घर पीएम आवास योजना में बने थे। -2022 में ऐसे 245 घर थे। 127 सबसे ज्यादा मच्छी बाजार में खाली। – 2022 में एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 5 गांव में 175 घर खाली कराए। ये रिजर्व के कोर क्षेत्र में थे। एक घर खरगोन में हटाया गया। देशभर में चला नया ट्रेंड लेकिन… बता दें कि देश के कोने-कोने में इस समय जघन्य अपराधों में लिप्त आरोपियों, अपराधियों और आतंकियों के घर तोड़े जा रहे हैं। यह नया ट्रेंड जरूर है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से लेकर विकास परियोजनाओं तक के लिए 2017 से 2023 के बीच यानी सात वर्ष में कम से कम 3.44 लाख मकान तोड़े जा चुके हैं। इन्हीं वजहों से अभी और करीब 1.7 करोड़ लोगों के घर टूटने के जोखिम पर हैं। हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क संगठन द्वारा जुटाई जानकारियों के अनुसार सात साल में हुई कार्रवाइयों की वजह से करीब 16 लाख लोग बेघर हुए, जिनमें से अधिकतर के लिए सरकारी स्तर पर विस्थापन योजनाएं भी बनाई गईं हैं। 2023 में भारत में कुल 1,07,499 और 2022 में 46,371 मकान तोड़े गए। इसके जरिए दोनों वर्षों में क्रमश: 5,15,752 और 2,22,686 लोगों को घरों से निकाला गया।

डाक विभाग की स्मार्ट पार्सल डिलीवरी, घर पर ताला होने के बावजूद पहुंचेगा पार्सल, मध्य प्रदेश में भी होगी शुरुआत

ग्वालियर  ग्वालियर में जल्द ही डाक विभाग का नया स्मार्ट पार्सल डिलीवरी सिस्टम (एसपीडीएस) लागू होगा, जो पार्सल डिलीवरी के पूरे अनुभव को और भी आसान और आधुनिक बनाएगा। अगर पोस्टमैन को घर पर कोई नहीं मिलता, तो अब ग्राहक अपनी पार्सल को स्मार्ट मशीन से कलेक्ट कर सकेंगे। ऐसे काम करेगा अगर ग्राहक पार्सल डिलीवरी के समय घर पर नहीं मिलते, तो पार्सल स्मार्ट मशीन में रखा जाएगा। ग्राहक को मैसेज भेज बताया जाएगा कि पार्सल कहां रखा है। ग्राहक ओटीपी के जरिए मशीन से पार्सल ले सकते हैं। इससे डिलीवरी का रिकॉर्ड भी ऑटोमेटिड अपडेट हो जाएगा। ग्वालियर के दो प्रमुख स्थानों पर सेवा मध्यप्रदेश के ग्वालियर में यह सेवा सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय के पास उपलब्ध होगी। नई सुविधा के बारे में डाक विभाग के प्रवर अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि ग्वालियर में रोजाना लगभग 350 से 400 पार्सल आते हैं और इनमें से 8-10 प्रतिशत पार्सल उसी दिन डिलीवर नहीं हो पाते। ऐसे में अब स्मार्ट पार्सल डिलीवरी सिस्टम इन समस्याओं को सुलझाने में मदद करेगा। इन शहरों में मिलेगी सुविधा इंदौर: तक्षशिला डिलीवरी, खातीवाला टैंक सियागंज ग्वालियर: सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय चेन्नई: अन्ना रोड, मायलापुर, टी. नगर, अंबत्तूर हैदराबाद: बंजारा हिल्स, ऊह्रश्वपल, वनस्थलीपुरम OTP दिखाने पर ही डिलीवरी भारतीय डाक विभाग ने डिलीवरी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ओटीपी आधारित प्रणाली भी शुरू की है। इसका मतलब है कि जब कोई पार्सल या आर्टिकल डिलीवरी के लिए पहुंचेगा, तो प्राप्तकर्ता ग्राहक के मोबाइल फोन पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। OTP दिखाने के बाद ही पार्सल दिया जाएगा। इससे गलत पते या किसी अन्य व्यक्ति को पार्सल मिलने की संभावना खत्म हो गई है। पार्सल सीधे उसी व्यक्ति को दिया जा रहा है, जिसके नाम से वह बुक किया गया है।

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत

प्रदेश के विशेषज्ञ ट्रांसको इंजीनियर्स ने रिकॉर्ड समय में 50 एमवीए पॉवर ट्रांसफार्मर को किया ऊर्जीकृत भोपाल  मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने मालनपुर  (भिंड) में तकनीकी दक्षता, सटीक योजना और उत्कृष्ट समन्वय का  उदाहरण प्रस्तुत करते हुए लगभग 15 दिन में 50 एमवीए क्षमता के नये पावर ट्रांसफार्मर का ट्रांसपोर्ट, स्थापना, संपूर्ण तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण कर एक बेहद अनुकरणीय कार्य किया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी भी पावर ट्रांसफार्मर के साइट पर पहुँचने के बाद उसके इरेक्शन, टेस्टिंग, आयल फिल्टेरेशन एवं ऊर्जीकरण में एक माह या उससे अधिक समय लग जाता है, किंतु  मालनपुर के ओद्योगिक क्षेत्र मे विद्युत की सामान्य बहाली की प्राथमिकता के कारण एम पी ट्रांसको ने तकनीकी रूप से जटिल , जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण  कार्य को मुख्य अभियंता (परीक्षण एवं संचार) अमर कीर्ति सक्सेना के कुशल निर्देशन में दिन रात एक कर न्यूनतम संभव समय में सफलतापूर्वक पूरा किया। एम.पी. ट्रांसको के इतिहास में यह विरला अवसर है जब  पुराने फेल ट्रांसफार्मर को हटाकर, नए उच्च क्षमता के  पावर ट्रांसफार्मर का सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन , स्थापना, आवश्यक सभी तकनीकी परीक्षण एवं ऊर्जीकरण  का बेहद संवेदनशील कार्य लगभग 15 दिनों में संभव हो सका हो। न्यूनतम समय में पूर्ण हुआ अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य – एमडी तिवारी एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने बताया कि एम.पी. ट्रांसको के 220 केवी सबस्टेशन मालनपुर में तकनीकी कारणों से  19 दिसंबर  को फेल हुए 40 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर नए 50 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफार्मर को न्यूनतम संभव समय में ट्रांसपोर्ट कर सबस्टेशन में स्थापित एवं ऊर्जीकृत किया गया। उन्होंने बताया कि  पावर ट्रांसफार्मर की डिस्मेंटलिंग, ट्रांसपोर्टेशन, साइट प्रिपरेशन, इरेक्शन, ऑयल फिल्ट्रेशन, कमिशनिंग एवं टेस्टिंग की संपूर्ण प्रक्रिया अत्यंत तकनीकी, समय-साध्य एवं सुरक्षा-संवेदनशील होती है। मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र के उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए, एम.पी. ट्रांसको के प्रदेश के विभिन्न भागों से नियुक्त किये गए अनुभवी अधीक्षण अभियंताओं ने  स्थानीय तकनीकी टीमों के साथ निरंतर   15 दिनों तक 24×7 कार्य करते हुए उच्च तकनीकी दक्षता, सतर्कता एवं समन्वय के साथ इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऊर्जा मंत्री ने दी बधाई  मालनपुर सबस्टेशन में रिकॉर्ड समय में नये पावर ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने पर बधाई देते हुए मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि एम.पी. ट्रांसको की यह सफलता उसके तकनीकी क्षमता, सुनियोजित रणनीति और टीमवर्क का सशक्त प्रमाण है, जो यह दर्शाती है कि प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के परिणामस्वरूप अब मालनपुर में लक्ष्मणपुरा औद्योगिक क्षेत्र के इंडस्ट्रियल फीडरों को पुनः सामान्य, निर्बाध एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति संभव हो सकेगी। 

लाडली बहना योजना में नया अपडेट: कुछ महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे पैसे, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल   मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना की अगली किस्त खाते में आने वाली है. इससे पहले योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही योजना की राशि पात्र महिलाओं के खातों में सरकार की ओर से डाली जाएगी, लेकिन सभी महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा. कुछ लाभार्थियों के नाम सूची से हट सकते हैं और कई के पैसे खाते में अटक सकते हैं. जी हां… बैंक खाता, आधार लिंक या पात्रता से जुड़ी छोटी गलती भी परेशानी बन बहनों के लिए बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि महिलाएं समय रहते अपनी जानकारी जांच लें, ताकि लाभ बिना रुकावट मिलता रहे. आइए आपको आगे की बात बताते हैं. जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लें दरअसल, मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना के तहत जल्द ही महिलाओं के खातों में 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी. सरकार ने इसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं. तय तारीख के आसपास डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके. जिन महिलाओं के दस्तावेज पूरे नहीं हैं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या जो अब योजना की पात्रता में नहीं आतीं, उन्हें इस बार लाडली बहना योजना की राशि नहीं दी जाएगी. इसलिए जरूरी है कि सभी जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लिए जाएं.  मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही लाभ ट्रांसफर होने वाला है, लेकिन सभी महिलाओं को इसका फायदा नहीं मिलेगा. कुछ बहनों के नाम लिस्ट से हट सकते हैं और कई के खाते में पैसा अटक सकता है .बैंक, आधार और पात्रता से जुड़ी छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है.पूरी जानकारी पढ़ें और जानें कैसे सुनिश्चित करें कि आपका नाम लाभार्थी सूची में बना रहे.  बता दें कि इस योजना के लिए राशि हर महीने की 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जारी की जाती है. इसलिए मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की अगली किस्त (32वीं किस्त) 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच कभी भी जारी की जा सकती है. हालांकि पैसे जारी होने की सही तारीख की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. बैंक खाता निष्क्रिय होने पर क्या होगा? जांच के दौरान यदि गलत जानकारी या अपात्रता पाई जाती है, तो महिलाओं का नाम योजना से हटाया जा सकता है और आगे भुगतान रोक दिया जाएगा. जिन बहनों का बैंक खाता निष्क्रिय है, आधार सीडिंग या एनपीसीआई लिंक नहीं है, उनके खाते में राशि अटक सकती है. महिलाएं अपने नजदीकी शिविर, पंचायत या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेज और स्टेटस अपडेट करा सकती हैं. ऐसी महिलाओं के पैसा आएंगे खाते में महिलाएं अपना आधार-बैंक लिंक जरूर जांच लें, सभी दस्तावेज अपडेट रखें और योजना की पात्रता सुनिश्चित करें. जानकारी सही होने पर लाडली बहना योजना की 1500 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

8वें वेतन आयोग का ऐलान, कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी—किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

भोपाल  देशभर के सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा चरम पर है। केंद्र सरकार ने इसकी प्रक्रिया की शुरुआत पहले ही कर दी है, वहीं राज्यों में भी हलचल तेज हो गई है। नए साल पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा ऐलान करते हुए 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही असम यह फैसला लेने वाला देश का पहला राज्य बन गया। इस ऐलान के बाद अब मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। एमपी में तेज हुई हलचल, कर्मचारी संघ सक्रिय असम की पहल के बाद मध्यप्रदेश में भी 8वें वेतन आयोग को लेकर कवायद तेज हो गई है। राज्य कर्मचारी संघ ने इसे लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को होने वाले संभावित लाभ का पूरा हिसाब-किताब तैयार करने की तैयारी चल रही है। राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव ने बताया कि जल्द ही इस विषय पर विशेष बैठक बुलाई जाएगी।  8वें वेतन आयोग: जानें किस वर्ग को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा 8वां वेतन आयोग क्या है? सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन की समीक्षा की जा सके। 8वां वेतन आयोग भी इसी उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते और पेंशन में संशोधन किया जाएगा, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों पर कम हो सके। कितने लोग होंगे लाभार्थी? इस वेतन आयोग से करीब 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी (रक्षा कर्मियों सहित) और लगभग 65 लाख पेंशनभोगी (रक्षा सेवानिवृत्तों सहित) लाभान्वित होंगे। यानी कुल मिलाकर करीब एक करोड़ लोग इस फैसले के दायरे में आएंगे। वेतन बढ़ोतरी कैसे तय होगी? 8वें वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी का आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। अभी सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक फिटमेंट फैक्टर 2.15 से लेकर 2.57 तक हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, बेसिक सैलरी में उतनी ही ज्यादा बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रखा जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 38,700 रुपये हो सकती है। कितना बढ़ेगा वेतन? विशेषज्ञ करेंगे गणना कर्मचारी संघ के मुताबिक –  6वें और 7वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा सभी संवर्ग, श्रेणी, वेतनमान और ग्रेड पे के आधार पर आकलन होगा वित्त विशेषज्ञों से चर्चा कर संभावित लाभ का खाका तैयार किया जाएगा इसके बाद निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों से भी मुलाकात करेगा। केंद्र सरकार का बड़ा कदम गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं। केंद्र सरकार ने आयोग को 18 महीने में रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। अब सवाल यही—कब मिलेगा फायदा? असम की पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य राज्य भी जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं। अगर मध्यप्रदेश में भी 8वां वेतन आयोग लागू होता है, तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को वेतन और पेंशन में बड़ा फायदा मिल सकता है। नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं… कितना फायदा होगा, इसका करेंगे हिसाब किताब राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार 8 वें वेतनमान में कर्मचारियों, अधिकारियों को होनेवाले फायदे का पूरा हिसाब निकाला जाएगा। वित्त विशेषज्ञों से भी इस संबंध में बात करेंगे। इससे जो निचोड़ निकलेगा, राज्य सरकार को उसकी जानकारी देंगे। संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव के अनुसार जल्द ही इसके लिए बैठक बुलाई जाएगी। संभावित लाभ के आकलन के लिए कठिन कवायद राज्य कर्मचारी संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में 8 वें वेतन आयोग के लिए 6 वें और 7 वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी संवर्ग और श्रेणी के अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतनमान और ग्रेड पे के हिसाब से 8 वें वेतनमान से संभावित लाभ का आकलन करेंगे।कर्मचारियों, विशेषज्ञों से चर्चा के बाद निष्कर्षो से राज्य सरकार को अवगत कराने ज्ञापन तैयार करेंगे। इसके साथ ही राज्य कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल सीएम कार्यालय जाएगा। प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों को भी यह ज्ञापन दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए बड़ा कदम, 100 करोड़ की लागत से बीपीसीएल कौशल विकास केन्द्र बनेगा

सागर  बीपीसीएल बीना रिफाइनरी (BPCL Bina Refinery) द्वारा क्षेत्र के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए कौशल विकास केन्द्र खोला जा रहा है। इसके लिए स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिसमें जल्द काम शुरू हो जाएगा और केन्द्र की शुरुआत होने पर क्षेत्र सहित आसपास के जिले के युवाओं को दूसरे शहरों में प्रशिक्षण लेने नहीं जाना पड़ेगा। यह मांग लोगों की लंबे समय से चली आ रही थी। 100 करोड़ में बनेगा केंद्र जानकारी के अनुसार कौशल विकास केन्द्र (Skill Development Center) करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा, जिसमें आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केन्द्र से प्रत्येक वर्ष करीब 1000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलेगा और 500 विद्यार्थियों को रुकने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था रहेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृति मिल गई है और टेंडर प्रक्रिया चल रही है। दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा प्रशिक्षण लेने अभी शहर में बड़े तकनीकी इंस्टीट्यूट न होने से युवाओं को भोपाल, उज्जैन, इंदौर आदि शहरों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ता है, जिसमें रुपए खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही कई युवा दूसरे शहरों में जा भी नहीं पाते हैं। इन कोर्सों में मिलेगा प्रशिक्षण कौशल विकास केन्द्र में आधुनिक कोर्स जैसे रोबोटिक्स, सीएमसी मशीन ट्रेनिंग, हैबी ड्यूटी इंडस्ट्रीयल वेलंडिग इलेक्ट्रीशियन, पेट्रोकेमिकल, सेफ्टी सुपरवाइजर, ऑपरेटर सहित अन्य तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण को लेकर युवाओ को रिफाइनरी सहित अन्य उद्योगों में रोजगार मिलेगा। साथ ही स्वयं का रोजगार भी स्थापित कर सकेंगे। मिल गई है स्वीकृति कौशल विकास केन्द्र के निर्माण की स्वीकृति बोर्ड से मिल गई है। इस प्रोजेक्ट पर सौ करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे और प्रत्येक वर्ष करीब 1000 युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। यह केन्द्र बीना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धी होगी।- केपी मिश्रा, चीफ मैनेजर, एचआर, बीपीसीएल बीना रिफाइनरी