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गुना का मास्टर प्लान: न्यायिक गलियारा, शिक्षा हब और तात्याटोपे यूनिवर्सिटी से होगा शहर का विकास

गुना   शहर समेत जिला 2047 में कैसा होगा, क्या-क्या आवश्यकता पड़ेगी? संकरी सड़कें और गलियों से जनता को कैसे मुक्ति दिलाई जाए? इस दिशा में कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए मास्टर प्लान और 2047 के अनुसार सुविधाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने कार्ययोजना बनाई है। उसको अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में जगनपुर में एसडीएम और तहसील को शिफ्ट कर दिया है। वैसे गुना शहर की बसाहट चारों तरफ हो, इस दिशा में भी जिला प्रशासन ने कार्ययोजना अनुसार काम शुरू कर दिया है। जल्द ही यहां सजेगा न्यायिक गलियारा, सिंगवासा बनेगा शिक्षा का हब, और तात्याटोपे यूनिवर्सिटी से बदलेगी जिले की तकदीर। 2047 के मास्टर प्लान के तहत ये शहर सत्ता का केंद्र बन सकता है। दरअसल, शहर विस्तार की जगह संकरा होता चला गया। वजह यह रही कि कलेक्ट्रेट जिसको शहर से तीन-चार किमी दूर ले जाने की योजना थी, वह पुरानी कलेक्ट्रेट से कुछ दूरी पर ही 2017 में बना दिया गया। यही स्थिति मुख्य बाजार सदर बाजार की हो गई है। ऐसे बसेगा नया शहर शहर से दो किमी दूर जगनपुर बसा हुआ है। यहां सबसे पहले नपा की गरीबों के लिए आवास योजना छह-सात साल पहले लाई गई थी। इसके लिए आठ बीघा जमीन स्वीकृत की गई थी। यहां 1800 फ्लेट बन चुके हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राहियों को फ्लेट आवंटित किए गए हैं। 750 फ्लेट और जल्द बनकर आवंटित होने की प्रक्रिया चल रही है। जिला न्यायालय व न्यायिक अधिकारियों के आवास बनाए जाने की योजना है, जिसके लिए राजस्व विभाग ने 16 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। उच्च शिक्षा विभाग ने यहां एक मॉडल कॉलेज का निर्माण कराया है। जगनपुर में सीएम राइज स्कूल भवन बनना प्रस्तावित है। हाल ही में एसडीएम कार्यालय और तहसील वहां पहुंच चुकी हैं। सिंगवासा चक शहर से चार किमी दूर ग्राम पंचायत पिपरौदा खुर्द के ग्राम सिंगवासा चक बसा है। यहां नपा ने कुछ समय पूर्व आमोद-प्रमोद पार्क बनवाया था। इससे पीछे लगभग 120 बीघा जमीन क्रांतिवीर तात्याटोपे यूनिवर्सिटी के लिए चिह्नित की है। यहां अडाणी सीमेन्ट फैक्टरी का संचालन होगा। सिंगवासा चक में ही यूनिवर्सिटी के पास लॉ कॉलेज के लिए राजस्व विभाग ने जमीन आवंटित की है। सहकारिता विभाग का ग्रेडिंग प्लांट भी बन रहा है। कुछ समय पूर्व एबी रोड पर आरटीओ कार्यालय भवन भी बन गया था। इसी जगह रिंग रोड और अंडर ब्रिज बनाए जाने कीयोजना है। नेगमा पर भी नजर गुना से छह किमी दूर ऊमरी रोड पर नेगमा के आसपास कई प्रोजेक्ट लाइन में चल रहे हैं। पूर्व में यहां एयरपोर्ट के लिए जमीन चिहिनत की गई थी। बाद में एयरपोर्ट का प्रस्ताव वहां से दूसरी जगह के लिए तैयार हुआ था। मोहनपुरकलां, मंगवार, रानीगंज और मोतीपुरा में अलग-अलग प्रोजेक्ट का काम होना है।

इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले में NHRC का हस्तक्षेप, दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी

 इंदौर  इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से कई लोगों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस गंभीर मामले को मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए मध्यप्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। NHRC ने अपने बयान में कहा है कि रिपोर्ट के अनुसार भगीरथपुरा इलाके के निवासी कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से उत्पन्न स्थिति को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में हालात की समीक्षा के साथ-साथ राहत और बचाव कार्यों के समन्वय पर चर्चा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संभागीय आयुक्त सुदाम खड़े, जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही दूषित पानी से प्रभावित सभी लोगों को निशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उपचाराधीन लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।  

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं की MSP 2600 रुपये, किसानों को सिर्फ 15 रुपये बोनस

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप इस साल भी किसानों से 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार पर बोनस का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। इस बार किसानों को बोनस के रूप में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे। बोनस के गणित से समझिए सरकार को राहत पिछले साल गेहूं का समर्थन मूल्य 2,275 रुपये था, जिस पर राज्य सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर 2,400 रुपये में खरीदी की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 2,600 रुपये करने का निर्णय लिया गया था, जिससे सरकार पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भार आया था। लेकिन इस साल केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये कर दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की 2,600 रुपये की घोषणा को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अब अपनी जेब से केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलाने होंगे। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भेज दिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है। फरवरी से पंजीयन और मार्च में खरीदी शुरू प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। फरवरी माह से किसानों का पंजीयन शुरू किया जाएगा और मार्च से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ होगी। पिछले वर्ष करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया था, और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद में सरकार ने व्यवस्थाएं बनाना शुरू कर दिया है। वित्तीय संकट के बीच राज्य की एजेंसियां ही करेंगी खरीदी नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड वर्तमान में लगभग 72 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सीधी खरीदी का प्रस्ताव दिया था ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके, लेकिन केंद्र से अभी तक सहमति नहीं मिली है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत ही राज्य की एजेंसियां गेहूं का उपार्जन करेंगी।  

भोपाल मंडल की ट्रेनों में नया सुरक्षा मॉडल, सादे कपड़ों में जवान करेंगे गश्त

भोपाल  भोपाल से हर दिन हजारों यात्री लंबी दूरी और लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। यात्रियों की इसी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने वर्ष 2025 में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। पिछले साल सामने आई चोरी और असुरक्षा की घटनाओं से सबक लेते हुए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और जीआरपी ने मिलकर नया सुरक्षा मॉडल लागू किया है। अब ट्रेनों में लगातार गश्त, सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है। भोपाल मंडल से गुजरने वाली प्रमुख एक्सप्रेस और भीड़भाड़ वाली ट्रेनों पर खास नजर रखी जा रही है। रात के समय यात्रा करने वाले कोच और संवेदनशील ट्रेनों में चेकिंग तेज की गई है। वर्ष 2025 में आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई में 160 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 125 मामलों में चोरी गया सामान बरामद किया गया। करीब 33 लाख रुपये की रिकवरी हुई है। राहत की बात यह है कि चोरी हुए मोबाइल फोन में से लगभग आधे यात्रियों को वापस मिल चुके हैं। सीसीटीवी कैमरे लगाए गए बिलासपुर एक्सप्रेस और इंदौर एक्सप्रेस में चोरी की शिकायतें ज्यादा मिलने के बाद इन ट्रेनों को विशेष निगरानी में रखा गया है। साथ ही इटारसी से रानी कमलापति स्टेशन के बीच के हिस्से को सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। यहां अतिरिक्त पेट्रोलिंग और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने जीरो टालरेंस नीति अपनाई है। छेड़छाड़ के मामलों में तुरंत कार्रवाई की जा रही है। पहले जहां मामलों के निपटारे में महीनों लग जाते थे, अब औसतन दो महीने में ही केस सुलझाए जा रहे हैं। ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता     भोपाल से गुजरने वाली और यहां से चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगातार गश्त, सादे कपड़ों में तैनाती और तकनीकी निगरानी के जरिए ट्रेनों के अंदर होने वाली घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा रहा है। – एमएस सोमवंशी, थाना प्रभारी, आरकेएमपी  

19 करोड़ की लागत से भीमबैटका में देश का पहला रॉक आर्ट ईको पार्क म्यूज़ियम विकसित होगा

भोपाल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भीमबेटका में बनी 30 हजार साल पुरानी शैल-कलाएं अब पर्यटकों के लिए और अधिक सुलभ होने जा रही हैं। राज्य पर्यटन निगम यहां देश का पहला अस्थायी 'रॉक आर्ट ईको पार्क द्ब्रयूजियम' विकसित करेगा। 1.12 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले इस संग्रहालय का उद्देश्य भीमबेटका के सातों पहाडिय़ों में फैले सभी 750 से अधिक शैल चित्रों का अनुभव पर्यटकों को एक ही स्थान पर कराना है। इसकी अनुमानित लागत 19 करोड़ रुपए है और इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस द्ब्रयूजियम में पारंपरिक भवन या हॉल नहीं बनेंगे, बल्कि अस्थायी सामग्री से भीमबेटका के मूल परिवेश जैसा ही ईको पार्क विकसित होगा, जहां पर्यटक डिजिटली इन्हें देख सकेंगे। डिजिटल होगी जानकारी प्राचीन कलाओं का डिजिटली प्रजेंटेशन म्यूजियम में शैल चित्रों की विशेषताओं, महॠव और अध्ययन स्रोतों की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी। प्रत्येक शैल चित्र की रोचक और सटीक सूचना, फोटो, लिखित विवरण, ऑडियोवीडियो, पुरातत्वविदों की कमेंट्री और प्रमाणित रिसर्च पेपर उपलह्ध होंगे। एआइ से इसे जीवंत व रचनात्मक बनाया जाएगा, ताकि पर्यटकों को अद्भुत अनुभव मिले।   देख सकेंगे 10 किमी में फैले शैलाश्रय भीमबेटका में शैल चित्रों के कई क्लस्टर हैं, जो लगभग 10 किमी के दायरे में फैले हुए हैं। यहां सात पहाडिय़ों में 750 से अधिक शैलाश्रय मौजूद हैं। इनमें से वर्तमान में केवल एक ही क्लस्टर पर्यटकों के लिए खुला है, जिसमें 'ऑडिटोरियम गुफा' और 'चिडिय़ाघर रॉक' जैसे प्रसिद्ध 15 शैलाश्रय शामिल हैं। दूर-दराज के और दुर्लभ जंगली क्षेत्रों में स्थित बाकी क्लस्टरों (जैसे जावरा, विनयका, भोंरावली और लाखा जुआर) तक पर्यटक पहुंच नहीं पाते। यह नया म्यूजियम इन सभी अनदेखे शैल चित्रों की रेप्लिका (हूबहू नकल) को उनके मूल स्वरूप में प्रदर्शित करेगा, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर पूरे भीमबेटका का अनुभव कर पाएंगे। यह डिजाइन न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है, बल्कि पर्यटकों को प्राचीन गुफाओं के वास्तविक अनुभव के करीब भी ले जाएगा।      

सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश के विकास की गति अब होगी और भी तेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप मनायेंगे खाचरौद को दी सांदीपनि विद्यालय और नवीन कृषि उपज मंडी की सौगात खाचरौद में बनेगा संयुक्त तहसील कार्यालय और जनपद पंचायत का नया भवन मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन खाचरौद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के 'समग्र विकास' के संकल्प के साथ काम कर रही है। हमारा मध्यप्रदेश अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी वर्ग या व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। विकास की बात पर हम सबका सहयोग लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास की बयार है। विकास की यह गति अब और तेज होगी। आप सबके सेवक के रूप में वे खुद चौबीसों घंटे सातों दिन प्राण-प्रण से सेवा में जुटे हुए हैं। सबका कल्याण ही हमारा लक्ष्य है। नागरिकों की समृद्धि और खुशहाली ही हमारा पारितोषिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने यहां 78 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत वाले पूर्ण एवं प्रस्तावित 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 48 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत के 16 कार्यों का लोकार्पण एवं 30 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत वाले 23 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी कार्यों से खाचरौद के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। यह विकास कार्य खाचरौद के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। सांदीपनि विद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर, बच्चों के बेहतर भविष्य की लिखेंगे नई इबारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद में 35 करोड़ 40 लाख की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन, 11 करोड़ 30 लाख की लागत से नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण सहित अन्य कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद का सांदीपनि विद्यालय आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का प्रतीक बनेगा और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करायेगा। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में शिक्षा के पवित्र मंदिर के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। यह हमारे बच्चों के बेहतर और सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद के नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण में किसानों की सुविधा के लिए कृषक विश्राम भवन, भोजनालय, पानी की टंकी एवं प्याऊ भी बनाये गए हैं। मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रुपये लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय के नवीन भवन, 5 करोड़ 25 लाख लागत से बनने वाले जनपद पंचायत भवन एवं 6 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम-2.0) सहित अन्य प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित खाचरौद के माध्यमिक विद्यालय में 11 स्मार्ट क्लासेस का लोकार्पण भी इस मौके पर किया। खाचरौद में बनेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में बहुतायत से होने वाली हरी मटर को देश-विदेश तक पहुंचाने और अन्य सभी फसलों को भी मार्केट लिंकेज दिलाने के लिए खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने और खिलाड़ियों के लिए नया स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खाचरौद से रतलाम को डायरेक्ट फोर लेन से जोड़ा जाएगा, जिससे खाचरौद को भी इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया की सीधी पहुंच मिल सके। 5 करोड़ की लागत से बनेगा फोरलेन हाई-वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा से खाचरौद से जावरा से उज्जैन होते हुए करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया फोरलेन हाई-वे बनाया जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना से मालवा-निमाड़ और चंबल का पूरा क्षेत्र भरपूर सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 5 सालों में हम प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर कृषि रकबे तक पहुंचा देंगे। किसान एवं कृषि से जुड़े उद्यामियों को देंगे नई दिशा और अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 किसानों के कल्याण का साल है। इस दौरान हमारा पूरा फोकस किसानों पर ही रहेगा। इस साल हम कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देंगे, जिससे किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को नई दिशा और अवसर मिलेंगे। गेहूं की खरीदी पर हम किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रहे हैं। हम किसानों की आय बढ़ायेंगे। किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनायेंगे। इसके लिए प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध करायेंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प दिए जाएंगे। इससे उन्हें बिजली बिल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। किसान खुद बिजली उत्पन्न करके खेतों में सिंचाई, छोटा-मोटा व्यवसाय और निजी उपभोग भी कर सकेंगे। साथ ही सरप्लस बिजली बेचकर अतिरिक्त आयार्जन भी वे कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। गरीबों और निराश्रितों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश के हर जरूरतमंद को शासन की सेवाएं, सुविधाएं और संबल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नागदा की विश्व में अपनी अलग ही पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में सांस्कृतिक धारा का अभ्युदय हो रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए हमारी तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सबसे अच्छे स्कूल बन रहे हैं। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यही समय है, सही समय है। इसी क्रम में आज खाचरौद को भी नया सांदीपनि विद्यालय मिला है। हमारी सरकार विरासत के संरक्षण के मार्ग पर चलते हुए प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण करा रही है। श्रीकृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। … Read more

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट और इकोसिस्टम अवार्ड्स 11-12 जनवरी को, वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनने की पहल

मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 11 और 12 जनवरी को मध्यप्रदेश को वैश्विक स्टार्टअप डेस्टीनेशन बनाने की पहल भोपाल मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट एवं इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 का आयोजन 11 और 12 जनवरी 2026 को रवीन्द्र भवन भोपाल में होगा। यह आयोजन प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय पहल के रूप में होगा। इस समिट का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग द्वारा किया जा रहा है। इससे राज्य में उद्यमिता, नवाचार एवं समावेशी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। समिट में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। इस आयोजन की परिकल्पना मध्यप्रदेश को एक वैश्विक स्टार्टअप गंतव्य के रूप में स्थापित करने के महत्वपूर्ण कदम के रूप में की गई है। समिट का उद्देश्य एवं महत्व समिट का उद्देश्य स्टार्टअप्स, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स, उद्योग जगत के लीडर, शैक्षणिक और वित्तीय संस्थानों तथा शासकीय विभागों के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है जिससे नवाचार आधारित उद्यमशील विकास को गति दी जा सके। वर्तमान में मध्यप्रदेश में एक सशक्त एवं समावेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम विद्यमान है, जिसमें लगभग 6,344 DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स शामिल हैं। इनमें लगभग 3,023 स्टार्टअप्स महिलाओं के नेतृत्व वाले हैं। यह इकोसिस्टम 100 से अधिक इनक्यूबेटर्स के मजबूत संस्थागत ढांचे द्वारा समर्थित है। आयोजन एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम के अंतर्गत प्रमुख उपलब्धियों को प्रस्तुत करेगा, संरचित नीतिगत विमर्श एवं स्टार्टअप–निवेशक संवाद को सक्षम बनाएगा तथा एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 के माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करेगा। उद्घाटन सत्र के दौरान “स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम” का विमोचन भी किया जाएगा, जिसमें राज्य के उल्लेखनीय स्टार्टअप्स की सफल कहानियाँ सम्मिलित होंगी और यह भावी उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य करेगा। पहले दिन की गतिविधियां एमपी स्टार्टअप समिट 2026 के दो दिवसीय आयोजन के रूप में नियोजित किया गया है, ताकि सभी इकोसिस्टम हितधारकों की सार्थक एवं परिणामोन्मुखी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। पहला दिन 11 जनवरी 2026 को इकोसिस्टम सुदृढ़ीकरण एवं प्रारंभिक चरण के निवेश संवाद पर केंद्रित होगा। इसमें इनक्यूबेटर सस्टेनेबिलिटी पर मास्टरक्लास, एग्री एफपीओ को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने पर विषयगत चर्चा, स्टार्टअप पिचिंग का क्वालिफायर राउंड तथा निवेशकों एवं इकोसिस्टम लीडर्स के साथ क्लोज्ड-डोर नेटवर्किंग डिनर होगा। समापन 12 जनवरी को होगा दूसरा दिन 12 जनवरी 2026 को रणनीतिक सहभागिता, मान्यता एवं सेक्टर-विशिष्ट ज्ञान साझा करने पर केंद्रित रहेगा। इसमें स्टार्टअप पिचिंग के फाइनल राउंड, मुख्यमंत्री, डॉ. यादव द्वारा उद्घाटन एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ, स्टार्टअप सक्सेस स्टोरीज़ कंपेंडियम का विमोचन, एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स-2026 का वितरण तथा प्राथमिकता वाले विषयों पर सेक्टर-विशिष्ट सत्र शामिल होंगे। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप राज्य में स्टार्टअप विकास हेतु नीतिगत पहलों एवं भविष्य की रूपरेखा को प्रस्तुत करेंगे। एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026 एमपी स्टार्टअप इकोसिस्टम अवार्ड्स 2026, समिट की एक प्रमुख गतिविधि होगी। छह स्टार्टअप श्रेणियों—श्रेष्ठ महिला उद्यमी, श्रेष्ठ युवा उद्यमी, सर्वाधिक नवोन्मेषी स्टार्टअप, श्रेष्ठ प्रारंभिक चरण स्टार्टअप, श्रेष्ठ ग्रोथ-स्टेज स्टार्टअप और प्राथमिकता क्षेत्रों में श्रेष्ठ स्टार्टअप के अंतर्गत नामांकन प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त इनक्यूबेटर्स जैसे प्रमुख इकोसिस्टम योगदानकर्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा। उद्योग जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, वेंचर कैपिटलिस्ट्स एवं वरिष्ठ इकोसिस्टम प्रतिनिधियों से युक्त एक जूरी का गठन किया गया है, जो पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों का आकंलन कर पुरस्कार विजेताओं की संस्तुति करेगी। प्रदर्शनी एवं सहभागिता इस समिट में लगभग 3 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, एक्सेलेरेटर्स, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक प्रतिनिधि, छात्र, शासकीय अधिकारी एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे। प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टॉल्स लगेंगे, जिसमें स्टार्टअप्स के साथ इनक्यूबेटर्स, फंड्स एवं बैंक, एक जिला एक उत्पाद पहल तथा शासकीय विभागों के लिए स्टॉल्स आरक्षित किए जाएंगे। यह प्रदर्शनी स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रदर्शित करने, निवेशकों से जुड़ने और नीति निर्माताओं एवं उद्योग हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगी। उभरता हुआ स्टार्टअप नवाचार केंद्र मध्यप्रदेश स्टार्टअप समिट 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व एवं एमएसएमई मंत्री के नीतिगत मार्गदर्शन के अनुरूप एक रणनीतिक एवं उच्च प्रभाव वाली पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसका उद्देश्य मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए स्टार्टअप एवं नवाचार केंद्र के रूप में सशक्त करना है। यह समिट इकोसिस्टम सहयोग को गहराई प्रदान करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और राज्य में सतत उद्यमशील विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

MP में सरकारी बसों का शुभारंभ, 20 से ज्यादा शहर जुड़ेंगे नए साल पर ‘सुगम परिवहन’ सेवा से

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही 'सरकारी बस' सड़कों पर एक बार फिर दौड़ते नजर आएंगी। मोहन सरकार जल्द ही 'राज्य परिवहन निगम' की तर्ज पर नए सिरे से बस सेवा प्रारंभ करने वाली है। नए साल में प्रदेश की जनता को यह सौगात मिलने वाली है। बता दें कि इसका नया नाम 'सुगम लोक परिवहन सेवा' होगा जो पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। जानकारी अनुसार प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने 'सुगम लोक परिवहन सेवा' के जरिए एमपी में सरकारी बसों की वापसी करने जा रहे हैं। सेवा चाहू होने के बाद दूरस्थ्य गांव तक तक सस्ती और लग्जरी यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 101 करोड़ की अंशपूंजी को बजट को स्वीकृति दी है। बता दें कि वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए गठित SPVs में से 16 कंपनियां कार्यरत हैं, जिन्हें अब संभागीय कंपनियों में मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। कंपनियों पर नियंत्रण के लिए 'होल्डिंग कंपनी' का गठन प्रदेश में बसों के परिवहन सेवा और व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा इसके एकीकृत संचालन के लिए 7 कंपनियों पर दारोमदार होगा। इन सातों कंपनियों पर नियंत्रण के लिए स्टेट लेवल पर 'होल्डिंग कंपनी' का गठन किया जाएगा। यह कंपनी कंपनीज एक्ट—2013 के तहत गठित की जाएगी, साथ ही जिला स्तर पर यात्री परिवहन समितियों के गठन को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। बस टर्मिनल व अन्य स्ट्रक्चर PPP मॉडल पर होंगे बता दें कि एमपी में सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बस स्टेंड, टर्मिनल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। बस संचालन और संधारण भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निजी बस ऑपरेटर्स के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि इन सब पर पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी का रहेगा। 

विवाह संस्कार और रीति-रिवाज भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विवाह संस्कार और रीति-रिवाज हमारी भारतीय गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कर्नाटक के राज्यपाल गेहलोत नागदा में विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल नव दंपति को दिया आशीर्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विवाह संस्कार हमारी भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण हिस्सा है। पाणिग्रहण संस्कार भारतीय समाज में विशेष महत्व रखता है। विवाह के माध्यम से कन्या अपने नए जीवन की शुरुआत करती है और माता–पिता का आशीर्वाद उसके जीवन को नई दिशा प्रदान करता है। ये सभी रीति–रिवाज हमारी गौरवशाली परंपरा के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने नव दंपत्ति एवं परिवारजनों को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नागदा में  राजेश धाकड़ के सुपुत्र के विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए। कर्नाटक के राज्यपाल  थावरचंद गेहलोत भी विवाह कार्यकम में शामिल हुए और उन्होंने नवविवाहित वर–वधू रितिक एवं वर्षा को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय दांपत्य जीवन की कामना की। कर्नाटक के राज्यपाल  गेहलोत और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवारजनों के साथ सामूहिक फोटो सेशन में सहभागिता की एवं सहभोज भी किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद  बाल योगी उमेशनाथ, घटिया विधायक  सतीश मालवीय, नागदा विधायक  तेजबहादुर चौहान, शाजापुर विधायक अरुण भीमावत सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

इंदौर दूषित पानी मामले में CM मोहन यादव ने लिया बड़ा एक्शन, निगम कमिश्नर को नोटिस, कई अधिकारियों पर कार्रवाई

 इंदौर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से उपजी त्रासदी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. शुक्रवार सुबह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए हैं.  इसके अलावा, प्रदेश के मुखिया ने इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए हैं. इससे पहले मुख्यमंत्री ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित जोनल अधिकारी जोन क्रमांक 4, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री PHE को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड और प्रभारी उपयंत्री PHE को तत्काल प्रभाव से सेवा से बाहर कर दिया था. घटना की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जांच समिति गठित की गई है. मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासन ने प्रभावित इलाके में युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू किया है. क्षेत्र के 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा चुकी है. अब तक कुल 272 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल गई है. वर्तमान में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 ICU में हैं. MY अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. मौत के आंकड़ों पर 'सस्पेंस' मुख्यमंत्री और प्रशासन सख्त कदम उठा रहे हैं, वहीं मौतों की संख्या को लेकर असमंजस अभी भी बना हुआ है. प्रशासन ने केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 मौतों की जानकारी होने की बात स्वीकार की है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक 6 महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की जान जा चुकी है. पाइपलाइन में लीकेज, पानी दूषित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब टेस्ट रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि इलाके में पीने का पानी एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित हो गया था. हालांकि, CMHO ने रिपोर्ट के विस्तृत नतीजे साझा नहीं किए. प्रशासनिक अधिकारी भी इस बारे में साफ जानकारी देने से बच रहे हैं. भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज मिला, जिस जगह पर एक शौचालय बना हुआ हैण् उन्होंने दावा किया कि लीकेज के कारण पानी की सप्लाई दूषित हो गई. पिछले नौ दिनों में भागीरथपुरा में 1400 से ज्यादा लोग उल्टी और डायरिया से प्रभावित हुए हैं.