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सुशासन दिवस पर ग्वालियर में बड़ी सौगात, अमित शाह करेंगे अटल म्यूजियम का उद्घाटन

ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिंसबर को ग्वालियर के दौरे पर हैं। इस दिन गृह मंत्री महाराज बाड़ा स्थित गोरखी स्कूल में तीन साल पहले बनकर तैयार अटल म्यूजियम का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री इस म्यूजियम को देखने के लिए पहुंच सकते हैं, क्योंकि उनका अटलजी के पैतृक निवास जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। अटल म्यूजियम के साथ ही शासकीय प्रेस बिल्डिंग में तैयार किए गए औद्योगिक म्यूजियम का भी लोकार्पण होने की संभावना है, क्योंकि ये म्यूजियम भी बनकर तैयार है और इसके संचालन-संधारण की एजेंसी भी फाइनल कर ली गई है। स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के माध्यम से लोकार्पण वाले प्रोजेक्टों में दोनों म्यूजियम का प्रस्ताव भेजा गया था। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारा लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये में अटल म्यूजियम को तैयार कराया गया था। वर्ष 2022 में ये म्यूजियम बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अभी तक इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। अटलजी की यादों को समर्पित इस म्यूजियम में उनसे जुड़ी कई वस्तुएं रखी हुई हैं। म्यूजियम में अटलजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती गैलरियों में फोटो गैलरी, काव्य गैलरी, साइंस गैलरी, डार्क रूम गैलरी सहित विभिन्न गैलरियों का समावेश किया गया है। इनके माध्यम से अटल जी जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। वहीं साइंस गैलरी के माध्यम से जहां अटलजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भारत के तकनीक और विज्ञान में सफलता की कहानी को डायरोमा माडल इत्यादि द्वारा प्रदर्शित किया गया है, तो वहीं काव्य गैलरी में अटल जी द्वारा लिखी गई विभिन्न कविताओं का सृजन किया गया है। इन गैलरियों में एक डार्क रूम भी तैयार किया गया है, जिसमें अटल जी के विभिन्न छायाचित्रों को स्पेशल लाइटिंग इफेक्ट से प्रदर्शित किया गया है।

निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में दिखेगी प्रदेश के आर्थिक विकास की समग्र तस्वीर निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। इसी उद्देश्य से 25 दिसंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार” का आयोजन किया जाएगा। यह ग्रोथ समिट प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास की समग्र तस्वीर को प्रदर्शित करने वाला सबसे प्रभावी मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप इस समिट में औद्योगिक निवेश के साथ उत्पादन और रोजगार के सृजन पर भी फोकस किया जायेगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उनकी सहभागिता यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास मॉडल केंद्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और प्रदेश में निवेश सुरक्षित, पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू किया जाएगा। निवेश को जमीन पर उतारने का मंच ग्रोथ समिट के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर आधारित भूमि आवंटन और अनुमोदन संबंधी निर्णय लिये जायेंगे। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। नए औद्योगिक क्षेत्र, क्लस्टर और प्लग-एंड-प्ले इकाइयों के शुभारंभ से प्रदेश में उत्पादन और उद्योग गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से विकसित होंगे और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। कार्यक्रम में निवेशकों को सिंगल-क्लिक प्रणाली के माध्यम से प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से निवेशक परियोजनाएँ तेजी से शुरू कर पाएंगे और औद्योगिक इकाइयों को समय पर समर्थन मिलेगा। रोजगार और युवाओं का सशक्तिकरण ग्रोथ समिट का उद्देश्य केवल निवेश नहीं, बल्कि रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रोजगार पाने वाले युवाओं को मंच से प्रोत्साहन देने से उनके आत्मविश्वास और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी। एमएसएमई, कौशल विकास और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान समिट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, ड्रोन, डिफेंस और फार्मा जैसे क्षेत्रीय और निर्यात आधारित उद्योगों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर केंद्रित सत्र यह दिखाएंगे कि प्रदेश सरकार कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार अवसर प्रदान करने पर समान रूप से ध्यान दे रही है। औद्योगिक प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की ताकत कार्यक्रम स्थल पर औद्योगिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और निवेश से जुड़े विभागीय कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक अवसर, निवेश के प्रस्ताव, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों और आमजन को दी जाएगी। इससे निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए भरोसा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सतत औद्योगिक और आर्थिक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह ग्रोथ समिट यह सुनिश्चित करेगा कि निवेश केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। निवेश को उद्योग स्थापना, उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण में बदला जाएगा। यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार और कौशल विकास एक साथ बढ़ें। समिट के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल है, उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं को स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। समग्र प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व ग्रोथ समिट न केवल प्रदेश के निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और नीति स्थिरता को प्रदर्शित करेगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की सहभागिता इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाएगी। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार प्रदेश की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन दृष्टि का सबसे बड़ा और प्रभावी मंच साबित होगा। यह आयोजन निवेशकों को भरोसा, उद्योगों को गति और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, रोजगारोन्मुख और निवेश-फ्रेण्डली राज्य के रूप में स्थापित करेगा।  

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी

देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी    – डॉ. नरेश बंसल, राज्यसभा सांसद और  राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष ,भारतीय जनता पार्टी  हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर ,लिखता–मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ। — अटल बिहारी वाजपेयी भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी महज एक स्मृति-उत्सव नहीं है, यह राष्ट्रीय आत्मनिरीक्षण का क्षण है।आज जब देश अपने लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है, १४० करोड़ भारतीय एक ऐसे नेतृत्व की परंपरा पर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं जिसने नैतिक साहस को लोकतांत्रिक संयम, दृढ़ता को सहानुभूति और दूरदर्शिता को विनम्रता के साथ जोड़ा। अटल जी उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे जिनके लिए राजनीति जनसेवा का एक पवित्र साधन थी। उनका नेतृत्व दिखावटी नहीं था; बल्कि प्रेरक था। उनका मानना था कि अधिकार विश्वसनीयता से आना चाहिए और शक्ति जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। एक प्रतिबद्ध विचारक होते हुए भी, उन्होंने कभी भी विचारधारा को संवाद पर हावी नहीं होने दिया। उनके लिए संसदीय लोकतंत्र एक प्रक्रियात्मक दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी थी। प्रधानमंत्री के रूप में, अटल जी ने यह सिद्ध किया कि सशक्त नेतृत्व और मानवीय शासन एक साथ चल सकते हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों में दृढ़ रहते हुए वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके नेतृत्व ने विश्व को दिखाया कि भारत बिना जल्दबाजी किए दृढ़ संकल्पित हो सकता है, और बिना आक्रामक हुए मुखर हो सकता है। उनके विचार में, शक्ति का अर्थ तभी सार्थक होता है जब वह शांति और स्थिरता के लिए अपनी सार्थकता प्रतिस्थापित करता हो। पोखरण परमाणु परीक्षण रणनीतिक दृढ़ संकल्प का प्रतीक था , जबकि शांति के लिए उनके प्रयासों ने उनकी कुशल राजनेता की भूमिका को अभिभूत किया। मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रहरी , अटल जी  मानना था कि भारत को सशक्त होने के साथ-साथ उत्तरदायी भी होना आवश्यक है ।   विकास के प्रति उनका दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण था। अटल जी समझते थे कि राष्ट्रीय प्रगति तभी सार्थक होती है जब वह समावेशी हो। अवसंरचना, ग्रामीण संपर्क और दूरसंचार के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों का उद्देश्य केवल संपत्ति अर्जन नहीं था, बल्कि लोगों, बाजारों और अवसरों को आपस में जोड़ना था। सड़कों, संपर्क और प्रौद्योगिकी पर उनकी प्राथमिकताओं  ने दूरस्थ क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत करने में मदद की और भारत के विकास को एक नया आधार दिया।   नीति और शासन के अलावा, अटल जी का सबसे बड़ा योगदान भारत को एक सभ्यतागत लोकतंत्र के रूप में समझना था। उनका मानना था कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, वाद-विवाद करने की क्षमता और एकता खोए बिना मतभेदों को आत्मसात करने की क्षमता में निहित है। उनका राष्ट्रवाद आत्मविश्वास से भरा था, लेकिन कभी भी बहिष्कारवादी नहीं था; दृढ़ होते हुए भी सहानुभूतिपूर्ण था। उत्तराखंड के लिए अटल जी की विरासत बेहद व्यक्तिगत और परिवर्तनकारी है। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) का शांतिपूर्ण गठन लोगों की लंबे समय से पोषित आकांक्षा की पूर्ति थी। यह महज प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था; यह राजनीतिक संवेदनशीलता और राष्ट्रीय दूरदर्शिता का महायज्ञ था क्यूँकि अटल जी समझते थे कि भूगोल शासन को आकार देता है, और जनमानस की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है जन-जन के दिल की धड़कनों से जुड़ना । उनकी प्रतिबद्धता राज्य बनने के साथ ही समाप्त नहीं हुई ;उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि नवगठित राज्य को विशेष दर्जा और आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक समर्पित औद्योगिक पैकेज मिले। उत्तराखंड के आध्यात्मिक और पारिस्थितिक महत्व को पहचानते हुए, उनकी सरकार ने उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की। ये निर्णय विकास के प्रति उनकी समग्र समझ को दर्शाते हैं – एक ऐसी समझ जो पारिस्थितिकी, संस्कृति और आजीविका का सम्मान करती है। उत्तराखंड के साथ अटल जी का रिश्ता नीतिगत संबंधों से कहीं बढ़कर था। उन्हें यहाँ के पहाड़ों, नदियों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गहरा लगाव था। 1984 में चुनाव में हार के बाद उन्होंने हरिद्वार और गंगोत्री की पहाड़ियों में शरण ली और वहाँ की शांति से शक्ति प्राप्त की। बहुत कम नेता किसी क्षेत्र की आत्मा से इतनी गहराई से जुड़ पाते हैं। आज जब हम कहते हैं, "अटल जी ने बनाया, मोदी जी  संवारेंगे ," तो यह तुलना का नारा नहीं, बल्कि निरंतरता की अनुभूति  है। अटल जी द्वारा रखी गई कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय एकता की नींव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत और विस्तारित किया जा रहा है। दूरदृष्टि की यह निरंतरता समावेशी और महत्वाकांक्षी विकास के प्रति भारतीय जनता पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।  जन्म शताब्दी वर्ष, विशेष रूप से युवा भारतीयों के लिए, राजनीति को एक महान कर्तव्य के रूप में पुनः स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। अटल जी का जीवन यह सिखाता है कि नेतृत्व संख्या के बारे में नहीं, बल्कि दूरदर्शिता के बारे में है; टकराव के बारे में नहीं, बल्कि आम सहमति के बारे में है; व्यक्तिगत स्वार्थ के  बारे में नहीं, बल्कि उद्देश्यगत ईमानदारी के बारे में है।   सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए, उनकी यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि सत्ता को हमेशा जवाबदेही के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। राष्ट्र के लिए, यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि प्रगति और मूल्य प्रतिस्पर्धी विचार नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं।   अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक बार लिखा था कि अंधेरे से डरना नहीं चाहिए क्योंकि यह केवल अपने भीतर ही जीवित रहता है। जैसे-जैसे भारत आत्मविश्वास और आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, उनके शब्द और कार्य आगे के मार्ग को प्रशस्त करते रहेंगे।   2025 में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशताब्दी वर्ष है । आइये! उस  दूरदर्शी नेता, कवि, वक्ता और रणनीतिकार को नमन करें जिन्होंने भारत को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने  के लिए इतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए और “भारत के सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य “ का मान अर्जित किया । अटल जी का व्यक्तित्व आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता , मजबूत होते हुए भी करुणामय होने की … Read more

नए साल 2026 पर महाकाल मंदिर में भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर को आरती बुकिंग होगी बंद

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था बंद रहेगी। भीड़ भरे दिनों में दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को पहले से ही ब्लाक कर दिया गया है। ऐसे में एक जनवरी को देश-विदेश से आने वाले दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन होंगे। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 के अवसर पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए दर्शन की व्यापक योजना बनाई गई है। 31 दिसंबर को भस्म आरती का ऑफलाइन पंजीकरण बंद रहेगा। एक जनवरी को दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कराए जाएंगे। चलित भस्म आरती दर्शन का समय सुबह चार बजकर, 15 मिनट से रहेगा। भस्म आरती के बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से महाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से मंदिर के बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा होते हुए पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे।  

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।   

मध्‍यप्रदेश पुलिस ने विगत एक सप्ताह में लूट व चोरी की बड़ी वारदातों का किया खुलासा

68 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति बरामद भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी तथा संगठित अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाइयाँ की गई हैं। हैं। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने त्वरित विवेचना, तकनीकी विश्लेषण एवं सशक्त मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों को गिरफ्तार कर 68 लाख रूपए से अधिक मूल्य की संपत्ति बरामद की है। जिलेवार प्रमुख कार्रवाइयाँ सीहोर थाना शाहगंज पुलिस ने बिजली कंपनी से चोरी हुए लोहे के पोल और पाइप बरामद कर 90 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसी प्रकार थाना जावर पुलिस ने ग्राम कजलास की चोरी का खुलासा करते हुए 30 तोला सोना, 3 किलो चांदी और 2 लाख रूपए नगद सहित लगभग 48 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। ग्वालियर थाना कम्पू पुलिस ने शराब कारोबारी के मुनीम से हुई लूट की घटना का खुलासा कर चार बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने लूटी गई 1 लाख 70 हजार रूपए की राशि और घटना में प्रयुक्त कार जब्‍त की। विदिशा थाना कोतवाली पुलिस ने दुकान में चोरी के प्रकरण में एक आरोपी एवं एक विधि विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लिया। टीम ने 11 बैटरियाँ, एक ऑटो समेत 2 लाख 64 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसके अतिरिक्‍त शहर के राम जानकी मंदिर, शंकर नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्रों में हुई चोरियों का भी खुलासा किया गया। 130 से अधिक सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और पूछताछ के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चांदी के आभूषण, नगदी और मोटरसाइकिल सहित कुल 3 लाख 75 हजार की संपत्ति जब्‍त की है। टीकमगढ़ थाना बमोरीकला पुलिस ने मात्र 24 घंटे में चोरी की वारदात का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा 4 लाख 54 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की। बुरहानपुर थाना नेपानगर पुलिस ने बिजली के एल्युमिनियम तार चोरी करने वाले शातिर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों से 2 लाख 50 हजार रूपए के तार और घटना में प्रयुक्त अर्टिगा कार सहित कुल 6 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जप्त की है। इन सभी कार्रवाहियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है। पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई के कारण आमजन की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

प्रदेश प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में देश में छठवें स्थान पर

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक 9508 मेगावॉट क्षमता हासिल की जा चुकी है। भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2025 में 5.72 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में मध्यप्रदेश देश में छठवें स्थान पर है। इसमें अब तक 76 हजार घरों पर 292 मेगावॉट के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जा चुके हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने यह बात मध्यप्रदेश सरकार के विकास और सेवा के 2 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विगत 2 वर्ष बेमिसाल रहे हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 एवं यथा पुनरीक्षित मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2025 लागू की है। मध्यप्रदेश में बॉयो-फ्यूल प्रोजेक्ट एवं पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश बॉयो-फ्यूल क्रियान्वयन स्कीम-2025, मध्यप्रदेश पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज क्रियान्वयन स्कीम-2025 लागू की गई। प्रदेश में आगर-शाजापुर-नीमच में 1045 मेगावॉट क्षमता का सौर पार्क स्थापित किया गया है। इसके साथ ही ओंकारेश्वर में विश्व की सबसे बड़ी 278 मेगावॉट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की गई। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के वर्ष 2030 में 500 गीगावॉट के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर कार्य कर आगे बढ़ रहा है। आगर में 550 मेगावॉट का सोलर पार्क और शाजापुर में 450 मेगावॉट का सोलर पार्क स्थापित किया जा चुका है। नीमच में 500 मेगावॉट के सोलर पार्क की स्थापना का कार्य प्रगतिरत है। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक (स) अंतर्गत 14 हजार 500 मेगावॉट के 550 प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें 4 हजार 500 मेगावॉट का क्रियान्वयन भी शुरू हो गया है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में ग्रिड प्रबंधन व दिन के समय सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिये अनेक नवाचार किये जा रहे हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसान अन्नदाता होने के साथ अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-ब (पीएम कृषक मित्र योजना) में अब तक 21 हजार 129 किसानों को लाभान्वित कर सोलर पम्प स्थापित किये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि समस्त पात्र किसानों को आगामी 3 वर्षों में सोलर पम्प से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में 50 हजार सोलर पम्प स्थापनाधीन हैं। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के समस्त शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 47 जिलों के 1500 शासकीय भवनों पर 70 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम जन-मन) में अब घर अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए 2060 पीवीटीजी घरों में सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जाने का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-अ में प्रदेश में 1790 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट की स्थापना का कार्य चल रहा है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए ऊर्जा भण्डारण के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में मुरैना सोलर पॉवर प्लस स्टोरेज प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट में 440 मेगावॉट की ऊर्जा क्षमता हासिल की जायेगी। यह प्रदेश की प्रथम ऊर्जा भण्डारण परियोजना है। इसमें प्राप्त होने वाली प्रति यूनिट दर देश में सबसे कम ऐतिहासिक रूप से मात्र 2 रुपये 70 पैसे प्रति यूनिट है। पत्रकार वार्ता में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव और एमडी ऊर्जा विकास निगम श्री अमनबीर सिंह बैंस ने भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये।  

मेडिकल एजुकेशन में नई क्रांति: धार में बना देश का पहला PPP मॉडल मेडिकल कॉलेज

धार देश के पहले पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के मेडिकल कालेज का भूमि पूजन मंगलवार को धार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि धार का यह मेडिकल कालेज देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है, जो निजी जन-भागीदारी से बनाया जा रहा है। यह केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि यहां से तैयार होकर एमबीबीएस डॉक्टर गांव-गांव तक सेवाएं देंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अधिक से अधिक मेडिकल कालेज खोलने के चक्कर में मेडिकल कालेजों की स्थिति भी इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों जैसी न हो जाए। गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी फैकल्टी (प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक) हैं, पर इस वर्ष प्रारंभ हुए श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कालेज मात्र 10 प्रतिशत फैकल्टी के सहारे चल रहे हैं।   116 पदों में से 12 ही पदस्थ फैकल्टी की कमी से नुकसान मात्र विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि मरीजों को भी उठाना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज के नाम पर आसपास के जिला अस्पतालों से रोगियों को मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है, पर सुविधाओं के अभाव में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पाता है। फैकल्टी की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंगरौली में फैकल्टी के 116 पदों में से 12 यानी 10 प्रतिशत ही पदस्थ हैं।

चिकित्सा का चमत्कार: AIIMS Bhopal में महाधमनी की हाई-रिस्क सर्जरी, मरीज को मिला नया जीवन

भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के विशेषज्ञों ने एक 35 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। यह मरीज पिछले आठ महीनों से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहा था और कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली थी। जानलेवा थी बीमारी, महाधमनी में सूजन एम्स में हुई जांच में सामने आया कि मरीज ''सुप्रा-रीनल एब्डामिनल एआर्टिक एन्यूरिज्म'' नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इसमें पेट की महाधमनी (शरीर की सबसे बड़ी रक्त नली) में खतरनाक सूजन आ गई थी। यह सूजन आंतों और दोनों किडनियों को रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख धमनियों तक फैल चुकी थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज की बाईं किडनी ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। यदि समय रहते सर्जरी न होती, तो महाधमनी के फटने से मरीज की जान जा सकती थी। छाती और पेट के रास्ते हुई सर्जरी सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में यह मैराथन सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने पेट और छाती के हिस्से से चीरा लगाकर ऑपरेशन शुरू किया। प्रक्रिया के दौरान सूजनग्रस्त महाधमनी को हटाकर उसकी जगह ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाई गई। साथ ही खराब हो चुकी बाईं किडनी को शरीर से अलग किया गया। सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा दाईं ओर की स्वस्थ किडनी और आंतों की प्रमुख धमनियों को ग्राफ्ट में फिर से जोड़ना (प्रत्यारोपित करना) था, जिसे टीम ने बखूबी अंजाम दिया। विशेषज्ञों की टीम का समन्वय सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन आईसीयू में निगरानी में रखा गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस सफलता में डॉ. निवारिया के साथ डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल थे। इसके अलावा यूरोलाजी विभाग से डॉ. माधवन, डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. हरीश और सर्जिकल आन्कोलाजी से डॉ. अंकित जैन का विशेष सहयोग रहा।  

भोपाल के कोलार में बड़ी स्वास्थ्य सौगात, CHC में बच्चों को चौबीसों घंटे इलाज और इनडोर सुविधा

भोपाल कोलार और आसपास के रहवासियों को अब बीमार बच्चों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में बच्चों के लिए 24 घंटे उपचार और भर्ती की सुविधा शुरू की जाएगी। यह निर्देश सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने मंगलवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान दिए। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मानिटरिंग के निर्देश डॉ. शर्मा ने प्रसूति वार्ड, ओपीडी, पोषण पुनर्वास केंद्र और न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट का जायजा लिया। उन्होंने संस्था प्रभारी को स्पष्ट किया कि अस्पताल में अब शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो चुकी है। इसलिए केवल डे-केयर (दिन में इलाज) तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर बच्चों को वार्ड में भर्ती कर इलाज करें। उन्होंने निर्देश दिए कि केवल अति गंभीर स्थिति में ही बच्चों को हमीदिया या अन्य उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए।   गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने भर्ती प्रसूता महिलाओं से भोजन और इलाज का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की संभावित डिलीवरी डेट से पहले पूरी जांच की जाए, ताकि समय रहते जटिलताओं को रोका जा सके। हाल ही में पकड़ में आए अटेंडेंस फर्जीवाड़े के बाद सीएमएचओ ने कोलार अस्पताल के स्टाफ की बैठक में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि डाक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक, सभी को ओपीडी समय पर आना होगा। उपस्थिति केवल 'सार्थक ऐप' के जरिए ही मान्य होगी और उसी आधार पर वेतन आहरित किया जाएगा। साथ ही मरीजों और परिजनों से व्यवहार में शालीनता बरतने की हिदायत दी गई। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।