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सालभर रुका रहा पश्चिमी रिंग रोड काम, इंदौर में जनवरी से पहले प्रगति नहीं संभव

इंदौर  किसानों का विरोध और मुआवजा बांटने में देरी ने पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट को सालभर पीछे कर दिया है। जनवरी 2025 में शुरू होने वाला काम नवंबर तक अटका हुआ है। अगले दो से तीन महीने तक भी सड़क निर्माण शुरू होने के आसार नहीं हैं, क्योंकि अभी तक महज 55 प्रतिशत किसानों को ही मुआवजे की राशि दी गई है। बावजूद इसके कई किसान नाराज हैं, क्योंकि इन्हें बाजार मूल्य की तुलना में पैसा कम मिला है। इस लेटलतीफी ने प्रोजेक्ट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इंदौर वन मंडल की 40 और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल शासन ने सड़क को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बनाने की योजना तैयार की थी। 64 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए कुल 638 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें से लगभग 50 हेक्टेयर वनभूमि है। इसमें इंदौर वन मंडल की 40 हेक्टेयर और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल है। बाकी 580 हेक्टेयर भूमि में 472 निजी व 98 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। एनएचएआई 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड को दो हिस्सों में बनाएगा। यह महू से हातोद और हातोद से क्षिप्रा के बीच बनाएंगे। डेढ़ साल पहले एजेंसी तय सड़क बनाने के लिए निर्माण एजेंसी डेढ़ साल पहले तय हो चुकी है। अहमदाबाद की कंपनी को ठेका मिला है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से एजेंसी को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। नियमानुसार प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित कर प्रशासन से क्लियरनेंस मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। वैसे अभी तक एक हजार करोड़ में से 500 से 550 करोड़ का मुआवजा बांटा गया है। शेष किसानों को राशि दिए जाने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। इन्हें देना है मुआवजा     इंदौर जिले की तीन तहसील सांवेर, देपालपुर और हातोद के 26 गांवों से यह सड़क निकलेगी। यहां 998 किसानों को कुल 795 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं।     धार जिले की पीथमपुर तहसील के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।     सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये मिलेंगे।     देपालपुर तहसील के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये का भुगतान होगा।     हातोद तहसील के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। बांट रहे मुआवजे की राशि     अगले साल यानी जनवरी से पश्चिमी रिंग रोड का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों किसानों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर तक 55 फीसद लोगों को राशि बांटी गई है। अगले दो महीनों में प्रोजेक्ट के लिए शेष जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी। वहीं वन विभाग की जमीन को लेकर पर्यावरण अनुमति आना बाकी है। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

महाकाल मंदिर के फूलों से स्टार्टअप की शुरुआत, छात्रों ने बनाई कमाई की नई राह

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को अर्पित होने वाले फूलों से कमाई का आइडिया मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार के युवा छात्र एवं छात्राओं ने एकसाथ मिलकर ढूंढ निकाला. उसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू कर छात्र लाखों की कमाई करने लगे हैं. छात्र एवं छात्राएं वेस्टेज फूलों को रीसायकल कर इको फ्रेंडली हार्ड प्रोडक्ट बना रहे हैं और मार्केट में बेच कर मोटी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है छात्रों के इस स्टार्टअप से कई कम्पनियों ने छात्रों को ऑफर देना भी शुरू कर दिए हैं. अभी छात्रों ने वेस्टेज फूलों से कटोरी, प्लेट्स, मोमेंटो सहित 16 तरह के अलग-अलग हार्ड प्रोडक्ट बनाएं हैं. ये सभी छात्र उज्जैन में रहकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे हैं. आइए इस रिपोर्ट में आपको छात्रों से भी मिलवाते हैं और उनके कामों को भी दिखाते हैं. कौन हैं ये पांच छात्र, जिन्होंने शुरू किया स्टार्टअप सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहुंचकर  छात्रों के बारे में पता किया तो स्टार्टअप टीम में खरगोन निवासी मृत्युंजय बड़ोले (उम्र 21 वर्ष) सब्जेक्ट बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी तीसरा सेमेस्टर, दूसरी बालाघाट निवासी योजना राहंगडाले (उम्र 20 वर्ष ) जो बीएससी बॉटनी तीसरा सेमेस्टर की छात्रा हैं. तीसरे भभुआ बिहार निवासी यूगांक सिंह (उम्र 22 वर्ष) बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी से चौथे सेमेस्टर के छात्र हैं. चौथे उज्जैन के तराना तहसील के निवासी तन्मय जैन (उम्र 27 वर्ष) बायो टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे हैं. पांचवी कोलकाता निवासी आहना चक्रवर्ती (उम्र 20 वर्ष) हैं जो बीएससी फोरेंसिक तीसरे सेमेस्टर की छात्रा हैं. फूलों को सुखाकर बनाते हैं खास प्रोडक्ट  छात्र एवं छात्राओं से चर्चा की. जिसमें मृत्युंजय बड़ोले ने बताया, ''हमने अभी तक 16 तरह के प्रोडक्ट बनाये हैं, जिसमें कटोरी, प्लेट्स शील्ड्स (मोमेंटो), लोगो, राखी, टेंपल, कॉस्टर्स, श्री चरण व अन्य आइटम शामिल हैं, जिसकी क्वालिटी अपने आप में बेहद खास है. 13 साल तक की वारंटी हम देते हैं की इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. कोई भी प्रोडक्ट टूटने पर हम वापस ले लेते हैं यानी उसे भी हम रिसायकल कर देते हैं. बस ग्राहक को तय कीमत चुकानी होगी.'' कैसे आया आईडिया? छात्रा योजना राहंगडाले ने कहा, ''हम जब उज्जैन आकर पढ़ाई कर रहे थे तब मंदिरों में दर्शन को भी गए तो वहां बड़ी मात्रा में फूलों को कचरा गाड़ी में जाते देखा, क्षिप्रा नदी दर्शन को गए तो वहां भी नदी में फूलों को डालते हुए व पड़ा हुआ देखा. तो विचार किया कि क्यों न भक्तों के भाव को सहेज कर रखा जाए. बस हम पांचों ने 2021 से रिसर्च करना शुरू कर दिया और आज रिजल्ट आपके सामने हैं.'' स्टार्टअप को नाम दिया 'प्रयास भावनाओं को सहेजने का' छात्रों ने बताया हमने 2021 से रिसर्च किया और 2024 तक काम किया. 2024 में हमने हमारे प्रोडक्ट को एग्जीबिशन में लांच किया. स्टार्टअप को नाम दिया निर्मल निर्माण "प्रयास भावनाओं को सहेजने का", ये पूरा काम हमने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज सर के निर्देशन में किया. 22 दिसंबर को हमने प्रोडक्ट्स को YOUNG ENTREPRENEURSHIP FORUM में लॉन्च किया. पहले दिन से इन्क्वायरी मिलने लगी. ऑटोमोबाइल सेक्टर से गाड़ियों के डैशबोर्ड के लिए ऑफर मिले, फंडिंग देने के लिए व्यपारियों ने हमसे संपर्क किया. गुजरात की एक कम्पनी से हमारा टायअप भी हो गया है. हम साथ में काम कर रहे हैं अब.'' स्टार्टअप के लिए मिल चुके हैं अवार्ड स्टार्टअप के लिए टीम को 22 दिसंबर 2024 को यंग एंटरप्रेन्योरशिप फोरम द्वारा डिस्ट्रिक्ट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया गया था. जिसमें उन्हें 51000 रुपए का प्राइज मिला था. वहीं 12 जनवरी 2025 में भोपाल में पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने स्टेट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया था. इसमें 11000 रुपए की राशि दी गई है. शुरुआत 15 से 20% प्रॉफिट के साथ की छात्राओं ने बताया, ''हमने 2024 से जब प्रोडक्ट बेचना शुरू किए तो अभी शुरुआत में ही साल भर में 2 लाख रेवेन्यू जेनेरेट किया है. 60 रुपए से 2200 रुपए तक के प्रोडक्ट हमने बनाए हैं और अभी 15 से 20% ही फायदा ले रहे हैं. हमारा ध्यान अभी खुद का प्रोडक्शन और प्रोडक्ट को मार्केट में ऑनलाइन बेचने पर है. अभी जो रेवेन्यू हमें मिला ये उज्जैन लोकल से ही मिला है. छात्रों ने बताया रेस्पॉन्स अच्छा मिल रहा है, देश दुनिया के मंदिरों से संपर्क कर आगे बढ़ेंगे.'' कैसे और कहां बना रहे ये प्रोडक्ट जानिए छात्र छात्राओं ने प्रोडक्ट की पूरी प्रोसेस बताई. उन्होंने कहा, ''शुरुआत हमने 1000 स्क्वायर फिट एरिया से की है. जिला प्रशासन के सहयोग से फूल मंदिरों से लेना शुरू किए. अभी सिर्फ महाकाल मंदिर से सप्ताह भर में 100 kg फूल लेते हैं, जिसमें सिर्फ ट्रांसपोर्ट खर्च आ रहा है. फूल लाकर 2 से 3 दिन के लिए सुखने को एक वेंटिलेशन रूम में रखते हैं पंखे या खुली हवा में. उसमें से प्लास्टिक और प्रसाद हटाते हैं, मटेरियल हटा कर फूल को धोते हैं. फिर धूप में सूखने के लिए 3 से 7 दिन तक रखते हैं. उसका पाउडर बनाते हैं, बोरे में कूट कर छानते हैं.'' 100 kg फूल में 5kg पाउडर निकलता है. फिर बाइनडर बनाते हैं (नीम बबूल के गोंद को तय टेम्परेचर में गर्म करके बाइनडर बनाते हैं). पाउडर Mix करके साँचा जो कि सिलिकॉन रबर का होता है उसमें डालते हैं, 12 मिनट में प्रोडक्ट बन जाता है. फिर साबुन के पानी में धुलने के लिए रखते हैं, फिनिशिंग और कलर करके तैयार करते हैं. छात्र छात्राओं का दावा है अभी तो जितने भी लोग इस कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं वो सिर्फ हार्ड मटेरियल को डीग्रेड (जैसे अगरबत्ती बनाना व अन्य) कर रहे हैं और हम हार्ड प्रोडक्ट बनाकर प्रिजर्वेशन करने का काम कर रहे हैं.

MP में 972 ई-बसेस का वितरण, 8 नगर निगमों में जल्द शुरू होगी इलेक्ट्रिक बस सेवा

भोपाल   मध्यप्रदेश के शहरी परिवहन को और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों को कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी प्रदान की है। इन बसों के संचालन से डीजल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  केंद्र से स्वीकृत ई-बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना नगर निगमों को मिलेंगी। इनमें भोपाल को 195, इंदौर को 270, ग्वालियर को 100, जबलपुर को 200, उज्जैन को 100, सागर को 32, देवास को 55 और सतना को 20 बसें आवंटित की गई हैं। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से संबंधित आवश्यक ढांचा निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक नगर निगम में चार्जिंग पॉइंट और परिचालन सुविधाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और राज्य दोनों खर्च वहन करेंगे  ई-बस परियोजना पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे। बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। वहीं चार्जिंग पॉइंट्स के निर्माण पर केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। बसों का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह सेवा आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और ईको फ्रेंडली परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। 

स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया में मनाया जाएगा मध्यप्रदेश दिवस, मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल

भारत पर्व 2025 में मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और स्वाद का होगा अद्भुत संगम भोपाल भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया गुजरात में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक "भारत पर्व" का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशिष्ट आतिथ्य में भारत पर्व 2025 के अंतर्गत मंगलवार, 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में मध्यप्रदेश दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के ध्येय को दृष्टिगत रखते हुए देश की विविधता में एकता को प्रदर्शित करना है। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि भारत पर्व के अंतर्गत मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक आकर्षक थीम पेवेलियन तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की पर्यटन, संस्कृति और हस्तशिल्प विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। पेवेलियन में सांची, खजुराहो, भीमबेटका, मांडू, ओरछा, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ बांधवगढ़, कान्हा और पेंच जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों की झलक प्रस्तुत की जा रही है। साथ ही, राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प और हस्तकला जैसे चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, बाघ प्रिंट, डोकरा कला, मिट्टी के बर्तन और गोंड पेंटिंग को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर उत्सव है। मध्यप्रदेश ‘भारत का हृदय’ है, और यहां की हर परंपरा, हर स्वाद, हर कला रूप हमारे देश की आत्मा को दर्शाता है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प, व्यंजनों और संस्कृति की प्रस्तुति के माध्यम से हम देशभर के आगंतुकों को अतुलनीय मध्यप्रदेश की आत्मा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आगंतुक न केवल मध्यप्रदेश के स्वाद और संगीत का आनंद लें, बल्कि उसकी आत्मिक ऊर्जा और जीवंतता का भी अनुभव करें। स्टूडियो किचन में मध्यप्रदेश का स्वाद मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) द्वारा 11 नवंबर को स्टूडियो किचन की विशेष प्रस्तुति दी जा रही है, जिसमें प्रदेश के पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजन लाइव तैयार कर परोसे जाएंगे। यह प्रस्तुति फ्लेवर्स फ्रॉम द हार्ट ऑफ इंडिया की थीम पर आधारित है। बुंदेलखंड क्षेत्र का खट्टा–तीखा छाछ पर आधारित पेय सन्नाटा, डिंडोरी क्षेत्र का पारंपरिक सूप कंगनी दाल का शोरबा, मालवा का प्रसिद्ध स्नैक भुट्टे की कीस, चना बेसन से बना स्वादिष्ट नमकीन व्यंजन चंबल का थोपा, सीधी क्षेत्र का पारंपरिक नाश्ता बेड़ई धुमना आलू, बघेलखंड क्षेत्र का लोकप्रिय व्यंजन मटर का निमोना और सादी पूरी, शहडोल क्षेत्र की प्रसिद्ध मिठाई कुटकी की खीर आगंतुकों को परोसे जाएंगे। इन व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश के विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। सांस्कृतिक प्रस्तुति – “अमृतस्य मध्यप्रदेश” संस्कृति विभाग की ओर से प्रसिद्ध नृत्य संयोजिका मैत्रीय पहाड़ी एवं समूह द्वारा “अमृतस्य मध्य प्रदेश” शीर्षक से एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी जाएगी। यह प्रस्तुति दर्शकों को मध्यप्रदेश की प्राचीन सभ्यता, भक्ति, प्रेम और प्रकृति की लय से जोड़ती है। इस नृत्यगाथा की शुरुआत भीमबेटका की गुफाओं से होती है, जहां मानव सभ्यता की प्रथम झलक दिखाई देती है। आगे खजुराहो के मंदिरों की मूर्तिकला, सांची के स्तूपों की शांति, और चित्रकूट की पवित्र भूमि के भावनात्मक दृश्यों को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंगों की दिव्यता, ग्वालियर किले की ऐतिहासिकता, मांडू की प्रेम गाथा और ओरछा के मंदिरों की भव्यता मंच पर जीवंत होती है। प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के वनों तथा जबलपुर की संगमरमर चट्टानों के दृश्यों से दर्शाया गया है। पारंपरिक महेश्वरी, चंदेरी और बाग प्रिंट वस्त्रों में सजे कलाकार मंच पर राज्य की शिल्प विरासत का गौरव गान करते हैं। नर्मदा आरती के दृश्य के साथ यह यात्रा अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंचती है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना एक महत्वाकांक्षी योजना, सतत निगरानी की आवश्यकता : मंत्री कुशवाह

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए जा सकते है। मंत्री श्री कुशवाह ने विभाग की 2 वर्षो की उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान पीएमएफएमई योजना की सतत निगरानी ने निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक योजना की शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति की जाए। मंत्री कुशवाह ने कहा कि उद्यानिकी गतिविधियाँ ग्रामीण अंचल से शहरों तक संचालित की जाती है। प्रदेश में उद्यानिकी उत्पादों को लगातार प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि बड़े शहरों के आसपास सब्जी के साथ साथ फूल उत्पादन के क्लस्टर भी विकसित किये जाये। मंत्री कुशवाह कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और मेले भी आयोजित किये जाने चाहिए। उन्होंने एमपी एग्रो तथा उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को वितरित किये जाने वाले उपकरण व अन्य सामग्री का भौतिक सत्यापन कराये जाने के निर्देश भी दिये। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रदेश में गत 2 वर्षो में उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। इन 2 वर्षो में उद्यानिकी फसलों का रकबा में 2 लाख 43 हैक्टेयर तथा उत्पादन में लगभग 36 लाख मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। संरक्षित खेती के तहत 1573 हैक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया गया है। आयुक्त दुबे ने बताया कि प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिये 3 सेक्टर आफ एक्सीलेंस मुरैना में आलू, छिंदवाड़ा में नीबूवार्गीय तथा हरदा में आम एवं सब्जी के विकसित किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई (PMFME) योजना में चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 3 हजार 113 सूक्ष्म उद्यमियों को 108 करोड़ का अनुदान प्रदान किया जा चुका है। योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है। एमपी एग्रो ने समीक्षा के दौरान प्रबंध संचालक श्री दुबे ने बताया कि गत तीन वर्षों में एमपी एग्रो का व्यापार 47 करोड़ से बढ़कर 386 करोड़ हो गया है। इसके और बेहतर करने के प्रयास किये जा रहे है। बैठक में विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मॉडल की रहस्यमय मौत: शरीर पर चोट के निशान, पुलिस कर रही बॉयफ्रेंड से पूछताछ

भोपाल राजधानी भोपाल के भैंसाखेड़ी क्षेत्र में सोमवार सुबह 21 वर्षीय मॉडल की मौत होने का मामला सामने आया है। युवती को उसके दोस्त ने अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान खुशबू अहिरवार के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ वर्षों से भोपाल में मॉडलिंग कर रही थी। बैरागढ़ क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आदित्य राज सिंह ने बताया कि खुशबू को उसका दोस्त कासिम और एक बस कंडक्टर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार, खुशबू बीए फर्स्ट इयर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह तीन साल से भोपल में रह रही थी। उसके प्राइवेट पार्ट और बॉडी पर चोटों के निशान मिले हैं। परिजनों ने लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कासिम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला आत्महत्या, हादसा या कुछ और है। जानकारी सामने आई कि मॉडल गर्भवती थी। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में गर्भवती और उसके कॉम्प्लिकेशन की बात कही जा रही है। फूल पीएम रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। जिसके बाद पूरी तरह से मौत का कारण साफ होने की बात कही जा रही है। 

नगरीय प्रशासन मंत्री विजयवर्गीय ने किया 33/11 के.वी. सब स्टेशन का लोकार्पण

  भोपाल नगरीय प्रशासन मंत्री एवं धार जिले के प्रभारी मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने धार जिले के बाग के अखाड़ा में रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम आरडीएसएस अंतर्गत नए 33/11केवी सब स्टेशन का लोकार्पण किया। उन्होंने प्रदेश शासन को किसानों, ग्रामीणों समेत सभी वर्ग के लिए कल्याणकारी सरकार निरूपित किया। इस अवसर पर धार जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मईड़ा समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के धार अधीक्षण यंत्री  आशीष आचार्य ने बताया कि करीब पौने तीन करोड़ की लागत के इस नए सब स्टेशन से अखाड़ा, महेशरा, सिरपानी, पिपरियापानी, डिलवानी समेत करीब 7 ग्रामों एवं अन्य फलियों के बिजली उपभोक्ताओ को फायदा मिलेगा। इस नए सब स्टेशन से आपूर्ति के बाद बाग सब स्टेशन पर लोड घटेगा। उन्होंने बताया कि धार जिले में आडीएएस अंतर्गत प्रत्येक बिजली संभाग में सब स्टेशन, केबल, ट्रांसफार्मर, पोल, कंडक्टर इत्यादि के कार्य बड़ी संख्या में हो रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिभाओं को देखने का अवसर रीवा को मिलेगा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

उप मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल स्मृति टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्वविद्यालय स्टेडियम रीवा में आयोजित स्व. भैयालाल शुक्ल स्मृति टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभ सोमवार को किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा बड़े आयोजनों का केन्द्र बनता जा रहा है। समाजसेवी स्व. श्री भैयालाल शुक्ल की स्मृति में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता में रीवावासियों को राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिभाओं को देखने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता लगातार 10वें वर्ष में सफलतापूर्वक आयोजित हो रही है। प्रतियोगिता के माध्यम से स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाने का अवसर मिल रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में रीवा में सैनिक स्कूलों की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। हमने कुछ दिनों पहले ही नौ सेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का नागरिक अभिनंदन किया था। रीवा में 6 से 9 नवम्बर तक अखिल भारतीय साहित्य परिषद का अधिवेशन भी आयोजित किया गया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मेरे पूज्य पिताजी स्व. श्री भैयालाल शुक्ल से ही मुझे जनसेवा और समाज सेवा के संस्कार मिले हैं। उनके आशीर्वाद से ही मुझे जन-कल्याण और क्षेत्र के विकास के लिए प्रयास करने की शक्ति मिलती है। पूज्य पिताजी से मिले संस्कार, गौमाता और आमजनों से मिला आशीर्वाद सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन रीवा ही नहीं पूरे विन्ध्य के लिए ऐतिहासिक दिन बनने जा रहा है। आज से रीवा से दिल्ली के लिए 72 सीटर हवाई सेवा शुरू हो गई है। यह हवाई सेवा विन्ध्य के विकास की बड़ी छलांग साबित होगी। उप मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रंद्धाजलि दी। इसके बाद उप मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया। प्रतियोगिता 10 से 16 नवम्बर तक राष्ट्रीय एकता मंच द्वारा आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर रीवा नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय,  राजगोपाल मिश्रा चारी,   सतीश सिंह,  प्रकाश सोनी,  गौरव पाण्डेय,  अखिलेश शुक्ला,   अरूण मिश्रा तथा स्थानीय जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राशि बढ़ी तो खुशी से झूमीं लाड़ली बहनें

  भोपाल खुशियां लेकर आई खबर ने ग्वालियर जिले की लाड़ली बहनों का भी उत्साह बढ़ा दिया है। रोजमर्रा के काम में जुटीं महिलाओं को जब पता चला कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में लाड़ली बहना की मासिक सहायता राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए करने का निर्णय लिया गया है तो सभी महिलायें खुशी से झूम उठीं। ग्वालियर जिले के ग्राम धनेली निवासी श्रीमती प्रीति मौर्य का कहना है कि लाड़ली बहना योजना हमारे लिये बड़ा सहारा है। हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहायता राशि बढ़ाकर इस सहारे को आज और मजबूत कर दिया है। इसी तरह ग्राम भदरौली निवासी श्रीमती मोनी बोलीं कि लाड़ली बहना से मुझे सिर्फ धनराशि ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास भी मिल रहा है, जिसे मुख्यमंत्री भैया ने आज और बढ़ा दिया है।       ग्वालियर शहर के छप्पर वाला पुल क्षेत्र की निवासी श्रीमती नर्मदा कुशवाह के चेहरे की खुशी देखते ही बन रही थी। वे बोलीं कि अब हम अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में और सहूलियत हो गई है। आरोन ग्राम में रह रहीं श्रीमती पूजा भी काफी खुश थीं , उनका कहना था कि मुख्यमंत्री भैया ने महिलाओं के स्वावलम्बन की चिंता की है। इसी प्रकार ग्वालियर शहर की निवासी श्रीमती पूजा शुक्ला बोलीं कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज हमारी खुशियों में और इजाफा कर दिया है। घर में होने जा रही शादी की खरीददारी करने बाजार के लिये निकलीं सरोज, रेखा, कृष्णा व उर्वशी आपस में बतिया रहीं थीं कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेटी, बहू और माँ सहित सभी महिलाओं के मान-सम्मान और जरूरतों का पूरा ध्यान रख रहे हैं। ग्वालियर जिले में लगभग 3 लाख 5 हजार 600 से अधिक महिलायें “मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना” से जुड़ी हैं। नवम्बर माह से अब जिले की सभी लाड़ली बहनों के खातों में 1500 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से कुल मिलाकर 45 करोड़ 25 लाख रूपए से अधिक धनराशि पहुँचेगी।

शादी के बाद अपराध रोकने के लिए सख्ती: एमपी में हर विवाह का होगा रजिस्ट्रेशन जरूरी

सागर   शादी के शत प्रतिशत पंजीयन को लेकर अब सरकार विभिन्न प्रकार की पहल करने जा रही है. राज्य सरकार के योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे इंतजाम किए जाएं, जिससे हर साल होने वाले विवाहों का शत प्रतिशत पंजीयन हो सके. इसके लिए कई तरह के सुझाव भी दिए गए हैं. हालांकि, कलेक्टर को अपने स्तर पर ऐसी व्यवस्था करने को कहा गया है, जिससे शत प्रतिशत विवाह पंजीयन का लक्ष्य पूरा हो सके. विवाह पंजीयन के लिए दिशा निर्देश इन निर्देशों के तहत सामूहिक विवाह सम्मेलन, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में मौके पर ही विवाह पंजीयन किया जाए. इसके अलावा मैरिज गार्डन और शादी घरों में अनिवार्य रूप से विवाह पंजीयन के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाए और प्रचार प्रसार भी किया जाए. पति की मौत के बाद परेशानियां देवउठनी एकादशी के बाद से ही शादियों का सिलसिला शुरू हो गया है. योजना एवं आर्थिक सांख्यिकी विभाग ने विवाह पंजीयन का महत्व लोगों को बताने के लिए शत प्रतिशत विवाह पंजीयन कराने पर जोर दिया है. इस काम को पूरा करने के लिए सभी कलेक्टर को दिशा निर्देश जारी किए हैं. विभाग का कहना है कि विवाह पंजीयन से दंपत्ति को कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा. मध्य प्रदेश विवाह रजिस्ट्रेशन नियम 2008 के तहत राज्य के भीतर भारत के नागरिकों के बीच किसी भी विधि के अधीन किये गये विवाह का पंजीयन किया जाता है. विवाह पंजीयन नहीं होने पर महिलाओं को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पति की मृत्यु के बाद उनको मिलने वाले हक और अधिकार और अन्य भुगतान में परेशानी होती है. सामूहिक विवाह सम्मेलन में तत्काल पंजीयन आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के आयुक्त विकास मिश्रा का कहना है कि "विवाह पंजीयन के लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल करने पर सभी कलेक्टर का ध्यान आकर्षित किया गया है. इनमें आयोजित मुख्यमंत्री कन्यादान, मुख्यमंत्री निकाह एवं सामूहिक विवाहों में कार्यक्रम स्थल पर ही विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने की व्यवस्था की जाए." इसके अलावा सामूहिक विवाह कराने वाली संस्थाओं को प्रचार प्रसार के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. विवाह पंजीयन की जागरूकता और अनिवार्यता को लोगों तक पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थल, मैरिज गार्डन और शादी घरों में ऐसी व्यवस्था किया जाए, जिससे लोग तत्काल विवाह पंजीयन कराएं. मैरिज गार्डन संचालकों के लिए अलग से दिशा-निर्देश जारी कराए जाएं कि वो तत्काल विवाह पंजीयन के लिए प्रेरित करने के साथ मदद करें.