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संतोष चौबे’ के कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का हुआ लोकार्पण

भोपाल. वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह 'ग़रीबनवाज़' का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा का आयोजन रवीन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में समारोह पूर्वक किया गया। यह महत्वपूर्ण आयोजन रबीन्द्रनाथ टैगोर विशवविद्यालय, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री संतोष चौबे ने अपने कहानी संग्रह से "मगर शेक्सपियर को याद रखना" कहानी का बेहतरीन पाठ किया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी रचना प्रक्रिया पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पठनीयता को लेकर मैं हमेशा सजगता बरतता हूँ। कहानी पढ़ते समय पाठक पहले ही वाक्य से कहानी के भीतर प्रवेश करें और फिर उसे पूरा पढ़कर ही रहें। मेरा मानना है कि लेखक की पवित्रता और उसका भोलापन हमेशा बना रहना चाहिए। मेरी कहानियों का मुख्य आधार उनमें दृश्यात्मकता और इंटेनसिटी का होना हैं।   समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष श्री मुकेश वर्मा ने कहा ‘गरीबनवाज़’ कहानियाँ हमें जीवन के भीतर छिपे उस करुण पक्ष से जोड़ती हैं जो अक्सर हमारी दृष्टि से ओझल रह जाता है। संतोष चौबे की कहानियाँ सिर्फ घटनाएँ नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे संवाद का दस्तावेज़ हैं। उनका कथा संसार हमारे समय का गहन आत्मपरिचय कराता है।   समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार श्री शशांक ने कहा कि संतोष चौबे की कहानियों में जीवन की संवेदना, मानवीय द्वंद्व और सामाजिक सरोकार गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके पात्र आम जन की जद्दोजहद और आशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संग्रह की कहानियाँ अपने शिल्प और कथ्य दोनों में उल्लेखनीय हैं।”   विशिष्ट अतिथि प्रतिष्ठित कथाकार डॉ. उर्मिला शिरीष ने अपने वक्तव्य में कहा कि कहानी संग्रह में स्त्री–पुरुष संबंधों, सामाजिक असमानताओं और नैतिक प्रश्नों की प्रस्तुति बेहद संवेदनशीलता के साथ की गई है। चौबे जी की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिक हिंदी कथा साहित्य अब भी मनुष्य की जड़ों और उसकी करुणा से जुड़ा हुआ है।   कार्यक्रम में साहित्यकार रेखा कस्तवार, भालचंद्र जोशी, पंकज सुबीर ने भी अपनी टिप्पणियाँ दीं। वक्ताओं ने कहा कि चौबे जी की कहानियाँ गहरी मानवीय दृष्टि से ओतप्रोत हैं और वे पाठक को भीतर तक झकझोर देती हैं। युवा कथाकार सुश्री प्रज्ञा रोहिणी (दिल्ली) ने कहा कि संतोष चौबे जी की कहानियां उत्तर आधुनिकता के शिफ्ट की कहानियां है। हमारे समय की नजर नहीं आने वाली बड़ी-बड़ी खाईयों को पाटने का महत्वपूर्ण कार्य संतोष चौबे तमाम द्वदों के बावजूद अपनी रचनाओं के माध्यम से करते हैं।   युवा आलोचक श्री अच्युतानंद मिश्र (केरल) ने कहा कि संतोष जी रचनाओं में विधाओं में आवाजाही सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। सामाजिक स्वरूप और सामाजिक आलोचना को लेकर चिंता और गहरी वैचारिकी दृष्टि उनकी कहानियों में विन्यस्त है।   अतिथियों का स्वागत वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन की प्रबंधक सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन भी सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा दिया गया। लोकार्पण समारोह का संचालन युवा कथाकार एवं वनमाली कथा के संपादक श्री कुणाल सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ रचनाकारों डॉ. विजय बहादुर सिंह, डॉ. विनीता चौबे, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय (मुंबई), आनंद प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. नितिन वत्स, बलराम गुमास्ता, डॉ. जवाहर कर्नावट, मेजर जनरल श्री श्याम श्रीवास्तव, श्री हरि भटनागर, प्रज्ञा रावत, नीलेश रघुवंशी, देवीलाल पाटीदार, डॉ. रामवल्लभ आचार्य, डॉ. गिरजेश सक्सेना, करुणा राजुरकर राज, मोहन सगोरिया सहित युवा रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज की।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के पोषण पर जारी की गाइडलाइन, छह महीने के बाद मांसाहारी परिवारों के लिए खास सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास विभाग ने दो साल तक के बच्चों के आहार को लेकर नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि छह माह की उम्र पूरी होने के बाद यदि परिवार मांसाहारी है, तो बच्चों को अंडा, मांस और मछली खिलाना चाहिए।विभाग ने बच्चों के पोषण के पांच सूत्र जारी किए हैं और इनका प्रचार-प्रसार आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बाजार की चीजें जैसे बिस्किट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस बच्चों के लिए नुकसानदायक हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। पोषण अभियान के तहत दिए निर्देश केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन सूत्रों को अपनाने को कहा है। मध्य प्रदेश में इन्हें राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। पोषण के पांच सूत्र इस प्रकार हैं:     पहले 1000 सुनहरे दिन: बच्चे के जन्म से दो वर्ष तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत है।     पौष्टिक आहार: परिवार मांसाहारी हो तो बच्चे को अंडा, मांस और मछली देने की सलाह।     अनीमिया से बचाव: आयरन और प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन बढ़ाने की सलाह।     डायरिया से बचाव: साफ पानी और स्वच्छ भोजन पर ध्यान।     स्वच्छता और साफ-सफाई: संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत व घरेलू स्वच्छता पर फोकस। बच्चों के लिए 1000 दिन बताए सुनहरे पोषण के पांच सूत्र बताते हुए कहा गया है कि पहले सौ दिनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक की उम्र की अवधि शामिल है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल होना चाहिए, ताकि बच्चे का पूरा विकास हो। इस दौरान मां और बच्चे को सही पोषण की सर्वाधिक जरूरत होती है। इन 1000 सुनहरे दिनों में 270 दिन गर्भावस्था, 365 दिन बच्चे के जन्म के पहले साल के और 365 दिन बच्चे के जन्म के दूसरे साल के शामिल होते हैं। पौष्टिक आहार में कहा- मांस, मछली, अंडा खाना चाहिए सभी उम्र के लोगों के साथ बच्चे को छह माह का होने पर पर्याप्त मात्रा में अलग-अलग आहार खिलाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, चावल और पीले व काले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां मसलन पालक, मैथी, चौलाई, सरसों, पीले फल आम, पका पपीता आदि खाना चाहिए। विभाग ने इसमें यह भी कहा है कि यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली खाना चाहिए। विभाग के अनुसार खाने में दूध, मिल्क प्रोडक्ट, अखरोट आदि शामिल करने के साथ आंगनवाड़ी में मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। जब बच्चा छह माह का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी दिया जाना चाहिए। इसमें कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल शामिल हैं। अगर मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में नमक, चीना और मसाला कम डालें और बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न पिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिलते। अनीमिया रोकने के लिए भी अंडा, मांस, मछली खाने को कहा पोषण का तीसरा सूत्र अनीमिया रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयास बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अनीमिया रोकथाम के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मैथी, सरसों, फल, दूध, दही, पनीर आदि बच्चे को खिलाएं। एमपी में हो चुका है अंडा खिलाने का विरोध प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों को अंडा खिलाने का प्रस्ताव पूर्व में भी महिला और बाल विकास विभाग में आ चुका है जिसका जमकर विरोध हुआ और इसके बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। अब केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग के पोषण के पांच सूत्र बताए जाने के बाद इसे जिला अधिकारियों को लागू करने के लिए कहा गया है। हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों से इसकी सप्लाई को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। बच्चे के माता पिता के लिए यह सलाह दी गई है।

जनजातीय वन-भूमि पट्टाधारी किसानों के लिए खुशखबरी, सब्जी उत्पादन पर मिलेगा विशेष अनुदान

भोपाल प्रदेश में जनजाति बाहुल्य ग्रामों में वनपट्टाधारी परिवारों को सब्जी उत्पादन के प्रति प्रोत्साहित कर, उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इसके तहत प्रदेश के चार संभाग के 16 जिलों में जनजाति वर्ग के लोगों को वन भूमि पर पैदावार बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत सब्जियों के उत्पादन के लिए विशेष अनुदान दिया जाएगा। अनुदान राशि प्रति हैक्टेयर इकाई लागत का 90% तक हो सकता है। आयुक्त उद्यानकी से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में नर्मदापुरम संभाग में नर्मदापुरम , बैतूल, हरदा, जबलपुर संभाग में जबलपुर, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा कटनी, नरसिंहपुर, डिंडोरी और बालाघाट, शहडोल संभाग में शहडोल, उमरिया और अनूपपुर तथा भोपाल संभाग में भोपाल और सीहोर जिलों के कोलार बांध के आसपास के वनपट्टाधारी किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। इन किसानों को कृषि तकनीकी विशेषज्ञ और मार्केटिंग एक्सपर्ट की सलाह पर उच्चमूल्य वाली सब्जी फसलों जैसे:- टमाटर, लौकी, करेला, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली ब्रुसेल्स, स्प्राउट, बाकलावली, हरी मटर, बैंगन, शिमला मिर्च, भिंडी, खीर, हरी मिर्च, गाजर चुकंदर, शलजम, मूली, गांठ गोभी, राजमा, शकरकंद, केल-करम साग, सहजना की फली या मुनगा तथा पात्तिदार सब्जियों पर अनुदान सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को विभाग के एमपीएफएसटीएस पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना अनिवार्य है। जिन किसानों का चयन योजना के अंतर्गत किया जाएगा, उनको उद्यानकी विभाग द्वारा सब्जी फसल उत्पादन की नवीन तकनीकियों, फसलोत्तर प्रबंधन, विपणन एवं संस्करण और विषयों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा।  

किसानों के लिए बड़ी राहत: शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना जारी रहेगी

किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण योजना निरंतर जारी रहेगी राज्य शासन ने किया आदेश जारी भोपाल राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) द्वारा शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण देने की योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। इस संबंध में राज्य शासन ने आदेश जारी किया है। जारी आदेशानुसार खरीफ 2025 सीजन के लिये देय तिथि 28 मार्च 2026 तथा रबी 2025-26 सीजन के लिये देय तिथि 15 जून 2026 नीयत की गई है। राज्य शासन द्वारा अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले सभी किसानों को गत वर्ष के समान 1.5 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित देय तिथि तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) दिया जायेगा। 

फेक ऑडियो विवाद में चंद्रशेखर आजाद का बयान — विवाद नहीं चाहिए, रोहिणी बोलीं- सबूत दो

इंदौर इंदौर की रोहिणी घावरी ने एक बार फिर चंद्रशेखर आजाद पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कोई मेरे आरोपों को गलत कहता है तो साबित कर के दिखाए। दरअसल उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पूर्व परिचित डॉ. रोहिणी घावरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि, मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह महिलाओं का सम्मान करते हैं और किसी भी विवादित बयानबाजी में पड़ना नहीं चाहते। चंद्रशेखर बोले- मैं मरा नहीं हूं.. चंद्रशेखर ने कहा, "मैं मरा नहीं, जिंदा हूं। जब मैं खुद सामने बोल रहा हूं, तो किसी ऑडियो या वीडियो के पास जाने की क्या जरूरत है?" उन्होंने आगे कहा कि वह हमेशा बसपा प्रमुख मायावती और कांशीराम साहब का सम्मान करते आए हैं। "हमारे राजनीतिक रास्ते भले अलग हों, लेकिन बहनजी के संघर्ष और कांशीराम साहब की विचारधारा के प्रति हमारा आदर हमेशा रहेगा। यही हमारे संस्कार हैं, जो हमें माता-पिता से मिले हैं।" रोहिणी घावरी ने दी खुली चुनौती चंद्रशेखर के इस बयान के बाद डॉ. रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा, "अगर हिम्मत है, तो चंद्रशेखर खुलकर कहें कि बहनजी को लेकर वायरल ऑडियो फेक है।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि, "जब वह सांसद हैं, तो अपनी पद की ताकत से जांच क्यों नहीं कराते ताकि सच्चाई सामने आ सके?" इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष खुलकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

सुश्री भूरिया का निर्देश, आंगनवाड़ी केंद्रों में भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए

आंगनवाड़ी केन्द्रों में नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करें : मंत्री सुश्री भूरिया हितग्राहियों के पंजीयन और पोषण ट्रैकर की मॉनिटरिंग को अभियान के रूप में संचालित करने के निर्देश भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने सोमवार को विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में संचालित सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता और सहायिका के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए ताकि सेवाओं में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने कहा कि हितग्राहियों का पंजीयन और पोषण ट्रैकर की मॉनिटरिंग नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए। इस कार्य को विभागीय स्तर पर एक अभियान के रूप में संचालित किया जाए जिससे प्रदेश में प्रत्येक पात्र महिला, गर्भवती, धात्री माता और बच्चों को योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित (ऑपरेशन रहित) प्रसव सुनिश्चित करने के लिये प्रसव की नियत तिथि के चार दिवस पूर्व शासकीय चिकित्सालयों में ठहरने के लिये वार्ड चिन्हांकित किए जाएं। इस कार्य के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के 25,239 भवनविहीन आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए नवीन भवन निर्माण की योजना तैयार की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रतिवर्ष 3,000 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण प्रस्तावित है मंत्रि परिषद से स्वीकृति के लिये प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं जिनकी जानकारी भारत सरकार को भी होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम का प्रभावी अनुश्रवण करें, साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में मेडिकल किट का नियमित रूप से परीक्षण किया जाए। आयुक्त महिला एवं बाल विकास श्रीमती निधि निवेदिता ने बैठक में कहा कि शहरी क्षेत्रों की सुपरवाइज़र यह सुनिश्चित करें कि आंगनवाड़ी केंद्र समय पर खुल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब विभाग की ओर से ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिससे यह पता चल सके कि आंगनवाड़ी केंद्र माह में कितने दिन संचालित रहा। सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार 97,791 में से 99.11% केंद्र 21 से 24 दिवस तक खुले जबकि 91.16% केंद्र माह में 25 दिवस से अधिक खुले रहे। यह अवधि मध्य जोनल क्षेत्र में सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि 11,786 आंगनवाड़ी केंद्रों को शासकीय भवनों में स्थानांतरित किया गया है तथा 21,954 एक कमरे वाले केंद्रों को सुविधायुक्त भवनों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही विद्युत विहीन केंद्रों में विद्युत प्रदाय के लिये पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 7,500 केंद्रों को विद्युत कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कुपोषण निवारण के लिये जुलाई और अगस्त 2025 में विशेष अभियान चलाया गया, जिसमें 9,49,161 बच्चों के वजन, ऊँचाई और लंबाई के आंकड़ों का सत्यापन कर वास्तविक डेटा दर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप ठिगनापन के रिपोर्टिंग आंकड़ों में 7.5% की कमी दर्ज की गई।सभी कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल स्तर पर सीबीसी टेस्ट सुनिश्चित किया जा रहा है और गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 5 दिवसीय परामर्श सत्रों की व्यवस्था की जा रही है।वर्तमान में 26,583 आंगनवाड़ी केंद्र किराए के भवनों में संचालित हैं जिनमें से 14,649 ग्रामीण और 11,934 शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। पीएम जनजातीय न्याय महाअभियान के तहत 605 आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 217 भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (दा-जगुआ) के अंतर्गत 66 नवीन आंगनवाड़ी केंद्र एवं भवन स्वीकृत एवं संचालित हैं। समीक्षा के दौरान भवनविहीन आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण, पूरक पोषण आहार की व्यवस्था, पोषण ट्रैकर एवं आरसीएच अनमोल डेटा की एकरूपता तथा हितग्राहियों तक समय पर सेवाओं की उपलब्धता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

साइबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि, MP-CERT बनी राष्ट्रीय स्तर पर आदर्श मॉडल

सायबर सुरक्षा में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास : एमपी-सीईआरटी बनी राष्ट्रीय नेतृत्व की मिसाल एमपी-सीईआरटी ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया प्रशिक्षण भोपाल विश्व में अक्टूबर माह को 'सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ' के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जन-सामान्य को इस दिशा में जागरुक बनाने का है कि डिजिटल सुरक्षा केवल विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि हर नागरिक और हर संस्था की सामुहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (एमपी-सीईआरटी) ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करते हुए न केवल राज्य, बल्कि देशभर में नई मिसालें कायम की हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने 'सायबर भारत सेतु, राष्ट्रीय साइबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। एमपी-सीईआरटी ने स्थापना के बाद से अब तक 24 से अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। इनमें राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।इन सत्रों का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को सायबर सुरक्षा के व्यावहारिक पहलुओं से जोड़कर उन्हें दैनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल सुरक्षा के उपायों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा है। एमपी-सीईआरटी ने रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और सीहोर जिलों में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए। यहां कर्मचारियों को संबंधित जिला कलेक्टर्स के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन कार्यक्रमों का नेतृत्व विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं एमपी-सीईआरटी के निदेशक संजय दुबे ने किया। एमपी-सीईआरटी ने सितंबर 2025 में 'सायबर भारत सेतु' नामक राष्ट्रीय सायबर अभ्यास का सफल आयोजन किया। सीईआरटी-इंडिया और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौ‌द्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से हुये इस आयोजन से मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया जिसने इस स्तर का प्रशिक्षण आयोजन किया। इस अभ्यास से सिद्ध हुआ कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। नीति-निर्माताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष आवासीय प्रशिक्षण एमपी-सीईआरटी अब इस आधार पर आगे बढ़ते हुए समूह-अ और समूह-ब अधिकारियों तथा नीति- निर्माताओं के लिए तीन दिवसीय रेजिडेंशियल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह प्रशिक्षण अभ्यास 27 से 29 अक्टूबर 2025 तक नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, (एनएफएसयू), गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया जा रहा है।इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को सायबर सुरक्षा की समग्र समझ, वैश्विक प्रवृत्तियों, साइबर रक्षा की सर्वोतम रणनीतियों और नीति निर्माण की संरचनाओं की गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे शासन के हर स्तर पर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त किया जा सके। राज्य में सायबर सुरक्षा नेटवर्क के लिये 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति एमपी-सीआईआरटी की रणनीति का मूल आधार 'विकेन्द्रित सतर्कता' (डीसेंट्रलाइज्ड विजिलेंस) है। राज्य सरकार ने अब तक 175 मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (सीआईएसओ) की नियुक्ति विभागीय और जिलास्तर पर की है। ये अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि सायबर सुरक्षा केवल आईटी इकाइयों तक सीमित न रहे, बल्कि यह हर नीति, प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रवाह का हिस्सा बने। इस नेटवर्क को और मज़बूत करने के लिए एक एकीकृत सीआईएसओ पोर्टल लॉन्च किया गया है। इससे जोख़िम, घटनाओं, और संबंधित परामर्शों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग में सहायता मिलेगी। जल्द ही जिलों में भी ई-गवर्नेस प्रबंधकों (डी ई-जीएम) का भी नोमिनेशन किया जायेगा। उन्हें भी अपने जिलों के सीआईएसओ के रूप में नामित किया जाएगा। इससे राज्य स्तर पर प्रशिक्षित सायबर सुरक्षा नेतृत्व का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार होगा। सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल (एसबीओएम): कोड सुरक्षा में अभिनव कदम एमपी-सीईआरटी की सबसे प्रभावशाली तकनीकी में से एक सॉफ्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स पद्धति का उपयोग है। यह प्रणाली सॉफ्टवेयर के घटकों की सूची तैयार करती है। इससे कमजोर या पुराने मॉड्युल्स की पहचान कर उन्हें समय रहते अपडेट किया जा सकता है। इससे नेशनल वल्नरेबिलिटी डेटाबेस (एनवीडी) के साथ समन्वय कर सुरक्षा खामियों की पहचान और समाधान की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।अक्टूबर 2025 तक 12 हज़ार से अधिक वल्नरेबिलिटी सफलतापूर्वक ठीक की जा चुकी हैं। साथ ही, नेशनल क्रिटिकल इंफोर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) के साथ मिलकर 120 से अधिक उच्च-प्राथमिकता वाले मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। अनाधिकृत विज्ञापनों और सरकारी पोर्टल सुरक्षा पर कार्रवाई इंडियन सायबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आईसीसीसी), गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पर एमपी- सीईआरटी ने सरकारी वेबसाइटों पर पाए गए अनाधिकृत ऑनलाइन सट्टेबाज़ी (बेटिंग) विज्ञापनों के मामलों में भी तत्परता दिखाई है। सरकारी पोर्टलों में मिले इन विज्ञापनों में से 40 से अधिक मामलों का निवारण एमपी-सीईआरटी की टीम ने त्वरित रूप से किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता एमपी-सीईआरटी न केवल तकनीकी मोर्चे पर, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ा रहा है। संस्था नियमित रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से पासवर्ड सुरक्षा, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल लेनदेन सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर सरल और रोचक सामग्री साझा कर रही है। इससे नागरिकों में साइबर सतर्कता की संस्कृति विकसित हो रही है। सतत निगरानी और राष्ट्रीय सहयोग की दिशा में अग्रसर एमपी-सीईआरटी का तकनीकी दल नियमित रूप से राज्य सरकार के 50 से अधिक पोर्टलों की सुरक्षा स्कैनिंग करता है। इसके माध्यम से कमजोरियों की पहचान कर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाता है। यह पहल राज्य शासन के सभी विभागों में साइबर सुरक्षा को शासन-प्रक्रिया का अभिन्न अंग बना रही है। सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस मंथ के अवसर पर एमपी-सीईआरटी की ये उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि मध्यप्रदेश सायबर सुरक्षित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिये तैयार है। प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार, और विकेन्द्रित सतर्कता के माध्यम से राज्य ने दिखाया है कि जब शासन, तकनीक और जागरूकता साथ मिलेंगे, तभी सुरक्षित डिजिटल भविष्य संभव है।  

भारत की आवाज़ बनेंगी विंध्य की वसुंधरा, कॉमनवेल्थ-आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी

सतना  कॉमनवेल्थ एशिया यूथ लीडरशिप समिट-2024 में हुई कॉमनवेल्थ एशिया यूथ एलायंस की स्थापना के बाद यह सम्मेलन युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार खोलने जा रहा है और महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां भारत का चेहरा होंगी वसुंधरा सिंह। विंध्य की धरती से एक बार फिर गौरव का सूरज उगने जा रहा है। सतना की युवा शोधार्थी वसुंधरा सिंह का चयन कॉमनवेल्थ-आसियान शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है। यह प्रतिष्ठित सम्मेलन 28 अक्टूबर को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित होगा, जहां कॉमनवेल्थ और आसियान सदस्य देशों के प्रधानमंत्री, मंत्री, राजनयिक, नीति-निर्माता और युवा नेता एक साथ एक मंच पर जुटेंगे। अब वसुंधरा मलेशिया में भारत के युवा नेतृत्व की आवाज बनेगी। एक ऐसी ‘विंध्य की बेटी’, जो अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की नवाचार शक्ति, शोध दृष्टि और नेतृत्व क्षमता का संदेश दुनिया तक पहुंचाएगी। पूर्व सांसद की पोती है ‘वसुंधरा’ वसुंधरा सिंह सतना लोकसभा के पूर्व सांसद दिवंगत रामानंद सिंह की पोती और राजवंत सिंह की पुत्री हैं। वर्तमान में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैं तथा मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। संगठन में वसुंधरा का सफर प्रेरणादायक रहा है, वह नरसिंहपुर की विभाग संगठन मंत्री, प्रांत छात्रा प्रमुख, और जिला संगठन प्रमुख जैसे दायित्व निभा चुकी हैं। कटनी में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में उनके योगदान ने उन्हें एक मजबूत सामाजिक और वैचारिक पहचान दी है। विंध्य क्षेत्र से होंगी पहली वसुंधरा विंध्य क्षेत्र की पहली और एकमात्र प्रतिनिधि हैं जिन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय है, सहयोग, नवाचार और भविष्य की साझेदारी"। कार्यक्रम के दौरान सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा, शोध, तकनीक और सतत विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। वसुंधरा सिंह की यह उपलब्धि केवल मध्यप्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले: भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भव्यता से मनाएँ

भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भव्यता से मनाएँ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एक से 15 नवम्बर तक हों विभिन्न विकासात्मक गतिविधियाँ  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के समापन कार्यक्रमों के संबंध में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वें जयंती वर्ष के समापन अवसर पर आगामी 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस भव्यता से मनाया जाए। साथ ही एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक ग्राम पंचायतों से राजधानी स्तर तक विभिन्न गतिविधियों का संचालन हो। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में भगवान बिरसा मुंडा के योगदान पर शिक्षण संस्थाओं में गतिविधियां संचालित की जाएं। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में सक्रिय रहे जनजातीय नायकों पर केन्द्रित प्रदर्शनियां लगाई जाएं। स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समुदाय के योगदान पर वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध, भाषण, क्विज और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय गौरव दिवस के संबंध में मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सोमवार को आयोजित बैठक में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों के सम्मेलन, हस्तशिल्प की प्रदर्शनी और लोक कलाओं पर केन्द्रित गतिविधियों का भी आयोजन किया जाए। जनजाति बहुल क्षेत्रों में इस अवधि में लगने वाले मेलों में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित विषय-वस्तु का प्रदर्शन किया जाए। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के समापन अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में शासकीय कल्याणकारी कार्यक्रमों और विकास गतिविधियों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए भी गतिविधियां हों।     बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

आत्म निर्माण-राष्ट्र निर्माण और युग निर्माण की गतिविधियों के लिए युवा चिंतन शिविर का मध्यप्रदेश में होना गर्व का विषय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गायत्री परिवार, समाज-संस्कृति-संस्कारों को पुष्पित-पल्लवित कर ऊर्जा का संचार कर रहा है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आत्म निर्माण-राष्ट्र निर्माण और युग निर्माण की गतिविधियों के लिए युवा चिंतन शिविर का मध्यप्रदेश में होना गर्व का विषय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के शिविर के शुभारंभ-सत्र को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का दिल है। जिस प्रकार हृदय, शरीर के रक्त को शुद्ध कर हमारी आयु बढ़ाता है, उसी प्रकार गायत्री परिवार समाज-संस्कृति-संस्कारों को पुष्पित-पल्लवित कर नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। प्रांतीय युवा चिंतन शिविर के माध्यम से आत्म निर्माण-राष्ट्र निर्माण और युग निर्माण की यह गतिविधियां देश के दिल में बसे मध्यप्रदेश से संचालित हो रही हैं। हम सबको इस पर गर्व है। उन्होंने कहा कि देश को आजादी तो वर्ष 1947 में मिल गई थी लेकिन वैचारिक रूप से युवाओं को दृष्टि प्रदान करने के लिए डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। संघ का यह शताब्दी वर्ष है। पंडित मदन मोहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने भी युवाओं को आगे बढ़ने के लिए दृष्टि प्रदान कर योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को शारदा विहार विद्यालय में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के तीन दिवसीय प्रांतीय युवा चिंतन शिविर के शुभारंभ-सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्य सरकार ने भगवान राम और कृष्ण के जीवन प्रसंगों को पाठ्यक्रमों में किया शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते दौर में भारतीय संस्कृति के सामने चुनौतियां हैं। परंतु भारत और विश्व में गायत्री परिवार की अखंड ज्योति भी प्रज्ज्वलित है। गायत्री परिवार, सर्वे भवंतु सुखिन: की सनातन भावना का पालन करते हुए मानवता की सेवा को ही अपना धर्म मानकर कार्य कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, नारी उत्थान, पर्यावरण, ग्राम विकास और नशा मुक्ति के क्षेत्र में गतिविधियों के माध्यम से धर्म सेवा और राष्ट्र निर्माण का कार्य निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। इसमें सनातन को समृद्ध करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाले अध्याय जोड़े गए हैं। राज्य सरकार ने भगवान कृष्ण और राम के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को भी पाठ्यक्रमों में शामिल किया है। हर्ष का विषय है कि गायत्री परिवार ने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक विषमता को दूर करने की दिशा में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। गायत्री परिवार ने संस्कारों की पद्धति को सरल और ग्राह्य बनाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गायत्री परिवार ने विवाह सहित सभी संस्कारों की पद्धति को सरल और ग्राह्य भाषा में कराने की प्रक्रिया आरंभ की, जिससे जनसामान्य को संस्कारों का महत्व और उनमें निहित भावना समझने में मदद मिली। राज्य सरकार द्वारा वैदिक पद्धति से काल गणना के लिए वैदिक घड़ी तैयार की गई है। इसी क्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा के अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी कार्य जारी है। हम बदलेंगे-युग बदलेंगे की भावना गायत्री परिवार का आधार गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार कोई संस्था नहीं बल्कि एक जीवन दर्शन है। यह एक विचार धारा है। पंडित राम शर्मा आचार्य ने गायत्री मंत्र को केवल जप नहीं बल्कि जीवन की दिशा बनाया। उन्होंने सिखाया कि युग परिवर्तन का आरंभ व्यक्ति के भीतर से होता है। उन्होंने 'हम बदलेंगे युग बदलेगा' की सीख देते हुए बतायाकि जब मनुष्य स्वयं सुधरता है तो परिवार सुधरता है। परिवार सुधरता है तो समाज बदलता है और समाज बदलता है तो राष्ट्र बदलता है। यही गायत्री परिवार के विचार का आधार है। माताजी भगवती देवी शर्मा ने इस विचार को मातृत्व का स्वर दिया और सेवा को साधना बना दिया। डॉ. पंड्या ने बताया आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर आधारित विकसित भारत-2050 का खाका तैयार करना इस शिविर का उद्देश्य हैं। स्वस्थ युवा-सशक्त राष्ट्र, शालीन युवा-श्रेष्ठ राष्ट्र, स्वावलम्बी युवा-संपन्न राष्ट्र और सेवाभावी युवा-सुखी राष्ट्र इस आयोजन के लक्ष्य हैं। प्रांतीय चिंतन शिविर में केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमारिया सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के सदस्य और युवा उपस्थित थे।