samacharsecretary.com

गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन पर्व संबंधी बैठक में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को गोवर्धन पर्व लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए। आयोजन में गौशालाओं तथा पशुपालकों को विशेष रूप से सहभागी बनाया जाए। साथ ही गोवर्धन पर्व पर पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां दर्ज करने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव गोवर्धन पर्व आयोजन के संबंध में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की गौ-शालाओं में गोवर्धन पर्व का सामुदायिक आयोजन होगा। गोवर्धन पर्व का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में किया जाएगा, जिसमें गोवर्धन पूजन, परिक्रमा, अन्नकूट भोग मुख्य होगा। इस अवसर पर पशुचारक समुदायों की कला, बरेदी और ठाट्या नृत्य आदि का प्रस्तुतीकरण होगा। कार्यक्रम में जैविक उत्पादक, दुग्ध उत्पाद, गोबर आधारित शिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, साथ ही पशुपालन, कृषि, सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार के लिए भी गतिविधियों का संचालन होगा। गोवर्धन पर्व पर सभी जिलों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंचगव्य उत्पाद जैसे घी, दूध, पनीर और दही से बनी सामग्री का वितरण किया जाएगा।  

Diwali के बाद MP में सोयाबीन किसानों की खुशी, भावांतर योजना के तहत मिलेगा सही मूल्य

इंदौर सोयाबीन उत्पाद किसानों के लिए सरकार ने भावांतर योजना शुरू की है। इसके लिए 17 अक्टूबर तक पंजीयन कराए गए और अब दीपावली बाद 84 दिन भावांतर योजना में सोयाबीन की खरीदी होगी। 24 अक्टूबर से प्रदेश की सभी मंडियों में भावांतर येाजना में सोयाबीन बचे सकेंगे। योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए मंडियों में प्रशासन द्वारा सभी सुविधाएं जुटाई जा रही है। 15 जनवरी तक होगी सोयाबीन की खरीदी इंदौर जिले में भी अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो खरीदी से लेकर निगरानी और भुगतान तक की व्यवस्था देखेगी। इंदौर संभाग में भावांतर योजना में सोयाबीन बचने के लिए एक लाख 45 हजाार 188 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 15 जनवरी तक भावांतर योजना में मंडियों में सोयाबीन बेच सकेंगे और अंतर की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किसानों के पंजीकृत खातों में किया जाएगा। संभाग में पंजीयन के लिए 432 केंद्र बनाए गए थे। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने विगत दिनों बैठक लेकर सभी जिलों के सोयाबीन की खरीदी को सुविधाजन बनाने के निर्देश जारी किए है। इंदौर की मंडियों में भी निगरानी के लिए विशेष व्यस्था की गई है।   सर्वाधिक पंजीयन इंदौर और धार जिले में हुए कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार संभाग में सर्वाधिक पंजीयन इंदौर और धार जिले में हुए है। सोयाबीन बोवनी के कुल रकबे की अपेक्षा इंदौर में 50.91 और धार में 35.74 प्रतिशत पंजीयन हुए है। जिले- किसान- रकबा- प्रतिशत इंदौर- 46,061 – 1,22,809 – 50.91 धार – 37,940 – 1,06,464 – 35.74 खंडवा – 20,001 – 46,652 – 24.75 बड़वानी – 13,455 – 15,592 – 75.18 खरगोन – 13,364 – 24,799 – 27.83 झाबुआ – 10,478 – 13,578 – 18.73 बुरहानपुर – 2,534 – 4,411 – 40.10 आलीराजपुर – 1,355 – 1,215 – 3.10

गोवर्धन पर्व: प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और समग्र विकास का पर्व – डॉ. मोहन यादव

गोवर्धन पर्वः प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का उत्सव डॉ. मोहन यादव भोपाल आप सभी को दीपोत्सव, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव की शुभकामनाएं और बधाई… दीपावली के उत्सव की श्रृंखला में आरोग्य, आर्थिक समृद्धि, परिवार एवं समाज समन्वय और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है। दीपावली के अगले दिन होने वाला गोवर्धन पर्व प्रकृति, पर्वत और गौ-वंश संरक्षण की भारतीय प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। इस परंपरा का साक्षात दर्शन हमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण करने से मिलता है। मानवता की रक्षा के इसी पावन स्मृति में गोवर्धन पूजन किया जाता है। इस पर्व में गौ-धन के संवर्धन की प्रेरणा है जो भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें भारतीय समाज की वह जीवनदृष्टि समाहित है, जिसमें प्रकृति, पशु, मनुष्य और देवत्व का संतुलन देखने को मिलता है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हम प्रदेशभर में गोवर्धन पर्व का आयोजन कर रहे हैं। यह पर्व सभी जिलों में लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जा रहा है। आयोजन में पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित किया जायेगा। इस अवसर पर पशुपालन, कृषि और सहकारिता विभाग की जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ लोगों को जोड़ने और ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार की गतिविधियों का संचालन शुरू किया गया है। हमारे पर्व-परंपराओं में प्रकृति से सह-अस्तित्व और समग्र विकास का भाव है। इसी कड़ी में गोवर्धन पर्व प्रकृति और प्राणियों के बीच समन्वय और संरक्षण से जुड़ा है। इस दिन गोबर से पर्वत का प्रतीक बनाकर उसकी पूजा की जाती है। पर्वत का प्राकृतिक संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान है। पर्वत जल संरक्षण, संवर्धन और ऋतुओं के संतुलन का समन्वय करते हैं। इससे नदी, तालाब तथा अन्य जलस्रोत सुरक्षित रहते हैं। गोवर्धन पूजन में पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प भी है। हमारा प्रयास है कि इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और पशुधन का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचे। मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ गौ-वंश से समृद्ध है। गौ-माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। हमने वर्ष 2024-25 को गौ-संरक्षण एवं संवर्धन वर्ष के रूप में मनाया। हम पशुपालक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रयासरत हैं। देश के दुग्ध उत्पादन का 9 प्रतिशत मध्यप्रदेश में होता है इसे 20 प्रतिशत तक करना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश के गांव-गांव में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत घर-घर जाकर पशुपालकों को पशुओं में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं के टीकाकरण, स्वास्थ्य रक्षा, संतुलित पशु आहार, पशु पोषण आदि के बारे में तकनीकी और व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। इन सभी प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को दुग्ध केपिटल बनायेंगे। मुझे इस बात का संतोष है कि मध्यप्रदेश सरकार गौ-पालन, गौ-संवर्धन के लिए संकल्पित है। हमने गौ-शालाओं के लिए अनुदान को 20 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौ-वंश प्रतिदिन किया है। गौ-वंश के भरण-पोषण के लिए दो वर्ष पहले बजट 90 करोड़ रुपये था, जिसे 250 करोड़ रुपये किया गया और अब यह राशि बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ग्वालियर में देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौ-शाला परिसर में कम्प्रेस्ड बायो गैस संयंत्र की स्थापना की गई है। प्रदेश में नवीन गौ-शालाओं का निर्माण, प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाने, गौ-उत्पादकों को प्रोत्साहन, गोबर से सीएनजी निर्मित करने वाले आधुनिक प्लांट की स्थापना तथा नेशनल डेयरी विकास बोर्ड के साथ करार जैसे नवाचार किये गये हैं। हमारे लिए खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश में किसानों और पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिये 2900 गौ-शालाएं हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के अंतर्गत 2203 गौ-शालाओंका संचालन हो रहा है। विगत एक वर्ष में एक हजार से अधिक नवीन गौ-शालाएं प्रारंभ की गई हैं। गौ-वंश के आश्रय एवं भरण-पोषण के लिए नगर पालिक निगम ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में गौ-शालाएं खोली गई हैं। भोपाल में 69.18 एकड़ भूमि पर 10 हजार गौ-वंश क्षमता की गौ-शाला का निर्माण किया जा रहा है। गौ-अभयारण्य अनुसंधान एवं उत्पादन केन्द्र, सालरिया, जिला आगर-मालवा में वर्तमान में 6500 गौ-वंश का पालन-पोषण किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गौ-वंश का संवर्धन दुग्ध उत्पादन से रोज़गार और स्वरोज़गार का बड़ा स्रोत होगा। महिलाओं की आत्मनिर्भरता में भी दुग्ध व्यवसाय का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में जिस तरह खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया गया और हमारे किसान भाइयों ने उपज का भंडार भर दिया, उसी तरह दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे प्रदेश में गौ-वंश पालन बढ़ेगा, कृषि की पारंपरिक व्यवस्था को आधार प्राप्त होगा और प्राकृतिक खेती को सहयोग मिलेगा। रसायन रहित पौष्टिक अन्न तथा अन्य वस्तुओं का उत्पादन जहां स्वास्थ्य के लिये लाभदायी होगा, वहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गौ-संवर्धन रोज़गार सृजन के साथ समाज को सांस्कृतिक मजबूती प्रदान करता है और सु-संस्कृत, स्वस्थ और सबल समाज का निर्माण करता है, जिससे सतत और समर्थ अर्थव्यवस्था का विकास संभव है। यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि यहां विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत की विपुल वन संपदा है। प्रदेश की समृद्धि और आत्मनिर्भरता पर्वतों और गौ-वंश के संरक्षण से जुड़ी है, जो मध्यप्रदेश और देश की प्रगति का आधार है। मुझे प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार गौ-सेवा, जैविक कृषि और दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। गोवर्धन पर्व के अवसर पर मेरा प्रदेश की जनता से आग्रह है कि हम सब मिलकर गोवर्धन पर्व-परंपरा के संकल्प को आत्मसात करें और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश: त्यौहार मनाएं सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को संजोते हुए

प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के भाव से मनाएं आगामी त्यौहार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाए धूमधाम से आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव का सभी विधानसभा क्षेत्रों में हो आयोजन दीपावली पर स्वदेशी वस्तुओं के क्रय-विक्रय को करें प्रोत्साहित सभी जिलों में सामाजिक समरसता पर हों कार्यक्रम दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रमों में साझा की जाएं खुशियां कलेक्टर्स, संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल लें संज्ञान सभी ओर हो पुलिस की उपस्थिति : जनसामान्य करे सुरक्षा की भावना महसूस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी त्यौहारों के संबंध में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस से किया संबोधित सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारी वीसी में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विरासत को सहेजने के लिए आगामी 21 और 22 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर प्राकृतिक खेती और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियों का संचालन किया जाए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, नगरीय निकायों के पदाधिकारी, पंचायत प्रतिनिधियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हों। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक मंडलों को सम्मिलित करते हुए कार्यक्रमों को उत्सव के रूप में मनाया जाए। पशुपालन विभाग इन आयोजनों के लिए नोडल विभाग रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगामी त्यौहारों के संबंध में रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से सांसद, विधायक, सहित सभी जिलों के कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक-नगरीय निकायों के पदाधिकारी और अधिकारियों को वीसी के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी दीपावली मनाते हुए आत्मनिर्भर भारत के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से त्यौहारों में स्वदेशी वस्तुओं के क्रय विक्रय को प्रोत्साहित किया जाए। आत्मनिर्भर भारत और जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आगामी 25 दिसंबर तक जारी रहेंगे। सभी विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी मंत्रीजनप्रतिनिधि और कलेक्टर्स परस्पर समन्वय से तिथियां निर्धारित करते हुए आत्मनिर्भर भारत/जीएसटी उत्सव के कार्यक्रम आयोजित करें। इन आयोजनों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रदर्शन एवं क्रय-विक्रय को बढ़ावा दिया जावे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले में सामाजिक समरसता के आयोजन सम्पन्न किए जायें। इन आयोजनों में सामाजिक चेतनाशील प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए और सामाजिक समरसता की दिशा में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए विचार-विमर्श भी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिवाली पर्व हम सबके लिए है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से आहवान किया कि वे दीपावली पर वृद्धाश्रम, गरीब बस्तियों और अनाथ आश्रम जाकर उनके साथ दिवाली मनाएं। दिवाली के दूसरे दिन मजदूर मैदान, मजदूर हाट में जाकर श्रमिकों के साथ दिवाली की खुशियां साझा की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर्स द्वारा संवेदनशील घटनाओं और खबरों पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। कलेक्टर्स की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं और समाचारों के संबंध में प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद तथा विधायकगण को वस्तुस्थिति से तत्काल अवगत करायें, उनके द्वारा आवश्यकतानुसार मौका स्थल का भ्रमण भी किया जाए। जिला कलेक्टर्स ऐसी सूचनाओं और खबरों पर तत्काल फैक्ट चेक और आवश्यकता हो तो खंडन जारी करें। प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री, सांसद, विधायक भी भ्रामक और समाज में सद्भावना बिगाड़ने वाली खबरों के संबंध में सही स्थिति रखें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस आवश्यक रूप से घनी बस्ती और चौराहों पर रहे, पुलिस बल भी इलाके में घूमें, पुलिस की उपस्थिति जनता के बीच दिखना चाहिए, जिससे जनता में सुरक्षा की भावना महसूस हो। विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा और विधायक भगवानदास सबनानी ने भी अपने विचार रखे।  

मध्य प्रदेश में बदलेगा शिकायत निवारण का सिस्टम, अब मुख्य सचिव देखेंगे लंबित मामलों को

 भोपाल  मुख्यमंत्री (सीएम) हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का शीघ्र समाधान हो, इसके लिए अब संबंधित विभाग के अधिकारी के अलावा लंबित शिकायतें मुख्य सचिव तक पहुंचेंगी। मध्य प्रदेश सरकार एल-4 के बाद अब एल-5 स्तर को भी जोड़ने जा रही है। यहां मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव की निगरानी में लंबित शिकायतों का समाधान होगा। एल-1 यानी पहले स्तर के अधिकारी को जवाबदेह बनाने के लिए कार्रवाई विवरण भरने के कालम में संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसके अलावा अन्य स्तर पर भी अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर करने का नियम लागू किया जाएगा। सीएम हेल्पलाइन-181 में दर्ज समस्याओं के समाधान में लगातार देरी के बीच राज्य सरकार इसमें यह महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। फोर्स क्लोज करने से पहले शिकायतकर्ता को बताना होगा कारण शिकायतों के निराकरण के लिए एल-1, एल-2, एल-3 व एल-4 हैं। एल-1 से एल-3 तक निराकरण नहीं होता है तो वह एल-4 पर जाती हैं। यहां फिर भी लंबित रहती हैं या उसे फोर्स क्लोज कर दिया जाता है। अब ऐसा करने से पहले एल-5 लेबल पर मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव भी शिकायतों का समाधान करेंगे। इसके अलावा शिकायतकर्ता को यह भी बताना होगा कि उसकी शिकायत को फोर्स क्लोज क्यों किया जा रहा है। गुजरात मॉडल पर होगा काम यह पूरी व्यवस्था गुजरात मॉडल पर होगी। इसके लिए मप्र सरकार के अधिकारियों का एक दल गुजरात भेजा गया था। यहां दल ने गुजरात की सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली और निराकरण करने के तरीके व मानीटरिंग सिस्टम को समझा। गुजरात से आए दल ने मध्य प्रदेश की सीएम हेल्पलाइन की विशेषताओं और खामियों का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया गया कि एल-1 स्तर पर उचित जिम्मेदारी नहीं होने से शिकायतों के समाधान में देरी होती है। अधिकांश कार्रवाई का विवरण कंप्यूटर आपरेटरों के भरोसे चलता है, जिसमें शिकायत का केवल प्रारंभिक ब्यौरा ही दिया जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही नई व्यवस्था की जा रही है। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है     गुजरात मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतें के निराकरण के लिए एल-5 स्तर को जोड़ा जा रहा है, इसमें मुख्य सचिव तक शिकायतें भेजी जाएगी। यह कार्रवाई अभी प्रस्तावित है, शासन से अनुमति मिलने पर लागू करेंगे। – संदीप आष्ठाना, अवर सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय  

महाकाल की नगरी में भजनों की गूंज! दिवाली से शुरू होगा ‘महाकाल बैंड’, 30 कलाकार शामिल

उज्जैन  भगवान श्री महाकाल का धाम करोड़ों भक्तों की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर में लगभग 300 वर्ष पुरानी सिंधिया परंपरा के साथ अब मंदिर समिति नया अध्याय जोड़ने जा रही है. मंदिर समिति खुद का एक बैंड तैयार करने में जुटी है, जिसे बाबा महाकाल की होने वाली सभी आरती व अन्य आयोजनों के दौरान उपयोग में लिया जाएगा. सिंधिया शासन काल के वक़्त से शहनाई और नगाड़े आरती के दौरान बजाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है. मंदिर समिति अब भगवान महाकाल की पांचों आरतियों के दौरान विशेष बैंड तैयार करवा रही है. मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिकका कहना है "विशेष प्रकार का बैंड तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे ही काम पूरा हो जाएगा तो सभी को जानकारी साझा की जायेगी कि इसे कब-कहां, कैसे उपयोग में लाया जाना है." अभी मंदिर में दो बार होता है शहनाई वादन श्री महाकाल मंदिर में हर रोज आरती के दौरान नगाड़े बजते हैं तो वहीं सुबह भस्म आरती के बाद 06 बजे करीब और शाम में 07 बजे करीब संध्या आरती के आसपास शहनाई वादन की परंपरा है, जोकि लगभग 300 साल पुरानी सिंधिया शासन काल के दौरान शुरू की गई थी. मंदिर समिति के अनुसार जिस बैंड को तैयार किया जाना है, उसके लिए वाद्य यंत्रों की दानदाताओं के माध्यम से खरीदारी शुरू कर दी गई है. साथ ही मंदिर समिति बैंड बजाने के लिए वाद्य वादकों की भर्ती प्राक्रिया भी शुरू करने की तैयारी में है, जिसके लिए संभवतः आउटसोर्स के माध्यम से प्रयास होगा. बैंड पूरी तरह से धार्मिक परंपरा का हो श्री महाकाल मंदिर के महेश पुजारीका कहना है "शिव तो आदि अनादि हैं. उन्हें पौराणिक कथाओं में वाद्यों का रचयिता भी कहा गया है. वे नटराज हैं, कलाधर हैं. अगर मंदिर समिति बैंड पर विचार कर रही है और आरती के दौरान व अन्य आयोजन के लिए तो यह एक अच्छा प्रयास है. पुरानी परंपराओं के साथ नई परंपराओं को भी जोड़ना अच्छा है. बस सब कुछ धर्मसंवत् होना चाहिए. बैंड धार्मिक और सांस्कृतिक उपयोग के लिए ही हो."  

दिवाली पर बड़वानी में हिंगोट पर पाबंदी, ड्रोन से चेकिंग, पुलिस मुस्तैद

बड़वानी  दिवाली की रात कुछ जगहों पर 'आग के गोले' बरसने की पुरानी परंपरा देखने को मिलती है. इस बार बड़वानी प्रशासन और पुलिस ने इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. जिले में हिंगोट के निर्माण, भंडारण, क्रय-विक्रय और चलाने पर दो माह के लिए रोक लगा दी गई है. पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि नियमों का कड़ाई से पालन कराए जाए. शहर-गांव की सड़कों पर जगह-जगह तैनात पुलिस अब हिंगोट चलाने वालों की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती. कई जगह डंडे लेकर खड़ी टीमें नजर आ रही हैं और निगरानी के लिए सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों का उपयोग भी किया जा रहा है. क्यों उठाया यह कदम, चोटें और जान-माल की आशंका हिंगोट जिसे कुछ स्थानों पर 'दीपावली युद्ध' का हिस्सा माना जाता है, असल में एक फल होता है, जिसे खाली करके उसमें बारूद और विस्फोटक सामग्री भरी जाती है. युद्ध की तरह खेले जाने पर यह तेज रफ्तार से उड़ता हुआ किसी के भी शरीर में घातक चोट पहुंचा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में बड़वानी जिले में हिंगोट खेलने के दौरान कई गंभीर दुर्घटनाएं हुई हैं. पिछले साल एमजी रोड पर एक 8 वर्षीय बच्चे को गंभीर सिर की चोट लगी. अस्पताल में जांच में उसकी खोपड़ी में फ्रैक्चर व दिमाग पर असर पाया गया और लाखों रुपये खर्च कर उसकी जान बचाई गई थी. इसी तरह दर्ज घटनाओं व संभावित जान-माल के जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने आपात कदम उठाने का निर्णय लिया. प्रशासनिक आदेश, दो माह का पूर्ण प्रतिबंध कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी जयति सिंह ने हिंगोट के निर्माण, भंडारण, विक्रय और उपयोग पर दो माह के लिए प्रतिबंध आदेशित किया है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने निर्देशों का पालन कराने और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी. आदेश में उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम 1884, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, विस्फोटक नियम 2008 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 208 समेत अन्य प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है. पुलिस की तैयारी, पेट्रोलिंग, ड्रोन, सीसीटीवी और मुकदमे एडिशनल एसपी धीरज सिंह बबर ने बताया कि, ''एसपी के निर्देशानुसार पुलिस हिंगोट चलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर रही है. जिलेभर में कई संदिग्धों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा चुके हैं. दिन-रात पेट्रोलिंग, संदिग्ध व्यक्तियों व विक्रेताओं की निगरानी, मुखबिर नेटवर्क को सक्रिय करने के साथ-साथ जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही है. मुहल्लों में जाकर टीमों द्वारा लोगों को समझाया जा रहा है कि यह खतरनाक प्रथा क्यों बंद होनी चाहिए और इसे रोकना किस तरह समुदाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध के उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती होगी. न केवल एफआईआर दर्ज की जाएगी, बल्कि आवश्यकतानुसार संपत्तियों व भंडारण पर भी कार्रवाई की जाएगी. जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की तुरंत सूचना पुलिस कंट्रोल रूम पर दें.      समाज का समर्थन और चेतावनी कई वार्डों व मोहल्लों के लोगों ने प्रशासन के निर्णय का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में हुई दुर्घटनाओं ने सबको हिलाया है और युवा वर्ग को इस तरह की खतरनाक रस्मों से दूर रखना चाहिए. वहीं कुछ परंपरावादी समुदायों में अभी भी यह रस्म जारी रखने की जिद दिखाई देती है, जिससे प्रशासन चौकन्ना है. एसडीएम भूपेंद्र रावत ने कहा, 'हमारा लक्ष्य केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि इस खतरनाक कुप्रथा को जड़ों से खत्म करना है ताकि आने वाले वर्षों में कोई भी परिवार इस तरह की त्रासदी का सामना न करे.'' हिंगोट क्या है, जानें खतरनाक प्रक्रिया हिंगोट मूल रूप से जंगलों से कच्चा तोड़ा जाने वाला फल है. इसे भीतर से खोखा कर लिया जाता है और फिर उसमें बारूद व विस्फोटक सामग्री भर दी जाती है. दीपावली के दिन ग्रामीण व युवा इसे एक खेल की तरह आपस में उछालते हैं, इस दौरान तेज धमाके व उड़ान के कारण गंभीर चोटें, आँखों व चेहरे पर आघात, हाथ-पैर कटने व यहाँ तक कि जान जाने तक की घटनाएं देखने को मिली हैं. इसलिए प्रशासन के लिए इसे नियंत्रित करना अनिवार्य हो गया है.

आदिवासियों के झोपड़े ढहे, बाबाओं के महल सुरक्षित: MP में न्याय पर उठे सवाल

सतना वन परिक्षेत्र सिंहपुर में वन विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया, लेकिन इस कार्रवाई ने सिस्टम की दोहरी नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां गरीब और आदिवासी वर्ग के आशियाने जेसीबी से मिटा दिए गए, वहीं दूसरी ओर इन्हीं जंगलों की सैकड़ों एकड़ भूमि तथाकथित बाबाओं और धार्मिक संस्थाओं को सामुदायिक पट्टों के नाम पर दी जा रही है। वन विभाग की कार्रवाई भले ही वन भूमि की सुरक्षा के नाम पर की गई हो, लेकिन इसने प्रशासन की प्राथमिकताओं और न्याय की समानता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग की टीम में परिक्षेत्र सहायक अंजनी कुमार पटेल, मोतीलाल पटेल, बीट प्रभारी ब्रजेश बागरी, पुष्पेंद्र सिंह, स्थायी कर्मी ब्रदी प्रसाद कुशवाहा, राजू सिंह गोंड समेत सुरक्षा श्रमिक दल शामिल रहा। विभाग ने बताया कि कार्रवाई के बाद भूमि की गहरी खुदाई कर उसे पुनः सुरक्षित किया गया, ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।   आदिवासियों की बेघर कहानी कार्रवाई के दौरान जिन परिवारों के आशियाने उजड़े, वे अधिकतर आदिवासी और मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। कई परिवार वर्षों से इसी भूमि पर खेती या झोपड़ी बनाकर जीवन-यापन कर रहे थे। कार्रवाई के बाद अब वे बेघर और बेसहारा हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “गरीबों पर बुलडोज़र चलता है, लेकिन बाबाओं और प्रभावशाली लोगों के कब्जे पर विभाग चुप रहता है।” बाबा और पट्टा संस्कृति पर सवाल सूत्र बताते हैं कि इसी परिक्षेत्र में कुछ धार्मिक संस्थाओं और आश्रमों को सामुदायिक उपयोग के नाम पर 100 से अधिक एकड़ वनभूमि दी गई है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “वन संरक्षण के नाम पर सरकार दोहरा रवैया अपनाती है एक तरफ आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ बाबाओं को वनभूमि पर ‘कानूनी कब्जा’ दिया जा रहा है।” कार्रवाई का ब्योरा वन परिक्षेत्राधिकारी नितेश कुमार गंगेले के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में बीट शिवराजपुर और मोरा के अतिक्रमण को हटाया गया। शिवराजपुर बीट (कक्ष क्र. पी-265) में कुल 8.00 हेक्टेयर भूमि पर से कब्जा हटाया गया। अतिक्रमणकारियों में रामभगत यादव (4.00 हे.), कामता उर्फ नत्थू यादव (2.00 हे.), अन्नू यादव (1.00 हे.), अशोक यादव (0.50 हे.) और संदीप यादव (0.50 हे.) शामिल रहे। वहीं मोरा बीट (कक्ष क्र. पी-253) में 17.00 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटाया गया। इसमें जगलाल गोंड (4.00 हे.), रामू गोंड (4.00 हे.), चिंतामणि पाल (3.00 हे.), बबलू पाल (3.00 हे.) और सोनेलाल पाल (3.00 हे.) के नाम सामने आए।

कोर्ट का बड़ा फैसला: आयुर्वेदिक दवा बनाने वालों को नहीं मिली राहत, जानें वजह

ग्वालियर बिना लाइसेंस के नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने और बेचने वाले आरोपितों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ से राहत नहीं मिली है। एकलपीठ ने एफआईआर रद्द करने की मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज अपराध प्रथम दृष्टया संज्ञेय हैं और जांच पूरी तरह वैध है। नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाए जाने की शिकायतें मिली दरअसल, थाना जनकगंज पुलिस को लंबे समय से अपने क्षेत्र में बिना औषधि लाइसेंस के नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गहन जांच के बाद विशेष टीम गठित कर छापामार कार्रवाई की। कार्रवाई में भारत सिंह कुशवाह, संतोष कुशवाह एवं विशाल सांखला द्वारा संचालित शिवम् फार्मेसी (नेहरू पेट्रोल पंप के पास, लक्ष्मीगंज, जनकगंज) के परिसर से बड़ी मात्रा में नकली आयुर्वेदिक औषधियां बरामद की गईं।   जान को खतरे में डालने का गंभीर अपराध इनमें “एडवांस ग्रोथ पाउडर”, “हाजमा चूर्ण हेल्थ बूटी” और “एक्टिव बॉडी ग्रोथ प्रोटीन पाउडर” जैसी दवाइयां शामिल थीं। जांच में पाया गया कि ये दवाइयां बिना किसी वैध लाइसेंस, फर्म का नाम, पता या बैच नंबर अंकित किए तैयार की जा रही थीं, जिससे मरीजों की जान को खतरे में डालने का गंभीर अपराध किया जा रहा था। पुलिस द्वारा बार-बार पूछे जाने पर भी आरोपी ड्रग कंट्रोलर, भोपाल से जारी वैध औषधि निर्माण लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके।   मौके पर बुलाए गए आयुष अधिकारी मंगल सिंह यादव की उपस्थिति में दवाइयों के नमूने एकत्र किए गए और शेष माल जब्त कर एफआईआर दर्ज की गई। यह अपराध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा कापीराइट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत किया गया। जांच के दौरान आरोपी विशाल सांखला ने बयान में स्वीकार किया कि वह भारत सिंह कुशवाह एवं संतोष कुशवाह द्वारा निर्मित नकली दवाइयों को शहर के विभिन्न मेडिकल स्टोर्स पर सप्लाई करता था।

दिवाली का माहौल बिगाड़ने की कोशिश, जबलपुर पुलिस ने तीनों युवकों को किया गिरफ्तार

जबलपुर शहर के गौरीघाट क्षेत्र में देर रात लगे एक विवादास्पद पोस्टर ने हड़कंप मचा दिया। पोस्टर पर लिखा था “MILK IS NOT VEGETARIAN (दूध शाकाहार नहीं है)” शनिवार रात जबलपुर पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए तीन युवकों को पोस्टर चिपकाते हुए पकड़ लिया और करीब 50 से अधिक पोस्टर जब्त कर लिए। बिना अनुमति लगाए जा रहे थे पोस्टर जानकारी के मुताबिक, ये पोस्टर भोपाल की एक विज्ञापन एजेंसी द्वारा मजदूरों से लगवाए जा रहे थे। पुलिस को रात करीब 1 से 2 बजे के बीच इसकी सूचना मिली, जिसके बाद सीएसपी महादेव नगोतिया और थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक छोटा हाथी वाहन में पोस्टर रखे हुए थे और तीन युवक उन्हें सड़क किनारे चिपका रहे थे। जब उनसे नगर निगम की अनुमति मांगी गई तो वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। भोपाल की एजेंसी से जुड़ा मामला पुलिस पूछताछ में एक युवक राजेश अहिरवार ने बताया कि वे भोपाल के कोलार क्षेत्र के रहने वाले हैं और यह काम उन्हें विपुल पांडे नामक व्यक्ति ने दिया था, जो प्रिंस इंटरप्राइजेस (भोपाल) के मालिक हैं। उन्हें निर्देश दिया गया था कि जबलपुर के गौरीघाट क्षेत्र में ये पोस्टर लगाए जाएं। पुलिस ने इनके पास से 50 से अधिक पोस्टर जब्त किए हैं। युवकों ने बताया कि इससे पहले वे फ्लाईओवर उद्घाटन के समय भी शहर में पोस्टर लगाने का काम कर चुके हैं। पोस्टर की सामग्री से बढ़ा विवाद पोस्टर पर लिखा था “MILK IS NOT VEGETARIAN, दूध शाकाहार नहीं है। भारत दुनिया में बीफ के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है और अधिक जानने के लिए ‘मां का दूध’ यूट्यूब पर देखें।” पोस्टर पर किसी प्रकाशक या संस्था का नाम नहीं था, जिससे इसकी प्रामाणिकता और उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं। सीएसपी महादेव नगोतिया ने बताया कि रविवार शाम को गौरीघाट पर दीपोत्सव 2025 का आयोजन होना है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। ऐसे में इस तरह के भड़काऊ और भ्रम फैलाने वाले पोस्टर लगाना शहर की फिजा बिगाड़ने की साजिश माना जा रहा है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर पूरे क्षेत्र से पोस्टर हटवा दिए हैं और विज्ञापन एजेंसी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।