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इलाज का झांसा देकर फॉर्महाउस ले गया ‘डॉक्टर’, महिला से की शर्मनाक हरकत – केस दर्ज

सिंगरौली मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र में एक महिला के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। महिला का आरोप है कि आरोपी रामप्रकाश पांडेय, जो लान संचालक है, ने खुद को चिकित्सक बताकर उसे अपने पास बुलाया और दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि कुछ दिन पहले उसने एक अंजान मोबाइल नंबर पर संपर्क किया था, जो आरोपी का था। आरोपी ने खुद को चिकित्सक बताया और महिला को लगातार परामर्श देता रहा। 24 सितंबर को वह इलाज के बहाने महिला को सोनभद्र के घोरावल के पास से अपनी बाइक पर बैठाकर लान ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला किसी तरह घर पहुंची और घटना की जानकारी अपने पति को दी। पहले सिंगरौली में मुकदमा दर्ज कराने की कोशिशें असफल रहीं, इसके बाद उसने इलिया थाने में तहरीर दी। थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि महिला की तहरीर पर आरोपी रामप्रकाश पांडेय के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस आरोपित की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है। 

मध्यप्रदेश का अन्नदाता अब बन रहा है ऊर्जादाता: मुख्यमंत्री डॉ यादव

किसान हमारी अर्थव्यवस्था की हैं रीढ़: मुख्यमंत्री डॉ यादव मध्यप्रदेश का अन्नदाता अब बन रहा है ऊर्जादाता किसानों का कल्याण सर्वोपरि, किसान हित में करेंगे सभी प्रयास सूखे खेत को पानी मिल जाये तो फसल हो जाती है सोना हम हर खेत तक पहुंचायेंगे पानी किसानों की खुशहाली ही हमारे विकास का है मुख्य आधार मुख्यमंत्री ने सोलर पंप स्थापना के लिये की किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी देने की घोषणा विद्युत पंप से एक स्टेप अधिक पॉवर केपिसिटी का दिया जायेगा सोलर पंप सोयाबीन पर भावांतर भुगतान के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री निवास में हुआ किसान आभार सम्मेलन भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के 3 हजार से अधिक किसान हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारे किसान भाई ही मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। किसानों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। सरकार का हर निर्णय किसानों के कल्याण को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। किसानो की भलाई के लिए हमारी सरकार हर जरूरी कदम उठायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर संभव तरीके से किसानों की आय बढ़ाकर उनकी माली हालत मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। भावांतर योजना किसानों को खुले बाजार में फसलों की कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देती है। यह योजना किसान हित में सरकार की एक बड़ी पहल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को मुख्यमंत्री निवास परिसर में 'सोयाबीन पर भावांतर भुगतान के उपलक्ष्य में' आयोजित किसान आभार सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सूखे खेत को अगर पानी दे दिया जाये, तो फसल सोना हो जाती है, हम प्रदेश के हर खेत तक पानी पहुंचायेंगे। मध्यप्रदेश के अन्नदाता अब ऊर्जादाता बन रहे हैं। किसान भाई अपने खेतों में सोलर पंप जरूर लगाएं। सोलर पंप लगाने से बिजली के अस्थाई कनेक्शन के खर्च से मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सोलर पॉवर पंप स्थापना के लिये किसानों को अब 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। पहले 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को विद्युत पंप से एक स्टेप अधिक पॉवर केपिसिटी का सोलर पॉवर पंप दिया जायेगा अर्थात् 3 HP वाले किसान को 5 HP का सोलर पॉवर पंप और 5 HP वाले किसान को 7.5 HP का सोलर पॉवर पंप दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने किसान आभार सम्मेलन में पारम्परिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले सभी कलाकारों को 5-5 हजार रूपए देने की घोषणा भी की। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन तथा भगवान हलधर बलराम एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर सम्मेलन की विधिवत् शुरूआत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान भाइयों की मेहनत से ही प्रदेश की जीडीपी में कृषि 39 प्रतिशत से अधिक का योगदान देती है। किसान भाई सच्चे अर्थों में मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, फलों और सब्जियों के उत्पादन की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश में अग्रणी है। प्लांट बेस्ड प्रोटीन के उत्पादन के मामले में भी हम कम नहीं हैं। संतरा, मसाले, लहसुन, अदरक और धनिया उत्पादन में मध्यप्रदेश नंबर वन है। मटर, प्याज, मिर्च, अमरूद उत्पादन में दूसरे तथा फूल, औषधीय एवं सुंगधित पौधों के मामले में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश सोयाबीन स्टेट, मिलेट्स स्टेट, मसाला स्टेट, लहसुन स्टेट और संतरा स्टेट के रूप में प्रसिद्ध होकर देश का फूड बास्केट कहलाने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेती-किसानी के लिए जल अमृततुल्य होता है। इसीलिए जल-संरक्षण के हर जरूरी उपाय कर जल अवश्य बचायें। हमारी सरकार ने प्रदेश के सभी अंचलों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 3 बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं पर काम प्रारंभ किया है। राजस्थान के साथ पार्वती-काली सिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो से बुंदेलखंड और चंबल, उत्तरप्रदेश के साथ केन-बेतवा से बुंदेलखंड और महाराष्ट्र के साथ ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना से हम प्रदेश के सभी अंचलों में सिंचाई की स्थाई सुविधा उपलब्ध कराने की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान धरती माता के वास्तविक पुत्र हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। प्रदेश में 250 से अधिक नदियां निकलती हैं। मां नर्मदा प्रदेश के किसानों के लिए वरदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को अनुदान पर सोलर पंप प्रदान कर रही है। किसान को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप दे रहे हैं। किसानों को 32 लाख सोलर पंप दिए जा रहे हैं। किसान 5 हॉर्स पावर तक के सोलर पंप लगाएं। बिजली का खर्च बढ़ाएं और अतिरिक्त बिजली सरकार को बेचें। हमारी सरकार आने पर प्रदेश में अब 52 लाख हेक्टेयर रकबा सिंचित हुआ है। नदी जोड़ो योजना के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध करा रहे हैं। किसानों की फसल को पानी मिल जाए, फसल सोने की हो जाती है। राज्य सरकार ने सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को उनकी फसल का समुचित दाम मिले, इसके लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स भी स्थापित की जा रही हैं, जिससे अधिक उत्पादन होने पर किसान भाइयों को फसल फेकनी न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले फसल का सीजन निकल जाने पर मुआवजे की राशि भेजी जाती थी। लेकिन अब राज्य सरकार ने सोयाबीन की फसल काटने से पहले ही राशि बांटना शुरू कर दिया है। किसानों की परेशानी किसान का बेटा ही समझ सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों के लिए भावांतर योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान भाई पवित्र मन से दूसरों का पेट भरने के लिए अन्न उगाते हैं। पुरानी सरकारों ने मां नर्मदा के जल का उपयोग नहीं किया। आज वही नर्मदा सिंचाई, पेयजल और उद्योगों को पानी उपलब्ध कराती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी गोपालक किसान धूमधाम से गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाएं। राज्य सरकार शासकीय स्तर पर गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाएगी। प्रदेश में प्रभु राम के ओरछा धाम को भव्य रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम वन गमन पथ भी विकसित कर रहे हैं। भगवान कृष्ण से जुड़े हर स्थान को तीर्थ के रूप में विकसित कर रहे हैं। किसान भाई … Read more

मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत के बाद कड़े कदम, 24 जिलों में गुणवत्ता सलाहकार नियुक्ति की घोषणा

भोपाल  मध्य प्रदेश में हाल ही में कफ सीरप से हुई बच्चों की मौत के बाद सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता दिखाई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्य प्रदेश अब राज्य के 24 जिलों में जिला गुणवत्ता सलाहकार नियुक्त करने जा रहा है। इन पदों पर ऐसे विशेषज्ञ रखे जाएंगे जो सरकारी अस्पतालों की सेवाओं, दवाओं और उपकरणों के गुणवत्ता की निगरानी करेंगे। एनएचएम के अनुसार, इन सलाहकारों का चयन ऐसे उम्मीदवारों में से होगा, जिनके पास हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हेल्थ मैनेजमेंट या पब्लिक हेल्थ से संबंधित डिग्री या अनुभव होगा। ये लोग जिला स्तर पर अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे, उपचार सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करेंगे और लापरवाही या कमियों की रिपोर्ट तैयार करेंगे। साथ ही वे सुधारात्मक कार्ययोजना बनाकर उसे लागू कराने में भी भूमिका निभाएंगे। जिम्मेदारी और निगरानी का बढ़ेगा दायरा जिला गुणवत्ता सलाहकार अस्पतालों में स्वच्छता, दवा वितरण, मरीजों के प्रति व्यवहार, रिकार्ड प्रबंधन और आपात सेवाओं जैसे बिंदुओं पर नजर रखेंगे। इसके अलावा वे यह भी देखेंगे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सेवाएं दी जा रही हैं या नहीं। एनएचएम इनकी रिपोर्ट के आधार पर समय-समय पर अस्पतालों की रैंकिंग और सुधार योजनाएं तय करेगा। उम्र सीमा और आरक्षण प्रविधान इसमें आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को शासन के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। कुल 24 पदों में से 13 अनारक्षित, पांच ओबीसी, तीन एससी और दो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। एक पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की पहल     मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए यह पहल की गई है। जिला गुणवत्ता सलाहकार अस्पतालों के निरीक्षण और सुधार कार्यों की निगरानी करेंगे। इससे मरीजों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा। – अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश।  

पीएम आवास योजना में प्रदेश के 49 लाख परिवारों को मिला अपना घर

खुद के घर की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबको आवास देना ही हमारा लक्ष्य आवास हितग्राहियों के लिये है यह विशेष दीवाली पीएम आवास योजना में प्रदेश के 49 लाख परिवारों को मिला अपना घर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम आवास योजना के अंतर्गत नीमच में तैयार 348 एएचपी आवास कॉलोनी का किया वर्चुअल लोर्कापण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अपना घर हर किसी का सपना होता है। अपने घर की खुशी से बढ़कर और कुछ नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 4 करोड़ से अधिक लोगों को उनका मकान बनाकर दिया है। प्रधानमंत्री का खुद का कोई घर नहीं है, लेकिन देश के सभी नागरिकों को मकान देना उन्होंने अपना लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीमच के 348 परिवार अपने सालों पुराने सपने को हकीकत में बदलते देख रहे हैं। यह दिवाली उनके जीवन की सबसे सुंदर दीपावली बनकर आई है, क्योंकि इस बार सभी अपने घर में में दिवाली मनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से नगर पालिका नीमच द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत अफोर्डेबल हाऊसिंग प्रोजेक्ट के तहत निर्मित आवासों की सुंदर कॉलोनी का वर्चुअल लोकार्पण कर हितग्राहियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां 348 परिवारों को गृह प्रवेश कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए घर के लाभार्थियों से संवाद कर सभी को धनतेरस के दिन मिले नये आवास और पंच दिवसीय दीपोत्सव की मंगलकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि जब गरीब का घर रोशन होता है, तभी देश में सच्ची दीपावली होती है। आज मध्यप्रदेश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। लक्ष्मी-गणेश की कृपा से मध्यप्रदेश जन-कल्याण और विकास की दीपावली मना रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी नीयत साफ है, हमारी नीतियां गरीबों को सशक्त करने की हैं एक दौर वो भी था जब गरीबों के नाम पर योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन उनका लाभ कई पुश्तों के बाद भी गरीब को नहीं मिल पाता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से हितग्राहियों को छत ही नहीं, स्वाभिमान और सुरक्षा दोनों मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 योजना के तहत हम 10 लाख आवास बनाएंगे। हम इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पीएम आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफार्मिंग स्टेट अवॉर्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान मिला है। नीमच तो हमेशा से ही इस मामले में अव्वल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही नीमच जिले में 134 करोड़ की लागत से पीएम आवास के 348 घरों की चाबियां सौंपी जा रही हैं। जिसमें 144 मकान EWS के, 144 मकान LIG और 60 मकान MIG के शामिल हैं। साथ ही 33 कमर्शियल प्लॉट भी हैं। आज जो मल्टी स्टोरी आवास प्रदान किए जा रहे हैं, यह सिर्फ मकान नहीं, बल्कि एक पूरा परिसर विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां चमचमाती सड़कें, व्यवस्थित नालियां, ओवरहेड टैंक और सीवरेज पंपिंग स्टेशन की व्यवस्था की गई है। स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा के लिए गेट और बाउंड्री वॉल बनाई गई हैं। बच्चों के खेलने के लिए पार्क की स्थापना की गई है। कैंपस में हेल्थ केयर सेंटर (प्राथमिक उपचार केन्द्र), बस स्टॉप, फायर सुविधा भी है। यहां स्कूल बनाने के लिए भूमि भी आरक्षित की गई है। यानी हर ज़रूरत का पूरा ध्यान रखा गया है। यह समेकित परियोजना एक सच्चे मायनों में सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य की नींव रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रदेश में हर गरीब के पास पक्का मकान हो। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से शहरी गरीबों को पक्के घर देने की दिशा में मिशन मोड पर काम जारी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पीएम आवास योजना के तहत अब तक 49 लाख से अधिक परिवारों का अपने घर का सपना पूरा हुआ है। 40 लाख से अधिक ग्रामीण और 8 लाख से अधिक शहरी परिवारों को अपनी छत मिली है। हमारे गांव और शहर दोनों एक साथ मुस्कुरा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीमच में बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज बनेगा और हवाई सेवाओं से भी जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि नीमच की भादवा माता मध्यप्रदेश की वैष्णो देवी हैं। भादवा माता मंदिर के विकास के लिए भी सभी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बहनें हमारा मान हैं। बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की राशि पहुंच गई है, भाईदूज से 250 रुपए अलग से दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भाइयों को भी हमने भावांतर योजना का उपहार दिया है। अब हमारी सरकार कोदो-कुटकी का उपार्जन भी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश दीयों की दिवाली भी मना रहा है और दिलों की दिवाली भी मना रहा है। आज दोहरी खुशी का मौका है, त्यौहार की खुशी के साथ-साथ अपने घर का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री ने नव गृह प्रवेश करने वाले सभी हितग्राहियों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। कार्यक्रम को नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार ने भी संबोधित किया। उन्होंने बताया कि आज नगर पालिका क्षेत्र नीमच में 348 घरों की पीएम आवास कॉलोनी सहित नीमच विधानसभा क्षेत्र की 25 ग्राम पंचायतों को स्वच्छता रथ भी दिए गए हैं। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सु निर्मला भूरिया ने वर्चुअली सहभागिता की। नीमच में हुए कार्यक्रम में मंदसौर-नीमच सांसद सुधीर गुप्ता, पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा, विधायक माधव मारू, जिलाध्यक्ष मती खंडेलवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में नीमच की नगर पालिका अध्यक्ष मती स्वाति चोपड़ा ने सभी का आभार व्यक्त किया।  

एम्स से सुभाष नगर तक भोपाल मेट्रो का CMRs निरीक्षण खत्म, जल्द दौड़ेगी मेट्रो

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर संचालन का जो लक्ष्य रखा गया था, अब वह पूरा होने के करीब है। मेट्रो प्रबंधन ने संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली से आई कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम द्वारा दूसरे चरण का निरीक्षण पूरा करा लिया है। सीएमआरएस की तीन सदस्यीय टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम्स से सुभाष नगर स्टेशन तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य लाइन, ट्रैक, विद्युत और यांत्रिक (ई एंड एम) सिस्टम, स्टेशन भवन और परिचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। यह भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा मानी जा रही है। अब सिर्फ ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट का इंतजार है। इससे पहले 25 सितंबर को मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) और उनकी टीम ने डिपो और रोलिंग स्टॉक का परीक्षण किया था। वहीं इस बार सीएमआरएस टीम ने सभी स्टेशनों पर सुरक्षा और तकनीकी मानकों की समीक्षा की ताकि संचालन शुरू होने से पहले सभी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मानक अनुरूप हों। CMRS की दूसरी जांच में डिपो से AIIMS Bhopal तक के आठ मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इस जांच में यात्रियों के लिए सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया। इसमें स्टेशन के आने-जाने के रास्ते, लिफ्ट, एस्केलेटर, शौचालय, कंट्रोल रूम, आग से सुरक्षा के इंतजाम, ट्रैक और बिजली की व्यवस्था, टेलीकॉम नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। स्टेशनों की सुंदरता बढ़ाने के कामों को भी देखा गया। CMRS की दूसरी जांच का यह हिस्सा प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करेगा। यह हिस्सा सुभाश नगर डिपो को AIIMS Bhopal से जोड़ता है। इस खंड में आठ मेट्रो स्टेशन हैं और यह शुरुआती यात्री सेवा का मुख्य आधार बनेगा। MPMRCL के अधिकारियों ने बताया कि CMRS की यह जांच मेट्रो के संचालन की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि जांच में हर छोटी-बड़ी चीज़ का बारीकी से मुआयना किया जा रहा है। स्टेशन के अंदर और बाहर की सुरक्षा व्यवस्थाएं, यात्रियों के लिए आरामदायक माहौल और आपातकालीन स्थिति से निपटने के इंतजामों को परखा जा रहा है। यह भी बताया गया कि मेट्रो के ट्रैक और बिजली की सप्लाई की जांच भी की जा रही है ताकि संचालन के दौरान कोई दिक्कत न आए। टेलीकॉम नेटवर्क की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि यात्रियों को संचार की कोई समस्या न हो। इस पूरे प्रोजेक्ट में MPMRCL के अधिकारी पूरी मेहनत से लगे हुए हैं ताकि भोपालवासी जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकें। दिवाली के बाद होगा अंतिम निरीक्षण मेट्रो प्रबंधन के अनुसार अब अगला कदम सीसीआरएस द्वारा अंतिम निरीक्षण है। उनकी स्वीकृति मिलने पर ही भोपाल मेट्रो को ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट जारी होगी। रिपोर्ट मिलते ही राजधानी के लोगों का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो जाएगा और भोपाल मेट्रो अपने पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक दौड़ने लगेगी।  

दिवाली से पहले भोपाल में पटाखा गन हादसा: आंख डैमेज, एम्स ने दी सावधानी बरतने की सलाह

भोपाल भोपाल में पटाखा गन से 11 साल के बच्चे की आंख की पलक जल गई। पुतली पर सफेदी (ल्यूकोकोरिया) छा गई। इस साल दिवाली का यह पहला केस गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के नेत्र विभाग में पहुंचा है। अब बच्चे की आंख बचाने के लिए शनिवार को सर्जरी की जाएगी। बच्चा पटाखा गन लोड करने के बाद चेक कर रहा था। ऊस वक्त गन चल गई, जिससे पटाखा उसकी आंख में लग गया। GMC के नेत्र विभाग के मुताबिक बच्चे को प्राथमिक उपचार दे दिया गया है। सभी जांचें पूरी कर ली गई हैं। रिपोर्ट आने के बाद नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस कुबरे सर्जरी करेंगे।दूसरी ओर, भोपाल एम्स ने दिवाली को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जिसमें बताया है कि इस त्योहार पटाखे फोड़ते वक्त क्या करना चाहिए और किससे बचना है। बता दें, पिछली दिवाली पर ऐसे ही हादसों में 52 लोग झुलसे थे। पिछली दिवाली पर 91 वर्षीय बुजुर्ग की साड़ी में दीये से आग लग गई थी। 70% झुलसने के बाद उन्हें एम्स भोपाल लाए थे। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, जलने के 15 मरीज एम्स, 13 जेपी और 24 हमीदिया पहुंचे थे। 6 मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ी थी। आंखों के सबसे ज्यादा मरीज दिवाली पर सबसे ज्यादा मरीज आंखों की चोटों के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। बीते साल एम्स में 14 साल के बच्चे और 29 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई थी। वहीं, हमीदिया में दो मरीज 50% से ज्यादा झुलसे थे। उनका इलाज बर्न एंड प्लास्टिक विभाग में हुआ था और करीब 20 दिन बाद डिस्चार्ज किया गया। एम्स ने जारी की एडवाइजरी एम्स भोपाल ने कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक कल्याण का अवसर है। इस अवसर पर एम्स के बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने जरूरी सावधानियां साझा की हैं। केमिकल और थर्मल इंजरी के साथ आते हैं मरीज गांधी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. अदिति दुबे ने बताया कि दिवाली पर बर्न से संबंधित कई इंजरी आती हैं। मुख्य रूप से ये केमिकल और थर्मल दो प्रकार की होती हैं। केमिकल इंजरी में आंखों में चूना या सफाई और रंगरोगन में उपयोग होने वाली सामग्री चली जाती है। वहीं, थर्मल इंजरी के अधिकतर केस पटाखों से जलने के होते हैं। डॉ. दुबे ने कहा कि पटाखों से लगने वाली चोटें लंबे समय तक दिक्कत देती हैं, क्योंकि विस्फोट से पहले थर्मल बर्न होता है और उसके बाद उसमें मौजूद केमिकल से हुआ नुकसान देर तक असर दिखाता है। हर साल की तरह इस बार भी नेत्र विभाग पूरी तरह अलर्ट है। उन्होंने अपील की कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह से जले तो सीधे अस्पताल पहुँचे। आंखों में समय रहते इलाज मिलने से रोशनी बचने की संभावना अधिक रहती है।

रिटायर्ड डीएसपी सहित तीन लोगों के खिलाफ सतना में बिजली चोरी की कार्रवाई

 सतना सतना जिले के बिरसिंहपुर विद्युत वितरण केन्द्र के अंतर्गत आने वाले गुझवां गांव में शुक्रवार को विद्युत विभाग के जेई सुनील मिश्रा के नेतृत्व में विषुत विभाग की जांच टीम ने छापा मारते हुए सेवानिवृत्त डीएसपी समेत दो अन्य पर विद्युत चोरी का मामला दर्ज किया है। इस बड़ी कार्रवाई से पूरे गांव में हलचल मचा दी है और अन्य लोगों में भी विद्युत चोरी को लेकर दशहत का माहौल है। विद्युत विभाग की टीम के मुताबिक रिटायर्ड डीएसपी रामकीर्ति शुक्ला के परिसर में अवैध रूप से 'कटिया फांस' कर बिजली का उपयोग किया जा रहा था। इस मामले में बिजली चोरी का एक प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी अभियान के तहत, गुझवा गांव के गुलाब गुप्ता के खिलाफ भी बिजली चोरी का एक अन्य प्रकरण दर्ज किया गया है। विद्युत वितरण केंद्र ने इन दोनों ही मामलों में वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जेई सुनील मिश्रा ने बताया कि बिजली चोरी रोकने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

लालघाटी चौराहे पर भीखमंगाई पर कड़ा अभियान, भोपाल प्रशासन का सख्त कदम

भोपाल राजधानी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पिछले 10 महीनों से प्रयासरत है। साल की शुरुआत में अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाया गया था और कईयों को सुधार गृह तक भेजा गया था। कुछ मामलों में एफआइआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन वक्त के साथ अभियान धीमा पड़ गया। नतीजा यह हुआ कि शहर के चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भिक्षुकों की संख्या फिर से बढ़ गई। इसी को देखते हुए प्रशासन ने भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सात टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। शुक्रवार को संत हिरदाराम नगर क्षेत्र की टीम ने लालघाटी चौराहे पर निरीक्षण किया। टीम ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समझाया कि वे भीख न मांगें और अपने घर लौट जाएँ। चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा भीख मांगते पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे चला अभियान तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में सुबह 10 बजे शुरू हुआ अभियान शाम चार बजे तक चला। नगर निगम सहायक प्रभारी उद्यान अवध नारायण मकोरिया की अगुवाई में टीम लालघाटी चौराहे पर पहुंची। टीम को देखकर कई भिक्षुक भाग निकले, लेकिन कुछ वहीं लौटकर वाहन चालकों से पैसे मांगने लगे। टीम ने जब आधार कार्ड देखे तो पाया कि अधिकांश भिक्षुक राजस्थान और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्हें समझाया गया कि भोपाल में भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसलिए वे अपने गृह राज्य लौट जाएँ। मासूम बच्चों के साथ मिली महिला निरीक्षण के दौरान लालघाटी फ्लाईओवर के नीचे एक महिला अपने छोटे बच्चों के साथ बैठी मिली। पूछताछ में उसने बताया कि वह महाराष्ट्र की रहने वाली है और इलाज के लिए भोपाल आई है। उसके पति यहां मजदूरी कर रहे हैं। टीम ने उसे भी चेतावनी दी कि सड़क पर बैठकर भिक्षा न मांगे। नहीं माने तो होगी एफआईआर हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि यदि भिक्षुक समझाईश के बाद भी नहीं मानते और भीख मांगते पाए जाते हैं तो लेने और देने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद भिक्षुकों को सुधार गृह भेजकर स्वजनों से संपर्क कर सौंपा जाएगा। नोडल अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने बताया कि शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए सभी एसडीएम के नेतृत्व में टीमें गठित की गई हैं। अभी भिक्षुकों को समझाया जा रहा है, लेकिन आगे सड़क से हटाकर सुधार गृह भेजने और एफआइआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी।

तीन युवकों की दर्दनाक मौत: उज्जैन में कार और डंपर की भयानक टक्कर

उज्जैन  आगर रोड पर घट्टिया के ग्राम जैथल के पास कार और डंपर की आपस में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। भिड़ंत इतनी खतरनाक थी कि कार का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। घटना में कार में सवार चार में तीन युवकों की मौत हो गई। एक की हालत गंभीर है। युवक बड़नगर और उज्जैन के रहने वाले हैं और नलखेड़ा में बगलामुखी माता मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। बड़नगर के इंगोरिया निवासी आदित्य पंड्या उम्र 22 वर्ष, अभय पंडित उम्र 20 वर्ष, उज्जैन के राजेश रावल उम्र 50 वर्ष व शैलेन्द्र आचार्य उम्र 20 वर्ष नलखेड़ा में दर्शन कर पुन: उज्जैन लौट रहे थे। जैथल के पास रात को 12.30 बजे गलत दिशा से आ रहे डंपर से कार की टक्कर हो गई। डंपर अलिसा फूड कंपनी का बताया जा रहा है। टक्कर में आदित्य पंड्या, अभय पंडित, राजेश रावल की मौत हो गई। शैलेंद्र आचार्य को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। डंपर चालक फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया। कार में मृत युवकों को ग्रामीणों से मदद से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर विधायक सतीश मालवीय मौके पर पहुंचे।

महालक्ष्मी मंदिर की अनोखी भव्यता: 5 दिन तिजोरियों और नोट-आभूषणों से सजा रहेगा मंदिर

रतलाम  रतलाम में मां महालक्ष्मी का मंदिर सज चुका है। सजावट फूलों से नहीं, हीरे, जवाहरात और नोटों से हुई है। मंदिर की हर लड़ में नोट लगे हैं। किसी में 10 तो किसी में 500 रुपए नजर आ रहे हैं।इस अद्भुत सज्जा के लिए भक्तों ने अपनी तिजोरी खोल दी है। मंदिर में अर्पित नकदी-आभूषण को दीपोत्सव के पांच दिन के बाद प्रसादी के रूप में भक्तों को समिति वापस लौटाएगी। मंदिर की सजाने की सालों पुरानी परंपरा के तहत इस साल 2 करोड़ रुपए से मंदिर को सजाया गया है। आज तक यहां से एक रुपया इधर से उधर नहीं हुआ है। धन राशि देने वालों में रतलाम के अलावा प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। दीपोत्सव के पहले दिन यानी आज धनतेरस से मंदिर की सजावट को भक्त निहार सकते हैं। संभवत: यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जो पांच दिनों तक भक्तों द्वारा अर्पित आभूषण और नोटों से सजा रहता है पहले जानिए आखिर यह परंपरा शुरू कैसे हुई…? मंदिर में पूजा कराने वाले अश्विनी पुजारी बताते हैं कि करीब 300 साल पुराना महालक्ष्मी जी का यह मंदिर रियासतकालीन है। रतलाम के महाराजा रतन सिंह राठौर ने जब रतलाम शहर बसाया, तब से यहां दीपावली धूमधाम से मनाई जाने लगी। राजा वैभव, निरोगी काया और प्रजा की खुशहाली के लिए पांच दिन तक अपनी संपदा मंदिर में रखकर आराधना कराते थे। इसके लिए महाराजा शाही खजाने के सोने-चांदी के आभूषण मां लक्ष्मी जी के श्रृंगार के लिए चढ़ाते थे, तभी से ये परंपरा चली आ रही है। धीरे-धीरे व्यवस्था बदलती गई और भक्त मंदिर के लिए चढ़ावा लेकर आने लगे। पिछले कई सालों से मंदिर की सजावट नोट और आभूषणों से की जा रही है। श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से मंदिर की सजावट के लिए अपनी तिजोरी खोलते हैं। अभी यह मंदिर सरकारी होकर कोर्ट ऑफ वार्डस में आता है। प्रशासन भी सजावट को लेकर पूरी निगरानी रखता है। मंदिर में आखिर क्या है खास… मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी की मूर्ति के साथ ही गणेश जी व सरस्वती मां की भी मूर्ति स्थापित है। लक्ष्मी की मूर्ति के हाथ में धन की थैली रखी है, जो वैभव का प्रतीक है। साथ मंदिर में महालक्ष्मी 8 रूप में विराजमान हैं। जिनमें अधी लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण, धन लक्ष्मी, विजयालक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी मां विराजमान हैं। पुजारी बताते हैं कि दीपावली पर्व हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दीपावली धन, वैभव का त्योहार है, जहां पर विष्णु भगवान के हाथों में महालक्ष्मी विराजमान हैं। सभी भक्त चाहते थे कि माताजी का वास्तविक स्वरूप, जो पुराणों, वेदों में दिखाया जाता है। यानी माता धन बरसा कर रही हैं, भक्त यहां आकर उसी रूप की अनुभूति करते हैं। मान्यता है कि जिस व्यक्ति का धन महालक्ष्मी के श्रृंगार में इस्तेमाल होता है, उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अब जान लीजिए मंदिर की सजावट होती कैसे है… दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट महालक्ष्मी मंदिर में हर साल दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट की तैयारी शुरू हो जाती है। शरद पूर्णिमा से ही यहां रुपए और गहने पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मंदिर को 1 रुपए से लेकर 20, 50, 100 और 500 रुपए के नए नोटों से सजाया जाता है। इस बार सजावट के लिए रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, नीमच के अलावा गुजरात, राजस्थान के भक्त ने श्रद्धानुसार राशि जमा कराई है। कई भक्त तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने एक साथ 5 लाख रुपए तक मंदिर काे दिए हैं। श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले नोटों से मंदिर के लिए वंदनवार बनाया जाता है। महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार कर गर्भगृह को खजाने के रूप में सजाया जाता है। मंदिर परिसर कुबेर के खजाने के रूप में दिखाई देता है। कई भक्त अपने घरों की तिजोरी तक मंदिर में सजावट के लिए रख जाते हैं। मंदिर की सजावट के लिए एक हजार श्रद्धालुओं ने धनराशि दी है। एक रुपए का भी हेरफेर नहीं, इसलिए यह व्यवस्था मंदिर की सजावट के लिए जो भक्त श्रद्धानुसार धन राशि, आभूषण सजावट के लिए देते हैं, उनकी बाकायदा एंट्री होती है। इस बार इसमें बदलाव कर डिजिटलाइजेशन कर दिया गया। नोट गिनने की मशीन का भी इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन एंट्री में नकदी व आभूषण देने वाले भक्तों का नाम, पता, पासपोर्ट फोटो और मोबाइल नंबर के साथ क्या धन राशि या आभूषण दी, उसकी डिटेल लिखी गई।ऑनलाइन टोकन पर महालक्ष्मी मंदिर की सील लगाई जाती है। साथ ही रजिस्टर में भी एंट्री की जाती है। दीपोत्सव के पांचवें दिन टोकन देखकर भक्तों को उनके द्वारा दी गई धन-राशि प्रसादी के रूप में लौटा दी जाती है। मंदिर परिसर में बंदूकधारी गार्ड तैनात मंदिर में रुपए आने का सिलसिला शुरू होते ही बंदूकधारी गार्ड भी तैनात कर दिए जाते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में सजने वाले कुबेर के खजाने की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं। मंदिर के पीछे ही माणक चौक पुलिस थाना है, जहां 24 घंटे फोर्स तैनात रहती है।