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मध्य प्रदेश सरकार OBC आरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: सीएम डॉ. मोहन यादव

पिछड़ा वर्ग आरक्षण के संबंध में प्रतिबद्ध मध्य प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता और केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राजभूषण चौधरी से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में राज्य सरकार द्वारा प्रतिबद्धता के साथ कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस संबंध में विस्तार से विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश भवन में सांसदगण से भी मुलाक़ात की।  हर घर जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राजभूषण चौधरी से भेंट कर मध्यप्रदेश के लिये पेयजल संबंधी योजनाओं के संबंध में चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय राज्यमंत्री श्री चौधरी को बताया की जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में सभी जिलों में कार्य हो रहा है। प्रदेश सरकार नागरिकों के लिए घर-घर तक जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में क्रियान्वित कार्यों की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार के अधिकारीगण से भी चर्चा की।   

प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया अभियान में देश में सर्वाधिक एक करोड़ से अधिक की हुई स्क्रीनिंग

नारी स्वस्थ होगी तो परिवार भी होगा स्वस्थ : राज्यपाल  पटेल प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया अभियान में देश में सर्वाधिक एक करोड़ से अधिक की हुई स्क्रीनिंग राज्यपाल ने वितरित किए सिकल सेल जेनेटिक कार्ड भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि नारी स्वस्थ होगी तभी परिवार स्वस्थ रहेगा। घर में, माँ स्वस्थ हो तो पूरे परिवार की देखभाल अच्छे से  कर सकती है। राज्यपाल  पटेल राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत सोमवार को मुरार सर्किट हाउस में  आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आयोजन स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के तहत किया हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में सिकल सेल जेनेटिक कार्डों का वितरण भी किया। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि सिकल सेल स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जहाँ एक करोड़ से अधिक व्यक्तियों की स्क्रीनिंग का कार्य किया गया है। आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कार्ड वितरण कार्य भी प्रदेश में अनुकरणीय तरीके से हुआ है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन अभियान अमृत काल का यह एक महत्वपूर्ण अभियान है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया मुक्त मिशन का वर्ष 2023 में शुभारंभ किया था। देश से वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए अभियान के रूप में तेज गति कार्य किये जा रहे हैं  है। वर्तमान में देश के 17 राज्यों के 278 जिलों का चयन कर सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन का कार्य हो रहा है।  प्रदेश के जबलपुर में अनुसंधान प्रबंधन एवं नियंत्रण केन्द्र प्रारंभ किया गया है। राज्यपाल  पटेल ने समारोह में आह्वान किया है कि सिकल सेल एनीमिया की जाँच सभी को कराना चाहिए। खासतौर से महिलाओं को इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए। स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के तहत देश भर में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाकर नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जा रहा है। इस अभियान का लाभ उठाकर सभी लोगों को अपने स्वास्थ्य की जाँच अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सम्पूर्ण देश में लगभग 15 हजार जन औषधि केन्द्र शुरू करायें हैं।  केन्द्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और अच्छी दवायें उपलब्ध हो रही हैं। राज्यपाल ने युवाओं को प्रदान किए हेलमेट राज्यपाल  मंगुभाई पटेल सोमवार को परिवहन विभाग द्वारा मुरार सर्किट हाऊस में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने वाहन चलाते समय सुरक्षा के समुचित प्रबंध करने पर बल दिया। सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए चालक के साथ ही सहयात्री को भी हेलमेट पहनने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना से बचाव का प्रभावी तरीका हेलमेट पहनकर वाहन चलाना है। राज्यपाल ने कार्यक्रम में 10 युवाओं को हेलमेट का वितरण भी किया। समारोह में जनप्रतिनिधि और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।  

राजाभोज एयरपोर्ट से विंटर सीजन में डायरेक्ट फ्लाइट्स फिर से शुरू, भोपाल से इन शहरों के लिए सुविधा

 भोपाल  राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई यात्रियों के लिए एक बार फिर अच्छी खबर आई है। इंडिगो एयरलाइंस ने भोपाल एयरपोर्ट से गोवा, अहमदाबाद, रायपुर जैसे शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू कर दी है। पिछले साल इन शहरों के लिए संचालित उड़ानों को यात्रियों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया गया था। पिछले 12 महीने से लगातार उठ रही डिमांड और हाल ही में किए गए यात्री सर्वे के बाद बेहतर पैसेंजर रिस्पांस के बाद इंडिगो एयरलाइंस ने 26 अक्टूबर से इन तीनों शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू करने का ऐलान कर दिया है। भोपाल एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि भोपाल हवाई अड्‌डे ने यात्रियों के लिए अपनी हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत किया है। अहमदाबाद, रायपुर, गोवा रूट पर डायरेक्ट फ्लाइट सेवा शुरू होने के बाद भोपाल एयरपोर्ट से प्रतिदिन उड़ानों की संख्या 36 दर्ज की जाएगी। 26 अक्टूबर से गोवा और अन्य शहरों के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू की जा रही है। इंडिगो एयरलाइंस गोवा के लिए दोपहर 2:40 पर विमान सेवा संचालित करेगी। गोवा से दोपहर 2:40 पर आने वाली फ्लाइट 3:30 पर दोबारा गोवा के लिए उड़ान भरेगी। राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू हुई हैं। 15 सितंबर से इंडिगो बेंगलुरु के लिए नई फ्लाइट शुरू की। 16 सितंबर से दिल्ली के लिए नई उड़ान शुरू हई। इसके बाद अहमदाबाद के लिए 21 सितंबर से सुबह और हैदराबाद के लिए 22 अक्टूबर से रात की नई फ्लाइट शुरू हुई। 

रेलवे का बड़ा ऐलान: 25 नवंबर से 8 जनवरी तक MP की 5 ट्रेनें रद्द, 18 के रूट बदले जाएंगे

ग्वालियर  पुराने साल की विदाई और नए साल के स्वागत को लेकर सैर-सपाटे की योजना बनाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। वीरंगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर वाशेबल एप्रन हटाकर गिट्टी रहित पटरी बिछाने का काम होने के कारण डेढ़ माह तक कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। 25 नवंबर से आठ जनवरी के बीच ग्वालियर होकर चलने वाली पांच जोड़ों ट्रेनों को रेलवे ने रद्द (Cancelled Train in MP) किया है, जबकि कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से संचालित किया जाएगा। ये ट्रेनें रहेंगी रद्द – ट्रेन क्रमांक 11901-11902 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-आगरा कैंट एक्सप्रेस 25 नवंबर से लेकर नौ जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 11903-11904 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-इटावा एक्सप्रेस 25 नवंबर से नौ जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 05073-05074 बेंगलुरु सिटी-लालकुआं साप्ताहिक ट्रेन को 29 नवंबर से छह जनवरी तक रद्द किया गया है। – ट्रेन क्रमांक 07363-07364 योगनगरी ऋषिकेश-हुबली साप्ताहिक ट्रेन 27 नवंबबर से पांच जनवरी तक रद्द रहेगी। – ट्रेन क्रमांक 06597-06598 योगनगरी ऋषिकेश-यशवंतपुर को 27 नवंबर से एक जनवरी तक रद्द किया गया है। परिवर्तित मार्ग से चलेंगी ये ट्रेनें – ट्रेन क्रमांक 22456 कालका-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस को 27 नवंबर से चार जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना होकर चलाया जाएगा। – ट्रेन क्रमांक 16318 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-कन्याकुमारी एक्सप्रेस 24 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 20494 चंडीगढ़-मदुरै एक्सप्रेस 28 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 16032 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-चेन्नई सेंट्रल 25 नवंबर से छह जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 16788 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस 27 नवंबर से एक जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 14314 बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – इसी प्रकार ट्रेन क्रमांक 14320 बरेली-इंदौर एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक तक अपने बदले हुए मार्ग ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 12162 आगरा कैंट-एलटीटी लश्कर एक्सप्रेस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 22706 जम्मूतवी-तिरुपति 28 नवंबर से दो जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 12752 जम्मूतवी-नांदेड़ 30 नवंबर से चार जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 22408 हजरत निजामुद्दीन-अंबिकापुर एक्सप्रेस 25 नवंबर से छह जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 11078 जम्मूतवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस 24 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 09466 दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक दिसंबर से पांच जनवरी तक बदले हुए मार्ग कानपुर से इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 09465 अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस 28 नवंबर से दो जनवरी तक कानपुर-इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से इटावा होते हुए कानपुर तक जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 11124 बरौनी-ग्वालियर मेल 24 नवंबर से सात जनवरी तक कानपुर-इटावा होते हुए ग्वालियर आएगी। – ट्रेन क्रमांक 04137 ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 04138 बरौनी-ग्वालियर 24 नवंबर से पांच जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी के बीच संचालित होगी। इन ट्रेनों के बदले स्टेशन – ट्रेन क्रमांक 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी 26 नवंबर से नौ जनवरी तक आगरा कैंट से शुरू होगी। – ट्रेन क्रमांक 19666 उदयपुर-खजुराहो इंटरसिटी 24 नवंबर से सात जनवरी तक आगरा कैंट तक संचालित की जाएगी। – ट्रेन क्रमांक 12279-12280 ताज एक्सप्रेस 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से दिल्ली के बीच संचालित की जाएगी। देरी से चलेंगी ये ट्रेनें – ट्रेन क्रमांक 22196 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी मंगलवार और बुधवार को 25 नवंबर से एक जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट विलंब से चलेगी। – ट्रेन क्रमांक 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी शनिवार को 29 नवंबर से तीन जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट देरी से जाएगी।

बड़ी सर्जरी: MP सरकार बदलेगी कई अधिकारियों की पोस्टिंग, कलेक्टरों पर विशेष कार्रवाई तय

भोपाल  मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव दशहरे के बाद मातहतों को सुशासन, न्याय और बेहतर कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाएंगे। उससे पहले बड़ी प्रशासनिक सर्जरी तय है। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के उन अधिकारियों को बदला जा सकता है, जिन्हें उम्मीदों के साथ लाया गया था लेकिन बेहतर परफॉर्मेंस नहीं कर पा रहे। कई कलेक्टरों पर भी गाज गिरनी तय है। ऐसे जिलों की बारी आएगी, जहां के प्रशासनिक मुखिया या तो विवादों में रहे हैं या काम अव्वल दर्जे का नहीं दिखा पाए। नए आइएएस अफसरों व राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में जिला पंचायत सीईओ बनाकर राहत की पोस्टिंग दी जा सकती है। पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस असल में मोहन सरकार में पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस होनी है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के पूर्व होनी थी, लेकिन तमाम विषयों को देखते हुए नहीं कर सके। अब नवरात्र और दशहरा पर्व नजदीक है, इसलिए कॉन्फ्रेंस को आगे खिसका दिया है। इसमें कलेक्टर, संभागायुक्त, एसपी पुलिस कमिश्नर समेत संभागों के आइजी-डीआइजी शामिल होंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कॉन्फ्रेंस में सीएस अनुराग जैन भी मौजूद रहेंगे। जिन जिलों में जिला पंचायत सीईओ ने नहीं हैं, उनमें कटनी, डिंडौरी, अनूपपुर, ग्वालियर, श्योपुर, छतरपुर, रतलाम, सिंगरौली, मंडला, शाजापुर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, सीधी. शहडोल, सिवनी, बुरहानपुर शामिल है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इन जिलों में सीईओ की कमान जल्द नए अफसरों को दे सकती है। हालांकि अभी इन जिलों में सीईओ का प्रभार दूसरे अफसरों को दे रखा है। कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव एजेंडे के साथ बैठेंगे। अलग-अलग सत्रों में अलग-अलग विषयों पर बातचीत होगी। शुरुआत जिलों की कमान संभाल रहे अफसरों के कामकाज पर आधारित रिपोर्ट से होगी। सूत्रों के मुताबिक संबंधितों को बताया जाएगा कि उन्होंने कहां अच्छा किया और कहां मुसीबत पैदा करने वाले काम किए। इस आधार पर ऐसे अधिकारियों को सीख दी जाएगी।

जबलपुर-रायपुर के बीच सफर होगा आसान, बनेगी 150 KM लंबी फोरलेन सड़क

जबलपुर  जबलपुर से रायपुर की सड़क की दशा जल्द बदलेगी। इस सड़क के कुछ हिस्से पर वाहन चालक चलने से घबराते हैं। इस सड़क को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण फोरलेन बनाने जा रहा है। सड़क की न सिर्फ चौड़ाई बढ़ेगी बल्कि नए तरह से निर्माण किया जाएगा। जबलपुर से चिल्पी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण एनएचएआइ करेगा। इस मार्ग के निर्माण में 4500 करोड़ का व्यय होगा। फिलहाल सडक निर्माण के लिए कंसल्टेंसी नियुक्त करने का प्रयास हो रहा है ताकि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जा सके। सब कुछ ठीक रहा तो यह सड़क जो अभी एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के पास है, इसे वापस एनएचएआइ सड़क का हस्तातंरण करेगा। वन्य जीवों के लिए सुरक्षित मार्ग जबलपुर से चिल्पी के बीच मंडला क्षेत्र में आने वाला कान्हा नेशनल पार्क का कोर एरिया आता है। जहां वन्यजीवों की घनी आबादी विचरण करती है। ऐसे में एनएचएआई मार्ग में जगह-जगह अंडरपास और ओवर ब्रिज का निर्माण करेंगा ताकि वाहन निकलने से वन्य जीवों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। कई जगह साउंड प्रूफ उपकरण भी लगाए जाएंगे जिससे बंदरों और अन्य जीवों को वाहनों की आवाजाही खलल न पैदा करें। बता दें करीब 25 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत आ रही है। फोरलेन बनने से बढ़ेगी रफ्तार फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग 30 जबलपुर से रायपुर के बीच दो लेन है। इस वजह से वाहनों की आवाजाही में थोड़ी परेशानी होती है। मौसम खराब होने पर वाहनों की लंबी कतार सड़क पर लग जाती है। आवागमन भी बाधित होता है। यहां कुछ जगह लैंड स्लाइडिंग की भी समस्या बनी हुई है इसके लिए लगातार एमपीआरडीसी को शिकायत होती है लेकिन वहां से कोई भी राहत नहीं मिल पा रही है।  एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से कराया जा रहा था। वर्षों से यह सड़क बेहद खराब स्थिति में है जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस सड़क को सरकार फोरलेन में तब्दील होगी तो बड़े स्तर पर राहत मिलने की संभावना है। इस सड़क के लिए गडकरी ने मांगी थी माफी जबलपुर मंडला की यह वही सड़क है जिसके लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सड़क की खराब गुणवत्ता के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। गडकरी 2022 में मध्य प्रदेश दौरे पर आए थे। तब उन्होंने मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे की इस बदहाल सड़क को देखा। उन्होंने शर्मिंदगी महसूस की। सड़क की स्थिति को देखते हुए मंच से ही माफी मांगी थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने ये बयान सात नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश के मंडला में दिया था। गडकरी ने जबलपुर से मंडला के बीच नेशनल हाईवे के टेंडर रद्द कर सड़क के इस हिस्से को फिर से बनवाने के निर्देश दिए थे। बाद में इस मार्ग को सुधारने के लिए 53 करोड़ रुपये की लागत से सुधार का काम हुआ था। 2015 में शुरू हुआ था निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 251 करोड़ की लागत से जबलपुर से मंडला के बीच इस राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन को निर्माण एजेंसी बनाया था। तीन फेस में बनने वाली इस सड़क का काम साल 2015 में शुरू हुआ था, जिसे दिसंबर 2016 तक पूरा हो जाना था। लेकिन, अब तक हाईवे का निर्माण अधूरा है और जहां हाईवे बना वो घटिया निर्माण से टूट-फूट का शिकार है। एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जबलपुर से चिल्पी के बीच करीब 150 किमी की सड़क को फोरलेन बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कंसल्टेंसी की तलाश हो रही है। हम जल्द डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजेंगे यदि मंजूरी मिली तो एमपीआरडीसी से यह सड़क लेकर एनएचएआई निर्माण कराएंगा।

भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट को मिलेगी विश्व धरोहर की मान्यता? प्राचीन चट्टानों और भूगर्भीय रहस्यों से भरा क्षेत्र

जबलपुर  भेड़ाघाट व लम्हेटाघाट की चट्टानें यूनेस्को के विश्व धरोधर सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गई हैं। जिसके बाद नर्मदा तट पर बसे जबलपुर की प्राचीन धरा को अब पूरी दुनिया में पहचान मिलेगी। भूगर्भ शास्त्र के अनुसार दो हजार करोड़ वर्ष पुरानी जबलपुर के नर्मदा तट की चट्टानें सदियों से पृथ्वी की कई संरचनाओं के निर्माण की गवाह रही हैं। कुछ वर्ष पहले यूनेस्को ने भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट (भूगर्भशास्त्र में लमेटा फार्मेशन के नाम से विख्यात) की चट्टानों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय किया और वर्ष 2021 में लम्हेटा यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हुआ। संगमरमर के पत्थरों को चीरकर निकलती नर्मदा के इस तट को दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सूची में लाने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ), जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड समेत राष्ट्रीय स्तर की अन्य एजेंसी कार्य कर रही हैं। विशेषज्ञों के दल ने किया दौरा विशेषज्ञों का एक दल ने भेड़ाघाट, लम्हेटा का दौरा किया और इस बात पर सहमति जताई कि यह स्थल अगले दो वर्ष के अंदर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थायी रूप से नाम दर्ज करवा लेगा। डब्ल्यूआइआइ के विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया ने बताया कि यह साइट प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भ के महत्व के लिहाज से देश की पहली अति प्राचीन धरोहर होगी। इधर, डब्ल्यूआईआई द्वारा तैयार प्रारंभिक मूल्यांकन को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। आगे यूनेस्को से प्रारंभिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आने के बाद नामांकन डोजियर यूनेस्को को सौंपा जाएगा। डोजियर जमा होने के बाद यूनेस्को के इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) का मूल्यांकन दल स्थल का निरीक्षण करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा। क्या है भूगर्भीय महत्व भेडाघाट और इसके निकट दो हजार से बाइस सौ करोड़ वर्ष पुरानी चट़टानों से लेकर पंद्रह लाख वर्ष पुरानी चट्टानें मौजूद हैं। इस समयावधि के बीच पृथ्वी में हुई भू वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रमाण यहां मौजूद हैं। यहां की इगनिंग बराइट नाम की चटटानें इस बात का प्रमाण हैं कि यहां कभी ज्वालामुखी फटने जैसी घटनाएं भी हुई थीं। यहां नर्मदा नदी का प्रवाह के परिवर्तन प्रमाण में देखने मिलते हैं जिसे नदी अपहरण कहा जाता है। नर्मदा के इस तट को पूरे विश्व में लमेटा फार्मेशन के नाम से जाना जाता है। भूगर्भ शास्त्रियों के लिए यह स्थल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां विभिन्न समय कालखंड की चट़टानों के साथ-साथ डायनासोर के अंडों के फासिल भी मिले हैं। केंद्र के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर शुक्रवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट के स्थलों का निरीक्षण किया। दल में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के विज्ञानी डा. गौतम तालुकदार, विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया, प्रोजेक्ट एसोसिएट दीपिका सायरे एवं स्नेहा पांडे, जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के डा. सुहेल अहमद, सर्वे आफ इंडिया के जयप्रकाश पाटीदार, कुलदीप सिंह बागरी, हेमंत तथा भेडाघाट नगर परिषद के सीएमओ विक्रम सिंह तथा मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के मार्केटिंग प्रमुख योगेंद्र रिछारिया, जीएम अमित सिंह आदि शामिल थे। 2200 करोड़ साल पुरानी हैं चट्टानें     लम्हेटाघाट में 2200 करोड़ साल पुरानी चट्टानें हैं इन्हें महाकोशल राक कहा जाता है। करोड़ों साल पहले यहां समुद्र था जिसके किनारे नमी में डायनासोर प्रजनन करते थे। अंडे देते थे। करीब 65 करोड़ साल पहले लम्हेटा में ज्वालामुखी फटा जिसका लावा ठंडा होकर लम्हेटाघाट की चट्टानों में बदल गया। प्राकृतिक रूप से यह अदभुत है कि यहां की चट्टानों में खड़े हो तो एक पैर जिस चट्टान पर होगा वह 22 करोड़ साल पुरानी होगी वहीं दूसरा पैर जिस पर रखा होगा वह 65 करोड़ साल पुरानी। ये बेहद दुर्लभ है। देश में प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भीय महत्व वाली यह पहली साइट है। – भूमेश सिंह भदौरिया, विषय विशेषज्ञ, वर्ल्ड हेरिटेज नर्मदा घाटी रहस्य समेटे हुए है     मां नर्मदा पृथ्वी पर सबसे प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक हैं। नर्मदा घाटी अपने आप में अनेक रहस्य समेटे हुए है जो मानव सभ्यता के उन अनजान पहलुओं से अवगत कराती है जिसकी खोज में आधुनिक मानव निरंतर प्रयत्नशील है। नर्मदा मैया के तट पर संगमरमर की चट्टानें करोडों वर्ष के भूगर्भीय परिवर्तन की मूक गवाह हैं जो मानव मात्र को अचंभित कर देती है। जबलपुर का लम्हेटा और भेड़ाघाट यूनेस्को की विश्व धरोहरों की स्थायी सूची में अपना गहरा हस्ताक्षर दर्ज कराने की कगार पर है। इस स्थल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन निरंतर प्रयत्नशील है।- शिव शेखर शुक्ल, पर्यटन सचिव, एमडी मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड  

शिक्षकों को मिलेगा सरकारी मकान, मध्यप्रदेश में स्कूलों के पास बनेगा आवास

भोपाल  स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो सके इसके लिए मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग स्कूलों के पास शिक्षकों को मकान बनाकर देगा। यह महिला शिक्षकों(Government Teacher) के लिए होंगे। लोक शिक्षण संचालनालय इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट जिलों से मिली जानकारी के आधार पर बनेगी। आवास ऐसे स्कूलों के आसपास बनेंगे जहां आवाजाही मुश्किल होती है। लोक शिक्षण ने सभी जिलों को इसके लिए निर्देश भेजे थे। जिलों से जमीन तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट मांगी थी। बारिश के कारण इस काम में रुकावट आई। इसे अब फिर शुरू किया जाएगा। विभाग के निर्देश के तहत हर जिले में 100 आवास बनेंगे। महिला शिक्षकों के लिए प्राथमिकता होगी। तीन से पांच एकड़ में बहुमंजिला इमारत इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट दिए जाने हैं। यानि विभाग बहुमंजिला इमारतें तैयार कराएगा। हर जिले से इन इमारतों के लिए तीन से पांच एकड़ जमीन को चिन्हित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। यह पहला चरण है। हर विकासखंड मुख्यालय पर 100 आवास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए 3 से 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक डीएस कुशवाहा ने इसके संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अब समीक्षा होना है। इन्हें मिलेगा लाभ मध्यप्रदेश में 94 हजार स्कूल हैं। इनमें एक लाख से अधिक महिला शिक्षक(Government Teacher) हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इनकी संख्या 25 हजार से अधिक है। वहीं फिलहाल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार गांवों और छोटे जिलों के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए ही घर का निर्माण कराने की तैयारी कर रहा है।

कम उपयोग में पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा, 4 महीने में सिर्फ 85 मरीजों ने लिया लाभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी योजना 'पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा' की उपयोगिता पर सवाल उठाने लगे हैं। इस सेवा के उपयोग में न जनता रुचि ले रही, न ही जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। मई 2024 में प्रारंभ हुई इस सेवा से अभी तक 85 रोगियों को ही प्रदेश के भीतर या दूसरे राज्य में उपचार के लिए पहुंचाया गया है। खास बात यह है कि एंबुलेंस का उपयोग हो या नहीं, पर सरकार की तरफ से एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी को प्रतिमाह नियत घंटों के किराये का भुगतान करने की शर्त है। सरकार हेलीकाप्टर का 40 घंटे और हवाई जहाज का 60 घंटे का फिक्स किराया कंपनी को देती है, पर इतने घंटे भी सेवा नहीं ले पा रही है। हेलीकाप्टर का किराया प्रतिघंटे सवा तीन लाख रुपये और हवाई जहाज का दो लाख रुपये है। यानी एक करोड़ 30 लाख रुपये हेलीकाप्टर और एक करोड़ 20 लाख रुपये हवाई जहाज का किराया सरकार प्रति माह चुका रही है, जबकि प्रतिमाह औसतन पांच रोगी ही योजना का लाभ उठा रहे हैं। लाभ उठाने वालों में सबसे ज्यादा रीवा के कुल 85 मरीजों ने अब तक योजना का लाभ उठाया है, जिनमें सबसे ज्यादा रीवा के 30 (35 प्रतिशत) रोगी हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि रीवा उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला है। वह यहां बैठकों और आम सभाओं में सेवा का उपयोग करने के लिए अपील करते रहे हैं। इस तरह लगभग 16 माह में प्रदेश के 55 में से 17 जिलों के रोगियों को ही इसका लाभ मिला है। यह स्थिति तब है जब खुद मुख्यमंत्री इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते रहे हैं। ऐसे ले सकते हैं मदद आयुष्मान योजना के हितग्राहियों के लिए यह सेवा निश्शुल्क मिलती है। अन्य मरीजों को निर्धारित दर पर भुगतान करना होता है। जरूरत के मुताबिक, रोगी को एक शहर से दूसरे शहर या दूसरे राज्य एयरलिफ्ट किया जाता है। दूसरे राज्य के अस्पताल भेजने के लिए सीएमएचओ की अनुशंसा पर कलेक्टर अनुमति देते हैं। रीवा दूर होने के कारण लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं     भौगोलिक रूप से रीवा दूर होने के कारण त्वरित उपचार के लिए लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं। दूसरा यह कि लोगों में वहां जागरूकता भी अच्छी है। अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कहा जा रहा है। – तरुण राठी, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  

पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट 10 ने 200 दिन तक किया लगातार उत्पादन

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी(MPPGCL) के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी (STPS) की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों के असाधारण समर्पण व कड़ी मेहनत की बदौलत 200 दिन तक सतत् और निर्बाध विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। यह यूनिट इस वर्ष 5 मार्च से अभी तक लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सारनी की यूनिट नंबर 10 के अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों को इस गौरवशाली उपलब्ध‍ि पर बधाई दी है। पिछले 12 वर्षों में रचे नए कीर्तिमान सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 की कमीशनिंग 18 अगस्त 2013 को हुई थी। पिछले बारह वर्षों में इस यूनिट ने विद्युत उत्पादन और ऑपरेशन के नए कीर्तिमान रचे। यूनिट नंबर 10 ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 305 दिन तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया था। वर्ष 2023-24 में इस यूनिट ने क्रमश: 170 व 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाया था। यूनिट ने अर्जित किया 98.34% पीएएफ सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर 10 ने जब 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की तब यूनिट का प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) 98.34 फीसदी, प्लांट लोड फेक्टर 84.23 फीसदी व ऑक्जलरी कंजम्पशन 8.94 प्रतिशत रहा।