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मध्य प्रदेश में बारिश का दौर तेज, आज 30 जिलों में झमाझम के आसार, इंदौर में पहले ही खुला मौसम का पिटारा

भोपाल   राजस्थान, गुजरात एवं पंजाब से भले ही मानसून की विदाई शुरू हो गई है, लेकिन मध्य प्रदेश में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला बना हुआ है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक प्रदेश से सितंबर माह में मानसून के वापस होने की संभावना कम ही है। वर्तमान में तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इसके प्रभाव से बुधवार देर शाम इंदौर में झमाझम बारिश हुई। गुरुवार-शुक्रवार को भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, जबलपुर, रीवा संभाग के जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के 30 जिलों भोपाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर में आज बारिश के आसार हैं। बुधवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक सिवनी में 43, रीवा में 41, टीकमगढ़ में 32, सतना में 21, छिंदवाड़ा में 16, पचमढ़ी में तीन, सीधी में दो, नौगांव एवं खजुराहो में एक मिलीमीटर बारिश हुई। बता दें कि सामान्य तौर पर 21 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई शुरू हो जाती है। एमपी से लेकर बंगाल की खाड़ी तक बनी है द्रोणिका मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे लगे बिहार पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। दक्षिण-पश्चिमी विदर्भ पर भी हवा के ऊपरी भाग में एक प्रभावी चक्रवात सक्रिय है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के मध्य से लेकर बंगाल की खाड़ी तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो पूर्वी विदर्भ, तेलंगाना से दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश से होकर जा रही है। सितंबर में नहीं होगी मानसून की विदाई मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर बनी मौसम प्रणालियों के असर से लगातार नमी आने का सिलसिला बना हुआ है। इस वजह से बारिश हो रही है। बंगाल की खाड़ी में 25 सितंबर को एक कम दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत मिले हैं। इस वजह से सितंबर माह में मानसून के वापस जाने की संभावना कम ही दिख रही है।

‘नायसा’ के पीछे कौन? संजय पाठक ने कर्मचारी के नाम पर बनाई कंपनी, खरीदी करोड़ों की सहारा ज़मीन

जबलपुर  कटनी जिले से विधायक संजय पाठक ने जमीनों की खरीद फरोख्त के लिए न सिर्फ आदिवासियों की मदद ली, बल्कि अपने कर्मचारियों के नाम पर भी कंपनियां बनाईं। आदिवासियों के नाम पर करीब 1100 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप से घिरे संजय पाठक सायना ग्रुप के मालिक हैं, इसलिए उन्होंने मिलते-जुलते नाम वाली नायसा देव बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना ली। इस कंपनी का कर्ताधर्ता अपने ही कर्मचारी सचिन तिवारी को बनाया। इस कंपनी से सहारा सिटी की जमीन खरीदी, वो भी औने-पौने दाम पर। सूत्रों की माने सचिन तिवारी के पास विधायक संजय पाठक के लिए जमीन खरीदने-बेचने से लेकर जनसंपर्क आदि कार्यों की जिम्मेदारी है। जबलपुर के तेवर स्थित सहारा सिटी की जमीन का सौदा करने और उसका भुगतान करने की पूरी जिम्मेदारी सचिन और उसके सहयोगियों ने संभाली। दोनों ही संजय पाठक से जुड़ी फर्म सूत्र बताते हैं कि कटनी और जबलपुर की दो फर्मों को सहारा सिटी की करीब 110 एकड़ जमीन खरीदी का काम दिया गया। ये दोनों ही संजय पाठक से जुड़ी फर्म हैं। इस जमीन को कमर्शियल के बजाय कृषि भूमि बताकर पंजीयन शुल्क की चोरी की गई। इतना ही नहीं, सूत्रों का कहना है कि यह जमीन 50 करोड़ में बेची गई, जबकि बाजार मूल्य 200 करोड़ था। इधर ग्रुप से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मूल्य कलेक्ट्रेट गाइडलाइन के मुताबिक तय किया गया था। वहीं 2014 में सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों में इस जमीन की कीमत 125 करोड़ रुपये तक दिखाई गई थी। माइनिंग कान्क्लेव में निवेश के बाद जांच ठंडी दरअसल, मेसर्स नायसा देव बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने सहारा कंपनी से जमीने खरीदीं। 2022 में हुए इस सौदे के दौरान नायसा देव बिल्ड के तत्कालीन डायरेक्टर्स और प्राधिकृत अधिकारी को ईओडब्ल्यू ने नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया भी था। जानकार बताते हैं कि रजिस्ट्री के दस्तावेजों की जांच में तीन पदाधिकारियों के नाम थे। जांच अधिकारियों ने यह पता लगाया कि नायसा कंपनी ने सहारा से खरीदी गई जमीन के एवज में कितनी रकम और किस माध्यम से सहारा को दी। इसके लिए ईओडब्ल्यू ने इनके बैंक खातें भी खंगाले, जिनसे जमीन के पैसों का भुगतान किया गया। हालांकि कंपनी में माइनिंग कान्क्लेव में सायना ग्रुप के बड़े निवेश के बाद मामला ठंडा करने में कई जुट गए, जिससे ईओडब्ल्यू की जांच ठंडी पड़ गई। खनिज से कलेक्टर के बीच घूम रही फाइल खनिज विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा बनाई गई जांच टीम ने जब सिहोरा, घुघरी कला समेत कई जगहों की जांच की तो वे भी हैरान हो गए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान यह देखा गया कि जिस जमीन के उत्खनन का लाइसेंस लिया गया है, उससे लगी हजारों एकड़ जमीन में भी अवैध उत्खनन कर दिया गया। इस जमीन को जब गूगल और सैटेलाइट के माध्यम से खंगाला गया तो पता चला कि यह काम आज का नहीं बल्कि पिछले 10 सालों से जारी है। विभाग ने संजय पाठक की तीनों कंपनी निर्मला मिनरल, आनंद माइनिंग कार्पोरेशन और मेसर्स पेसिफिक एक्सपोर्ट के नाम पर जारी आठ खदानों को खंगाला तो करीब 443 करोड़ का अवैध उत्खनन पाया गया। इसे वसूलने का काम जबलपुर कलेक्टर को दिया है। भोपाल से फाइल आए हुए करीब 10 दिन से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक कुल जुर्माने की राशि का आकलन नहीं हो सका है।

MP और महाराष्ट्र में बाघों के शिकार पर बवाल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब, उठे संगठित गिरोहों के सवाल

भोपल  सुप्रीम कोर्ट ने  केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और अन्य से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कथित संगठित बाघ शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार रैकेट की सीबीआइ जांच की मांग की गई है। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ वकील गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें सक्रिय संगठित शिकार गिरोहों द्वारा बाघों के लिए उत्पन्न गंभीर खतरे पर प्रकाश डाला गया था। बंसल ने कहा कि कम से कम 30 प्रतिशत बाघ निर्दिष्ट बाघ अभयारण्यों के बाहर हैं और उन्होंने बाघों के बड़े पैमाने पर शिकार की खबरों का हवाला दिया। इन बिंदुओं पर दायर हुई है याचिका महाराष्ट्र सरकार की एसआईटी जांच में शिकारी, तस्करों और हवाला नेटवर्क का संगठित गिरोह सामने आया। यह गिरोह बाघों की खाल, हड्डियां और ट्रॉफी को राज्य की सीमाओं से बाहर और विदेशों तक तस्करी करता है। याचिका में रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि बाघों का शिकार अब संरक्षित क्षेत्रों से बाहर वन प्रभागों और कॉरिडोर में ज्यादा हो रहा है, जहां निगरानी और सुरक्षा बेहद कमजोर है। वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) ने इन क्षेत्रों को बाघों के फैलाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश पीठ ने केंद्र एवं अन्य प्राधिकारियों की ओर से अदालत में पेश हुईं अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से याचिका पर निर्देश लेने को कहा। याचिका में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बाघों के व्यवस्थित शिकार और राज्यों एवं म्यांमार तक फैले बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है, ''कई आरोपितों की गिरफ्तारी, बाघों की खाल, हड्डियां, हथियार और वित्तीय रिकार्ड की जब्ती, साथ ही एसआइटी के गठन से यह स्पष्ट हो गया है कि यह समस्या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गहरे आपराधिक नेटवर्क के अस्तित्व को दर्शाती है जो कानून के शासन को कमजोर करता है।'' बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन शिकारियों के आसान शिकार याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिसूचित बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन क्षेत्र बार-बार शिकारियों का आसान निशाना बन गए हैं। इसके फलस्वरूप कार्रवाई करने की वजहें और भी मजबूत हो जाती हैं। सीबीआइ जांच की मांग करते हुए याचिका में कहा गया है, ''जब तक यह अदालत हस्तक्षेप नहीं करती और एक व्यापक, स्वतंत्र और समन्वित जांच का निर्देश नहीं देती, तब तक राष्ट्र की पारिस्थितिक सुरक्षा और राष्ट्रीय पशु के अस्तित्व को गंभीर खतरा रहेगा।'' याचिका में यह भी कहा गया है, ''प्रतिवादियों (केंद्र और अन्य) को एसआइटी की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और बाघ अभयारण्यों से सटे बाघ गलियारों और प्रादेशिक वन प्रभागों में प्रभावी सुरक्षा, निगरानी और गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया जाए, और उन्हें मुख्य क्षेत्रों के समान माना जाए।'' याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और एनटीसीए को पक्ष बनाया गया है। बंसल ने अदालत में कहा याचिकाकर्ता के वकील बंसल ने कहा कि भारत में 30% से अधिक बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तस्करी का यह संगठित नेटवर्क वन गुर्जर समुदाय जैसे आदिवासी समूहों से जुड़े गिरोहों को भी शामिल करता है। उन्होंने अदालत से मांग की कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।  

बड़वारा को मिलेगी बड़ी सौगात: CM डॉ. यादव करेंगे 233 करोड़ के विकास कार्यों का शुभारंभ

भोपाल  मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 18 सितंबर को कटनी जिले के बड़वारा विकासखंड मुख्‍यालय में बड़वारा और विकासखंड रीठी में नवनिर्मित सांदीपनि स्‍कूल भवनों के लोकार्पण सहित 233.82 करोंड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव यहां 106.18 करोड़ रूपये के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण और 127.64 करोड़ रूपये के 14 विकास कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री हितग्राहियों को हितलाभों का वितरण भी करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव बड़वारा में मुख्‍यमंत्री नि:शुल्‍क स्‍कूटी वितरण योजना, लाड़ली लक्ष्‍मी छात्रवृत्ति राशि, मुख्‍यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन और ई-कृषि यंत्रीकरण अनुदान योजनांतर्गत हितग्राहियों को लाभान्वित करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव सेवा पखवाड़ा अभियान की थीम पर आयोजित वृहद प्रदर्शनी का भी अवलोकन करेंगे। प्रदर्शनी में राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वोकल फॉर लोकल की भावना को सशक्‍त करने के उद्देश्य से स्‍व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्‍पादों और जिला व्यापार एवं उद्योग केन्‍द्र के द्वारा एक जिला एक उत्‍पाद के तहत कटनी सैंड स्‍टोन से निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जायेगी। इसके अलावा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा यहां विशेष शिविर लगाकर स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण, आयुष्‍मान कार्ड निर्माण और स्‍वस्‍थ्‍य नारी, सशक्‍त परिवार की थीम पर स्‍वास्‍थ्‍य एवं महिला बाल विकास द्वारा गैर संचारी रोगों की स्‍क्रीनिंग और  अन्‍न से निर्मित उत्‍पादों व खाद्य पदार्थों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। सामाजिक न्‍याय विभाग द्वारा दिव्‍यांगजनों की ई-स्‍क्रीनिंग और कृत्रिम उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जायेगी। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा ‘स्‍वच्‍छता ही सेवा पखवाड़ा’ के विभिन्‍न घटकों को प्रदर्शित करने वाले क्रियाकलापों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ एवं ‘एक बगिया मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत पौधारोपण करेंगे और छात्रों की कक्षा में पहुंच कर चर्चा करेंगे।     

बारिश बनी आफत: इंदौर में मासूम की मौत, उज्जैन के मंदिरों में जलभराव, भोपाल में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित

इंदौर इंदौर शहर में बुधवार रात हुई तेज बारिश में मायाखेड़ी क्षेत्र में ओमेक्स सिटी के करीब एक बच्चा तेज पानी के बहाव में नाले में बह गया। बच्चे का नाम राजवीर मालवीय बताया जा रहा है और उसकी उम्र करीब 8 साल है। जानकारी के मुताबिक देर रात तेज बारिश के दौरान राजवीर के पिता राजपाल उसे एक जगह पर खड़े करके अपनी गाड़ी पार्क करने गए, जब वो वापस लौटे तो बच्चा वहां पर नहीं था। रात में ही परिजनों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। अंधेरा होने की वजह से बच्चे को खोजा नहीं जा सका। गुरुवार सुबह लसूड़‍िया थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने एक बार फिर सर्चिंग शुरू की तो राजवीर का शव मिला। बच्चे का शव कुछ दूरी पर एक पुल में फंसा हुआ मिला। आशंका जताई जा रही है कि बारिश में फिसलने की वजह से वो नीचे गिर गया और पानी के बहाव में बह गया। घटना के बाद राजवीर के माता-पिता सदमे में हैं, वो उनका एकलौता बेटा था। उधर इलाके के लोग नाले के आस-पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वहां दीवार या जाली लगी होती तो बच्चा अंदर नहीं बहता। भोपाल में सबसे ज्यादा ढाई इंच पानी गिर गया। शाजापुर में 2.1 इंच, इंदौर में 2 इंच, उमरिया में 1.9 इंच, उज्जैन-सिवनी में 1.8 इंच, रीवा में 1.6 इंच, टीकमगढ़ में 1.3 इंच बारिश दर्ज की गई। गुरुवार सुबह से बादल छाए हुए हैं। कुछ जिलों में हल्की बारिश भी हुई। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की विदाई के दौरान भी पूरे प्रदेश में तेज बारिश का एक और दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, 4 दिन तक तेज बारिश का अलर्ट नहीं है। भोपाल, जबलपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। इस मानसूनी सीजन में औसत 42.7 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे से 7 इंच ज्यादा है। रायसेन, सागर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दतिया, नर्मदापुरम, ग्वालियर, जबलपुर, बैतूल, सीधी, नरसिंहपुर, गुना, दमोह, पांढुर्णा, डिंडौरी, विदिशा और सीहोर में भी बुधवार को हल्की बारिश दर्ज की गई। सीजन में चौथी बार खुले भदभदा डैम के गेट भोपाल में शाम 7:30 बजे से रात 11:30 बजे तक सिर्फ 4 घंटे में लगभग ढाई इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। बड़ा तालाब एक बार फिर लबालब भर गया, जिससे रात में भदभदा डैम का एक गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी। इस मानसून सीजन में चौथी बार डैम का गेट खोला गया है। 4 दिन प्रदेश में तेज बारिश का अलर्ट नहीं मौसम विभाग ने अगले 4 दिन तक प्रदेश में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है, लेकिन लोकल सिस्टम की वजह से पानी गिर सकता है। पिछले एक सप्ताह से ऐसा ही हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आधे राजस्थान से मानसून लौट चुका है। वहीं, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के कई जिलों से भी मानसून लौटा है। यदि वापसी की यही रफ्तार रही तो एमपी के भी कई जिलों में अगले हफ्ते ऐसी स्थिति बन सकती है। मध्यप्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 42.7 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 35.6 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.1 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है।

IPS संवर्ग में होंगे शामिल 7 राज्य पुलिस सेवा अधिकारी, 5 को इसी साल पदोन्नति

भोपाल राज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत हो जाएंगे। अगले वर्ष एक जनवरी 2025 की स्थिति में सात को पदोन्नति मिलनी है। यह सभी 1998 बैच के होंगे। यानी, अभी 27 वर्ष की सेवा के बाद भी वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ही हैं। बड़े-बड़े बैच, हर पांच वर्ष में काडर रिव्यू नहीं होने सहित कई कारणों से मप्र के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति में अन्य राज्यों से काफी पीछे हैं। वर्ष 2025 में सात पदों के लिए डीपीसी की तैयारी शासन अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ कर सकता है। इनकी डीपीसी लगभग एक वर्ष पीछे चल रही है।   बता दें कि कर्नाटक में 2012, तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश में 2010 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नत होकर आइपीएस बन चुके हैं, पर प्रदेश में अभी वर्ष 1998 का ही पूरा बैच पदोन्नत नहीं हो पाया है। उधर, प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2006 के अधिकारी आईएएस में पदोन्नत हो चुके हैं। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी लंबे समय से शासन से मांग कर रहे हैं कि छोटे जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए, पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, जबकि यह व्यवस्था मध्य प्रदेश में पहले लागू रही है। शशिकांत शुक्ला, रमन सिंह सहित कई अधिकारी दो जिलों में एसपी रहने के बाद आइपीएस बने। अब कई वर्षों से इसे बंद कर दिया गया है।

ग्वालियरवासियों को राहत: कैपेसिटर बैंक से सुधरेगी बिजली आपूर्ति

ग्वालियर बिजली उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा स्थिर बिजली मिलेगी। उन्हें अब लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिल जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर में 417 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशनों में से 412 सब स्टेशनों पर विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक लगा दिए हैं। इन कैपेसिटर बैंकों की मदद से वोल्टेज में स्थिरता लाई जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और बार-बार उपकरण खराब होने की समस्या से निजात मिलेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ट्रांसमिशन सिस्टम और अधिक मजबूत हो रहा है।   यह होते हैं कैपेसिटर बैंक कैपेसिटर बैंक (संधारित्र बैंक) कई कैपेसिटर का एक समूह होता है, जो विद्युत ऊर्जा को संग्रहित और जारी करने के लिए एक साथ समानांतर या श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। इन्हें विद्युत प्रणालियों की दक्षता में सुधार करने, पावर फैक्टर को सही करने और प्रतिक्रियाशील शक्ति को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। ग्वालियर जिले में 11 हाई टेंशन सब स्टेशनों पर 222 एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील किए गए हैं। एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पावर ट्रांसफार्मर पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटर एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए गए हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पावर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।

घातक ‘मेलिओइडोसिस’: पहचानना मुश्किल, मध्य प्रदेश में बढ़ रही चिंता

भोपाल प्रदेश में एक नए स्वास्थ्य संकट ने दस्तक दी है। यह जीवाणु (बैक्टीरिया) का संक्रमण है, जिसकी पहचान मेलिओइडोसिस बीमारी के रूप में हुई है। इसके लक्षण बिल्कुल टीबी जैसे होते हैं। अगर मरीज का गलत इलाज हो जाए तो जीवन पर खतरा हो जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल का दावा है कि इससे संक्रमित प्रत्येक 10 में से चार मरीजों की मौत हो जा रही है। प्रदेश के 20 जिलों में 130 मरीज इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं। मध्य प्रदेश में दो लाख से अधिक लोग मिले जो सिकल सेल पीड़ित बच्चों को दे सकते थे जन्म पिछले दिनों राजधानी के पास रहने वाले एक 45 वर्षीय किसान को एम्स लाया गया था। वह कई महीनों से बार-बार आने वाले बुखार, खांसी और सीने में दर्द से परेशान थे। स्थानीय डाॅक्टरों ने इसे टीबी मानकर इलाज शुरू किया था। महीनों तक दवा खाने के बाद भी जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो थक-हारकर उन्हें एम्स भोपाल लाया गया। यहां जब माइक्रोबाॅयोलाजी विभाग ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं, बल्कि मेलिओइडोसिस है। सही बीमारी पकड़ में आने के बाद मरीज ठीक हो गया।     एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से इस बीमारी पर वह नजर बनाए हुए हैं।     प्रदेश में अब तक 20 जिलों में 130 से ज्यादा मरीजों की पहचान हो चुकी है।     यह बीमारी अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल रही है।     सही समय पर इसकी पहचान न हो पाने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।     क्योंकि इसके लक्षण टीबी जैसे होने के कारण अक्सर डाॅक्टर भी धोखा खा जाते हैं। यह होता है मेलिओइडोसिस     मेलिओइडोसिस एक संक्रामक बीमारी है जो 'बर्कहोल्डरिया स्यूडोमल्ली' नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है।     विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) हो चुकी है, यानी यहीं के वातावरण में स्थायी रूप से मौजूद है। किसान और मधुमेह रोगी होते हैं आसान शिकार     बताया गया कि इसका सबसे अधिक खतरा ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़े लोगों को होता है, क्योंकि उनका सीधा संपर्क मिट्टी और पानी से होता है।     शहरी इलाकों में डायबिटीज(मधुमेह) के मरीजों और अधिक शराब का सेवन करने वालों को भी यह बीमारी आसानी से अपनी चपेट में ले सकती है। डाॅक्टरों को प्रशिक्षित कर रहा एम्स     एम्स का माइक्रोबायोलाजी विभाग प्रदेश भर के डाॅक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की सही और समय पर पहचान के लिए प्रशिक्षित कर रहा है।     पिछले ढाई सालों में 25 सरकारी और निजी अस्पतालों के 50 से ज्यादा विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।     इस प्रशिक्षण का ही नतीजा है कि अब प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी 14 नए मामले सामने आए हैं, जिनका सही इलाज संभव हो पाया है। 

परीक्षण सफल तो जबलपुर में जल्द शुरू होगी सरकारी बस सेवा, होगा बड़ा विस्तार

भोपाल प्रदेश में लोक परिवहन सेवा अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक सबसे पहले इंदौर, इसके बाद उज्जैन और फिर जबलपुर से प्रारंभ होगी। छह माह के भीतर रीवा, सागर ग्वालियर, भोपाल आदि शहरों से सेवा प्रारंभ करने की तैयारी है। शुरू में 50 से 100 किमी दूर तक के लिए बसें चलाई जाएंगी। इसके बाद सुविधा का परीक्षण कर इसमें विस्तार किया जाएगा। कुछ जगह रूट सर्वे का काम पूरा हो गया है और कई जगह चल रहा है। नगरीय निकायों के नियंत्रण में पहले से चल रही बसों को भी संभागीय स्तर पर क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाकर उसके नियंत्रण में लाया जाएगा। भोपाल शहर में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) बसों का संचालन कर रही है। इसी तरह से इंदौर व अन्य शहरों में बसें निजी ऑपरेटरों की हैं, पर नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का होता है। लोक परिवहन सेवा के प्रबंधन के लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जा रही है। इसके नीचे सात संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर सहायक कंपनियां बनाई जाएंगी। उज्जैन में रूट सर्व का काम पूरा बस संचालन के लिए उज्जैन में रूट सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है। इंदौर और जबलपुर में श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और रूट सर्वे भी लगभग अंतिम चरण में है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंध कर बसें चलाई जाएंगी। आगे चलकर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भी इसके निर्देश दिए हैं। सीएम ने इसी महीने की मीटिंग बता दें कि मुख्यमंत्री ने इसी माह लोक परिवहन सेवा की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। उन्होंने मार्च के पहले बसें चलाने के लिए कहा है, पर समय सीमा एक-दो माह और आगे जा सकती है। इसमें निगरानी, प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग किया जाएगा। बड़े शहरों के बाद सरकार की प्राथमिकता उन स्थानों के बीच बसें चलाने की हैं, जहां यात्रियों की संख्या ज्यादा है।

दिव्यांगता की जल्द पहचान के लिए कदम, स्क्रीनिंग शिविरों में जांचेंगे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे

15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक चलाया जा रहा है अभियान भोपाल  प्रदेश के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान एवं त्वरित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। यह शिविर 15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। चिन्हित बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं और परिचय-पत्र मुहैया कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि मध्यप्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जुनाईविल जस्टिस कमेटी की अनुशंसा पर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान के लिए शिविर आयोजित किये जा रहे है। शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे। नव चिन्हित दिव्यांग बच्चों को 30 नवंबर तक यूडीआईडी (UDID) नंबर जारी करने तथा शासन की पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है श्रीमती वायंगणकर ने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभाग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, आयुष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शिविरों के आयोजन में भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 पंचायत का तथा शहरी क्षेत्रों में 5 से 6 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।