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मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई मजबूती, मंत्री डॉ. शाह ने PM मोदी का जताया आभार

मध्यप्रदेश में और मजबूत होंगी सड़क संरचनाएं प्रधानमंत्री मोदी का मंत्री डॉ. शाह ने जताया आभार कैबिनेट ने हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को अपग्रेड करने की दी मंजूरी चार हजार करोड़ से अधिक लागत से संवरेगी 233 किमी लंबाई की सड़कें भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्यप्रदेश के निमाड़ – अंचल को महत्वपूर्ण सौंगात दी है। मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड (125.01 किमी) की मौजूदा मध्यवर्ती लेन को पक्की शोल्डर मानक वाली टू लेन में अपग्रेड करने और देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) की मौजूदा टू लेन को फोर लेन में चौड़ा करने को हाइब्रिड वार्षिकी मोड पर मंजूरी दे दी है। इस पर 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय कुंवर शाह ने उनके विधानसभा क्षेत्र और निमाड़ – अंचल की सड़कों के उन्नयन के लिये प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में आधारभूत संरचनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही हे। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एनएच-347बी के हिवारखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी और देशगांव-जुलवानिया खंड के प्रस्तावित उन्नयन से बेतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों के शहरी क्षेत्रों में मौजूद गंभीर ज्यामितीय खामियों, तिरछे मोड़ों और भीड़भाड़ की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना के अंतर्गत खरगोन जिले के लिए 16.20 किलोमीटर लंबा एक विस्तारित ग्रीनफील्ड बाईपास विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से औसत यात्रा गति बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहन परिचालन लागत में सुधार होगा, जिससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बडवानी, 3 आदिवासी जिले – बैतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।  

भोपाल के बाघ बने वैश्विक चर्चा का विषय, काठमांडू सम्मेलन में 42 देशों के विशेषज्ञ जानेंगे उनका व्यवहार

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शहरीकरण के बीच बाघों के जिंदा रहने और इंसानों के साथ उनके अनोखे तालमेल पर हुई एक बेहद अहम स्टडी को नेपाल की राजधानी काठमांडू में पेश किया गया है। काठमांडू में 3 से 5 जून 2026 तक चल रहे छठे कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस में इस रिसर्च को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के सामने रखा गया। इस ग्लोबल इवेंट को 'सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन बायोलॉजी एशिया रीजन', नेपाल चैप्टर और बुरहान फाउंडेशन मिलकर आयोजित कर रहे हैं, जिसमें 42 देशों के 600 से ज्यादा एक्सपर्ट्स शामिल हुए हैं। खास बात यह है कि इस संस्था के एशिया चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ. कौस्तुभ शर्मा खुद भोपाल के रहने वाले हैं। कैमरा ट्रैप और जीआईएस मैपिंग से खुला राज वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से हुई इस रिसर्च में बायो-सोशल तरीका अपनाया गया। इसमें फील्ड सर्वे, कैमरा ट्रैप, जीआईएस मैपिंग और स्थानीय लोगों के इंटरव्यू शामिल किए गए। स्टडी में यह जानने की कोशिश की गई कि भोपाल के जंगल, तालाब और हरियाली वाले इलाके कैसे बाघों की आवाजाही में मददगार साबित हो रहे हैं। रिसर्च में सामने आया कि भोपाल में प्राकृतिक जमीन का सही इस्तेमाल, आपस में जुड़े नदी-तालाब और हरियाली (ब्लू-ग्रीन स्पेस), जंगलों में पर्याप्त शिकार, स्थानीय लोगों की स्वीकार्यता और बाघों के बदलते बर्ताव की वजह से ही वे इस शहरी माहौल में भी खुद को बचाए हुए हैं। बढ़ते हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से बड़ा खतरा जहाँ एक तरफ भोपाल में बाघों का बचना बड़ी कामयाबी है, वहीं रिसर्चर्स ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में तेजी से फैल रही सड़कों और लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे रेलवे लाइन या बिजली के तार की वजह से बाघों के आने-जाने के रास्ते बदल रहे हैं और उनके जंगल छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहे हैं।

रसोई गैस पर बड़ी बचत, जानिए LPG सिलेंडर पर ₹300 की छूट पाने का तरीका

भोपाल  एलपीजी सिलेंडर के दाम आपके शहर में चाहे जिस रेट पर मिल रहा हो, लेकिन उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये सस्ता मिल रहा है। वैसे निराश तो आपको भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत से काफी सस्ता सिलेंडर आपको भी मिल रहा है। अगर दिल्ली का उदाहरण लें तो यहां उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर केवल ₹613 में मिल रहा है, जबकि बिना सब्सिडी वाले सामान्य उपभोक्ता को इसके लिए ₹913 देने पड़ते हैं। यह सप्लाई लागत ₹1,200 से काफी कम है। देश में 10.55 करोड़ से अधिक महिलाओं को मार्केट रेट से 300 और सप्लाई लागत से करीब 587 रुपये सस्ता सिलेंडर मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 33 करोड़ कस्टमर घरेलू एलपीजी के हैं। 2014 में यह संख्या करीब 14.52 करोड़ थी। नुकसान की कौन कर रहा भरपाई एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत और मार्केट प्राइस में अंतर तथा उज्ज्वला सब्सिडी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल इन कंपनियों को ₹41,338 करोड़ का नुकसान हुआ था, जो इस साल बढ़कर लगभग ₹60,000 करोड़ हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने इस साल लगभग ₹30,000 करोड़ के मुआवजे का प्रावधान किया है। आपको भी मिल सकता है 300 रुपये सस्ता सिलेंडर, जानें कैसे उज्ज्वला योजना के कनेक्शन के लिए अपने नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर से मिलें। इसके तहत गैस कनेक्शन लेने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की गरीब महिला होनी चाहिए, जिसके परिवार में पहले से LPG कनेक्शन नहीं है। ऐसी महिला आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और आवश्यक घोषणा पत्र जमा करके आवेदन कर सकती है। बता दें उज्ज्वला योजना के तहत पात्र महिलाओं को बिना सिक्योरिटी मनी के गैस कनेक्शन दिया जाता है। साथ ही पहला भरा हुआ सिलेंडर और गैस चूल्हा भी मुफ्त मिलता है। उज्ज्वला योजना के लिए जरूरी दस्तावेज केवाईसी (KYC) आवेदन फॉर्म। पहचान प्रमाण के लिए आवेदक के आधार कार्ड की फोटोकॉपी। एड्रेस प्रूफ (अगर वर्तमान पता आधार कार्ड में दर्ज पते से अलग है)। प्रवासी (माइग्रेंट) आवेदकों के लिए स्व-घोषणा पत्र। जिस राज्य में आवेदन किया जा रहा है, वहां का राशन कार्ड या परिवार के सदस्यों की जानकारी प्रमाणित करने वाला राज्य सरकार का कोई अन्य दस्तावेज। आवेदक तथा परिवार के वयस्क सदस्यों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी (जिनके नाम राशन कार्ड/पारिवारिक दस्तावेज में दर्ज हों)। बैंक पासबुक की फोटाकॉपी या कैंसिल चेक। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत क्या-क्या देती है सरकार सरकार 14.2 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 2,050 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर वाले कनेक्शन के लिए 1,300 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। यह सहायता राशि निम्न खर्चों को कवर करती है, जैसे… सिलेंडर की सिक्योरिटी डिपॉजिट, जो 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 1,700 रुपये और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए 950 रुपये है। प्रेशर रेगुलेटर के लिए 150 रुपये, एलपीजी पाइप के लिए100 रुपये और घरेलू गैस उपभोक्ता कार्ड के लिए 25 रुपये। निरीक्षण, स्थापना और यूज करने का प्रदर्शन शुल्क 75 रुपये है। इसके अलावा, सभी उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से पहला LPG रिफिल (सिलेंडर भरवाना) और गैस चूल्हा (हॉट प्लेट) बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है।

भोपाल गैस त्रासदी प्रभावित क्षेत्रों में डिटॉक्सिफिकेशन अभियान, मिट्टी-भूजल सुधार पर सरकार का फोकस

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे के खात्मे के बाद अब प्रदेश और भोपाल पर लगे इस त्रासदी के आखिरी दाग को भी धोने की तैयारी शुरू कर दी है। यूनियन कार्बाइड (यूका) परिसर व आसपास के 2 किमी क्षेत्र में दूषित मिट्टी और भूजल का उपचार कराने के साथ जंग लगे यूका प्लांट के ढांचे को हटाने ओर जहर को विसंक्रमण करने का आकलन कराया जा रहा है। प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। जमीन और भूजल में घुले जहर को दूर करने के बाद आगे की योजना पर काम शुरू होगा। यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआइएल) की शुरुआत 1969 में भोपाल में कीटनाशकों के निर्माण के लिए हुई थी। 1979 में मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआइसी) निर्माण के लिए विशेष इकाई लगी। 1984 में गैस त्रासदी के बाद सरकार ने संयंत्र को कब्जे में लिया, फिर यहां कोई काम नहीं हुआ। त्रासदी के बाद यूका के जहरीले कचरे को बोरों में भरकर तलघर में रखवाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने पीथमपुर में इसे नष्ट कराया। हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल कर अब सरकार ने परिसर की मिट्टी और भूजल के साथ प्लांट का जहर भी खत्म कराने की तैयारी की है। भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग ने इसके लिए एजेंसियों और संस्थानों से प्रस्ताव मंगाए हैं।  तीन चरणों में होगा काम पहले चरण में साइट का प्रारंभिक आकलन होगा। दूसरे चरण में सूक्ष्मता से इन्वेस्टिगेशन और तीसरे चरण में इम्पैक्ट असेसमेंट स्टडी कराई जाएगी।     पहले चरण में विशेषज्ञों की टीम यूका परिसर के दस्तावेज- नक्शे देखेगी। आसपास के क्षेत्र का अध्ययन व नीरी, सीएसआइआर की पुरानी रिपोर्टों की जांच, फिर परिसर और आसपास के क्षेत्र की हाइड्रोजियोलोजी संबंधी डेटा और रिपोट्र्स देखेगी। परिसर की टोपोग्राफी, जियोलोजी, भूजल के एक्विफर और कैचमेंट एरिया का आकलन होगा। जमीन और भूजल के सैंपल के लिए जगह चिह्नित किए जाएंगे।     हेल्थ और सुरक्षा प्लान बनेगा ताकि किसी को नुकसान न हो। हाइड्रोजियोलोजिकल स्टडी के दौरान सतह की मिट्टी के साथ तालाब, डंप एरिया से सैंपल लिए जाएंगे। प्रदूषण का फैलाव आंकेंगे। यूका परिसर और आसपास 2 किमी एरिया से मिट्टी के 50 सेंपल और भूजल के 15 सेंपल 189 पैरामीटर पर परखेंगे। संक्रमित कचरे का निपटारा होगा। एक रेमेडियल एंड रिहेबिलिटेशन एकशन प्लान भी बनेगा।     खतरनाक अपशिष्ट और दूषित मिट्टी की सेंपलिंग और उपचार, भंडारण, निपटान का आकलन अध्ययन पर्यावरण प्रभाव (ईआइए) के सिद्धांतों और नियमों के अनुसार होगा। इसके तहत क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आकलन, मिट्टी, भूजल, सतही जल निकायों, स्वास्थ्य प्रभाव परिवहन- निस्तारण के खतरे का आकलन और उससे निपटने की तरीके भी तय किए जाएंगे। प्रमुख बिंदु यूका के दो किलोमीटर क्षेत्र में प्रदूषण दूषित मिट्टी- भूजल होगा शुद्ध विशेषज्ञों की टीम से जांच और समाधान की तैयारी प्रस्ताव मंगाए

इकॉनोमिक कॉरिडोर को मंजूरी, बैतूल-खंडवा-जुलवानिया हाईवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी और कारोबार

खंडवा खंडवा जिला इकॉनामिक कॉरिडोर के रूप में जल्द ही विकसित होने वाला है। बुधवार को नेशनल हाईवे 347बी हैवारखेड़ी (बैतूल) से जुलवानिया (बड़वानी) तक 233.653 किमी हाईवे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने मंजूरी दे दी है। इस रोड की कुल लागत इसकी कुल लागत 4415.60 करोड़ की है। पहले पांच चरण में बनने वाला नेशनल हाईवे अब दो पैकेज में बनेगा। इस हाईवे के निर्माण से खंडवा सीधे गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ जाएगा। कैबिनेट में दो पैकेज में किया रोड एनएच-347बी पहले पांच चरणों में बनाया जाना था। इसमें हैवारखेड़ी से रोशनी, रोशनी से आशापुर, आशापुर से रूधि, रूधि से देशगांव और देशगांव से जुलवानिया तक रोड शामिल है। अब कैबिनेट ने इसे दो पैकेज में कर दिया है। इसमें हैवारखेड़ी से व्हाया रोशनी-आशापुर-रूधि तक कुल 125.01 किमी का रोड टू-लेन को पेव्ड शोल्डर स्टैंडर्ड (पक्की पटरी) के साथ बनाया जाएगा। इसमें 70.39 किमी का बायपास भी रहेगा। इसके आगे देशगांव-रूधि बायपास 28.680 किमी का काम पहले से ही चल रहा है, जो लगभग 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। देशगांव-जुलवानिया अब फोरलेन कैबिनेट ने एनएच-347बी के दूसरे पैकेज में देशगांव-जुलवानिया सेक्शन में 108.643 किमी रोड को मंजूरी दी है। इस रोड को पहले टू-लेन बनाया जाना था, लेकिन केबिनेट ने इसे अब अपग्रेड करते हुए फोर-लेन बनाने की स्वीकृति दी है। इस रोड पर 54.273 किमी का बायपास आ रहा है। साथ ही इसमें खरगोन जिले में 16.20 किमी का ग्रीन फिल्ड भी शामिल है। ग्रीन फिल्ड में वन विभाग और खेती की जमीन अधिग्रहण करने की कार्रवाई की जाएगी। नेशनल हाईवे हाइब्रिड एन्युइटी मोड पर बनाया जाएगा। खंडवा बनेगा दो नेशनल हाईवे का सेंटर एनएचएआइ द्वारा पहले ही इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे फोरलेन का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा का काम भी चल रहा है। खंडवा का देशगांव दो नेशनल हाईवे का क्रॉसिंग बन रहा है। दो नेशनल हाईवे के सेंटर में आने से खंडवा का इकानोनिक कॉरिडोर भी मजबूत होगा। बैतूल से आगे ये हाईवे नागपुर से जुड़ा हुआ है। खंडवा से नागपुर, बड़ोदरा के साथ सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इधर इंदौर-इच्छापुर हाईवे से खंडवा सीधे राजस्थान और महाराष्ट्र के मुक्तईनगर से आगे तेलंगाना से जुड़ जाएगा। आर्थिक, सामाजिक, लॉजिस्टिक्स केंद्रों को कनेक्टिविटी यह परियोजना पूरे राज्य के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को बिना रुकावट कनेक्टिविटी देगी। यह उन्नत कॉरिडोर 06 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों से जुड़ेगा, जिनमें एक टेक्सटाइल क्लस्टर, दो मेगा फूड पार्क, एक औद्योगिक पार्क और दो सुपर थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं। परियोजना 5 सामाजिक केंद्रों को भी एकीकृत करेगी, जिनमें खंडवा और बड़वानी जैसे दो आकांक्षी जिले, साथ ही बैतूल, खंडवा और खरगोन जैसे तीन आदिवासी जिले शामिल हैं। इसके अलावा, दो बड़े रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और एक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क सहित 5 लॉजिस्टिक्स केंद्र भी इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे। व्यापार उद्योग को मिलेगी हाइट बैतूल-खंडवा-बड़ोदरा नेशनल हाईवे को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इसमें रूधि-देशगांव और रोशनी-आशापुर के बीच काम चल रहा है। देशगांव जुलवानिया और हैवारखेड़ी-रोशनी के बीच भी जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नेशनल हाईवे से इकॉनोमिक कॉरिडोर बनेगा और यहां व्यापार-उद्योग को हाइट मिलेगी। आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

डराने वाले आंकड़े: MP में HIV संक्रमण तेजी से बढ़ा, मां से बच्चों तक पहुंच रहा खतरा

इंदौर.  मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस समय संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है, उसी समय जांचों की संख्या में कमी क्यों आ रही है. इंदौर जैसे बड़े शहर में वर्ष 2022 में जहां करीब 1.47 लाख लोगों की एचआईवी जांच की गई थी, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 85 हजार रह गई है. इसके बावजूद पॉजिटिव मरीजों की संख्या 492 से बढ़कर 615 तक पहुंच गई है. संक्रमण दर भी 0.33 प्रतिशत से बढ़कर 0.72 प्रतिशत हो गई है. यानी कम जांच के बावजूद ज्यादा संक्रमित सामने आ रहे हैं. यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर संक्रमण की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है।  स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के आंकड़े बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़ी है. वर्ष 2020-21 में जहां 3771 संक्रमित गर्भवती महिलाएं दर्ज थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या 7167 तक पहुंच गई. इसी अवधि में 200 से अधिक नवजात बच्चों में संक्रमण मां से पहुंचने के मामले सामने आए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, नियमित दवा और चिकित्सकीय निगरानी से इस तरह के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है. इसके बावजूद बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।  इंदौर में क्यों बढ़ रही संक्रमण दर स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में एचआईवी पॉजिटिविटी रेट लगभग दोगुना हो गया है. वर्ष 2022 में यह दर 0.33 प्रतिशत थी, जो 2023 में 0.67 प्रतिशत, 2024 में 0.70 प्रतिशत और 2025 में 0.72 प्रतिशत तक पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे के दौरान संक्रमित सुइयों का उपयोग संक्रमण फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।  जांच कम होने से छिप रही असली तस्वीर एचआईवी नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका व्यापक स्क्रीनिंग और समय पर पहचान है. लेकिन इंदौर में जांचों की संख्या लगातार कम हो रही है. इससे कई संक्रमित व्यक्ति समय पर सामने नहीं आ पा रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम स्क्रीनिंग के कारण संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो रहा है।  गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ता खतरा राज्य में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ना सबसे चिंताजनक पहलू माना जा रहा है. वर्ष 2025-26 में 743 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी दर्ज की गई. कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच नहीं हुई या उपचार बीच में छूट गया. परिणामस्वरूप संक्रमण मां से बच्चे तक पहुंचने का जोखिम बढ़ गया।  क्यों नहीं रुक रहा संक्रमण विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण संक्रमण नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं. इनमें समय पर जांच न होना, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी बीच में छोड़ देना, संक्रमण की जानकारी छिपाना, नवजात को आवश्यक दवा न देना और संक्रमित मां द्वारा चिकित्सकीय सलाह के बिना स्तनपान कराना शामिल है।  केस स्टडी ने बढ़ाई चिंता एक मामले में महिला की पहली गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच ही नहीं हुई. दूसरी गर्भावस्था में संक्रमण का पता चला. इसके बाद पति और पहला बच्चा भी संक्रमित पाए गए. दूसरे मामले में मां ने उपचार पूरा नहीं लिया और नवजात को निर्धारित दवा भी नहीं दी गई. बाद में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।  कमलनाथ ने जांच और निगरानी का मुद्दा उठाया पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और दवा उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी को केवल चिकित्सा नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता के माध्यम से भी नियंत्रित किया जा सकता है। 

भोपाल के डायल-112 हीरोज घर की राह भटकी 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल ​भोपाल जिले के थाना अशोका गार्डन क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गई 03 वर्षीय मासूम बच्ची को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई मदद से बच्ची सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सकी और परिजनों की चिंता दूर हुई। 03 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना अशोका गार्डन क्षेत्र अंतर्गत रूचि रेस्टोरेंट के पास एक छोटी बच्ची अकेली मिली है, जो घर का रास्ता भटक गई है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री प्रदीप दुबे एवं पायलट श्री केदार सिंह मौके पर पहुँचे और बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद डायल-112 जवानों ने बच्ची को डायल 112 वाहन में सुरक्षित बैठाकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश एवं पूछताछ के दौरान सेमरा क्षेत्र में बच्ची के परिजनों की जानकारी प्राप्त हुई। डायल-112 टीम ने तत्काल परिजनों से संपर्क किया तथा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया।अपनी बच्ची को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

313 दिवसीय प्रशिक्षण में दिया गया आधुनिक पुलिसिंग पर जोर

भोपाल ​मध्यप्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण तंत्र की उत्कृष्ट परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पुलिस प्रशिक्षण शाला (पीटीएस) उज्जैन में नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण के पांचवें सत्र का दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में 206 नव आरक्षकों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण कर मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में प्रवेश किया। विशेष पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण  रवि कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में प्रदेश की विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण इकाइयों में नव आरक्षकों को आधुनिक, व्यावहारिक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में पीटीएस उज्जैन में संचालित प्रशिक्षण का समापन दीक्षांत परेड के साथ हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, उज्जैन जोन  राकेश गुप्ता ने परेड की सलामी लेकर प्रशिक्षुओं से परिचय प्राप्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नव आरक्षक मध्यप्रदेश पुलिस की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्दी का वास्तविक सम्मान जनता के विश्वास से प्राप्त होता है तथा आमजन के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान है।  गुप्‍ता ने नव आरक्षकों से अपेक्षा की कि वे अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ पुलिस सेवा में आने वाली नई चुनौतियों का सामना करेंगे तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ करेंगे। उन्होंने सफल आयोजन एवं उत्कृष्ट परेड के लिए पुलिस प्रशिक्षण शाला के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी। 313 दिवसीय प्रशिक्षण में आधुनिक पुलिसिंग पर विशेष जोर पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन की पुलिस अधीक्षक मती मनीषा पाठक सोनी ने प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस बैच के प्रशिक्षणार्थियों ने 313 दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। प्रशिक्षण पुलिस मुख्यालय द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार दो सेमेस्टर में संचालित किया गया, जिसमें 12 विषयों की लिखित परीक्षाओं के साथ विभिन्न आउटडोर गतिविधियां, व्यावहारिक प्रशिक्षण, भ्रमण, प्रदर्शन आधारित शिक्षण तथा आधुनिक हथियारों से फायरिंग प्रशिक्षण शामिल रहा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान तकनीक आधारित पुलिसिंग पर भी विशेष ध्यान दिया गया तथा साइबर वॉरियर योजना के अंतर्गत इस बैच के 61 नव आरक्षकों का चयन किया गया है। ‘साहस’ स्मारिका का विमोचन, दिलाई गई संविधान एवं पुलिस आचरण संहिता की शपथ समारोह के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा प्रशिक्षण काल की उपलब्धियों, अनुभवों एवं स्मृतियों को संजोए हुए वार्षिक स्मारिका ‘साहस’ का विमोचन किया गया। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक पीटीएस द्वारा नव आरक्षकों को संविधान एवं पुलिस आचरण संहिता की शपथ दिलाई गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों का सम्मान मुख्‍य अतिथि ने सत्र का सर्वश्रेष्‍ठ प्रशिक्षणार्थी, बाह्य प्रशिक्षण एवं आंतरिक प्रशिक्षण का पुरस्‍कार शासकीय रेल पुलिस भोपाल के आरक्षक  आदित्य उपाध्याय को प्रदान किया। इसके अलावा बाह्य प्रशिक्षण में द्वितीय पुरस्कार विक्रम दाहिया तथा आंतरिक प्रशिक्षण में द्वितीय पुरस्कार राहुल को प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्‍त प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक संचालित करने वाले अधिकारियों एवं प्रशिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।  

जल की हर बूंद में बसती है आने वाले कल की धड़कन, संरक्षण पर जोर

भोपाल  विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म मंथन और संकल्प का अवसर है। यह वह क्षण है जब हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को पुनः स्मरण करते हुए एक ऐसे भविष्य की कल्पना करनी चाहिए, जहां जल, जंगल और जमीन सुरक्षित हों। आज आवश्यकता केवल एक दिन के संकल्प की नहीं, बल्कि आने वाले युगों तक चलने वाले जन-संकल्प की है। पीढ़ियों से हम सुनते आए हैं. “जल ही जीवन है।” किंतु विडंबना यह है कि इस सत्य को समझने में हमें एक गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा। आज यह संकट किसी एक मोहल्ले, शहर, राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा वैश्विक प्रश्न बन चुका है। भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन ने प्राकृतिक जल स्रोतों को तेजी से क्षीण कर दिया है। ऐसे समय में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजना मानवता का सबसे बड़ा दायित्व बन गया है। जल संकट की गंभीरता केवल पानी की कमी तक सीमित नहीं है। भू-जल स्तर का निरंतर गिरना, नदियों का प्रदूषित होना, पारंपरिक जल स्रोतों का लुप्त होना और वर्षा जल का व्यर्थ बह जाना इस संकट के प्रमुख कारण हैं। गांवों और नगरों की जीवन रेखा रहे तालाब, बावड़ियाँ और कुएं आज उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं। दूसरी ओर कृषि और उद्योगों में भूजल के अंधाधुंध दोहन ने स्थिति को और अधिक विकट बना दिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में “जल गंगा संवर्धन अभियान” आशा की एक सशक्त किरण बनकर उभरा है। यह अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक सामाजिक आंदोलन है, जिसका मूल मंत्र है…“जन सहयोग से जल संरक्षण और संवर्धन।” इसका उद्देश्य जल संकट के मूल कारणों का समाधान करते हुए समाज को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। मैंने स्वयं अपने विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर तथा गृह नगर गोटेगांव में सिंगरी नदी के पुनर्जीवन के लिये सफाई अभियान चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण का प्रयास किया है। इसी अनुभव के आधार पर मैं सदैव आह्वान करता हूं—“नदियों को नाला बनाना बंद करें।” वास्तव में नदी का उद्गम स्थल ऊर्जा का केंद्र होता है और जहां नदियों का संगम होता है, वहां जीवन की नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। इसलिए नदियों के उद्गम और उनके प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करना हमारा सामूहिक दायित्व है। मेरे आराध्य परम पूज्य  बाबा  जी की वाणी है कि संकल्प में विकल्प नहीं होता। संकल्प में विक्लप खोजने पर महानतम कार्य रुक जाते हैं। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और नदियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बारिश का पानी धरती में समाहित होकर भू-जल स्तर को पुनर्जीवित कर सके। जल स्रोतों के आसपास व्यापक वृक्षारोपण किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण की प्राकृतिक प्रक्रिया मजबूत हो सके। साथ ही नदियों में प्रदूषण रोकने और गंदे नालों के प्रवाह को नियंत्रित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस अभियान के परिणाम उत्साहवर्धक हैं। जल संरचनाओं की सफाई और गहरीकरण से भू-जल स्तर में सुधार हुआ है। अनेक ऐतिहासिक तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर जल उपलब्धता बढ़ी है। “पानी चौपाल” जैसे कार्यक्रमों ने लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की है और जल बचाने की संस्कृति को पुनर्जीवित किया है। कृषि क्षेत्र में भी इस अभियान ने सकारात्मक प्रभाव डाला है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो । यह न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि किसानों की आर्थिक समृद्धि का भी आधार बन रहा है। जल संकट के स्थायी समाधान के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयास भी आवश्यक हैं। शहरों में अपशिष्ट जल का शोधन कर पुनः उपयोग किया जाना चाहिए। औद्योगिक प्रदूषण पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है और व्यक्तिगत स्तर पर भी हमें पानी की बर्बादी रोकने की आदत विकसित करनी होगी। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेगा, तब तक कोई भी अभियान पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व है। आज यदि हम जल को सहेजेंगे, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें अपनी प्राचीन जल संस्कृति से जोड़ते हुए वैज्ञानिक जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग देखना है। आइए, इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि जल की हर बूंद को बचाएंगे, जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। क्योंकि सच यही है—पानी को सहेजना ही आने वाली पीढ़ियों को बचाना है और जल का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है। भारत की भूमी और मौसम दोनों हमें संदेश दे रहे हैं 5 जून से पौधारोपण की तैयारी करें और वर्षा प्रारंभ होने पर पौधरोपण “विश्व पर्यावरण दिवस” आहवान सुफल औऱ सफल होगा।  

तेज हवाओं से बाधित विद्युत आपूर्ति को सुधारने में जुटीं बिजली कंपनियों की टीमें

भोपाल राजधानी भोपाल में गुरुवार की शाम आये तेज आँधी-अँधड़ और वर्षा से विद्युत प्रदाय में व्यापक व्यवधान और हानि पहुँची। प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल शहर में लगभग 300 फीडर पूर्ण या आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर विद्युत संरचना को गंभीर क्षति पहुँची है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी की टीम मैदान में कार्य कर रही है। सभी स्थानों पर यथाशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने युद्ध स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने लिय जायजा ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने शहर के विभिन्न स्थानों पर पहुँचकर आँधी-अँधड़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिशीघ्र विद्युत प्रवाह शुरू करने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया है।