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CM मोहन यादव ने लिया बड़ा फैसला: मंत्री-विधायकों के काम का करेंगे सटीक मूल्यांकन

भोपाल. मध्य प्रदेश के मंत्री-विधायकों ने दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद 20 महीने में क्या काम किए, इसका हिसाब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लेंगे। वह मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे और विभागवार उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसी के आधार पर मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में इसी के आधार पर मंत्रियों का भविष्य भी तय होगा। डॉ. मोहन यादव द्वारा अक्टूबर में मंत्रियों के साथ बैठकों का दौर शुरू करने की तैयारी है। विधायकों का काम देखेंगे सीएम इसमें मंत्रियों को विभागवार कामकाज की जानकारी प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया है। इसी तरह मुख्यमंत्री विधायकों का कामकाज भी देखेंगे। विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपनी विधायक निधि का जनकल्याण में कितना उपयोग किया, इसकी रिपोर्ट भी तैयार की गई है। यह भी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। सीएम ने पहले भी तैयार कराई थी रिपोर्ट तैयार बता दें, डा. मोहन यादव ने पहले भी मंत्रियों के कार्य प्रदर्शन की एक रिपोर्ट तैयार कराई थी, जो केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई। हाल ही में भोपाल में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को भी यही रिपोर्ट दिखाई गई थी। गांव में रात्रि विश्राम और चौपाल की जानकारी भी ली जाएगी मुख्यमंत्री मंत्रियों से यह भी पूछेंगे कि उन्होंने कितने गांवों में रात्रि विश्राम किया और चौपाल लगाई। प्रभार के जिलों में प्रति माह दौरा कर रहे हैं या नहीं। यह भी देखा जाएगा कि मंत्रियों का अपने प्रभार के जिलों में अधिकारियों के साथ तालमेल कैसा है। पार्टी के दृष्टिकोण से यह भी देखा जाएगा कि संगठन के कामकाज में उनकी सहभागिता कैसी है। केंद्र से मिले अभियानों को सफल बनाने में कितने मंत्रियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। इसके अलावा मंत्रियों से आमजन व पार्टी कार्यकर्ता की संतुष्टि के बारे में भी जानकारी लेकर इस पर चर्चा की जाएगी। मंत्रिमंडल विस्तार के भी संकेत डा. मोहन यादव जिस तरह से मंत्रियों के कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं, उससे मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। बता दें, रामनिवास रावत के चुनाव हारने और इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियमानुसार 35 मंत्री हो सकते हैं।

CM डॉ. यादव मऊगंज पहुंचे, बहुती जलप्रपात का किया अवलोकन, व्यू प्वाइंट से निहारी दूधिया धाराएं

मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मऊगंज जिले के प्रवास पर नई गड़ी जनपद पंचायत के बहुती जल प्रपात का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वाटरफॉल के नजदीक जाकर व्यू प्वाइंट से जलप्रपात की गिरती हुई दूधिया जल धारा और वहा बनने वाले इंद्रधनुष की आभा को देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहुती जल प्रपात के समीप कार्यक्रम स्थल पर गौपूजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जंगल में विचरण करने वाली गौमाताओं को अपनी एक आवाज में अपने पास बुलाने की कला रखने वाले रकरी गांव के गौसेवक सौखीलाल यादव ने भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम की दीदीओं द्वारा सम्मान कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती में हुआ पारंपरिक स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बहुती पहुंचने पर पारंपरिक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊगंज की लोक कला की छात्राओं ने बघेली शैली नृत्य और स्थानीय लोक कलाकारों के दल ने अहिरहाई लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर स्वागत किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, पशुपालन डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जिले के प्रभारी मंत्री लखन पटेल, विधायक सर्वगिरीश गौतम, दिव्यराज सिंह और प्रदीप पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, कमिश्नर रीवा बी.एस. जामोद, आई.जी. गौरव राजपूत, कलेक्टर संजय जैन एवं पुलिस अधीक्षक प्रजापति सहित नागरिक मौजूद थे। पर्यटक स्थल के रूप में किया जा रहा है विकसित कलेक्टर मऊगंज संजय जैन ने बताया कि बहुती जल प्रपात को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने एवं जन सुविधाओं के विकास के लिए 10 करोड़ रुपए लागत की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कलेक्टर ने बातया कि बहुती प्रपात के अप स्ट्रीम में स्टॉप डैम का निर्माण प्रस्तावित है। स्टॉप डैम में जल का संचय होने से वाटर फॉल की जल धारा का बारह माह सदा अविरल प्रवाह बना रहेगा। प्रदेश का सबसे ऊँचा बहुती जल प्रपात बहुती जल प्रपात रीवा से 75 किलोमीटर दूर मऊगंज जिले में स्थित है। यह विन्ध्य क्षेत्र ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। बहुती में सेलर नदी 650 फिट की ऊंचाई से दो धाराओं में विभक्त होकर गिरती है। नीचे सुंदर कुंड और चारों ओर घने वन हैं। बहुती में अनंत जलराशि लंबवत चट्टानों पर गिरती है। जुलाई से सितम्बर माह तक इस प्रपात का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। प्रपात के समीप ही अष्टभुजा देवी का प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है। प्रयागराज और बनारस से सड़क मार्ग से सीधे जुड़ा होने से उत्तरप्रदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुंचते हैं। इसके पास भैंसहाई में प्रागैतिहासिक काल के भित्ति चित्र मिले हैं।  

CM डॉ. यादव बोले- देवतालाब, बनारस और प्रयागराज है धार्मिक आस्था का अनूठा त्रिकोण

देवतालाब, बनारस और प्रयागराज धार्मिक क्षेत्र का अनूठा त्रिकोण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देवतालाब शिव मंदिर में होगा शिवलोक का निर्माण बहुती जल प्रपात को विकसित करेगा पर्यटन विकास निगम देवतालाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का होगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन देवतालाब और नईगढ़ी में बनेंगे नए तहसील भवन हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना से विंध्य के चार जिलों में 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होगी सिंचाई लाड़ली बहनों को दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह अंतरित किए जाएंगे मुख्यमंत्री ने देवतालाब में 241 करोड़ 33 लाख रुपए के निर्माण कार्यों का किया शिलान्यास और लोकार्पण मऊगंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहा है कि शिव मंदिर देवतालाब अदभुत है। यहां पांच तत्वों का आभास होता है। ऐसा अद्भुत मंदिर केवल विश्वकर्मा जी ही बना सकते हैं। देवतालाब, बनारस और प्रयागराज महत्वपूर्ण धार्मिक त्रिकोण हैं। देवतालाब आस्था, इतिहास और आनंद का संगम है। यह श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है। ऐसी मान्यता है कि देवतालाब के शिव का दर्शन करने पर ही चारधाम की यात्रा का फल मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मऊगंज के देवतालाब स्टेडियम में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 241 करोड़ 33 लाख रूपये के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास कर विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये और मऊगंज को विकास की अनेक सौगातें देते हुए घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कन्यापूजन कर मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि हमारे गांव स्वावलम्बन की अद्भुत मिसाल हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट है। हमारी इस सामर्थ्य के परिणामस्वरूप ही देश की कीर्ति गाथा सम्पूर्ण विश्व में गूंज रही है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कथन की "21वीं सदी भारत की होगी" साकार हो रहा है। गर्व का विषय है कि स्वामी विवेकानंद अर्थात श्रद्धेय नरेन्द्र नाथ दत्त की भावना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चरितार्थ किया है। देश के गरीब, युवा, अन्नदात और महिलाओं का कल्याण तथा विकास तपोनिष्ट प्रधानमंत्री मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसी माह प्रदेश आगमन के लिए स्वीकृति प्रदान की है। राज्य सरकार ने प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए कभी भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी, इसी का परिणाम है कि प्रदेश में चहुंओर विकास का परचम लहरा रहा है। जबकि अन्य दलों की सरकारें विकास के लिए सदैव संसाधनों के अभाव का बहाना बनाती रहीं। विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत है केंद्र बिंदु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रयागराज और काशी विश्वनाथ के बीच बसा यह स्थान देवताओं की अभिरूचि की अभिव्यक्ति है। उनके स्वयं के लिए भी देवतालाब आगमन सदैव सुखद और भाग्यशाली रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने विश्व को मानवता का विचार देते हुए जीवन जीने का सही मार्ग प्रशस्त किया। वर्तमान में भी प्रधानमंत्री मोदी की प्रभावशीलता के परिणाम स्वरूप विश्व की सभी महत्वपूर्ण नीतियों के निर्धारण में भारत केंद्र बिंदु बना हुआ है। यह हम सबके लिए गर्व-गौरव और स्वाभिमान का विषय है कि अमेरिका हो या दुनिया का कोई भी अन्य बड़ा देश, सभी प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकार्यता के लिए उत्सुक हैं। खेत में किसान और सीमा पर जवान का सम्मान हमारी सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खेत में किसान और सीमा पर जवान दोनों का सम्मान हमारी सरकार के लिए सर्वोपरि है। किसान सम्मान निधि तथा अन्य प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। पर्याप्त सिंचाई और बिजली की उपलब्धता प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हनुमना उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर की गई है। जिससे रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जिलों की एक लाख 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। रीवा के सोलर प्लांट की बिजली से दिल्ली की मेट्रो रेल दौड़ रही है। मऊगंज के घुरेहटा में बाबा रामदेव के पतंजलि संस्थान द्वारा एक हजार करोड़ रुपए की लागत से कृषि पर आधारित उद्योगों का विकास किया जा रहा है। इससे लाखों किसान लाभान्वित होंगे। उज्ज्वला गैस योजना से 64 हजार से अधिक गैस के कनेक्शन दिए गए हैं। मऊगंज में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में 44 हजार गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्के आवास मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में जारी की जा रही राशि दीपावली के बाद से 1500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी, जिसे वर्ष 2028 तक प्रतिमाह 3 हजार रुपए किया जायेगा। मऊगंज को दी अनेक सौगातें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज जिले और देवतालाब विधानसभा क्षेत्र को अनेक सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने देवतालाब शिव मंदिर में शिवलोक के निर्माण और नईगढ़ी एवं देवतालाब में तहसील भवन निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवतालाब के अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जायेगा। देवतालाब के शासकीय महाविद्यालय में ऑडिटोरियम और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास भवन बनाए जाएंगे। बहुती जल प्रपात को पर्यटन विकास निगम के माध्यम से विकसित किया जायेगा। अष्टभुजी माता मंदिर में सौंदर्यीकरण और जनजाति अंचल में टीपा बदोर से गढ़वा रोड तक 11 किलोमीटर की सड़क बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बनारस से आये लोक कलाकारों द्वारा दी गई सांगीतिक प्रस्तुति की सराहना की और लोक कलाकारों को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की। लोक नृत्य प्रस्तुत करने वाले दल के प्रत्येक सदस्य को 5-5 हजार रूपए और स्वागत गीत गाने वाली लोक गायिका राखी द्विवेदी को 50 हजार रूपए देने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने 2 साल से कम समय में जो विकास किया है वह ऐतिहासिक है। उन्होंने विकास योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी। आज मऊगंज को 241 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। क्षेत्र में सड़क, नहर और माइक्रो इरिगेशन परियोजना से विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने … Read more

प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर पर चोरी का प्रयास, चोरों ने जाली पर किया हाथ साफ

जबलपुर  प्रदेश के सबसे लंबे वीरागंना रानी दुर्गावती फ्लाईओवर को चोर-नशेड़ियों की भी नजर लग गई हैं। नशे के लिए नशेड़ी फ्लाईओवर की सामग्री भी चुराने लगे है। दरअसल फ्लाईओवर पर बरसाती पानी की निकासी के लिए जगह-जगह नालीनुमा चेंबर बनाएं जिसे लोहे की रॉड व जालियां से ढंका गया था। लोक निर्माण विभाग द्वारा इसे मजबूती से नटबोल्ट से टाइट भी किया गया था बावजूद इसके नशेड़ियों ने औजारों का उपयोग कर नट-बोल्ट काट दिया और लोहे की जालियां चुरा ले गए। जिससे फ्लाईओवर पर अब वाहनों के साथ दुर्घटना का अंदेशा बढ़ गया है। क्योंकि रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों का टायर खुले चेंबर में घुस सकता है जिससे किसी बड़े हादसे की संभावना है। ये चेंबर इतने बड़े है कि वाहन का अगला टायर घुसने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट भी सकता है। छोड़े सबूत, नशे के इंजेक्शन मिले ये करतूत नशेड़ियों द्वारा की गई है इसके सबूत भी यहां मिले है। चेंबर में नशे के इंजेक्शन इस बात की गवाही दे रहे है कि नशे के लिए नशेड़ियों ने चेंबर की जाली चुराई और बेच दी। ऐसे करीब चार से पांच चेंबर में लोहे की जाली व रॉड काटी गई है। कुछ जगह तो सड़क को भी नुकसान पहुंचाया गया हैं। सीसीटीवी लगाएं जाने चाहिए प्रदेश के सबसे बड़े करीब सात किमी लंबे फ्लाईओवर पर जिस तरह से अनैतिक गतिविधियां बढ़ रही है उससे फ्लाईओवर पर सीसीटीवी लगाने की मांग भी उठने लगी है। ताकि फ्लाईओवर से छेड़छाड़ करने वालों की पहचान हो सके और उन्हें दंडित किया जा सके। वहीं फ्लाईओवर से गुजरने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। मोटरसाइकिल दो युवक कर थे स्टंट, FIR दर्ज दशमेश द्वार-दमोहनाका वीरांगना रानी दुर्गावती फ्लाइओवर पर दो युवक झंडा लेकर स्टंट कर रहे थे। दोनों युवक मोटरसाइकिल पर सवार थे। रील के लिए स्टंट करते हुए वीडियो बना रहे थे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें मोटरसाइकिल पर सवार दोनों युवक हाथ में बड़ा झंडा लेकर लापरवाही पूर्वक वाहन चला रहे है। सफेद रंग के झंडे में उर्दू में कुछ लिखा हुआ है। मदन महल पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लिया है। दोनों युवकों पर एफआईआर पंजीबद्ध की है। आरोपितों की तलाश की जा रही है। यह फ्लाइओवर जब से लोकार्पित हुआ है, उस पर स्टंड करने वाले और रील बनाने के लिए लोग लगातार पहुंच रहे है। उनके कृत्य से यातायात बाधित होने के साथ ही राहगीरों के घायल होने की आशंका बन रही है। एक मोटरसाइकिल चला रहा था, दूसरा वीडियो बना रहा था सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक युवक फ्लाइओवर पर तेज गति से मोटरसाइकिल चला रहा है। वाहन चलाते हुए उसने एक बड़ा झंडा थाम रखा है। जिसे वह वाहन चलाने के साथ ही लहरा रहा है। जिसका वीडियो उसका साथी एक दूसरा युवक बना रहा है। उसके इस कृत्य से सड़क पर दुर्घटना और अन्य वाहन सवार के दुर्घटना के शिकार होने का खतरा बना हुआ है। वाहन नंबर के आधार पर तलाश जारी वायरल वीडियो में मोटरसाइकिल का नंबर एमपी 20 एमटी 8574 दिख रहा है। झंडा फहराते हुए वीडियो बनाने वाले दोनों युवक का चेहरा भी नजर आ रहा है। इस वीडियो की जानकारी पुलिस को गुरुवार की रात को लगी। उसके बाद अज्ञात आरोपितों पर मामला दर्ज किया है। मोटरसाइकिल के नंबर के आधार पर आरोपितों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे है।

39 दिनों की आस्था: महाकाल के दरबार में सवा करोड़ भक्तों ने नवाया शीश, चढ़े 30 करोड़

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास में भगवान महाकाल के दर्शन करने आए भक्तों की भेंट से राजाधिराज महाकाल का खजाना एक बार फिर भर गया है। मंदिर समिति को 29 करोड़ 61 लाख रुपये की आय हुई है, जो बीते तीन सालों में (श्रावण-भाद्रपद मास में) सर्वाधिक है। इस साल 39 दिनों चले महापर्व के दौरान भक्तों की संख्या ने भी नया रिकॉर्ड बनाया है। देश-विदेश से आए सवा करोड़ भक्त मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दौरान देश विदेश से आए सवा करोड़ भक्तों ने अवंतिकानाथ को शीश नवाया। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया महाकालेश्वर मंदिर में 11 जुलाई से 18 अगस्त तक श्रावण-भाद्रपद मास का उल्लास छाया रहा। हर दिन आए तीन लाख से ज्यादा भक्त 39 दिनों तक चले इस महा महोत्सव में प्रतिदिन औसतन सवा तीन लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की यह संख्या वर्ष 2023-24 के मुकाबले 38.9 प्रतिशत अधिक रही। वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन ढाई लाख दर्शनार्थियों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए थे।   इस बार देखी गई आय में बढ़ोतरी वर्ष 2024 में भक्तों की संख्या कम रही। प्रतिदिन औसतन सवा दो लाख भक्तों ने ही भगवान महाकाल के दर्शन किए थे। दर्शनार्थियों की संख्या के अलावा इस बार शीघ्र दर्शन टिकट, लड्डू प्रसाद की बिक्री, भेंट पेटी में आई दान राशि तथा अन्य स्रोत से हुई आय में भी बीते सालों के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। मंदिर को शीघ्र दर्शन टिकट मद में 10.79 करोड़ रुपये, लड्डू प्रसाद विक्रय से 10.13 करोड़ रुपये की आय हुई। जबकि भेंट पेटियों से 5.23 करोड़ रुपये व दान से 3.26 करोड़ रुपये की आय हुई है।

जल जीवन मिशन: नल से पानी ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी आसान बनाई

राजगढ़ जिले के समलाबेह गांव के परिवारों तक पहुँचा शुद्ध पेयजल भोपाल मध्यप्रदेश के दूरस्थ गांवों में नल से जल पहुंचने से जीवन आसान हो गया है। राजगढ़ जिले की ग्राम पंचायत चाँदपुरा का छोटा-सा दूरस्थ गांव समलाबेह इसका आदर्श उदाहरण है। नल से जल की सुविधा मिलने से यह गांव नई पहचान बन गया है। मोहनपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत यहां की 130 की आबादी और 26 परिवारों तक घर-घर पाइपलाइन से स्वच्छ पेयजल पहुँच रहा है। पानी की कमी से जूझता यह गांव अब सुविधा, स्वास्थ्य और खुशहाली की ओर अग्रसर है। कुछ वर्ष पहले तक इस गांव का जीवन बेहद कठिन था। पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोज़ सुबह-शाम कई किलोमीटर दूर कुओं से पानी लाना पड़ता था। बरसात के मौसम में जब गंदा पानी इन स्रोतों में मिल जाता था तो ग्रामीणों को दूषित जल पीना पड़ता था। गर्मियों में गांव में पानी का संकट बढ़ जाता था। सीमित जलस्रोतों पर निर्भरता के कारण आए दिन झगड़े की स्थिति भी बनती थी। इन परिस्थितियों से बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हो रही थी। गांव की बदली तस्वीर समूह नलजल योजना ने इस गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब गांव के हर घर में पाइपलाइन से जलापूर्ति हो रही है। 26 घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। महिलाएँ बताती हैं कि पहले उनका आधा दिन पानी ढोने में ही निकल जाता था। अब यही समय परिवार और अन्य कार्यों को दे पा रही हैं। बच्चों को भी पानी लाने के काम से मुक्ति मिली है और उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी है। स्वास्थ्य के स्तर पर भी बड़ा बदलाव आया है। पहले बारिश के दिनों में डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियाँ आम थीं। अब ग्रामीण साफ पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और इलाज पर होने वाला खर्च भी कम हो गया है। मोहनपुरा समूह जल योजना केवल समलाबेह तक सीमित नहीं है। यह योजना राजगढ़ जिले के कई गांवों को कवर कर रही है, जिनमें हजारों परिवारों तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुँचाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य पूरे क्षेत्र को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध कराना है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक जीवन की नींव है। अब पानी के लिए नहीं करना पड़ता है संघर्ष: नौरंग बाई वर्षों तक पानी ढोने को मजबूर रहीं, गांव की 70 वर्षीय नौरंग बाई बताती हैं कि जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष पानी ही रहा। रोज़ाना सिर पर घड़ा रखकर पानी ढोना उनकी दिनचर्या थी। बरसों तक पानी की एक-एक बाल्टी के लिए कतार में खड़े रहना पड़ा। अब घर में नल लगने से यह संघर्ष बीते जमाने की बात हो गयी है। वे कहती हैं कि अब नई पीढ़ी को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। ग्रामीण भी मानते हैं कि नल से जल की व्यवस्था ने उनके जीवन स्तर को ही नहीं, पूरे गांव की सोच और संस्कृति को भी बदल दिया है। अब पानी केवल आवश्यकता नहीं रहा, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य और खुशहाली का प्रतीक बन गया है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. क्रेमर ने भी की सराहना जल जीवन मिशन से ग्रामीण स्वास्थ्य संकेतकों में भी व्यापक सुधार परिलक्षित हो रहा है। स्वच्छ जल की आपूर्ति होने से विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी विकास अर्थशास्त्री डॉ. माइकल रॉबर्ट क्रेमर ने राज्य की विकास रणनीतियों पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश की इस पहल पर प्रसन्नता जाहिर की कि जल जीवन मिशन द्वारा ग्रामीण घरों में जल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने अपने अध्ययन का हवाला देते हुए कहा यदि परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 20% शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। नवजात शिशु, जल जनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं। बच्चों से संबंधित हर चार में से एक मृत्यु सुरक्षित जल उपलब्ध कराकर रोकी जा सकती है। प्रो. क्रेमर ने गत शुक्रवार को भोपाल में मख्य सचिव श्री अनुराग जैन के साथ बैठक कर मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों पर संतोष को सराहा।  

किसानों के लिए बंपर खबर: सितंबर में बोएं ये फसलें, जल्दी तैयार और मुनाफा गारंटीड!

भोपाल  अच्छी फसल के लिहाज से सितम्बर महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह महीना ना ही ज्यादा गर्म होता है और ना ही ज्यादा ठंडा। यह मौसम रबी की फसलों के साथ-साथ सब्जी की फसलों के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है और उनका तेजी से विकास होता है। इन सब्जियों में शलगम, बैंगन, गाजर, मूली, चुकंदर, मटर, गोभी, ब्रोकली, पत्ता गोभी, सेम की फली और टमाटर शामिल हैं। अगर आप भी खेती के जरिए अच्छी कमाई के बारे में सोच रहे हैं तो इनमें से किसी भी सब्जी का खेती करके अच्छे पैसे कमा सकते हैं। बड़ी बात यह है कि इनमें से कुछ सब्जियां तो ऐसी हैं, जो दो महीने से भी कम समय में तैयार हो जाती है, जिन्हें बेच कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। एक नजर डालते हैं इन सब्जियों पर।   टमाटर भारत ही नहीं पूरे बल्कि पूरी दुनिया में टमाटर की काफी डिमांड है। टमाटर की खेती के लिए सितंबर महीना उपयुक्त माना जाता है। टमाटर की खेती के लिए काली दोमट मिट्टी, रेतीली दोमट मिट्टी और लाल दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। अगर आप सितंबर में टमाटर की बुआई करते हैं तो इसकी फसल दिसंबर से जनवरी के बीच तैयार हो जाती है। गाजर सर्दी की शुरुआत होते-होते बाजार में गाजर की डिमांड बढ़ जाती है। गाजर की बुवाई अगस्त से लेकर नवंबर तक की जाती है। अच्छी बात यह है कि इसकी फसल दो महीने के अंदर ही तैयार हो जाती है, जिससे आप काफी मुनाफा कमा सकते हो। पूसा रुधिर, पूसा मेघाली और पूसा केसर गाजर की कुछ उन्नत किस्में हैं, जिन्हें आप इस समय बो सकते हैं। ब्रोकली सितंबर में ब्रोकली की खेती करने का सबसे अच्छा समय होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह ठंडे मौसम की फसल है। इस फसल की डिमांड शहरों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसकी कीमत 50 से 100 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है। ब्रोकली की फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। बैंगन सितंबर माह की प्रमुख फसलों में एक नाम बैंगन का भी है, जो कम खर्च में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है। बैंगन के लिए अच्छी तरह जुताई की गई, भुरभुरी और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। यह फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है। 

एम्स भोपाल में नया हृदय सर्जरी केंद्र, मरीजों के लिए तेज और बेहतर इलाज संभव

भोपाल  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के हार्ट पेशेंट का इलाज पहले से आधुनिक और त्वरित होने वाला है। हृदय रोगियों, गर्भ में बच्चों का हृदय दोष और ऑपरेशन के लिए 6 एडवांस मशीनें आने वाली है। करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से एम्स में एक नया कार्डियक सेटअप तैयार किया जाएगा। साथ ही हाई-टेक बाइप्लेन कार्डियक कैथलैब लगाई जाएगी। इस व्यवस्था से इलाज के लिए ज्यादा समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का तत्काल इलाज मिल पाएगा। एम्स के उपसंचालक संदेश जैन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि यह सुविधा कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत प्रारंभ की जाएगी। नवंबर से रोगियों को इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। एम्स में आएगी ये 6 अत्याधुनिक मशीनें बाई प्लेन कार्डियक कैथलैब यह एक नई लैब है जो एक साथ दो अलग-अलग एंगल से एक्सरे वाली इमेज देती है। इस रिपोर्ट को देखकर डॉक्टर हार्ट और धमनियों का दो तरह का दृश्य देख सकता है। बच्चों में जन्मजात हृदय रोग जटिल ब्लॉकेज, वाल्व रिपेयर, ब्रेन स्ट्रोक जैसी बीमारियों के बारे में आसानी से जानकारी लग पाती है। होल्टर मशीन इस मशीन के द्वारा लगातार 24 से 48 घंटे तक हार्टबीट को रिकॉर्ड किया जाता है। इससे हार्ट की धड़कन में अनियमितता जैसी समस्याओं का पता चल जाता है। वर्तमान में इस जांच में मरीजों को दो महीने तक इंतजार करना पड़ता है। आधुनिक ट्रेडमिल एक्सरसाइज मशीन यह मशीन हार्ट और फेफड़ों की क्षमता की जांच करती है। जब किसी रोगी का हार्ट सर्जरी होती है तो उसकी रिकवरी का आकलन किया जाता है। अभी इस जांच के लिए करीब 3 से 4 महीने इंतजार करना पड़ता है। ट्रांस ईसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी मशीन इस मशीन के द्वारा हृदय की 2D, 3D और 4D तस्वीर निकाल कर आती हैं। जन्मजात हृदय दोष, हार्ट वाल्व ऑपरेशन के लिए यह बेहद कारगर है। ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी इस तंत्र के द्वारा धमनियों का 3D दृश्य मिलता है। रक्त का प्रवाह को मापा जाता है। दवा देने के दौरान मरीज को इसका असर होगा या नहीं? इस जांच में आसानी होती है। इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड तंत्र इस तंत्र के द्वारा धमनियों के अंदर की बहुत ही हाई डेफिनेशन वाली फोटो मिल जाती है। इससे ब्लॉकेज का सही आकलन किया जा सकता है। इस मशीन के द्वारा डॉक्टर अनुमान लगाते हैं कि क्या स्टंट के द्वारा इलाज संभव है या दवा देने जरूरत है। मरीजों की लंबी कतार आपको बता दें कि वर्तमान में भोपाल एम्स में दो कैथलैब हैं। लेकिन यहां मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बार हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत इलाज नहीं मिल पाता। 22 करोड़ से मिलने वाली 6 मशीन से मरीज का इंतजार खत्म होगा।वर्तमान में एम्स भोपाल में हर दिन करीब 200 से 300 एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी इलाज होते हैं। मशीनों की कमी के चलते मरीजों को इको और कैथलैब प्रोसीजर के लिए ढाई से तीन माह तक इंतजार करना पड़ता है। नई कैथ लैब और मशीनों के जुड़ने से वेटिंग टाइम लगभग आधा रह जाएगा। इसके साथ ही हमीदिया में भी नई कैथलेब शुरू होने दिल के रोगियों को काफी मदद मिलेगी

यात्री राहत के लिए वैष्णो देवी ट्रेन बहाल, पर रिजर्वेशन सिस्टम ने बढ़ाई परेशानी

जबलपुर रेलवे ने निरस्त की गई जबलपुर-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा साप्ताहिक एक्सप्रेस (11449-50) को बहाल कर राहत देने की घोषणा की है। लेकिन यात्रियों को झटका तब लग रहा है जब इस ट्रेन में वापसी की टिकट बुक नहीं हो रही है। एक छोर से सीटों की बुकिंग होने और दूसरे छोर से रेल आरक्षण खिड़की पर ट्रेन निरस्त बताने से यात्री असमंजस में है। पश्चिम मध्य रेल की यह ट्रेन जबलपुर-कटरा के मध्य सीधी एकमात्र रेलसेवा है। यह ट्रेन कटरा के साथ ही जम्मू, पंजाब एवं हरियाणा के कुछ प्रमुख शहरों को भी सीधा जोड़ती है। रेलवे के अचानक ट्रेन को दो सितंबर से एक अक्टूबर के बीच निरस्त किए जाने से कई यात्री संकट में फंस गए थे। जिन्होंने ट्रेन के 10 सितंबर से पुन: बहाल किए जाने पर राहत की सांस ली। लेकिन अब कटरा से जबलपुर के लिए टिकट बुक नहीं होने से यात्री भ्रमित हैं। पांच फेरे निरस्त, किए एक फेरे के बाद ही बदला आदेश जबलपुर-एसवीडीके-जबलपुर एक्सप्रेस (11449-50) पंजाब में वर्षा से जम्मू रेल मंडल के कठुआ-माधोपुर पंजाब रेलखंड की डाउन लाइन पर यातायात प्रभावित था। जिसके कारण जबलपुर-एसवीडीके एक्सप्रेस के पांच फेरे निरस्त कर दिए गए थे। लेकिन एक फेरा निरस्त करने के बाद ही अगले फेरे से ट्रेन को बहाल करने का निर्णय किया गया। जिसके बाद गुरुवार को पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर-एसवीडीके ट्रेन को नौ सितंबर एवं एसवीडीके-जबलपुर ट्रेन को 10 सितंबर से पुन: नियमित संचालित करने का निर्देश जारी किया। तुरंत आरंभ कर दी सीटों की बुकिंग पश्चिम मध्य रेल ने चार सितंबर को ट्रेन बहाली का आदेश दिया जारी किया। जिसके बाद पूर्व में निरस्त की गई नौ, 23 एवं 30 सितंबर की जबलपुर-एसवीडीके ट्रेन के लिए सीटों का आरक्षण शुरू हो गया। इस ट्रेन की मांग इतनी अधिक है कि ट्रेन बहाली के साथ ही संबंधित तिथियों पर दो दिन में ही ट्रेन की स्लीपर श्रेणी की सीटें फुल हो गई। पश्चिम मध्य रेल प्रशासन के अनुसार उत्तर रेलवे को ट्रेन बहाली की सूचना दे दी गई है। उत्तर रेलवे ने अपडेट नहीं किया सिस्टम रेलवे बोर्ड से प्राप्त निर्देश के बाद पश्चिम मध्य रेल ने जबलपुर-एसवीडीके के मध्य संचालित ट्रेन क्रमांक 11449-50 को बहाल किया। जिसकी सूचना से तुरंत उत्तर प्रदेश को भी अवगत करा दिया गया। इस ट्रेन के मार्ग पर स्थित पंजाब एवं जम्मू के स्टेशन उत्तर रेलवे के अंतर्गत आते है। लेकिन उत्तर रेलवे ने अभी तक अपने रिजर्वेशन सिस्टम को अपडेट नहीं किया है। जिसके कारण कटरा-जबलपुर के बीच सीटों का आरक्षण शुरू नहीं हो सकता है।

दुर्घटना ने बदली खुशियों की शाम, रायसेन में विसर्जन के दौरान दो भाइयों की गई जान

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन में गणेश विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. घाटखेड़ा गांव में दो भाई डूब गए जिससे उनकी मौत हो गई. पांच लोग विसर्जन के लिए गए थे, तभी फिसलकर दो नाबालिग गहरे पानी में समा गए. एक को निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इस घटना से गांव में मातम पसरा है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.   मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के घाटखेड़ा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दर्दनाक हादसा सामने आया है. शनिवार रात करीब 8 बजे गणेशोत्सव की समाप्ति पर घर से गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए निकले पांच युवकों में से दो की डूबने से मौत हो गई. प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा जानकारी के अनुसार, उमरावगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव में एक ही परिवार के पांच युवक विसर्जन के लिए नजदीकी नाले में गए थे. सभी किशोर प्रतिमा विसर्जन के बाद एक पत्थर पर खड़े होकर पानी देख रहे थे, तभी नीचे की मिट्टी धंस गई और वो पानी में गिर पड़े. इस हादसे में 16 साल के अनुज साहू और 17 साल के नितिन साहू गहरे पानी में बह गए. दो भाइयों की डूबने से मौत गांववालों ने तुरंत शोर सुनकर बचाव कार्य शुरू किया. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद अनुज का शव बरामद हुआ. वहीं नितिन को निकालकर सीपीआर (CPR) दिया गया और तत्काल भोपाल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस के मुताबिक, अन्य तीन लोग किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर आ गए. हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया.  उमरावगंज थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि घटना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि यह एक दुखद हादसा है और परिजनों को ढांढस बंधाया गया है. गांववालों ने कहा कि हर साल यहां विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने की वजह से यह हादसा हो गया.